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सोने से पहले अपनाइए ये 5 आदतें, कामयाबी और धन आपके कदम चूमेंगे

जीवन में सफल होना हर कोई चाहता है। और हर कोई यह भी जानता है कि सफलता पानी है तो मेहनत से नहीं बचा जा सकता। लेकिन कई बार सिर्फ मेहनत करने से भी कुछ हाथ नहीं लगता। आप खुद भी अपने आस-पास कई लोगों को पाएंगे जो मेहनत तो खूब करते हैं लेकिन उन्हें सफल दूर-दूर तक नहीं कहा जा सकता। दरअसल जीवन में कुछ करना है तो प्रॉपर प्लानिंग की भी जरूरत होती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में इसी सफलता के सूत्र का जिक्र किया है। उन्होंने कुछ छोटी-छोटी आदतों के बारे में लिखा, जिन्हें आज भी यदि जीवन में उतार लिया जाए तो सफलता और धन दोनों आपके हिस्से आ सकते हैं। आचार्य की बताई इन बातों को रात में सोने से पहले फॉलो करें और अपने जीवन में पॉजिटिव बदलाव देखें। दिन कैसा गया, इसपर विचार करें आचार्य चाणक्य अपनी नीति में कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने कर्मों का हिसाब रखता है, वो जीवन में कभी असफल नहीं हो सकता। इसलिए रोजाना आपने दिन भर में क्या किया, इसका ब्यौरा आपके पास जरूर होना चाहिए। रात में जब भी सोने जाएं, तो कुछ देर जरूर सोचें कि आपका दिन कैसा रहा। क्या कुछ गलतियां आपने की, उनसे क्या सीखा और दिन को बेहतर बनाने के लिए आप क्या कर सकते थे। ऐसे आप आने वाले दिन की बेहतर प्लानिंग कर पाएंगे। अपने ज्ञान का विस्तार करें सोने से पहले कुछ देर अपना समय किताबों के साथ बिताएं। आधा घंटा या कम से कम बीस मिनट भी मिनट भी, कोई अच्छी किताब पढ़ें। कुछ ऐसा जो आपके ज्ञान में वृद्धि करे। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान सबसे बड़ा धन होता है। ऐसे में अगर सफल और धनवान बनना है तो ज्ञान के विस्तार की ओर ध्यान दें। अगले दिन की योजना बनाएं अगला दिन बेहतर और प्रोडक्टिव हो, इसके लिए पहले से ही प्रॉपर प्लानिंग करना जरूरी है। इसलिए रात में सोने से पहले ही एक मोटा-मोटा खाका अपने मन में तैयार कर लें कि आने वाला दिन आप कैसे बिताने वाले हैं। दिन के कुछ खास एजेंडा सेट करें। खासतौर से सुबह क्या करना है; पहले से ही डिसाइड कर लें। इस तरह आपका अगला दिन प्रोडक्टिव होगा और अपने गोल समय पर अचीव कर पाएंगे। अपने लक्ष्य के बारे में सोचें आजकल जिसे विजुलाइजेशन कहा जाता है, वो आचार्य चाणक्य ने सालों पहले अपनी नीति में बता दिया था। आचार्य कहते हैं कि व्यक्ति का मन हमेशा इसके लक्ष्य पर सधा हुआ होना चाहिए। जिसके आगे अपना लक्ष्य एकदम तय है, वो भविष्य में कभी भटकता नहीं और सफलता भी उसे जरूर मिलती है। इसलिए रात में सोने से पहले कुछ देर अपने लक्ष्य के बारे में सोचें। सोचकर देखें कि आपने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है तो उस वक्त आप कैसा महसूस करेंगे। ये बातें आपको और मेहनत के मोटिवेट करेंगे और आपके ब्रेन को भी सफलता के लिए रिप्रोग्राम करेंगी। सकारात्मक सोच से करें दिन समाप्त रात में सोते हुए कभी भी नेगेटिव विचार अपने मन में ना लाने दें। रात में जब आप कुछ नेगेटिव सोचते हैं, तो चीजें और भी ज्यादा नकारात्मक होने लगती हैं। इसलिए दिन की एंडिंग हमेशा हैप्पी रखें। सोने से पहले कुछ पॉजिटिव सोचें। आपकी लाइफ में जो भी कुछ अच्छा है, उसे याद करें और हर चीज के लिए शुक्रिया की भावना रखें। इस तरह आपको नींद भी अच्छी आएगी और जीवन को ले कर आपका नजरिया भी सकारात्मक होगा।  

आज का राशिफल (14 सितंबर): खास राशि वालों के लिए खुशखबरी, सफलता और संपत्ति के संकेत

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आप अपने करियर को लेकर नए से जोश और उत्साह का अनुभव करेंगे। हर कार्य में सफलता मिलेगी। निवेश करने के लिए समय शुभ है। आज के दिन आपको विभिन्न स्तोत्रों से धन लाभ भी हो सकता है। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को आज अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। रिलेशिनशिप में गलतफहमियां पैदा न होने दें। अपनी बातचीत में स्पष्ट और प्रत्यक्ष होने की कोशिश करें। प्रेमी की बातों को ध्यान से सुनें। पैसे कमाने के नए तरीकों खोजें। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के करियर में कुछ अनिश्चित बदलाव हो सकते हैं। जो आपके लिए कुछ रोमांचक और नए अवसर लेकर आ सकता है। इस समय आपको कुछ कठिन निर्णय लेने की आवश्यकता महसूस हो सकती है। अपने खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण रखें। कर्क राशि- कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन अच्छा कहा जा सकता है। जीवन में चली आ रही परेशानियां दूर होंगी। आपको अपने काम के लिए पहचान मिल सकती है, जो आपके आत्मविश्वास को बढ़ा को बढ़ाने में मदद करेगा और आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा। सिंह राशि- सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन चुनौतियों से भरा रह सकता है। आपके ऊपर अधिक जिम्मेदारियां आ सकती हैं या आप एक नए करियर की शुरुआत कर सकते हैं। इस समय खुद पर ध्यान केंद्रित करना और रहना बेहद महत्वपूर्ण है। जरूरत से अधिक जिम्मेदारियों का बोझ खुद पर न लें। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक योजना बनाएं। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के दिन अच्छा रहेगा। करियर में तरक्की के कई मौके मिलेंगे। दूसरों के साथ मिलकर काम करने से आप अधिक सफलता हासिल कर सकते हैं। अन्य लोगों के विचारों को स्वीकार करना सीखें और आवश्यकता पड़ने पर समझौता करने के लिए तैयार रहें। हालांकि, अपनी राय साझा करने में संकोच न करें। निवेश के लिए नए अवसर तलाश करने की कोशिश करें। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। तुला राशि- तुला राशि वाले आज अधिक मेहनत करेंगे। मेहनत का फल जरूर मिलेगा। आप अपने करियर को लेकर अधिक महत्वाकांक्षी महसूस कर सकते हैं। अपने लक्ष्यों का निर्धारण कर अपने प्रोफेशनल लाइफ को विकसित बनाने के लिए नए अवसरों का पीछा करें। आर्थिक रूप से दिन अच्छा रहेगा। वृश्चिक राशि- आपके लिए यह दिन बड़े बदलावों वाला हो सकता है। रिस्क ले सकते हैं। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साहसिक कदम उठाएं। काम पूरा करने की ओर ध्यान दें। आज निवेश के नए अवसर तलाशें और अपने वित्त में सुधार करने की कोशिश करें। जीवनसाथी का आज पूरा साथ मिलेगा। धनु राशि- आज का दिन धनु राशि वालों के लिए शुभ रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में सफलता मिलेगी। करियर को आगे बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे। वित्तीय रूप से, यह किसी भी ऋण का भुगतान करने या अपने क्रेडिट स्कोर में सुधार करने के लिए एक अच्छा समय हो सकता है। मकर राशि- मकर राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहेगा। करियर के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। कार्यस्थल पर आपको अतिरिक्त जिम्मेदारियां उठानी पड़ सकती हैं। कड़ी मेहनत का फल मिलेगा। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। इस समय निवेश न करें। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों को थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता होगी। कम्युनिकेशन स्किल्स का फायदा उठाएं। अपने विचारों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से व्यक्त करें। प्रेमी के साथ समय व्यतीत करें। व्यापार में भी सावधानी से फैसले लें। अपने प्रोफेशनल सर्किल का भी विस्तार करें। मीन राशि- आपके जीवन में बड़े बदलाव हो सकते हैं। यह दिन आपके लिए काफी रोमांचक हो सकता है। यह दिन नर्वस करने वाला भी हो सकता है। अपने खर्चों पर नजर रखें। आज स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। दापंत्य जीवन भी खुशियों से भरा रहेगा।

जानें सर्वपितृ अमावस्या पर वो वास्तु टिप्स जो दूर करेंगे सभी पितृ दोष

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। यह दिन उन सभी पूर्वजों को समर्पित होता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध सही तिथि पर नहीं हो सका। यह दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस दिन अगर कुछ विशेष वास्तु उपाय किए जाएं, तो न केवल पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, बल्कि घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति भी बनी रहती है।आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या 2025 पर किए जाने वाले 5 सरल वास्तु उपाय, जो पितृ दोष को दूर कर सकते हैं। तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और यह सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है। पितृ दोष से जुड़ी नकारात्मक शक्तियों को यह दूर करने में सहायक होती है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन सुबह स्नान कर तुलसी के पौधे के पास तिल के तेल का दीपक जलाएं और गायत्री मंत्र या पितरों का तर्पण मंत्र पढ़ें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है। दक्षिण दिशा की सफाई और पितरों की तस्वीर का ध्यान वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को पितृ दिशा कहा गया है। यह दिशा हमारे पूर्वजों से जुड़ी होती है। अगर यह दिशा गंदी या अव्यवस्थित हो, तो पितृ दोष उत्पन्न हो सकता है। इस दिन दक्षिण दिशा की विशेष सफाई करें और वहां पितरों की तस्वीर को साफ कर अगरबत्ती, दीप आदि लगाएं। तिल जल, फूल और अक्षत अर्पण कर श्रद्धा पूर्वक नमस्कार करें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। कौओं को भोजन कराएं कौवे को पितरों का प्रतिनिधि माना गया है। ऐसा माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर कौए को भोजन कराने से पितरों को भोजन प्राप्त होता है। चावल, घी, रोटी या पका हुआ भोजन कौओं को खिलाएं। इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार को मिलता है। भोजन में काले तिल मिलाना और पीपल के पत्ते पर परोसना अत्यंत शुभ माना जाता है। पीपल के वृक्ष की पूजा करें पीपल का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है और यह पितरों को प्रसन्न करने का एक सशक्त माध्यम है। इससे पितृ दोष शांत होता है। सर्वपितृ अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं, दीपक जलाएं और सात परिक्रमा करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या पितृ गायत्री मंत्र का जाप करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और पितरों की कृपा बनी रहती है।  ईशान कोण का रखें खास ध्यान इस दिन के बाद से ही नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। यदि आप अपनी इस दिशा को साफ़-सुथरा रखते हैं तो जल्द ही आपको वास्तु दोष से मुक्ति मिलती है। इतना ही नहीं साथ में पूर्वजों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।  

फालतू में मत फेंकें अपनी घड़ी, ये टिप्स कर देंगी समय सही!

नई दिल्ली काल यानी समय कभी नहीं रुकता है। जो समय के साथ चलता है, वही आगे बढ़ता है। जो ठहर जाता है वह खत्म हो जाता है। इसी समय को बताने के लिए हम घड़ी का इस्तेमाल करते हैं, जो हमेशा चलती रहनी चाहिए। मगर, यदि घड़ी बंद हो जाए, तो उसे घर से हटा देना चाहिए। दरअसल, यह निगेटिव एनर्जी पैदा करती है और इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां जीवन में आने लगती हैं। इसीलिए बंद घड़ी को घर से बाहर निकाल दिया जाता है। वास्तु के अनुसार, बंद घड़ी आपके लिए लगातार नुकसान और बुरे समय का कारण भी बन सकती है। करियर पर भी डालती है असर बंद घड़ी को घर में रखने से करियर, आर्थिक स्थिति और रिश्तों में बाधा आ सकती है। ज्योतिष में घड़ी को ग्रहों से जोड़ा जाता है। घड़ी के बंद होने का मतलब है कि समय के फ्लो यानी बहाव में रुकावट आ रही है। इसका असर आपकी तरक्की पर भी पड़ता है। लिहाजा, अगर आपके घर में भी कोई बंद घड़ी पड़ी है, तो अब समय है कि उसे घर से बाहर कर दिया जाए। मगर, इससे पहले आप एक उपाय कर सकते हैं, जो आपकी किस्मत के बंद ताले को खोल सकता है। बंद घड़ी से करें ये उपाय घर में पड़ी खराब घड़ी को घर से बाहर निकालने से पहले आप जिस भी परेशानी से जूझ रहे हैं, उसे एक कागज पर लिख लें। इसके बाद उस कागज के टुकड़े को घड़ी के साथ रखकर काले कपड़े से लपेट दें। इसके बाद इस घड़ी को घर से दूर किसी कचरा फेंकने की जगह पर फेंक आएं। इस उपाय को करते समय आपको यह ध्यान रखना है कि आपको पीछे पलटकर नहीं देखना है। बस इतना करने के बाद आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपके जीवन से वह समस्या दूर हो रही है।

करवा चौथ कब है? 9 और 10 अक्टूबर में से सही तिथि, शुभ समय और पूजा सामग्री की जानकारी

हिंदू धर्म में कार्तिक महीने का विशेष महत्व माना गया है। इस महीने को पूजन पाठ और दान धर्म से जोड़कर देखा जाता है। इस बार 8 अक्टूबर से कार्तिक के महीने की शुरुआत हो रही है। कार्तिक के महीने में करवा चौथ का त्यौहार भी आता है जो सुहागिन महिलाओं के लिए काफी खास माना गया है। इस हिंदू महीने में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी की पूजन के साथ करवा चौथ के व्रत का भी महत्व माना गया है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आने वाले इस त्यौहार पर सुहागन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्रमा का पूजन करने के बाद व्रत खोलती हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन विधि विधान से की गई पूजन रिश्ते में प्रेम को बढ़ाती है। चलिए आपको इस शुभ पर्व की सही तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में बताते हैं। करवा चौथ की तिथि  वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल 10 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत किया जाने वाला है। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 9 अक्टूबर को देर रात 10:54 पर होने वाली है। यह तिथि 10 अक्टूबर की शाम 7:38 पर समाप्त होगी। पूजन का मुहूर्त अगर आप भी हारतालिका तीज का व्रत करते हैं तो पूजन का शुभ मुहूर्त 5:16 से शाम 6:2 मिनट तक है। इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 7:42 का बताया जा रहा है। पूजन की सामग्री पूजन के लिए कच्चा दूध, पुष्प, शक्कर, घी, अगरबत्ती, मिठाई, गंगाजल, अक्षत, कुमकुम, मेहंदी, बिंदी, चूड़ी, बिछिया, महावीर, छलनी, जल का लौटा, थाली और दीपक की आवश्यकता होगी। इन चीजों का करें दान करवा चौथ के दिन माता करवा की पूजन अर्चन करें। व्रत की कथा का पाठ करने के बाद माता से जीवन में सुख समृद्धि लाने की प्रार्थना करें। अब आपको केसर सिंदूर, इत्र और लाल चुनरी का दान करना है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।

आज का राशिफल: 13 सितंबर को चमकेगा इन जातकों का भाग्य, पैसा और तरक्की तय

मेष राशि- आज मेष राशि वाले संवेदनशील बने रहेंगे और दूसरों की मदद करेंगे। रिश्तों में प्यार और भरोसा बढ़ेगा। काम में नई योजनाएं बन सकती हैं। पैसों को लेकर सोच-समझकर फैसले लें। समय पर आराम और हल्की कसरत सेहत के लिए ठीक रहेगी। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। आज विचार स्पष्ट रहेंगे। नए लोगों से जुड़ाव फायदेमंद रहेगा। रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें। कामकाज में फायदा होगा। पैसों की समस्या दूर होगी। सुबह या शाम की सैर और हल्का खाना शरीर को स्वस्थ रखेगा। मिथुन राशि- मिथुन राशि वाले आज धैर्य से काम लें। परिवार और काम दोनों को समय दें। पैसों को लेकर सावधानी बरतें। काम में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पर्याप्त आराम और संतुलित आहार आपकी सेहत को अच्छा रखेंगे। कर्क राशि- कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। आज उत्साह और ऊर्जा बनी रहेगी। रिश्तों में खुलापन और खुशी दिखाएं। कामकाज में योजना बनाकर आगे बढ़ें। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी लेकिन फालतू खर्च से बचें। योग या हल्की कसरत सेहत के लिए अच्छी रहेगी। सिंह राशि- सिंह राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। पढ़ाई और काम में मन लगेगा। बच्चों की सेहत का ध्यान रखें और परिवार से सहयोग मिलेगा। धार्मिक कामों या भक्ति संगीत में मन लगेगा। रिश्तों में प्यार और भरोसा बढ़ेगा। नौकरी में नए मौके मिल सकते हैं और कामकाज बढ़ेगा। कन्या राशि- कन्या राशि वाले आज आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। परिवार और साथी के साथ समय अच्छा गुजरेगा। काम में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आय बढ़ने के अवसर हैं, लेकिन खर्च सोच-समझकर करें। ज्यादा तनाव न लें, नींद पूरी करें और शरीर को आराम दें। तुला राशि- तुला राशि वाला को शुभ फल की प्राप्ति होगी। आय बढ़ने की संभावना है लेकिन खर्च सोच-समझकर करें। सेहत के लिए समय पर खाना, आराम और हल्की कसरत फायदेमंद रहेगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। वृश्चिक राशि- आप आज छोटे-छोटे काम आसानी से कर पाएंगे। नए लोगों से मुलाकात फायदेमंद रहेगी। रिश्तों में खुलकर और धीरे बोलें। कामकाज में छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं। पैसे की बचत पर ध्यान दें। हल्की-फुल्की कसरत और समय पर आराम सेहत के लिए ठीक रहेगा। धनु राशि- धनु राशि वालों का मन आज शांत रहेगा और आप लोगों की मदद करने के लिए आगे आएंगे। परिवार और साथी से समर्थन मिलेगा। कामकाज में नई योजनाएं बन सकती हैं। पैसे को लेकर सावधानी जरूरी है, फालतू खर्च से बचें। सेहत के लिए ताजे फल, सब्जियां और आराम लेना अच्छा रहेगा। मकर राशि- आज योजनाएं पूरी होंगी और कामकाज में अनुशासन रहेगा। रिश्तों में धैर्य और सरलता अपनाएं। पैसों की स्थिति संभलकर चलेगी, जरूरत से ज्यादा खर्च न करें। हल्की कसरत और समय पर खाना-पीना आपकी सेहत ठीक रखेगा। कुंभ राशि- आज मेहनत रंग लाएगी। रिश्तों में ईमानदारी और धैर्य रखें। काम में नए विचार आएंगे, उन्हें धीरे-धीरे लागू करें। पैसों के मामले में बचत जरूरी है। हल्की सैर और ध्यान लगाने से मन शांत रहेगा। मीन राशि- आज भावनाओं में न बहें। धीरे-धीरे प्रगति होगी। परिवार और दोस्तों से मेल-जोल बढ़ेगा। कामकाज अच्छा चलेगा। पैसों के मामले में धैर्य रखें और छोटी-छोटी बचत करते रहें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

जानिए क्या है भगवान कृष्ण शब्द का अर्थ

श्रीकृष्ण संसार में अवतीर्ण होकर धर्म का परिपालन के साथ सरल और सहज जीवन बिताने का मार्ग दिखाते हैं। उनके नामस्मरण से ही मोक्ष सुनिश्चित है। कृष्ण शब्द की व्युत्पत्ति ब्रह्मवैवर्तपुराण में कई प्रकार से दर्शाई गई है। कृष्ण शब्द में तीन अक्षर विद्यमान हैं। जैसे कृष़ण़्अ। इनमें कृष् का अर्थ है उत्कृष्ट, ण् का अर्थ है, उत्तम भक्ति और अ का अर्थ है देने वाला। अर्थात् उत्कृष्ट भक्ति को जो देता है अर्थात् जगाता है वही कृष्ण है। कृष्ण शब्द में ही दो अक्षर कृष़्ण मानकर पुराणों में जो अर्थ बताया गया है उसके अनुसार कृष् का अर्थ है परम आनन्द और ण का अर्थ है दास्य कर्म अर्थात् सेवा। कृष्ण शब्द का अर्थ होगा परम आनन्द और सेवा का अवसर, इन दोनों को देने वाला ही कृष्ण है। कृष्ण शब्द की तीसरी व्युत्पत्ति बताते हैं कि कृष् का अर्थ है कोटि जन्म से अर्जित पापों का क्लेश और ण का अर्थ है उन सब पापों को दूर करने वाला। कोटि जन्मों से किए हुए पापों को दूर करने वाला ही कृष्ण है। शास्त्रों में कृष्ण नाम के उच्चारण का फल भगवान् विष्णु के हजार नामों को तीन बार दोहराने के बराबर मिलता है। वैदिक विद्वान् कहते हैं कि सभी नामों से कृष्ण का नाम बड़ा है। जिसके मुख से कृष्ण नाम का उच्चारण किया जाता है उस के सारे पाप स्वतः ही भस्मसात् हो जाते हैं। भागवत का उद्देश्य है कि श्रीकृष्ण तत्व को दर्शाना। श्रीकृष्ण परब्रह्म भगवान् विष्णु के अवतार माने जाते हैं। इस अवतार के लिए योग्य तिथि का चयन भगवान कृष्ण ने अष्टमी के रूप में किया। रोहिणी नक्षत्र से युक्त अष्टमी के दिन श्रीकृष्ण धरती पर अवतीर्ण हुए। कृष्ण जन्म और उससे जुड़ी हुई संख्या आठ का महत्व स्फुरित होगा। कृष्ण के अवतार से पहले मत्स्य और कूर्म आदि सात अवतार भगवान् विष्णु के माने जाते हैं। यह कृष्णावतार विष्णु के दस अवतारों में से आठवां है। इतना ही नहीं, देवकी और वसुदेव की आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कृष्ण को परतत्व समझकर उनसे प्रेम करने वाली राधा का भी जन्म भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि को ही हुआ। क्या चमत्कार है यह आठ की संख्या जो कि अचेतन है, फिर भी कृष्णानुग्रह से मुख्यत्व प्राप्तकर धन्य हो गई। कृष्ण का संकल्प है कि वे साधुजनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए तथा धर्म के प्रतिष्ठापन के लिए हर युग में जन्म लेते हैं। इस संकल्प को वेदव्यास ने भी भागवत में आठवें श्लोक के रूप में दर्शाकर इस संख्या के महत्व को और बढ़ाया। आमतौर पर सात समुद्र, सात वर्ण, सात लोक, सात पर्वत तथा संगीत शास्त्र में सप्तस्वर आदि ही प्रसिद्ध हैं। जब कोई भी पदार्थ सात तक पहुंचता है तो उसे उस पदार्थ की चरम सीमा मानी जाती है। ऐसी दशा में जब आठवां कोई होगा तो वह परब्रह्म ही माना जाता है। यही कारण है कि श्रीकृष्ण ने अपने जन्मतिथि के रूप में अष्टमी को ही चुना। इसीलिए अपने गुरूजनों से उपदेश पाकर लोग भी अष्टांग् योग और अष्टांग् नमस्कार आदि को अपनाते हैं। सर्वलोकहितकारी कृष्ण ने जन्म के समय पिता वसुदेव को अपना वास्तविक रूप दिखाकर मोहित किया। तमद्भुतं बालकमम्बुजेक्षणं चतुर्भुजं शङख्गदार्युदायुधम्। श्रीवत्सलक्ष्मं गलशोभिकौस्तुभं पीताम्बरं सान्द्रपयोदसौभगम्।। कृष्ण के गुणों का जो वर्णन किया गया है, उससे पता चलता है आदर्श उत्तम पुरूष के लक्षण। यहां पर महर्षि वेदव्यास 64 गुणों का वर्णन करते हैं, जो संख्या भी आठ से आठ का गुणनफल ही है। श्रीकृष्ण के सखाओं की संख्या देखेंगें तो भी आश्चर्य होगा कि वह भी आठ ही है। उज्वलनीलमणि नामक ग्रन्थ में इनकी प्रियाओं में भी राधा, चन्द्रावली आदि आठ सखियां ही मुख्य रूप से दर्शायी गई हैं। श्रीकृष्ण की पत्नियों की संख्या तो असंख्य हैं तथापि उन में से भी रूक्मिणी, जाम्बवती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रविन्दा, नाग्नजिती, भद्रा और लक्ष्मणा नाम की आठ पत्नियां ही प्रमुख हैं। कृष्ण भक्ति और शरणागति से प्राप्त होते हैं। सामान्य जन भी उन्हें अपनी आंतरिक पुकार से प्राप्त कर सकता है। श्रीकृष्ण ने संसार को भक्ति और मैत्री के महत्व को अपने आचरण से सिखाया है, जिसका अनुपालन हमें करना है। हमें परबह्म श्रीकृष्ण से न वै प्रार्थ्यं राज्यं न च कनकमाणिक्य-विभवम् जैसे भौतिक पदार्थो को त्यागकर सदा हर त्वं संसारं हर त्वं पापानि इत्यादि प्रार्थना करनी चाहिए। वेदांतदेशिक प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि नाथायैव नमःपदं भवतु नः अर्थात् भगवान श्रीकृष्ण के लिए हमारे पास समर्पित करने के लिए मात्र प्रणाम है।  

असफलता में तलाशें सफलता

क्सर देखने में आता है कि छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते। बिना मंजिल के सफलता नहीं मिलती। मंजिल या लक्ष्य का निर्धारण करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि मुझ में कितनी योग्यता है और क्या-क्या कमियां हैं? मंजिल को प्राप्त 1करने के लिए हमें अपनी योग्यताओं का भरपूर उपयोग करके अपनी कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। लक्ष्य यह सोचकर बनाना चाहिए कि इस काम को मैं पूरा कर सकता हूं। जब मंजिल के निर्धारण में कठिनाई का अनुभव हो तो हमें अपनी अंतर्रात्मा की सहायता लेनी चाहिए क्योंकि आत्मबल सबसे बड़ा बल है। दूसरों के विचार पूछने पर हमें भिन्न-भिन्न विचार सुनने को मिलेंगे जिससे हमें अपनी मंजिल के निर्धारण में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है कि कौन-सा मार्ग अपनाएं। हमें परमेश्वर ने सोचने समझने की शक्ति दी है। यह सबसे अच्छा हो यदि अपनी मंजिल का निर्धारण हम स्वयं करें। हमें जो आज्ञा अपनी आत्मा या अंतरूकरण से प्राप्त होती है वह हर मौके पर सही रहती है। हमें अपने मार्ग में मिलने वाली असफलताओं की उपेक्षा करनी चाहिए और अपनी सफलताओं पर खुश नहीं होना चाहिए। मंजिल के मार्ग में आने वाली बाधाओं की चिंता नहीं करनी चाहिए और गलतियों को दोहराना नहीं चाहिए। एक कहावत है कि जो जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। कभी गलत ढंग से नहीं सोचना चाहिए और अपने को किसी से कम नहीं समझना चाहिए। जीवन में मिलने वाली असफलताओं से अनुभव प्राप्त होता है जिससे सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। प्रत्येक के विचार और सिद्घांत अलग-अलग होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने विचारों और सिद्घांतों को जीवन में उतारें। अपने लक्ष्य की प्राप्ति में वही व्यक्ति सफल हो सकता है जो कठिन परिश्रम कर सके। कल्पना मात्र करने से कोई व्यक्ति सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। कभी-कभी ऐसा लगता है कि कुछ युवा छोटी-सी बात पर निरुत्साहित होकर अपना धीरज छोड़ बैठते हैं और अपनी मंजिल को प्राप्त नहीं कर पाते। केवल योजनाओं के निर्माण से कोई व्यक्ति सफल नहीं हो सकता बल्कि उन्हें पूर्ण करने के लिए सदैव परिश्रम करने के लिए तैयार रहना चाहिए। जीवन की सफलता के शिखर पर परिश्रम करने वाले व्यक्ति ही पहुंचते हैं। तो आइए, सबसे पहले हम अपनी मंजिल का निर्धारण करके अपनी कमजोरियों को दूर करते हुए उचित परिश्रम करें।  

नवजात की मृत्यु: जानिए इस परिस्थिति में श्राद्ध करना चाहिए या नहीं

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म किए जाते हैं जिससे हमारे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. श्राद्ध कर्म, पिंडदान और तर्पण करने से मृतक की आत्मा तृप्त होती है. साल 2025 में पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है जो 21 सितंबर यानी सर्वपितृ अमावस्या की तिथि तक चलेंगे. पितृपक्ष के दौरान सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है. हर तिथि का अपना अलग श्राद्ध होता है. लेकिन क्या नवजात शिशु का श्राद्ध कर्म कर सकते हैं, और अगर कर सकते हैं तो नवजात शिशु के श्राद्ध कर्म के क्या नियम हैं जानते हैं. बच्चों का श्राद्ध कब करना चाहिए? अगर बच्चे के आयु 6 वर्ष से कम है और उसका निधन हो जाता है तो बच्चा का श्राद्ध उसकी मृत्यु तिथि पर ही किया जाता है. नवजात शिशु की मृत्यु के बाद, श्राद्ध (पिंडदान) के बजाय तर्पण किया जाता है. तर्पण एक विशिष्ट कर्मकांड है जो प्रेत योनि में फंसे शिशु को मोक्ष दिलाने में मदद करता है. तर्पण क्यों किया जाता है? जब कोई बच्चा नवजात शिशु की मृत्यु के बाद प्रेत योनि में अटक जाता है. तर्पण के बाद शिशु पितृ बनता है और मोक्ष प्राप्त करता है. अगर नवजात शिशु की किसी कारण से मृत्यु हो जाती है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति करना जरूरी होता है.नवजात शिशु का केवल तर्पण किया जाता है और नवजात शिशु का पिंडदान ना करें. किस तिथि पर होता है बच्चों का श्राद्ध ? पितृपक्ष के दौरान अगर किसी की तिथि ज्ञात ना हो तो उसका तर्पण त्रयोदशी तिथि के दिन कर सकते हैं. ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. गर्भावस्था में शिशु के श्राद्ध के नियम? गर्भावस्था के दौरान किसी कारण से अजन्मी संतान की मृत्यु माता के गर्भ में हो जाती है तो शास्त्रों के अनुसार उसका श्राद्ध कर्म नहीं किया जाता है.

किस्मत बदलना है आसान: पानी की बोतल रखें इस दिशा में

वास्तु शास्त्र प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो घर, ऑफिस और अन्य स्थानों पर ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करके जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने में मदद करता है। पानी, जो जीवन का आधार है, वास्तु में भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खासतौर पर घर में पानी की बोतल रखने का स्थान और तरीका वास्तु के अनुसार सही होना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे और नकारात्मकता से बचा जा सके। पानी का संबंध जीवन, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य से है। पानी की बोतल घर के विभिन्न कोनों में रखी जाती है लेकिन अगर इसे गलत दिशा या स्थान पर रखा जाए, तो इससे घर में ऊर्जा असंतुलित हो सकती है। गलत जगह पानी रखना तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और आर्थिक संकट ला सकता है। इसलिए वास्तु में पानी की बोतल रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करके आप घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनाए रख सकते हैं। उत्तर और पूर्व दिशा: वास्तु के अनुसार पानी की बोतल घर में उत्तर या पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है। ये दिशाएं धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की ऊर्जा लाती हैं। दक्षिण-पश्चिम दिशा से बचें: पानी की बोतल को कभी भी दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ये दिशाएं भारी ऊर्जा रखती हैं और यहां पानी रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे परिवार में झगड़े और असंतोष हो सकता है। दक्षिण-पूर्व दिशा में भी न रखें: यह दिशा अग्नि तत्व की होती है, इसलिए यहां पानी की बोतल रखना अशुभ माना जाता है। पानी की बोतल की स्थिति और साफ-सफाई घर में पानी की बोतल हमेशा साफ और स्वच्छ पानी से भरी होनी चाहिए। गंदा या खराब पानी न रखें क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। बोतल को ढककर रखें: बोतल को अच्छे से ढककर रखें ताकि उसमें कोई धूल या कीट न पड़ें। खुले पानी को भी खुली जगह पर नहीं रखना चाहिए। पानी को रोजाना बदलें: पानी को नियमित रूप से बदलना चाहिए। पुराना पानी घर में अशुभता ला सकता है। साफ बोतल का प्रयोग करें: प्लास्टिक की बोतल की बजाय ग्लास या स्टील की बोतल का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। प्लास्टिक से निकलने वाली हानिकारक गैसें घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकती हैं। पानी की बोतल को रखने का सही स्थान घर के मुख्य द्वार के पास उत्तर या पूर्व दिशा में पानी की बोतल रखना शुभ होता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। किचन के पास न रखें: पानी की बोतल को रसोई या किचन के पास दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए क्योंकि किचन में अग्नि का प्रभाव होता है। बेडरूम में सीमित मात्रा में रखें: बेडरूम में बहुत ज्यादा पानी की बोतल नहीं रखें। अगर रखनी हो तो सिर के पास नहीं, बल्कि कमरे के उत्तर या पूर्व दिशा में रखें। बाथरूम के बाहर रखें: बाथरूम के अंदर पानी की बोतल रखना अशुभ माना जाता है। यदि जरूरी हो तो बाथरूम के बाहर साफ और अच्छी जगह पर ही रखें।