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उत्तर बस्तर कांकेर: स्कूल परिसर के आसपास तंबाकू बिक्री पर रोक, कलेक्टर ने एसडीएम को दिए सख्त निर्देश

उत्तर बस्तर कांकेर : शहरी क्षेत्रों में स्कूलों के आसपास तम्बाकू उत्पाद बेचने वालों पर सख्ती से प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करें सभी एसडीएम : कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर कलेक्टर का निर्देश: स्कूलों के पास तंबाकू बिक्री पर हो सख्त कार्रवाई, सभी एसडीएम को दिए आदेश उत्तर बस्तर कांकेर: स्कूल परिसर के आसपास तंबाकू बिक्री पर रोक, कलेक्टर ने एसडीएम को दिए सख्त निर्देश सार्वजनिक स्थलों और कार्यालयों में धूम्रपान करने वालों पर लगेगा जुर्माना सभी कार्यालयों में तम्बाकू नियंत्रण के लिए नामांकित किए जाएंगे नोडल अधिकारी उत्तर बस्तर कांकेर कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर की अध्यक्षता में आज राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक का आयोजन  किया गया। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्कूलों व सार्वजनिक स्थलों के आसपास ठेले, गुमटियों में तम्बाकू और उससे निर्मित विभिन्न प्रकार के उत्पाद बेचे जाने की शिकायतें अक्सर मिलती हैं। बच्चों को किसी प्रकार के नशे की लत ना पड़े, इसलिए सभी अनुविभागीय अधिकारी कोटपा एक्ट के तहत सख्ती से प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करें। कलेक्टर द्वारा जिले में नशे के विरुद्ध अभियान चलाते हुए सतत् चालानी कार्यवाही करने, जिले के सभी कार्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों को तम्बाकू मुक्त किये जाने के साथ-साथ यथाशीघ्र जिले को धूम्रपान मुक्त किये जाने के निर्देश दिए गए। पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक में कोटपा 2003 के विषय को भी शामिल करने तथा जिले के समस्त कार्यालयों में तम्बाकू नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी के नामांकित करने के निर्देश दिए गए।   बैठक के दौरान तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला सलाहकार डॉ. विनोद वैध द्वारा तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में की जा रही गतिविधियों के सम्बंध में अवगत कराया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.सी. ठाकुर द्वारा राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम, कोटपा एक्ट 2003, कोटपा छ.ग. संशोधन अधिनियम 2021, धूम्रपान मुक्त नीतियों से अवगत कराया गया। इस अवसर पर जिला स्तर के सभी अधिकारीगण उपस्थित थे।

रायपुर : प्रदेश में अब तक 636.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 636.2 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 1054.2 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 329.0 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर संभाग में रायपुर जिले मे 581.2 मि.मी., बलौदाबाजार में 557.5 मि.मी., गरियाबंद में 499.8 मि.मी., महासमुंद में 538.2 मि.मी. और धमतरी में 505.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 675.8 मि.मी., मुंगेली में 680.4 मि.मी., रायगढ़ मंे 795.8 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 867.2 मि.मी., कोरबा में 710.3 मि.मी., गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 632.1 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 594.5 मि.मी., सक्ती में 729.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 506.8 मि.मी., कबीरधाम में 472.4 मि.मी., राजनांदगांव में 552.4 मि.मी., बालोद में 591.9 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 791.1 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 452.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 477.3 मि.मी., सूरजपुर में 818.5 मि.मी., जशपुर में 719.1 मि.मी., कोरिया में 739.3 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 709.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 727.6 मि.मी., कोंडागांव में 482.4 मि.मी., नारायणपुर में 594.2 मि.मी., बीजापुर में 804.5 मि.मी., सुकमा में 497.8 मि.मी., कांकेर में 644.6 मि.मी., दंतेवाड़ा में 664.1 मि.मी. और औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

तल्ख अंदाज में कहा- बार-बार समीक्षा के बाद भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो रोका जाएगा वेतन

उत्तर बस्तर कांकेर : जनपद पंचायत स्तर के लंबित निर्माण कार्यों को लेकर कलेक्टर ने जताई नाराजगी उत्तर बस्तर कांकेर: लंबित निर्माण कार्यों पर कलेक्टर सख्त, जनपद पंचायतों को दी चेतावनी तल्ख अंदाज में कहा- बार-बार समीक्षा के बाद भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो रोका जाएगा वेतन उत्तर बस्तर कांकेर  समय-सीमा की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने आज जिले की सभी जनपद पंचायतों में विभिन्न पुराने लंबित निर्माण कार्यों के संबंध में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि या तो ये छोटे-मोटे कार्य जल्द से जल्द पूर्ण करें, या फिर पूर्ण नहीं कर पाने की स्थिति में संबंधित विभाग को राशि वापस लौटा दें। उन्होंने तल्ख अंदाज में कहा कि प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करने के बाद भी इन लंबित कार्यों में प्रगति नहीं आ रही है। ऐसे में संबंधित जनपद पंचायत के सीईओ का वेतन रोकने की कार्यवाही सख्ती से की जाएगी। कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आज सुबह 10.30 बजे से आयोजित समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायतों में आंगनबाड़ी एवं पीडीएस सेंटर भवन निर्माण सहित ग्राम पंचायतों में बनाए जा रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी जनपद सीईओ को उक्ताशय के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को जेम पोर्टल के माध्यम से ही सभी प्रकार का क्रय नियमानुसार पूरी सतर्कता के साथ करने के लिए निर्देशित किया। इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही वित्तीय नियमों के उल्लंघन के श्रेणी में आएगी, अतः सभी अधिकारी शासकीय निर्माण कार्यों से संबंधित सामग्री एवं अन्य उपकरणों का क्रय गंभीरता से करें। बैठक में कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को कहा कि ई-ऑफिस के माध्यम से ही सभी प्रकार की फाइलों एवं नस्तियों को मूव करें। उन्होंने अधीनस्थ कार्यालयों में भी ई-ऑफिस के माध्यम से सभी प्रकार के विभागीय दैनिक गतिविधियों का क्रियान्वयन करने हेतु निर्देशित किया। इसी तरह प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए इसके लाभ से आम जनता को अवगत कराने के निर्देश कार्यपालन अभियंता विद्युत विभाग को दिए। आकांक्षी जिला एवं ब्लॉक का अवॉर्ड कलेक्टर को सौंपा कांकेर जिले को संपूर्णता अभियान के तहत आकांक्षी जिला एवं ब्लॉक हेतु उत्कृष्ट कार्य के लिए रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में शनिवार 02 अगस्त को सम्मानित किया गया। कलेक्टर की ओर से जिला पंचायत के सीईओ हरेश मंडावी ने सम्मान ग्रहण किया था। आज आयोजित टीएल बैठक की शुरूआत में उक्त सम्मान को सीईओ ने कलेक्टर को भेंट किया। इस दौरान कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विभागों ने पूरी शिद्दत के साथ मेहनत व लगन से बेहतर कार्य किया, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने आगे भी शासन की योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन करने के लिए सभी अधिकारियों को प्रोत्साहित किया। उल्लेखनीय है कि राज्य के आकांक्षी जिलों और आकांक्षी विकासखंडों में तीन महीनों तक संचालित संपूर्णता अभियान में निर्धारित संकेतकों को संतृप्त करने और लक्ष्यों को हासिल करने वाले जिलों और विकासखंडों को पुरस्कार प्रदान किए गए। संपूर्णता अभियान में कांकेर जिले को रजत पदक प्राप्त हुआ तथा आकांक्षी विकासखण्ड की श्रेणी में कोयलीबेड़ा ब्लॉक को स्वर्ण और दुर्गूकोंदल ब्लॉक को रजत पदक प्राप्त हुआ। बैठक में कलेक्टर ने विभागवार लंबित कार्यों की समीक्षा करते हुए जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने एलडब्ल्यूई सर्वे, नियद नेल्लानार योजना, ठोस अपशिष्ट पदार्थ प्रबंधन, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, सामाजिक अंकेक्षण, आयुष्मान भारत योजना, आयुष्मान वय वंदना योजना, पोषण पुनर्वास केन्द्र सहित विभिन्न प्रकरणों की विभागवार एवं योजनावार प्रगति की समीक्षा की। बस्तर विकास प्राधिकरण के कार्यों की समीक्षा हुई समय-सीमा बैठक के दौरान कलेक्टर क्षीरसागर ने बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत लंबित निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने वर्ष 2020-21 से लंबित निर्माण कार्यों को लेकर असंतोष जाहिर करते हुए सहायक आयुक्त आदिवासी विकास को शीघ्रता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। साथ ही पुराने कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा कराने और देवगुड़ी, घोटुल भवन, सामुदायिक भवन जैसे छोटे कार्यों को अविलंब निर्माण कराने सभी जनपद सीईओ को निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने विशेष केन्द्रीय सहायता मद अंतर्गत लंबित कार्यों की भी कार्यवार समीक्षा की। इस अवसर पर डीएफओ हेमचंद पहारे, अग्रवाल, अपर कलेक्टर जितेन्द्र कुर्रे एवं ए.एस. पैकरा सहित सभी अनुविभागीय अधिकारी तथा जिला स्तर के अधिकारीगण मौजूद रहे।

ओडिशा की टीम का अध्ययन दौरा, जगदलपुर के MRF और MRC सेंटर का किया निरीक्षण

जगदलपुर स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत अध्ययन एवं अवलोकन भ्रमण कार्यक्रम के तहत जिला परिषद सुंदरगढ़ ओडीशा की टीम ने सोमवार  को बस्तर जिले के बुरुंडवाड़ा सेमरा में स्थापित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) और मटेरियल रिसाइक्लिंग सेंटर (एमआरसी) का भ्रमण कर कचरा प्रबंधन और प्रसंस्करण के बारे में विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान जिला पंचायत बस्तर तथा नगरीय निकाय के अधिकारियों ने जिले में समुदाय की सहभागिता से चलाए जा रहे कचरा प्रबंधन सम्बन्धी पहल के बारे में विस्तारपूर्वक अवगत कराया।         इस अध्ययन भ्रमण के दौरान ओडीशा की टीम ने जिला प्रशासन बस्तर के द्वारा संचालित बुरुंडवाड़ा सेमरा एमआरएफ के माध्यम से जिले में कचरा संग्रहण और वर्गीकरण की व्यवस्थित प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा। टीम ने यह अनुभव किया कि किस प्रकार स्रोत स्तर पर ही कचरे को अलग-अलग श्रेणियों (सूखा, प्लास्टिक आदि) में वर्गीकृत किया जाता है और फिर उसकी आगे की प्रक्रिया हेतु तैयार किया जाता है। इसके पश्चात टीम ने एमआरसी केंद्र का भी भ्रमण किया, जिसे सृष्टि वेस्ट मैनेजमेंट सर्विस द्वारा संचालित किया जा रहा है। यहां टीम ने जिला पंचायत बस्तर और स्थानीय निकायों से सहयोग प्राप्त ‘स्वच्छ केंद्र मॉडल’ के तहत अपनाई गई समेकित रिसाइक्लिंग प्रणाली के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उक्त टीम द्वारा विशेष रूप से यह देखा गया कि किस प्रकार से एमआरएफ और एमआरसी इकाइयों के बीच समन्वय स्थापित कर कचरे को पुनः उपयोगी सामग्री जैसे प्लास्टिक ग्रैन्यूल में बदलाव किया जा रहा है।          अपने अध्ययन भ्रमण के दौरान ओडीशा की टीम के सदस्यों ने कहा कि यह अवलोकन यात्रा सुंदरगढ़ जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपयोगी रही। विशेष रूप से संग्रहण, वर्गीकरण और पुनःप्रक्रिया को एकीकृत करने की प्रक्रिया से जुड़े व्यावहारिक अनुभव इस क्षेत्र में सुधार के लिए सहायक सिद्ध होंगे।

जगदलपुर : पर्यटन को बढ़ावा देने एवं होम-स्टे के विकास हेतु ईच्छुक आवेदकों से 7 अगस्त तक मंगाये गए आवेदन

जगदलपुर भारत सरकार द्वारा आदिवासी क्षेत्रो में स्वदेश दर्शन 2.0 योजना एवं प्रधानमंत्री जनजाती उत्कर्ष ग्राम अभियान के तहत् होम-स्टे के विकास तथा बस्तर जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने एवं स्थानीय व्यक्तियों को स्वरोजगार व आय के साधन उपलब्ध कराने हेतु पर्यटन क्षेत्र के समीप आदिवासी ग्रामों में होम-स्टे संचालन हेतु इच्छुक अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों से 07 अगस्त 2025 तक आवेदन आमंत्रित किया गया है। चयनित व्यक्तियों को होम-स्टे हेतु नये कमरे बनाने हेतु 5 लाख रूपए तक एवं पूर्व से संचालित होम-स्टे में सुधार हेतु 3 लाख रूपये तक की सहायता प्रदाय की जाएगी। होम-स्टे हेतु प्रस्तावित भूमि संबंधित व्यक्ति के कब्जे व भू-स्वामित्व का होना अनिवार्य है। पूर्व में होम-स्टे संचालनकर्ता, महिलाओं व पर्यटन क्षेत्र में पूर्व से जुड़े व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी। अधिक जानकारी के लिए कार्यालय कलेक्टर बस्तर के सामान्य शाखा से संपर्क कर सकते हैं।

पूर्व CM भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हाईकोर्ट जाने का दिया निर्देश

 रायपुर / नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आपराधिक मामलों में राहत पाने के लिए प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा सीधे उसके पास आने की प्रथा की निंदा की।अदालत ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से की जा रही जांच के सिलसिले में हाई कोर्ट जाने को कहा। 'हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?' ये मामले छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और अन्य केस से संबंधित हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जायमाल्या बागची की पीठ ने पूछा कि प्राथमिकी, गिरफ्तारी और रिमांड तथा मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रविधानों के खिलाफ उनकी याचिकाओं पर शीर्ष अदालत को क्यों विचार करना चाहिए? पीठ ने सवालिया लहजे में पूछा, "याचिकाकर्ता हाई कोर्ट क्यों नहीं गए। वह भी संवैधानिक न्यायालय है और इस मुद्दे पर फैसला सुना सकता है। यही वह समस्या है, जिसका हम सामना कर रहे हैं। हाई कोर्ट इस मुद्दे पर फैसला क्यों नहीं कर सकता, अन्यथा उन अदालतों का क्या फायदा?" शीर्ष अदालत ने ये भी पूछा कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट क्यों नहीं गए, जो खुद भी एक संवैधानिक न्यायालय है और ऐसे मामलों पर फैसला कर सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘हम इसी समस्या को झेल रहे हैं। उच्च न्यायालय इस मामले का फैसला क्यों नहीं कर सकता? अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर उन अदालतों का क्या मतलब है? यह एक नया चलन बन गया है- जैसे ही कोई संपन्न व्यक्ति उच्चतम न्यायालय आता है, हम अपने निर्देशों को बदलने लगते हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आम लोगों और उनके साधारण वकीलों के लिए उच्चतम न्यायालयों में कोई जगह नहीं बचेगी।’’ SC क्यों पहुंचे थे पिता-पुत्र? भूपेश बघेल और चैतन्य बघेल ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और पीएमएलए के प्रावधानों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक एम. सिंघवी ने कहा, "गिरफ्तारी का यह सिलसिला पूरे देश में देखा जा रहा है और प्रवर्तन निदेशालय जैसी जांच एजेंसियां टुकड़ों में आरोपपत्र दाखिल कर रही हैं, किसी को भी फंसा रही हैं और सभी को गिरफ्तार कर रही हैं।” ईडी पर क्या-क्या आरोप? पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं चल सकता। लोगों का नाम प्राथमिकी या शुरुआती आरोपपत्रों में नहीं होता, लेकिन अचानक उनके नाम पूरक आरोपपत्र में आ जाते हैं और उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।’’ बघेल के बेटे की ओर से पेश सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम दो-तीन आरोपपत्रों में नहीं था, लेकिन मार्च में उनके घर पर अचानक छापा मारा गया और बाद में एक पूरक आरोपपत्र में उनका नाम आने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ED SC के फैसले का उल्लंघन कर रहा: सिब्बल सिब्बल ने दलील दी कि ईडी शीर्ष अदालत द्वारा 2022 के फैसले में निर्धारित कानून का उल्लंघन कर रहा है, जिसमें गिरफ्तारी के उसके अधिकार को बरकरार रखा गया था। कपिल सिब्बल ने कहा कि इसलिए याचिका में पीएमएलए की धारा 50 और 63 की वैधता को चुनौती दी गई है। ये धाराएं अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति को तलब करने, दस्तावेज मंगवाने, जांच के दौरान बयान दर्ज करने और झूठा बयान देने पर सजा देने का अधिकार देती हैं। हाई कोर्ट जाने का आदेश पीठ ने पूछा कि अगर ईडी कानून का पालन नहीं कर रहा था या प्रक्रिया से भटक रहा था, तो क्या कोई इसे अदालत के संज्ञान में लेकर आया या जांच एजेंसियों की कार्रवाई को चुनौती दी। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत पहले भी कह चुकी है कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद आगे की जांच केवल अदालत की अनुमति से ही हो सकती है। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसे कई मामले होते हैं जहां कानून वैध होता है, लेकिन उस पर की गई कार्रवाई अवैध हो सकती है।’’ अदालत ने दोनों याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे अपने मामले से जुड़े सभी तथ्य उच्च न्यायालय के समक्ष रखें। पीएमएलए की धाराओं 50 और 63 को चुनौती देने के संबंध में पीठ ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता इस मुद्दे पर नई रिट याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं, और न्यायालय उन पर सुनवाई लंबित मामलों के साथ करेगा। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्हें उच्च न्यायालय जाने की अनुमति दी और उच्च न्यायालय से कहा कि वह उनकी याचिकाओं पर जल्दी सुनवाई करे।  

चिकित्सा घोटाले में ED की रेड, रायपुर में करोड़ों की संपत्ति पर कसा शिकंजा

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर में चिकित्सा उपकरण एवं री-एजेंट खरीद घोटाले के संबंध में बड़ी कार्रवाई की है। पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत ईडी ने छत्तीसगढ़ में शशांक चोपड़ा, उनके परिवार के सदस्यों, व्यावसायिक संस्थाओं और राज्य के अधिकारियों सहित अन्य सहयोगियों के आवासीय व कार्यालय परिसरों में 30 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक छापेमारी अभियान चलाया। 40 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त इस दौरान 20 स्थानों पर तलाशी ली गई। छापे के दौरान बैंक खातों में जमा राशि, सावधि जमा, डीमैट खातों में शेयर और वाहनों के रूप में 40 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति सामने आई। विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और चल-अचल संपत्तियां जब्त/फ्रीज की गई हैं। ईडी ने कहा- अभी और खुलासे होंगे ईडी ने इस मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ी जांच के तहत की गई है, जिसमें कई और खुलासे संभावित हैं। 

बिजली उपभोक्ताओं को झटका, हाफ बिल योजना अब सिर्फ 100 यूनिट तक

रायपुर   राज्य सरकार द्वारा हाफ बिजली बिल योजना के अंतर्गत दी जाने वाली छूट की सीमा में युक्तियुक्त संशोधन किया गया है। अब प्रतिमाह दी जाने वाली 400 यूनिट की छूट के स्थान पर 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर 50 प्रतिशत रियायत दी जाएगी। वर्तमान में राज्य के 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से लगभग 31 लाख परिवार (करीब 70%) ऐसे हैं जिनकी खपत 100 यूनिट प्रतिमाह से अधिक नहीं है। अतएव हाफ बिजली बिल की छूट सीमा के इस पुनरीक्षण के बावजूद इन 31 लाख जरूरतमंद सामान्य एवं कमजोर वर्ग के उपभोक्ता परिवारों को योजना का लाभ पहले की ही तरह मिलता रहेगा। प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता परिवार हाफ बिजली योजना से पूर्ववत लाभान्वित होते रहेंगे। इन 31 लाख परिवारों में 15 लाख बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें पूर्ववत हाफ बिजली बिल योजना का लाभ मिलता रहेगा। इन परिवारों को 30 यूनिट तक की मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत पहले की तरह प्राप्त होती रहेगी, साथ ही वे हॉफ बिजली बिल योजना के अन्य सभी लाभों से भी यथावत् लाभान्वित रहेंगे।  राज्य सरकार गरीब परिवारों को बिजली खर्च में राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को गति दे रही है, जिसके अंतर्गत 3 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट की स्थापना पर केंद्र सरकार से ₹78,000/- तथा राज्य सरकार से ₹30,000/- की कुल ₹1,08,000/- तक की सब्सिडी दी जा रही है। 2 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 75% (₹90,000/-) का अनुदान उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ता प्रतिमाह 200 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन कर सकते हैं। यह उत्पादन वर्तमान में हॉफ बिजली बिल योजना से मिलने वाली अधिकतम छूट (400 यूनिट पर 200 यूनिट की छूट) से भी अधिक है। 400 यूनिट तक औसत खपत करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली बिल आमतौर पर ₹1000/- से अधिक होता है, जो सोलर प्लांट की स्थापना के बाद लगभग शून्य हो जाएगा। इस प्रकार के उपभोक्ता हॉफ बिजली बिल योजना से “मुफ्त बिजली बिल” योजना की ओर अग्रसर होंगे, और दीर्घकालिक बचत प्राप्त करेंगे। उपभोक्ता स्वयं की छत पर उत्पादित बिजली के अतिरिक्त शेष बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर प्राप्त कर सकेंगे अतिरिक्त आय रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने वाले उपभोक्ता अपनी छत पर उत्पादित बिजली का उपयोग करने के साथ-साथ शेष बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के अंतर्गत 25 प्रतिशत शेष लागत उपभोक्ता स्वयं वहन कर सकते हैं, या फिर बैंक से न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इस ऋण की मासिक किस्त लगभग ₹800/- होगी, जो कि वर्तमान में 400 यूनिट पर देय औसत बिजली बिल ₹1000/- से भी कम है। इस प्रकार, उपभोक्ता अपने मासिक बिजली बिल को कम करते हुए भविष्य में आत्मनिर्भर ऊर्जा उत्पादक बन सकते हैं। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार का यह निर्णय गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं को राहत देने, तथा उन्हें ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त और दूरदर्शी प्रयास है। यह योजना राज्य को स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक बचत के पथ पर अग्रसर करेगी।

दुर्घटना पीड़ित की मदद के लिए रुका मंत्री का काफिला, घायल को खुद के वाहन से भिजवाया अस्पताल

रायपुर छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और मानवीयता का परिचय दिया। रायपुर से अपने निज निवास वीरपुर जाते समय मंत्री श्रीमती राजवाड़े का काफिला जैसे ही सुत्तररा मोड़, कटघोरा पहुंचा, उन्होंने सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त एक दोपहिया वाहन सवार युवक को देखा। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने तत्काल अपने काफिले को रुकवाया और स्वयं मौके पर पहुंचकर घायल व्यक्ति की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बिना समय गंवाए घायल को अपने वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कटघोरा भिजवाने की व्यवस्था की। श्रीमती राजवाड़े ने कोरबा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को फोन कर घायल को त्वरित और समुचित उपचार देने के निर्देश भी दिए।

एओर्टिक वाल्व रिपेयर — दुर्लभ एवं तकनीकी रूप से जटिल प्रक्रिया

रायपुर : अम्बेडकर अस्पताल में एक ही साथ कोरोनरी बाईपास सर्जरी एवं हृदय के तीनों वॉल्व का सफल ऑपरेशन संपन्न मरीज के तीनों हृदय वाल्वों में खराबी के साथ कोरोनरी आर्टरी में था 95% ब्लॉकेज एओर्टिक वाल्व रिपेयर — दुर्लभ एवं तकनीकी रूप से जटिल प्रक्रिया पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अंतर्गत डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में 58 वर्षीय महिला की जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इस सर्जरी में एक साथ ऑफ पंप बीटिंग हार्ट कोरोनरी बाईपास सर्जरी के साथ-साथ हृदय के दोनों वॉल्व का रिपेयर एवं माइट्रल वॉल्व का प्रतिस्थापन किया गया। यह मरीज दुर्ग जिले के जेवरा सिरसा गांव की निवासी हैं, जिन्हें पिछले तीन वर्षों से सांस फूलने और छाती में दर्द की शिकायत थी। जांच में पता चला  था ब्लॉकेज मरीज की जांच में यह सामने आया कि मरीज की कोरोनरी आर्टरी में 95% ब्लॉकेज है तथा हृदय के तीन प्रमुख वाल्व :- माइट्रल, एओर्टिक और ट्राइकस्पिड क्षतिग्रस्त हैं। ईकोकार्डियोग्राफी और कोरोनरी एंजियोग्राफी के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी का निर्णय लिया। इसमें पहले ऑफ पंप बीटिंग हार्ट बाईपास सर्जरी की गई, जिसमें हृदय के धड़कन को बंद किये बिना हार्ट के कोरोनरी आर्टरी की बायपास सर्जरी की गई। इसके बाद हार्ट-लंग मशीन की सहायता से हृदय और फेफड़ों को अस्थायी रूप से रोका गया। आपरेशन के दौरान हृदय के चैम्बर्स को खोलकर माइट्रल वाल्व को मेटालिक कृत्रिम वाल्व से बदला गया, एओर्टिक वाल्व को विशेष तकनीक से रिपेयर किया गया और ट्राइकस्पिड वाल्व को रिंग लगाकर सुधारा गया।  सर्जरी की ख़ास बातें   यह एक उच्च जोखिम वाली सर्जरी थी, क्योंकि मरीज की ई.एफ. (ejection fraction) कम तो थी ही एवं एक ही साथ बहुत सारी अन्य सर्जरी भी शामिल थी। इस बाईपास में आर्टेरियल ग्राफ्ट का प्रयोग किया गया, जो अधिक टिकाऊ होता है। एओर्टिक वाल्व रिपेयर केवल चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में संभव होता है। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वे शीघ्र ही अस्पताल से डिस्चार्ज लेकर घर लौटने वाली हैं। मेडिकल कालेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने डॉ. डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम को इस सफल सर्जरी की उपलब्धि के लिए बधाई दी है। गौरतलब है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग को सतत् उत्कृष्ट कार्य, नवाचार एवं मरीजों की सेवा के लिए जाना जाता है।