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वायु प्रदूषण से राहत का देसी उपाय, इंदौर की छात्राओं ने खोजा 11 औषधियों का धूपन फार्मूला

इंदौर वर्तमान समय में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिसके कारण श्वसन तंत्र से जुड़ी अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग इन बीमारियों से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है। इंदौर के अष्टांग आयुर्वेदिक कालेज की छात्राओं ने एक शोध में यह पाया है कि 11 औषधियों के धूपन से वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। छात्रा हिमानी सोनी ने 11 औषधियों का किया उल्लेख यह शोध केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद की स्पार्क (स्टूडेंटशिप प्रोग्राम फार आयुर्वेदा रिसर्च केन) योजना के अंतर्गत किया गया है। इसमें कालेज की दो छात्राओं का शोध चयनित हुआ है। तृतीय वर्ष की छात्रा हिमानी सोनी ने आचार्य सुश्रुत द्वारा बताए गए तरीकों पर शोध किया। हिमानी ने बताया कि आचार्य सुश्रुत ने दो श्लोकों में 11 औषधियों का उल्लेख किया है।   शोध में यह जानने का प्रयास किया गया कि इन औषधियों को हजारों वर्ष पहले क्यों शामिल किया गया था। शोध से यह स्पष्ट हुआ कि ये औषधियां कृमिनाशक और विषनाशक हैं। यदि वायु में सूक्ष्म जीव या विष मौजूद हैं, तो ये औषधियां उनका नाश करती हैं। इस शोध को आज के संदर्भ में जोड़ते हुए बताया गया कि प्रदूषित वायु के सेवन से लंग्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब इन औषधियों का धूपन (एक आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रिया) किया जाता है, तो यह बाहरी प्रदूषण के साथ-साथ हमारे शरीर में प्रवेश करने वाले सूक्ष्म जीवों से भी लड़ती हैं। इसमें लाक्षा, हल्दी, अतीस, हरितकी, नागरमोथा, हरेणु, एला, तेजपत्र, वक्र, कुष्ठ और प्रियंगु जैसी औषधियां शामिल हैं। शोध में कुछ व्यक्तियों को एक माह तक 15 मिनट तक धूपन दिया गया, जिससे उनकी ब्रेथ होल्डिंग केपेसिटी में वृद्धि हुई। इससे यह सिद्ध होता है कि प्रदूषित वायु के स्थान पर हम शुद्ध वायु ग्रहण कर सकते हैं और यह प्रक्रिया हम अपने घर के कक्ष में भी कर सकते हैं। अनुवांशिक मधुमेह के कारणों पर शोध दूसरी ओर, कालेज की द्वितीय वर्ष की छात्रा अंशिका तोमर ने अनुवांशिक मधुमेह के कारणों पर शोध किया। अंशिका ने बताया कि आयुर्वेद में अनुवांशिक मधुमेह का कारण सात प्रकृति को माना जाता है। शोध में यह पाया गया कि टाइप 2 डायबिटीज एक सामान्य जीवनशैली विकार है, जिसके मुख्य कारण अनुचित आहार-विहार, चयापचय की गड़बड़ी, हार्मोन असंतुलन, मानसिक तनाव और आनुवांशिक कारक हैं। इन कारणों का निदान पंचक के माध्यम से किया जा सकता है। आयुर्वेद में आचार्यों द्वारा बताया गया है कि संतुलित आहार और जीवनशैली का पालन स्वास्थ्य बनाए रखने और रोगों की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है। शोध में यह भी ज्ञात हुआ कि जो व्यक्ति अपनी प्रकृति के अनुसार पथ्य-अपथ्य का पालन करते हैं, उनमें मधुमेह होने की आशंका कम हो जाती है। यह सिद्ध करता है कि प्रकृति भले ही स्थिर हो, लेकिन जीवनशैली में सुधार कर रोगों की आशंका को कम किया जा सकता है। देशभर के 300 विद्यार्थियों का हुआ चयन  इन शोधों पर अब राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में बीमारियों से पीड़ित मरीजों को लाभ मिलेगा। केंद्रीय स्पार्क योजना के तहत शोध के लिए देशभर के करीब 300 विद्यार्थियों का चयन किया गया है, जिन्हें 50 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। देशभर के 539 आयुर्वेदिक कालेजों से हजारों विद्यार्थियों ने शोध के विषय भेजे थे और इन्हें शोध पूरा करने के लिए दो माह का समय दिया गया था। 

योगी सरकार की अनोखी पहल: पोषण पाठशाला से बच्चों की सेहत में सुधार

  – सतत विकास के लक्ष्यों के तहत स्टंटिंग को कम करने के लिए योगी सरकार का संकल्प – पोषण पाठशाला के माध्यम से माता-पिता को जागरूक कर रही योगी सरकार – प्रदेश में स्टंटिंग के खिलाफ खास रणनीति पर काम कर रही प्रदेश सरकार – 75 जिलों में 9.80 लाख से अधिक माप, स्टंटिंग उन्मूलन की दिशा में बड़ी शुरुआत लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में बच्चों में स्टंटिंग (नाटापन) और कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार 'संभव अभियान 5.0' के माध्यम से 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के तहत स्टंटिंग को कम करने का संकल्प लिया है। इस बार इस अभियान का केंद्र बिंदु स्टंटिंग के उन्मूलन को बनाया गया है, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधक है। बीते जुलाई माह से शुरू हुए इस अभियान ने पिछले एक माह में राज्यव्यापी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। साथ ही, 'पोषण पाठशाला' कार्यक्रम ने विश्व स्तनपान सप्ताह (1-7 अगस्त) की थीम 'स्तनपान में निवेश, भविष्य में निवेश' को साकार करते हुए माताओं और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। स्टंटिंग के खिलाफ खास रणनीति पर काम कर रही योगी सरकार योगी सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों के तहत स्टंटिंग को कम करना है, जिसके लिए ठोस नीतियां बनाई जा रही हैं। पोषण पाठशाला के माध्यम से योगी सरकार माता-पिता और अन्य अभिभावकों को जागरुक कर रही है। बच्चों के जीवन के पहले 1000 दिनों में अपर्याप्त पोषण के कारण स्टेंटिंग की समस्या होती है। इसे कम करने के लिए योगी सरकार ने 'छह माह, सात बार' रणनीति अपनाई है। इसके तहत छह माह से कम आयु के शिशुओं की नियमित निगरानी, बीमारी प्रबंधन, और माताओं को स्तनपान सहायता प्रदान की जा रही है। पहले छह माह में केवल स्तनपान और बाद में संतुलित आहार बच्चों के विकास को मजबूत करता है। इस दिशा में, 75 जिलों के 7,500 आंगनबाड़ी केंद्रों में 0-5 वर्ष की आयु के अविकसित बच्चों की माप के लिए कुल 9.80 लाख से अधिक कार्य किए गए हैं। प्रदेश में पहली बार एक साथ स्टंटिंग मापन अभियान चलाया गया इन केंद्रों में अविकसित बच्चों की निगरानी के लिए 7,500 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं, जो सघन ग्रोथ मॉनिटरिंग और न्यूट्रिशन ट्रैकिंग सुनिश्चित कर रहे हैं। बीते 14-15 जुलाई को पूरे प्रदेश में पहली बार एक साथ स्टंटिंग मापन अभियान चलाया गया, जिसमें नोडल अधिकारियों ने बच्चों के एंथ्रोपोमेट्रिक माप (लंबाई, वजन) का सत्यापन किया। स्टंटिंग की वास्तविक स्थिति को समझने और डेटा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए राज्यव्यापी स्टंटिंग वैलिडेशन अभियान शुरू किया गया। इस अभियान में सभी विभागों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल विकास सेवा के संयुक्त प्रयासों से चयनित गांवों में बच्चों की निगरानी की गई हैं। यह पहल समय रहते हस्तक्षेप सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। बीते वर्षों में स्टंटिंग के आंकड़ों में सुधार दर्ज हुआ है। 'पोषण पाठशाला' के माध्यम से मिला प्रशिक्षण विश्व स्तनपान सप्ताह (1-7 अगस्त) के अवसर पर शुरू की गई 'पोषण पाठशाला' ने माताओं को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों ने माताओं को स्तनपान और पोषक आहार के बारे में प्रशिक्षित किया। बताया गया कि पहले 1000 दिन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं संतुलित पोषण से स्टंटिंग को रोका जा सकता है। सघन निगरानी से संभव हो रहा स्टंटिंग की स्थिति का आकलन प्रत्येक जनपद में ब्लॉक और जनपद स्तर के 100 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो आंगनबाड़ी केंद्रों की सघन निगरानी कर रहे हैं। जिलाधिकारी मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित कर रहे हैं, जिसमें स्टंटिंग की स्थिति का आकलन किया जाता है। 'संभव अभियान 5.0' का मुख्य उद्देश्य पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों में अतिगंभीर कुपोषण का चिन्हांकन, चिकित्सीय उपचार, और स्टंटिंग में कमी लाना है। इस अभियान ने गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान भवन के प्रवेश द्वार के नए गुंबद का किया लोकार्पण

– सीएम ने विधान भवन के नये सभा मंडप, सभा कक्ष संख्या-15 और अतिविशिष्ट जलपानगृह का किया उद्धाटन – सीएम योगी ने मानूसन सत्र से पहले की सर्वदलीय बैठक, बैठक में सभी दल के विधायक रहे मौजूद – बैठक में वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, बसपा और कांग्रेस विधायक समेत कई लोग रहे उपस्थित लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानमंडल के मानसून सत्र से पहले रविवार को विधान भवन के प्रवेश द्वार पर नए गुंबद, सभा मंडप का लोकार्पण किया। इसके अलावा नवीनीकृत सभा कक्ष संख्या-15 और अतिविशिष्ट जलपान गृह भी का उद्धाटन किया। साथ ही उन्होंने मानसून सत्र को लेकर सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लिया। सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधान सभा अध्यक्ष ने सतीश महाना ने रविवार को मानूसन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें मुख्यमंत्री के साथ पक्ष और विपक्ष के तमाम नेता उपस्थित थे। इस दौरान कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, मंत्री संजय निषाद, आेम प्रकाश राजभर, कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा, बसपा विधायक उमाशंकर सिंह, विधायक कुंवर रघुराज प्रताप सिंह "राजा भइया" आदि मौजूद रहे।

जंगल से गांव तक… कूनो के चीते पहुंचे मानपुर, कुत्ते और लोगों ने किया पीछा

श्योपुर मानपुर क्षेत्र के बालापुरा और काशीपुर गांवों में दो जंगली चीते खेतों, पगडंडियों और गांव की सड़कों पर टहलते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले कभी भी चीते नहीं देखे गए थे। वायरल हुए वीडियो में चीतों के पीछे एक कुत्ता और ग्रामीण हाथ में डंडा लिए नजर आ रहे हैं। जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम और ‘चीता मित्र’ गांवों में पहुंच गए हैं। चीता मित्र लगातार निगरानी कर रहे हैं और ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों चीतों की लोकेशन पर ड्रोन और बीट गार्ड्स के जरिए नजर रखी जा रही है। यदि वे लंबे समय तक गांवों में ठहरते हैं, तो उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस कूनो नेशनल पार्क के क्षेत्र में भेजा जाएगा।   ग्रामीणों से अपील चीतों से दूर रहें ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों की सुरक्षा के लिए वन विभाग विशेष टीम तैनात करे। वन विभाग ने चेतावनी दी है कि कोई भी व्यक्ति चीतों के पास न जाए और न ही उन्हें फोटो खींचने के लिए उकसाए, क्योंकि इससे खतरा बढ़ सकता है। इसके पहले चीतों का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो बंधी हुई गाय के सामने ही उसके बछड़े का शिकार कर लेते हैं। वह कुछ देर तक वहीं रुककर उसे खाते हुए नजर आते हैं। चीता प्रोजेक्ट के तहत कूनो नेशनल पार्क में लाए गए चीते कई बार पार्क की सीमाओं को लांघकर गांवों में पहुंचे हैं। अब उनके किसी गांव में पहुंचाना आम हो गया है, लेकिन चीता मित्र लगातार उन पर निगाह रखकर ग्रामीणों को उनके लिए सतर्क करते रहते हैं।  

वीआईपी के लिए रोके गए दर्शन, कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन पर लगाया ₹55 हजार का जुर्माना

भोपाल वीआईपी की वजह से भोपाल के एक परिवार को मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित प्रसिद्ध शारदा माता मंदिर में दर्शन नहीं हो पाए थे। उन्होंने आवाज उठाई तो कर्मचारियों ने उन्हें अपमानित किया। इस परिवार ने मंदिर प्रबंधन की ओर से तय शुल्क देकर वाहन पार्किंग की थी। रोपवे का शुल्क दिया था। अब भोपाल के जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मंदिर प्रबंधन और रोपवे का संचालन करने वाली कंपनी को इस परिवार के लिए 55 हजार रुपये का हर्जाना अदा करने का निर्णय दिया है। भोपाल के बागमुगालिया स्थित अरविंद विहार निवासी ललित कुमार गुप्ता पत्नी, बच्चों और अन्य परिजनों के साथ चार साल पहले 2021 में मैहर में मां शारदा देवी के दर्शन करने गए थे। वहां उन्होंने 50 रुपये पार्किंग शुल्क दिया। मंदिर तक जाने के लिए रोपवे के लिए पांच टिकटों के लिए 130 रुपये प्रति टिकट की दर से 650 रुपये का भुगतान किया। उनका समूह लाइन में लगा रहा, लेकिन उनको दो घंटों के बाद भी दर्शन नहीं हो पाए।   पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी थी इस बीच रोपवे प्रणाली के कर्मचारी बिना टिकट वाले वीआईपी लोगों को शीघ्र दर्शन कराकर ले आए। इस परिवार ने इस पर आपत्ति जताई तो उनके साथ रोपवे प्रणाली के कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किया। इससे आहत होकर उन्होंने 2022 में मां शारदा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और दामोदर रोपवे इंफ्रा लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर करके पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह, सदस्य अंजुम फिरोज व प्रीति मुद्गल की बैंच ने सुनवाई में इसे सेवा में कमी मानते हुए मंदिर प्रबंधन समिति और रोपवे का संचालन करने वाली कंपनी को परिवार को दर्शन से वंचित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने कहा- मंदिर में कोई भी भक्त खास या वीआईपी नहीं होता उपभोक्ता मामलों की अधिवक्ता संभावना राजपूत ने बताया कि प्रकरण में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था ही आधार बनी है। जिला उपभोक्ता आयोग ने निर्णय में कहा कि किसी भी मंदिर में कोई भी भक्त खास या वीआइपी नहीं होता है। सभी को एक ही श्रेणी में रखकर लाइन में लगाकर मां शारदा का दर्शन कराने का नियम होना चाहिए। यदि कोई भक्त रोपवे से टिकट लेकर लाइन में लगा और दो घंटे बाद भी दर्शन नहीं हो पाए, वहीं दूसरों को विशेष श्रेणी का दर्जा देकर दर्शन कराया गया तो यह सेवा में कमी है। कलेक्टर ने खड़े कर दिए हाथ मामले में मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में कलेक्टर को प्रतिवादी बनाया गया था। कलेक्टर का कहना था कि मंदिर प्रबंध समिति में दर्शन के काम के लिए दूसरे लोग तैनात हैं। वहीं रोपवे संचालक कंपनी ने अत्यधिक भीड़ को इसकी वजह बताई।

आज और कल MP के 22 जिलों में बारिश, 13 अगस्त से फिर तेज बरसात के संकेत

भोपाल अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी क्रम में शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक दमोह में 92, पचमढ़ी में 29, रीवा में 15, खजुराहो में पांच, सिवनी में तीन, जबलपुर एवं सीधी में दो, छिंदवाड़ा में एक मिलीमीटर बारिश हुई। आज और कल भोपाल, रायसेन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, गुना, ग्वालियर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, मुरैना, श्योपुर, भिंड, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सागर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले में बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक 13 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है। उसके असर से एक बार फिर झमाझम बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं। रविवार, सोमवार को सागर, नर्मदापुरम, भोपाल, ग्वालियर, चंबल संभाग के जिलों में मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है।   यहां बना हुआ है चक्रवात मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी पीके रायकवार ने बताया कि मानसून द्रोणिका वर्तमान में भटिंडा, रोहतक, दिल्ली, हरदोई, बाराबंकी, देहरी, बांकुरा, कोंटाई से बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। इस चक्रवात से लेकर झारखंड तक एक द्रोणिका बनी हुई है। इसी चक्रवात से एक अन्य द्रोणिका गुजरात तक बनी हुई है, जो पश्चिमी मध्य प्रदेश से होकर जा रही है। मध्य प्रदेश में फिर शुरू होगी अच्छी बारिश 13 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने जा रहा है। इस मौसम प्रणाली के असर से मध्य प्रदेश में एक बार फिर अच्छी बारिश का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि मानसून द्रोणिका नीचे आने लगी है। पश्चमी मध्य प्रदेश से होकर द्रोणिका भी गुजर रही है। इस वजह से रुक-रुककर बारिश होने लगी है। 13 अगस्त को कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।

रक्षाबंधन पर योगी सरकार का रिकॉर्ड, सिर्फ 2 दिन में 50 लाख यात्रियों ने की बस यात्रा

  प्रदेश की लाखों बहनों ने उठाया योगी सरकार की निशुल्क यात्रा का लाभ 8 अगस्त को 19.5 लाख, 9 अगस्त को 31.7 लाख यात्रियों ने किया सफर कुल यात्रियों में 70 प्रतिशत तक यात्री निशुल्क यात्रा सुविधा से हो रहे लाभान्वित तीन दिनों में 75 लाख से अधिक यात्रियों के यात्रा करने का अनुमान   लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर रक्षाबंधन पर्व पर महिलाओं के लिए शुरू की गई निःशुल्क बस यात्रा योजना ने इस बार यात्री संख्या के नए कीर्तिमान बनाए हैं। तीन दिनों तक चलने वाली इस सुविधा को देखते हुए रात 12 बजे तक इसके 75 लाख यात्रियों का रिकॉर्ड बनाने की संभावना है। परिवहन निगम के अनुसार इसमें 70 प्रतिशत तक वह यात्री हो सकते हैं, जिन्हें सरकार की ओर से निशुल्क यात्रा का लाभ दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार ने रक्षाबंधन के पर्व पर प्रदेश की माताओं और बहनों को बड़ी सौगात देते हुए 8 से 10 अगस्त तक परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा का तोहफा दिया है। इसमें महिलाओं के साथ एक सहयात्री को भी यह सुविधा दी जा रही है। 3 दिनों में 75 लाख यात्रियों के सफर का अनुमान परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर के अनुसार सामान्य दिनों में निगम की बसों में प्रतिदिन 14-15 लाख यात्री सफर करते हैं, लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर्व के शुरुआती दो दिनों में ही यह आंकड़ा 50 लाख से अधिक पहुंच गया। इनमें लगभग 70 प्रतिशत महिला यात्री थीं, जिन्होंने मुख्यमंत्री योगी की ओर से दिए गए 66 घंटे के ‘सम्मान के तोहफे’ का लाभ लिया। एमडी सरवर ने बताया कि 8 अगस्त की सुबह 6 बजे से ही बस अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ रही। पहले दिन यानी 8 अगस्त को 19.5 लाख से ज्यादा लोगों ने यात्रा की, जो सामान्य दिनों की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक था। रक्षाबंधन के दिन 9 अगस्त को तो यह संख्या 31.7 लाख के पार पहुंच गई, जो सामान्य दिनों की तुलना में 210 प्रतिशत से अधिक रही। तीसरे दिन 10 अगस्त को दोपहर 12.50 बजे तक ही 13 लाख यात्री सफर कर चुके थे और रात 12 बजे तक यह संख्या 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह तीन दिनों में 75 लाख से अधिक लोग बसों में यात्रा करेंगे, जो परिवहन निगम के इतिहास में अभूतपूर्व संख्या है। चलाई गईं अतिरिक्त बसें, तैनात रहे सभी कर्मचारी उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस बार 8 अगस्त सुबह 6 बजे से 10 अगस्त मध्यरात्रि 12 बजे तक महिलाओं और बेटियों के लिए सभी श्रेणी की रोडवेज बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इस अवधि में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बसें चलाई गईं और समस्त अनुबंधित बसों को भी संचालन में लगाया गया। प्रमुख बस स्टेशनों — गाजियाबाद, मुरादाबाद, मेरठ, बरेली, लखनऊ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, कानपुर एवं इटावा — पर यात्रियों की अधिक संख्या को देखते हुए विशेष ड्यूटी और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई। उन्होंने यह भी बताया कि चालक-परिचालकों को प्रोत्साहन राशि देने की योजना लागू की गई है, जिसमें 1800 किलोमीटर संचालन पूर्ण करने पर 1200 रुपए का भुगतान और 6 दिनों तक लगातार कार्य करने पर अतिरिक्त 0.55 रुपए प्रति किलोमीटर दिया जाएगा। वहीं तकनीकी कर्मचारियों को भी प्रतिदिन उपस्थित रहने पर एकमुश्त 500 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। संचालन व्यवस्था बेहतर बनाए रखने वाले कार्मिकों और पर्यवेक्षकों को भी ₹5000 प्रति स्टेशन के हिसाब से सम्मानित किया जाएगा। बहनों ने योगी भाई को दिया धन्यवाद इस सुविधा का लाभ पाने वाली प्रदेश की लाखों महिलाओं ने इस तोहफे के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की यह पहल सिर्फ एक यात्री सुविधा नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सम्मान का प्रतीक है, जिससे न केवल रक्षाबंधन पर्व की खुशियां बढ़ी हैं, बल्कि करोड़ों महिलाओं को सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक यात्रा का भरोसा भी मिला है। झांसी बस डिपो से यात्रा करने वाली संध्या ने कहा कि योगी सरकार ने यह अच्छा कदम उठाया है। इससे महिलाओं को काफी अच्छा महसूस हो रहा है। मुरादाबाद बस डिपो पर महिला यात्री जीतू ने कहा कि इस पहल से लाखों बहनों को लाभ हो रहा है, इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हार्दिक शुक्रिया। योगी सरकार की सुविधा का लाभ हिंदु समुदाय के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय की बहनों ने भी उठाया। उन्होंने भी एक सहयात्री के साथ निशुल्क यात्रा की और योगी सरकार का धन्यवाद दिया। विगत 8 वर्षों में 1.23 करोड़ बहनों को मिला मुफ्त सफर का लाभ 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू हुई रक्षाबंधन पर माताओं-बहनों के लिए रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की योजना बीते आठ वर्षों में नारी सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गई है। इन 8 वर्षों में  1,23,30,194 महिलाओं को इसका लाभ मिला है, जिसके लिए सरकार ने 101.42 करोड़ रुपए का आर्थिक बोझ वहन किया। इन वर्षों में 2023 में सर्वाधिक 29 लाख से अधिक महिलाओं ने निशुल्क यात्रा की। यह सुविधा खासकर ग्रामीण, पिछड़े और निम्न आय वर्ग की महिलाओं के लिए “सम्मान का तोहफा” साबित हुई है, जिससे उन्हें सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक यात्रा का अवसर मिला। रक्षाबंधन को भावनात्मक और पारिवारिक जुड़ाव के साथ मनाने का यह अनूठा प्रयास दर्शाता है कि योगी सरकार महिला कल्याण को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे ज़मीन पर उतारकर महिलाओं की गरिमा और सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है।

योगी सरकार का लक्ष्य 2027 तक फाइलेरिया मुक्त हो उत्तर प्रदेश, फाइलेरिया उन्मूलन अभियान शुरू

– सीएम योगी के निर्देश पर 27 जिलों में जनप्रतिनिधियों व सीएमओ ने किया अभियान का आगाज – 28 अगस्त तक स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर खिलाएंगे दवा, दवा जरूर खाएं और खुद के साथ समुदाय को बीमारी से बचाएं लखनऊ,  योगी सरकार प्रदेश को वर्ष 2027 तक फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है। इसी के तहत प्रदेश में रविवार से 27 जिलों के 195 ब्लाॅक में लिम्फेटिक फाइलेरियासिस के उन्मूलन के प्राथमिक उद्देश्य से व्यापक सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान शुरू किया गया। इन जिलों में जनप्रतिनिधियों ने दवा खाकर अभियान की शुरुआत की। सामुदायिक भागीदारी के महत्व को समझते हुए, योगी सरकार ने कई विभागों को शामिल करते हुए सहयोगात्मक प्रयास की योजना बनाई है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर व्यापक जन सहयोग सुनिश्चित करने और एमडीए अभियान की अंतिम सफलता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अभियान से जोड़ा गया राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप अभियान को सफल बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। इस उद्देश्य अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों का पालन करे और उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करे। इसके अतिरिक्त, मिशन निदेशक ने सभी सहयोगी विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। ये दिशा-निर्देश अभियान के कार्यान्वयन के दौरान एकीकृत और सुसंगत दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं। जन सहभागिता रणनीति का एक प्रमुख पहलू स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को शामिल करना है, जो दी जाने वाली दवा की सुरक्षा और प्रभावशीलता के बारे में जनता की किसी भी चिंता या आशंका को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। फाइलेरिया की रोकथाम में बच्चे और गुरू जी निभाएंगे अहम भूमिका शिक्षा विभाग विभिन्न स्कूल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाकर इस अभियान में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। शिक्षक छात्रों को फाइलेरिया की रोकथाम के बारे में शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस शिक्षा को दैनिक दिनचर्या में शामिल किया जाएगा, जहां शिक्षक प्रार्थना सभाओं के दौरान फाइलेरिया की रोकथाम के महत्व को समझाएँगे। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य एमडीए अभियान में अभिभावकों की भागीदारी और समर्थन को प्रोत्साहित करना है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग भी अभियान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी के प्रसार में सक्रिय रूप से शामिल है। यह जानकारी राशन की दुकानों पर रणनीतिक रूप से साझा की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आबादी के एक बड़े हिस्से तक पहुंच हो। अभियान का उद्देश्य उन परिवारों को अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है जो इस अभियान से हिचकिचा रहे हैं। 15 साल बाद दिखाई देते हैं फाइलेरिया के लक्षण प्रमुख सचिव ने अभियान के महत्व को रेखांकित किया है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि यह फाइलेरिया के दुर्बल करने वाले प्रभावों के विरुद्ध महत्वपूर्ण निवारक उपाय है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अभियान की सफलता व्यापक जनभागीदारी और सहयोग पर निर्भर करती है। फाइलेरिया, संक्रमित क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलने वाला रोग है, जिसके लक्षण अक्सर सूजन और दूधिया पेशाब आने के काफी समय बाद, आमतौर पर 10-15 साल बाद दिखाई देते हैं। हालाँकि फाइलेरिया वर्तमान में लाइलाज है, लेकिन पाँच साल तक दी जाने वाली वार्षिक दवा इस रोग की शुरुआत को प्रभावी ढंग से रोक सकती है। 35 हजार से अधिक औषधि प्रशासक और 7 हजार से अधिक पर्यवेक्षक किये गये तैनात एमडीए अभियान औरैया, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, चंदौली, देवरिया, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कौशाम्बी, लखीमपुर खीरी, कुशीनगर, महाराजगंज, मिर्जापुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, श्रावस्ती, रायबरेली और सुल्तानपुर में चलेगा। इसके लिए 35483 औषधि प्रशासक (डीए) और 7096 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। 195 ब्लॉकों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सूचना एवं संचार तकनीक सामग्री भेज दी गई है और यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सूक्ष्म योजनाएँ बनाई गई हैं कि 195 ब्लॉक टास्क फोर्स की बैठकें हुई हैं और तैयारियों का जायजा लिया गया है। किसी भी गंभीर प्रतिकूल दवा प्रभाव से निपटने के लिए 390 त्वरित प्रतिक्रिया दल तैयार किया गया है। इस व्यापक कार्यान्वयन का उद्देश्य आबादी के एक बड़े हिस्से को फाइलेरिया के खतरे से बचाना है।

गऊ माता की कृपा से समृद्धि का रास्ता: यूपी के लिए सीएम योगी का विजन

  एक गाय के गोबर से 5500 किलोमीटर बिना प्रदूषण फैलाए चलेगी कार एक गोवंश के गोबर से सालाना 225 लीटर पेट्रोल के बराबर मीथेन होगी तैयार रफ्तार पकड़ेगी अर्थव्यवस्था : स्वरोजगार से लाखों की होगी कमाई, बड़ी संख्या में पैदा होंगे नए तौर तरीके के रोजगार निराश्रित गोवंश से प्रदेश में हर दिन औसतन 54 लाख किलोग्राम गोबर (गोमेय) प्राप्त होता है प्रदेश में पहली बार गऊ माता से मिल रहे गोमेय का किया जा रहा इतना व्यापक रूप से प्रयोग लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार और महिलाओं को लघु उद्यम से जोड़ने की तैयारी, योगी सरकार को मिलेगा राजस्व लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन और गऊ माता की कृपा से अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था नई रफ्तार पकड़ने जा रही है। प्रदेश में पहली बार गाय के गोबर से इतने बड़े पैमाने पर मीथेन तैयार की जाएगी, जो वाहनों को लंबी दूरी तक चलाने के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार और हरित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। विशेषज्ञों का कहना है कि एक गाय के गोबर से सालाना 225 लीटर पेट्रोल के बराबर मीथेन गैस तैयार होगी। इसे शुद्ध कर सीबीजी में बदला जाएगा, जिससे एक कार 5500 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तय कर सकेगी। गोबर को सीबीजी संयंत्रों में प्रोसेस किया जाएगा उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में निराश्रित गोवंश से रोजाना औसतन 54 लाख किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है। इस गोबर को सीबीजी संयंत्रों में प्रोसेस किया जा सकेगा, जिसका इस्तेमाल मीथेन बनाने से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में घरों में खाना पकाने, लघु उद्योगों में हीटिंग ईंधन और प्राकृतिक खेती में जैविक घोल के रूप में किया जाएगा। इससे लाखों रुपये तक की सालाना कमाई संभव होगी। कचरे से कंचन' की अवधारणा को मिलेगा बढ़ावा गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि यह 'मीथेन फार्मिंग' आने वाले समय में जीवाश्म ईंधनों का विकल्प बन सकती है। यह योजना 'कचरे से कंचन' की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है, जो परिवहन और हरित अर्थव्यवस्था के लिए प्रभावी ईंधन उपलब्ध कराएगी। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि एक गोवंश के गोबर से तैयार मीथेन प्राकृतिक गैस का ही एक रूप है, जो पर्यावरण अनुकूल और किफायती भी है। हिंदी में कीवर्ड्स सीएम योगी विजन गऊ माता की कृपा वन ट्रिलियन इकोनॉमी यूपी गाय का गोबर सीबीजी 5500 किलोमीटर कार मीथेन गैस उत्पादन गोबर से सीबीजी संयंत्र ग्रामीण रोजगार योजना यूपी कचरे से कंचन अवधारणा हरित ईंधन उत्तर प्रदेश

विधायक सिंगरौली रामनिवास शाह ने अपने कार्यालय में आयोजित किया रक्षाबंधन का पर्व !

सिंगरौली हजारों की संख्या में माताएं बहने हुई शामिल उक्त रक्षाबंधन को भव्य बनाने में पार्टी कार्यकर्ताओं ने बढ़चढ़कर लिया भाग , बहनों ने विधायक को बांधी राखी माथे में तिलक लगाकर उनके लंबी आयु का वरदान मांगा वहीं उपरोक्त अवसर पर विधायक के द्वारा माताओं बहनों को उपहार स्वरूप हेल्मेट के साथ टिफीन बाँटा और उन्होंने कहा की बहनो के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एक भाई की होती है बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर उपस्थित बहनों को हेल्मेट प्रदान किया और हर घर परिवार के लोगों को सुरक्षा बरतने को कहा इस प्रकार से सामुहिक रूप से रक्षाबंधन का पर्व भव्य रूप में मनाने को लेकर उपस्थित लोगो ने जमकर सराहना की !