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माँ नर्मदा के आशीर्वाद से प्रदेश में बह रही है विकास की नई धारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की जीवन रेखा है और उनके आशीर्वाद से मध्यप्रदेश में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भी होलकर साम्राज्य ने मां नर्मदा के आशीर्वाद से कठिन परिस्थितियों में सनातन संस्कृति को सशक्त बनाए रखा और देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर घाट, धर्मशालाएं एवं अन्नक्षेत्र विकसित किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा परियोजनाओं को नई गति मिली है। सरदार सरोवर परियोजना के माध्यम से गुजरात, राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र सहित व्यापक भू-भाग में जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे कृषि, उद्योग एवं पेयजल की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में आयोजित नर्मदा के चतुर्थ चरण के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर शहर को पेयजल व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिये मां नर्मदा जल के चतुर्थ चरण के तहत अमृत 2.0 योजना में 1356 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन । इससे शहर की पेयजल आपूर्ति संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और नागरिकों को बेहतर जलापूर्ति सुविधाएं प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री इंदौर के रामसर साइट सिरपुर में 62.72 करोड़ रूपये लागत से निर्मित एसटीपी प्लांट का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संकल्प से समाधान अभियान के तहत विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर संचालित किए गए इस संकल्प से समाधान अभियान के तहत इंदौर जिले में एक लाख 44 हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “संकल्प से समाधान” अभियान में इंदौर जिले में एक लाख 44 हजार 912 आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया है। यह अभियान प्रदेश के सभी 55 जिलों में प्रभावी रूप से संचालित हुआ। प्रदेश में अब “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत लगभग पौने तीन लाख कुएं, बावड़ी, तालाब एवं नहरों का निर्माण एवं जल संरचनाओं पुनर्जीवित किया जाएगा। यह अभियान गुड़ी पड़वा से प्रारंभ हो गया है, जो गंगा दशमी तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के 25 जिलों को लाभ मिलेगा, वहीं पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना से मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के 13 जिलों में सिंचाई एवं पेयजल की सुविधाएं सुदृढ़ होंगी। उन्होंने शिप्रा नदी के पुनर्जीवन के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालु शिप्रा के स्वच्छ जल में स्नान कर सकेंगे। इसके लिए बड़े पैमाने पर वर्षा जल संग्रहण एवं निरंतर जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कान्ह नदी के जल को शुद्ध कर कृषि कार्यों में उपयोग हेतु उपलब्ध कराया जाएगा। प्रत्येक बूंद जल के संरक्षण के माध्यम से प्रदेश को समृद्ध बनाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे इंदौर शहर के लिए आगामी 25 वर्षों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना बनाई गई है, जिससे क्षेत्र में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र देश के प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल हो रहा है। आने वाले समय में यह क्षेत्र लगभग डेढ़ करोड़ की आबादी के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनेगा। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आज का दिन इंदौर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। यह दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वर्णिम भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि शहर के विकास के लिए दीर्घकालिक सोच के साथ कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2040 तक इंदौर की अनुमानित 65 लाख जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन की अग्रिम तैयारी करना नगर निगम की दूरदर्शिता का प्रतीक है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि नर्मदा परियोजना का इतिहास संघर्ष और संकल्प से भरा हुआ है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के उस ऐतिहासिक क्षण को याद किया जब नर्मदा परियोजना के प्रथम चरण का शुभारंभ हुआ था। उस समय वैज्ञानिकों ने इंदौर तक नर्मदा जल लाने की चुनौती को असंभव बताया था, लेकिन इंजीनियर्स और विशेषज्ञों के प्रयासों से यह संभव हो सका। यह देश की एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नर्मदा जल अत्यंत मूल्यवान है और इसे व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए। जल संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है और इसका सम्मान करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना इंदौर के सतत विकास और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने शहरवासियों को 1356 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण जल परियोजना की सौगात पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह योजना इंदौर के विकास और भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिसका लक्ष्य लगभग 900 एमएलडी जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है। मंत्री सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल संसाधनों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। पिछले लगभग दो वर्षों में करीब 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विस्तार किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है, जिसे अगले एक वर्ष में बढ़ाकर लगभग 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028-29 तक राज्य में 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रदेश के कृषि विकास में मील का पत्थर साबित होगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नर्मदा के चतुर्थ चरण के भूमिपूजन कार्यक्रम को इंदौर के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल वर्तमान, बल्कि भविष्य के इंदौर की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि इसी स्थान पर उन्होंने नर्मदा परियोजना के पहले चरण का लोकार्पण … Read more

नव नियुक्त एल्डरमैन नागरिक सुविधाओं के विस्तार को दें प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के नगरीय निकायों में नव-नियुक्त सभी एल्डरमैन को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नव नियुक्त सभी एल्डरमैन नागरिक सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दें। शहरों के समग्र विकास, सुशासन और जन-भागीदारी को बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी समस्त एल्डरमैन को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘विकसित मध्यप्रदेश-विकसित भारत’ के संकल्प के साथ नव नियुक्त एल्डरमैन्स अपनी ऊर्जा, अनुभव और समर्पण से अपने-अपने नगरों में प्रगति के नये आयाम जोड़ेंगे।  

इनोवेशन अपनाकर मध्यप्रदेश बनेगा उद्यमिता का हब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। आज मध्यप्रदेश का युवा अपनी सोच को आकार देकर नए-नए इनोवेशन कर आईटी तकनीकी के माध्यम से स्टार्टअप कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश स्टार्टअप एवं इनोवेशन को अपनाते हुए उद्यमिता विकास का हब बन जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आज दुनिया तेजी से बदल रही है। वर्तमान समय में इंसान को उसके ज्ञान से ही मापा जाता है। उन्होंने कहा कि युवा नवीन तकनीकी को अपनाएं और स्टार्टअप करें एवं दूसरों को रोजगार देने वाले सफल उद्यमी बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में प्रदेश की पहली नॉलेज और एआई सिटी बन रही है। उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के सिंहासा में स्थित आईटी पार्क में बने लॉन्चपैड इनक्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। नवाचार और विज्ञान के माध्यम से अनेक कार्य हो रहे हैं। लोग कभी जमीन और प्रापर्टी को अपना सब कुछ समझते थे। अब तो ज्ञान ही सबसे बड़ा खजाना है। ज्ञान होने से मनुष्य अपने आप धनवान हो जाता है। नॉलेज के बलबूते पर उन्नति के मार्ग पर तेजी से जा सकते हैं। सत्यवादी मार्ग पर बढ़ने का यही समय है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में भोपाल के अलावा इंदौर और उज्जैन क्षेत्र मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित होने वाले हैं। हमारे सभी संसाधन भविष्य की दृष्टि से विकसित किए जाएंगे। मध्यप्रदेश को इनोवेशन हब बनाकर प्रदेश की भूमिका को सशक्त करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नवाचार और उद्यमिता का केंद्र बन रहा है। मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट के माध्यम से इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर भारत की स्टार्टअप क्रान्ति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के युवा एआई पर आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप, हेल्थटेक, स्किलटेक, ग्रीन इनोवेशन और डिजिटल सॉल्यूशन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर स्टार्टअप हब बन रहे हैं। लांचपैड सेंटर का किया निरीक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लॉन्चपेड इनोवेशन सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान युवाओं द्वारा अपनी सोच को नवीन तकनीकी से आकर देकर निर्मित की गई अत्याधुनिक मशीनों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत वर्ष इस सेंटर का भूमि-पूजन किया था और आज उसके लोकार्पण अवसर पर युवाओं की आधुनिक सोच एवं आइडियाज को देखकर अति प्रसन्नता हो रही है। स्टार्टअप वाले युवाओं से किया संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने आइडिया से स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा उद्यमियों से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने युवा उद्यमियों से जाना की वे किस क्षेत्र में कार्य कर रहे है। युवाओं के कार्यों के बारे में जानकर उनका हौंसला बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी कार्य को करने की अगर हमारी मंशा सही है तो उस कार्य में सफलता अवश्य मिलती है। भारतीय औद्योगिक प्रबंध संस्थान इंदौर के निदेशक सुभाष एस जोशी ने बताया कि “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करना, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश को सशक्त बनाना और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है। विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों से की चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्य कर रही विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों से चर्चा भी की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी उद्यमियों से कहा कि अपनी कंपनियों में युवाओं को काम करने का मौका दें एवं उन्हें अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। हमारे देश में युवाओं के पास एक नई एवं आधुनिक सोच है हमारा देश चौथी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर कर आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट,विधायक गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड़, राजेश मेंदोला, मनोज पटेल, अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पवन सोनकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मध्यप्रदेश में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित “लाँचपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” एक महत्वपूर्ण पहल है। इस केंद्र की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है। “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” एक महत्वपूर्ण पहल इंदौर के सिंहासा में स्थित आईटी पार्क में बने लगभग 10 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित इस अत्याधुनिक केंद्र में 5 हजार वर्ग फुट का को-वर्किंग एवं इन्क्यूबेशन स्पेस और 5 हजार वर्ग फुट की उन्नत प्रयोगशाला अवसंरचना विकसित की गई है। केंद्र में स्थापित इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग लैब के माध्यम से उत्पादों की प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और सत्यापन की सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। यह केंद्र विचार से लेकर व्यावसायीकरण तक संपूर्ण नवाचार प्रक्रिया को सहयोग प्रदान करेगा। साथ ही एआई,एमएल,इंडस्ट्री 4.0, रोबोटिक्स, डिजिटल हेल्थकेयर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, एमएसएमई और नवाचारकर्ताओं को आवश्यक तकनीकी एवं संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा। लगभग 10 करोड़ रुपये के अवसंरचना निवेश और 20 करोड़ रुपये के स्टार्टअप समर्थन प्रावधान के साथ यह केंद्र आगामी 7 वर्षों में 100 स्टार्टअप्स को विकसित करने और 200 से 300 रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य लेकर कार्य करेगा। यह केंद्र डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करने, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश की क्षमताओं को मजबूत करने और उद्योग तथा अकादमिक जगत के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने का कार्य करेगा।   

टीकमगढ़ के डायल-112 हीरोज : ट्रैक्टर-बोलेरो की टक्कर में घायल 20 व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल.  टीकमगढ़ जिले के थाना बड़ागांव क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं समन्वित कार्रवाई से ट्रैक्टर एवं बोलेरो की टक्कर में घायल 20 व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस हादसे में त्वरित राहत कार्य के चलते सभी घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। दिनांक 28 मार्च 2026 को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना बड़ागांव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोपालपुरा के पास ट्रैक्टर एवं बोलेरो की टक्कर में लगभग 20 व्यक्ति घायल हो गए हैं एवं तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही बड़ागांव थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री लक्ष्मण लोधी एवं पायलट श्री शैलेश त्रिपाठी ने दुर्घटना में बड़ी संख्या में घायल व्यक्तियों को देखकर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया। डायल-112 जवानों ने त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई करते हुए एफआरव्ही वाहन एवं चिकित्सा वाहनों की सहायता से सभी घायलों को शीघ्रता से शासकीय अस्पताल, बड़ागांव पहुँचाया। डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से सभी घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में बड़े हादसों में भी त्वरित राहत एवं सहायता प्रदान करने हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है। 

जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार का महा अभियान

भोपाल.  जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान अभियान चलाया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून 2026 तक चलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह महा अभि‍यान केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन-अभियान के रूप में स्थापित हो रहा है। इस वर्ष अभियान के अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 2.0 एवं 1.0 के कार्यों को भी शामिल किया गया है। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट तथा 19 अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण एवं जल उपलब्धता में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसानों को सिंचाई सुविधा में विस्तार एवं कृषि उत्पादन में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्‍त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 के अंतर्गत पूर्व में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। इससे न केवल इन संरचनाओं की कार्यक्षमता पुनर्स्थापित होगी, बल्कि जल संरक्षण के पूर्व प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता एवं सतत निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की निगरानी WMS पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे कार्यों की वास्तविक समय (Real-Time) पर प्रगति का आकलन संभव हो सकेगा। वहीं, वाटरशेड विकास 1.0 के कार्यों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से कर उन्हें मनरेगा पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे उनके अनुश्रवण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके। 

कूनो में जन्मी चीता ‘मुखी’ का तीसरा जन्म-दिन गौरव का क्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कूनो में जन्मी चीता 'मुखी' का तीसरा जन्म-दिन प्रदेश के साथ ही पूरे देश के वन्य-जीव संरक्षण के लिए गौरव का क्षण है। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में जन्मी भारतीय चीता 'मुखी' ने 29 मार्च को तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है। यह परियोजना के लिये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश में संचालित 'चीता परियोजना' लगातार सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है। चीता ‘मुखी’ की कहानी भारत में चीतों की पुनर्स्थापना के प्रयासों के दृढ़ संकल्प, श्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गई है। कूनो नेशनल पार्क में 29 मार्च को ‘मुखी’ के तीसरे जन्म-दिवस के अवसर पर एक विशेष और भावनात्मक वातावरण देखने को मिला। एक नन्हे शावक से आत्म-विश्वास लबरेज फर्राटे भरती वयस्क चीता और अब एक माँ बनने तक की मुखी की यात्रा प्रेरणादायक रही है। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत में चीतों के संरक्षण और पुनर्वास के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कठिन परिस्थितियों में जन्म और जीवन की शुरुआत चीता मुखी का जन्म 29 मार्च 2023 को नामीबिया से लाई गई ‘ज्वाला’ की कोख से हुआ था। वह चार शावकों के समूह में एकमात्र जीवित बची थी। भीषण गर्मी के कारण उसके अन्य तीन भाई-बहन जीवित नहीं रह सके। प्रारंभिक परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन कूनो नेशनल पार्क के पशु चिकित्सकों और वन्य-जीव विशेषज्ञों की सतत निगरानी और देखभाल से मुखी आज पूर्णतः स्वस्थ है। विशेष देखभाल में हुआ पालन-पोषण जन्म के साथ ही तीन शावकों की मृत्यु के सदमें में डूबी माँ ज्वाला ने मुखी को भी अस्वीकार कर दिया था। वन विभाग और कूनो के पशु चिकित्सकों ने मुखी का विशेष देखभाल के साथ पालन-पोषण किया। उसे भारतीय जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से प्रशिक्षित और संरक्षित किया गया। समर्पित और समन्वित प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मुखी स्वस्थ रूप से विकसित होकर एक ताकतवर और आत्मनिर्भर चीता बन सकी। दूसरी पीढ़ी के चीतों का जन्म नवंबर 2025 में मात्र 33 महीने की आयु में मुखी ने पाँच स्वस्थ शावकों को जन्म देकर इतिहास रच दिया। यह पहला अवसर था जब भारत में जन्मे किसी चीते ने स्वयं शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही भारतीय भूमि पर चीतों की दूसरी पीढ़ी का आगमन हुआ, जिसने मध्यप्रदेश में ‘चीता परियोजना’ की सफलता का परचम ग्लोबल वन्य-जीव संरक्षण जगत में लहरा दिया। चीता परियोजना की सफलता का प्रतीक तीन वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी मुखी पूरी तरह विकसित और स्वस्थ है और अपने प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक अपने शावकों के साथ फर्राटे भर रही है। यह उपलब्धि सिद्ध कर रही है कि कूनो नेशनल पार्क का पर्यावरण और वन्य जीव प्रबंधन प्रवासी चीतों के प्राकृतिक जीवन चक्र के लिए अनुकूल सिद्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रबंधन और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। मुखी की सफलता न केवल कूनो नेशनल पार्क बल्कि पूरे देश के लिए वन्य-जीव संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है। बढ़ती संख्या से सफल सिद्ध हो रहा चीता संरक्षण अभियान कूनो में भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी’ की सफलता और उसके पाँच शावकों के जन्म के बाद कूनो तथा गांधी सागर क्षेत्र में चीतों की कुल संख्या 32 तक पहुँच चुकी है। यह उपलब्धि भारत में चीतों के सफल पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। गांधी सागर में पुनर्वास की दिशा में कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के लिए अनुकूल आवास के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने वहाँ ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ का भूमि-पूजन कर नई साइट पर चीतों को बसाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में चीतों के लिए अतिरिक्त सुरक्षित आवास उपलब्ध होगा। अंतर्राज्यीय सहयोग से संरक्षण परियोजना को मिला बल चीता संरक्षण को और सुदृढ़ बनाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच संयुक्त चीता संरक्षण परिसर विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यह पहल क्षेत्रीय स्तर पर वन्य-जीव संरक्षण को नया आयाम प्रदान करेगी। ईको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा चीतों की बढ़ती संख्या के कारण कूनो और चंबल क्षेत्र में ईको-टूरिज्म की संभावनाएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। तकनीकी निगरानी से सुनिश्चित हो रही सुरक्षा चीतों की सुरक्षा और गतिविधियों की निगरानी के लिए रेडियो ट्रैकिंग, ड्रोन और फील्ड टीमों की मदद से सतत निगरानी की जा रही है। इससे चीतों की सुरक्षा के साथ उनके व्यवहार और आवास के अनुकूलन का वैज्ञानिक अध्ययन भी संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नेशनल पार्क की कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़कर चंबल अंचल को पर्यटन और जैव-विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया है। मुखी का तीसरा जन्म-दिवस केवल एक वन्य-जीव की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत में चीतों की वापसी की ऐतिहासिक की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इससे सिद्ध हो रहा है कि समर्पित प्रयासों और दूरदर्शी नेतृत्व के साथ वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश नई सफलताएँ हासिल कर रहा है।  

शरीर की साधना का अद्भुत खेल है बॉडी बिल्डिंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बॉडी बिल्डिंग शरीर की साधना का अद्भुत खेल है। यह साधना संगमरमर की मूर्तियों पर रेखा उकेरने जैसा कठिन कार्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को नई ऊंचाइयां मिल रही हैं और नई शिक्षा नीति में भी खेलों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडियन बॉडी बिल्डर फेडरेशन को 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय खिलाड़ी और पद्मसे सम्मानित प्रेमचंद डिगरा का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के बॉस्केटबाल कॉम्पलेक्स में 17वीं सीनियर मेन्स-विमेंस नेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप के भव्य आयोजन को संबोधत कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दो दिवसीय बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप-2026 के विजेताओं को सम्मानित किया और बॉडी बिल्डिंग में सहभागिता करने वाले खिलाड़ियों की प्रतिभा की सराहना की। प्रतियोगिता इंडियन बॉडी बिल्डर फेडरेशन, मुंबई के तत्वावधान में राज्य शरीर सौष्ठव संस्था द्वारा आयोजित की गई, जिसमें देश भर से आए खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में पंजाब के टोनू कुमार, केरलम के रियाज टीके, कर्नाटक के प्रशांत कानूकर, उत्तराखंड के पंकज सिंह बिष्ट और तेलंगाना के हरीश वालूगुंडा सहित पांच खिलाड़ियों ने बॉडी बिल्डिंग की सात अनिवार्य मुद्राओं का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक रमेश मेंदोला, मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया, गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड़, इंदौर सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह,कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित जनप्रतिनिधि एवं अन्य राज्यों से आए खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को रखेंगे मध्यप्रदेश का ओडीओपी मॉडल

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और संकल्प से मध्यप्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) को एक प्रभावी आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जो स्थानीय उत्पादों को पहचान से आगे बढ़ाकर उन्हें बाजार, निर्यात और रोजगार से जोड़ रहा है। इसी सशक्त और परिणामोन्मुख मॉडल को वाराणसी में 31 मार्च को आयोजित सहयोग सम्मेलन में साझा किया जयेगा और यूपी के नवाचारों से अवगत होंगे। ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल ओडीओपी के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। मध्यप्रदेश में यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आर्थिक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सहयोग सम्मेलन में ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल साझा किया जायेगा। प्रदेश के हर जिले की विशिष्टता को मिला आर्थिक विस्तार श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, सीहोर का बासमती, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, मंडला-डिंडोरी का कोदो-कुटकी, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी जैसे विविध उत्पादों को ODOP के अंतर्गत संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है। यह व्यापकता यह दर्शाती है कि प्रदेश के हर हिस्से की आर्थिक क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के ओडीओपी को सिल्वर अवॉर्ड से राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता मध्यप्रदेश के इन समग्र प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मध्यप्रेश के ओडीओपी मॉडल को अवॉर्ड-2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रदेश के कारीगरों, किसानों और उद्यमियों की दक्षता और सरकार द्वारा विकसित सुदृढ़ इकोसिस्टम का परिणाम है। निर्यात, कौशल और बाजार को जोड़ता एकीकृत इकोसिस्टम प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ते हुए कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। ब्रांडिंग, पैकेजिंग, जीआई टैगिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। एमपी यूपी सम्मेलन से उभरेंगे नए अवसर और समन्वय एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की सहभागिता के साथ ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रहेगा। इस मंच के माध्यम से मध्यप्रदेश अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह प्रदर्शित करेगा कि ओडीओपी को किस प्रकार व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और निर्यात-आधारित मॉडल के रूप में लागू किया जा सकता है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टि को मिलेगा ठोस विस्तार मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सम्मेलन से ओडीपी उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर विकसित होंगे, निर्यात को गति मिलेगी और कारीगरों तथा उद्यमियों को व्यापक प्लेटफॉर्म प्राप्त होगा। दोनों राज्यों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान सुदृढ़ होगा, जिससे ओडीओपी को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त आर्थिक मॉडल के रूप में और मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में ‘एक जिला एक उत्पाद’ के अंतर्गत प्रदेश के 50 से अधिक जिलों की विशिष्ट उत्पादकता को चिन्हित कर उसे एक सशक्त आर्थिक ढांचे से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन टाइल्स, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, रतलाम का नमकीन, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, बड़वानी का केला, खरगोन की मिर्च, इंदौर का आलू, सागर के कृषि उपकरण, मंदसौर का लहसुन, नीमच का धनिया, आगर मालवा-राजगढ़-छिंदवाड़ा का संतरा, टीकमगढ़-निवाड़ी का अदरक, देवास-हरदा का बांस, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, नरसिंहपुर की तुअर दाल, सिवनी का सीताफल, सीधी का कालीन, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी तथा मंडला, डिंडोरी, सिंगरौली और अनूपपुर का कोदो-कुटकी जैसे विविध उत्पादों को वैल्यू चेन आधारित दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जा रहा है। उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता तक एकीकृत समर्थन के माध्यम से यह पहल स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को स्थायी आय, बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे प्रदेश में संतुलित और समावेशी आर्थिक विकास को नई गति मिल रही है।

कंकाली मंदिर प्रांगण में राजपूत समाज का भव्य होली मिलन समारोह सम्पन्न, सामाजिक एकता और संस्कृति का दिखा अनुपम संगम

रायसेन/भोपाल.  राजराजेश्वरी राजपूत ठाकुर समाज भोपाल एवं भोपाल मंडल द्वारा रायसेन जिले के गुदाबल स्थित पावन मां कंकाली धाम मंदिर प्रांगण में भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन हर्षोल्लास और सामाजिक समरसता के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के सैकड़ों लोगों ने सहभागिता कर एकता, परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों का अद्भुत परिचय दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात फूलों से होली खेलकर उपस्थित जनों ने आपसी प्रेम, भाईचारे और उल्लास का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान रंगारंग माहौल में समाजजनों ने गीत-संगीत और पारंपरिक आयोजनों का भरपूर आनंद लिया। इस अवसर पर समाज उत्थान, संगठन की मजबूती एवं सामाजिक समरसता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी सार्थक चर्चा की गई। कार्यक्रम में विशेष रूप से मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन एवं जानकारी देते हुए राजपूत समाज भोपाल मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष संतोष कुमार ठाकुर ने बताया कि होली मिलन समारोह का उद्देश्य समाज को एक मंच पर लाकर आपसी समन्वय और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के साथ सभी समाजजनों ने मां कंकाली के दर्शन कर आशीर्वाद भी प्राप्त किया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय उपस्थित रहीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता गोविंद सिंह ठाकुर ने की। विशेष अतिथि के रूप में रोहित राजपूत, गौरव ठाकुर, नीतू जी, शोभना जी एवं ललिता जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अलावा कार्यक्रम में प्रतिम सिंह ठाकुर, सुनील सिंह ठाकुर, राजेश सिंह ठाकुर, गणेश सिंह ठाकुर, जगदीश सिंह ठाकुर सहित गढ़ाकोटा से राहुल जी एवं बड़ी संख्या में समाज बंधुओं ने सहभागिता कर आयोजन को सफल बनाया। समारोह ने जहां एक ओर होली के उल्लास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, वहीं सामाजिक एकता, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश भी दिया।

भगवान महावीर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया बयान

भगवान महावीर के विचार आज भी हैं प्रासंगिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दिगंबर और श्वेताम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन ने दी है समाज सेवा को नई दिशा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर में महावीर जयंती व्याख्यान में की सहभागिता चार वरिष्ठ समाजसेवियों को दिया महावीर अलंकरण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर संसार को सत्य, अहिंसा, असंचय, अपरिग्रह, त्याग और तपस्या का शाश्वत संदेश देने वाले करुणा के महासागर थे। भगवान महावीर ऐसे तीर्थंकर हैं, जिनसे हम सबको प्रेरणा मिलती है। ऐसे भगवान की जयंती हमें वर्षभर मनाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज से करीब ढ़ाई हजार साल पहले भगवान महावीर स्वामी ने जो कहा था, वह आज की वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक है। जैन दर्शन की विशेषता है कि वह दूसरों को दबाने या डराने के बजाय, जिनेन्द्रिय़ों पर अर्थात् स्वयं पर विजय प्राप्त करता है। भगवान महावीर स्वामी ने भी स्वयं की इन्द्रियों को जीता है, इसलिये वे जिन महावीर कहलाये। आज पूरी दुनिया उनको पूजती है, उनके विचारों को मानती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान महावीर के चरणों में वंदन कर प्रदेशवासियों को महावीर जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हर काल में राष्ट्र निर्माण में जैन समाज का अप्रतिम योगदान रहा है। आज ऐसे समाजसेवियों को सम्मानित करना हम सबके लिए सौभाग्य का अवसर है, जिन्होंने भगवान महावीर की शिक्षाओं को अपने आचरण और व्यक्तित्व में उतारा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर में मदन मोहन मेहता ऑडिटोरियम में महावीर जयंती व्याख्यान एवं महावीर अलंकरण/सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान जिन् महावीर पर दिखाए सत्यमार्ग पर चलने वाले 4 वरिष्ठ समाजसेवियों चंदनमल चौरड़िया, हंसराज जैन, हंसमुख गांधी एवं संतोष कुमार जैन को 'महावीर अलंकरण' प्रदान किया। साथ ही सम्मानित समाजसेवियों को बधाई देते हुए कहा कि आप सबने भगवान महावीर के सिद्धांतों को सच्चे अर्थों में जीवन में आत्मसात किया है। आपका आचरण और यह उपलब्धि दूसरों को भी ऐसा करने की प्रेरणा देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन और श्वेताम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन उच्च कोटि की समाज सेवा के जीवंत उदाहरण है। महावीर जयंती व्याख्यान एवं महावीर अलंकरण समारोह के रूप में इन दोनों फेडरेशन्स का यह संयुक्त प्रयास अद्भुत संगठन शक्ति, समर्पण और समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्तमान में चल रहे वैश्विक उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि स्वहितों के लिए पूरे विश्व को विषम और असामान्य सी परिस्थितियों में ला देने वाले लोगों को भगवान महावीर के 'अहिंसा परमो धर्म:' सूत्र वाक्य को याद करना चाहिए। क्योंकि हिंसा और अराजकता का जबाव प्रतिकार नहीं, बल्कि करुणा और संयम ही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि करीब 100 साल पहले विदेशियों को संबोधित करते हुए महान वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चन्द्र बसु ने बताया था कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है और वे इसका अनुभव करते हैं। हमारे यहां गांव-देहात में रहने वाला सामान्य व्यक्ति भी जानता है कि संध्या के समय पेड़-पौधों को स्पर्श नहीं करना चाहिए अथवा पत्तियों और पुष्पों को नहीं तोड़ना चाहिए। हमारे देश में चर-अचर जगत में सभी को सम्मान दिया जाता है। पृथ्वी को माता मानकर उसकी पूजा की जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानव शरीर पंच तत्वों से मिलकर बना है और जैन दर्शन में पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच क्रमेन्द्रियां और मनुष्य के मन-मानस को विस्तार से परिभाषित किया गया है। जैन दर्शन में एकात्मवाद सहित उपवास, आत्मा, संस्कार आदि पर भी बहुत कुछ लिखा-कहा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा भोजन सात्विक होना चाहिए। जैसा आहार होगा, वैसा ही हमारा मन और विचार होंगे। परमात्मा ने एक चीज हम सबको दी है और वह है ऑक्सीजन, जो हम सबके जीवन के लिए जरूरी है। आज हमारी ऊर्जा का स्रोत भी सात्विक होना चाहिए। इसीलिए हमारी सरकार ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन में विशेष प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाजजनों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को शिक्षाविद् स्वप्निल कोठारी एवं वरिष्ठ पत्रकार राजेश चेलावत ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक रमेश मेंदोला, मनोज पटेल, गोलू शुक्ला एवं सावन सोनकर, सुमित मिश्रा, श्रवण चावड़ा, हरिनारायण यादव, टीनू जैन, सूरज कैरो सहित जैन समाज के संतगण, दोनों ही फेडरेशन्स के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।