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नक्सलवाद उन्मूलन में छत्तीसगढ़ ने रचा नया इतिहास: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजनांदगांव में आयोजित  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष राज्य के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुए हैं।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा निर्धारित लक्ष्य—“31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन”—की दिशा में छत्तीसगढ़ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और यह अब अंतिम सांसें गिन रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में न्यूट्रलाइज हुए, जबकि 4,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी दी, जो नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम से बस्तर में दशकों से जमी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक बढ़त मिली है। उन्होंने राज्य सरकार की नई पुनर्वास नीति की भी विस्तृत जानकारी दी। इसके तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15,000 प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति, 3 वर्षों तक 10,000 रुपये मासिक वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार-संबंधी कार्यक्रम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि "गोलीबारी की भाषा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ना" अब बस्तर में हकीकत बन रहा है। पंडुम कैफ़े जैसे नवाचार आज सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में तेजी से सुरक्षा कैंप खुलने और प्रशासन की पहुंच बढ़ने के साथ ही 400 से अधिक गाँव पुनः आबाद हो चुके हैं। नियद नेल्ला नार  योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएँ और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएँ पहुँच रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा—“जहाँ कभी गोलीबारी की आवाज आती थी, आज वहाँ स्कूल की घंटियाँ बज रही हैं। कई गाँवों में वर्षों बाद ध्वजारोहण हुआ, चुनाव में लोग निर्भीक होकर भाग ले रहे हैं और राशन-कार्ड से लेकर मोबाइल नेटवर्क तक की सुविधाएँ अब सुगमता से उपलब्ध हो रही हैं।” मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर को भविष्य के विकास का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि कृषि, सिंचाई, वन-उत्पाद, पशुपालन और छोटे उद्योगों के लिए अभूतपूर्व संभावनाएँ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति (2024–30) में नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वनोपज आधारित वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्थायी आय से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से बस्तर अब वैश्विक नक्शे पर तेजी से पहचान बना रहा है। कुटुमसर गुफा, झरने, अबूझमाड़ के जंगल और जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर विश्व आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। होम-स्टे मॉडल तेजी से फल-फूल रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद उन्मूलन की यह ऐतिहासिक प्रगति राज्य के शहीद जवानों, सुरक्षा बलों के अथक परिश्रम और जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री श्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में शामिल होगा।

सुदूर ग्राम कुर्रा के रतिराम को मिला सपनों का पक्का आशियाना

रायपुर किसी भी सरकारी योजना का वास्तविक महत्व तभी सिद्ध होता है, जब उसका लाभ जमीनी स्तर पर आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाए। ऐसी ही एक सशक्त योजना है प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन), जिसका प्रभाव रायगढ़ जिले में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। इस योजना के अंतर्गत लैलूंगा विकासखंड के सुदूर ग्राम कुर्रा के निवासी श्री रतिराम बिरहोर को उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना-पक्का और सुरक्षित आवास-साकार हुआ।  जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और सम्मान भी लेकर आया पीएम-जनमन वर्षों तक कच्चे मकान में रहकर बरसात, ठंड और जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे के बीच जीवन-यापन करने वाले रतिराम और उनका परिवार जब पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत आवास में प्रवेश किया, तो वह क्षण उनके लिए अविस्मरणीय बन गया। आवास स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और निर्धारित समय में पूर्ण भी हुआ। नया पक्का घर न केवल उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और सम्मान भी लेकर आया है।  जनजातीय समूहों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्त्वाकांक्षी मिशन रतिराम का कहना है कि पहले जिस घर में रहना मजबूरी था, वहीं अब पक्के मकान में रहना गर्व की अनुभूति देता है। उल्लेखनीय है कि पीएम-जनमन योजना, जिसकी शुरुआत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में की गई, विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्त्वाकांक्षी मिशन है। इस अभियान का उद्देश्य आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, बिजली, आजीविका और संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। गौरतलब है कि पीएम जनमन योजना आज केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों के लिए न्याय, समानता और आत्मसम्मान का मजबूत आधार बन चुकी है। ग्राम कुर्रा के रतिराम की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब योजनाएं सही ढंग से लागू होती हैं, तो वे लोगों की तस्वीर ही नहीं, तकदीर भी बदल देती हैं।

महाकुंभ 2025 की तरह माघ मेला 2026 को दिव्य भव्य और नव्य स्वरूप प्रदान कर रही है योगी सरकार

प्रयागराज माघ मेले की प्रकाश व्यवस्था में भी मिलेगी नव्यता की झलक: योगी सरकार माघ मेले में आने वाले आगंतुकों के रास्ते रोशन करेगी नियॉन और स्पाइरल लाइट्स: योगी सरकार प्रयागराज प्रयागराज में माघ मेले में त्रिवेणी के तट पर आस्था का जन समागम एकत्र होगा । योगी सरकार की तरफ से इस आयोजन को दिव्य ,भव्य और नव्य स्वरूप देने के लिए माघ मेला क्षेत्र से जुड़े शहर के उन मार्गों और गलियों को भी आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है जहां से होकर पर्यटक और श्रद्धालु माघ मेला पहुंचेंगे । इसी क्रम में शहर की हर मुख्य मार्ग और संपर्क मार्ग को रोशनी से भरने की तैयारी है।नगर निगम यह जिम्मेदारी उठा रहा है । सड़क किनारे के वृक्षों को रोशनी के माध्यम से नया स्वरूप दिया गया है।  नियॉन और स्पाइरल रोशनी से जगमग होंगे माघ मेला आगंतुकों के रास्ते प्रयागराज में 3 जनवरी से लगने जा रहे आस्था के महा जन समागम माघ मेला 2026 की तैयारियों को लेकर सभी विभाग अपनी तैयारियों में जुटे हैं। मेला क्षेत्र के अंदर और बाहर आगंतुकों के गुजरने वाले मार्गों को सजाने संवारने की कवायद भी चल रही है। नगर निगम प्रयागराज के यांत्रिक विभाग के चीफ इंजीनियर ( विद्युत) डॉ संजय कटियार बताते हैं कि माघ मेले में आने वाले पर्यटकों के  स्वागत के लिए की संगम नगरी की  सड़कों के साथ उनके दोनों ओर की प्रकाश व्यवस्था को भी भव्य स्वरूप दिया जा रहा है।   शहर में सड़क किनारे लगे वृक्षों का नया लुक देने के लिए महाकुंभ 2025  की तर्ज पर नियॉन और स्पाइरल लाइट की संयोजित प्रकाश व्यवस्था की गई है। इस  व्यवस्था में शहर के महत्वपूर्ण मार्गों के 260 वृक्षों के तनों, शाखाओं और पत्तियों में अलग अलग थीम की रोशनी लगाई गई है। इनमें नियॉन और स्पाइरल लाइट्स को इस तरह संयोजित किया गया है जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कैसे रात के अंधेरे में पूरा वृक्ष आलोकित हो गया है। प्रयागराज एयरपोर्ट से लेकर संगम तक जाने वाले  पर्यटक और श्रद्धालु इस भव्य प्रकाश व्यवस्था का अवलोकन कर सकेंगे। शहर की 23 सड़कों,  06 आरओबी और 02  फ्लाईओवर में  शंख, चक्र, गदा, त्रिशूल, तलवार आदि के आकार के मोटिव्स भी श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी तरफ खींचेंगे । महाकुंभ में की गई इस व्यवस्था को माघ मेले के आयोजन में भी धरातल में उतारा जा रहा है। इसके लिए अलग से कोई बजट की व्यवस्था नहीं है क्योंकि ये अभी भी एक साल की गारंटी के अवधि में हैं।  शहर की सड़क और गलियां होंगी जगमग माघ मेला क्षेत्र के अलावा शहर के सभी वार्डों की हर गली और प्रमुख मार्ग में प्रकाश की बेहतर व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रयागराज नगर निगम की तरफ से इसके लिए विस्तारित क्षेत्र और मूल क्षेत्र में पूर्व में बनाई गई 150 करोड़ की योजना के अंतर्गत इसे धरातल पर उतारा जा रहा है। नगर निगम के मुख्य अभियंता विद्युत यांत्रिकी डॉ संजय कटियार के मुताबिक विस्तारित क्षेत्र में 28 वार्डों में मार्ग प्रकाश को बेहतर करने के लिए लगभग 25 करोड़ का बजट बजट आबंटित भी हो चुका है। इसमें झूंसी, फाफामऊ और नैनी क्षेत्र में 11 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट्स लगाई जा रही हैं। मेला प्रशासन की तरफ से मिली 4,400 से अधिक स्ट्रीट लाइट को भी उपयोग में लाया जा रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि माघ मेला पहुंचने वाले आगंतुक शहर के जिस भी मार्ग से निकलें वहां की गलियां और सड़कें उन्हें जगमगाती मिले।

रबी क्षेत्र विस्तार एवं दलहन-तिलहन उत्पादकता बढ़ाने कृषि विभाग करेगा जागरूकता शिविरों का आयोजन

रायपुर प्रधानमंत्री धन.धान्य कृषि योजना (PMDDKY) 2025.26 से शुरू की गई एक सरकारी पहल है, जिसका लक्ष्य कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है।  इसमें सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया हैए, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और देश को दालों सहित विभिन्न फसलों में आत्मनिर्भर बनाने के मिशन का समर्थन किया जा सके। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत कृषकों को रबी फसल की आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा मत्स्यपालन, पशुपालन सहित अन्य कृषि-संबद्ध व्यवसायों की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रत्येक समिति में विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।   किसानों आधुनिक खेती से जोडकर लाभान्वित करना है शिविरों में जशपुर जिले के ऐसे उत्कृष्ट एवं प्रगतिशील कृषकों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़ा गया है, जो आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर खेती में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। ये प्रशिक्षक कृषक अपने अनुभव, कठिनाईयों तथा विभागीय योजनाओं से प्राप्त लाभों को अन्य कृषकों के साथ साझा करेंगे, जिससे अधिक से अधिक किसान आधुनिक खेती अपनाकर लाभान्वित हो सकें। साथ ही कृषि एवं संबद्ध विभाग के अधिकारी किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, अनुदान प्राप्ति की प्रक्रिया, तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के मार्गदर्शन की जानकारी प्रदान करेंगे। इन शिविरों में कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक भी शामिल रहेंगे, जो आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार कर किसानों को उन्नत खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। दलहन-तिलहन उत्पादक कृषकों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने की सुविधा जशपुर जिले में कुल 09 आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों का पंजीयन किया गया है, जहाँ दलहन-तिलहन फसलें उगाने वाले कृषक अपनी उड़द, मूंग एवं मूंगफली को बाजार मूल्य कम होने की स्थिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विक्रय कर सकते हैं। कृषकों के हित में प्रशासन ने अपील की है कि वे एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन अवश्य कराएँ। पंजीयन कराने में किसी भी प्रकार की सहायता हेतु संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। किसान बढ़ा सकते हैं अपनी आय कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर  शिविर के दौरान जिले के जशपुर जिले के प्रत्येक विकासखंड के कृषक उत्पादक संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। जिन कृषकों ने अभी तक किसी कृषक उत्पादक संगठन की सदस्यता नहीं ली है, वे शिविर में उपस्थित प्रतिनिधियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सदस्यता हेतु आवेदन कर सकते हैं। कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर किसान न केवल आधुनिक कृषि तकनीक, समूह विपणन और सामूहिक क्रय-बिक्री का लाभ उठा सकते हैं, बल्कि अपनी आय दोगुनी करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकते हैं।

कोरिया : जवानों के त्याग और बलिदान से ही हम सुरक्षित हैं-कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी

कोरिया : जवानों के त्याग और बलिदान से ही हम सुरक्षित हैं-कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पर हुआ आत्मीय संवाद और सम्मान समारोह कोरिया सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के अवसर पर आज कलेक्ट्रेट सभागृह, बैकुण्ठपुर में सादगी और गरिमा से परिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश की रक्षा में जुटे सैनिकों के अदम्य साहस व अनुकरणीय बलिदान को नमन किया गया। मुख्य अतिथि कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने कहा-हम सभी नागरिक आज सुरक्षित जीवन जी पा रहे हैं तो इसका श्रेय हमारे सेना और सुरक्षा बलों के जवानों को जाता है। उनका त्याग केवल उनका अपना नहीं, बल्कि पूरे परिवार का त्याग होता है। कड़ाके की ठंड हो, बारिश हो या भीषण गर्मी- हमारे जाँबाज़ सैनिक राष्ट्र की सेवा में हर पल तत्पर रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जवानों का समर्पण न केवल राष्ट्र की रक्षा करता है बल्कि नागरिकों के जीवन और भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। कार्यक्रम में लेफ्टिनेन्ट कर्नल जितेन्द्र कुमार देवांगन (से.नि.), जिला सैनिक कल्याण अधिकारी द्वारा कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी, अपर कलेक्टर श्री सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य, डिप्टी कलेक्टर श्री डी.डी. मंडावी, अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण तथा क्षेत्र के प्रसिद्ध सैन्य-गाथा कवि श्री जी.पी. नेमा, सुबेदार सुनील कुमार सिंह, भूतपूर्व सैनिक और वीर नारियों का लेपल पिन लगाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। जिला सैनिक कल्याण कार्यालय द्वारा उपस्थित सभी अधिकारी-कर्मचारी, पूर्व सैनिकों, शहीद परिवारों की विधवाओं, सेवारत सैनिकों एवं उनके आश्रितों को ध्वज लगाकर सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी अधिक अर्थपूर्ण बनाया। सभी अतिथियों ने सैनिकों के अद्वितीय साहस, अनुशासन और बलिदान को सलाम करते हुए उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

उत्तर बस्तर कांकेर : जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन 12 दिसम्बर से

उत्तर बस्तर कांकेर : जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन 12 दिसम्बर से उत्तर बस्तर कांकेर कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार जिले के आम ग्रामीणजनों की आवश्यकताओं, शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन आगामी 12 दिसम्बर से 25 मार्च 2026 तक किया जाएगा। उक्त शिविरों में सभी जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने शिविरों के सुचारू रूप से आयोजन के लिए अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री स्टेला खलखो को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। प्राप्त जानकारी अनुसार कोयलीबेड़ा विकासखण्ड की ग्राम पंचायत चारगांव में 12 शुक्रवार दिसम्बर को शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत चारगांव, छोटेबोदेली, पोरोण्डी, सिकसोड़, सुलंगी, तुरसानी और बदरंगी के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी प्रकार अंतागढ़ विकासखण्ड में शुक्रवार 19 दिसम्बर को हाईस्कूल प्रांगण भैंसगांव में ग्राम बैहासाल्हेभाट, फुलपाड़, कोलर, कोसरोण्डा, मंगतासाल्हेभाट, तालाबेड़ा, ताड़ोकी और बोंदानार तथा दुर्गूकोंदल विकासखण्ड में 26 दिसम्बर शुक्रवार को स्कूल ग्राउंड चेमल में चिहरो, गुलालबोड़ी, आमागढ़, हानपतरी, बोदेली, गुदूम, तुमड़ीसुर, भेजर, हिंगनपुरी और मेरेगांव ग्राम पंचायत के ग्रामीण शिविर में शामिल होंगे। इसके अलावा भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में बुधवार 07 जनवरी को हायर सेकेण्डरी स्कूल कच्चे में ग्राम पंचायत साल्हे, भैंसाकन्हार, ईरागांव, टेढ़ईकोंदल, भैंसमुण्डी, चौगेल तथा मुल्ला, विकासखण्ड कोयलीबेड़ा में बुधवार 04 फरवरी को हाई स्कूल प्रांगण कौड़ोसाल्हेभाट में ग्राम पंचायत जिरामतराई, दड़वीसाल्हेभाट, उदनपुर, कामतेड़ा, कोयलीबेड़ा, केसेकोड़ी और कड़मे के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी प्रकार 13 फरवरी शुक्रवार को दुर्गूकोंदल विकासखण्ड के स्कूल ग्राउण्ड मेड़ो में शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत चाहचाड़, हाहालद्दी, सिहारी, खुटगांव, दोड़दे, साधुमिचगांव, पड़गाल, भुसकी, पलाचूर, दुर्गूकांदल एवं भुरकागुदूम में, भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में 18 फरवरी को शीतला मंदिर मैदान चिचगांव में ग्राम पंचायत भानबेड़ा, डोंगरकट्टा, बयानार, उंचपानी, कुल्हाड़कट्टा, रानवाही, मुंगवाल, बुदेली, दाबकट्टा, जलीनकसा, चिचगांव और रानीडोंगरी, 26 फरवरी को अंतागढ़ विकासखण्ड के माध्यमिक शाला खेल मैदान सरेवाही में ग्राम पंचायत भैंसासुर, टेमरूपानी, मण्डागांव, हिन्दुबिनापाल, कानागांव, बुलावण्ड, मासबरस, जेठेगांव, अमोड़़ी, कोदागांव तथा 13 मार्च को कांकेर विकासखण्ड के कलमुच्चे चौक में ग्राम पंचायत कलमुच्चे, पीढ़ापाल, मुरागांव, तुलतुली, मांदरी, कुरिष्टीकुर, कोकपुर, मालगांव,कोड़ेजुंगा और बारदेवरी के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी तरह 18 मार्च 2026 को चारामा विकासखण्ड के पंडरीपानी हाईस्कूल मैदान में शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत हाराडुला, हल्बा, भिलाई, पंडरीपानी, भिरौद, करिहा, जेपरा, गितपहर, भानपुरी, रानीडोंगरी, कुर्रूभाट, टांहकापार, किलेपार, कोटेला एवं तुएगहन तथा 25 मार्च 2026 को नरहरपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत मुसुरपुट्टा मंगल भवन में ग्राम बासनवाही, साईंमुण्डा, मावलीपारा, मांडाभर्री, बांगाबारी, दुधावा, सारवण्डी, मालगांव, दलदली, घोटियावाही, देवडोंगर, शामतरा, धनोरा और भिरौद के ग्रामीण शामिल रहेंगे। उक्त शिविर में कलेक्टर ने अनुभाग स्तर, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारी के अलावा सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर विभागीय योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को देने तथा यथासम्भव शिविर स्थल पर प्राप्त आवेदनों का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

कुनकुरी नगर को स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिया बड़ा तोहफ़ा

रायपुर, कई प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, योग केंद्र और वेलनेस हब खुद को नेचुरोपैथी  कहते हैं। जो प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान करता है और बापू भवन इसका ऐतिहासिक घर है, जिसे गांधीजी ने अपनाया था। खासकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का उद्देश्य प्राकृतिक उपचार, योग, आहार, मिट्टी स्नान और हर्बल दवाओं के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य प्रदान करना है।  जशपुर जिले के कुनकुरी नगर की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए 2 करोड़ 62 लाख रुपए की मंजूरी प्रदान की है। निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। भवन तैयार हो जाने के बाद कुनकुरी नगरवासियों को प्राकृतिक चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधा अपने ही नगर में उपलब्ध होगी। यह भवन न सिर्फ लोगों को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की ओर प्रोत्साहित करेगा, बल्कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उपचार के लिए बड़ी राहत भी देगा। अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर दराज जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नगरवासियों ने इस दूरदर्शी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सुविधा स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा और नई उम्मीद लेकर आएगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई ऊंचाई को छूता जशपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सौगातें मिल चुकी है। मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ा कदम उठाते हुए वित्त विभाग से 359 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है । इसी प्रकार 220 विस्तर अस्पताल के लिए 32 करोड़ की मंजूरी, नर्सिंग महाविद्यालय भवन के 8 करोड़ की मंजूरी, फिजियोथेरेपी महाविद्यालय के 14 करोड़ की मंजूरी, कल्याण आश्रम अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन के लिए 35 करोड़ की मंजूरी, ग़िनाबहर में मातृत्व शिशु चिकित्सालय भवन निर्माण के 8 करोड़ की मंजूरी सहित कई सौगातें दी गई है, जो जिले वासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वरदान साबित होंगी।

ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों का इस माह के अंत तक होगा भूमिपूजन और शुभारंभ

मेट्रोपॉलिटन सिटी के दृष्टिगत विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को उद्योग जगत के बीच करें प्रचारित : मुख्यमंत्री डॉ.यादव ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों का इस माह के अंत तक होगा भूमिपूजन और शुभारंभ मुख्यमंत्री ने पिछले दो वर्ष में एमएसएमई की 31प्रतिशत ग्रोथ पर दी बधाई फूड पार्क सहित अन्य ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को एमएसएमई से जोड़ें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमएसएमई विभाग के दो वर्ष के कार्यों की समीक्षा की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमएसएमई विभाग के अधिकारियों से कहा है कि वे इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के दृष्टिगत विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को उद्योग जगत के बीच इस तरह से प्रचारित और प्रस्तुत करें, जिससे अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हों तथा व्यापक निवेश और रोजगार सृजित हो सकें। उन्होंने उद्योग वर्ष के समापन पर इस माह के अंत तक ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों के भूमिपूजन औद्योगिक भूखंड आवंटन, शुभारंभ आदि का व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने एमएसएमई के पंजीकरण में जबरदस्त 31प्रतिशत की ग्रोथ पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे पिछले दो वर्ष में छोटे उद्योगों के लिए राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए शानदार वातावरण का उदाहरण बताया। उन्होंने फूड पार्क सहित अन्य ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को भी एमएसएमई से जोड़ने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को खजुराहो में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के गत 2 वर्ष के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। एमएसएमई मंत्री  चेतन्य कुमार काश्यप, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत दो वर्ष में मध्यप्रदेश में एमएसएमई और स्टार्टअप के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। प्रदेश में इस अवधि में कई लाख करोड़ का निवेश आया है और नवीन औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन और शुभारंभ हुआ है। एमएसएमई इकाइयों को 2780 करोड़ की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई गई है।मुख्यमंत्री ने 2019 से उद्यमों के लिए लंबित प्रोत्साहन राशि के संपूर्ण भुगतान को ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग वर्ष के समापन पर यह विभाग की जिम्मेदारी है कि पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के साथ इन उपलब्धियों का मीडिया को भी मौके पर निरीक्षण कराए, जिससे निवेश और रोजगार में हुए कार्य पूरे देश में प्रचारित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल सहित बड़े शहरों में फ्लैटेड इंडस्ट्रियल पार्क के विकास कार्यों में प्रदेश के विकास प्राधिकरणों को जोड़ें, जिससे मितव्ययता बनी रहे। प्रदेश में एमएसएमई एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार, औद्योगिक संरचना के विकास तथा आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।  बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश में 4.51 लाख विनिर्माण उद्यम, 6,340 से अधिक स्टार्टअप और 3,023 से अधिक महिला स्टार्टअप सक्रिय हैं। प्रदेश में 102 से अधिक इन्क्यूबेटर कार्यरत हैं। विनिर्माण क्षेत्र में ₹39,600 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त हुआ है। नीतिगत सुधार एवं विभागीय उपलब्धियाँ विगत दो वर्षों में विभाग ने नीतिगत सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। एमएसएमई एवं स्टार्टअप के लिए नई नीतियाँ लागू की गईं। प्रदेश में 116 से अधिक कार्यशालाओं के माध्यम से जागरूकता एवं प्रशिक्षण दिया गया। भू-आवंटन एवं अन्य प्रक्रियाओं को फेसलेस ऑनलाइन माध्यम से समयबद्ध सेवा के रूप में लागू किया गया। वित्तीय सहायता के अंतर्गत 4,065 इकाइयों को 2,780.44 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई और  220 सहायता प्रकरणों का राज्य स्तरीय साधिकार समिति द्वारा निराकरण किया गया। औद्योगिक अधोसंरचना का विस्तार समीक्षा बैठक में बताया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। कुल 1,240 भूखंड उद्यमियों को उपलब्ध कराए गए, 13 औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और 14 नए औद्योगिक क्षेत्रों को स्वीकृति प्रदान की गई। वर्तमान में 31 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास कार्य प्रगति पर है। निजी भूमि पर स्वीकृत 30 औद्योगिक क्षेत्रों में से 12 का विकास कार्य पूर्ण हुआ है। विभाग द्वारा पहली बार गोविंदपुरा, भोपाल में फ्लैटेड इंडस्ट्रियल पार्क का विकास कर नवाचार को प्रोत्साहन दिया गया है। वित्तीय समावेशन एवं उद्यम क्रांति योजना मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 15,838 युवाओं को लाभान्वित किया गया और 1,087.27 करोड़ रूपये की ऋण राशि वितरित की गई। प्रदेश की साख योजना के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य 2,45,038 करोड़ रूपये के विरुद्ध सितम्बर 2025 तक 1,93,872 करोड़ रूपये वितरित किए गए, जो पिछले दो वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण वृद्धि है। इससे एमएसएमई क्षेत्र में वित्तीय उपलब्धता और उद्यमिता को मजबूती मिली है। फेसिलिटेशन कॉउंसिल की उपलब्धियाँ एमएसएमई फेसिलिटेशन काउंसिल द्वारा विलंबित भुगतान के 439 प्रकरणों का निराकरण किया गया और काउंसिल की सुनवाई पूरी तरह डिजिटल माध्यम से सुनिश्चित की गई। ODR पोर्टल के प्रभावी उपयोग के लिए काउंसिल को वर्ष 2025 में राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। निवेश संवर्धन एवं राष्ट्रीय उपलब्धियाँ समीक्षा बैठक में बताया गया कि जीआईएस- 2025 के दौरान प्रदेश को 2,279 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनकी कुल राशि 21,000 करोड़ रूपये है। इनमें से 729 प्रस्ताव क्रियान्वित हुए हैं, जिनके माध्यम से 5,075 करोड़ रूपये का वास्तविक निवेश और 21,599 रोजगार सृजित हुए हैं। नई दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में मध्यप्रदेश मंडप को वर्ष 2024 में स्वर्ण पदक तथा 2025 में रजत पदक प्राप्त हुआ। विनिर्माण एवं प्रमाणन में प्रगति बैठक में बताया गया कि विगत दो वर्षों में 2 लाख से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ पंजीकृत हुई हैं, जो 31 प्रतिशत की वृद्धि है। आरएएमपी योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 SME को स्टॉक एक्सचेंज में शामिल कराया गया है। जेडईडी प्रमाणन के क्षेत्र में 16,428 इकाइयाँ प्रमाणित हुई हैं, जबकि पूर्व में यह संख्या मात्र 437 थी। प्रतिदिन अवधि में 30 हजार से अधिक एमएसएमई एवं स्टार्टअप का क्षमता निर्माण किया गया तथा iGOT पोर्टल पर 834 शासकीय सेवक ऑनबोर्ड हुए। ग्वालियर स्टोन एवं छतरपुर वुडन फर्नीचर को दिसंबर 2025 में जीआई टैग प्राप्त हुआ है। क्लस्टर विकास एवं भविष्य की औद्योगिक तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि आगामी तीन वर्ष में 5 हजार से अधिक करोड़ की प्रोत्साहन राशि एमएसएमई इकाइयों को दी जाएगी। इसी तरह क्लस्टर विकास के लिए 30 नए निजी क्लस्टरों और 22 सामान्य सुविधा केंद्रों … Read more

मध्यप्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड, वाहनों की डिडुप्लीकेशन की सभी लंबित प्रविष्टियाँ कीं शून्य; EV पर मोटरयान कर पूरी तरह माफ

मध्यप्रदेश बना वाहनों की डिडुप्लीकेशन की लंबित प्रविष्टियों को शून्य करने वाला राज्य इलेक्ट्रिक वाहनों में मोटरयान कर में पूर्ण छूट भोपाल परिवहन विभाग के प्रयासों से मध्यप्रदेश डिडुप्लीकेशन की लंबित प्रविष्टियों को शून्य करने वाला राज्य बन गया है। इस कार्यवाही का फायदा उन समस्त 2 लाख 50 हजार वाहन स्वामियों को मिला है, जो अब परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर पा रहे हैं। देश में समस्त राज्यों के परिवहन विभाग द्वारा वाहनों के पंजीयन एवं उनके स्थानान्तरण के संबंध में विभिन्न परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में समय-समय पर प्रविष्टियां की जाती हैं। पूर्व में कागजों पर संधारित रिकार्ड को डिजिटाइज करने के दौरान दूसरे आरटीओ के अधिकार क्षेत्र में वाहन के स्थानांतरित होने पर पूर्व के आरटीओ द्वारा एंट्री को डिलीट न किये जाने के कारण देश में 35 लाख वाहन ऐसे थे, जिनकी प्रविष्टि एक से अधिक आरटीओ में होने से उन वाहन स्वामियों को परिवहन सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस वर्ष जुलाई 2025 के अंत तक मध्यप्रदेश में करीब 2 लाख 50 हजार ऐसी प्रविष्टियां थीं। परिवहन विभाग द्वारा एक विशेष मुहिम चलाई गई। मुहिम की समीक्षा प्रत्येक पखवाड़े में परिवहन विभाग में वरिष्ठ स्तर पर किये जाने से मध्यप्रदेश में डुप्लीकेट एंट्रियों को सही कर दिया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटरयान कर में पूर्ण छूट पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य में पंजीकृत होने वाले समस्त श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटरयान कर में पूर्णत: छूट प्रदान किये जाने के प्रावधान किये गये हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कम्प्रेस्ड् नेचुरल गैस (सीएनजी) वाहनों पर भी राज्य सरकार द्वारा मोटरयान कर में एक प्रतिशत की छूट प्रदान की गई है। इस प्रावधान से प्रदेश में इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।  

प्रशासनिक हलचल: छत्तीसगढ़ के 38 अफसरों का तबादला, आदेश जारी

रायपुर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के एक साथ अधिकारियों का एक साथ तबादला किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश में कुल 38 अधिकारियों का नाम शामिल है। यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) द्वारा जारी किया गया है और इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा (State Administrative Service) एवं सचिवालय सेवा (Secretariat Service) के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया गया है। छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 38 अधिकारियों का तबादला छत्तीसगढ़ शासन ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने आज, 08 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा एवं सचिवालय सेवा के 38 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से नवीन विभागों में पदस्थ किया है। प्रमुख अधिकारियों की नवीन पदस्थापनाएं तबादला सूची में शामिल कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों और उनके नए प्रभार निम्नलिखित हैं: राजीव अहिरे (संयुक्त सचिव) वर्तमान: आवास एवं पर्यावरण विभाग (अतिरिक्त प्रभार- योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग) नवीन: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग सूर्यकिरण तिवारी (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (अतिरिक्त प्रभार- पशुधन विकास एवं मछली पालन विभाग) नवीन: पशुधन विकास एवं मछली पालन विभाग दुर्गेश कुमार वर्मा (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: सामान्य प्रशासन विभाग (पूल) नवीन: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग लवीना पाण्डेय (रा.प्र.से., उप सचिव) वर्तमान: आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास विभाग (अति. प्रभार- चिकित्सा शिक्षा विभाग) नवीन: चिकित्सा शिक्षा विभाग कुसुम एक्का (उप सचिव) वर्तमान: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग नवीन: गृह विभाग श्रीमती विजया खेस्स (उप सचिव) वर्तमान: विमानन विभाग नवीन: ग्रामोद्योग विभाग अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किए गए अधिकारी तबादला सूची में कई अधिकारियों को उनके मौजूदा अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है, जबकि उनका मूल प्रभार यथावत रहेगा- अरूण कुमार मरकाम (रा.प्र.से., उप सचिव) को ग्रामोद्योग विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। रामप्रसाद चौहान (रा.प्र.से., उप सचिव) को समाज कल्याण विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। श्रीकांत वर्मा (रा.प्र.से., उप सचिव) को गृह विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। अंकिता गर्ग (रा.प्र.से., उप सचिव) को श्रम विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। विभोर अग्रवाल (रा.प्र.से., उप सचिव) को उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। अन्वेष धृतलहरे (रा.प्र.से., उप सचिव) को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल नवीन पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण करें और पालन प्रतिवेदन सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।