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रोजगार महाकुंभ लखनऊ: अगस्त के अंत में 50 हजार युवाओं के लिए मौका

लखनऊ इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में 26 से 28 अगस्त तक रोजगार महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें 50 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार का अवसर उपलब्ध मिलेगा। इसमें देश-विदेश की कंपनियां भाग लेंगी। इसके प्रचार- प्रसार के लिए सोमवार को श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने विधान भवन के सामने से रोजगार रथ को रवाना किया, जो अलग- अलग जिलों में जाकर युवाओं को रोजगार महाकुंभ की जानकारी उपलब्ध कराएगा। रथ को रवाना करते हुए मंत्री ने बताया कि शासन की मंशा है कि हर युवा को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इसी उद्देश्य से रोजगार महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें एक लाख से अधिक युवाओं का पंजीकरण अपेक्षित है। रोजगार महाकुंभ में पंद्रह हजार से अधिक अंतरराष्ट्रीय अवसर मिलेंगे, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जापान और जर्मनी जैसे देशों में प्लेसमेंट शामिल हैं। वहीं 35 हजार से अधिक घरेलू नौकरियां आईटी, विनिर्माण, सेवा और उभरते उद्योगों में दी जाएंगी।   प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन डॉ. एमके शन्मुगा सुन्दरम ने बताया कि रोजगार महाकुंभ में वैश्विक नियोक्ता, उद्योग जगत के नेता और नौकरी चाहने वाले एक मंच पर आएंगे। 10 हजार से अधिक आफर लेटर मौके पर ही जारी होंगे, जिनमें दो हजार से अधिक विदेशी प्लेसमेंट के होंगे। एआई प्रशिक्षण मंडप और रोजगार एवं कौशल प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण होंगे। यहां डिजिटल स्किल्स और एआइ आधारित नौकरी की तैयारी पर फोकस रहेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री युवा स्टॉल पर स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी मिलेगी और राज्य के स्टार्टअप अपने नवाचार प्रस्तुत करेंगे। द इकोनॉमिक टाइम्स के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भविष्य के रोजगार बाजार और कौशल रणनीतियों पर चर्चा होगी। उन्होंने यह भी बताया कि सेवायोजन विभाग ने हाल ही में 5978 निर्माण श्रमिकों को इजराइल भेजा है। वहीं जर्मनी, जापान और इजराइल में नर्स व केयरगिवर की नई रिक्तियां आई हैं, जिनमें साढ़े एक लाख रुपये तक वेतन मिलेगा। प्रदेश सरकार ने युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन भी बनाया है। इस मौके पर विशेष सचिव नीलेश कुमार, निदेशक सेवायोजन नेहा प्रकाश, पूजा यादव और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।  

राज्य में IPS अफसरों का बड़ा फेरबदल, 6 अधिकारियों के स्थानांतरण के आदेश

पटना  विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला जारी है। अगस्त में दूसरी बार भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। एक साथ 6 आईपीएस अधिकारियों को नए पद का प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा 26 बिहार पुलिस सेवा अफसरों को भी नई जिम्मेदारी मिली है। ट्रांसफर और नियुक्ति को लेकर 7 अगस्त गुरुवार गृह विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। आदेश के तहत बैच 2022 की आईपीएस अधिकारी शैलजा को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 हिलसा नालंदा के पद पर भेजा गया है। इससे पहले वह सहायक पुलिस अधीक्षक, वैशाली पद पर कार्यरत थी। मोहिबुल्लाह अंसारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 नगर पटना को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-2 विधि व्यवस्था पटना के पद पर भेजा गया है। बता दें कि इससे पहले 2 अगस्त को भी बिहार सरकार ने 10 आईपीएस और एक बीपीएस अधिकारी का तबादला किया था।  कई जिलों के एसपी बदले गए थे।   इन आईपीएस अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी  संकेत कुमार, सहायक पुलिस अधीक्षक सारण को स्थानांतरित कर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिक्रमगंज रोहतास पद की जिम्मेदारी सौंप गई है। गरिमा, सहायक पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरपुर को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सरैया मुजफ्फरपुर के पद पर नियुक्त किया गया है। साक्षी कुमारी सहायक पुलिस अधीक्षक, बेगूसराय को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बलिया बेगूसराय पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कमल मीणा, सहायक पुलिस अधीक्षक दरभंगा को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मसौढ़ी पटना के पद पर भेजा गया है। 25 से अधिक BPS अफसर इधर से उधर  सुनीता कुमारी, अपर पुलिस अधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग को स्थानांतरित करके अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पुपरी सीतामढ़ी के पद की जिम्मेदारी सौंप गई है। सुमित कुमार अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 हिलसा नालंदा को स्थानांतरित करके वरीय पुलिस उपाधीक्षक बिहार पुलिस अकादेमी राजगीर के पद पर भेजा गया है। राजेश कुमार पुलिस उपाधीक्षक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को स्थानांतरित कर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी झाझा, जमुई के पद की जिम्मेदारी दी गई है। ज्योति शंकर पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राइम) नालंदा को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 सदर पूर्णियां के पद पर नियुक्त किया गया है। गोपाल कृष्ण को पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राइम) जहानाबाद के पद पर भेजा गया है। नवल किशोर को पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राइम) पटना की जिम्मेदारी मिली है। कुमार संजय को पुलिस उपाधीक्षक विधि व्यवस्था शाखा बिहार पुलिस मुख्यालय पटना के पद पर नियुक्त किया गया है। अतनु दत्ता, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पुपरी सीतामढ़ी को स्थानांतरित कर पुलिस उपाधीक्षक यातायात बेतिया के पद पर नियुक्त किया गया है। शैलेश प्रीतम पुलिस उपाधीक्षक यातायात सिवान को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बनमनखी पूर्णियां के पद पर नियुक्त किया गया है। सुशील कुमार को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अररिया पद पर भेजा गया है। नरेंद्र कुमार पुलिस उपाधीक्षक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। सुनील कुमार सिंह को पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय शिवहर पद पर नियुक्त किया गया है।

31 सितंबर से 14 अगस्त तक राज्य में चलाया गया ऑपरेशन नया सवेरा

इस अभियान में 28 पुरुष और 22 महिला यानी 50 मानव तस्करों को किया गया गिरफ्तार पटना पूरे राज्य में मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार, ऑर्केस्ट्रा या थियेटर ग्रुप समेत ऐसे अन्य स्थानों में फंसे 112 नाबालिग लड़के या लड़कियों को मुक्त कराया गया है। इसके लिए पूरे राज्य में 31 जुलाई से 14 अगस्त तक विशेष अभियान ऑपरेशन नया सवेरा चलाया गया। इस दौरान मुक्त कराए गए 112 पीड़ितों में 41 नाबालिग लड़कियों, 7 महिलाओं और 64 नाबालिग लड़कें शामिल हैं। इस दौरान 28 पुरुष और 22 महिला समेत 50 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी एडीजी (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने दी। पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित इस प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि इस दौरान 24 एफआईआर दर्ज की गई है।        एडीजी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानव व्यापार निरोध दिवस (30 जुलाई) के अवसर पर यह विशेष अभियान शुरू करके मानव व्यापार, बाल श्रम, अनैतिक देह व्यापार और ऑर्केस्ट्रा या थियेटर से पीड़ितों को मुक्त कराया गया है। इनके पुनर्वास के लिए यह अभियान चलाया गया है। इसके तहत पटना जिले से 2, किशनगंज से 7, पूर्णिया से 3, रोहतास से 3, मधुबनी से 1 और अररिया से 3 समेत कुल 19 ऑर्केस्ट्रा या थियेटर ग्रुप तथा मानव व्यापार के मामले में सारण जिला से 29 और बेतिया से 1 यानी कुल 30 को मुक्त कराया गया है। इसके साथ ही बाल श्रम मामले में पटना से 23, सीतामढ़ी से 21, वैशाली से 4, कटिहार से 3, बगहा से 1, मधुबनी से 3, नरकटियागंज रेलवे स्टेशन से 2 और सासाराम रेलवे स्टेशन से 6 यानी कुल 63 को बाल श्रम के चंगुल से मुक्त कराया गया है। मुक्त कराए गए पीड़ितों में नेपाल के 3, पश्चिम बंगाल के 13, उत्तरप्रदेश के 4, उड़ीसा एवं झारखंड के 1-1 पीड़ित शामिल हैं।         एडीजी अमित कुमार जैन ने बताया कि इस वर्ष जनवरी से अब तक सभी जिलों में मानव व्यापार से संबंधित विभिन्न मामलों में छापेमारी की गई। इसमें पुलिस के स्तर से 329 एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें 217 नाबालिग लड़कियों, 77 महिलाओं और 722 नाबालिग लड़कों समेत कुल 1016 पीड़ितों को शोषण से मुक्त कराया गया है। इस दौरान 250 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें 197 पुरुष और 53 महिलाएं शामिल हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत मामले दर्ज कराकर जेल भेजा गया है।  सारण को पहला और पटना को दूसरा स्थान मिला ऑपरेशन नया सवेरा के अंतर्गत बेहतरीन कार्य करने के लिए सारण जिला को पहला और पटना को दूसरा पुरस्कार मिला है। वर्ष 2021 में सीआईडी के कमजोर वर्ग में परामर्श प्रकोष्ठ की स्थापना की गई। तब से 17 अगस्त 2025 तक पारिवारिक विवाद से संबंधित 157 आवेदन इस प्रकोष्ठ को प्राप्त हुए हैं। इसमें 142 मामलों का निपटारा कर दिया गया है। इनमें 56 मामलों में आपसी समझौते के जरिए पारिवारिक विवाद का निपटारा कराया गया है। ट्रांस वुमेन हेल्पडेस्क कमजोर वर्ग के स्तर से उभयलिंगी महिलाओं (ट्रांस वुमेन) के साथ होने वाले भेदभाव के समाधान के लिए हेल्पडेस्क बनाया गया है। इनके मामलों का निपटारा कर उनकी थाना स्तर तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए 855 थानों में पहले से स्थापित महिला हेल्पलाइन को ट्रांस वुमेन हेल्पडेस्क का कार्य करने की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके मामलों का निपटारा करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है।

हड़ताली सर्वे कर्मियों पर विभाग की सख्ती, 10,775 का लॉगिन ब्लॉक

अपर मुख्य सचिव द्वारा जिलों के अपर समाहर्ता राजस्व एवं बंदोबस्त अधिकारी के साथ वीसी कर की गई स्थिति की समीक्षा  हड़ताल पर रहने वालों पर बुधवार से शुरू होगी संविदा समाप्त करने की कार्रवाई पटना  राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने हड़ताल पर गये सर्वे कर्मियों पर कड़ा कदम उठाते हुए कुल 10,775 कर्मचारियों का लॉगिन ब्लॉक कर दिया है। इनमें 446 एएसओ, 656 कानूनगो, 8,759 अमीन और 914 लिपिक शामिल हैं। हड़ताली सभी कर्मियों को तत्काल संबद्ध अंचल कार्यालय में सभी सरकारी कागजात जमा करने का निर्देश दिया गया है। राजस्व मुख्यालय से सभी जिलों के अपर समाहर्ता (राजस्व) एवं बंदोबस्त अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर उपरोक्त निर्देश दिये गये। सभी जिलों के अधिकारियों से हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों की अद्यतन सूची तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। मंगलवार तक ई मेल के माध्यम से कारण पृच्छा सभी हड़ताली कर्मियों को हस्तगत करा देने की कार्रवाई पूर्ण कर लेने का भी आदेश दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिलों से सूची आने के बाद हड़ताल पर  न रहने वाले सर्वे कर्मियों का लॉगिन फिर से सक्रिय कर दिया जाएगा, जबकि हड़ताल पर डटे कर्मचारियों के खिलाफ सेवा-मुक्ति की कार्रवाई बुधवार से शुरू की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि राजस्व महा-अभियान जैसी जनहितकारी गतिविधियाँ प्रभावित न हों और रैयतों की समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके।  राजस्व विभाग के अलावा  इस महा अभियान हेतु ग्रामीण विकास विभाग, अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग तथा पंचायती राज विभाग के कर्मियों का सहयोग भी लिया जा रहा है। साथ ही अपर मुख्य सचिव द्वारा पत्र के माध्यम से शिक्षा विभाग तथा सामाजिक कल्याण विभाग से भी इस कार्य हेतु सहयोग मांगा गया है।  शिक्षा विभाग के टोला सेवकों और तालीमी मरकज से सहयोग मांगा गया है ताकि वे वितरण और आवेदन प्रक्रिया में मदद कर सकें। समाज कल्याण विभाग से आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहयोगियों को जमाबंदी पंजी प्रति के वितरण में स्थानीय परिवारों में बेहतर पहचान के कारण शामिल करने का अनुरोध किया गया है। संबंधित अधिकारियों से आंगनबाड़ी सेविकाओं को नियुक्त कर  जमाबंदी वितरण दल के साथ जोड़ने और समन्वय करने को कहा गया है।  बताते चलें कि राजस्व महा–अभियान की शुरुआत 16 अगस्त से हुई है और 20 सितंबर तक चलने है। इस दौरान घर घर में जमाबंदी पंजी की प्रति और आवेदन प्रपत्र पहुंचाया जाना है। इसी के साथ पंचायत स्तर पर दो शिविर लगाकर रैयतों का आवेदन जमा लेना है। सर्वेकर्मियों की हड़ताल को देखते हुए राजस्व विभाग ने अन्य विभागों के समरूप कर्मियों की सेवा लेने का निर्णय लेते हुए वैकल्पिक कार्ययोजना तैयार कर ली है।

27.78 करोड़ कोसी बराज के रखरखाव और मरम्मत के लिए स्वीकृत: सम्राट चौधरी

* योजना से कोसी बराज की सुरक्षा और गेटों का सुचारु संचालन, किसानों, कृषि उत्पादन और जनसुरक्षा को लाभ मिलेगा। पटना, बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने कहा कि कोसी बराज के 66 गेटों, होइस्टिंग अरेंजमेंट, ईओटी, मोनो क्रेन और संबंधित यांत्रिक उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत के लिए सरकार ने 27 करोड़ 78 लाख 54 हजार 336 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। यह स्वीकृति अगले पांच वर्षों (2025 से 2030) तक गेटों और संबंधित संरचनाओं के संचालन, अनुरक्षण, रख-रखाव और मरम्मत के कार्यों के लिए दी गई है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि विभागीय बजट के अंतर्गत मरम्मत एवं अनुरक्षण मद में 4320.66 लाख रुपये का प्रावधान है। अब इस स्वीकृति के बाद 2778.54 लाख रुपये इस योजना पर खर्च किए जाएंगे। पहले खर्च का अनुमान 48.55 करोड़ रुपये था। लेकिन बाद में इसे घटाकर बजट के हिसाब से ठीक कर दिया गया है। इस योजना के तहत गेटों, प्लेटफॉर्म, पेंटिंग, होइस्टिंग सिस्टम और अन्य उपकरणों का रखरखाव और मरम्मत की जाएगी।  निविदा प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी, ताकि कार्य तय समयसीमा में पूरा हो सके। इस परियोजना के पूरा होने से कोसी बराज के गेटों का कुशल संचालन सुनिश्चित होगा और उनकी दीर्घकालिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। यह कदम बिहार के किसानों और प्रदेश के सिंचाई तंत्र के लिए बेहद अहम है। इससे आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और जनसुरक्षा को भी लाभ पहुंचेगा। श्री चौधरी ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार लगातार किसानों के हित के लिए काम कर रही है। 2005 की तुलना में बिहार में सिंचाई के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ है। इसी कड़ी में कोसी बराज के 66 गेटों, होइस्टिंग अरेंजमेंट, ईओटी, मोनो क्रेन और संबंधित यांत्रिक उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत के लिए सरकार ने 27.78 करोड़ रुपये (2778.54 लाख) की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है।

UP में माफिया पर कड़ी टिपण्णी, अखिलेश यादव ने कहा बन गया है महामाफिया

लखनऊ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल में जबरन वसूली गिरोह संचालित करने के आरोप में कानपुर में एक वकील गिरफ्तारी का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। यादव ने ‘एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश में भाजपाई भ्रष्टाचार का त्रिकोण- फर्जी ‘एनकाउंटर' वाली भ्रष्ट भाजपा सरकार, काली कमाई वाले भाजपा संरक्षित भ्रष्ट अधिकारी, दोनों की करतूतों को छिपाने वाला भ्रष्ट भाजपाई वकील।''  'हजारों करोड़ कमाने वाले भ्रष्टाचारी को न ड्रोन देख पाया…' अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘हजारों करोड़ कमाने वाले भ्रष्टाचारी को न ड्रोन देख पाया, न दूरबीन में वो नजर आया, मामला भी तब खुला जब आपस में ही रंगदारी का धंधा सामने आया। अब देखते हैं कि इस भाजपाई भू-माफिया के अवैध कब्जों पर बुलडोजर अपने आप चलता है या हमारी इस पोस्ट के प्रकाशित होने के बाद या फिर कोई सबसे बड़ा रंगदार, इन सबसे वसूलकर मामला रफा-दफा कर देगा।'' सपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश ‘माफिया मुक्त' होने का दावा करने वाले अब कहां हैं? सच तो ये है कि उत्तर प्रदेश ‘माफिया मुक्त' नहीं हुआ है, बल्कि माफिया किसी एक में समाकर ‘महामाफिया' बन गया है।'' सपा प्रमुख की यह टिप्पणी इस महीने की शुरुआत में कानपुर में वकील अखिलेश दुबे और उनके सहयोगी की गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि में आई है। दुबे पर भाजपा नेता रवि सतीजा सहित कई नामी-गिरामी लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए दुष्कर्म के झूठे मामले दर्ज कराकर जबरन वसूली का गिरोह संचालित का आरोप है। पुलिस के अनुसार, दुबे और उसकी सहयोगी लवी मिश्रा को जबरन वसूली गिरोह और भू-माफिया गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए एक महीने तक चले ‘ऑपरेशन महाकाल' के बाद छह अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने कहा कि दुबे ने पिछले कुछ वर्षों में कई लोगों को ब्लैकमेल किया है और निजी फायदे के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया है।  

बिहार में उद्यमिता क्रांति, हर विचार बन रहा कारोबार

–    बिहार में उद्यमिता की नई उड़ान –    सरकारी योजनाओं से मिल रहा लाभ पटना, बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं अब प्रदेश के आर्थिक विकास और उद्यमिता को नई दिशा देने लगी हैं। गरीब परिवारों से लेकर नवाचार आधारित स्टार्टअप तक, सभी को सरकार की ओर से आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जा रहा है।         उद्योग विभाग की एक ऐसी ही योजना जिसके तहत लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। बिहार लघु उद्यमी योजना के तहत गरीब परिवारों को मासिक आय के आधार पर दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता अनुदान के रूप में दी जा रही है। अब तक 60,205 लाभार्थियों को 512.33 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत अनुदान की राशि तीन किस्तों में दी जाती है, पहली किस्त में 50 हजार, दूसरी में 1 लाख और तीसरी में 50 हजार रुपये।           नए उद्योग स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना भी युवाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत परियोजना राशि के रूप में अधिकतम 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके तहत अब तक 43526 लाभार्थियों को 3072.45 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। इस सहयोग से हजारों युवाओं ने अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है।        इसी तरह बिहार स्टार्टअप नीति ने भी नवाचार और नई सोच वाले युवाओं को बड़ा अवसर दिया है। इस योजना में 10 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसमें अब तक 1522 कंपनियां पंजीकृत हो चुकी हैं। 46 स्टार्टअप सेल और 22 इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष में 2261 एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों को जोड़ा गया।        उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्यभर में 1903 जागरूकता शिविर और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 8099 छात्रों को प्रशिक्षित किया गया और 91 छात्रों को इंटर्नशिप का अवसर मिला। वहीं, स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सिडबी के साथ 150 करोड़ रुपये के फंड का एमओयू भी किया है।

राज्य के सभी 38 जिलों की कुल 17,942 ग्रामीण पथों का कायाकल्प शुरू

–    ग्रामीण सड़कों ने बदली बिहार के गांवों की तस्वीर –    ग्रामीण सड़कों से राज्य के विकास, रोजगार और आर्थिक संभावनाओं को मिल रही गति पटना, मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना (एमएमजीएसयूवाई) के अंतर्गत ग्रामीण पथ सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम के लागू किए जाने से न केवल राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी संरचना को मजबूती मिल रही है, बल्कि इससे गांवों की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। अब यह योजना सिर्फ ग्रामीण सड़कों के संधारण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और सामाजिक सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार बन चुकी है। अबतक इस योजना के तहत राज्य के सभी 38 जिलों की कुल 17,942 ग्रामीण पथों की जिनकी लंबाई 30,627 किलोमीटर है, के पुनर्निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान मिल चुकी है। इन सड़कों से राज्य के हजारों गांवों को हर मौसम में (बारहमासी) निर्बाध संपर्क, बाजारों तक आसान पहुंच, स्कूलों और अस्पतालों तक आवागमन की सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार ने राज्य में मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम लागू कर रखा है। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना का एक महत्वपूर्ण अवयव है, जिसे राज्य मंत्रिमंडल द्वारा पिछले साल नवंबर में स्वीकृति मिल चुकी है। इसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्थित सड़कों का दीर्घकालिक सुदृढ़ीकरण और प्रभावी रख-रखाव करना है। ग्रामीण कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 17,942 स्वीकृत ग्रामीण सड़कों में से 11,985 सड़कें, जिसकी कुल लम्बाई 20,998 किलोमीटर सड़कों का कार्यारम्भ किया जा चुका है। सभी स्वीकृत सड़कों का प्रारंभिक सुधार का कार्य वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही, बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम भी लागू किया है। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सड़कों का दीर्घकालिक सुदृढ़ीकरण और प्रभावी रखरखाव करना है। इस कार्यक्रम के तहत पथों का दो बार कालीकरण किया जाएगा, ताकि उनकी सतह की मजबूती और सड़क की पर वाहनों के सुगम परिचालन लगातार बनी रहे। इस योजना का एक और अहम पहलू यह है कि सभी संवेदकों को रूरल रोड रिपेयर वाहन रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि का प्रतिक्रिया समय के अधीन समाधान किया जा सके और सड़क का उपयोग करने वालों को यात्रा के दौरान कोई असुविधा न हो। राज्य सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि हर वित्तीय वर्ष के बाद पंचवर्षीय अनुरक्षण अवधि से बाहर हुए सड़कों का चयन कर उन्हें फिर से उन्नत किया जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क की गुणवत्ता और स्थायित्व बनी रहे तथा इन्हें टूटने से बचाया जा सके। जिन जिलों की ग्रामीण सड़कों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है, उसमें सबे अधिक मधुबनी और मुजफ्फरपुर की ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। इन दोनों ही जिलों की 1001-1001 सड़कों के सुदृढ़ीकरण और प्रबंधन का कार्य जारी है। जिसकी कुल लम्बाई क्रमश: 17,57.146 और 16,56.49 किलोमीटर है। जबकि समस्तीपुर की 926 सड़कों की जिसकी कुल लम्बाई 1422.844 किमी है। इसी तरह गयाजी की 836 सड़कों की (कुल लम्बाई 1599.927 किमी), पूर्व चंपारण की 899 सड़कों की, पटना की 709, वैशाली की 732 और सिवान की 704 सड़कों को शामिल किया गया है।            ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला पंख इस योजना के कार्यान्वयन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। किसानों के कृषि उत्पादों को बड़ा बाजार मिला है। गांव से शहरों तक आसान पहुंच होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नगदी का प्रवाह बढ़ा है और ग्रामीण परिवारों की आय पर इसका सीधा असर देखा जा रहा है। नई सड़कों ने किसानों को अपनी फसल को समय पर बाजारों तक पहुंचाने का सुगम रास्ता दिया है, जिससे कृषि उपज की गुणवत्ता बनी रहती है और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य भी मिल रहा है। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों में छोटे व्यापार, दुग्ध व्यवसाय और ग्रामीण पर्यटन जैसे क्षेत्रों को भी इससे काफी लाभ हुआ है। इन प्रयासों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का वह सपना भी साकार हो रहा है कि राज्य के किसी भी सुदूर क्षेत्र से राजधानी पटना तक की दूरी महज चार घंटे में तय की जा सके।

उमा भारती का बयान: विपक्ष कर रहा गुलामी से जुड़े नामों का समर्थन, CM योगी से अपील

शाहजहांपुर  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यूपी के शाहजहांपुर जिले का नाम बदलने की मांग करते हुए विवाद को फिर हवा दे दी है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक जिले का नाम किसी स्वतंत्रता सेनानी, संत या समाज सुधारक के नाम पर रखा जाना चाहिए, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व करता हो। उमा भारती ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्ष पर "गुलामी से जुड़े नामों" का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह दल केवल वोट बैंक की राजनीति में जुटे हैं और जनता की भावनाओं का सम्मान नहीं करते। राहुल गांधी पर पलटवार उमा भारती ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया आरोपों पर भी तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था है और सभी शिकायतों की जांच करता है। "अगर जनता राहुल गांधी को वोट नहीं दे रही है, तो उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए, बजाय इसके कि वे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाएं,"। कांग्रेस की 'मतदाता अधिकार यात्रा' शुरू इधर, बिहार में कांग्रेस ने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और "वोट चोरी" के खिलाफ 'मतदाता अधिकार यात्रा' की शुरुआत की है। यह यात्रा 16 दिनों तक चलेगी और 20 से अधिक जिलों से होकर गुज़रते हुए 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी। इस यात्रा की शुरुआत रविवार को सासाराम से हुई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, कन्हैया कुमार और अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया।  

डबल इंजन सरकार का साथ, असलम की सफलता ने चूम लिया ‘आकाश’

सफलता की कहानी उप्र मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में किए गए प्रयासों से बाराबंकी के असलम खान के जीवन में आया बदलाव 2014 में किया केले का व्यवसाय पर मिली निराशा, 2018 में मत्स्य पालन में बाराबंकी में असलम को मिला प्रथम स्थान 24 तालाब व 2 नर्सरी के जरिये सफलता की नई कहानी लिख रहे असलम अब युवाओं को भी दे रहे रोजगार, सरकार की योजनाओं को दिया सफलता का श्रेय लखनऊ, डबल इंजन सरकार की योजनाओं का साथ और उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग का मार्गदर्शन मिला तो बाराबंकी के असलम ने 'आकाश' छू लिया। असलम ने 2014 में केले के व्यापार का आगाज किया, लेकिन निराशा हाथ लगी, वही असलम मत्स्य पालन क्षेत्र में 2018 में बाराबंकी में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं। डबल इंजन सरकार की योजनाओं, मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बलबूते असलम आज न सिर्फ सफलता का पर्याय बन चुके, बल्कि आत्मनिर्भर होने के साथ युवाओं को भी रोजगार भी दे रहे हैं। 2014 में शुरू की थी केले की खेती बाराबंकी के फतेहपुर तहसील के बकरापुर गांव के जव्वाद खान के पुत्र असलम खान (40) अब वहां के युवाओं के प्रेरणास्रोत हो गए हैं। स्नातक उत्तीर्ण असलम खान ने 2014 में अपनी पैतृक भूमि पर लगभग 8 एकड़ क्षेत्रफल में केला उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया, यह कार्य वर्ष 2016 तक चला। शुरू में अच्छी आमदनी हुई, परंतु बाद में आमदनी में गिरावट होने से उन्होंने यह व्यवसाय छोड़ दिया। फिर नए व्यवसाय की तलाश में लग गए। शुरू में मत्स्य पालन में भी नहीं मिला लाभ, लेकिन नहीं मानी हार बाराबंकी के ही ग्राम गंगवारा, विकास खंड देवा के मत्स्य पालक मो. आसिफ सिद्दीकी के फार्म को देखने का अवसर मिला। मो. आसिफ से जानकारी लेने के बाद असलम खान ने शुरू में 27000 स्क्वायर फिट में 3 तालाब बनाकर पंगेशियस मछली का पालन प्रारम्भ किया। शुरू में अच्छा मत्स्य बीज नहीं मिलने और जानकारी के अभाव में हानि उठानी पड़ी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। फिर से उन्होंने इन्हीं तीन तालाबों में 35 हजार पंगेशियस फिंगरलिंग का संचय किया तथा छह माह में लगभग 700 ग्राम की 21 टन मछली का उत्पादन किया। इससे उन्हें 8,40,000 रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। इससे उत्साहित होकर 2018 में फिर एक एकड़ में एक और तालाब बनाया। उसमें पंगेशियस के साथ-साथ भारतीय मेजर कार्प मछली का भी संचय किया। 24 तालाब और दो नर्सरी बनाकर मत्स्य पालन कर रहे असलम वर्तमान में 08 एकड़ भूमि में 24 तालाब एवं 02 नर्सरी बनाकर मत्स्य पालन का कार्य वृहद रूप से कर रहे हैं। वर्तमान वर्ष में असलम ने 3 लाख पंगेशियस मत्स्य बीज संचित किया था। इससे लगभग 2.20 लाख मत्स्य बीज के सापेक्ष कुल 162 टन मछली की बिक्री की जा चुकी है। अभी उनके फार्म में औसत 400-500 ग्राम की लगभग 40 हजार मछली उपलब्ध है। इसकी बिक्री भी दिसंबर से प्रारंभ होगी। असलम ने जनवरी 2019 से एबीस मत्स्य पूरक आहार की डीलरशिप ली। अब बाराबंकी, लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, अयोध्या, बहराइच तथा गोण्डा के लगभग 350 किसानों को मत्स्य पूरक आहार की आपूर्ति भी कर रहे हैं। मत्स्य विभाग का सहयोग बना प्रेरक, अब 10 युवाओं को दे रहे प्रत्यक्ष रोजगार असलम ने इस कार्य के प्रारंभ और सफलता की यात्रा में जनपद के मत्स्य विभाग के सहयोग को सराहनीय बताया। वहां से उन्हें मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और मात्स्यिकी से जुड़ी अन्य गतिविधियों को अपनाने की प्रेरणा मिली। वर्ष 2018 में मत्स्य पालन क्षेत्र में असलम को जनपद में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। 2017 से मत्स्य पालन किये जाने के पश्चात ब्लॉक निंदूरा में वर्तमान में पंगेशियस मछली का पालन लगभग 25 हेक्टेयर में हो रहा है। असलम वर्तमान में 10 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार दे रहे हैं। यह लोग मत्स्य फार्म संचालन एवं फीड वितरण में असलम की सहायता करते हैं। एफपीओ का गठन करना चाहते हैं असलम मत्स्य पालक असलम खान अभी 350-400 मत्स्य किसानों के संपर्क में हैं। वे उन्हें मत्स्य पालन में यथासंभव आवश्यक सेवाएं भी दे रहे हैं। वे अपने फार्म पर आरएएस इकाई स्थापित कर चुके हैं। आरएएस इकाई में सर्दियों में पंगेशियस बीज रियरिंग का कार्य करेंगे, जिससे फरवरी एवं मार्च तक आसपास के किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध करा सकें। वे मत्स्य विभाग के सहयोग से एफपीओ भी गठित करना चाहते हैं। वर्जन हर गांव-हर वर्ग तक सरकारी योजनाओं की पहुंच मत्स्य पालन कर युवाओं व महिलाओं ने सफलता की नई कहानी लिखी है, जो केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं की प्रभावशीलता और जमीनी स्तर पर सफलता को दर्शाती है। प्रदेश सरकार के नेतृत्व में समाज के सभी वर्ग तक केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। मत्स्य पालन जैसी विभिन्न योजनाओं से जुड़कर भी लोग आत्मनिर्भर और प्रदेश के आर्थिक विकास में सहभागी बन सकते हैं। एनएस रहमानी, निदेशक, मत्स्य विभाग