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AAP विधायक अमनदीप के ठिकानों पर ED की रेड, 7 जगहों पर तलाशी

चंडीगढ़. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को पंजाब में एक साथ सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मोगा जिले में सरकारी और संस्थागत संपत्तियों के कथित धोखाधड़ी से अधिग्रहण तथा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़े मामले में की गई है। ध्यान देने वाली बात है कि अमनदीप कौर मोगा से मौजूदा विधायक हैं और आम आदमी पार्टी ने 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए भी अपना उम्मीदवार चुना है। तलाशी के दायरे में आम आदमी पार्टी की महिला विंग की पंजाब प्रधान और मोगा की विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा, उनके पति डाॅ. राकेश अरोड़ा, परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़े अन्य लोगों के परिसर शामिल हैं। ईडी की टीम डा राकेश अरोड़ा से जुड़े नशा मुक्ति अस्पताल में भी तलाशी लेने पहुंची। जानें क्यों एक्टिव हुई ईडी ईडी चंडीगढ़ की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यह मामला नेशनल हाईवे नंबर 754ए के निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई सरकारी जमीन से संबंधित है। आरोप है कि जमीन के राजस्व रिकार्ड में कथित तौर पर फर्जी इंतकाल दर्ज करवाकर मुआवजे की राशि गलत तरीके से हासिल की गई। इसी मामले में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और सरकारी संपत्तियों के कथित धोखाधड़ीपूर्ण अधिग्रहण की जांच की जा रही है। इस मामले में पंजाब पुलिस की ओर से 16 जून 2024 को एफआइआर नंबर 101 दर्ज की गई थी। इसी एफआइआर के आधार पर ईडी ने मनी लांड्रिंग की जांच के लिए ईसीआईआर दर्ज की। जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर किस तरह किया गया और इसके आधार पर मुआवजे की रकम किन लोगों को जारी हुई। कई और ठिकानों पर भी रेड जारी बुधवार को चलाए गए तलाशी अभियान में विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा और उनके पति से जुड़े परिसरों के अलावा परिवार के सदस्यों तथा सहयोगियों के ठिकानों को भी शामिल किया गया। ईडी की टीमें अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। फिलहाल ईडी की ओर से तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेजों, नकदी या अन्य संपत्तियों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। जांच एजेंसी की कार्रवाई अभी जारी है।

सुंदर शाम अरोड़ा के ठिकानों पर 26 घंटे से ED की जांच, कार्रवाई जारी

होशियारपुर. पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता सुंदर शाम अरोड़ा के जोधामल रोड स्थित आवास पर मंगलवार को दूसरे दिन भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई जारी रही। सोमवार तड़के पांच बजे तीन गाड़ियों में पहुंची ईडी की टीम घर के अंदर दाखिल हुई थी। इसके बाद से अधिकारी बाहर नहीं निकले हैं। मंगलवार सुबह तक करीब 26 घंटे बीतने के बावजूद जांच जारी रहने से कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्रवाई के दौरान आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। किसी भी बाहरी व्यक्ति को घर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। वहीं, घर के अंदर मौजूद किसी व्यक्ति को बाहर आने की भी इजाजत नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, सुंदर शाम अरोड़ा भी इस दौरान अपने आवास के अंदर ही मौजूद हैं।

टेरर फंडिंग नेटवर्क की जांच तेज, उमर आदिल डार और सहयोगियों पर ED का शिकंजा

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग के नेटवर्क को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी के श्रीनगर जोनल ऑफिस की टीम ने आतंकी फंडिंग से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में श्रीनगर में चार अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया है. बताया जा रहा है कि यह जांच उमर आदिल डार और उसके सहयोगियों से जुड़े कथित आतंकी फंडिंग नेटवर्क को लेकर की जा रही है।  जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोप है कि उमर आदिल डार प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के तौर पर काम कर रहा था और संगठन से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था।  जेल जा चुका है उमर आदिल डार ईडी की जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, उमर आदिल डार को उसके कुछ सहयोगियों के साथ पहले भी गिरफ्तार किया गया था. उस दौरान उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी और प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़ी आपत्तिजनक साहित्यिक सामग्री बरामद होने का दावा किया गया था. जांच में यह भी पता चला है कि उमर आदिल डार जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और भारत विरोधी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के मामले में करीब चार साल तक जेल में रह चुका है।  कौन है उमर आदिल डार और उस पर क्या आरोप हैं? जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कथित ओवर ग्राउंड वर्कर उमर आदिल डार और उसके साथियों से जुड़ा है। आरोप है कि डार इस संगठन के लिए OGW के तौर पर काम करता था और इसकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था। उस पर लश्कर के आतंकी नेटवर्क को जमीनी मदद मुहैया कराने, लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने और नेटवर्क के लिए फंड जुटाने जैसे आरोप हैं। अधिकारियों का कहना है कि उमर आदिल डार और उसके साथियों को पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। उस समय उनके पास से भारी मात्रा में नकदी और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी। डार जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और भारत-विरोधी गतिविधियों से जुड़े मामलों में लगभग चार साल जेल भी काट चुका है। सीमा पार के हैंडलर्स और हवाला नेटवर्क पर फोकस ED के इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य आतंकी फंडिंग के असली स्रोतों यानी अपराध से प्राप्त धन का पता लगाना है। जांच एजेंसी को शक है कि सीमा पार (पाकिस्तान में) बैठे लश्कर के कमांडर और हैंडलर्स, घाटी में अशांति फैलाने के लिए हवाला और अन्य अवैध तरीकों से भारी मात्रा में पैसा भेज रहे थे। एजेंसी फिलहाल इस वित्तीय ट्रेल को ट्रैक कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि डार और उसके नेटवर्क ने इन पैसों का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर कैसे किया और किन तरीकों से आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग की। अधिकारियों का कहना है कि तलाशी के दौरान मिले सबूतों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं या संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं। फंडिंग नेटवर्क और हैंडलर्स की भूमिका की जांच ईडी की मौजूदा कार्रवाई का मकसद कथित आतंकी गतिविधियों से अर्जित अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) का पता लगाना है. एजेंसी चारों ठिकानों पर तलाशी के दौरान वित्तीय लेन-देन, फंडिंग के स्रोतों और पैसों के ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।  इसके साथ ही जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित आतंकी फंडिंग के लिए किन लोगों और नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया. इस पूरे नेटवर्क के सीमा पार बैठे हैंडलर्स से संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।  ईडी का उद्देश्य इस मामले में पैसों के स्रोत, फंडिंग चैनल, संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से मिलने वाली कथित आर्थिक मदद की कड़ियों को जोड़ना है, ताकि आतंकी फंडिंग से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। 

CG News: रायपुर के ‘सुशील विला’ में ED का छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

रायपुर. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने मंगलवार सुबह राजधानी रायपुर के रवि नगर स्थित सुशील विला में दबिश दी। यह ठिकाना ज्वेलरी और जमीन कारोबारी नितिन डागा से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम दो गाड़ियों से पहुंची और विला के भीतर दस्तावेजों की जांच शुरू की। कार्रवाई को मनी लांड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, जांच के दायरे और मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। रायपुर के सुशील विला में घंटों से पड़ताल जारी सूत्रों के अनुसार, ईडी की कार्रवाई सुबह से जारी है। टीम सुशील विला के भीतर मौजूद दस्तावेजों और अन्य जानकारियों की पड़ताल कर रही है। नितिन डागा का नाम ज्वेलरी और जमीन के कारोबार से जुड़ा बताया जाता है। उनके कारोबारी गतिविधियों को लेकर जांच की जा रही है या कार्रवाई किसी अन्य संबंधित मामले में है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दुर्ग में भी कार्रवाई रायपुर के अलावा दुर्ग जिले में भी ईडी ने कार्रवाई की है। यहां ट्रांसपोर्ट व्यापारी गुलशन बघेल के यहां छापा पड़ा है। उनके ऋषभ कॉलोनी स्थित घर में सुबह-सुबह ईडी की टीम पहुंची। उनको भूपेश बघेल का करीबी माना जाता है। फिलहाल, जांच के दायरे में कौन व्यक्ति है और क्या मामला है, इसे लेकर जानकारी स्पष्ट नहीं है. ईडी की ओर से भी कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. रायपुर के साथ दुर्ग में भी ईडी की कार्रवाई की खबर है. हालांकि दुर्ग में छापे की कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.

पंजाब में 57 करोड़ की देनदारी माफी पर विवाद, गमाडा अधिकारियों और बिल्डर की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

चंडीगढ़  मोहाली में जमीन सौदे में कथित अनियमितताओं और बिल्डर को करीब 57 करोड़ रुपये की देनदारी में राहत देने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गमाडा (ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) के वरिष्ठ अधिकारियों और दिल्ली की कंपनी रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पंजाब पुलिस से संपर्क किया है। मामला सेक्टर-62 में 1.13 एकड़ की फूड कोर्ट साइट से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, ईडी की कार्रवाई गमाडा के मुख्य अभियंता अजय गर्ग के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों पर आधारित है। अजय गर्ग से अगस्त में पूछताछ की गई थी। एजेंसी उस प्रक्रिया की जांच कर रही है, जिसके तहत कंपनी को बकाया राशि में छूट दी गई थी। यह छूट मुख्य सचिव-कम-चेयरमैन केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में हुई गमाडा की बैठक में मंजूर की गई थी। इस साइट की सितंबर 2015 में 32.50 करोड़ रुपये में नीलामी की गई थी। ईडी ने अगस्त में गमाडा के मुख्य अभियंता अजय गर्ग, पूर्व मुख्य अभियंता सुनील कंसल और तत्कालीन एस्टेट अधिकारी हरदीप सिंह से पूछताछ की थी। उनसे जांच के सिलसिले में रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्य मांगे गए थे। यह जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की जा रही है। छापे में मिले दस्तावेज भी जांच के दायरे में सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने 22 से 24 सितंबर के बीच गमाडा कार्यालय में करीब 50 घंटे तक चली तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री को भी अपने संचार में आधार बनाया है। एजेंसी जमीन सौदे और बकाया राशि माफ करने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। ईडी की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखे जाने के बाद आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव ने बिल्डर को दी गई 40 करोड़ रुपये की छूट वापस ले ली। प्रधान सचिव ने पुनरीक्षण प्राधिकारी के रूप में कंपनी की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए पांच फरवरी, 2026 को गमाडा के अपीलीय प्राधिकारी-कम-अतिरिक्त मुख्य प्रशासक की ओर से पारित आदेश रद कर दिया। रेमिगेट मामले में प्रमोटर गिरफ्तार पिछले सप्ताह ईडी ने रेमिगेट जांच के सिलसिले में जगमोहन गर्ग को गिरफ्तार किया था। गर्ग तिरुपति इन्फ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटर हैं। रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड तिरुपति के प्रमोटरों के नियंत्रण वाली संबंधित कंपनी है। गिरफ्तारी के बाद गर्ग को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। ईडी की जांच का केंद्र बिल्डर को दी गई राहत, जमीन सौदे से जुड़े निर्णय और इसमें कथित अनियमितताओं की परिस्थितियां हैं।

डंकी रूट मामले में ED की कार्रवाई तेज, ट्रैवल एजेंट तरुण खोसला को दिल्ली से दबोचा

जालंधर. अमेरिका से भारतीयों को डिपोर्ट किए जाने के बाद सामने आए कथित डंकी रूट नेटवर्क की जांच के बीच ट्रैवल एजेंट तरुण खोसला को ed ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है! उसे आज जालंधर में अदालत में पेश किया! इससे पहले दिसंबर 2025 में ईडी ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में नकदी, सोना, चांदी, मोबाइल फोन और दस्तावेज बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, आज की पेशी के कारण और उससे जुड़े ताजा घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। फरवरी 2025 में अमेरिका से सैकड़ों भारतीयों को वापस भेजा गया था। इनमें पंजाब और हरियाणा के लोग भी शामिल थे। डिपोर्ट किए गए लोगों के बयानों के बाद विदेश भेजने के नाम पर कथित धोखाधड़ी और डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचाने वाले नेटवर्क की जांच शुरू हुई। पंजाब और हरियाणा में दर्ज मामलों के आधार पर ED ने इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की। ईडी ने निर्वासितों के बयान दर्ज किए हैं, जिनके आधार पर संदिग्धों तक पहुंचा जा सका है और जिनकी तलाश जारी है। प्रत्येक निर्वासित ने उन ट्रैवल एजेंटों को ₹ 45 लाख से ₹ 55 लाख के बीच भुगतान किया था जिनसे वे व्यक्तिगत रूप से कभी नहीं मिले थे, लेकिन स्थानीय संपर्कों के माध्यम से उनसे जुड़े थे। ईडी ने निर्वासितों से उन सभी दस्तावेजों को प्रस्तुत करने को कहा है, जिनमें उन एजेंटों के बैंक खाते का विवरण भी शामिल है जिन्हें भुगतान किया गया था। ईडी की जांच में पाया गया कि निर्वासितों को ट्रैवल एजेंटों, बिचौलियों, विदेशी सहयोगियों, हवाला ऑपरेटरों, आवास और अन्य लॉजिस्टिक्स व्यवस्था प्रदाताओं के एक नेटवर्क द्वारा सुविधा प्रदान की गई थी। जुलाई में, पंजाब के अमृतसर, संगरूर, पटियाला और मोगा सहित 11 शहरों और हरियाणा के अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में संदिग्धों और एजेंटों के कार्यालयों और घरों पर छापे मारे गए, जिसके दौरान फर्जी आव्रजन और वीजा स्टाम्प सहित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।

₹656 करोड़ के गबन की जांच तेज, चंडीगढ़ में ED के 14 ठिकानों पर रेड

चंडीगढ़. ईडी चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-II ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 जगहों पर तलाशी की। यह जांच हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन आदि के 645 करोड़ सार्वजनिक फंड के कथित गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में है। जांच हरियाणा पुलिस के फरवरी 2026 के एफआईआर पर आधारित है, जिसमें डेवलपमेंट एंड पंचायत विभाग के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक खातों में गड़बड़ी पाई गई थी। तलाशी मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेल्स, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, शाम ज्वेलर्स, सुंदर ज्वेलर्स और बिचौलिये गौरव कंसल सहित ज्वेलरी फर्मों पर हुई। कथित गबन की रकम ज्वेलर्स के खातों से व्यापारिक लेनदेन दिखाकर लेयर्ड की गई और आईएएस अधिकारियों तक पहुंचाई गई। सीबीआई ने पहले ही छह हरियाणा कैडर आईएएस समेत आरोपियों के खिलाफ तीसरा चार्जशीट दाखिल किया है। ईडी ने पहले 4 गिरफ्तार किए, 211 करोड़ की संपत्ति अटैच/जब्त की और 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की। नई तलाशियों से और सबूत मिले। जांच जारी है।

GMDA स्कैम पर ED की बड़ी कार्रवाई, जालंधर और दिल्ली समेत कई ठिकानों पर छापेमारी

चंडीगढ़/नई दिल्ली पंजाब के मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण ( GMDA ) के कार्यालय में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, जालंधर, चंडीगढ़ और दिल्ली से पहुंची ईडी की टीमें तीन वाहनों में कार्यालय पहुंचीं और जांच शुरू की। अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की पड़ताल की। बताया जा रहा है कि छापे मुख्य रूप से जीएमएडीए कार्यालय और पंजाब आवास विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस विकास गर्ग के कार्यालय में मारे गए। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीमों ने दफ्तरों में दस्तावेज खंगाला और कंप्यूटर रिकॉर्ड को भी देखा। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के फोन भी जांच के लिए लिए लिए गए हैं। ईडी की ओर से फिलहाल छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जीएमएडीए में लगभग 150 करोड़ रुपये के भू-उपयोग परिवर्तन (CLU) घोटाले और शुल्क में कथित अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के तहत की जा रही है। जांच में सनटेक सिटी (न्यू चंडीगढ़) सहित कई परियोजनाएं शामिल हैं। इससे पहले ईडी इस मामले में दो भवन निर्माताओं के ठिकानों पर भी छापेमारी कर चुकी है। मामले में आईएएस अधिकारी कंवलप्रीत बराड़ से 18 और 27 अगस्त को पूछताछ की गई थी। 18 अगस्त को उनसे करीब आठ से नौ घंटे तक पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बराड़ नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की पूर्व निदेशक रह चुकी हैं। पूर्व मुख्य सचिव अनुराग वर्मा 9 सितंबर को ईडी के जालंधर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेश हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनसे आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। उस समय वह आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख थे। ईडी ने 10 सितंबर को मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी समन जारी कर मामले से संबंधित अभिलेख और जांच की जानकारी मांगी थी। मंगलवार को जीएमडीए कार्यालय में हुई कार्रवाई को इसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है

पटियाला के कॉल सेंटर से मोहाली तक ED की रेड, IPS अधिकारी के ठिकाने भी खंगाले

चंडीगढ़  पंजाब के पटियाला और मोहाली जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को छापामारी की। पटियाला के अर्बन एस्टेट फेज 2 में दम वेब सॉल्यूशन नाम के ऑफिस में रेड की। अर्बन एस्टेट फेज 2 में स्को 29 में खुले इस डीएम वेब सॉल्यूशन के अंदर कॉल सेंटर का काम किया जाता था। अधिकारियों की टीम में दो गाड़ियों में सवार होकर आई थी और सुबह से टीम ने रेड करने के बाद आने-जाने वालों पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि यह कॉल सेंटर दिन-रात चलता था। मौके पर 15 से 20 अधिकारी मौजूद हैं। वहीं, मोहाली सेक्टर 82 ए के प्लॉट नंबर 2010 ईडी ने छापामारी की है। कथित तौर पर यह रेड आईपीएस अधिकीरी से संबंधित है। जानकारी के अनुसार,  ईडी की जांच के दौरान इनपुट मिला था कि तकरीबन ढाई सौ 300 करोड रुपए का ट्रांजेक्शन विदेश में हुआ है। इस बीच जांच के दौरान अधिकारियों को मोहाली का इनपुट मिला। मोहाली स्थित ऑफिस की मालकिन के भाई का पटियाला में ऑफिस बना हुआ था। डीएम वेब सॉल्यूशन के नाम से खुले इस ऑफिस के जरिए ट्रांजेक्शन होने की जांच की जा रही है। यह ऑफिस पहले फ्लाइंग फेदर के नाम से चल रहा था लेकिन पिछले कुछ महीने से इसका नाम बदल कर डीएम वेब सॉल्यूशन कर दिया गया था। फ्लाइंग फेदर का ऑफिस छोटी बरादरी पटियाला में बना दिया था लेकिन वह भी पिछले कुछ समय से बंद कर दिया गया था।  

85 करोड़ के बैंक लोन में हेराफेरी का आरोप, रामनंदी होटल्स के 17 ठिकानों पर ED की रेड

पटना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग ) मामले में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड के 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी बिहार के गया जी और बोधगया के साथ ही नई दिल्ली और गुरुग्राम स्थित कंपनी के विभिन्न ठिकानों पर की गयी। कंपनी के निदेशक अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत और नितेश पर कथित धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। कंपनी से जुड़े 85 करोड़ के बैंक ऋण में कथित हेराफेरी मामले की सीबीआई पूर्व से ही जांच कर रही है। इसमें इस अपराध से हुई कथित कमाई 131.79 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में धन शोधन की आशंका को देखते हुए अब ईडी की एंट्री हुई है 58 करोड़ रुपये की हेराफेरी ईडी सूत्रों के मुताबिक, रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड मूलत: बिहार से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के निदेशक गया जी के चांदचौरा निवासी अखौरी गोपाल का पूर्व में रामनंदी ऑटोमोबाइल नाम से कारोबार रहा है। उनकी कंपनी पर बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए करीब 85 करोड़ रुपये के ऋण में लगभग 58 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी और डायवर्जन का आरोप है। फर्जी और जाली दस्तावेज मिल ईडी को जांच में कथित तौर पर फर्जी और जाली दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से परियोजना पूरी होने की दी गयी गलत रिपोर्ट के आधार पर पहले बैंक से लोन की रकम हासिल की गई। फिर लोन के बदले कई संपत्तियां गिरवी रखी गयीं। इनमें पांच संपत्तियां टाटा मोटर्स के पक्ष में मॉर्गेज बताई गई हैं। बाद में इन संपत्तियों को बेच दिया गया। जांच एजेंसी को बिक्री में भी गड़बड़ी का संदेह है। प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका आरोप है कि संपत्तियों की कीमत कम दिखाई गई। रकम का एक हिस्सा नकद प्राप्ति के रूप में दर्शाया गया। कुछ खरीदार भी ईडी की जांच के घेरे में हैं। एजेंसी को संदेह है कि करोड़ों की संपत्ति खरीदने वाले कुछ लोगों की आर्थिक क्षमता इतनी नहीं थी। ऐसे में उनके बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका है। लोन की व्यक्तिगत गारंटी दी थी प्रवर्तन निदेशालय की जांच में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके पुत्रों निशांत एवं नितेश के पास होने की बात सामने आई है। बैंक ऋण के लिए अखौरी गोपाल और परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी भी दी गयी थी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने शुक्रवार की अहले सुबह ही गया जी के चांदचौरा में अखौरी गोपाल और उनके नजदीकी रहे बोधगया के अमर बिगहा गांव में मिथिलेश राय के आवास पर छापेमारी शुरू की। जांच एजेंसी के अधिकारी बिहार समेत देशभर में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों की विस्तृत छानबीन करेगी। गया में 15 घंटे तक चली तलाशी ईडी की टीम ने गया जी और बोधगया में तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी करीब 15 घंटे तक चली। इस दौरान गया जी शहर की कालीबाड़ी स्थित न्यू कॉलोनी में अरविंद कुमार के घर में रह रहे किरायेदार, बाला जी नगर और बोधगया के अमर बिगहा में मिथिलेश राय के घर की जांच की गयी। जांच टीम ने दस्तावेज, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। तलाशी पूरी होने के बाद टीम जरूरी दस्तावेज और अन्य कागजात अपने साथ ले गई है। जांच एजेंसी ने छापेमारी व बरामदगी से संबंधित जानकारी देने से इनकार कर दिया।