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मंदार पर्वत छेड़छाड़ केस में 3 युवक हिरासत में, वायरल वीडियो से खुला ढाई महीने पुराना मामला

 बांका बिहार के बांका जिले में मंदार पर्वत पर लड़की से सरेआम छेड़खानी के मामले में पुलिस ने 3 युवकों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि पीड़िता अपने दो दोस्तों के साथ मंदार पर्वत घूमने गई थी। उसी दौरान मनचलों ने उनके साथ बदसलूकी की। आरोपियों ने पीड़िता से फोनपे पर 1500 रुपये जबरन ऑनलाइन ट्रांसफर भी करवाए। रुपये लेने के बाद ही लड़की और उसके दोस्तों को वहां से जाने दिया गया। मंदार पर्वत पर छेड़छाड़ का वीडियो 3 दिन पहले वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया था। घटना ढाई महीने पहले की बताई जा रही है। बांका के एसपी अमितेश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि यह वीडियो 22 सितंबर को बौंसी थाना पुलिस की नजर में आया था। वायरल वीडियो में दृश्य मंदार पर्वत का लग रहा था। इसके बाद बौंसी थानाध्यक्ष ने इसकी जांच शुरू की। पुलिस टीम मंदार पर्वत पहुंची और जांच के दौरान वीडियो वाली जगह पहाड़ की ही मिली। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी। बाराहाट के रहने वाले हैं आरोपी एसपी ने कहा कि पुलिस ने वायरल वीडियो में नजर आ रहे लोगों की पहचान में जुट गई। इसी दौरान गुरुवार रात को फुटेज में दिख रहे तीन युवकों के बारे में जानकारी मिल गई। ये तीनों बाराहाट थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस ने तीनों युवकों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। एसपी ने पीड़िता का बयान दर्ज करवाया एसपी ने बताया कि घटना के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उन्होंने खुद पीड़िता से बात की। उसका बयान दर्ज कराया गया है। पीड़िता ने भी पुलिस पर पूरा भरोसा जताया है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस घटना में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास भी किए जा रहे हैं। 3 जुलाई की घटना, आरोपियों के नाम बांका पुलिस का कहना है कि यह घटना 3 जुलाई 2026 की है। पीड़िता अपने दो दोस्तों के साथ मंदार पर्वत घूमने गई थी। वायरल वीडियो में अब्दुल्ला, नीतीश कुमार राय और विकास कुमार नाम के लड़के उनके साथ अभद्र व्यवहार करते नजर आए। आरोपियों ने पीड़िता का हाथ पकड़ा और गाली-गलौज भी की। इन धाराओं में मुकदमा मंदार पर्वत पर लड़की से छेड़छाड़ के आरोप में बौंसी थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74, 75, 76, 3 (5) और आईटी एक्ट की धारा 66ई, 67ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है। बता दें कि मंदार पर्वत ऐतिहासिक और प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। यह हिंदू, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के अनुयायियों के लिए पवित्र स्थल माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन को पहुंचते हैं। मंदार पर्वत पर जैन और हिंदू मंदिर भी बने हुए हैं। ऐसे में इस जगह पर लड़की से छेड़खानी की घटना ने शर्मसार कर दिया है।

योगी सरकार की चार सदस्यीय टीम परखेगी आयुष्मान अस्पताल की सुविधाओं की हकीकत

लखनऊ योगी सरकार ने आयुष्मान के कार्ड धारकों को बेहतर और सुरक्षित इलाज देने के लिए योजना से जुड़े अस्पतालों की निगरानी बढ़ा दी है। योजना के नियमों और तय मानकों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिये स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) द्वारा चार सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम ने योजना से जुड़े अस्पतालों का औचक निरीक्षण भी शुरू कर दिया है।   चार सदस्यीय टीम ने लखनऊ के आयुष्मान के अस्पतालों का किया औचक निरीक्षण  साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योगी सरकार आयुष्मान के लाभार्थियों को योजना का लाभ गुणवत्तापूर्ण उपलब्ध कराने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर योजना से जुड़े अस्पतालों में सुविधाओं को परखने के लिए औचक निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चार सदस्यीय टीम ने लखनऊ में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े चिकित्सालयों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सालयों में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन, चिकित्सालय के कर्मचारियों के व्यवहार, स्वच्छता व्यवस्था तथा बायोमेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन एवं निस्तारण की स्थिति का परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली गई। टीम ने अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और आईसीयू में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के लिए अपनाई जा रही व्यवस्था की भी जांच की। यह देखा गया कि इन जगहों पर तय नियमों के अनुसार साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है या नहीं।निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी जानकारी भी देखी गई। अस्पताल में योजना के बारे में जानकारी देने वाली सामग्री लगी है या नहीं और मरीजों को योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं के बारे में सही जानकारी दी जा रही है या नहीं, इसकी भी जांच की गई। मरीजों से अच्छा व्यवहार जरूरी साचीज की सीईओ ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को योजना के नियमों का पालन करना जरूरी है। यह योगी सरकार की प्राथमिकताओं में है। अस्पताल में आने वाले लाभार्थियों के साथ अच्छा व्यवहार करना, उन्हे साफ और सुरक्षित वातावरण देना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान अगर किसी अस्पताल में तय मानकों का पालन नहीं पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सभी आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों को योजना के नियमों और तय मानकों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों को साफ-सफाई, मरीजों के साथ व्यवहार, कर्मचारियों की उपलब्धता, बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण, ओटी और आईसीयू की व्यवस्था तथा आयुष्मान योजना की जानकारी मरीजों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज की संवाहक और नौनिहालों के भविष्य की आधारशिला : राज्यमंत्री गौर

भोपाल  सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में संचालित 'सेवा से संकल्प' (सेवा पखवाड़ा) अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र स्थित बागसेवनिया के अमराई (आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 735) में 'आंगन मिलन सेवा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने आंगनबाड़ी केंद्र का सूक्ष्म निरीक्षण किया, एवं नौनिहालों से संवाद कर उनकी रचनात्मक गतिविधियों की जानकारी ली तथा परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलता है मातृवत् स्नेह और संस्कार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौर ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज के वंचित और जरूरतमंद बच्चों के सर्वांगीण विकास, शिक्षा एवं पोषण का पावन दायित्व निष्ठापूर्वक निभा रही हैं। ये केंद्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यहाँ बच्चों को शिक्षा और संस्कार के साथ माँ की ममता का भाव भी प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि 'सेवा से संकल्प अभियान' के माध्यम से इन समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मानित करना स्वयं में अत्यंत गौरव एवं संतोष का विषय है। उत्कृष्ट सेवा के लिए कार्यकर्ताओं का हुआ सम्मान कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र की उत्कृष्ट सेवाएं देने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को उनके अनुकरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अतिथियों ने बच्चों द्वारा निर्मित चित्रकारियों एवं गतिविधियों की सराहना करते हुए उन्हें स्नेह उपहार वितरित किए। इस अवसर पर राज्यमंत्री  प्रतिमा बागरी,  ज्योति सिंह,  अश्विनी परांजपे,  सपना वर्मा,  मोना सुस्तानी,  प्रज्ञा त्रिपाठी,  मोनिका ठाकुर,  शीला पाटीदार सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दिलाई पद एवं गोपनीयता की शपथ

रायपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों एवं सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने लोक कलाकारों की सुविधाओं और उनकी कला को आगे बढ़ाने के लिए स्टूडियो निर्माण के संबंध में आश्वासन भी दिया। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक कला, संस्कृति और परंपराओं से है। लोक कलाकार अपनी प्रतिभा और कला के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि लोक कला को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कलाकारों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कलाकारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कलाकारों के लिए स्टूडियो निर्माण की दिशा में आवश्यक सहयोग और पहल का आश्वासन दिया। स्टूडियो उपलब्ध होने से कलाकारों को अपनी कला के अभ्यास, प्रशिक्षण, रिकॉर्डिंग और प्रस्तुतियों की तैयारी के लिए बेहतर सुविधा मिल सकेगी।  इस दौरान संघ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने तथा छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी,  मनीराम साहू, संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, बड़ी संख्या में लोक कलाकार और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

राजा-महाराजाओं के दौर से चली आ रही परंपरा, इटखोरी टाल में आज भी खास तरीके से होती है पूजा

इटखोरी (चतरा)  इटखोरी के टाल पर की राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक परंपरा आज भी जीवंत है। लगभग ढाई सौ साल पहले इस ऐतिहासिक पूजा की शुरुआत इटखोरी टाल के राजा हरि नारायण सिंह ने की थी। तब से यह सुचारू रूप से यहाx होती आ रही है। वर्तमान में इटखोरी के ग्रामीण इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। लगभग ढाई सौ साल पहले टाल पर दुर्गा पूजा का आयोजन शुरू होने के बाद धीरे-धीरे पितीज, गुल्ली, करनी, परसौनी, परोका और इटखोरी बाजार में भी दुर्गा पूजा का आयोजन होने लगा। 1920 के बाद से मंदिर में वैष्णवी पूजा आरंभ हालांकि अन्य जगहों पर पूजा शुरू होने के बावजूद टाल की दुर्गा पूजा से प्रखंड के लोगों की श्रद्धा और आस्था आज भी गहराई से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि नवरात्र के पावन अवसर पर प्रखंड के अधिकांश गांवों के लोग टाल पर विराजमान मां दुर्गा का दर्शन करने आवश्यक रूप से आते हैं। पूर्व में यहां राजा की ओर से बलि प्रथा के साथ पूजा की जाती थी, लेकिन वर्ष 1920 के बाद से मंदिर में वैष्णवी पूजा आरंभ हो गई। पुरानी परंपरा को कायम रखने के लिए नवमी के दिन भैंसे के स्थान पर गन्ने और भुआ कोहड़े की बलि दी जाने लगी। कलश स्थापना के लिए पुजारी राजगढ़ से एक पैर पर लाते हैं मिट्टी इस ऐतिहासिक पूजा की एक खास बात नवरात्र के पहले दिन की कलश स्थापना विधि है। कलश स्थापना से पूर्व आज भी राजा हरि नारायण सिंह के राजगढ़ से पारंपरिक रूप से मिट्टी लाई जाती है। पुजारी यहां से एक पैर पर मिट्टी ले जाते हैं। जिसके बाद ही कलश स्थापना की विधि संपन्न होती है। इटखोरी टाल के राजा ने इस दुर्गा मंडप को गांव के समीप एक ऊंचे टीले पर स्थापित किया था। ऊंचे स्थान पर होने के कारण वहां का वातावरण काफी खुशनुमा रहता है। यहां कलश स्थापना के दिन से ही सुबह नवरात्र कथा और रात में महाआरती शुरू हो जाती है। आरती में सैकड़ों लोग जमा होकर भाग लेते हैं और महिलाएं देर रात तक देवी माँ के गीत गाती हैं। इटखोरी टाल को ऐतिहासिक पूजा स्थल होने का गौरव प्राप्त है।

रिश्वत-म्यूटेशन की शिकायतों से घिरे अंचल, लोकायुक्त के पास हर माह पहुंच रहीं 15-20 शिकायतें

रांची झारखंड में अंचलों में सर्वाधिक भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध झारखंड की सशक्त एजेंसी लोकायुक्त व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के पास अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतों की भरमार है। रिश्वत मांगने, बिना रिश्वत के म्यूटेशन नहीं करने, बेवजह लोगों को परेशान करने के मामले पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि छोटे-मोटे मामलों में भी अंचल में काम नहीं होने पर वरीय पदाधिकारियों के पास उनकी शिकायतें पहुंच रहीं हैं। अभी दो दिन पहले ही भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ही झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार दीक्षित तथा तत्कालीन कार्यालय लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इतना ही नहीं, तत्कालीन अंचलाधिकारी डाॅ. श्वेता वर्मा व अन्य आरोपितों के विरुद्ध जांच तेज है। गत वर्ष रांची के चुटिया थाने में तीन अंचलाधिकारी रवींद्र कुमार, अरविंद कुमार ओझा व सुमन कुमार सौरभ के अलावा अंचल निरीक्षक कमलकांत वर्मा, अनिल कुमार गुप्ता व राजस्व कर्मचारी सुनील मिंज व मनोरथ भगत के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पूरा मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा था। लोकायुक्त के यहां सर्वाधिक शिकायतें अंचलों से संबंधित इसी वर्ष अप्रैल महीने में लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने पदभार ग्रहण किया है। उनके पदभार ग्रहण के बाद से भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार शिकायतें लोकायुक्त कार्यालय में पहुंच रहीं हैं। प्रत्येक माह करीब 15 से 20 शिकायतें ऐसी हैं, जो सिर्फ जमीन से संबंधित हैं और अंचलों में भ्रष्टाचार से जुड़ी हैं। कुछ तो ऐसी शिकायतें हैं, जिनमें आवेदक का कहना है कि वह जिस जमीन पर घर बनाकर रह रहा है, उसके म्यूटेशन आवेदन को अंचल ने यह लिखकर खारिज कर दिया कि आवेदक का जमीन पर दखल कब्जा नहीं है। मतलब रिश्वत नहीं देने पर राजस्व कर्मचारी ने बिना भौतिक सत्यापन के फर्जी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अंचलाधिकारी ने म्यूटेशन को अस्वीकृत कर दिया। लोकायुक्त व एसीबी में ऐसी शिकायतों की भरमार है। अंचलों में भ्रष्टाचार के कुछ प्रमुख मामले बुढ़मू अंचल : एसीबी ने रांची के बुढ़मू अंचलाधिकारी सच्चिदानंद कुमार वर्मा व राजस्व उप निरीक्षक सह राजस्व कर्मचारी राजेश किशोर रवि व राजेश किशोर रवि के भाई गौतम किशोर को इसी वर्ष जुलाई महीने में गिरफ्तार किया था। तीनों पर दाखिल खारिज के बदले रिश्वत मांगने व वसूलने का आरोप है। जांच के पुष्टि के बाद एसीबी ने उनके विरुद्ध चार्जशीट भी दाखिल की थी। सदर अंचल चतरा  चतरा सदर अंचल में 15 सितंबर को एसीबी ने दाखिल खारिज के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत लेते वहां के राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को एसीबी ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उसने दाखिल खारिज के लिए 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। सदर अंचल रांची एसीबी ने रांची के सदर अंचल के अंचलाधिकारी मुंशी राम को दो जनवरी 2025 को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उनपर जमीन संबंधित एक काम के निष्पादन के लिए रिश्वत मांगने का आरोप था। एसीबी उनके विरुद्ध चार्जशीट कर चुकी है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वे 37 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए थे और उनके घर से 11.42 लाख रुपये नकदी की बरामदगी हुई थी। सिल्ली अंचल : एसीबी रांची की टीम ने रांची के सिल्ली अंचल कार्यालय के अमीन गणेश महतो को आठ हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में वरीय पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। नामकुम अंचल : एसीबी ने नामकुम अंचल के पूर्व अंचलाधिकारी मनोज कुमार, तत्कालीन प्रभारी अंचल निरीक्षक अशोक कुमार सिंह व हल्का कर्मचारी रतिया टोप्पो के विरुद्ध प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी, जिसकी जांच चल रही है। हेहल अंचल : एसीबी ने हेहल अंचल के पूर्व सीआइ रहे अनिल कुमार सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। यह प्राथमिकी मुख्यमंत्री के आदेश पर की गई थी। उनके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उनके विरुद्ध आय की तुलना में 19 लाख 30 हजार रुपये अधिक की संपत्ति मिली थी। रातू अंचल : एसीबी ने वर्ष 20्र23 में म्यूटेशन के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने के मामले में रातू अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) प्रदीप कुमार, राजस्व उप निरीक्षक सुनील कुमार सिंह व दलाल जाफर अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बड़गाईं अंचल : रांची के बड़गाईं अंचल के पूर्व राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद को सबसे पहले ईडी ने ही गिरफ्तार किया था। उनके घर से 11 ट्रंक में जमीन के सरकारी दस्तावेज मिले थे। राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद पर जमीन के मूल दस्तावेज में हेराफेरी सहित कई आरोपों की पुष्टि हो चुकी है। कांके अंचल : पूर्व में लोकायुक्त के आदेश पर जांच में कांके के अंचल के मेसरा मौजा का एक मामला उजागर हुआ था, जिसमें एक दिन में ही कांके अंचल ने 50 डिसमिल जमीन का दाखिल खारिज कर दिया था। इस मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी अनिल कुमार व अंचल निरीक्षक दोषी मिले थे। कांके अंचल : कांके अंचल के पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ) जयकुमार राम सहित छह के विरुद्ध ईडी ने चार्जशीट दाखिल की थी। उनपर कांके अंचल क्षेत्र में आदिवासी, भुईहरी व सरकारी प्रकृति की जमीन को फर्जी दस्तावेज पर जेनरल बनाकर बेचने का आरोप लगा था। बाद में सीओ जयकुमार राम का निधन हो गया था।

कौशल से कारोबार और नवाचार तक, यूपीआईटीएस में दिखा युवाओं के हुनर का नया चेहरा

ग्रेटर  हुनर जब प्रशिक्षण की चौखट से निकलकर बाजार में पहुंचता है तो वह सिर्फ कला नहीं रहता, कारोबार और रोजगार की ताकत बन जाता है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में शुक्रवार को कौशल विकास मिशन के पवेलियन में इसी बदलाव की तस्वीर दिखाई दी। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही 16 कौशलों के लाइव प्रदर्शन, ‘स्किल मंच’, उद्योग-शिक्षण संस्थानों के संवाद और प्रशिक्षित युवा उद्यमियों की सफलता की कहानियों ने पवेलियन को कौशल से रोजगार और नवाचार तक की यात्रा का मंच बना दिया। पोर्टल पर युवा, विद्यार्थी, स्टार्टअप और इनोवेटर नए समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे। पिछले वर्ष 200 वर्गमीटर में सजा पवेलियन इस बार 360 वर्गमीटर में विस्तार पा चुका है। यहां पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक और उभरते कौशलों का लाइव प्रदर्शन हो रहा है। पहली बार बनाए गए स्किल मंच पर शिक्षाविद, कौशल विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और साफ्ट स्किल विशेषज्ञ युवाओं को करियर और रोजगार की बदलती संभावनाओं से रूबरू करा रहे हैं। आगंतुक कई गतिविधियों में स्वयं हिस्सा लेकर कौशल की बारीकियां भी समझ सकते हैं। वाराणसी की लकड़ी, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और फर्रुखाबाद की जरदोजी पवेलियन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की कारीगरी एक ही छत के नीचे नजर आ रही है। वाराणसी से सह सहयोग सेवा समिति लकड़ी के उत्पाद और आकर्षक मूर्तियां लेकर आई है। वुडन वर्क उत्पादक निर्मल का कहना है कि ऐसे बड़े मंच से स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे नए ग्राहकों और कारोबारियों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। उनके अनुसार योगी सरकार ने हुनरमंदों को ऐसा मंच दिया है, जहां पारंपरिक काम को बाजार की नई जरूरतों के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। आजमगढ़ से ई हरेक्स समूह ब्लैक पॉटरी लेकर पहुंचा है। गोरखपुर से नॉर्दर्न एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट संस्थान के टेराकोटा उत्पाद लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। बुलंदशहर की स्टडी मैट्रिक्स स्किल डेवलपमेंट मिशन ने सिरेमिक पॉटरी प्रदर्शित की है। इन उत्पादों के जरिए पारंपरिक मिट्टी और शिल्पकला को आधुनिक बाजार से जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है। फर्रुखाबाद की कल्कि इंडिया की जरदोजी कारीगरी भी पवेलियन में अपनी अलग पहचान बना रही है। चिकनकारी वस्त्र निर्माता जरीना कहती हैं कि पारंपरिक कारीगरी को आगे बढ़ाने के लिए उसे बड़े बाजार तक पहुंचाना जरूरी है। उनके अनुसार सरकार की ओर से मिले ऐसे मंच से कारीगरों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने और नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। इससे नई पीढ़ी भी पारंपरिक हुनर को रोजगार के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित हो सकती है। आगरा से एसआरएस रूरल एंड स्किल डेवलपमेंट सोसाइटी पर्स, बेल्ट सहित चमड़े के उत्पाद लेकर आई है। फिरोजाबाद से ओम विजय चैरिटेबल ट्रस्ट हैंडीक्राफ्ट और कांच के उत्पाद प्रदर्शित कर रहा है। हैंडीक्राफ्ट उत्पादक आदित्य के अनुसार योगी सरकार ने स्थानीय उत्पादकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने अपनी पहचान बनाने के लिए अच्छा मंच दिया है। उनका कहना है कि ऐसे आयोजनों से उत्पादों की बिक्री के साथ नए बाजार और व्यापारिक संपर्क बनाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। प्रशिक्षण से उद्यमिता तक सरकार का जोर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में प्रदेश के युवाओं के विकास को कौशल, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और कौशल विकास मिशन की विभिन्न योजनाओं से युवाओं में स्वरोजगार की ललक बढ़ी है। आज का युवा नौकरी तलाशने के साथ रोजगार देने वाला बनना चाहता है। युवाओं के स्टार्टअप और उद्यमिता से प्रदेश में निवेश के अवसर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से प्रदेश के उत्पादकों को अपने उत्पाद बेचने और निवेश आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच एक ही छत के नीचे मिल रहा है। सरकार की मंशा है कि प्रदेश का हुनर स्थानीय बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि उसे देश-दुनिया के खरीदारों तक पहुंच मिले। मिशन निदेशक पुलकित खरे के मुताबिक इस बार पवेलियन में कौशल प्रदर्शन के साथ संवाद, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं को जोड़ा गया है। प्रशिक्षित युवा उद्यमी अपनी सफलता की कहानी साझा कर रहे हैं, जबकि उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच संवाद से नए सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद महेश शर्मा तथा उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री सुरेश राणा भी उपस्थित रहे। इस तरह पवेलियन में एक तरफ वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद, आगरा और फिरोजाबाद का पारंपरिक हुनर बाजार से जुड़ता दिखाई दिया, तो दूसरी तरफ सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के जरिए नई सोच रखने वाले युवाओं को नवाचार का मंच मिला।

केसकोड़ी में बना पहला बालिका शौचालय, बेटियों को मिली सुविधा

नक्सल मुक्त केसकोड़ी में वीबी-जीरामजी योजना से बना पहला बालिका शौचालय ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत बेटियों को मिली स्वच्छता और सम्मान की सुविधा रायपुर कांकेर जिले के जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा के नक्सल मुक्त ग्राम पंचायत केसकोड़ी में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। कभी नक्सल समस्या से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब शिक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत केसकोड़ी में पहला बालिका शौचालय निर्मित किया गया है। यह निर्माण बेटियों की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।        मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। कांकेर जिले की नक्सल मुक्त पंचायत केसकोड़ी में निर्मित बालिका शौचालय इस अभियान को धरातल पर उतारने का उदाहरण है। इससे विद्यालय में अध्ययनरत बालिकाओं को स्वच्छता संबंधी आवश्यक सुविधा उपलब्ध होगी।       उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाना है। प्रत्येक शौचालय के निर्माण के लिए 4 लाख 30 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है।         उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का उद्देश्य गांव की हर बेटी को विद्यालय में सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में बालिकाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के किसी भी गांव की बेटी को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े। कांकेर जिले की नक्सल मुक्त पंचायत केसकोड़ी में वीबी-जी राम जी योजना से निर्मित पहला बालिका शौचालय इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में कभी नक्सल समस्या के कारण विकास की गति प्रभावित रही, वहां आज बेटियों की शिक्षा, स्वच्छता और सम्मान के लिए कार्य हो रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण पूरा हो, ताकि हमारी बेटियां बिना किसी असुविधा के आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।       वीबी- जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के विकास कार्य अनुमेय हैं। इनमें जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्य शामिल हैं। इन कार्यों का चयन ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा के अनुमोदन से किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सके। इसके साथ ही पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी भी प्राप्त होगी।

राजस्थान में अब 4 तरह से होगा कचरे का पृथक्करण, डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही

जयपुर शहरों की स्वच्छता अब केवल कचरे के निस्तारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कचरे को संसाधन में परिवर्तित करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के निदेशक अनुभव बैरवा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेहतर कचरा प्रबंधन स्वच्छ एवं टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों, उनके क्रियान्वयन तथा आमजन, स्थानीय निकायों एवं थोक अपशिष्ट उत्पादकों की भूमिका के संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला । चार-धारा पृथक्करण बनेगा प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की आधारशिला इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने बताया कि 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी नए नियमों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत गीले कचरे, सूखे कचरे, स्वच्छता संबंधी कचरे तथा विशेष/घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग एकत्रित एवं संग्रहित करने पर जोर दिया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल कचरा एकत्र करना नहीं, बल्कि स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित करते हुए पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट प्रसंस्करण की पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाना है। थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारी होगी और स्पष्ट स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों में थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित सीमा के अंतर्गत आने वाले बड़े अपशिष्ट उत्पादकों—जैसे बड़े आवासीय परिसर, होटल, संस्थान एवं अन्य प्रतिष्ठानों—को अपने परिसर में ही जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण अथवा अन्य अनुमोदित तकनीकों का उपयोग करना होगा। साथ ही पुनर्चक्रण योग्य एवं खतरनाक अपशिष्ट का अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा। डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन निगरानी एवं अनुश्रवण व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण एवं अंतिम निस्तारण की निगरानी को बढ़ावा मिलेगा तथा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। कचरे से संसाधन और भराव स्थलों पर निर्भरता में कमी नए नियमों में सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्रों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इनके माध्यम से सूखे कचरे से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की अधिकतम पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। वहीं कचरा भराव स्थलों पर निर्भरता कम करने के लिए उद्योगों में अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है। पुराने विरासत अपशिष्ट स्थलों के वैज्ञानिक उपचार एवं सुधार पर भी विशेष बल दिया गया है। इसके साथ ही अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग एवं जैव-मीथेनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की संभावनाओं का लाभ उठाने की दिशा में भी प्रोत्साहन दिया गया है। ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ से मजबूत होगी जवाबदेही नियमों में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ को भी शामिल किया गया है। इसके तहत अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने का प्रावधान है। इससे नियमों के अनुपालन को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। स्थानीय निकायों की भूमिका अहम नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण तथा मीथेन उत्सर्जन में कमी के माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ एवं टिकाऊ शहरों की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय निकायों, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, राज्य सरकार, उद्योगों तथा आम नागरिकों के बीच समन्वय एवं सक्रिय सहभागिता इसके सफल क्रियान्वयन की आधारशिला होगी। राजस्थान में क्रियान्वयन की दिशा में उठाए गए कदम राजस्थान में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अब तक की गई कार्यवाही के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि • राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है। • 29 मई, 2026 को क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें शहरी स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों के लगभग 600 प्रतिभागियों ने भाग लिया। • सभी शहरी स्थानीय निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीकृत पोर्टल पर थोक अपशिष्ट उत्पादकों का अंतरिम पंजीकरण प्रारंभ किया गया है। • थोक उपभोक्ताओं एवं अपशिष्ट उत्पादकों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों के अनुरूप शर्तों के अनुपालन हेतु रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के साथ भी समन्वय किया जा रहा है। अपशिष्ट से संसाधन’ की ओर बढ़ता राजस्थान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन शहरी स्वच्छता को नई दिशा देने के साथ-साथ प्रदूषण में कमी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक होगा। नए नियमों का मूल संदेश यही है कि कचरा केवल निस्तारण की वस्तु नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण, पुनःउपयोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति के माध्यम से आर्थिक एवं पर्यावरणीय मूल्य रखने वाला संसाधन है। राजस्थान में इन प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, स्थानीय निकायों, उद्योगों और नागरिकों के समन्वित प्रयासों से स्वच्छ, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ शहरी व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।  

खेजड़ी के उत्पादों से संरक्षण तक, MDSU में बनेगा खास रिसर्च सेंटर

अजमेर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में जल्द ही खेजड़ी के उत्पाद और उपयोगिता पर जानकारी और शोध की शुरुआत होगी। कैंपस में पर्यावरण विज्ञान विभाग लघु शोध केंद्र तैयार करने में जुटा है। इसमें शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी काम कर सकेंगे। खेजड़ी या शमी एक वृक्ष है, जो अजमेर सहित जोधपुर, बीकानेर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, सीकर, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों में पाया जाता है। इस वृक्ष की फलियों और पत्तियों में भरपूर मात्रा में विटामिन और प्रोटीन पाया जाता है। इसकी पत्तियां पशुओं के चारे और औषधीय उपयोग के लिए उपयोगी हैं। इसकी फलियों से सांगरी तैयार की जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वृक्ष की आयु 5000 वर्ष मानी जाती है। रेगिस्तान में जब जानवरों के लिए धूप से बचने का कोई सहारा नहीं होता, तब यह पेड़ उन्हें छाया देता है। विश्वविद्यालय ने समझी उपयोगिता विश्वविद्यालय में महर्षि चरक भवन के पीछे खेजड़ी वाटिका विकसित की गई है। इसमें खेजड़ी के 100 पौधे लगाए गए हैं। ये पौधे काफी बड़े हो चुके हैं। जल्द ही विभाग खाली पड़ी अन्य जमीन पर खेजड़ी के पौधे लगाएगा। तैयार हो रहा लघु शोध केंद्र पर्यावरण विज्ञान विभाग में लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। इसमें खेजड़ी से निर्मित गोंद, केर-सांगरी की सब्जी-आचार, खोखा (सूखा फल), मींझर (फूल) और अन्य उत्पाद रखे जाएंगे। खेजड़ी को बचाने के लिए अमृता देवी के योगदान और इसकी उपयोगिता से जुड़ी जानकारी भी यहां मिलेगी। प्रोजेक्टर लगाया जाएगा। भूगोल, बॉटनी, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और अन्य विषयों के विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक यहां शोध कर सकेंगे। मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल खेजड़ी को लगाने के लिए मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। पौधरोपण की यह विधि छोटे क्षेत्रों में घने, देशी और आत्मनिर्भर जंगल विकसित करने में मदद करती है। इस विधि में पारंपरिक वनीकरण की तुलना में पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। ये 30 गुना अधिक घने होते हैं। फैक्ट फाइल     1983 में घोषित किया गया राज्य वृक्ष     15 से ज्यादा जिलों में पाया जाता है खेजड़ी     5 हजार वर्ष मानी जाती है खेजड़ी की आयु     45 प्रतिशत से ज्यादा खेजड़ी वृक्ष खतरे में     1 लाख रुपए जुर्माना है खेजड़ी को काटने पर इनका कहना है… लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। भविष्य में शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी रिसर्च कर सकेंगे। इससे खेजड़ी के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। -प्रो. प्रवीण माथुर, पूर्व पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष, एमडीएस विश्वविद्यालय