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250 हेक्टेयर खेतों को मिला संजीवनी जल

रायपुर  जल संसाधन विभाग के समयबद्ध प्रयासों और बिंजली जलाशय की नहरों के जीर्णाेद्धार अभियान ने बस्तर अंचल के कृषि परिदृश्य को बदलकर रख दिया है। विभाग द्वारा जल संसाधन संभाग, नारायणपुर के माध्यम से नहरों की मरम्मत और गाद सफाई का वृहद कार्य कराया गया है, जिसका सीधा और सकारात्मक असर अब खेतों में दिखाई देने लगा है। इस व्यवस्था के सुचारू होने से नारायणपुर विकासखंड के खैराभाट, पालकी, तेलसी, करलखा, गुरिया और सुलेंगा गांवों की लगभग 250 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा प्राप्त हुई है।          ​समय के साथ बिंजली जलाशय की नहरों में जमा हुई गाद और अवरोधों के कारण जल प्रवाह बाधित हो गया था, जिससे खेतों तक पानी पहुँचाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। सफाई और आवश्यक मरम्मत कार्य के बाद अब नहरों में पानी का प्रवाह निर्बाध रूप से हो रहा है, जिससे किसानों की मानसून पर निर्भरता काफी कम हुई है। इस जल सुरक्षा से खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता में भी भारी सुधार की संभावना बढ़ गई है। जिन खेतों में पहले पानी की कमी के कारण खेती सीमित रहती थी, वहाँ अब किसान दोहरी फसल लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग की इस पहल से क्षेत्र के ग्रामीण अर्थतंत्र को नई गति मिली है और किसानों के जीवन में एक सुखद व सकारात्मक बदलाव आया है।

योगी सरकार का सुरक्षित पेयजल अभियान: बिहार की टीम ने यूपी जल निगम ग्रामीण की प्रयोगशाला का किया अध्ययन

लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश के हर नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और निगरानी व्यवस्था को भी लगातार मजबूत कर रही है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की लखनऊ स्थित राज्य स्तरीय जल विश्लेषण प्रयोगशाला का बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) की तीन सदस्यीय टीम ने एक्सपोजर विजिट किया। यूनिसेफ उत्तर प्रदेश की टीम ने भी इसमें सहभागिता की। बिहार की टीम ने यूपी में जल गुणवत्ता की जांच, निगरानी और प्रयोगशाला प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। गांव स्तर तक जल गुणवत्ता की निगरानी एक्सपोजर विजिट के दौरान राज्य प्रयोगशाला प्रभारी एवं सहायक शोध अधिकारी अनिल कुमार ने उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत चल रही जल गुणवत्ता निगरानी एवं अनुश्रवण व्यवस्था की जानकारी दी। टीम को प्रदेश के प्रयोगशाला नेटवर्क, ग्राम स्तर पर फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) से पानी की जांच और पोर्टल के माध्यम से इसकी निगरानी की प्रक्रिया समझाई गई। पानी में किसी तरह का संदूषण मिलने पर सुधारात्मक कार्रवाई, दोबारा जांच और समस्या के अंतिम समाधान तक अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। एनएबीएल एक्रीडेशन और प्रयोगशाला की गुणवत्ता व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई। आधुनिक तकनीकों से पानी की जांच बिहार की टीम ने प्रयोगशाला में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म जैसे जीवाणुजनित मापदंडों की जांच प्रक्रिया को देखा। इसके अलावा भारी धातुओं की बेहद कम मात्रा की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली आईसीपी-एमएस और कीटनाशक अवशेषों की जांच के लिए जीसी-एमएस/एमएस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। टीम को भविष्य में पीएफएएस और माइक्रोप्लास्टिक जैसे नए प्रकार के प्रदूषकों की जांच के लिए विकसित की जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया गया। यूपी-बिहार ने साझा किए बेहतर अनुभव उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के संयुक्त निदेशक सीपी यूनिट इंजीनियर संजय गुप्ता की अध्यक्षता में यूपी, बिहार और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक भी हुई। इसमें जल गुणवत्ता निगरानी, प्रयोगशाला प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और एनएबीएल एक्रीडेशन से जुड़ी बेहतर कार्यप्रणालियों और अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया। अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण) एवं प्रयोगशाला प्रमुख इंजीनियर ज्ञानेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि यह एक्सपोजर विजिट जल गुणवत्ता प्रबंधन और आधुनिक परीक्षण तकनीकों के क्षेत्र में दोनों राज्यों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रयोगशालाओं को मजबूत करने पर जोर उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। अंतरराज्यीय सहयोग और तकनीकी अनुभवों के आदान-प्रदान से प्रयोगशालाओं को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और अधिक सक्षम बनाने के साथ-साथ नई एवं उभरती जल गुणवत्ता चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी निगरानी एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए प्रत्येक नागरिक तक स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता के संकल्प को और मजबूत किया जाए।

विश्व ईवी दिवस पर भोपाल में निकलेगी इलेक्ट्रिक व्हीकल रैली

भोपाल मध्यप्रदेश में स्वच्छ, हरित एवं सतत परिवहन प्रणाली को सुदृढ़ करने और पर्यावरण-अनुकूल मोबिलिटी के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 'विश्व ईवी दिवस' के अवसर पर 9 सितंबर को राजधानी भोपाल में एक विशाल इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) रैली का आयोजन किया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल के प्राविधिक सहयोग से इस पहल का आयोजन किया जा रहा है। गोविंदपुरा से मैनिट परिसर तक होगा मार्ग यह जनजागरूकता रैली 9 सितंबर को प्रातः 8 बजे गोविंदपुरा दशहरा मैदान से हरी झंडी दिखाकर रवाना की जाएगी। रैली शहर के प्रमुख व्यावसायिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों से गुजरते हुए चेतक ब्रिज, एमपी नगर, लिंक रोड नंबर-1, टीटी नगर तिराहा एवं माता मंदिर होते हुए मैनिट, भोपाल परिसर में गरिमामय ढंग से संपन्न होगी। इस रैली में ई-टू व्हीलर, ई-रिक्शा, अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कारें एवं ई-बसें एक साथ सम्मिलित होकर हरित मोबिलिटी का संदेश देंगी। पर्यावरण-अनुकूल कल के लिए नागरिक सहभागिता आवश्यक नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि ई-वाहनों का अंगीकार केवल परिवहन का आधुनिक विकल्प मात्र नहीं है, अपितु यह वायु गुणवत्ता में सुधार, कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में एक युगगामी कदम है। आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि ‘ईवी अपनाएं, स्वच्छ भविष्य बनाएं’ के केंद्रीय ध्येय वाक्य के साथ आयोजित यह रैली आम नागरिकों को दैनिक जीवन में पर्यावरण-मित्र साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। यह अनुठा प्रयास एक स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त और हरित मध्यप्रदेश के निर्माण में जन-भागीदारी को नई दिशा प्रदान करेगा।  

सहायक आचार्य के 1,936 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी, आवेदन शुरू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को गति देने की दिशा में योगी सरकार की पहल लगातार जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने प्रदेश के अशासकीय अनुदानित सह-शिक्षा महाविद्यालयों एवं महिला महाविद्यालयों में सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) के 1,936 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर 2026 से शुरू हो गई है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था लागू की गई है। सहायक आचार्य पद के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को ओटीआर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। निर्धारित अर्हता एवं पात्रता रखने वाले अभ्यर्थी ही आवेदन करेंगे। उन्होंने बताया कि विज्ञापित पदों की अर्हता एवं पात्रता के संबंध में अलग से व्यक्तिगत परामर्श उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। आयोग की वेबसाइट पर विस्तृत विज्ञापन एवं निर्देश पुस्तिका उपलब्ध है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले विज्ञापन का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी करने के बाद ही आवेदन करें। आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन प्रक्रिया 8 सितंबर से प्रारंभ हो गई है। ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 7 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है, जबकि ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 11 अक्टूबर 2026 रहेगी। सहायक आचार्य पदों के लिए लिखित परीक्षा 19 एवं 20 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम, परीक्षा केंद्र एवं अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश आयोग की वेबसाइट पर समय-समय पर जारी किए जाएंगे। आयोग के अध्यक्ष ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे आवेदन से पहले विज्ञापन में दी गई शैक्षिक योग्यता, विषयवार पदों, आयु सीमा, आरक्षण, आवेदन प्रक्रिया एवं अन्य शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। योगी सरकार की रोजगारपरक नीतियों के तहत प्रदेश में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। सहायक आचार्य के 1,936 पदों पर भर्ती से उच्च शिक्षा क्षेत्र में योग्य युवाओं को अवसर मिलने के साथ ही महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

यूपी का मतलब अनलिमिटेड पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अनलिमिटेड पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।   मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया। फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं। प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।   यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता। यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा। अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है। यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं। पिछले 9 वर्ष में यूपी पर कैपिटा इनकम तीन गुना करने और वूमेन वर्कफोर्स की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ाने में सफल रहा है। यूपी पिछले 6 वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह निवेशकों का भरोसा है कि हमें पिछले 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, … Read more

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति: लापरवाही पर पांच तहसीलदार निलंबित, 13 अन्य को नोटिस

लखनऊ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राजस्व मामलों में लापरवाही और उदासीनता पर कड़ी कार्रवाई की गई है। राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने पांच तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि 13 तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 7 सितंबर को प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की तहसीलवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा की गई थी, जिसके बाद यह सख्त कार्रवाई की गई। निलंबित किए गए अधिकारियों में अमित यादव तहसीलदार संडीला हरदोई, कृष्ण कुमार मिश्रा तहसीलदार देवरिया, सौरभ कुमार तहसीलदार जौनपुर, रंजन वर्मा तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या व सम्प्रति तहसीलदार गाजीपुर और अलख शुक्ला तहसीलदार जनपद प्रतापगढ़ शामिल हैं। इससे पहले 1 सितंबर 2026 को भी चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद दिए गए निर्देशों के क्रम में की जा रही है। समीक्षा में राजस्व वादों का निर्धारित समय सीमा के भीतर हर स्थिति में निस्तारण सुनिश्चित करने और किसी भी स्तर पर बरती गई लापरवाही अथवा उदासीनता पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। 13 तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस इसके अलावा वादों के निस्तारण में बरती गई लापरवाही के दृष्टिगत 13 तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें चंद्रशेखर वर्मा तत्कालीन तहसीलदार देवरिया व सम्प्रति तहसीलदार गोरखपुर, गोपाल जी तत्कालीन नायब तहसीलदार देवरिया व सम्प्रति नायब तहसीलदार कुशीनगर, रविरंजन कश्यप तहसीलदार जौनपुर, राकेश कुमार तत्कालीन तहसीलदार जौनपुर व सम्प्रति तहसीलदार बलरामपुर, कविता ठाकुर तत्कालीन तहसीलदार बाराबंकी व सम्प्रति तहसीलदार गोंडा, देवानन्द तिवारी तत्कालीन तहसीलदार सुल्तानपुर व सम्प्रति तहसीलदार फिरोजाबाद, स्नेहल वर्मा तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या व सम्प्रति नायब तहसीलदार लखनऊ, राहुल सिंह तहसीलदार अमेठी, अनिल कुमार तहसीलदार प्रतापगढ़, यजुवेन्द्र सिंह नायब तहसीलदार लखनऊ, सुखवीर सिंह नायब तहसीलदार लखनऊ, रमाशंकर मिश्रा नायब तहसीलदार रायबरेली और शार्द सिंह तहसीलदार लखनऊ शामिल हैं। राजस्व परिषद की ओर से इन अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जा रही है। मामलों में जवाबदेही निर्धारित करते हुए नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई समीक्षा के क्रम में राजस्व परिषद द्वारा राजस्व न्यायालयों के कार्यों की प्रगति और निस्तारण की स्थिति पर विशेष निगरानी रखते हुए अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक बार होने वाली कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सतत और निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है। राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण में लापरवाही और उदासीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। वादों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं पाए जाने अथवा कार्यों में लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी शिथिलता के नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे प्रदेश के किसानों और आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध हो सके।

पुलिस, सिविल सोसायटी एवं एनजीओ के समन्वय से न्याय सुलभता और जनसुरक्षा को और प्रभावी बनाने पर मंथन

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं सामुदायिक पुलिसिंग शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आज 08 सितंबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में ‘संबल—न्याय सुलभता, समाज कार्य एवं सामुदायिक पुलिस सहभागिता’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव रहे। विशिष्ट अतिथियों में कमिश्नर उच्च शिक्षा विभाग प्रबल शिपहा, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सुसुमन श्रीवास्तव, कानूनविद् एवं विशेष वक्ता श्रीमती रचना त्यागी, कोडी इंस्टीट्यूट कनाडा की प्रो. सारिका सिन्हा, मध्यप्रदेश महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार तथा उप पुलिस महानिरीक्षक, सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग शाखा द्वारा ‘संबल’ नाम से सामुदायिक सुरक्षा पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें आपराधिक न्याय क्षेत्र में कार्यरत समुदाय-आधारित गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के कार्यों व अनुभवों को साझा किया गया था। इस पहल में सामाजिक कार्य से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी जोड़ा गया, ताकि पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के बीच स्थायी समन्वय एवं सहयोग का मॉडल विकसित किया जा सके। UNFPA के सहयोग से आयोजित वर्तमान सम्मेलन उसी दिशा में एक अगला कदम है, जिसका उद्देश्य पुलिस, आपराधिक न्याय व्यवस्था, विधिक सेवाओं, नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय विकसित कर नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं अपराध के पीड़ितों तक न्याय और सहायता की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाना है। सम्मेलन में मध्यप्रदेश के 75 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों, बाल संरक्षण से जुड़े पुलिस अधिकारियों, जिला पुलिस प्रमुखों, सामुदायिक पुलिसिंग अधिकारियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, अभियोजन अधिकारियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा सामाजिक कार्य एवं विधि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग पंकज श्रीवास्तव ने सामुदायिक पुलिसिंग को पुलिसिंग का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा पुलिस एवं गैर-शासकीय संगठनों के बीच स्थायी एवं संस्थागत समन्वय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 के कार्यक्रम के बाद प्रदेश में सक्रिय गैर-शासकीय संगठनों की जानकारी संकलित कर पुलिस अधिकारियों एवं इकाइयों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिला, बच्चे, बुजुर्ग, मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर तथा अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को पुलिस कार्रवाई के साथ आश्रय, उपचार, पुनर्वास एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग अपराध नियंत्रण के साथ-साथ कमजोर एवं वंचित वर्गों की सुरक्षा, सामाजिक सहयोग और विश्वास निर्माण से भी जुड़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पुनर्वास, महिला-बाल सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनजीओ पुलिस के प्रभावी सहयोगी बन सकते हैं। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए एनजीओ के प्रयासों को आंतरिक सुरक्षा एवं विश्वास निर्माण का उदाहरण बताया तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित व्यक्तियों के संरक्षण-पुनर्वास और घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को सहायता में पुलिस-एनजीओ समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। महिला सशक्तिकरण योजनाओं के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन कर घरेलू हिंसा एवं महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में कमी का आकलन करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों तथा प्रशिक्षित नागरिक स्वयंसेवकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए बड़े धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं जनसुरक्षा में उनकी सहभागिता को आवश्यक बताया। वर्ष 2028 के उज्जैन सिंहस्थ के लिए अभी से प्रशिक्षण, योजना एवं समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल संजय कुमार ने कहा कि पुलिस जब थाने या कार्यालय में होती है, तो सामान्यतः उसके सामने किसी विवाद के दो पक्ष होते हैं—पीड़ित और आरोपी। दोनों पक्षों को संतुष्ट करना कठिन होता है। इसके विपरीत, समुदाय के साथ मिलकर कार्य करने से ऐसी कई स्थानीय समस्याओं की जानकारी समय रहते मिल जाती है, जिनका समाधान कम प्रयास में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोहल्लों में खुले में नशा करना, अवैध शराब की गतिविधियां, महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थान, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा अथवा किसी स्थान पर लगातार होने वाली दुर्घटनाएं जैसी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी शिकायत प्रायः थाने या पुलिस कार्यालय तक नहीं पहुंचती। समुदाय के साथ निरंतर संवाद और सहभागिता से पुलिस को इन समस्याओं की जमीनी जानकारी मिलती है और समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। संजय कुमार ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग में पुलिस, नागरिक, सिविल सोसाइटी, सामाजिक संगठन तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर कार्य करते हैं। इससे जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने, आपसी गलतफहमियां दूर करने और पुलिस सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, कम्युनिटी सेफ्टी वॉलंटियर्स, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों एवं लगभग 93 गैर-शासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि न्याय की सुलभता केवल अपराध दर्ज करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपराध की संभावना कम करने तथा पीड़ित एवं जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है। डॉ कपूर ने POCSO Act एवं किशोर न्याय व्यवस्था में सपोर्ट पर्सन, चाइल्ड केयर संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से नागरिक समाज की सहभागिता के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए महिलाओं एवं अन्य वंचित वर्गों के लिए सहयोग तंत्र मजबूत करने तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के उन्मूलन के साथ प्रभावित बालिकाओं के लिए संरक्षण एवं वैकल्पिक सहयोग व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि हाल ही में संचालित “सेफ क्लिक” एवं “नशे से दूरी है जरूरी” अभियानों में ग्राम एवं नगर रक्षा समितियों, गैर-शासकीय संगठनों तथा पुलिस के विभिन्न प्रभागों ने सक्रिय सहभागिता की। इन अभियानों के माध्यम से … Read more

पहली बार लोकरंग पर्व में दिखी सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक, पंथी और नाचा-गम्मत ने भी मोहा दर्शकों का मन

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने वाले तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का तीसरा एवं अंतिम दिन सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति के नाम रहा। पहली बार लोकरंग पर्व के मंच पर जशपुर अंचल के सरहुल एवं करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों की मधुरता और कलाकारों के ऊर्जावान नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया। कार्यक्रम में विजय कुमार भगत, जशपुर के दल द्वारा सरहुल एवं करमा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आदिवासी लोकजीवन, प्रकृति और सामुदायिक परंपराओं से जुड़े इन लोकनृत्यों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति, पारंपरिक लय और आकर्षक वेशभूषा ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया। इसके साथ ही रायपुर के डॉ. रामनारायण नेताम ने आदिवासी लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी। नवलदास मानिकपुरी, दुर्ग ने लोकगीत-संगीत से समां बांधा। वहीं सुआरती बारले, भिलाई ने पंथी नृत्य की ऊर्जापूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सुरमादत्त जोशी, रायपुर की नाचा-गम्मत की प्रस्तुति ने हास्य, मनोरंजन और लोकनाट्य के रंगों से कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया। लोककलाओं को मंच देना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी : डॉ. कन्नौजे लोकरंग पर्व के समापन अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर जनजातीय अंचलों सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्थानीय कलाकारों ने अपनी-अपनी लोककलाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं। ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ प्रोत्साहन और सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि लोकरंग पर्व जैसे सांस्कृतिक आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध और सुघर लोकसंस्कृति को सहेजने तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने के साथ ही विलुप्त होती लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्रोत्साहन मिलता है। लोकविरासत के विविध रंगों का संगम बना लोकरंग तीन दिनों तक चले लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों की लोकसंस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को मंच मिला। अंतिम दिन सरहुल, करमा, आदिवासी लोकगीत, पंथी और नाचा-गम्मत जैसी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविध लोकपरंपराओं में निहित है। कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड की सदस्य श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी तथा समाजसेवी उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। लोकरंग पर्व का अंतिम दिन दर्शकों के लिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की विविधता और जीवंतता को करीब से अनुभव करने का अवसर बना। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। आयोजन ने एक ओर जहां लोककलाकारों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को सहेजने, संवारने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सार्थक संदेश दिया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के मानदेय वृद्धि का शासनादेश जारी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के अनुपालन में शासन ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि का शासनादेश जारी कर दिया है। मंगलवार को अपर मुख्य सचिव, महिला कल्याण एवं बाल विकास लीना जौहरी ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के राज्यांश में 4,000 रुपये प्रतिमाह और सहायिकाओं के राज्यांश में 2,000 रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त वृद्धि की गई है। इसके बाद कार्यकर्ताओं को कुल 12,000 रुपये और सहायिकाओं को 6,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।     राज्यांश में फिक्स्ड व वैरिएबल पीएलआई शामिल शासनादेश के अनुसार, कार्यकर्ताओं के राज्यांश में 1,500 रुपये अतिरिक्त फिक्स्ड मानदेय तथा 2,500 रुपये अतिरिक्त वैरिएबल पीएलआई मानदेय की वृद्धि की गई है। सहायिकाओं के राज्यांश में 750 रुपये अतिरिक्त फिक्स्ड मानदेय और 1,250 रुपये अतिरिक्त वैरिएबल पीएलआई मानदेय बढ़ाया गया है। वर्तमान में भारत सरकार के मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि तथा राज्य सरकार के अतिरिक्त मानदेय को मिलाकर कार्यकर्ताओं को 8,000 और सहायिकाओं को 4,000 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं।   सितंबर से लागू, अक्टूबर में भुगतान शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर 2026 से प्रभावी होगा और इसका भुगतान अक्टूबर 2026 में किया जाएगा। यह निर्णय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के बढ़े कार्य-दायित्व, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई), पोषण सेवाओं, डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं के अभिसरण में उनकी भूमिका को देखते हुए लिया है। निदेशक को कार्रवाई के निर्देश   अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने निदेशक, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार हर्षिता माथुर को शासनादेश के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में इस व्यवस्था में किसी भी बदलाव का निर्णय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के अनुमोदन के अधीन होगा।

मुख्यमंत्री योगी ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं व बच्चों का बढ़ाया हौसला

लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘आंगनवाड़ी की आवाज स्वस्थ बच्चा-शिक्षित समाज’ के तहत अयोध्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, मेधावी बच्चों तथा पोषण, शिक्षा एवं महिला कल्याण से जुड़ी उत्कृष्ट अधीक्षिकाओं को सम्मानित किया। उन्होंने नव नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र का वितरण भी किया। बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरित किए गए। साथ ही 2,51,162 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी के लिए डीबीटी के माध्यम से 29.11 करोड़ रुपये की धनराशि अंतरण किया। इस दौरान ‘नवीन टेक होम राशन’ (टीएचआर) कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी हुआ।   इनका किया गया सम्मान व दिया गया चेक, साड़ी, प्रशस्ति पत्र आदि  बढ़े हुए मानदेय का चेक वितरण  सुनीता पांडेय – आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  सोनी साहू – आंगनवाड़ी सहायिका साड़ी वितरण  ममता पांडेय – आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  नीलम यादव – आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  अर्चना मिश्रा – आंगनवाड़ी सहायिका  सोनी साहू – आंगनवाड़ी सहायिका नव नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र का वितरण ज्योति निषाद – आंगनवाड़ी सहायिका अमृता निषाद – आंगनवाड़ी सहायिका अति कुपोषित श्रेणी से सामान्य पोषण स्थिति प्राप्त करने वाले बच्चों तथा संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान अनाया पुत्री  आरती परी कन्नौजिया पुत्री  सारिका  मिथलेश कुमारी (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित संवासिनी गृह के निवासरत बच्चों द्वारा शिक्षा संस्थान में उत्कृष्ट परिणाम के अंतर्गत मोहिनी पाल (इंटर में 82.02 प्रतिशत अंक) – प्रशस्ति पत्र व बैग भाविनी शर्मा (हाईस्कूल में 89.16 प्रतिशत अंक) – प्रशस्ति पत्र व बैग देवेश यादव (हाईस्कूल में 77 प्रतिशत अंक) – प्रशस्ति पत्र व बैग महिला कल्याण विभाग की उत्कृष्ट विभागीय सेवाओं हेतु सम्मान  सफलता (अधीक्षिका राजकीय बाल गृह बालिका, लखनऊ) – प्रशस्ति पत्र  नीतू सिंह (पर्यवेक्षक राजकीय बाल गृह बालिका, प्रयागराज) – प्रशस्ति पत्र बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत माउंट एवरेस्ट बेस कैंप का विजय अभियान करने वाली बालिकाएं नीलांशु – प्रशस्ति पत्र व बैग प्रियंका उपाध्याय – प्रशस्ति पत्र व बैग प्रियंका प्रजापति – प्रशस्ति पत्र व बैग वहीं आईआरएफसी नई दिल्ली के श्वेतकेतु मिश्रा (चीफ जनरल मैनेजर) व अवनीश प्रकाश ने दो करोड़ रुपये के सीएसआर के जरिए जनपद के 1,250 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री स्कूल किट उपलब्ध कराई। भारत केयर्स के सीईओ भोमिक शाह ने 5 हजार छात्राओं को स्कॉलरशिप दी और जगमग अयोध्या कार्यक्रम का क्रियान्वयन कराया। इन्हें भी सीएम योगी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।