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स्पीड का कहर! ट्रक की टक्कर से बाइक सवार की दर्दनाक मौत

बलरामपुर जिला मुख्यालय के समीप हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक चालक की मौके पर ही मौत हो गई. दुर्घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया. घटना बलरामपुर कोतवाली क्षेत्र की है. नेशनल हाइवे-343 सुहानी ढाबा के पास तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक चालक को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें युवक की घटना स्थल पर ही मौत हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खतरनाक मोड़ और रफ्तार की वजह से हादसे हुआ. दुर्घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची यातायात पुलिस बाइक नंबर के आधार पर मृतक की पहचान में जुटी है.

केंद्रीय रक्षा मंत्री से मिले रामविचार नेताम, ऑपरेशन सिंदूर पर जताया गर्व

रायपुर छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रामविचार नेताम ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके निवास कार्यालय पर मुलाकात की. इस दौरान मंत्री रामविचार नेताम ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर बधाई दी. वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में चलाए जा रहे नक्सल अभियान पर चर्चा की. कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को बताया कि छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा नियद नेल्लानार अभियान के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनजातियों के विकास के लिए कार्यों किए जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की प्रगति की जानकारी भी दी.

सीएम साय के नेतृत्व में बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलकरण तेज़ी से आगे

 स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर “नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल” से स्वास्थ्य सुविधाएं हुईं और भी सुलभ, प्रभावी एवं पारदर्शी रायपुर, बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तथा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का प्रभावी क्रियान्वयन क्षेत्र के लिए एक बड़ा परिवर्तन साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्त विस्तार की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सतत मार्गदर्शन में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं आज तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। बस्तर के छ :जिला चिकित्सालयों,  दो सिविल अस्पतालों और 41 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल प्रणाली का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे ओपीडी पंजीकरण, परामर्श, जांच, दवा वितरण तथा मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां अब एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध हो रही हैं। इसके तहत मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल तकनीक के इस समावेशन ने अस्पतालों में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और मरीजों की संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत अस्पतालों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन (HFR) और चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन (HPR) सुनिश्चित किया गया है। अस्पताल परिसरों में आभा कियोस्क स्थापित कर मरीजों को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने की सुविधा दी जा रही है। स्कैन एंड शेयर एवं आभा आईडी के माध्यम से ऑनलाइन ओपीडी पंजीयन की सुविधा से मरीजों को लम्बी कतारों से राहत मिली है और उन्हें त्वरित सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल नवाचारों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से सामने आया है। जिला चिकित्सालय बस्तर में मई, जून और जुलाई 2025 के दौरान कुल 60,045 ओपीडी पंजीयन दर्ज किए गए, जिनमें से 32,379 पंजीयन आभा लिंक के माध्यम से हुए — जो कि कुल पंजीयनों का 53% है। इसी अवधि में जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा में 33,895 ओपीडी पंजीयन दर्ज हुए, जिनमें से 13,729 पंजीयन आभा से लिंक किए गए — यानी 40% का डिजिटल एकीकरण। यह पूरी प्रक्रिया न केवल समय की बचत सुनिश्चित कर रही है, बल्कि मरीजों के लिए डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की सुविधा भी प्रदान कर रही है, जिसे वे देश के किसी भी हिस्से में कभी भी देख सकते हैं। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ उपचार की निरंतरता और गुणवत्ता में भी वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी आधुनिक तकनीकों के सफल क्रियान्वयन ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति और दिशा दी है। डिजिटल पंजीकरण, हेल्थ रिकॉर्ड और पारदर्शी सेवा प्रणाली से मरीजों को समयबद्ध, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है। यह पहल न केवल बस्तर के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है, जिसे हम शीघ्र ही राज्य के सभी जिलों में लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" के संकल्प को साकार करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का यह तकनीकी उन्नयन न केवल स्थानीय जनता के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस प्रणाली को सभी जिलों में सुदृढ़ रूप से लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ना है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में यह पहल केवल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। बस्तर में मिले सकारात्मक परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि जब तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ आते हैं, तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाएगी, बल्कि ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण में भी छत्तीसगढ़ का महत्त्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करेगी।    

अबूझमाड़ में बदलती फिज़ा, रक्षाबंधन बना भरोसे और स्वतंत्रता का पर्व

नारायणपुर नक्सल प्रभावित जिला नारायणपुर का अबूझमाड़, यह वह नाम है जिसे सुनते ही दिमाग़ में जंगलों की अनंत हरियाली के बीच बम, बारूद और गोलियों की गूंज उतर आती थी. दशकों तक नक्सलवाद के साये में जीते लोग, जिनका संसार अपने घर और आसपास के जंगलों तक सीमित था. जहां त्योहारों की रौनक नहीं, बल्कि सन्नाटे और डर का पहरा हुआ करता था. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. सरकार के नक्सलवाद के खात्मे के दृढ़ संकल्प और सुरक्षा बलों की लगातार तैनाती ने इस इलाक़े में भरोसे और सुरक्षा की नई कहानी लिख दी है. वही लोग, जो कभी बंदूक की नोक पर जीते थे, अब क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पर्वों को खुले दिल और पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं. रक्षाबंधन पर दिखी बदलाव की झलक इस बदलाव की झलक हाल ही में रक्षाबंधन के पर्व पर देखने को मिली. अबूझमाड़ के सोनपुर, डोड़रीबेड़ा, होरादी, गारपा समेत कई नक्सल प्रभावित गांवों की महिलाएं और बालिकाएं अपने गांव में स्थित पुलिस कैंप पहुंचीं. वहां नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हुए उनके चेहरे पर भय नहीं, बल्कि गर्व और आत्मीयता की चमक थी. सीमा सुरक्षा बल की 133वीं वाहिनी के जवानों ने भी ग्रामीणों से वादा किया कि वे हर परिस्थिति में उनकी सुरक्षा करेंगे. महीनों तक घर-परिवार से दूर रहकर नक्सल मोर्चे पर डटे इन जवानों के लिए यह सिर्फ एक औपचारिक पर्व नहीं था,यह उन बहनों का विश्वास था, जिनकी रक्षा के लिए वे अपनी जान दांव पर लगाए हुए हैं.इस कार्यक्रम में आसपास के गांवों के विभिन्न विद्यालयों और आश्रमों से 106 बालिकाएं, 13 शिक्षक और 18 ग्रामीण शामिल कुल 200 नागरिक शामिल हुए. जब नन्हीं-नन्हीं हथेलियों से राखी बांधी गई, तो कई जवानों की आंखें भर आईं. वर्षों से सुरक्षा की आस में जीते इन गांवों में यह दृश्य एक भावनात्मक क्रांति जैसा था ,जहां भाईचारे का धागा, डर की जंजीरों को तोड़ रहा था. बता दें कि सीमा सुरक्षा बल की भूमिका केवल नक्सल मोर्चे तक सीमित नहीं है. वे अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयासों में भी जुटे हैं. जहां कल तक स्कूल भवन अधूरे या जर्जर थे, वहां अब पढ़ाई की गूंज सुनाई देने लगी है. चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक सेवाएं धीरे-धीरे इन घने जंगलों तक पहुँच रही हैं.यह राह इतना आसान नहीं है, नक्सली विकास कार्यों में रुकावट डालने के लिए आए दिन जवानों पर हमला करते हैं, आईईडी लगाते हैं, और आगजनी की घटनाएं करते हैं. लेकिन सुरक्षा बल भी पीछे हटने वालों में से नहीं,वे हर वार का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं. नक्सलवाद धीरे-धीरे बैकफुट पर जाने लगा है, और अबूझमाड़ के लोग महसूस करने लगे हैं कि वे वास्तव में आज़ाद हो रहे हैं.आज अबूझमाड़ के गांवों में रक्षाबंधन ही नहीं, दीपावली, होली और स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहार भी उल्लास से मनाए जाते हैं. हर उत्सव में सुरक्षा बलों को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि इन ग्रामीणों के लिए वे सिर्फ रक्षक नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा बन चुके हैं.अबूझमाड़ की फिजा में अब विश्वास, भाईचारे और बदलती हुई हवा, जिसमें अब गोलियों की गूंज नहीं, बल्कि ढोल-नगाड़ों और हंसी की आवाज़ सुनाई देती है.

शिवनाथ नदी में फिर हादसा: दो दिनों में डूबने से 2 युवकों की मौत

दुर्ग जिले में पिछले दो दिनों के भीतर अलग-अलग हादसों में दो युवकों की शिवनाथ नदी में डूबकर मौत हो गई. पहली घटना सिरसा चौकी क्षेत्र के ग्राम सिरसा की है, जहां दोस्तों के साथ नहाने गया युवक तेज बहाव में बह गया. समोदा निवासी साहिल देशमुख की डूबने से मौत हो गई. सूचना मिलते ही दुर्ग एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान चलाकर युवक का शव बरामद किया. दूसरी घटना में शिवनाथ नदी में मोहारा एनीकेट में प्रशान्त सोनी ( 35 साल) की नदी में डूबने से मौत ही गई. घटना के बाद से परिजनों में शोक का माहौल है. घटना की सूचना के बाद एसडीआरफ की टीम ने मशक्कत के बाद प्रशांत के शव को नदी से बाहर निकाल लिया. हादसों की वजह दरअसल कुछ दिनों से बारिश थम गई है, जिससे शिवनाथ नदी का जलस्तर कम हो रहा है. जिसे देखकर ग्रामीण और युवा नदी में नहाने पहुंचते है और दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं.

बच्चियां बोलीं- सर गंदी चीजें दिखाते थे और Bad Touch करते थें, शिक्षक और सहायक निलंबित

राजनांदगांव राजनांदगांव ब्लॉक की एक प्राथमिक शाला में बच्चियों के यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। प्रधान पाठक नेतराम वर्मा कई वर्ष से 10 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों की अस्मत से खेल रहा था। पिछले दिनों कुछ बच्चियों ने स्वजनों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पूरा प्रकरण सामने आया। स्वजनों के मुताबिक बच्चियों ने बताया कि शिक्षक कक्षा में उन्हें गंदी फिल्में दिखाते हैं और बेड टच करते हैं। बच्चियों ने शिक्षकों की जो हरकतें बताई उसे सुनकर स्वजन भी सकते में आ गए। शिकायत के बाद पुलिस जांच कर रही है। उधर आरोपित एचएम को निलंबित कर दिया गया है। उसके साथ ही सहायक शिक्षक डीसम प्रसाद तिवारी का भी निलंबन किया गया है।   विभाग के अनुसार डीसम को मामले की पूरी जानकारी थी लेकिन उन्होंने इसकी कोई सूचना विभाग को नहीं दी। वहीं विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने इसकी शिकायत चिखली पुलिस चौकी में दर्ज कराई है। पुलिस ने स्वजनों के बयान दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। नेतराम वर्मा को विकासखंड कार्यालय छुरिया संलग्न किया गया है। आदेश में उन्हें बाल संरक्षण अधिनियम व पाक्सो नियम के विपरीत आचरण का दोषी बताया गया है। आरोपित को छग सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन करना बताय गया है। इसी तरह डीसम प्रसाद तिवारी को विकासखंड शिक्षा कार्यालय डोंगरगढ़ में संलग्न किया गया है। दूसरे बच्चों के सामने करता था गंदी हरकत जिस शाला में आरोपी नेतराम वर्मा पदस्थ है, वहां पहली से पांचवी तक की कक्षाएं लगती है। आरोप है कि नेतराम, कक्षा में दूसरे बच्चों के सामने ही कुछ बच्चियों को गंदी फिल्में दिखाता था और उन्हें बेड टच करता था। बच्च्यिों ने ये पूरा किस्सा स्वयं परिजनों को बताया है। जब यह मामला सामने आया तो पता चला कि ऐसा लंबे समय से चल रहा है। कुछ और बच्चों से पूछे जाने पर उन्होंने भी स्वजनों को ये जानकारी दी। इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में भी काफी आक्रोश है। बीईओ ने दर्ज कराई शिकायत प्रकरण में विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने चिखली पुलिस चौकी ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरु कर दी है। चौकी प्रभारी ने कहा कि, मामला काफी संवेदनशील है और महिला पुलिस अधिकारी द्वारा बयान लिए जा रहे हैं। पूरी जांच के बाद ही प्रकरण के संबंध में आगे कोई जानकारी दी जाएगी। कुछ भी बताने से बच रहे अधिकारी इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजू साहू ने कहा कि इस संबंध में पुलिस से ही जानकारी ली जा सकती है। विभागीय तौर पर जानकारी के लिए उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क करने की बात कही। पाक्सो बाक्स सिर्फ दिखावा हर स्कूल में पाक्सो बाक्स लगाया जाना अनिवार्य है। यह प्रवेश द्वार पर या नोटिस बोर्ड के पास लगाया जाना होता है। लेकिन इसे लेकर कोई जागरुकता नहीं है। यही कारण है कि संगीन मामले में भी दबे रह जाते हैं। प्रति सप्ताह शनिवार को पालकों या शिक्षा सदस्यों की उपस्थिति में इसे खोला जाना होता है। इसकी जानकारी विभाग को दी जानी जरूरी है। इसके अलावा स्कूल में इस पर एक रजिस्टर भी मेंटेंन किया जाना आवश्यक है जिसमें पूरा ब्यौरा भरना होता है। किसी दूसरे मामले की शिकायत भी इसमें दर्ज कर ली जाती है। लेकिन स्कूलों में इस जरूरी व्यवस्था को नजर अंदाज किया जा रहा है।

रक्षाबंधन पर अनोखी पहल: नक्सली महिलाओं से राखी बंधवाकर नेताओं ने बढ़ाया विश्वास

रायपुर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और मंत्री केदार कश्यप ने आज दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं से राखी बंधवाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऐसी माता और बहनें जो पहले नक्सली थी और जिन्होंने पुनर्वास किया है। अभी किसी सरकारी दायित्व पर हैं या सामान्य जीवन जी रही हैं उनसे हमने आज राखी बंधवाई। सभी के मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि  "जो माताएं और बहनें पहले नक्सली थीं और मुख्यधारा में शामिल हो गई हैं, उनसे मैं, मंत्री केदार कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष, बस्तर कमिश्नर, बस्तर आईजी, दंतेवाड़ा कलेक्टर, दंतेवाड़ा एसपी और अन्य सभी वरिष्ठ अधिकारी आज रक्षाबंधन पर उनसे मिलने गए। उन्होंने कहा कि अगर कोई बहन वापस आना चाहती है, तो पूरा समाज उसे अपना माने और हम सब मिलकर उसकी सुरक्षा और आजीविका सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।" वहीं दूसरी ओर सीएम विष्णुदेव साय ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ब्रह्मकुमारी बहनों ने राखी बांधी। 

शक्ति और एकता का संगम: कोरबा-पाली में आदिवासी दिवस की गूंज

  कोरबा विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर कोरबा जिले के पाली में आदिवासी समाज ने अपनी एकजुटता और ताकत का ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। आयोजन स्थल पर सुबह से ही पारंपरिक वेशभूषा और झंडों के साथ समाजजन पहुंचने लगे। देखते ही देखते पाली का मैदान हजारों आदिवासी भाइयों-बहनों से भर गया। अनुमान है कि 10 हजार से अधिक लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर मरकाम ने शिरकत की। इस अवसर पर आदिवासी समाज के विभिन्न संगठन, युवा मंडल, महिला मंडल और सांस्कृतिक दल भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के तहत एक विशाल रैली का आयोजन हुआ, जिसमें आदिवासी समाजजन ढोल-मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य करते हुए आगे बढ़े। हजारों की संख्या में सड़क पर रैली निकाली गई जहां रैली पाली थाना के बाहर पहुंचे। इस दौरान सभी लोगों ने शराब भट्टी को बंद करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई और जाम की स्थिति निर्मित हो गई। वहीं, इस दौरान पाली पुलिस भी मौजूद रही और लोगों को समझने का प्रयास किया। क्षेत्रीय विधायक और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर मरकाम ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस हर साल 9 अगस्त को दुनियाभर में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने की थी, ताकि मूलवासी और आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह दिवस आदिवासी समाज के लिए अपनी परंपराओं, इतिहास और अधिकारों को याद करने और आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने का अवसर होता है।

मुख्यमंत्री साय बोले- छत्तीसगढ़ की बहनों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध

रक्षाबंधन पर जशपुर एक्सप्रेस का शुभारंभ : बिहान की 12 दीदियों को ई-रिक्शा का उपहार रायपुर रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के गृहग्राम बगिया से जशपुर एक्सप्रेस का शुभारंभ किया और बिहान योजना से जुड़ी 12 दीदियों को राखी के उपहार स्वरूप ई-रिक्शा प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्वयं स्व-सहायता समूह की महिला श्रीमती गिलसोनिका पाण्डे के ई-रिक्शा में बैठकर बगिया निवास परिसर की यात्रा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह ई-रिक्शा न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इसकी परिचालन लागत भी कम है। इससे महिलाएं स्थानीय परिवहन सेवाओं में अपनी भागीदारी निभाते हुए आत्मनिर्भर बनेंगी और अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगी। उन्होंने रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सरकार छत्तीसगढ़ की सभी बहनों की सुरक्षा और सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्व-सहायता समूह की बहनों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ही यह ई-रिक्शा वितरण किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी सरकार मोदी की गारंटी को तेजी से लागू कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत 18 लाख आवास का कार्य तीव्र गति से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही आवास प्लस प्लस योजना के अंतर्गत 5 एकड़ असिंचित भूमि, 2.50 एकड़ सिंचित भूमि, टू-व्हीलर और 15 हजार रुपये मासिक आमदनी वाले पात्र परिवारों को भी लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से 70 लाख बहनों को प्रति माह 1000 रुपये दिए जा रहे हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय बढ़ाने के लिए तेंदूपत्ता का समर्थन मूल्य 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। गांवों में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अटल डिजिटल सुविधा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें आगामी पंचायत दिवस पर सभी ग्राम पंचायतों में शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम नागरिकों की सुविधा के लिए रजिस्ट्री में 10 नई क्रांतियों के तहत पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल, डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनाया गया है। दूरस्थ एवं पहुंचविहीन क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत बस सेवाएं प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज और शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज खोले जाएंगे। कार्यक्रम में बताया गया कि ई-रिक्शा का संचालन जिले के विभिन्न रूट्स पर महिला संचालकों द्वारा किया जाएगा। फरसाबहार में प्रतिमा भगत फरसाबहार- कन्दईबहार- अमडीहा- तपकरा मार्ग पर, मदनावती लवाकेरा- अमडीहा- पुराईनबंध- समडमा- तपकरा मार्ग पर, राजकुमारी पैंकरा तपकरा- कन्दईबहार- तुबा- फरसाबहार मार्ग पर और उर्मिला भगत खुटगांव- सिंगीबहार- साजबहार- तपकरा मार्ग पर परिचालन करेंगी। इसी तरह, दुलदुला में बिंदेश्वरी देवी कोसा- दुलदुला- विपतपुर- छेरडांड मार्ग पर, पार्वती साय कोसा- दुलदुला- पतराटोली- लोरो- बम्हनी मार्ग पर, संगीता देवी छेरडांड- लोरो- बम्हनी- कस्तुरा मार्ग पर और बिमला देवी छेरडांड- दुलदुला- लोरो- पतराटोली मार्ग पर परिचालन करेंगी। कांसाबेल में गिलसोनिका पाण्डे टांगरगांव- हथगड़ा- कांसाबेल मार्ग पर, तियासो पैंकरा बांसबहार- दोकड़ा- पुसरा- खुंटीटोली- कांसाबेल मार्ग पर, नीता रवानी कटंगखार- दोकड़ा- बन्दरचुंआ- कांसाबेल मार्ग पर और अंगावती बाई देवरी- दोकड़ा- छाताबर- कांसाबेल मार्ग पर ई-रिक्शा का परिचालन करेंगी। इस अवसर पर कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, डिप्टी कलेक्टर समीर बड़ा, उपेन्द्र यादव, गणेश जैन एवं रवि यादव उपस्थित थे।  

जीवन के अनुभवों से सिखाए सुशासन के गुर, विद्यार्थियों के जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों के दिए प्रेरक उत्तर

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ईमानदारी और निष्ठा से निभाई गई जिम्मेदारी हमेशा सकारात्मक परिणाम देती है। जनसेवा में ईमानदारी और समर्पण के साथ लगे रहने  पर जनता का स्नेह और आशीर्वाद अवश्य ही प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री साय आज मंत्रालय महानदी भवन के पंचम तल स्थित नवनिर्मित सभागार में आयोजित ‘मुख्यमंत्री सुशासन संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन IIM रायपुर में अध्ययनरत मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के विद्यार्थियों के साथ हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें सुशासन की बारीकियों से अवगत कराया और उनके प्रश्नों के प्रेरणादायक उत्तर दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की है। प्रदेश में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है, जिससे सभी फाइलें डिजिटलीकृत हो रही हैं। इससे शासन की कार्यप्रणाली पारदर्शी बनी है और फाइलों की ट्रैकिंग भी सहज हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा भ्रष्टाचार के सभी मार्गों को बंद करने की है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनता को शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले, यही असली सुशासन है। योजनाएं सोच-समझकर बननी चाहिए, क्योंकि इसके पीछे जनता की गाढ़ी कमाई लगती है। जब योजनाएं जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से क्रियान्वित होती हैं, तभी आमजन को उसका सीधा लाभ मिलता है। मुख्यमंत्री साय ने सुशासन फेलोशिप के विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उनके जिज्ञासु सवालों के बेझिझक और प्रेरणाप्रद उत्तर दिए। आरंग के फेलो हर्षवर्धन ने जब मुख्यमंत्री से उनके ग्राम बगिया के पंच से लेकर मुख्यमंत्री बनने के सफर की सबसे महत्वपूर्ण सीख पूछी, तो मुख्यमंत्री साय ने अपने राजनीतिक और पारिवारिक संघर्षों को साझा करते हुए कहा – "बहुत कम उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि मैं पंच भी बनूंगा, लेकिन जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा से निभाया।" उन्होंने आगे कहा – “ईमानदारी और निष्ठा से जब कार्य करते हैं, तो सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। मैंने कभी कर्तव्यपथ नहीं छोड़ा, और जनसेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया। जनता ने मुझे पंच, सरपंच, विधायक, सांसद, राज्य मंत्री और अब मुख्यमंत्री तक का दायित्व सौंपा।” बिलासपुर के फेलो मनु पांडेय ने जब यह पूछा कि 2047 तक विकसित भारत के सपने में छत्तीसगढ़ की क्या भूमिका होगी, तो मुख्यमंत्री ने बताया – "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 तक विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसमें छत्तीसगढ़ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2014 से पहले भारत अर्थव्यवस्था में दसवें स्थान पर था, जो अब चौथे स्थान पर पहुंच गया है। हमने भी विकसित छत्तीसगढ़ के लिए ‘विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार किया है। वर्तमान में हमारी जीएसडीपी 5 लाख करोड़ रुपये है, जिसे 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है।" मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह लक्ष्य कोई कल्पना नहीं, बल्कि एक ठोस योजना है, जिसे हम अवश्य प्राप्त करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक सम्पन्न राज्य है – यहाँ लोहा, टिन, लिथियम, बॉक्साइट, सोना और हीरे जैसे बहुमूल्य खनिजों के भंडार हैं। राज्य का 44% भूभाग वनों से आच्छादित है, जहां सैकड़ों प्रकार के लघु वनोपज हैं। यहाँ की उर्वरा मिट्टी और मेहनतकश लोग ही छत्तीसगढ़ की असली ताकत हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा – “आप जैसे युवाओं के संकल्प और कौशल से हम विकसित छत्तीसगढ़ जरूर बनाएंगे।” फेलोशिप का उद्देश्य – भविष्य के उत्तरदायी सुशासक तैयार करना कार्यक्रम में सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने फेलोशिप योजना की रूपरेखा पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप का उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को गवर्नेंस की उच्च स्तरीय शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर एक दक्ष एवं उत्तरदायी प्रशासनिक पीढ़ी तैयार करना है। इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सरकार, भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर के साथ मिलकर पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित कर रही है। चयनित फेलोज को शासन के विभिन्न विभागों में प्रायोगिक प्रशिक्षण के अवसर भी दिए जाएंगे। भगत ने बताया कि फेलोज शासन के निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में डेटा आधारित नीति निर्धारण, प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण, संसाधनों के कुशल उपयोग, ई-गवर्नेंस को मजबूती, और नीतियों के जमीनी प्रभावों के विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देंगे। मुख्यमंत्री ने किया फेलोशिप के प्रोस्पेक्टस का विमोचन, अंजोर विजन डॉक्युमेंट भी किया भेंट  मुख्यमंत्री साय ने मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप कोर्स के प्रोस्पेक्टस का विमोचन किया और विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्युमेंट की प्रति भी भेंट की। इस अवसर पर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने भी छात्रों को मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल, IIM रायपुर के प्रोफेसर्स एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।