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बुरी खबर: पंजाब में 30 सितंबर तक 11 लाख राशन कार्ड धारकों के नाम होंगे हटाए

चंडीगढ़ पंजाब के 11 लाख राशन कार्ड धारकों के लिए बुरी खबर है। दरअसल, केंद्र सरकार ने इन कार्ड धारकों के नामों पर आपत्ति जताई है और इन्हें सूची से हटाने के आदेश दिए हैं। केंद्र की ओर से 30 सितंबर तक यह नाम काटने के लिए कहा गया है, जिसके बाद इन लोगों को मुफ्त गेहूं मिलना बंद हो जाएगा। बताया जा रहा है कि ये लोग आयकर भर रहे हैं, 5 एकड़ से अधिक जमीन और गाड़‍ियों के मालिक हैं, जिसके चलते इनके राशन कार्ड रद्द करने का फैसला किया गया है। जानकारी के मुताबिक देशभर में करीब 8 करोड़ संदिग्ध लाभार्थी पहचाने गए हैं, जो निर्धारित शर्तों को पूरा न करने के बावजूद मुफ्त राशन ले रहे हैं। इनमें पंजाब के 11 लाख लाभार्थी भी शामिल हैं। केंद्र ने पंजाब सरकार को पत्र लिखकर इन संदिग्ध राशन कार्ड धारकों की जानकारी दी है। फिलहाल पंजाब सरकार ने इन कार्ड धारकों की जांच शुरू कर दी है और केंद्र से इस काम के लिए 6 महीने का समय मांगा है। पंजाब सरकार का कहना है कि 1 अक्टूबर से धान की खरीद का सीजन शुरू हो रहा है और पूरा स्टाफ उसी में व्यस्त रहेगा। इसके अलावा, पंजाब सरकार ने केंद्र से राशन कार्ड धारकों का डेटा भी मांगा है ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके। इस खबर के सामने आने के बाद पंजाब के राशन कार्ड धारकों में हलचल मच गई है और केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया जा रहा है।  

पीएम बिहार को छह लेन पुल, बुद्ध सर्किट से जुड़ी ट्रेन की सौगात देंगे

– गंगा नदी पर बिहार में 2005 के पहले थे 4 पुल, 2005 के बाद से अब तक बने 14 पुल पटना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 अगस्त को बिहार के गया में जनसभा को संबोधित करने आ रहे हैं। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बिहार को कई प्रमुख सौगातें देने जा रहे हैं। इसमें दो बेहद खास हैं, पहला, देश का सबसे चौड़ा पहला छह लेन पुल शामिल है। यह पुल औटा (मोकामा) से सिमरिया (बेगूसराय) के बीच बना एक्सपैंशन केबल तकनीक से बना हुआ है। दूसरा, बुद्ध सर्किट से जुड़ स्थलों को जोड़ता हुए एक ट्रेन शामिल है। यह ट्रेन वैशाली से शुरू होकर नालंदा, राजगीर, गयाजी होते हुए कोडरमा (झारखंड) तक जाएगी। बिहार और झारखंड में मौजूद बुद्ध से जुड़े सभी स्थलों को यह ट्रेन एक साथ जोड़ेगी।       बेगूसराय जिला का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सिमरिया धाम से शुरू होने वाला यह पुल पुराने दो लेन रेल सह सड़क पुल राजेंद्र सेतू के समानांतर बनाया गया है। सिमरिया धाम प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्मस्थान भी है। देश के अन्य छह लेन पुलों से इसकी चौड़ाई अधिक छह लेन के इस पुल की चौड़ाई 34 मीटर है। आमतौर पर छह लेन के पुल की चौड़ाई 29.5 मीटर होती है, लेकिन सिमरिया पुल की चौड़ाई (डेक) 34 मीटर है। देश में मौजूद अन्य छह लेन पुलों की तुलना में यह साढ़े चार मीटर अधिक चौड़ा है। इससे अधिक संख्या में वाहनों की आवाजाही बेहद सुगमता से हो सकेगी। इसके निर्माण पर 1871 करोड़ रुपये का खर्च आया है। एप्रोच समेत इस पुल की कुल लंबाई 8.150 किमी है। गंगा नदी पर इसकी लंबाई 1.86 किमी है। उत्तर-दक्षिण बिहार की दूरी 100 किमी हो जाएगी कम पुल पर आवागमन शुरू होते ही उत्तर से दक्षिण बिहार के बीच 100 किमी की दूरी कम हो जाएगी। साथ ही पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम से भी आवागमन की दूरी कम हो जाएगी और आना-जाना आसान हो जाएगा। बिहार में यह पुल है, जिसे हैम (हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल) मोड में बनाया गया है। इस मोड में निर्माण एजेंसी को 60 फीसदी राशि खर्च करनी पड़ती है। जबकि सरकार सिर्फ 40 फीसदी राशि खर्च करती है। टोल टैक्स के माध्यम से एजेंसी अपनी लागत वसूल करती है। इस मोड पर इस प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद राज्य के सड़क एवं पुल के अन्य प्रोजेक्ट भी इसी मोड पर बनाने का रास्ता खुल गया है। 2005 के बाद बिहार में गंगा पर बने 14 पुल बिहार में गंगा नदी पर 2005 के पहले चार प्रमुख पुल मौजूद थे। इसमें बक्सर में दो लेन का वीर कुंवर सिंह सेतु, पटना में चार लेन का महात्मा गांधी सेतु, बेगूसराय में दो लेन का राजेंद्र सेतु और 2 लेन का विक्रमशीला सेतु शामिल है।       परंतु 2005 के बाद से अब तक 14 पुल तैयार किए गए। इसमें बक्सर में वीर कुंवर सिंह सेतु के समानांतर 2 लेन पुल, पटना में दो लेन रेल सह सड़क पुल जेपी सेतु, आरा-छपरा 4 लेन पुल, बेगूसराय में राजेंद्र सेतु के समानांतर 6 लेन पुल और मुंगेर घाट में 2 लेन रेल सह सड़क पुल शामिल है। गंगा पर ये पुल जल्द होने जा रहे तैयार इसके अतिरिक्त गंगा नदी पर बने अभी 9 ऐसे पुल हैं, जिनकी कार्य अभी प्रगति पर है। जल्द ही इनका निर्माण पूरा हो जाएगा। बक्सर में वीर कुंवर सिंह सेतु के समानांतर अतिरिक्त 3 लेन पुल, पटना में जेपी सेतु के समानांतर 6 लेन पुल, सारण जिला में दीघवारा-शेरपुर 6 लेन पुल, पटना में महात्मा गांधी सेतु के समानांतर 4 लेन पुल, पटना सिटी में 6 लेन कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल, बख्तियारपुर-ताजपुर पर 4 लेन पुल, विक्रमशीला के समानांतर 4 लेन पुल, अगुवानी घाट-सुल्तानगंज 4 लेन पुल तथा मनिहारी घाट से साहेबगंज के बीच 4 लेन पुल शामिल है।         इसके अलावा रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे पर मटिहानी से शाम्हो पुल भी गंगा नदी पर बन रहे पुलों की फेहरिस्त में 15वें नंबर पर है। इसकी विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन कार्य की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है।   बिहार-झारखंड में बुद्ध सर्किट के सभी स्थान जुड़ेंगे ट्रेन से पीएम नरेंद्र मोदी बिहार-झारखंड के बुद्ध सर्किट में शामिल सभी स्थानों को जोड़ने वाली एक जोड़ी ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन वैशाली रेलवे स्टेशन से शुरू होगी और झारखंड के कोडरमा तक जाएगी। यह ट्रेन हाजीपुर, सोनपुर, पटना, फतुहा, बख्तियारपुर, बिहारशरीफ, नालंदा, राजगीर, तिलैया, गया, गुरपा और कोडरमा जंक्शन तक जाएगी। वैशाली स्टेशन से यह ट्रेन सुबह सवा 5 बजे खुलेगी और दोपहर सवा तीन बजे कोडरमा पहुंचेगी। इसी कोडरमा से यह ट्रेन शाम पौने 5 बजे खुलेगी और देर रात पौने 3 बजे वैशाली पहुंचेगी।

नशामुक्त समाज की राह दिखा रही हैं जीविका दीदी

कोशी मलवरी परियोजना के तहत 4,500 दीदियों को मलबरी की खेती और रेशम कीट पालन से जोड़ा गया जीविका दीदियों द्वारा अब तक 987 पौधशालाएं तैयार की गई हैं पटना, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ग्रामीण विकास विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘जीविका’ अब केवल महिलाओं की आर्थिक मजबूती का जरिया नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक सशक्त ताकत बन चुकी है। गांव–गांव में सक्रिय 60,000 से अधिक ग्राम संगठन आज नशामुक्ति और बाल विवाह रोकथाम के लिए संगठित अभियान चला रहे हैं। महिलाओं की अगुवाई में निकल रही जागरूकता रैलियां, नुक्कड़ नाटक और चौपाल बैठकें गांव की तस्वीर बदल रही हैं। शराबबंदी नियमों के अनुपालन में भी जीविका दीदियों की भूमिका निर्णायक साबित हो रही है। जहां कभी शराब और तंबाकू का सेवन आम था, वहां अब सामूहिक चेतना और सामाजिक दबाव से सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। सिर्फ सामाजिक सुधार ही नहीं बल्कि जीविका दीदियां पर्यावरण और आजीविका सृजन में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और मनरेगा के समन्वय से जीविका दीदियों द्वारा अब तक 987 पौधशालाएं तैयार की गई हैं और 4.25 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री कोशी मलवरी परियोजना के तहत 4,500 दीदियों को मलबरी की खेती और रेशम कीट पालन से जोड़ा गया है। वहीं, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की साझेदारी से 372 महिलाएं सोलर लैंप निर्माण कर अपने उद्यम चला रही हैं। गया जिले में स्थापित जे-डब्लूआईआरईएस कंपनी इस कार्य को गति दे रही है। गौरतलब है कि महिलाओं की पहल शिक्षा और कैरियर निर्माण तक भी पहुंच रही है। जीविका के तहत 33 जिलों के 110 प्रखंडों में सामुदायिक पुस्तकालय सह कैरियर विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण बच्चों को पढ़ाई में सहयोग और करियर मार्गदर्शन मिल रहा है।

छात्रावास की बदहाली उजागर: जिम्मेदारों की लापरवाही से बच्चों पर मंडरा रहा हादसे का खतरा

बलरामपुर रामानुजगंज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत जोका पाठ छात्रावास की हालत किसी खंडहर से कम नहीं है। यहां पढ़ने और रहने वाले 50 से अधिक आदिवासी बच्चे अपनी जान दांव पर लगाकर जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि पूरे छात्रावास को बारिश से बचाने के लिए प्लास्टिक की चादर से ढककर रखा गया है। छात्रावास अधीक्षक का कहना है कि बरसात के दिनों में भवन की छत से लगातार पानी टपकता है, जिसके कारण बच्चों का रहना और पढ़ाई करना बेहद कठिन हो जाता है। अधीक्षक ने बताया कि इस समस्या की जानकारी कई बार उच्च अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पिछले वर्ष भी यही समस्या थी और इस साल भी वही स्थिति दोहराई जा रही है। दीवारें पूरी तरह सीलन और नमी से भर चुकी हैं। जगह-जगह दरारें और गड्ढे हो गए हैं। किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है। 30 बिस्तरों पर 50 बच्चों का ठिकाना छात्रावास में वर्तमान समय में 50 बच्चे रह रहे हैं। लेकिन यहां बिस्तर सिर्फ 30 ही उपलब्ध हैं। मजबूरीवश दो-दो बच्चे एक ही बिस्तर पर सोने को विवश हैं। बच्चों को न तो उचित सोने की व्यवस्था मिल रही है और न ही रहने के लिए सुरक्षित भवन। उल्लेखनीय है कि यह छात्रावास विशेष रूप से सुदूर अंचल के आदिवासी बच्चों के लिए बनाया गया था, ताकि वे यहां रहकर पढ़ाई कर सकें और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकें। लेकिन जिस स्थिति में यह भवन आज खड़ा है, उसे देखकर कहना मुश्किल है कि यहां कोई सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो रहा है। प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आज तक यहां किसी भी जिला अधिकारी ने दौरा तक नहीं किया। अधीक्षक से जब पूछा गया कि आपके जिला अधिकारी का क्या नाम है, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें याद नहीं। इसका सीधा मतलब यह है कि आज तक इस छात्रावास की स्थिति जानने कोई जिम्मेदार अधिकारी यहां पहुंचे ही नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासी आयुक्त अधिकारी की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। वर्षों से यहां के बच्चे प्लास्टिक से ढंके भवन में रह रहे हैं और प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है। बच्चों की जिंदगी से बड़ा कोई विषय नहीं, लेकिन अफसरों की उदासीनता ने यह स्थिति बना दी है। बच्चों के भविष्य पर संकट आदिवासी विभाग के प्रयासों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि आदिवासी अंचलों में शिक्षा की मूलभूत सुविधाएं बेहद खराब हैं। जोका पाठ छात्रावास इसका जीता-जागता उदाहरण है। जहां मासूम बच्चे तंग हालात में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। न समय पर बिस्तर, न सुरक्षित भवन और न ही स्वच्छ वातावरण। बारिश के दिनों में प्लास्टिक की छत के नीचे बच्चों का सोना और पढ़ाई करना यह दर्शाता है कि शिक्षा के अधिकार का सपना यहां कितना अधूरा है। तुरंत कार्रवाई की मांग स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत इस भवन की मरम्मत या नए भवन के निर्माण की दिशा में कदम उठाए। क्योंकि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बच्चों के भविष्य और जीवन की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द उच्च अधिकारियों की टीम मौके पर भेजी जाए और उचित कदम उठाए जाएं।  

बच्चों को रोचक तरीके से मिलेगी विज्ञान की शिक्षा

–    तारामंडल में बन रहा एस्ट्रो पार्क –    मनोरंजन और विज्ञान का होगा संगम पटना, बिहार की राजधानी पटना में एक अनोखा विज्ञान का पार्क तैयार किया जा रहा है। तारामंडल परिसर में एस्ट्रो पार्क का निर्माण किया जा रहा है। पार्क की खास बात यह है कि इसमें साइंस को सरल और इंटरेक्टिव तरीके से समझने के लिए कई  साइंटिफिक मॉडल और प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और मॉडल के माध्यम से जानकारी प्रदान करना है। इसमें बच्चे विज्ञान की बारीकियों को आसानी से समझेंगे।   पार्क का सिविल कार्य पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।   यह एस्ट्रो पार्क बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ विज्ञान को सरल तरीके से समझने में मदद करेगा। पार्क में ब्रह्मांड से जुड़ी गतिविधियों को रोचक तरीके से दर्शाया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार एस्ट्रो पार्क को विकसित करने और आकर्षक बनाने के लिए कोलकाता से आधुनिक उपकरण मंगाए जा रहे हैं। यहां पर10- 11 प्रकार के इंटरेटेक्टिव साइंस माडल को प्रदर्शित किया जाएगा। इन मॉडलों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि बच्चे खेल खेल में विज्ञान को सीख सकें। उदाहरण के लिए, पार्क में एक मॉडल यह दिखाएगा कि पुराने समय में लोग सूर्य की छाया देखकर समय का पता लगाते थे। ऐसे कई और प्रयोग यहां प्रदर्शित होंगे, जिसका अनुभव बच्चे प्रत्यक्ष रूप से कर पाएंगे। यह पार्क विज्ञान की शिक्षा को बढ़ावा देगा ।

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अगस्त माह के अपने पशुपालक कैलेंडर में दी जरूरी सलाह

अगस्त माह में पशुओं को खुरहा-मुंहपका रोग का रहता है खतरा पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अगस्त माह के अपने पशुपालक कैलेंडर में दी जरूरी सलाह इन उपायों से पशुओं को खुरहा-मुंहपका और गलाघोंटू रोग से बचा सकते हैं इस महीने पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए खनिज मिश्रण 30-50 ग्राम प्रतिदिन दें पशुओं में रोगों के लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करें पशुपालक पटना, बिहार सरकार का पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग पशुओं के स्वास्थ्य का खास ध्यान रख रहा है। इन दिनों यानी अगस्त माह में पशुओं का ध्यान कैसे रखा जाए इसके लिए विभाग ने पशुपालक कैलेंडर जारी किया है, जिसमें एफएमडी रोग अर्थात खुरहा-मुंहपका रोग से बचाव के उपायों पर जोर दिया गया है। कैलेंडर में विभाग ने कहा है कि पशुओं के खुरहा-मुंहपका रोग से ग्रसित होने पर रोगग्रस्त पशुओं को अलग रखें एवं ग्रसित पशुओं की खान-पान की व्यवस्था भी अलग से करें। साथ ही, खुरहा-मुंहपका रोग से ग्रसित पशुओं के दूध को उसके बछड़ों को न पीने दें। ऐसा करने से बछड़े संक्रमित होने से बचेंगे एवं स्वस्थ रहेंगे। आपके पशुओं में मुंहपका-खुरपका (Foot and Mouth Disease) रोग का प्रकोप है, तो इसे स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। यदि आस-पास के पशुओं से यह रोग फैल रहा है तो अपने पशुओं का सीधा संपर्क रोगी पशुओं से नहीं होने दें। वहीं गलाघोंटू (Haemorrhagic Septicaemia), जहरवात एवं अन्य रोग के लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सक से सम्पर्क करें। भेड़, बकरियों में पी.पी.आर., भेड़ चेचक रोग होने की संभावना रहती है। अतः बचाव के लिए टीके निश्चित रूप से लगवा लें। पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए खनिज मिश्रण 30-50 ग्राम प्रतिदिन दें, जिससे पशुओं में दूध उत्पादन के साथ ही शारीरिक तंदुरुस्ती बनी रहे। पशुओं को अत्यधिक तापमान एवं तेज धूप से बचाने के लिए उपाय करें। अत्यधिक संक्रामक रोग है एफएमडी फुट-एंड-माउथ डिजीज (एफएमडी), जिसे खुरपका-मुंहपका रोग भी कहा जाता है। यह पशुओं विशेषकर गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सुअर में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है। यह रोग पिकोर्नावायरस परिवार के एफ्थोवायरस के कारण होता है। इसके लक्षणों में बुखार, मुंह और पैरों में छाले, लार बहना और लंगड़ापन शामिल हैं। यह रोग पशुओं की उत्पादकता को प्रभावित करता है, जिससे दूध उत्पादन और वजन में कमी होती है। एफएमडी का प्रसार संक्रमित पशुओं, दूषित उपकरणों या हवा के माध्यम से होता है। रोकथाम के लिए टीकाकरण, स्वच्छता और जैव-सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। यह मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक नहीं है।

खनन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग: वर्ष 2024-25 में 15 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व

रायपुर राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल छत्तीसगढ़ की रजत महोत्सव के रूप में 25वी बैठक आज सिविल लाईन स्थित न्यू सर्किट हाऊस में श्री पी. दयानंद, सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, खनिज साधन विभाग एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में श्री रजत बंसल, संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म एवं केन्द्र सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागो, उपक्रमों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग, नए खनन परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करना और गत वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा करना रहा। बैठक में वर्ष 2024-25 के दौरान पूरे हुए खनन कार्यों और उनसे प्राप्त उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को खनिज राजस्व के रूप में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। यह उपलब्धि वर्ष 2023-24 की तुलना में लगभग 34 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि ने न केवल प्रदेश के आर्थिक ढांचे को मजबूती दी है, बल्कि खनन क्षेत्र में नए निवेश और अवसरों के द्वार खोले हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में खनिज अन्वेषण एवं खनिज दोहन के क्षेत्र में कार्यरत भारत सरकार एवं राज्य सरकार के विभागों एवं संस्थानों के द्वारा वर्ष 2024-25 में किये गये भू-वैज्ञानिक कार्यों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जहां वर्ष 2024-25 के सम्पादित कार्यों की उपलब्धियों पर चर्चा की गई वही प्रदेश में पाये जाने वाले खनिजों की खोज के लिए वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित भू-वैज्ञानिक कार्यों को अंतिम रूप दिया गया। मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद ने अपने उ‌द्बोधन में कहा कि खनिज किसी भी राज्य और देश के सर्वांगीण विकास की रीढ़ होती है। राज्य में स्ट्रेटजिक एवं क्रिटिकल मिनरल की खोज राज्य में विकास के एक नए युग की शुरूआत का संकेत देती है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज अधारित नये उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य में विद्यमान विभिन्न खनिजों का सतत् एवं व्यवस्थित तरीके से अन्वेषण किया जाना चाहिए। बैठक में उपस्थित अन्वेषण कार्यों से संबद्ध सभी विभागों एवं संस्थानों से यह आग्रह किया गया कि छत्तीसगढ़ के समग्र विकास हेतु वे अपनी कुशलता, संसाधन एवं उपलब्ध नवीनतम तकनीकियों का उपयोग कर प्रदेश में पाये जाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण करे। मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव श्री दयानंद ने छत्तीसगढ़ में खनिज के विकास के लिए कार्य करने वाली एजेंसियों के मध्य उत्पादित आंकड़ों के साझा किये जाने एवं समन्वय स्थापित किये जाने की सलाह दी। बैठक में संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म छत्तीसगढ़ श्री रजत बंसल के द्वारा क्षेत्रीय सत्र 2024-25 में सम्पन्न कार्यों की जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में लगभग 2500 मिलियन टन चूनापत्थर एवं लौह अयस्क के लगभग 93 मिलियन टन भण्डार आंकलित किये गये। आगामी क्षेत्रीय सत्र 2025-26 के अन्वेषण परियोजनाओं में विभाग द्वारा महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को शामिल किया गया है। यह परियोजना देश के लिए आवश्यक खनिज संसाधनों की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा। यह आत्मनिर्भर भारत मिशन को सशक्त करेगी और रणनीतिक क्षेत्रों में सतत् एवं आत्मनिर्भर विकास को प्रोत्साहित करेगी। उन्होने कहा कि "छत्तीसगढ़ शासन वैज्ञानिक एवं विस्तृत खनिज अन्वेषण तथा विकास को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।" खान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में एनएमइटी के तहत वर्ष 2024-25 में चूनापत्थर हेतु 01 एवं बाक्साइट हेतु 01 अन्वेषण परियोजना की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अधिसूचित निजी अन्वेषण संस्थान को एनएमइटी के तहत् राज्य के अन्वेषण कार्य हेतु दो प्रस्ताव स्वीकृत किये गये थे। जिसमें एक लिथियम, नियोबियम, टेण्टेलम, टाईटेनियम दुर्लभ मृदा धातुएँ एवं एक लौहअयस्क के प्रस्ताव सम्मिलित है। विभाग द्वारा निजी संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा देकर अन्वेषण एवं खनिज संसाधनों के परिशोधन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। केन्द्र सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागों, उपक्रमों के प्रतिनिधियों द्वारा भी छत्तीसगढ़ राज्य में किये गये खनिज अन्वेषण कार्यों की जानकारियों प्रस्तुत की गई। सर्व प्रथम भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के उप महानिदेशक डॉ. अमित धारवारकर द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बाक्साइट, गोल्ड, ग्लूकोनाईट, लिथियम, टाईटेनियम दुर्लभ मृदा धातुएँ, फास्फोराइट, फ्लोराईट, लेड एवं जिंक खनिज हेतु सर्वेक्षण कार्य किया गया है। वर्ष 2025-26 में विभिन्न खनिजों के कुल 29 परियोजनाओं पर कार्य लिया जा रहा है। संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2025-26 में कुल 11 अन्वेषण परियोजना को सर्वेक्षण / पूर्वेक्षण कार्य हेतु अनुमोदित किया गया। जिसमें स्ट्रेटजिक एवं किटिकल मिनरल पर 02, ग्लूकोनाईट पर 02, लेपिडोलाईट पर 01, चूनापत्थर पर 02, लौह अयस्क पर 02 एवं बॉक्साइट पर 02 परियोजना सम्मिलित है। इस अवसर पर आईबीएम रायपुर के रीजनल कंट्रोलर श्री प्रेम प्रकाश, रीजनल माइनिंग जियोलॉजिस्ट श्री डी. दास, जीएसआई रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल श्री अमित ए धारवाड़कर, एएमडी के सेंट्रल रीजन के क्षेत्रीय निदेशक श्री एस.आर. मंथनवार सहित एन.एम.डी. सी., सीआईएल, वेदांता, अल्ट्राटेक, डेक्कन गोल्ड के अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

गयाजी में बिहार को 12,992 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे प्रधानमंत्री मोदी : सम्राट चौधरी

* गयाजी में प्रधानमंत्री मोदी छह परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन और आठ परियोजनाओं का शिलान्यास * अमृत भारत एक्सप्रेस और बुद्ध सर्किट ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे पीएम। * करीब 13 हजार की परियोजनाओं से विकास के पथ पर तेजी से बढ़ेगा बिहार पटना, बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने बताया कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी 22 अगस्त को गयाजी से बिहार की जनता को 12,992 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इन परियोजनाओं के माध्यम से बिहार के बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शहरी एवं ग्रामीण विकास और पर्यटन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। श्री चौधरी ने कहा कि इस अवसर पर 11,735 करोड़ रुपये की लागत वाली छह परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। इसमें-बक्सर में 660 मेगावाट क्षमता वाला थर्मल पावर प्लांट है, जिसकी लागत 6,878 करोड़ रुपये, मुंगेर में सीवरेज नेटवर्क और एसटीपी परियोजना 523 करोड़, मुजफ्फरपुर के होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र का 385 करोड़ की लागत से निर्माण, 1,871 करोड़ रुपये से मोखामा-सिमरिया के बीच एनएच-31 पर 4/6 लेन और गंगा ब्रिज का निर्माण, बख्तियारपुर से मोखामा एनएच-31 सड़क का सुधार 1,899 करोड़ रुपये से और 179 करोड़ रुपये से बिक्रमगंज-दवथ-नवांगर-दुमरांव सड़क का 2 लेन में उन्नयन शामिल है। उपमुख्यमंत्री ने कहा- प्रधानमंत्री जी 1,257 करोड़ रुपये की आठ परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं में दाउदनगर और औरंगाबाद में एसटीपी और सीवरेज नेटवर्क, बरहिया (लखीसराय) और जमुई में एसटीपी और आईएंडडी, वहीं अमृत 2.0 के तहत औरंगाबाद, बोधगया और जहानाबाद में जल आपूर्ति एवं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की परियोजनाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में 4,260 और ग्रामीण क्षेत्रों में 12,000 लाभार्थियों को गृह प्रवेश कराएंगे। इस अवसर पर पांच प्रमुख लाभार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से अपने घरों की चाबी भी वो सौपेंगे। इनमें तीन ग्रामीण और दो शहरी परिवार शामिल हैं। इसके साथ ही मोदीजी गयाजी और दिल्ली के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन और बुद्ध सर्किट की वैशाली से कोडरमा ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इन रेलों के परिचालन से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उपमुख्यमंत्री श्री चौधरी ने कहा- गयाजी में माननीय प्रधानमंत्री के कर कमलों से बिहार को मिल रही 13 हजार की परियोजनाओं से रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ जल, बेहतर सड़क और परिवहन की सुविधा तथा आवास जैसी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी होने से बिहार विकास के पथ पर और तेजी से बढ़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से गतिशील बनाकर एक विकसित प्रदेश के रूप में स्थापित किया जा रहा है

करोड़ों की जमीन हड़पने की अजीब टेक्निक, एक नहीं बल्कि 10 नकली मदनमोहन बनाए गए

सोनीपत  सोनीपत में हैरान और परेशान करने वाला मामला सामने आया है । करोड़ों की जमीन हड़पने के लिए एक दो नहीं बल्कि 10 नकली मदन मोहन बने। सोनीपत के दिल्ली रोड पर गांव सुल्तानपुर के रकबे में स्थित 12 एकड़ जमीन को बेचने के मामले में सोनीपत एंटी करप्शन ब्यूरोक टीम ने 10 वे नकली मदनमोहन और उसके साथी को गिरफ्तार किया है । आरोपी राजेश जैन दिल्ली और राजेश कुमार गोहाना का रहने वाला हैं। यह जमीन पंजाब के  अमृतसर के रहने वाले मदनमोहन की थी,जिसकी मृत्यु हो चुकी है। इस जमीन को हड़पने व आगे बेचने के लिए 10 नकली मदनमोहन सामने आ चुके हैं। इस मामले में नौ फर्जी मदनमोहन एसीबी पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब इस 10वें नकली मदनमोहन को पकड़ा गया है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया गया है। एसीबी की टीम एक अन्य आरोपित की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।  बता दे कि सोनीपत के सुल्तानपुर गांव की 12 एकड़ जमीन अमृतसर के रहने वाले मदनमोहन के नाम थी। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे नरेंद्र अग्रवाल को भी नहीं पता था उनकी जमीन सोनीपत मेंं है। इस कारण इस जमीन को हड़पने के लिए नकली मदनमोहन बनकर लोग सामने आने लगे और कइयों ने तो जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज भी पेशकरते हुए इसे अन्य लोगों को बेच दिया। एसीबी ने जनवरी, 2021 में इस मामले में कई आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया था। तब से एसीबी मदनमोहन बने नौ फर्जी आरोपित को गिरफ्तार कर चुकी थी, ये सभी जेल में है। अब एसीबी ने दिल्ली के चांदनी चौक के राजेश जैन पुत्र ताराचंद जैन और राजेश कुमार  को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दो दिन के डिमांड पर लिया गया है। एसीबी की टीम मामले को लेकर जांच कर रही है।  बहालगढ़ रोड पर स्थित सुल्तानपुर गांव के रकबे की 12 एकड़ जमीन पर अब खेती हो रही है। अमृतसर के रहने वाले भूस्वामी मदनमोहन की मृत्यु के बाद जमीन की देखरेख अब उनका बेटा नरेंद्र अग्रवाल कर रहा है। उन्होंने इस जमीन को खेती करने के लिए गांव चौहान जोशी के दीपक को पट्टे दे रखी है। दीपक इस पर खेती कर रहे हैं।  एसीबी के अधिकारी ने बताया कि राजेश जैन ने मदनमोहन के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज फर्जी बनवा लिए और फर्जी तरीके से ही खुद को मदनमोहन दिखाया था। उसने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर यह जमीन अपने नाम करवा ली थी थी और इसे नकली मदन मोहन बनकर कई अन्य लोगों को बेच दिया था। आरोपी राजेश जैन और राजेश कुमार को सोनीपत के कोर्ट परिसर रोड पर घूम रहा था तो इस दौरान ने एसीबी की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।  

बिहार में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाली प्रधानमंत्री की परियोजनाएं, रोजगार और आर्थिक विकास के अवसर सृजित होंगे: सम्राट चौधरी

* बुद्ध सर्किट को जोड़ने के लिए वैशाली से कोडरमा तक ट्रेन का परिचालन * सिमरिया धाम तक बेहतर संपर्क सुविधा के लिए 1.86 किमी लंबा 6 लेन पुल * मां जानकी मंदिर और बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय जैसे प्रोजेक्ट से पर्यटन को मिल रहा है बढ़ावा * धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, रोजगार और आर्थिक मजबूती की दिशा में सरकार का बड़ा कदमबुद्ध सर्किट को जोड़ने के लिए वैशाली से कोडरमा तक ट्रेन का परिचालन * सिमरिया धाम तक बेहतर संपर्क सुविधा के लिए 1.86 किमी लंबा 6 लेन पुल * मां जानकी मंदिर और बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय जैसे प्रोजेक्ट से पर्यटन को मिल रहा है बढ़ावा * धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, रोजगार और आर्थिक मजबूती की दिशा में सरकार का बड़ा कदम पटना, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया है कि बिहार में पर्यटन, खासकर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन और आर्थिक मजबूती की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 22 अगस्त को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी गयाजी में बिहारवासियों को 12,992 करोड़ रुपए की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इन परियोजनाओं में धार्मिक पर्यटन को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे राज्य की संस्कृति, विरासत और पर्यटन क्षमता को नई पहचान मिलेगी। रेल कनेक्टिविटी में सुधार के तहत वैशाली से कोडरमा तक ‘बुद्ध सर्किट’ की ट्रेन सेवा शुरू होगी, जो वैशाली, हाजीपुर, सोनपुर, पटना, फतुहा, राजगीर, नटेश्वर, गया होते हुए कोडरमा तक चलेगी। इससे बौद्ध धर्म से जुड़ी कई महत्वपूर्ण धरोहरों को जोड़ने में मदद मिलेगी और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। इसके साथ ही, सिमरिया धाम तक बेहतर संपर्क के लिए 1.86 किलोमीटर लंबा 6 लेन पुल राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर 1,870 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है, जिसका उद्घाटन भी प्रधानमंत्री करेंगे। यह पुल देश के प्रमुख तीर्थस्थल सिमरिया धाम और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेगा। धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में मां जानकी मंदिर का पुनौराधाम (सीतामढ़ी) में निर्माण भी महत्वपूर्ण पहल है, जिसका भूमिपूजन 67 एकड़ भूमि पर हुआ है, और इसकी लागत लगभग 882 करोड़ रुपए है। इसके अलावा, वैशाली में स्थित ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप’ का लोकार्पण हो चुका है, जो पर्यटन को और बढ़ावा देगा। रेल सेवाओं में सुलतानगंज-देवघर रेलमार्ग की भी घोषणा होने वाली है, जिससे श्रावणी मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा मिलेगी। इस मार्ग पर अब तक ट्रेन सेवा नहीं थी। इन पहलों से राज्य में पर्यटन की संख्या बढ़ेगी और इससे स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, गाइड व सहायक सेवाओं समेत रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने से बिहार की नई पहचान बनेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार पर्यटन क्षेत्र में देखी जा रही तेजी आम जनता के लिए खुशहाली के नए द्वार खोल रही है। ये परियोजनाएं बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त प्रदेश बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी और रोजगार के अवसरों को व्यापक बनाएंगी। * राजगीर एवं वैशाली में तीन पाँच सितारा होटलो निर्माण को मंजूरी दी गई * पटना साहिब सहित सिख धर्म के प्रमुख स्थलों का पुनरुत्थान व सौंदर्यीकरण। * पर्यटन नीति 2024 के तहत निवेश, रोजगार और अधोसंरचना को बढ़ावा। * मुख्यमंत्री होमस्टे/बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा। * चौसा के ऐतिहासिक मैदान का सौंदर्यीकरण * 20 वर्षों में बिहार का पर्यटन बजट 7.43 करोड़ से बढ़कर 914.44 करोड़। * रामायण सर्किट के स्थलों का कायाकल्प, वैश्विक स्तर पर मिल रही पहचान