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बिहार में ग्रामीण सड़कों के निर्माण से कम हुई गांवों से शहरों की दूरी

–    नाबार्ड के सहयोग से राज्य की 2025 ग्रामीण सड़कों में 1859 पर फर्राटा भर रहे हैं छोटे बड़े वाहन –    कुल 1235 ग्रामीण पुलों में 910 पुलों का भी निर्माण कार्य पूर्ण, ग्रामीण कार्य विभाग ने जारी की सड़कों के निर्माण की प्रगति रिपोर्ट    पटना, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की मदद से बिहार में निर्मित ग्रामीण सड़कों और पुलों का संजाल बुनने का काम अब लगभग अपने अंतिम चरण में है। राज्य में बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों के निर्माण से गांवों की तस्वीर तो बदली ही है, साथ ही राज्य के सुदूर गांवों से शहरों की दूरी लगातार कम गई है। साथ ही राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को यह सड़कें नई रफ़्तार दे रही हैं। नाबार्ड के सहयोग से इस राज्य योजना के तहत विभिन्न जिलों में स्वीकृत सड़कों के निर्माण की ग्रामीण कार्य विभाग ने जिलावार प्रगति रिपोर्ट गुरुवार को जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में राज्य की कुल 2025 ग्रामीण सड़कों के निर्माण की विभाग ने प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी। जिसमें 1859 सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इन 2025 सड़कों की कुल लम्बाई 5254.490 किलोमीटर है, जिसमें 4822.474 सड़कों का निर्माण कर लिया गया है। इसी तरह, राज्य में ग्रामीण सड़कों के साथ-साथ कुल 1235 पुलों के निर्माण का लक्ष्य भी नाबार्ड के सहयोग से निर्धारित किया गया था। जिसमें अबतक कुल 910 पुलों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 325 पुलों का निर्माण का कार्य जारी है और इसे अगले कुछ महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। नालंदा समेत इन जिलों का प्रदर्शन शानदार ग्रामीण कार्य विभाग के स्तर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार ग्रामीण सड़कों के निर्माण में नालंदा जिला सबसे आगे है। जहां कुल 214 सड़कों की स्वीकृति में से 199 सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। नालंदा में 370 किलोमीटर से भी अधिक सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। जबकि लक्ष्य 396.194 किलोमीटर सड़क के निर्माण का है। साथ ही, नालंदा में 67 पुल का निर्माण किया जाना था, जिसमें 59 पुल बनकर तैयार हो चुके हैं। वहीं, गयाजी में कुल 129 सड़कों के निर्माण की मिली स्वीकृति के विरुद्ध 120 सड़कों का निर्माण हो चुका है। गयाजी में कुल 395.245 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। जिसके विरुद्ध अबतक 365.782 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। जबकि गयाजी में निर्माणाधीन 57 पुलों में 46 पुलों का निर्माण भी पूरा हो चुका है। वहीं, राजधानी पटना जिला में कुल 167 ग्रामीण सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। जिनमें से 157 सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। पटना में कुल 363.767 किमी से अधिक ग्रामीण सड़कों के निर्माण का लक्ष्य है। जबकि इस लक्ष्य के विरुद्ध कुल 329.708 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा चुका है। पटना के ग्रामीण इलाकों में निर्माणाधीन कुल 54 पुलों में 46 पुल बनकर तैयार हो चुके हैं। वहीं, औरंगाबाद में कुल 244.856 किलोमीटर, दरभंगा में 235.740 किमी, पूर्वी चंपारण में 230.772 किमी, मुंगेर में 202.814 किमी, रोहतास में 176.462 किमी, जहानाबाद में 169.606 किमी, सीतामढ़ी में 151.346 किमी, मुजफ्फरपुर में 139.682 किमी सड़कों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वहीं, जमुई, मधुबनी, समस्तीपुर, गोपालगंज, किशनगंज और नवादा में भी ग्रामीण सड़कों के निर्माण का काम लगभग पूर्ण हो चुका है।

बिहार में जनता का गुस्सा, नित्यानंद राय ने राहुल और तेजस्वी पर साधा निशाना

पटना  केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के समर्थकों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए दोनों पार्टियों को कटघरे में खड़ा करते हुए राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से बिहार और देश के लोगों से माफी मांगने की बात कही। उन्होंने कहा, "बिहार के लोग यह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के मंच से टिप्पणी की जाए।" केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे विपक्ष के नेता बनने के लायक नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 'वोटर अधिकार यात्रा' के नाम पर देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरोधी दलों के लोगों ने 'वोटर अधिकार यात्रा' को गाली-गलौज करने का मंच बनाकर रख दिया है। आजकल राहुल गांधी और तेजस्वी यादव संविधान की कॉपी जेब में लेकर घूम रहे हैं, लेकिन इन लोगों ने संविधान को मजाक बनाकर रख दिया है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नहीं मालूम है कि प्रधानमंत्री का पद संवैधानिक है? प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं, किसी पार्टी के नहीं? उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर तत्काल माफी मांगें, अन्यथा भारतीय जनता पार्टी चुप नहीं बैठेगी। बिहार के 14 करोड़ लोगों में जबरदस्त गुस्सा है और इसका जवाब जनता देने के लिए तैयार है।

पशुपालन से जुड़े व्यवसायों में सरकार देगी सहायता

* पशुपालन से जुड़े व्यवसायों में सरकार देगी आर्थिक सहायता, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर * किसानों को पशुपालन से जुड़ी योजनाओं में 50 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी * पशुपालन से जुड़े उद्यमों को शुरू करने में महत्वपूर्ण सहायता साबित होगी यह योजना * चारा प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी सरकार पटना, बिहार सरकार के पशुपालन निदेशालय ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) के अंतर्गत उद्यमिता विकास कार्यक्रम (एनएलएम-ईडीपी) की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना और पशुपालन को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाना है।       इस कार्यक्रम के तहत किसानों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारिता संगठनों, और निजी उद्यमियों को पशुपालन से जुड़े व्यवसायों में सरकार के स्तर से सहायता प्रदान की जाएगी।       इस कार्यक्रम का मकसद रोजगार सृजन और उत्पादकता वृद्धि करना है। जुगाली करने वाले छोटे पशु, कुक्कुट और सूअर पालन क्षेत्र और चारा क्षेत्र में उद्यमिता विकास के माध्यम से रोजगार का सजृन करना है। नस्ल सुधार के जरिए प्रति पशु उत्पादकता में वृद्धि करना है। मांस, अंडा, बकरी का दूध, ऊन और चारे के उत्पादन को बढ़ाना है। चारा बीज आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाकर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना।       मांग आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए चारा प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना को प्रोत्साहित करना भी इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। इसके साथ ही किसानों के लिए पशुधन बीमा सहित जोखिम प्रबंधन उपायों को बढ़ावा देना। मुर्गी, भेड़, बकरी पालन और चारा प्राथमिकता वाले क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करना। उत्पादन लागत को कम करने और पशुधन क्षेत्र के उत्पादन में सुधार के लिए कौशल आधारित प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकियों के प्रसार को बढ़ावा देना भी इसके प्रमुख उद्श्यों में शामिल है।        इस कार्यक्रम के तहत योजनाओं में लाभार्थियों को अधिकतम 50% कैपिटल सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो पशुपालन से जुड़े उद्यमों को शुरू करने में महत्वपूर्ण सहायता साबित होगी। माना जा रहा है ति यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मददगार होगी।       अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति http://nlm.udyamimitra.in या www.dahd.nic.in वेबसाइट पर संपर्क कर सकते हैं। उद्यमिता विकास कार्यक्रम बिहार के किसानों और पशुपालकों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो न केवल रोजगार उत्पन्न करेगा बल्कि पशुधन क्षेत्र को आधुनिक बनाएगा।

19 करोड़ की लागत से वैशाली गोरौल-सोन्धो-मथनामल सड़क चौड़ीकरण-मजबूतीकरण को स्वीकृति : सम्राट चौधरी

* गोरौल-सोन्धो-मथनामल सड़क चौड़ीकरण-मजबूतीकरण से आवागमन सुगम, रोजगार के बढेंगे अवसर * सड़कों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है डबल इंजन सरकार पटना, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि वैशाली पथ प्रमंडल- हाजीपुर अंतर्गत गोरौल–सोन्धो–मथनामल (12.66 किमी) सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना पर कुल 1951.63 लाख यानि उन्नीस करोड़ इक्यावन लाख रुपये तिरेसठ हजार रुपये की लागत आएगी।  चौधरी ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण से स्थानीय लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आर्थिक-सामाजिक विकास को गति मिलेगी। सम्राट चौधरी ने कहा- बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की डबल इंजन सरकार सूबे में सड़कों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। 2005 की तुलना में बिहार में विशाल सड़क नेटवर्क तैयार हुआ है। इसी कड़ी में वैशाली गोरौल-सोन्धो-मथनामल सड़क के चौड़ीकरण-मजबूतीकरण को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के पूर्ण होने से वैशाली क्षेत्र के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

कोटा में बाढ़ का पानी घटा, गांवों में हालात होने लगे सामान्य

कोटा राजस्थान के बूंदी जिले के नैनवां, कापरेन और केशोरायपाटन इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी जैसे-जैसे कम हो रहा है, ग्रामीण जीवन की टूटी हुई कड़ियों को फिर से जोड़कर उसे पटरी पर लाने में जुट गए हैं। वे अपने भीगे हुए घरेलू सामान, गीले कपड़ों और अनाज को सुखा रहे हैं तथा अपने अपने घरों और दुकानों में बाढ़ के कारण जमा गाद को बाहर निकाल रहे हैं। इस क्षेत्र के किसानों को बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है, सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्के की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। नैनवां ब्लॉक में पैबलापुरा बांध के नीचे की ओर स्थित 1,500 से अधिक आबादी वाला डोकुन गांव और पड़ोसी देवरिया गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान बांध का पानी उफनकर अचानक घरों और दुकानों में घुस गया था। डोकुन गांव के निवासी रमेश नागर ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से घरों में घुस आया कि लोगों को अपने घरेलू सामान या फसलों को बचाने का भी समय नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उनके घरों में रखे गेहूं, सोयाबीन, चना और मूंग से भरे सैकड़ों बोरे पूरी तरह भीगकर खराब हो गए। इस बीच, प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं पहुंची है। कांग्रेस की बूंदी जिला इकाई के अध्यक्ष और केशोरायपाटन से विधायक सीएल प्रेमी ने मीडिया को बताया, ‘‘बाढ़ के बाद के हालात केशोरायपाटन, कापरेन और नैनवां क्षेत्रों में सबसे खराब हैं। इन इलाकों के गांवों के लगभग हर घर और दुकान को भारी नुकसान हुआ है। संपत्ति और फसलें नष्ट हो गई हैं, अधिकतर कच्चे मकान ढह गए हैं, मवेशी मर गए हैं। राज्य सरकार को शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों तक तुरंत राहत पहुंचानी चाहिए।’’ बूंदी के विधायक हरिमोहन शर्मा ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार ने अब तक बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए कोई मुआवज़ा घोषित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत मानदंडों के तहत निर्धारित सहायता राशि अपर्याप्त है और गांवों में हुए नुकसान को देखते हुए ‘‘यह सागर में एक बूंद के समान है और सहायता के नाम पर एक मजाक है’’। इस बीच, केशोरायपाटन के उप-मंडल अधिकारी (एसडीएम) ऋतुराज शर्मा ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य और नुकसान का सर्वेक्षण जारी है। एसडीएम ने कहा, ‘‘हम जल्द ग्राम पंचायतों में शिविर लगाने जा रहे हैं, ताकि मौके पर ही दस्तावेजों और राहत संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।’’ उन्होंने बताया कि लोग राहत शिविरों से अपने अपने घर लौट चुके हैं।  

पटना साहिब की जंग: नंद किशोर यादव को BJP ने सौंपी कमान, कांग्रेस ने दिखाया दमखम

पटना सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंंद सिंह जी की जन्मस्थली पटना साहिब की व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी खास पहचान है। यहां मारुफगंज, मंसूरचक, रामबाग, मच्छरहट्टा जैसे मोहल्लों में अनाज-मसाले से लेकर शृंगार व छोटे खिलौनों की थोक मंडी और बड़ी संख्या में कुटीर उद्योग हैं। पहले इसे पटना पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2008 में परिसीमन के बाद यह क्षेत्र पटना साहिब बन गया। कांग्रेस, जनसंघ और समाजवादियों को बारी-बारी से मौका देने वाला यह विधानसभा क्षेत्र पिछले साढ़े तीन दशक से भाजपा का गढ़ है। इस सीट से भाजपा के नंदकिशोर यादव पिछले सात चुनावों से लगातार जीत रहे हैं। वह बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं और इस लिहाज से पटना साहिब महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है। नंद किशोर यादव इस बार चुनाव मैदान में आठवीं बार यहां उतरने वाले हैं। 1957 में अस्तित्व में आए पटना पूर्वी क्षेत्र में 1990 तक नौ विधानसभा चुनावों में सर्वाधिक पांच बार कांग्रेस जीती। भारतीय जनसंघ को दो और जनता पार्टी तथा जनता दल को एक-एक बार सफलता मिली। 1995 में इस सीट पर पहली बार नंदकिशोर यादव जीते। तब से यह भाजपा का गढ़ बना है। इस बार चुनाव में यह सीट इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के खाते में आने के आसार हैं। 90 के दशक के बाद कांग्रेस पहली बार विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर दिख रही है। एक-एक सीट का आकलन हो रहा है। कांग्रेस पटना साहिब में किसे उम्मीदवार बनाती है, यह भी अहम पहलू होगा। उधर, जनसुराज ने भी सक्रियता बढ़ाई है और चुनाव संघर्ष को त्रिकोणीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। नंदकिशोर यादव क्षेत्र से लगाव व विकास कार्यों की बदौलत फिर चुनाव मैदान में उतरने को तैयार हैं। कहते हैं, क्षेत्र का चहुंमुखी विकास मेरा सपना है। उम्मीद है कि जात-पात से ऊपर उठ इस बार भी जनता हमें आशीर्वाद देगी। प्रतिद्वंद्वी दल सामाजिक समीकरण साधने के साथ वे मुद्दे भी उठा रहे हैं, जो विकास से अछूते हैं। 2015 के चुनाव में कांटे की टक्कर नंदकिशोर यादव को क्षेत्र के लोग ‘नंदू भइया’ से भी बुलाते हैं। वह पथ निर्माण, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रहे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था, जब जदयू, राजद व कांग्रेस का महागठबंधन था। राजद ने उनके शिष्य रहे संतोष मेहता को उतारा और मुकाबला इस कदर कांटे का रहा कि नंदकिशोर यादव के सिर महज 2792 मतों से जीत का सेहरा बंधा। चुनावों में नंद किशोर यादव के सामने प्रतिद्वंद्वी पार्टी और चेहरा बदलता रहा। 1995 में उनके सामने राजद के रामलखन सिंह यादव थे तो 2000 में उनका सामना राजद के ही ज्ञानेन्द्र कुमार ज्ञानू से हुआ। इसी तरह 2005 में हुए दो चुनावों में उनके सामने राजद ने भारती यादव (फरवरी) और अनिल यादव (नवंबर) को उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस ने 2010 के चुनाव में परवेज अहमद को टिकट दिया, जबकि 2015 में राजद ने संतोष मेहता तो 2020 में कांग्रेस ने प्रवीण कुशवाहा को मैदान में उतारा था। नंद किशोर यादव जी बिहार में कई विभागों के मंत्री रहे। अभी विधानसभा के अध्यक्ष हैं। बिहार की राजनीति में जितना बड़ा उनका चेहरा है, उसके मुताबकि पटना साहिब का विकास नहीं हुआ। पटना सिटी के इलाके में आवागमन सुगम नहीं हो सका। कई इलाकों में लोग जलजमाव से त्रस्त हैं। अपराध भी बेलगाम है। -प्रवीण सिंह कुशवाहा, कांग्रेस प्रत्याशी पटना साहिब के विधायक सह बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने कहा कि जातपात से ऊपर उठकर मैं विकास की राजनीति करता हूं। पटना साहिब में सड़कों के निर्माण के लिए 125 करो़ड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गयी है। मंगल तालाब के सौन्दर्यीकरण अगले माह शुरू हो जाएगा। गंगा पाथ के निर्माण से जाम से काफी राहत मिली है। पटना घाट समेत अन्य सड़कों का निर्माण पूरा हो जाने से आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। पांच साल में दिखा यह बदलाव ● जेपी गंगा पथ का दीदारगंज तक विस्तार ● गायघाट से पटना घाट तक लिंक रोड का निर्माण ● गायघाट में आईआईटी की स्थापना ● मंगल तालाब पाटलिपुत्र में इंडोर स्टेडियम का निर्माण ● गुरु गोविंद सिंह अस्पताल को जिला अस्पताल का दर्जा वायदे, जो पूरे नहीं हुए – : ● अशोक राजपथ और उससे सटे इलाकों को जाम से मुक्ति नहीं ● बरसात में जल्ला के कृषि योग्य भूमि को जलजलाव से निजात नहीं ● कुटीर उद्योगों का दायरा बढ़ने की जगह सिमट रहा है ● छोटी पहाड़ी और महादेव स्थान के पास अंडरपास नहीं बना ● अंतरराज्यीय बस स्टैंड बना पर जाम की समस्या का नहीं हुआ निदान कब-कौन जीता 1957 – जेहरा अहमद (कांग्रेस) 1962 – जेहरा अहमद (कांग्रेस) 1967 – रामदेव महतो (भारतीय जनसंघ) 1969 – रामदेव महतो (भारतीय जनसंघ) 1972 – जमील अहमद (कांग्रेस) 1977 – रामदेव महतो (जनता पार्टी) 1980 – शरत कुमार जैन (कांग्रेस) 1985 – शरत कुमार जैन (कांग्रेस) 1990 – महताब लाल (जनता दल) 1995 – नंद किशोर यादव (भाजपा) अबतक  

NH-107 अपग्रेडेशन को हरी झंडी, 22 करोड़ से काझी पथ होगा और मजबूत

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरूवार को बताया कि पथ प्रमंडल पूर्णियां अंतर्गत एन.एच.-107 से काझी (कुल लंबाई 6.000 किमी) पथ चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई है। सम्राट चौधरी ने बयान जारी कर बताया कि इस योजना की लागत 22 करोड़ 61 लाख 70 हजार रुपये आएगी। उन्होंने कहा कि पथ निर्माण विभाग से तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद निविदा प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। इसके क्रियान्वयन और खर्च की जिम्मेदारी पथ प्रमंडल पूर्णिया के कार्यपालक अभियंता को दी गई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में डबल इंजन वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार, सड़कों के बुनियादी ढ़ांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। यही वजह है कि बिहार में सड़कों का विशाल नेटवर्क तैयार हुआ है। हाल में ही सरकार ने पूर्णिया जिले के पथ प्रमंडल अंतर्गत एनएच-107 के चेथरीयपीर चौक से चम्पानगर भाया धनहरा, कुम्हारटोला, जंगैली, जगनी तक कुल 7.653 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी और अब इसी कड़ी में 22 करोड़ 61 लाख 70 हजार रुपये की लागत से पूर्णिया में एन.एच.-107 से काझी पथ का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि काझी पथ का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण जहां आवागमन सुगम होगा वहीं रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।  

गरीब-मजदूरों के मामले में मांगी थी घूस, ESIC मैनेजर रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

सोनीपत हरियाणा में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम भ्रष्टाचार पर लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी के तहत अब रोहतक और सोनीपत एसीबी की संयुक्त टीम ने सोनीपत में तैनात ESIC मैनेजर विनोद को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार 3 माह पहले ही ट्रांसफर होकर सोनीपत पहुंचे मैनेजर विनोद ने गरीब-मजदूरों की मुआवजा राशि निपटाने के बदले शिकायतकर्ता सागर से 16 हजार रुपये की मांग की थी। शुरूआत में आरोपी ने 5 हजार रुपये ले लिए और बाकि राशि बाद में देने का दबाव बनाया। परेशान होकर युवक ने एसीबी से शिकायत की। योजना बनाकर जब शिकायतकर्ता ने 11 हजार रुपये दिए तो एसीबी टीम ने मौके पर छापा मारकर विनोद को गिरफ्तार कर लिया। ACB अधिकारी सचिव कुमार ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और आगे की कार्रवाई कानून के मुताबिक की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि मजदूरों के हक पर डाका डालने वाले भ्रष्ट अधिकारी किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। 

सरकार से नाराज NHM स्टाफ, सिर मुंडवाकर जताया आक्रोश

सूरजपुर छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16 हजार से ज्यादा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी बीते 18 अगस्त से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. मोदी की गारंटी को आधार बनाते हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है. सरकार की अनदेखी से नाराज कर्मचारियों का हड़ताल आज 11 वें दिन भी जारी है. सूरजपुर बस स्टैंड के पास NHM कर्मचारियों ने नियमितीकरण समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आज सिर मुंडवा कर विरोध प्रदर्शन किया है. बता दें, लगातार 11 दिनों से वे अपनी मांगों को लेकर अलग-अलग जिलों में अलग-अलग ढंग से हड़ताल कर रहे हैं. बीते दिन बुधवार को मनेंद्रगढ़ में NHM कर्मचारियों ने PPE किट पहनकर बाजार में भीख मांगते हुए प्रदर्शन किया. ये वही किट है, जो कोरोना काल में पहनी जाती थी. वहीं स्वास्थ्य कर्मचारियों के लगातार हड़ताल पर रहने से अस्पतालों में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्वास्थ्य संबंधित व्यवस्थाओं में काफी असर पड़ रहा है. ‘मोदी की गारंटी खोज अभियान’ 29 अगस्त से सरकार की अनदेखी से नाराज कर्मचारियों ने अब शुक्रवार से ‘मोदी की गारंटी खोज अभियान’ शुरू करने का ऐलान किया है. इसके तहत सभी कर्मचारी राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर जुटेंगे और वहां से प्रदेशभर में इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे. संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा ने ‘मोदी की गारंटी’ का नारा देकर घोषणा पत्र जारी किया था. उसमें एनएचएम कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने का वादा किया गया था. लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार ने अब तक 160 से ज्यादा ज्ञापन दिए जाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की. मजबूर होकर कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा. डॉ. मिरी ने कहा कि शुक्रवार 29 अगस्त को प्रदेशभर से कर्मचारी अपने-अपने जिलों से राजधानी की ओर कूच करेंगे. रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों में ‘मोदी की गारंटी खोज अभियान’ चलाया जाएगा. इसके लिए विशेष रुप से तैयार किये गए 2 लाख पंपलेट बांटे जाएंगे, जिनके जरिए लोग सरकार से पूछेंगे कि वादा की गई गारंटी आखिर कहां गायब हो गई. आंदोलनकारी कर्मचारी आम जनता, दुकानदारों और परिचितों से मिलकर अपनी पीड़ा भी साझा करेंगे.

पूर्व CM भूपेंद्र हुड्डा पर अभय चौटाला का निशाना, कहा वोट काटने में सहयोगी

फतेहाबाद  फतेहाबाद की जाट धर्मशाला में बुधवार को इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने 23 सितंबर को होने वाली ताऊ देवीलाल जयंती समारोह को लेकर कार्यकर्ताओं को निमंत्रण दिया। इसके बाद वह मीडिया से भी रूबरू हुए। अभय चौटाला ने भूपेंद्र हुड्डा पर साधा निशाना  अभय सिंह चौटाला ने कहा कि विधानसभा के सत्र में विपक्ष पूरी तरह से नाकाम रहा है और सरकार को घेर नहीं पाया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी के 37 विधायक होते तब हम बताते कि विपक्ष क्या होता है। उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा वोट काटु है और इन्होंने ही बीजेपी की सरकार बनाने में मदद की है। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि मुझे हरवाने में भी बीजेपी और कांग्रेस एक हो गई थी और यह जानती थी कि अगर अभय सिंह चौटाला जीत गया तो वह विधानसभा में किसी को बोलते नहीं देगा। वही आयुष्मान योजना को लेकर रुकी डॉक्टरों की पेमेंट को लेकर भी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि कुछ डॉक्टर आयुष्मान योजना का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहे है।