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नौकरी का मेगा पिटारा तैयार! हरियाणा के इस शहर में बनेगा देश का बड़ा ट्रांसपोर्ट हब

चंडीगढ़  हरियाणा के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को ध्यान में रखते हुए सरकार कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. इसी कड़ी में सरकार हरियाणा के एक जिले में मॉडर्न और डायनामिक ट्रांसपोर्ट हब बना रही है, जिससे न सिर्फ शहर के आने-जाने वालों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि दिल्ली-NCR और आस-पास के राज्यों से आसान कनेक्टिविटी भी मिलेगी। इस जिलें में प्रस्तावित मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब में बस अड्डा, मैट्रो और रैपिड रेल (RRTS) की सेवाएं एक ही परिधि में मिलेंगी. इससे यात्रियों को अलग-अलग स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.   नए बस अड्डे के लिए जाट जोशी गांव में 9.43 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। यहां आधुनिक बस स्टैंड, वर्कशॉप, पार्किंग, रैन बसेरा, वेटिंग हॉल और अन्य यात्री सुविधाओं के निर्माण के लिए पैमाइश और निशानदेही का काम शुरू हो चुका है। यह बस अड्डा न सिर्फ बस संचालन का केंद्र होगा, बल्कि यात्रियों को आरामदायक माहौल और बेहतर सेवाएं  भी प्रदान करेगा।   जाट जोशी से लगभग 300 मीटर की दूरी पर सेक्टर-7 मोड़ के पास रैपिड रेल (RRTS) स्टेशन प्रस्तावित है. इसके साथ ही दिल्ली मैट्रो के फेज-5 के तहत बैलो लाइन का विस्तार नाथूपुर, कुंडली होते हुए सेक्टर-7 तक करने की योजना पर भी काम आगे बढ़ रहा है। इस विस्तार में करीब 26.5 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर और 21 नए स्टेशन शामिल होंगे। अनुमान है कि इस रूट से प्रतिदिन लगभग 50,000 यात्री सफर कर सकेंगे।   इन तीनों सेवाओं बस, मैट्रो और रैपिड रेल के एक ही क्षेत्र में उपलब्ध होने से न केवल ये जिला,बल्कि इसके आसपास के इलाकों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। दिल्ली और एनसीआर की ओर आने-जाने वाले यात्रियों का समय बचेगा और कई बार परिवहन के साधन बदलने की समस्या भी समाप्त होगी। सोनीपत में कनेक्टिविटी बढ़ने से निवेश, रियल एस्टेट, रोजगार और विकास के नए अवसर खुलेंगे. केएमपी, केजीपी और यूईआर-2 जैसे प्रमुख मार्गों के साथ मैट्रो और रैपिड रेल नेटवर्क के जुड़ने से यह क्षेत्र तेजी से एक नियोजित और उभरते शहर के रूप में विकसित हो रहा है।निवेशकों और रियल एस्टेट कंपनियों की रुचि भी पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है।    नई परिवहन सुविधाएं लागू होने के बाद सोनीपत न केवल दिल्ली का उपनगर रहेगा, बल्कि एक विकसित, सुविधायुक्त और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार आधुनिक शहर के रूप में उभरेगा। ये परियोजनाएं हरियाणा के सोनीपत जिले को चीन और जापान की तरह एक आधुनिक मल्टी-मॉडल परिवहन केंद्र में बदल देंगी, जिससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।   

हरियाणा के इस जिले में मौजूद है दूसरा ‘ताजमहल’, इतिहास ऐसा कि सोचने पर मजबूर कर दे

चंडीगढ़  हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के थानेसर शहर में स्थित शेख चिल्ली का मकबरा एक प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल है। इसकी बनावट और स्थापत्य कला इतनी सुंदर है कि इसे अक्सर "हरियाणा का ताजमहल" कहा जाता है। मकबरे के निर्माण में प्रयुक्त पत्थर और स्थापत्य शैली आगरा के ताजमहल से मिलती-जुलती मानी जाती है। इस मकबरे का निर्माण मुगल राजकुमार दाराशिकोह ने प्रसिद्ध सूफी संत शेख चिल्ली की याद में करवाया था। इसका निर्माण कार्य लगभग 1650 ई. के आसपास पूरा हुआ। दाराशिकोह, जो बादशाह शाहजहाँ का बड़ा बेटा था, शेख चिल्ली को अपना आध्यात्मिक गुरु मानता था। यह मकबरा उसकी श्रद्धा और सूफी परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। मकबरा हर्ष के टीले के पूर्वी किनारे पर स्थित है, जो स्वयं एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल रहा है।   इतिहासकारों के अनुसार, शेख चिल्ली मूल रूप से ईरान से आए थे और भारत आकर उन्होंने कुरुक्षेत्र में जलालुद्दीन साहब साबरी से भेंट की। जलालुद्दीन की आध्यात्मिक प्रसिद्धि से प्रभावित होकर शेख चिल्ली ने यहीं रहना प्रारंभ कर दिया और यहीं उनका जीवन भी समाप्त हुआ। उनकी मृत्यु के बाद, उनके शिष्य ने उनकी याद में इस भव्य मकबरे का निर्माण करवाया। समय के साथ यह ऐतिहासिक स्थल गुमनामी की ओर बढ़ने लगा, लेकिन बाद में इसे भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) द्वारा संरक्षित किया गया। विभाग ने इसकी मरम्मत और संरक्षण का कार्य कर इसे दोबारा जीवित किया। आज यह न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए भी अध्ययन का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत बन गया है।   शेख चिल्ली का मकबरा हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसकी अद्वितीय मुग़ल शैली की वास्तुकला, सुंदर नक़्क़ाशी, और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व इसे एक अनमोल ऐतिहासिक धरोहर बनाते हैं। घूमने की सलाह     स्थान: थानेसर, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)     प्रसिद्धि: मुग़ल स्थापत्य, सूफी विरासत, पुरातत्वीय महत्व     खुलने का समय: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक     प्रवेश: पुरातत्व विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार  

नायब सरकार का VIP ट्रीटमेंट? निर्दलीय विधायक की 314 मांगें, 60% कामों को मिली हरी झंडी

बहादुरगढ़ हरियाणा की नायब सरकार बहादुरगढ़ के निर्दलीय विधायक पर खूब मेहरबान है। निर्दलीय विधायक राजेश जून मुख्यमंत्री के सामने जो भी डिमांड रखते हैं वो हर डिमांड लगभग पूरी हो चुकी है। एक साल में विधायक राजेश जून ने सरकार के सामने अलग अलग विभागों के 314 कामों की डिमांड रखी थी जिसमें से 60 प्रतिशत से ज्यादा मांगे पूरी हो चुकी है। उन पर काम करने के लिए करीबन 400 करोड़ रूप्ए भी मंजूर हो गए है। एक साल के कार्यकाल पर चर्चा करते हुए विधायक राजेश जून ने बताया कि उन्होंने हल्के के हर गांव को 60 लाख से लेकर डेढ़ करोड़ रूप्ए तक विकास कार्यों के लिए दिलवाए हैं। उन्होंने कहा कि ये आवंटन गांव की जनसंख्या के आधार पर है किसी में कम तो किसी में ज्यादा लेकिन कम से कम 60 लाख हर गांव को मिल चुके हैं। राजेश जून ने बताया कि बहादुरगढ़ शहर के सैक्टरों की सड़कों के निर्माण के लिए 18 करोड़ रूप्ए।सीसीटीवी कैमरों के लिए 12 करोड़ और पीने के पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नहरी क्षमता विकास के लिए भी 14 करोड़ रूप्ए मंजूर हो चुके हैं। राजेश जून का कहना है कि पैसा आ चुका है और जल्द ही सारे काम भी शुरू हो जाएंगे। उन्होंनें कहा कि बहादुरगढ़ हल्के का नसीब अच्छा है जो उन्हे विधायक बनाया है और एक निर्दलीय विधायक चुने हुए विधायकों से ज्यादा काम अपने हल्के में करके दिखाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सैनी का उनपर पूरा भरोसा और आर्शिवाद है। राजेश जून ने शहर के छोटूराम नगर में गलियों के निर्माण कार्य की शुरूवात भी करवाई है जहां पहुंचने पर लोगों ने उनका जोरदार स्वागत भी किया।

मानवता शर्मसार: भाइयों ने मिलकर युवती को बनाया दरिंदगी का शिकार, पंजाब में गैंगरेप

चंडीगढ़   पंजाब के लुधियाना में हरियाणा की युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घिनौनी वारदात हुई है। लुधियाना के शिमलापुरी के बसंत एवेन्यू सतजोत नगर इलाके में दो भाइयों सहित तीन युवकों ने युवती को घर बुलाया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इतना ही नहीं आरोपियों ने युवती के साथ मारपीट की और उसे धमकियां दी कि अगर वह किसी को इसके बारे में बताएगी तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।    पीड़िता की शिकायत के मुताबिक वह आरोपियों को पहले से किसी के जरिए जानती थी। आरोपियों ने उसे घर मिलने के लिए बुलाया। वहां आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपियों ने उसे धमकियां दी और वहां से मारपीट कर भगा दिया।  इसके बाद डरी सहमी युवती हरियाणा के फरीदाबाद अपने परिवार वालों के पास चली गई। वहां उसने यह सारी जानकारी परिवार को दी। पीड़िता के परिवार वालों ने हरियाणा पुलिस से संपर्क किया। फरीदाबाद पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर तरनपाल सिंह मोंगा, उसके भाई दविंदरपाल सिंह मोंगा और गुरकरण सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कर लुधियाना पुलिस को भेज दी। कमिश्नरेट के थाना शिमलापुरी पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया। हालांकि यह वारदात सितंबर महीने की बताई जा रही है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।   जांच अधिकारी सलविंदर पाल सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है। पीड़िता की मेडिकल जांच करवाई जाएगी। जल्द ही आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

HSSC बायोमेट्रिक विवाद पर नया खुलासा, हिम्मत सिंह ने अभ्यर्थियों को दी अहम जानकारी

हरियाणा  हरियाणा CET 2025 ग्रुप C परीक्षा के दौरान जिन अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक किसी कारण नहीं नहीं हो पाई थी। हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन ने उन अभ्यर्थियों को राहत दी है। इसको लेकर चेयरमैन हिम्मत सिंह ने अपने सोशल मीडिया X पर पोस्ट शेयर की है।  उन्होंने पोस्ट में लिखा कि जिसमें उन्होंने लिखा कि जिन अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं हो पाया है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। आयोग इस विषय पर काम कर रहा है। बहुत जल्द सभी को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूर्ण कराने के लिए निर्धारित समय के बारे में सूचना दी जाएगी। उन्होंने पोस्ट में यह भी लिखा है कि 26 एवं 27 जुलाई को संपन्न हुए CET 2025 ग्रुप C परीक्षा के दौरान जिन अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं हो पाए थे, उन्होंने फोन कॉल, मैसेज और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी क्वायरीज आयोग को भेजी हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों को कहा कि अफवाहों पर ध्यान न देने और आयोग की आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।  

सरकारी–प्राइवेट अस्पतालों के लिए बड़ी गाइडलाइन जारी, बकाया बिल विवाद पर सरकार का स्पष्ट आदेश

चंडीगढ़  पंजाब में अब निजी या सरकारी अस्पताल बकाया बिल के कारण किसी भी शव को परिजनों को सौंपने से इनकार नहीं कर सकेंगे। साथ ही, अज्ञात शव को 72 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में रखने की भी अनुमति नहीं होगी। पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पंजाब में मृतकों की गरिमा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि मृतक से संबंधित कोई बकाया राशि होती भी है, तो अस्पताल बाद में कानूनी तरीके से बिल की वसूली कर सकता है, लेकिन शव को बिना देरी किए परिजनों को सौंपना अनिवार्य होगा। बिल का भुगतान न करने की स्थिति में परिजनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मानवाधिकार आयोग ने अस्पतालों में मरीजों के बेड की संख्या को ध्यान में रखते हुए शवों की संभाल से संबंधित विशेष प्रोटोकॉल भी तय किए हैं। आयोग के संज्ञान में फगवाड़ा अस्पताल का एक मामला भी आया था, जहां शवों को कूड़ा ले जाने वाले वाहन में ले जाया गया था। सभी अस्पतालों को करनी होगी मॉर्चरी वैन की व्यवस्था आयोग के सदस्य जतिंदर सिंह शंटी ने सभी अस्पतालों को मॉर्चरी वैन (शव वाहन) की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अस्पतालों और अन्य स्थानों पर मॉर्चरी वैन से जुड़े संपर्क नंबर और नि:शुल्क अंतिम संस्कार योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा। इस जानकारी में मॉर्चरी वैन चालकों के संपर्क नंबर और लावारिस शवों के प्रबंधन के लिए हेल्पडेस्क नंबर शामिल होंगे। आयोग ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि जब अस्पताल में कोई लावारिस शव होता है, तो उसकी पहचान कराने के नाम पर अस्पताल और पुलिस उसे लंबे समय तक मॉर्चरी में रख देते हैं। अब भविष्य में ऐसा नहीं किया जाएगा। कोई भी अस्पताल 72 घंटे से अधिक समय तक लावारिस शव नहीं रख सकेगा। ऐसे लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए मॉर्चरी वैन नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं जिन परिवारों के पास अंतिम संस्कार की व्यवस्था नहीं है, उनकी सहायता अस्पताल द्वारा की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ध्यान में रखते हुए अस्पताल इस जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकेंगे।  

हड़ताल नहीं चलेगी! हरियाणा सरकार ने डॉक्टरों पर लगाया 6 महीने का एस्मा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने डॉक्टरों की हड़ताल पर सख्त कार्रवाई करते हुए प्रदेश में अगले 6 महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लगा दिया है. सरकार ने हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1974 (1974 का 40) की धारा 4 (क) की उप-धारा (1) के तहत डॉक्टरों की हड़ताल पर रोक लगा दी है. सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि एस्मा 8 दिसंबर से लागू होगा और अगले छह महीने की अवधि के लिए स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक और कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे. आदेश में कहा गया है कि हरियाणा के राज्यपाल ने भी इस बात को माना है कि गंभीर रूप से बीमार और अन्य मरीजों की देखभाल सुनिश्चित करने और जन साधारण के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का निर्वाध परिदान बनाए रखने के लिए कोई भी हड़ताल सार्वजनिक स्वास्थ्य और समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक सेवाओं पर गंभीर रूप से असर डालेगी. 6 महीने तक डॉक्टरों की हड़ताल पर रोक आदेश में आगे कहा गया है कि अब हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1974 (1974 का 40) की धारा 4 (क) की उप धारा (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते राज्य में एस्मा लगाया जा रहा है जो कि अगले छह महीने तक डॉक्टरों के किसी भी प्रकार के हड़ताल पर रोक लगाता है.   दरअसल, हरियाणा में सभी सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के डॉक्टरों ने मंगलवार को प्रमोशन से जुड़े मुद्दे को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया. डॉक्टरों के इस ऐलान से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के बेपटरी हो जाने का अंदेशा था. हरियाणा के चिकित्सा अधिकारी राज्य स्वास्थ्य विभाग में शामिल होने के बाद प्रमोशन के सीमित अवसरों से निराश हैं. हड़ताल को लेकर डॉक्टरों का क्या कहना था? हड़ताल पर जाने वाले डॉक्टरों का कहना था कि उनके अधिकतर सहयोगियों को अपने पूरे करियर में केवल एक ही बार प्रमोशन मिलती है. कुछ डॉक्टरों की यह भी शिकायत थी कि वर्तमान नीति के तहत 75 फीसदी एसएमओ पद पदोन्नति के जरिए भरे जाते हैं जबकि 25 फीसदी सीटें सीधी भर्ती के लिए आरक्षित हैं. डॉक्टरों का तर्क है कि सीधी भर्ती वाले एसएमओ अपने करियर में बहुत आगे बढ़ जाते हैं, कुछ तो महानिदेशक के पद तक पहुंच जाते हैं, जबकि सेवारत डॉक्टर स्थिर रहते हैं.  

रेलू राम और उनके परिवार के 8 सदस्यों की हत्या: आधी रात को बेटी-दामाद ने फार्म हाउस में फैला दीं लाशें

हिसार. 23 अगस्त 2001. अगस्त का महीना और बरसात का सीजन. रात के 12 बजे रहे थे. हालांकि, अब तक पूर्व विधायक रेलू राम और उनकी पत्नी सोए नहीं थे. अपने फार्म हाउस में दोनों पति पत्नी के बीच किसी बात पर बहसबाजी औऱ चर्चा हो रही थी. किसी को अंदेशा नहीं था कि यह उनकी जिदंगी की आखिरी रात होगी. फिर उसी रात को घर में रेलू राम की बेटी की एंट्री हुई और फिर जो कुछ हुआ, वो डराने वाला था. एक के बाद एक, कुल आठ लोगों का लाशें घर में बिछी हुई थी. फर्श पर मानों खून की नदियां बह रही थी. जैसे ही आठ लोगों की हत्या की खबर फैली तो पूरा इलाका हैरान रह गया. दरअसल, यह कहानी हिसार के बरवाला के पूर्व विधायक रेलू राम और उनके परिवार के कुल आठ लोगों की हत्या से जुड़ी है. इस मामले में अब हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया के दामाद संजीव कुमार और बेटी सोनिया और की रिहाई को लेकर याचिका को स्वीकार कर लिया है और इस वजह से यह हत्याकांड फिर से चर्चा में आ गया है. रेलू राम की बेटी सोनिया ने संजीव के साथ लव मैरिज की थी. हालांकि, परिवार इस शादी के खिलाफ था. सोनिया जूडो खिलाड़ी थी और संजीव के साथ उसकी मुलाकात भी ट्रेनिंग के दौरान हुई थी. क्यों की गई थी हिसार के बरवाला के पूर्व विधायक रेलू राम समेत 8 लोगों की हत्या पूर्व विधायक रेलू राम पुनिय़ा की बेटी सोनिया अपने पिता की संपति में हिस्सा चाहती थी. लेकिन वह उन्हें प्रॉपर्टी देने के इच्छुक नहीं थे. 23 अगस्त को सोनिया का जन्मदिन था और वह पति के साथ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हिसार जा रही थी. इस दौरान सोनिया को लितानी गांव में पिता के फार्महाउस पहुंचते पहुंचते करीब रात के 12 बज गए थे. जब पर घर में पहंची तो देखा कि उसके पिता और मां में कहासुनी हो रही है और प्रॉपर्टी को लेकर ही वह झगड़ रहे थे. सोनिया ने देखा कि उनके पिता अपनी संपति में उन्हें हिस्सा देने के बिलकुल खिलाफ थे. बस फिर क्या था, सोनिया ने अपने पति के साथ मिलकर पिता और पूरे परिवार को मारने की प्लानिंग बनाई. सोनिया और संजीव ने अपनी पिता रेलू राम पूनिया (50), मां कृष्णा देवी (41), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियों शिवानी (2) और प्रियंका (14) के अलावा, 45 दिन की प्रीति की रॉड से बेरहमी से हत्या कर दी. सोनिया और संजीव ने घर में आठ लांशें बिछा दी. हालांकि, वह कार लेकर वहां से फरार गई और सोचा कि अब खुद की जिदंगी को भी खत्म कर देगी. लेकिन ऐसा नहीं कर पाई. सोनिया फिर दोबारा घर लौटी और जहर की आधी शीशी पीकर जान देने के कोशिश की. लेकिन, वह अपनी कोशिश में कामयाब नहीं हुई. बाद में पुलिस ने दोनों पति पत्नी को गिरफ्तार कर लिया था. तीन साल तक कोर्ट में चला था केस और हुई थी फांसी की सजा फिर तीन साल केस चला और 2004 में हिसार की अदालत ने संजीव और सोनिया को फांसी की सजा सुनाई. सजा के खिलाफ दोनों सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन राहत नहीं मिली और 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा करो बरकरार रखा. हिसार पुलिस की जांच में पता चला था कि इस नरसंहार की मुख्य वजह जमीन-जायदाद का बंटावारा ही था. इस पूरे हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था. क्योंकि अब प्रदेश में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जिसमें एकसाथ आठ लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया हो. सोनिया अपने पति के साथ जूडो एकादमी खोलना चाहती थी औऱ इसलिए पिता से थोड़ी बहुत संपति मांग रही थी.  सोनिया और संजीव ने पहले गोली मारने का प्लान था सोनिया और संजीव ने पहले प्लान बनाया था कि पूरे परिवार को गोलियां मारेंगे. प्लान के अनुसार, सोनिया के जन्मदिन की पार्टी के बहाने पटाखे के शोर में गोलियां चलेंगे. हालांकि, फिर उन्हें लगा कि पटाखों के शोर से पिता और मां की नींद टूट सकती है. इसलिए लोहे की रॉड से हत्या की गई. कौन थे हिसार के बरवाला के पूर्व विधायक रेलू राम पुनिया हिसार से पूर्व विधायक रेलू राम की कहानी बेहर रोचक है. उन्हें कामयाबी के रास्ते में जाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी थी. रेलू राम का बचपन काफी गरीबी में गुजरा था और वह अपने परिवार का गुजारा करने के लिए लोगों की भैंसें चराते थे. हालांकि, बाद में वह नौकरी की तराल में दिल्ली चले गए. यहां पर उन्हें ट्रकों की धुलाई और साफ सफाई का काम मिला. यहां पर एक सेठ के पास नौकरी के दौरान रेलू राम की जिदंगी को नई दिशा मिली और उन्हें कच्चे तेल का कारोबार शुरू कर दिया. यहीं से रेलू राम की जिदंगी पलट गई और उन्होंने बड़े पैमानी पर पैसा बना. ऐस पैसे से उन्होंने बड़े पैमाने पर जमीन फरीदाबाद और दिल्ली में कोठी के अलावा, कई दुकानें खरीदीं. गौर रहे कि रेलू राम ने दो शादियां की थी. रेलू राम ने आजाद लड़ा था चुनाव जानकारी के अनुसार, साल 1996 में हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने जा रहे थे. इस बीच रेलू राम ने चुनाव लड़ने का मन बनाया. किसी भी पार्टी से टिकट नहीं मिला तो रेलू राम पूनिया ने बरवाला से आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया. उन्हें चुनाव में रेलगाड़ी का चुनाव चिह्न मिला. बताते हैं कि उस चुनाव में ‘रेलू राम की रेल चलेगी, बिन पानी बिन तेल चलेगी.’ नारा खूब चला. इस चुनाव में रेलू राम की जीत हुई और फिर उन्होंने हिसार में 2 एकड़ जमीन में कोठी बनवाई. कहते हैं कि इस कोठी के दूसरे फ्लोर तक कारें जाती थीं. पहले दी थी फांसी फिर हाईकोर्ट ने बदला फैसला हिसार कोर्ट ने इस मामले में दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन 2025 में हाईकोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में बदल दिया. हालांकि, मामला फिर सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसले को सही माना और फांसी की सजा को बरकार रखा. 23 अगस्त 2007 … Read more

गाय को चिकन मोमोज खिलाने वाला यूट्यूबर गुरुग्राम में गिरफ्तार, पैसों के लालच में किया था काम

गुरुग्राम गुरुग्राम में गाय को चिकन मोमोज खिलाते वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी यूट्यूबर को पकड़ लिया गया है। हिंदू संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़कर पहले पीटा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी युवक का कहना है कि कुछ लोगों ने उसका ब्रेनवॉश किया था और पैसों का लालच देकर गाय को मांस खिलाने को कहा था। लड़के ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और आगे ऐसा नहीं करने की बात कही। पुलिस ने उसके खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में केस दर्ज किया है। आरोपी की पहचान 28 साल के ऋतिक चंदाना के रूप में हुई है जो न्यू कॉलोनी का रहने वाला है। चंदाना कई सोशल मीडिया चैनल्स चलाता है। उसके पिता दुकान चलाते हैं और मां एक निजी अस्पताल में डॉक्टर है। डीयू से पढ़ाई इंग्लिश ऑनर्स में बीए करने वाले आरोपी का कहना है कि उसे ऐसा करने के लिए लालच दिया गया था। जानकारी के अनुसार आरोपी 2 दिसंबर को सेक्टर-56 स्थित हुड्डा मार्केट में रेहड़ी पर चिकन मोमोज खा रहा था। उसने कुछ मोमोज खाए और बाकी वहां खड़ी एक गाय को खिला दिए। उसने इसका वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बारे में जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठन सक्रिय हो गए और उन्होंने आरोपी युवक की पहचान कर सोमवार को न्यू कॉलोनी से पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी युवक को सेक्टर-56 थाने में लेकर गए और शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने फॉलोअर्स के कहने पर और पैसे के लालच में आकर जानवर को चिकन मोमोज खिलाए थे। जांच अधिकारी इंद्र ने बताया कि मामला दर्ज कर आरोपी को शामिल जांच कर जमानत पर छोड़ दिया गया है। आरोपी युवक ने पकड़े जाने के बाद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के सामने कहा कि कुछ लोगों ने उसका ब्रेनवॉश किया था। उसको पैसों का लालच देकर ऐसा करने को कहा गया था। पुलिस लड़के के आरोपों की भी जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या सच में उसे किसी ने ऐसा निर्देश दिया था।

Haryana Govt का बड़ा फैसला: पुलिस भर्ती नियम बदले, NCC उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी

चंडीगढ़  हरियाणा में पुलिस के करीब छह हजार पदों पर जल्द शुरू होने वाली भर्ती प्रक्रिया से पहले राज्य सरकार ने भर्ती नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। कॉन्स्टेबल और सब-इंस्पेक्टर दोनों पदों पर अब NCC प्रमाणपत्र धारकों को अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। सरकार के अनुसार, एनसीसी ‘A’ सर्टिफिकेट वालों को 1 अंक, ‘B’ सर्टिफिकेट पर 2 अंक और ‘C’ सर्टिफिकेट रखने वालों को 3 अंकों का वेटेज दिया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में संकेत दिए थे कि पुलिस भर्ती जल्द शुरू होगी। इसी क्रम में उनकी अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पंजाब पुलिस नियम 1934 में संशोधन को मंजूरी दी गई। ये बदलाव पंजाब पुलिस (हरियाणा संशोधन) नियम 2025 के रूप में अधिसूचित किए जाएंगे। संशोधन के तहत नियम 12.16 में बदलाव करके यह तय किया गया है कि PMT और PST पास करने वाले उम्मीदवारों में से विज्ञापित पदों की संख्या के 10 गुना उम्मीदवारों को नॉलेज टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा।   नॉलेज टेस्ट पूरी तरह वस्तुनिष्ठ व बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित होगा, जिसमें उम्मीदवारों को 97% वेटेज दिया जाएगा। यह परीक्षा हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में होगी। प्रश्न पत्र में सामान्य अध्ययन, विज्ञान, करंट अफेयर्स, तर्कशक्ति, गणित, कृषि, पशुपालन और संबंधित ट्रेड्स से जुड़े प्रश्न शामिल होंगे। प्रश्नों में कम से कम 10% हिस्सा बेसिक कंप्यूटर ज्ञान और कम से कम 20% हिस्सा हरियाणा से जुड़े विषयों पर आधारित होगा। कॉन्स्टेबल के लिए परीक्षा का स्तर 10+2 और सब-इंस्पेक्टर के लिए स्नातक स्तर का रहेगा। सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए नॉलेज टेस्ट में 50% अंक अनिवार्य होंगे, जबकि आरक्षित श्रेणी वाले उम्मीदवारों को 10% की छूट दी जाएगी, जिसके तहत उन्हें कम से कम 40% अंक लाने होंगे।  कैबिनेट बैठक में हरियाणा राज्य अभियोजन विभाग की विधिक सेवा (समूह क) नियम 2013 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। यह बदलाव नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के अनुरूप अभियोजन ढांचे को मजबूत करेगा। BNSS के अनुसार राज्य और जिला स्तर पर लोक अभियोजकों और अभियोजन निदेशालय में कई नई जिम्मेदारियां जोड़ी गई हैं। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार पहले ही 48 नए पदों को मंजूरी दे चुकी है, जिनमें 24 उप निदेशक और 24 सहायक निदेशक के पद शामिल हैं।