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ओसाका (जापान) में वर्ल्ड एक्सपो 2025 के पहले ही दिन छत्तीसगढ़ पैवेलियन में उमड़ी रौनक

रायपुर  ओसाका (जापान) में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 के पहले दिन ही छत्तीसगढ़ पैवेलियन आकर्षण का केंद्र बन गया। उद्घाटन दिवस पर 22 हजार से अधिक दर्शकों ने यहाँ पहुँचकर छत्तीसगढ़ की विरासत, उद्योग और पर्यटन की अनूठी झलक का अनुभव किया। भारत सरकार के इंडियन ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) के आमंत्रण पर 24 से 30 अगस्त 2025 तक भारत पैवेलियन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। आज इस भव्य पैवेलियन का विधिवत शुभारंभ किया गया। छत्तीसगढ़ : संस्कृति, उद्योग और अवसरों का संगम पैवेलियन को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह आगंतुकों को एक जीवंत अनुभव प्रदान करता है। पवेलियन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, औद्योगिक शक्ति और पर्यटन की संभावनाओं को सुंदर रूप से पिरोया गया है। यह वैश्विक दर्शकों को छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराता है। पर्यटन और विरासत की छटा पैवेलियन में छत्तीसगढ़ की धरती की सुंदरता और धरोहर को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। नवा रायपुर, देश का पहला ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी, जिसे निवेश और औद्योगिक प्रगति के लिए तैयार किया गया है, यहाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान चित्रकोट जलप्रपात ने भी सबका ध्यान खींचा। भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात होने के कारण इसे “भारत का नियाग्रा” कहा जाता है। इतिहास और आस्था की झलक देने वाला सीतापुर (Sirpur) पैवेलियन में प्रमुख रूप से प्रदर्शित है। यह 8वीं शताब्दी ईस्वी से जुड़ा भारत का एक विशाल बौद्ध स्थल है, जो छत्तीसगढ़ की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का परिचायक है। भारत और जापान की सांस्कृतिक विरासत के इस जुड़ाव में, छत्तीसगढ़ बुद्ध के विचारों और शिक्षाओं से प्रेरित होकर शांति, समावेश और सतत विकास के साझा मूल्यों को आगे बढ़ाता है। औद्योगिक शक्ति और लॉजिस्टिक हब के रूप में छत्तीसगढ़ पैवेलियन में छत्तीसगढ़ की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति पर विशेष बल दिया गया। राज्य की केंद्रीय स्थिति और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क उसे देश के भीतर सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाते हैं। विनिर्माण, वस्त्र, आईटी/आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रामोद्योग जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ की तेजी से हो रही प्रगति को भी यहाँ प्रदर्शित किया गया है। यह वैश्विक निवेशकों के लिए राज्य को निवेश-तैयार गंतव्य के रूप में स्थापित करता है। कला और शिल्प की पहचान छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोककला और हस्तशिल्प में भी झलकती है। पैवेलियन में बस्तर की ढोकरा कला—4,000 वर्ष पुरानी जीआई टैग प्राप्त धातु शिल्प—अपने अनगढ़ सौंदर्य और मौलिकता से सबको आकर्षित कर रही है। इसी तरह, कोसा सिल्क, जिसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा कहा जाता है, पैवेलियन का मुख्य आकर्षण बना। यह अपनी प्राकृतिक चमक, मजबूती और आकर्षण के लिए विख्यात है और राज्य के वनों में पाए जाने वाले एंथरेया मायलिट्टा रेशमकीट से तैयार किया जाता है। कोसा से बनी कलात्मक इंस्टॉलेशन छत्तीसगढ़ की आत्मा को व्यक्त करती है—जहाँ आध्यात्मिकता, प्रकृति और विकास का संतुलन साफ़ दिखाई देता है। वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की दमदार उपस्थिति वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पैवेलियन की शानदार शुरुआत और रिकॉर्डतोड़ दर्शक संख्या ने आने वाले सप्ताह की दिशा तय कर दी है। यह पैवेलियन न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है, बल्कि छत्तीसगढ़ को सतत औद्योगिक प्रगति और वैश्विक निवेश अवसरों के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेवता पर प्रदेशभर से आई माताओं-बहनों का किया गया आत्मीय स्वागत

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेवता पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आज छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्योहार तीजा-पोरा धूमधाम से मनाया गया। ‘विष्णु भइया’ के नेवता पर आयोजित इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए प्रदेशभर से बड़ी संख्या में महिलाएँ पहुँचीं। प्रदेश सरकार के मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें उपहार स्वरूप साड़ी, श्रृंगार सामग्री और छत्तीसगढ़ी कलेवा भेंट किया गया। मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने उपस्थित माताओं-बहनों को तीजा पर्व की शुभकामनाएँ दीं। महिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति के मान, सम्मान और दृढ़ निश्चय का महत्वपूर्ण पर्व है। निर्जला व्रत रखकर अपने पति-परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की कामना करने वाली सभी माताओं-बहनों को उन्होंने सरकार की ओर से शुभकामनाएँ दीं। श्री साव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेवता पर माताओं-बहनों की इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति स्वयं इस पर्व के महत्व को सिद्ध करती है। उन्होंने कहा कि तीजा के आते ही माताओं-बहनों के मन में प्रसन्नता छा जाती है। भाई-भतीजा के तीजा लिवाने आने की प्रतीक्षा रहती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ महतारी के मान, सम्मान और गौरव को बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की 70 लाख से अधिक माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि मिल रही है। इससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और घर-परिवार को संचालित करने में पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु आगे भी ऐसी योजनाएँ लाती रहेगी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी तीजा-पोरा पर्व की बधाई दी और कहा कि यह अवसर सभी तीजहारिन बहनों के लिए बहुत विशेष है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए खुशी, एकजुटता और आत्मीयता का प्रतीक है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीजा धार्मिक, सामाजिक और प्राकृतिक सामंजस्य का पर्व है। माता-बहनें परिवार को जोड़कर स्वर्ग समान बनाए रखने का कार्य करती हैं। सुहागन महिलाएँ निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। सावन में खेत-खलिहान हरे-भरे हो जाते हैं, जिनमें गाय-बैलों की अथक मेहनत का योगदान होता है। इसी मेहनत से हमारे धान के कोठार भरते हैं। कार्यक्रम में मौजूद पूर्व सांसद सरोज पांडेय ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर पंडवानी गायिका पद्मश्री उषा बारले और लोकगायिका कुमारी आरु साहू को स्मृतिचिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, विधायक सुनील सोनी, इंद्र कुमार साव, अनुज शर्मा, केश शिल्पी बोर्ड की अध्यक्ष मोना सेना, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, रायपुर की महापौर  मीनल चौबे सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे। महिला सम्मेलन में महतारियों का उत्साह, तीजहारिन बहनों ने लगवाई मेंहदी तीजा-पोरा के नेवता के लिए ‘विष्णु भइया’ का जताया आभार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के भाई के रूप में दिए गए नेवता पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित महिला सम्मेलन एवं तीजा-पोरा तिहार में बड़ी संख्या में माताओं-बहनों ने भाग लिया। यहाँ लगाए गए स्टॉल गुलजार रहे। महिलाओं ने मेंहदी लगवाई, रंग-बिरंगी चूड़ियाँ पहनीं, आलता लगाया और सजधज कर सावन के झूले का आनंद लिया। महतारियों के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। पंडवानी गायिका उषा बारले ने अपनी प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। पूरे सभागार को छत्तीसगढ़ी पारंपरिक साज-सज्जा से सजाया गया था। यहाँ मेहंदी, चूड़ियाँ, आलता के स्टॉल और ग्रामीण परिवेश को जीवंत करते हुए तीजा-पोरा की तैयारियाँ प्रदर्शित की गईं। ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक चिन्हारी आभूषणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें तोड़ा, पैरी पैजन, लच्छा, साँटी, झांझ, बिछिया, बिछुआ, चुटकी, ऐंठी, गोल, कंगन या कड़ा टरकउव्वा, कंगन या कड़ा (चोटी की तरह गुँथा हुआ), पटा, ककनी-हर्रया, तरकी, छुमका, ढार, खिनवा, लुरकी, धतुरिया, फुल्ली, नथ, रुपियामाला, तिलरी, कटवा, सूता, करधन, बजुबंद, खग्गा, फुंदरा और झबली जैसे पारंपरिक आभूषणों के साथ कृषि उपकरण और वाद्ययंत्र भी प्रदर्शित किए गए। महिलाओं ने खेल प्रतियोगिताओं में दिखाया उत्साह कुर्सी दौड़, जलेबी दौड़, नींबू दौड़ और रस्साकशी जैसी प्रतियोगिताएँ हुईं महिला सम्मेलन एवं तीजा-पोरा तिहार की शुरुआत विधि-विधान से शिव-पार्वती और नंदी की पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद मंचीय कार्यक्रमों में महिलाओं की सहभागिता ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। कुर्सी दौड़, जलेबी दौड़, नींबू दौड़ और रस्साकशी जैसी प्रतियोगिताओं में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह से गूंज उठा। इन खेलों ने न केवल प्रतियोगिता का रोमांच बढ़ाया, बल्कि पारंपरिक पर्व की आत्मीयता और सामाजिकता को भी जीवंत कर दिया। कई महिलाओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से त्योहार का आनंद दोगुना हो जाता है और समाज में आपसी मेलजोल भी बढ़ता है। प्रतियोगिता के अंत में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया और सभी प्रतिभागियों की सराहना की गई।

सड़कों की बदहाली पर अनोखा प्रदर्शन : व्यापारियों ने गड्ढों में नहाकर किया विरोध

कोरबा सड़क पर जगह-जगह गड्‌ढों से शहरवासी परेशान हैं. कोरबा जिले के कुसमुंडा क्षेत्र में सड़क की समस्या को लेकर व्यापारियों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया. व्यापारियों ने सड़क पर गड्‌ढों वाले स्थान पर बाल्टी मंगाकर गड्‌ढों में भरे पानी से नहाकर विरोध जताया. व्यापारियों का कहना है कि कुसमुंडा मार्ग में विशालकाय गड्ढे और जलभराव की समस्या से लोग बीते एक दशक से जूझ रहे हैं. यहां फोरलेन निर्माण का कार्य हुआ था, लेकिन इमली छापर में ओवरब्रिज की समस्या के कारण लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. विकास नगर कुसमुंडा फोरलाइन में लगभग 100 मीटर तक जलभराव होता है और सड़क पर जगह-जगह गड्ढों के कारण राहगीरों और शरहवासियों का चलना मुश्किल हो गया है. सड़क खराब होने से व्यवसाय चौपट व्यापारिक संघ के अध्यक्ष अशोक राठौर ने बताया कि बीते लगभग 2 साल से यही स्थिति है, जिससे व्यापारियों का व्यवसाय चौपट हो चुका है. कॉलोनीवासियों की आवाजाही मुश्किल हो गई है. इस प्रदर्शन के माध्यम से व्यापारियों ने शासन-प्रशासन का ध्यान खराब सड़क की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है.

खेल सम्मान 2025: छत्तीसगढ़ के 77 खिलाड़ी पाएंगे अलंकरण

रायपुर  छत्तीसगढ़ में खेल अलंकरण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. खेल विभाग ने इस वर्ष सम्मानित किए जाने वाले खिलाड़ियों की अनंतिम सूची जारी कर दी है. इस सूची में 77 खिलाड़ियों के नाम शामिल किए गए हैं जिन्हें विभिन्न खेल पुरस्कारों से नवाजा जाएगा. बता दें, खिलाड़ियों का यह सम्मान समारोह 3 सितंबर को आयोजित होगा. इससे पहले खेल अलंकरण समारोह की तारीख 29 अगस्त को तय हुई थी, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विदेश प्रवास के चलते कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ा दी गई है. खेल संचालक तनुजा सलाम ने खिलाड़ियों की सूची जारी करते हुए बताया कि इस बार खिलाड़ियों को शहीद राजीव पांडे पुरस्कार, शहीद कौशल पांडे पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद पंकज विक्रम सम्मान, शहीद विनोद चौबे सम्मान, मुख्यमंत्री ट्रॉफी और ओलंपिक खेल सम्मान जैसे प्रतिष्ठित अलंकरणों से सम्मानित किया जाएगा.

खेती में आधुनिक तकनीक: ड्रोन से हो रहा नैनो यूरिया का छिड़काव

रायपुर, प्रदेश में किसान खेती-किसानी में नई तकनीकों को अपना रहे हैं। महासमुंद जिले के ग्राम जोगनीपाली में शनिवार को किसानों के बीच ड्रोन तकनीक के माध्यम से नैनो यूरिया का छिड़काव कर प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर अधिकारीयों ने किसानों को पारंपरिक यूरिया के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया के लाभों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। किसानों को नैनो यूरिया के प्रयोग से लागत में कमी, मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि और पर्यावरणीय लाभों के बारे में अवगत कराया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ किसान श्री अमृत पटेल, भोगलाल चौधरी, नेहरू चौधरी, चुम्बन लाल, बाबूलाल चौधरी, फागु लाल, शिवप्रसाद, वासुदेव साहू, गणेश साहू सहित लगभग 30 किसान उपस्थित रहे।

गुप्त ठिकाने पर चल रहा था जुआ, पुलिस ने दबिश देकर 11 बड़ी हस्तियों को पकड़ा

दुर्ग बावन परियों के साथ शहर के धन्ना सेठों के खेलने की खबर पर वैशाली नगर और भिलाई नगर पुलिस टीम की संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई की. मौके से 11 लोगों को छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर 10 नग मोबाइल के साथ नगद 2,18,000 रुपए जब्त किया गया. जानकारी के अनुसार, पुलिस को 23 अगस्त को मुखबिर से सूचना मिली कि रामनगर जलाराम केटर्स के पीछे कुछ लोग पैसे लगाकर ताश पत्ती खेल रहे हैं. इस पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में तत्काल थाना वैशालीनगर और भिलाई नगर की टीम के साथ नगर पुलिस अधीक्षक भिलाई नगर ने छापामार कार्रवाई की. पुलिस को देखकर जुआ खेल रहे आरोपियों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन चाक-चौबंद पुलिस ने घेराबंदी कर सभी जुआरियों को पकड़ लिया. पकड़े गए बावन परियों के शौकिनों में खुर्सीपार निवासी गोपाल कुमार अग्रवाल, स्मृति नगर निवासी प्रदीप लाया, वैशाली नगर निवासी एके जैन, दुर्ग निवासी बुधराम निर्मलकर, जामुल निवासी मनोज सिंह, वैशाली नगर निवासी पवन कुमार, स्मृति नगर निवासी अनूप कुमार धौटे, मोहन नगर निवासी शंक गेडवानी, वैशाली नगर निवासी विनोद अग्रवाल, जामुल निवासी रोहन अग्रवाल और वैशाली नगर निवासी राजेश शामिल हैं. बताया गया कि आरोपीगणों के कब्जे से 10 मोबाइल, 52 पत्ती ताश और नगदी 218000 रुपए को समक्ष गवाहों के जब्त किया गया. आरोपीगणों के विरूद्ध थाना वैशाली नगर में अपराध क्रमां- 284/2025, धारा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 3(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना मे लिया जाकर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है.

नक्सलियों को तगड़ा झटका! कोईमेंटा जंगल से मिला विस्फोटक डंप

सुकमा नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर मेट्टागुड़ा कैंप से जवानों की टीम नक्सल विरोधी अभियान के लिए रवाना हुई थी. इस दौरान जवानों को नक्सलियों के खुफिया डंप को बरामद कर बड़ी सफलता हासिल हुई है. नक्सलियों के छिपाए गए कंट्रीमेड रायफल, विस्फोटक और भारी मात्रा में लोहे की सामग्री सुरक्षाबलों ने बरामद की है. जानकारी के मुताबिक, 23 अगस्त को जवानों को नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी. इसके बाद 203 कोबरा वाहिनी, 241 बस्तर बटालियन सीआपीएफ और जिला बल की संयुक्त पार्टी नक्सल विरोधी अभियान के लिए ग्राम बोटेलंका, ईरापल्ली, कोईमेंटा पहाड़ी, दारेली व आस-पास क्षेत्र की ओर रवाना हुई. अभियान के दौरान कोईमेंटा पहाड़ी में नक्सलियों द्वारा डंप कर कंट्रीमेड हथियार और अन्य नक्सल सामग्राी को बरामद किया गया.   नक्सल डंप से क्या-क्या मिला ? बरामदगी के दौरान जवानों को नक्सलियों के डंप से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री मिली है. इसमें कंट्रीमेड रायफल, बीजीएल लांचर और उसका बैरल, यूएवी नेत्रा का टूटा हुआ प्रोपेलर, इलेक्ट्रिक होल्डर वेल्डिंग, बैंच वाइस और स्टील पाइप शामिल है. इसके अलावा 7 लोहे के छड़, करीब 2 किलो वजनी 45 लोहे के बेस प्लेट, 8 किलो के 47 पोल एंगलर और लगभग 480 भारी-भरकम आयरन क्लैंप बरामद किए गए. वहीं 35 ग्राउंड सपोर्टर, 1 किलो, 18 और 12 इंच के दर्जनों क्लैंप, एक टी-टाइप क्लैंप, काला वर्दी, एम्युनेशन पाउच और टूटी हुई इन्वर्टर बैटरी भी मिली. मौके से करीब 20 मीटर इलेक्ट्रिक वायर और एक इलेक्ट्रिकल एक्सटेंशन बोर्ड भी जब्त किया गया.

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से उपभोक्ताओं को मिल रही राहत

कोनी निवासी रमेश साहू का बिजली बिल हुआ शून्य रायपुर, केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना अब उपभोक्ताओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला रही है। प्रदेश के बिजली उपभोक्ता इस योजना का लाभ लेने आगे आ रहे हैं। ऐसे ही बिलासपुर जिले के ग्राम कोनी के निवासी श्री रमेश साहू ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया है। इसके बाद उनका बिजली बिल शून्य हो गया है।इस अभिनव योजना के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री का आभार जताया है। कोनी में रहने वाले श्री रमेश साहू बताते हैं कि उनके घर पर बिजली की खपत काफी अधिक थी प्रतिमाह आने वाले बिजली के बिल से उन्हें बड़ा आर्थिक भार झेलना पड़ता था। सूर्यघर योजना के बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया जिसकी लागत करीब दो लाख रुपए थी। इस प्लांट पर उन्हें केन्द्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है, जबकि राज्य सरकार से मिलने वाली 30 हजार रुपये की सब्सिडी भी शीघ्र मिलने वाली है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें बिजली बिल की चिंता से मुक्ति मिल गई है।अब उन्हें किसी तरह का बिल नहीं भरना पड़ रहा। एक बार निवेश करने पर 25 वर्षों तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है और इस पर कोई विशेष मेंटेनेंस खर्च भी नहीं है। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में सप्लाई कर आय अर्जित करने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में यह योजना बड़ा कदम है। श्री साहू ने आम नागरिकों से अपील की कि वे भी इस योजना का लाभ उठाएं और सौर ऊर्जा को अपनाकर बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनें। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने पर केन्द्र सरकार से 78 हजार रुपये तक सब्सिडी और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये तक सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही सरकार 300 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली प्रदान कर रही है। योजना में घर की छत पर सोलर पैनल लगाने की सुविधा मिलती है जिससे बनने वाली खपत से अतिरिक्त बिजली ग्रिड में देकर बिजली उत्पादक भी बना जा सकता है। योजना के तहत ऋण का भी प्रावधान है जिसमें एक बार निवेश पर 25 वर्षों तक मुफ्त और सतत बिजली पाई जा सकती है।

बेलबहरा विद्यालय का एनसीईआरटी नई दिल्ली एवं जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा औचक निरीक्षण

संकुल स्तरीय सामाजिक अंकेक्षण एवं एसएमडीसी के सदस्यों का प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न एमसीबी/बेलबहार  शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलबहरा का नई दिल्ली एनसीआरटी से मनोवैज्ञानिक करियर काउंसलिंग एवं गाइडलाइंस विभाग से आए अशोक कुमार तथा जिला शिक्षा अधिकारी राम प्रसाद मिरे द्वारा विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के के दौरान विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियां , प्रयोगशाला, पुस्तकालय, आईसीटी लैब, कक्षा – कक्ष तथा विद्यार्थियों की अध्ययन स्थिति का मूल्यांकन किया गया। प्रोफेसर श्री कुमार ने विद्यार्थियों को कैरियर मार्गदर्शन तथा मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए सुझाव दिए। जिला शिक्षा अधिकारी आरपी मिरे द्वारा मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर बल दिया गया। अधिकारियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं एवं अनुशासन को संतोषजनक एवं उत्तम पाया गया। विशेष रूप से विद्यालय द्वारा प्रदान की जा रही शिक्षा की गुणवत्ता को सराहनीय एवं उत्कृष्ट बताया गया। प्राचार्य बलराज पाल एवं शालेय परिवार  द्वारा सभी आगंतुकों का स्वागत किया गया। उनके सुझावों का विद्यालय विकास में उपयोग करने का आश्वासन दिया गया  जिला शिक्षा अधिकारी श्री मिरे द्वारा द्वारा 12वीं साइंस के छात्र-छात्राओं को कक्षा बोर्ड में ही विषय वस्तु को विस्तार से समझाया गया तथा सभी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं उच्च संस्था के बारे में भी बतलाया गया उन्होंने कहा कि पढ़ाई को निरंतर जारी रखते हुए सभी छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा को अवश्य प्राप्त करें जिससे उनका भविष्य उज्जवल हो सके। सभी छात्र-छात्राएं अपने लक्ष्य अवश्य बनाएं एवं उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अहर्निश मेहनत करें उन्होंने 12वीं कक्षा में प्रथम श्रेणी में आने के लिए विशेष टिप्स के साथ सभी छात्रों को नोट्स बुक तैयार कर ब्लूप्रिंट के माध्यम से पढ़ने के लिए  प्रेरणा दी। तत्पश्चात एसएमडीसी के सदस्यों का संकुल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सक्रिय सदस्यों ने सहभागिता निभाई तथा इस प्रशिक्षण में संकुल स्तर के  प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के प्रधान पाठक तथा संकुल सदस्यगण उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया, उद्देश्य एवं शाला स्तर पर पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। संकुल प्राचार्य  श्री पाल ने  बताया कि सोशल ऑडिट केवल लेखा-जोखा की जाँच भर नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें विद्यालय की गुणवत्ता सुधार और शैक्षिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि सामाजिक अंकेक्षण से अभिभावकों एवं समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित होगी। इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कृष्ण गोपाल दुबे, पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी डीपी मिश्रा, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आरसी राजवाड़े, सीएसी धर्मेंद्र पैकरा सहित  व्याख्यातागण माता प्रसाद द्विवेदी, सुधा शुक्ला, सुषमा टोप्पो,  सुनीता मिश्रा, निर्मला अग्रवाल, कमलेश पांडे, अश्विनी कुमार दुबे, नित्यानंद द्विवेदी, जयंत देवांगन, माया वर्मा, मंजू बघेल, शोभा जायसवाल तथा सहायक शिक्षक सुनीता यादव, विशाल ठाकुर, अभिलाष पांडे सहित संकुल स्तर के शिक्षक गण तथा पालकगण उपस्थित थे।

कलेक्टर का बड़ा फैसला: गणेश चतुर्थी की छुट्टी रद्द

सूरजपुर छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में कलेक्टर ने गणेश चतुर्थी का अवकाश रद्द कर दिया है. कलेक्टर एस जयवर्धन ने आदेश जारी कर 27 अगस्त यानि गणेश चतुर्थी को पूर्व में घोषित अवकाश को रद्द कर दिया है. साथ ही तीन सितंबर को मनाए जाने वाले करमा जिसे ढोल ग्यारस भी कहा जाता है को स्थानीय अवकाश घोषित किया है. बता दें कि इससे पहले सरकार ने नवरात्रि महाअष्टमी का अवकाश निरस्त किया था और उसके बदले नुआखाई को स्थानीय अवकाश घोषित किया है. 30 सितंबर महाअष्टमी के बदले 28 अगस्त को नुआखाई (ऋषि पंचमी) के मौके पर स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है.