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डाइट में जरुर शामिल करें पालक का जूस, फायदे है कमाल के

इस बात से तो हर कोई वाकिफ है कि फल व सब्जियों के रस का सेवन स्वास्थ्यवर्धक होता है। अगर आप भी अपनी डाइट में किसी जूस को शामिल करने का मन बना रहे हैं तो शुरूआत पालक के जूस से कीजिए। पालक के जूस में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, साथ ही यह सेहत के लिए भी कई मायनों में लाभकारी होता है। तो चलिए जानते हैं पालक के जूस का सेवन करने से होने वाले लाभों के बारे में-   पोषक तत्वों से भरपूर पालक को यदि एक सुपरफूड कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इसके जूस का सेवन करने से व्यक्ति को कई तरह के पोषक तत्व जैसे विटामिन ए, सी तो मिलता है ही, साथ ही इसमें आयरन, प्रोटीन मैग्नीशियम, कैल्शियम, खनिज आदि पोषक तत्व भी होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद आवश्यक होते हैं। एक बेहतरीन एंटी-एजिंग जो लोग लंबे समय तक जवां दिखने की चाहत रखते हैं, उन्हें पालक के जूस को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स होने के साथ-साथ कुछ ऐसे तत्व भी पाए जाते हैं जो बढ़ती उम्र की निशानियों को बेहद आसानी से कम करते हैं। यह ढीली त्वचा में कसावट व झुर्रियों को कम करने के साथ-साथ आपके चेहरे का निखार भी बढ़ाने में मदद करता है। पाचन तंत्र के लिए वरदान अधिकतर बीमारियों की जड़ व्यक्ति का पेट ही होता है। अगर पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करे तो व्यक्ति एक खुशहाल व निरोगी जीवन जी सकता है और आपकी पाचन क्रिया की प्रणाली को बेहतर बनाने में पालक का जूस फायदेमंद साबित हो सकता है। यह न सिर्फ विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है, बल्कि इसमें पाया जाने वाला फाइबर पेट संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, अपच, एसिडिटी आदि को भी दूर करता है।   महिलाओं के लिए लाभदायक पालक का जूस महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायी है। दरअसल, भारत में करीबन 70 प्रतिशत महिलाएं आयरन की कमी से जूझ रही हैं। लेकिन अगर वह अपनी डाइट में पालक के जूस को शामिल करती हैं, तो इससे उनके शरीर की आयरन की आवश्यकता पूरी होगी। इतना ही नहीं, गर्भावस्था में भी महिला को पालक के जूस का सेवन अवश्य करना चाहिए।   वजन कम करने में सहायक अगर आप अपना वजन कम करने की फिराक में हैं तो भी पालक का जूस आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। दरअसल, पालक के जूस में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है, जिसके कारण इसका सेवन बेफिक्र होकर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसमें प्रोटीन भी पाया जाता है जो वजन कम करने और मसल्स को बिल्डअप करने में सहायक होता है।  

घर पर ही बनाएं बाजार जैसा जेल आईलाइनर

जब भी आंखों के मेकअप की बात होती है तो आईलाइनर का इस्तेमाल अवश्य किया जाता है। इसके बिना आईमेकअप पूरा ही नहीं होता। आमतौर पर महिलाएं बाजार में मिलने वाले आईलाइनर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन अगर आप चाहें तो खुद घर पर भी जैल बेस्ड आईलाइनर बनाकर इस्तेमाल कर सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इसे बनाने का तरीका-   इनकी होगी जरूरत घर पर जेल आईलाइनर बनाने के लिए आपको ब्लैक या किसी कलर के आईशैडो, एक छोटा कंटेनर, आई प्राइमर व नारियल के तेल की आवश्यकता होगी। वैसे तो आईलाइनर बनाने के लिए ब्लैक आईशैडो का प्रयोग किया जाता है, लेकिन अगर आप कलरफुल आईलाइनर बनाना चाहती हैं तो उस कलर के आईशैडो का प्रयोग करें। इन सभी चीजों के इस्तेमाल से एक बेहतरीन आईलाइनर तैयार किया जा सकता है।   यूं बनाएं आईलाइनर होममेड जेल आईलाइनर बनाने के लिए सबसे पहले ब्लैक आईशैडो को स्क्रैप करके कंटेनर में भरें। अब इसमें थोड़ा सा प्राइमर मिलाएं और तब तक मिक्स करें, जब तक इनकी कसिस्टेंसी एक जैसी न हो जाए। अब इसमें नारियल तेल की कुछ बूंदें मिलाएं और इन्हें फिर से अच्छी तरह मिक्स करें। आपका आईलाइनर बनकर तैयार है।   होते हैं यह फायदे होममेड जेल आईलाइनर बनाने के कई तरह के फायदे हैं। सबसे पहले तो आप इस तरीके से उन कलर्स के आईलाइनर भी बना सकते हैं, जो मार्केट में आसानी से अवेलेबल नहीं होते। इसके अतिरिक्त यह जेल आईलाइनर बेहद स्मूद लुक देता है और करीबन सात से आठ घंटे तक आराम से टिकता है।   इसका रखें ध्यान   अगर आप भी घर पर आईलाइनर बनाने का मन बना रही हैं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। जैसे कि आईलाइनर बनाने के लिए लूज आईशैडो का प्रयोग करें।   अगर आप अपने आईलाइनर को शिमरी इफेक्ट नहीं देना चाहतीं तो बेहतर होगा कि आप मैट आईशैडो का प्रयोग करें।   वहीं जिस आईप्राइमर का आप इस्तेमाल करें, वह क्लीयर हो। अर्थात् उसका अपना कोई कलर न हो। अन्यथा अंत में आपके आईलाइनर का वह कलर नहीं आएगा, जिसकी आपको इच्छा है।   अगर आपके पास नारियल का तेल नहीं है तो आप उसके स्थान पर वैसलीन का प्रयोग भी कर सकती हैं।  

मोबाइल में कभी न करें ये काम, न हैंग होगा और न ही हैक

नई दिल्ली डिजिटल वर्ल्ड में सबसे ज्यादा खतरा हैकिंग का होता है। हैकर्स हमारे डिवाइसों पर सेंधमारी करके निजी जानकारी चुरा लेते हैं। हमारे वाई-फाई से लेकर स्मार्टफोन कुछ भी सुरक्षित नहीं है। अगर आप अपने मोबाइल को हैकर्स से बचाना चाहते हैं तो कुछ टिप्स आपके लिए मददगार साबित हो सकती हैं। ये टिप्स आपके मोबाइल को सुरक्षित रखेंगे और हैकिंग का खतरा नहीं रहेगा। आइए जानते हैं हैकिंग से बचने के उपाय कैसे हैक होता है मोबाइल अगर हम अनप्रोटेक्टेड व पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करते हैं तो हमारा मोबाइल हैक हो सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति के यूएसबी से फोन चार्ज करने पर भी मोबाइल हैकिंग का खतरा रहता है। मोबाइल पर आने वाले अज्ञात मैसेज के लिंक को खोलने से भी फोन हैक हो सकता है। फोन हैक होने के संकेत अगर आपका फोन हैंग या बिना इस्तेमाल के गर्म हो रहा है तो समझिए फोन हैक हो गया है। इसके अलावा फोन खुद से रिबूट होने लगे या स्विच ऑफ हो जाए तो यह भी हैंकिंग का संकेत हो सकता है। आप अपने फोन को स्विच ऑफ कर रहे हैं और वो बंद न हो तो यह भी एक खतरे की घंटी हो सकती है। ऐसे हैक होने से बचाएं फोन आपके फोन में आने वाले मैसेज में अगर कोई अधूरे यूआरएल वाला लिंक आया है तो उसे भूलकर भी न खोलें। अज्ञात कम्प्यूटर से फोन चार्ज करते वक्त ओनली चार्जिंग ऑप्शन ही चुनें।” रेमेम्बेर पासवर्ड” ऑप्शन पर क्लिक करने से हमेशा बचें। इससे हैकिंग के खतरे बढ़ जाते हैं। पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते वक्त ऑटोमैटिक कनेक्शन ऑप्शन को बंद कर दें। भूलकर भी सार्वजनिक वाई-फाई से पैसे का लेन-देन या किसी भी तरह की खरीददारी न करें। इससे स्मार्टफोन हैक हो सकता है।  

प्राइवेट वीडियो लीक कैसे होती है? MMS स्कैंडल और सजा से जुड़े अहम तथ्य

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर आम लोगों के ही नहीं बल्कि मशहूर हस्तियों और इनफ्लुएंसर के भी निजी वीडियो के वायरल होने के मामले सामने आते रहते हैं। कई बार ये वीडियो झूठे या डीपफेक तकनीक से बनाए गए निकलते हैं, लेकिन कई मामलों में ये बिना अनुमति के बनाए और फैलाए गए असली वीडियो होते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर सोफिक एसके का एक निजी वीडियो वायरल हुआ है जिसके बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि किसी की निजता का उल्लंघन करना और प्राइवेट वीडियो वायरल करना कानून की नजर में कितना गंभीर है। हालिया घटनाक्रम में बंगाल के इनफ्लुएंसर सोफिक एसके और उनकी गर्लफ्रेंड का एक निजी वीडियो कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तेज़ी से फैल गया। वीडियो वायरल होने के कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर 'सोफिक वायरल वीडियो' जैसे सर्च शब्द ट्रेंड करने लगे। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया यूज़र्स के बीच मतभेद दिखा। कुछ लोगों ने इसे असली बताया जबकि अन्य ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे छेड़छाड़ किया गया या एआई (AI) तकनीक से बनाया गया बताया। हालांकि वीडियो के असली या फेक होने की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। MMS वीडियो क्या है? यह किसी की प्राइवेट वीडियो हो, जो सोशल मीडिया पर उसे बदनाम करने के लिए वायरल कर दी जाती है। इससे किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी पर सीधा हमला होता है। इस तरह की घटनाएं न सिर्फ कानूनन अपराध हैं बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार करने वाली है, लेकिन लोग इस बात को नहीं समझते। MMS लीक होने पर पीड़ित सबसे ज्यादा परेशान हो जाता है। कैसे लीक हो जाती है MMS वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी भी कंटेंट को वायरल होने से आप रोक नहीं सकते। ऐसे में अगर यह किसी की प्राइवेट वीडियो है, तो यह इतनी तेजी से फैलता है कि आप इसे शेयर करने या डाउनलोड होने से रोक नहीं सकते। एक बार वीडियो अपलोड करने के बाद इसे रोकना मुश्किल हो जाता है। इसका एक कारण फोन चोरी या गुम होना भी हो सकता है। इससे आपके फोन में रिकॉर्ड प्राइवेट वीडियो का कोई गलत इस्तेमाल कर लेता है। हैकिंग के जरिए भी वीडियो लीक होना आसान होता है। कुछ लिंक या ऐप ऐसे होते हैं, जिससे किसी अनजान व्यक्ति के हाथ में आपके फोन का एक्सेस आ जाता है। वह आपके फोन का कैमरा भी यूज कर सकता है। धोखा देना- कई बार आपका साथी आपके साथ प्यार में धोखे से वीडियो बना लेता है, फिर बाद में वह इसका गलत इस्तेमाल करता है। बहुत सारे MMS लीक केसों में वीडियो किसी पार्टनर, दोस्त या जान-पहचान वाले द्वारा बनाया गया होता है। इसमें सबसे बड़ा कारण झगड़ा, बदला और ब्लैकमेल होता है। कितनी मिलती है सजा बता दें कि पहली बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 से 3 साल तक की कैद और जुर्माना। दूसरी बार दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक की कैद और जुर्माना। धारा 73 के तहत ऐसे अपराध गैर-जमानती और असंज्ञेय  माने जाते हैं। इसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है और जमानत मिलना भी आसान नहीं होता है।  

बचपन से 32 साल तक दिमाग कैसे बदलता है? जीवनभर में आते हैं 4 अहम मानसिक परिवर्तन

हमारा दिमाग जीवन भर एक जैसा नहीं रहता। यह लगातार विकसित और बदलता रहता है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है हमारे दिमाग में भी उसी के हिसाब से बदलाव आते हैं। इसी से जुड़ी एक रिसर्च में पता चला है कि व्यक्ति का दिमाग चार मुख्य स्टेजेस से गुजरता है। आपको बता दें कि ये चार स्टेज हैं, 9, 32, 66 और 83 वर्ष की उम्र। इस दौरान व्यक्ति के दिमाग में अहम बदलाव आते हैं, जो उसकी सोचने, समझने और दुनिया के देखने के तरीके को नया आकार देते हैं। आइए इन चारों स्टेजेस के बारे में समझते हैं। कैसे किया गया यह रिसर्च? यह रिसर्च कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया। उन्होंने शून्य से लेकर नब्बे साल तक की उम्र के 3,802 लोगों के दिमाग का विस्तार से स्टडी किया। इसके लिए एमआरआई स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। दिमाग के जीवनभर के चार स्टेज-     बचपन से किशोरावस्था का स्टेज (9 साल की उम्र)- यह वह उम्र है जब बच्चे का दिमाग बचपने की सीमा से निकलकर किशोरावस्था में प्रवेश करता है। इस दौरान दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच तेजी से संचार बढ़ता है और सीखने की गति बहुत तेज होती है।     मेच्योरिटी और स्थिरता का दौर (32 साल की उम्र)- यह उम्र एक बहुत बड़ा मोड़ मानी जाती है। इसके बाद दिमाग "एडल्ट मोड" में प्रवेश कर जाता है। यह सबसे लंबा स्टेज होता है, जो लगभग तीन दशकों तक चलता है। इस दौरान दिमाग की संरचना काफी स्थिर और मेच्योर हो जाती है। व्यक्ति की सोच, फैसले लेने की क्षमता और भावनात्मक समझ इस उम्र में पूरी तरह से विकसित हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि 32 साल की उम्र तक आते-आते व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह मेच्योर हो जाता है।     वृद्धावस्था की शुरुआत (66 साल की उम्र)- इस उम्र के आसपास दिमाग ‘अर्ली एजिंग’ यानी शुरुआती वृद्धावस्था के स्टेज में प्रवेश करता है। रिटायरमेंट का समय आने के साथ-साथ दिमाग के काम करने की गति थोड़ी धीमी होने लगती है, लेकिन एक्सपीरिएंस और नॉलेज अपने चरम पर होता है।     लेट एजिंग (83 साल की उम्र)- यह "लेट एजिंग" के स्टेज की शुरुआत है। इस उम्र में दिमाग की संरचना में गिरावट के लक्षण नजर आ सकते हैं और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। क्यों हैं ये चार स्टेज महत्वपूर्ण? इस अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता एलेक्सा मौसले के अनुसार, इन चरणों को समझने से हमें यह जानने में मदद मिलती है कि कुछ लोगों का दिमाग जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर अलग तरह से क्यों विकसित होता है। चाहे वह बचपन में सीखने की समस्या हो या बुढ़ापे में याददाश्त कमजोर होना। इससे भविष्य में दिमाग से जुड़ी बीमारियों के इलाज और बचाव में मदद मिल सकती है।  

भविष्य की इंटरनेट स्पीड इस फैसले पर: जानिए 6GHz की अहमियत

नई दिल्ली    भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में इस वक्त एक जंग चल रही है. ये जंग 6GHz बैंड्स को लेकर है. जहां भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटर्स और दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां 6-गीगाहर्ट्ज बैंड्स को लेकर एक दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं. दोनों ही पक्ष सरकार से अलग-अलग तरीके से इन्हें जारी करने की मांग कर रहे हैं.  फैसला चाहे जो हो, इसका असर हमारे मोबाइल नेटवर्क और Wi-Fi स्पीड पर पड़ने वाला है. 6GHz बैंड्स का लाइसेंस कैसे जारी होगा इसी बात को लेकर तमाम कंपनियां आमने सामने हैं. इस वक्त दुनिया भर में 6GHz बैंड्स की चर्चा है. इंटरनेट और टेलीकॉम की दुनिया में 6GHz इस वक्त किसी रियल एस्टेट की तरह है.  दुनिया के कुछ देशों ने इसे अनलाइसेंस Wi-Fi के लिए ओपन कर दिया है, तो कुछ ने इसे फ्यूचर मोबाइल यूज के लिए रिजर्व रखा है. वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने 6G बैंड्स पर कोई फैसला नहीं लिया है. इन देशों की लिस्ट में भारत भी है.  6GHz स्पेक्ट्रम बना नया जंग का मैदान Apple, Amazon, Meta, Cisco और Intel जैसी कंपनियां चाहती हैं को भारत 6GHz वाले 1200 MHz बैंड को अनलाइसेंस रखे और इसे Wi-Fi यूज के लिए अलाउ करे. उनका कहना है कि ये बैंड घर और ऑफिस में नेटवर्क की भीड़ को कम कर सकता है. खासकर Wi-Fi 7 डिवाइसेस की एंट्री के बाद.  उनका कहना है कि भारत को ग्लोबल पैटर्न को फॉलो करना चाहिए. वहीं Jio और Vi का मानना है कि भारत को 6GHz को IMT स्पेक्ट्रम के तहत मोबाइल नेटवर्क्स के लिए जारी करना चाहिए. दोनों ही ऑपरेटर्स का कहना है कि ये बैंड 5G और फ्यूचर 6G रोलआउट के लिए बहुत जरूरी है.  कैसे होगा यूजर्स का फायदा? खासकर उन शहरों में जहां खपत ज्यादा है. टेलीकॉम कंपनियों की चिंता जायज है. बिना मिड-बैंड स्पेक्ट्रम के भारतीय नेटवर्क्स पर फ्यूचर में वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस के बढ़ने से दबाव पड़ेगा. वहीं भारती एयरटेल ने फिलहाल बीच का रास्ता चुना है. कंपनी का कहना है कि भारत को स्पेक्ट्रम जारी करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. हालांकि, फैसला किसी भी पक्ष का हो, आम यूजर्स के रोजमर्रा के काम पर इसका असर जरूर पड़ेगा.  ये बैंड Wi-Fi के लिए जारी होता है, तो घर और ऑफिस में नेटवर्क वाइड होगा, उन पर दबाव कम होगा और परफॉर्मेंस बेहतर होगी. खासकर उन जगहों पर जहां मल्टी डिवाइस का इस्तेमाल होता है.  वहीं मोबाइल नेटवर्क्स के लिए अगर ये बैंड जारी होता है, तो 5G और 6G का बड़ा बूस्ट मिलेगा. मोबाइल इंटरनेट की स्पीड बेहतर होगी. अगर भारत इस मामले में कोई फैसला नहीं लेता है और मामले को फ्यूचर के लिए टालता है, तो लोगों को इसका फायदा मिलने में देरी होगी.

Realme C85 5G कल देगा दस्तक: मिलेगा फुल वॉटरप्रूफ डिज़ाइन और दमदार 7000mAh बैटरी

नई दिल्ली कंपनी ने कंफर्म कर दिया है कि Realme C85 5G भारत में 28 नवंबर को लॉन्च होगा। फोन की माइक्रोसाइट Flipkart पर लाइव हो चुकी है, जिससे यह कंफर्म हो गया है कि फोन इस प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। माइक्रोसाइट पर कंपनी ने इसके कुछ खास फीचर्स का भी खुलासा किया है। फोन की सेल भी कल 12PM बजे से शुरू हो जाएगी। बड़ी बैटरी और फास्ट चार्जिंग भी फोन में 7,000mAh की बैटरी मिलेगी। दावा है कि यह 22 घंटे तक का वीडियो प्लेबैक, 50 घंटे की कॉलिंग और 145 घंटे का म्यूजिक प्लेबैक टाइम प्रदान करेगी। कंपनी ने यह भी बताया कि 1 परसेंट बैटरी में फोन 9 घंटे का स्टैंडबाय और 40 मिनट की कॉलिंग देगा। इसमें 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट होगा, जो 5 मिनट के चार्ज पर 1.5 घंटे की बैटरी लाइफ देगा। हैंडसेट में 6.5W रिवर्स चार्ज सपोर्ट भी मिलेगा। मजबूत और वॉटरप्रूफ फोन डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंस के लिए IP69 प्रो लेवल रेटिंग के साथ आएगा। यह MIL-STD 810H ग्रेड शॉक रेजिस्टेंस बॉडी के साथ आएगा, यानी फोन अचानक गिरने पर टूटेगा नहीं। डिस्प्ले कंपनी ने डिस्प्ले का साइज कंफर्म नहीं किया है लेकिन यह बता दिया है कि फोन में 1200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस वाला सुपर ब्राइट एमोलेड डिस्प्ले मिलेगा। कैमरा फोटोग्राफी के लिए, फोन में पीछे की तरफ 50-मेगापिक्सेल का 'Sony AI' कैमरा होगा। फोन में AI-पावर्ड इमेज एडिटर भी होगा, जिसे AI Edit Genie कहा जाएगा। वियतनाम में फोन के फीचर्स Realme C85 5G वियतनाम में लॉन्च हो चुका है। जहां इसमें 6.8 इंच एचडी प्लस (1570×720 पिक्सेल) एलसीडी पैनल है, जिसका रिफ्रेश रेट 144 हर्ट्ज तक है और इसकी पीक ब्राइटनेस 1200 निट्स है। फोन MediaTek Dimensity 6300 चिप से लैस है, जिसे 8GB रैम और 256GB स्टोरेज के साथ जोड़ा गया है। फोटो और वीडियो के लिए, Realme C85 5G में 50-मेगापिक्सेल का मेन शूटर है। इसमें 8 मेगापिक्सेल का सेल्फी कैमरा भी है।

शादी से पहले चाहिए नेचुरल ग्लो? ट्राई करें ये 4 आसान फेस पैक

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में त्वचा की देखभाल अक्सर पीछे रह जाती है। लेकिन जब कोई शादी जैसा खास मौका सामने हो, तो हर कोई चाहता है कि उसका चेहरा दमकता हुआ और तरोताजा नजर आए। ऐसे में इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए बाजार के केमिकल प्रोडक्ट्स के बजाय प्राकृतिक फेस पैक्स एक बेहतरीन ऑप्शन हैं। ये न सिर्फ चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाते हैं, बल्कि त्वचा को पोषण भी देते हैं। आइए जानते हैं शादी में जाने से पहले ट्राई करने के लिए 4 असरदार फेस पैक्स के बारे में। बेसन और दही का पैक यह फेस पैक भारतीय घरों में सदियों से सौंदर्य निखार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह त्वचा की सफाई करके उसमें इंस्टेंट ग्लो लाता है। सामग्री-     2 चम्मच बेसन     1 चम्मच ताजा दही     आधा चम्मच शहद     कुछ बूंदें नींबू का रस बनाने का तरीका- सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं और सूखने दें। सूखने के बाद गीले हाथों से हल्के-हल्के स्क्रब करते हुए ठंडे पानी से धो लें। फायदे-     बेसन त्वचा की गहराई से सफाई करता है और डेड स्किन सेल्स को हटाता है।     दही त्वचा को प्राकृतिक रूप से मॉइस्चराइज करती है और उसमें कसाव लाती है।     शहद एक प्राकृतिक ह्यूमेक्टेंट है, जो त्वचा में नमी बनाए रखता है।     नींबू दाग-धब्बों को हल्का करता है। हल्दी और चंदन पाउडर का ग्लो पैक हल्दी और चंदन त्वचा के लिए रामबाण हैं। यह पैक त्वचा को अंदरूनी ग्लो देने के साथ-साथ उसे ठंडक और शांति भी देता है, जो शादी जैसे स्ट्रेसफुल इवेंट से पहले बेहद जरूरी है। सामग्री-     1 चम्मच चंदन पाउडर     आधा चम्मच हल्दी पाउडर     1 चम्मच गुलाब जल     1 चम्मच दूध या मलाई बनाने का तरीका- चंदन पाउडर और हल्दी को गुलाब जल और दूध में मिलाकर एक चिकना पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं और 15-20 मिनट तक सूखने दें। सूख जाने पर हल्के हाथों से रब करते हुए ठंडे पानी से धो लें। फायदे-     चंदन पाउडर त्वचा को ठंडक पहुंचाता है, रैशेज और जलन को शांत करता है।     हल्दी त्वचा को डिटॉक्सीफाई करती है और उसमें प्राकृतिक चमक लाती है।     गुलाब जल त्वचा के पीएच संतुलन को बनाए रखता है और त्वचा को तरोताजा करता है।     दूध या मलाई त्वचा को मुलायम बनाती है और उसमें नमी बरकरार रखती है। शहद और दालचीनी का ग्लो बूस्टर अगर आपको मुहांसों की समस्या है और त्वचा बेजान सी लगती है, तो यह पैक आपके लिए परफेक्ट है। शहद और दालचीनी दोनों ही एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर हैं। सामग्री-     1 चम्मच कच्चा शहद     आधा चम्मच दालचीनी पाउडर     आधा चम्मच नींबू का रस बनाने का तरीका- शहद और दालचीनी पाउडर को अच्छी तरह मिला लें। अगर त्वचा ऑयली है तो इसमें नींबू का रस भी मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट बाद हल्के गुनगुने पानी से धो लें। फायदे-     शहद त्वचा में नमी बनाए रखते हुए बैक्टीरिया से लड़ता है।     दालचीनी ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देकर त्वचा में नैचुरल ग्लो लाती है और मुहांसों को कम करती है।     नींबू का रस त्वचा के एक्स्ट्रा ऑयल को कम करता है और ब्लैकहेड्स व्हाइटहेड्स से छुटकारा दिलाता है। पपीता और ओटमील का एक्सफोलिएटिंग पैक यह पैक त्वचा की डेड स्किन को हटाकर उसे कोमल और चमकदार बनाने का काम करता है। पपीते में मौजूद एंजाइम त्वचा के लिए नेचुरल एक्सफोलिएंट का काम करते हैं। सामग्री-     2 चम्मच पका हुआ पपीता, मैश किया हुआ     1 चम्मच ओटमील     1 चम्मच दही बनाने का तरीका- पपीते, ओटमील और दही को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट तक लगा रहने दें। फिर हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में मसाज करते हुए ठंडे पानी से धो लें। फायदे-     पपीता त्वचा को एक्सफोलिएट करके उसे चमकदार बनाता है और फाइन लाइन्स को कम करता है।     ओटमील त्वचा की नमी बरकरार रखता है और हल्के एक्सफोलिएंट का काम करता है।     दही त्वचा में कसाव लाती है और उसे मुलायम बनाती है।  

एक मिनट की जांच बताएगी हार्ट हेल्थ की पूरी कहानी, बेहद आसान तरीका

दिल की सेहत की समय-समय पर जांच करना बेहद जरूरी है, ताकि अगर कोई परेशानी हो, तो वक्त पर उसका इलाज करवाया जा सके। अपने दिल का हाल जानने के लिए आप घर पर खुद से एक छोटा-सा टेस्ट कर सकते हैं। इसे स्टेयर क्लाइंबिंग टेस्ट कहते हैं। जी हां, एक साधारण-सा एक मिनट का टेस्ट आपकी हार्ट हेल्थ के बारे में काफी कुछ बता सकता है। आइए जानें कि यह टेस्ट कैसे करना है और इसके रिजल्ट आपके दिल के बारे में क्या बताते हैं। यह टेस्ट क्या है? एक रिसर्च में इस टेस्ट को हार्ट हेल्थ जांचने का एक विश्वसनीय तरीका माना गया है। इस टेस्ट का मकसद यह पता लगाना है कि आप एक मिनट में कितनी जल्दी चार मंजिल की सीढ़ियां चढ़ पाते हैं। टेस्ट कैसे करें? सबसे पहले एक चार मंजिल की सीढ़ी ढूंढें। सुनिश्चित करें कि सीढ़ियां सूखी और साफ हों ताकि फिसलने का खतरा न रहे। आरामदायक कपड़े और जूते पहनें।     बिल्कुल रिलैक्स पोजिशन में शुरुआत करें। जोर-जोर से सांस न लें या दौड़ न लगाएं। बस अपनी सामान्य गति से सीढ़ियां चढ़ना शुरू करें।     जैसे ही आप पहला कदम चढ़ें, एक स्टॉपवॉच या फोन में टाइमर शुरू कर दें।     लगातार और बिना रुके 60 सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश करें।     चौथी मंजिल पर पहुंचने में लगे समय को नोट कर लें। अब जानें, आपका परिणाम क्या कहता है? स्टडी के अनुसार, यदि आप 60 सीढ़ियां चढ़ने में 40-45 सेकंड से कम का समय लेते हैं और सांस फूलने या सीने में दर्द जैसी कोई तकलीफ नहीं होती, तो यह संकेत है कि आपका दिल स्वस्थ है और आपकी फिटनेस का स्तर अच्छा है। इसका मतलब है कि आपका दिल शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को जरूरी मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाने में सक्षम है। वहीं, अगर आपको इस टेस्ट को पूरा करने में एक मिनट से ज्यादा समय लगता है या फिर चढ़ाई के दौरान आपकी सांस बहुत ज्यादा फूलने लगती है, सीने में भारीपन या दर्द महसूस होता है, चक्कर आते हैं, या आपको बीच में ही रुकना पड़ जाता है, तो यह दिल की कमजोरी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। क्यों काम करता है ये टेस्ट? सीढ़ियां चढ़ना एक तरह की एरोबिक एक्सरसाइज है। इसमें शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए हमारा दिल तेजी से धड़कता है और फेफड़े ज्यादा ऑक्सीजन लेने का काम करते हैं। अगर दिल स्वस्थ है, तो वह इस चुनौती को आसानी से हैंडल कर लेता है। लेकिन अगर दिल कमजोर है या उसमें कोई समस्या है, तो वह शरीर की मांग के अनुसार खून की सप्लाई नहीं कर पाता, जिसके कारण सांस फूलना, थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सावधानियां और सीमाएं     यह टेस्ट केवल एक शुरुआती जांच है, यह किसी मेडिकल टेस्ट का विकल्प नहीं है।     अगर आपको पहले से ही दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों में दर्द या सांस की गंभीर बीमारी है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के यह टेस्ट न करें।     टेस्ट के दौरान अगर चक्कर आएं, सीने में तेज दर्द हो या बहुत ज्यादा परेशानी हो, तो तुरंत रुक जाएं और आराम करें।  

वैज्ञानिकों का दावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनाएगी इंसान को 150 साल तक जवान

नई दिल्ली किसी भी इंसान की लंबी से लंबी उम्र 100 साल के आसपास होती है। बहुत कम लोग होते हैं जो इतने साल जिंदा रहते हैं। जबकि इंसान की औसत उम्र तो 72 साल के आसपास ही मानी जाती है। लेकिन क्या हो अगर कोई आपसे कहे कि भविष्य में इंसान 150 साल तक जिंदा रहेंगे। इस बात पर यकीन करना जरा मुश्किल है, लेकिन AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने तो पूरा खेल ही बदल दिया है। अब दावा किया जा रहा है कि AI की मदद से इंसान की उम्र बढ़ाई जा सकती है। लेकिन सवाल उठता है कि AI ऐसा कैसे कर पाएगा? चलिए जानते हैं। वैज्ञानिकों ने खोजा यह तरीका डेटा सोसाइटी की रिपोर्ट बताती है कि हमारा शरीर इसलिए बूढ़ा होता है क्योंकि हमारे सेल के अंदर मौजूद डीएनए धीरे-धीरे खराब होता जाता है। जब खाना-पानी और आराम बहुत होता है, तो शरीर नई कोशिकाएं बनाने में लगा रहता है, मरम्मत नहीं करता। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका ढूंढा है। वे शरीर को थोड़ा 'झटका' देते हैं, जिससे कोशिकाएं खुद-ब-खुद मरम्मत करने लगती हैं। अभी इसकी दवा ट्रायल पर है। AI कैसे लोगों की उम्र बढ़ाएगा? पहले CRISPR नाम की तकनीक से डीएनए बदलते थे, लेकिन वह एक ही समय की तस्वीर दिखाती थी। असल जिंदगी में जीन का व्यवहार हर पल बदलता रहता है, खाने, तनाव और मौसम के साथ। यहां AI कमाल कर रहा है। AI पूरे समय जीन की हरकत पर नजर रखता है और सही समय पर सही इलाज बताता है। इससे इलाज एक-एक व्यक्ति के लिए अलग-अलग और बिल्कुल सटीक बन जाता है। साइड इफेक्ट भी बहुत कम होते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि आने वाले समय में 60-70 साल के लोग भी उतने ही तेज दिमाग वाले रहेंगे जितने 20-25 साल की उम्र में होते हैं। याददाश्त, सोचने की ताकत सब बरकरार रहेगी। लोग सिर्फ लंबा जीवन नहीं, बल्कि स्वस्थ और खुशहाल जीवन भी जिएंगे। 100-120 साल की उम्र में तंदरुस्त रहेंगे लोग डेटा सोसाइटी के को-फाउंडर दिमित्री एडलर कहते हैं, 'AI आपको सुपरहीरो नहीं बनाएगा, लेकिन आपको ज्यादा स्वस्थ, तेज दिमाग वाला और मजबूत बना देगा।' बहुत जल्दी हम उन लोगों को देखेंगे जो 100-120 साल की उम्र में भी जवान जैसे खेल-कूद कर रहे होंगे।