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दिव्यांग सहायता योजना से संकट की घड़ी में मिला संबल, बच्चों का भविष्य संवारने में जुटीं रोशनी

रायपुर जीवन में अचानक आई कठिन परिस्थितियों के बीच शासन से मिली आर्थिक सहायता ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के नगर पालिका परिषद गौरेला निवासी मती रोशनी रोहनी को अपने बच्चों के भविष्य को संवारने का संबल दिया है। पति के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। ऐसे मुश्किल समय में श्रम विभाग की दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत मिली एक लाख रुपए की सहायता राशि ने परिवार को आर्थिक सहारा प्रदान किया। मती रोशनी रोहनी के पति श्रम विभाग में निर्माण श्रमिक के रूप में पंजीकृत थे। उनके आकस्मिक निधन के बाद परिवार के सामने आजीविका के साथ बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की चिंता भी खड़ी हो गई। इस कठिन परिस्थिति में योजना के तहत एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें परिवार को तत्काल जरूरतों को पूरा करने और आगे की व्यवस्था बनाने में मदद मिली। मती रोशनी के लिए यह सहायता बच्चों की शिक्षा को निरंतर जारी रखने का माध्यम भी बनी है। वे प्राप्त राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनके बेहतर भविष्य के लिए कर रही हैं। परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद उनका प्रयास है कि आर्थिक परेशानी बच्चों की शिक्षा और उनके सपनों की राह में बाधा न बने। मती रोशनी का कहना है कि पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गई थीं। ऐसे समय में मिली आर्थिक सहायता से उन्हें बच्चों की शिक्षा की चिंता कुछ कम करने में मदद मिली। अब वे बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही हैं। योजना का लाभ मिलने पर मती रोशनी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय मिली यह सहायता उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण संबल बनी है। इससे उन्हें बच्चों की पढ़ाई जारी रखने और भविष्य की ओर आगे बढ़ने का हौसला मिला है। श्रमिक परिवारों के जीवन में आकस्मिक परिस्थितियां कई बार गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर देती हैं। ऐसे समय में मिलने वाली आर्थिक सहायता परिवार की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को जारी रखने में भी सहायक होती है। मती रोशनी की कहानी इसी सहायता से कठिन परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ने के प्रयास को दर्शाती है।

फूलगोभी की उन्नत खेती से प्रमोद सिंह को मिला 1.50 लाख रुपए का लाभ

रायपुर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के किसान परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ग्राम पंचायत देवरगांव, विकासखंड गौरेला के कृषक श्री प्रमोद सिंह ने भी आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाते हुए फूलगोभी की व्यावसायिक खेती कर अपनी मेहनत को बेहतर आमदनी में बदला है। उन्होंने लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में फूलगोभी की खेती से अब तक करीब 1.50 लाख रुपए का लाभ अर्जित किया है। श्री प्रमोद सिंह पहले भी उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। विभाग द्वारा उन्हें समय-समय पर उन्नत कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन, नवीन उद्यानिकी गतिविधियों एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाता रहा है। इसी मार्गदर्शन और अपने अनुभव का उपयोग करते हुए उन्होंने फूलगोभी की व्यावसायिक खेती शुरू की। फसल की बेहतर देखभाल, समय पर आवश्यक कृषि कार्य और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से उन्हें अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में उपज की बिक्री से अब तक लगभग 1.50 लाख रुपए का लाभ मिलने से श्री प्रमोद सिंह उत्साहित हैं। इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है और अब वे उद्यानिकी गतिविधियों को और विस्तार देने के लिए प्रेरित हुए हैं। श्री प्रमोद सिंह की सफलता बताती है कि खेती में आधुनिक तकनीक, सही फसल चयन और बेहतर प्रबंधन को अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उद्यानिकी विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन और कृषक की मेहनत का समन्वय खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी उद्यानिकी फसलों की व्यावसायिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

भोपाल दुग्ध संघ की 44वीं वार्षिक साधारण सभा संपन्न

भोपाल  भोपाल सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित, भोपाल की वर्ष 2025-26 की 44वीं वार्षिक साधारण सभा की बैठक पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान, साइंस हिल्स, भोपाल के ऑडिटोरियम में 30 सितंबर को हुई। वार्षिक साधारण सभा की अध्यक्षता संभागायुक्त भोपाल संभाग, भोपाल एवं प्रशासक, भोपाल सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित, भोपाल के प्रतिनिधि श्री पी.सी. शाक्य, अपर कलेक्टर द्वारा की गई। संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, श्री प्रीतेश जोशी द्वारा वार्षिक साधारण सभा में रखे गए प्रस्तावों का अनुमोदन प्राप्त किया गया। दुग्ध संकलन और दूध उत्पादकों को रिकॉर्ड भुगतान वर्ष 2025-26 के दौरान भोपाल दुग्ध संघ से जुड़ी 2,646 सहकारी दुग्ध समितियों के माध्यम से औसतन 3.77 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दूध का संकलन किया गया, जो विगत वर्ष (2024-25) की 2,110 समितियों से प्राप्त 3.15 लाख किलोग्राम प्रतिदिन की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। दुग्ध संघ ने वर्ष 2025-26 में दुग्ध उत्पादकों को समितियों के माध्यम से ₹674.44 करोड़ का भुगतान किया, जो पिछले वर्ष के ₹485.39 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है। इसके साथ ही दुग्ध संघ ने पशुपालकों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए 1 अक्टूबर 2026 से अब तक की सर्वोच्च क्रय दर ₹890/- प्रति किलोग्राम फैट लागू कर दी है। दुग्ध समितियों के लाभ और पशुपालन सेवाओं में बढ़ोतरी वर्ष 2025-26 में दुग्ध समितियों ने ₹1,100.49 लाख का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो विगत वर्ष के ₹864.15 लाख से अधिक है। पशुपालकों के लिए संघ द्वारा 29,052 मीट्रिक टन पशु आहार ‘सुदाना' और 64 मीट्रिक टन मिनरल मिक्चर ‘सुदाना' का विक्रय किया गया। इसके अलावा, 324 कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों के माध्यम से 1.21 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए। संघ के प्रशिक्षण केंद्र में पशुपालन, डेयरी संचालन और कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित प्रशिक्षण व अभिप्रेरण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सांची उत्पादों की बिक्री में उछाल और खाद्य सुरक्षा में A+ ग्रेड उपभोक्ता सेवाओं के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में औसतन 3.05 लाख लीटर पैकेट दूध प्रतिदिन बेचा गया (जो पिछले वर्ष 3.02 लाख लीटर था)। सांची घी की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखा गया और यह पिछले वर्ष के 860 मीट्रिक टन से बढ़कर 1,362 मीट्रिक टन पर पहुंच गई। गुणवत्ता के मामले में भोपाल दुग्ध संघ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) से 'A+' श्रेणी हासिल की। संघ ने निर्धारित 108 अंकों में से 106 अंक प्राप्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन निधि सिंह द्वारा किया गया। संघ के प्रभारी क्षेत्र संचालन श्री राजेश विजयवर्गीय ने सभी अतिथियों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया।  

मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना बनी श्रमिक परिवार का सहारा, बच्चों की पढ़ाई की राह हुई आसान

रायपुर मेहनत-मजदूरी से परिवार चलाने वाले श्रमिकों के लिए बच्चों की अच्छी शिक्षा का खर्च कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे परिवारों के बच्चों की पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण प्रभावित न हो, इसके लिए श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना सहारा बन रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बचरवार निवासी निर्माण श्रमिक  राजेश कुमार पाण्डेय का परिवार भी इस योजना से लाभान्वित हो रहा है। उनके दो बच्चों को छात्रवृत्ति मिलने से पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में आर्थिक सहयोग मिला है।  राजेश कुमार पाण्डेय निर्माण श्रमिक के रूप में मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आमदनी में घर की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद उनकी इच्छा थी कि आर्थिक परिस्थितियां बच्चों की पढ़ाई में बाधा न बनें और उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें। ऐसे समय में मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना ने परिवार को आर्थिक संबल दिया। योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को कक्षा पहली से लेकर उच्च शिक्षा तक अध्ययन के लिए निर्धारित वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।  पाण्डेय के दो बच्चों को इसका लाभ मिलने से उनकी शिक्षा से संबंधित आवश्यक खर्चों को पूरा करने में परिवार को मदद मिली है।  पाण्डेय बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रही है। आमदनी सीमित होने के कारण शिक्षा से जुड़े खर्चों की चिंता बनी रहती थी, लेकिन छात्रवृत्ति मिलने से यह आर्थिक दबाव कुछ कम हुआ है। अब वे बच्चों की पढ़ाई को निरंतर जारी रखने और उन्हें बेहतर भविष्य देने के लिए अधिक विश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। योजना का लाभ मिलने पर  राजेश पाण्डेय ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवार अपनी मेहनत से परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं, लेकिन बच्चों की शिक्षा पर होने वाला खर्च कई बार उनके लिए कठिन हो जाता है। ऐसे में छात्रवृत्ति के रूप में मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके जैसे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहयोग है। मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा से जुड़े रहने और आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ग्राम बचरवार के  राजेश पाण्डेय के परिवार की कहानी बताती है कि ऐसी सहायता सीमित आय वाले श्रमिक परिवारों के लिए बच्चों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में उपयोगी साबित हो रही है।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में राज्य स्तरीय वन्य-जीव सप्ताह-2026 का आयोजन

भोपाल  वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में 'जुड़े आवास, वन्य-जीवन का विकास' थीम पर राज्य स्तरीय वन्य-जीव सप्ताह 2026 के प्रथम दिन का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ उपस्थित अधिकारियों द्वारा चित्रकारी कर सांकेतिक रूप से किया गया। वन्य-जीव सप्ताह के अवसर पर प्रथम दिन आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में लगभग 1200 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही 'एक फोटो, एक कहानी" प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों से वन्य-जीव एवं प्रकृति से संबंधित अपने 52 फोटो एवं उनसे सम्बंधित कहानियों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई। आगंतुकों द्वारा संकल्प लेने के लिये वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पांच स्थलों पर संरक्षण दीवार (Conservation Wall) लगाई गई है। उक्त संरक्षण दीवार (Conservation Wall) पर बच्चों एवं समस्त आयु वर्ग के आगंतुकों तथा अधिकारियों द्वारा संकल्प लिया जाकर हस्ताक्षर किये गये। वन्य-जीव सप्ताह 2026 के दौरान वन विहार ने शुरू की वन्य-जीव पासपोर्ट-मेरा 1% वन्यजीवों के लिए अभिनव पहल इस वर्ष वन्य-जीव सप्ताह 2026 के दौरान वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं प्राणी उद्यान, भोपाल द्वारा एक नई एवं अभिनव गतिविधि 'वन्य-जीव पासपोर्ट मेरा 1% वन्यजीवों के लिए प्रारंभ की गई है। इस पहल का उद्देश्य वन्य-जीव सप्ताह के आयोजनों को केवल पारंपरिक प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए लोगों और वन्य-जीव संरक्षण के बीच एक अधिक गहरा, सार्थक एवं दीर्घकालिक जुड़ाव स्थापित करना है। इस पहल का व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग केवल वन्य-जीव सप्ताह के दौरान किसी गतिविधि में भाग लेकर ही न रुकें, बल्कि 'वन्य-जीव संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता लें और पूरे वर्ष तथा संभव हो तो जीवनभर इसके लिए योगदान करते रहें। इस पहल की मूल अवधारणा यह है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने समय, प्रयास अथवा दैनिक कार्यों का कम से कम 1 प्रतिशत वन्य-जीव एवं प्रकृति संरक्षण के लिए समर्पित कर सकता है। इस प्रकार संरक्षण को वर्ष में केवल एक सप्ताह तक सीमित गतिविधि न बनाकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनावा जा सके। "वन्य-जीव पासपोर्ट" पहल के अंतर्गत वन विहार के दोनों प्रवेश द्वारों पर पंजीकरण कराने वाले आगंतुकों को 'डिजिटल वन्य-जीव पासपोर्ट प्रदान किया जा रहा है। इसके माध्यम से वे वन विहार के विभिन्न महत्वपूर्ण बाड़ों एवं स्थलों पर स्थापित 10 रोचक वन्य-जीव एवं संरक्षण आधारित चैलेंज स्टेशनों में भाग ले सकते हैं। प्रत्येक स्टेशन पर प्रतिभागियों को वन्य-जीवों से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देना होता है। प्रत्येक चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने पर उन्हें वन विहार के स्वयंसेवकों द्वारा एक 'स्टाम्प' प्रदान किया जाता है। इस गतिविधि को इस प्रकार तैयार किया गया है कि प्रतिभागी वन विहार के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने के साथ-साथ वन्य-जीवों, उनके आवास, जैव विविधता तथा संरक्षण के महत्व के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकें। इस पहल में 'मध्यप्रदेश के विभिन्न हिस्सों तथा राज्य के बाहर से आए 100 से अधिक उत्साही स्वयंसेवक भी वन विहार के साथ जुड़कर वन्य-जीव सप्ताह की गतिविधियों के आयोजन में सहयोग कर रहे हैं। ये स्वयंसेवक विभिन्न चैलेंज स्टेशनों पर प्रतिभागियों की सहायता करने, उनका मार्गदर्शन करने, वन्य-जीव पासपोर्ट गतिविधि के संचालन तथा विभिन्न गतिविधियों से जुड़े संरक्षण संदेशों को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन स्वयंसेवकों की स्वैच्छिक भागीदारी वन्य-जीव संरक्षण के प्रति नागरिकों में बढ़ती रुचि एवं सहभागिता को दर्शाती है और वन्य-जीव सप्ताह के आयोजनों को एक मजबूत 'सामुदायिक आयाम प्रदान करती है। 10 चैलेंज पूरे करने के बाद प्रतिभागियों को "मेरा 1% वन्य-जीवों के लिए संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस संकल्प के अंतर्गत वे वन्य-जीव एवं प्रकृति संरक्षण के लिए अपने स्तर पर कुछ सार्थक कार्य करने की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता लेते हैं। इस पहल के माध्यम से वन विहार का उद्देश्य संरक्षण को केवल एक सप्ताह के आयोजन के रूप में न रखते हुए इसे 'पूरे वर्ष की आदत और जीवनभर की जिम्मेदारी में परिवर्तित करना है। प्रतिभागियों को अपने संरक्षण संबंधी कार्यों को सोशल मीडिया पर साझा करने तथा वन विहार के सोशल मीडिया हँडल@वनविहारऑफिशल के साथ सहयोग एवं टैग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे वन्य-जीव संरक्षण के लिए निरंतर सक्रिय रहने वाले लोगों का एक व्यापक समुदाय तैयार करने में सहायता मिलेगी। वन्य-जीव पासपोर्ट के माध्यम से प्रतिभागियों को उनके प्रदर्शन एवं सहभागिता के आधार पर विभिन्न स्तरों पर पहचान भी प्रदान की जा रही है। जो प्रतिभागी सभी 10 चैलेंज के सही उत्तर देकर '10 स्टाम्प' प्राप्त करते हैं, उन्हें "वन्य-जीव संरक्षण राजदूत' का प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। 8-9 स्टाम्प प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को "वन्य-जीव चैंपियन, जबकि 5-7 स्टाम्प प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को "वन्य-जीव एक्सप्लोरर" के रूप में मान्यता दी जाएगी। इस प्रकार इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों को वन्य-जीव सप्ताह समाप्त होने के बाद भी वन्य-जीव संरक्षण से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करना है। वन्य-जीव सप्ताह-2026 के 'पहले ही दिन इस पहल को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली, जब कुल 118 आगंतुकों ने वन्य-जीव पासपोर्ट गतिविधि के लिए पंजीकरण कराया। इनमें से 'सु अनन्या बोरासी एवं  चिराग नागपाल प्रथम 'वन्य-जीव संरक्षण राजदूत' बने, जबकि ' हर्षित पटेल, सु खुशी अग्रवाल,  मोहित मेवाड़े एवं  हितेश प्रजापति' को 'वन्य-जीव चैंपियन के रूप में मान्यता दी गई। वन्य-जीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के लिए 'वन्य-जीव संरक्षण राजदूतों को एक वर्ष में वन विहार में 12 निःशुल्क प्रवेश, जबकि "वन्य-जीव चैंपियनों को 6 निःशुल्क प्रवेश प्रदान किए जाएंगे। ये वन्य-जीव संरक्षण राजदूत एवं चैंपियन वन विहार और व्यापक समाज के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेंगे तथा अपने 'परिवार, मित्रों एवं समाज के बीच वन्य-जीव संरक्षण का संदेश पहुंचाने और दूसरों को भी छोटे-छोटे लेकिन सार्थक संरक्षण कार्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। "वन्य-जीव पासपोर्ट मेरा 1% वन्यजीवों के लिए पहल वन विहार के उस प्रयास को दर्शाती है, जिसके माध्यम से वन्य-जीव सप्ताह को अधिक 'सहभागितापूर्ण, रोचक एवं क्रियाशील' बनाया जा रहा है। केवल व्याख्यानों, प्रतियोगिताओं अथवा समारोहों तक संरक्षण जागरूकता को सीमित रखने के बजाय इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक आगंतुक को एक प्रतिभागी, एक संकल्पकर्ता और अंततः संरक्षण के संदेशवाहक के रूप में विकसित करना है। राज्य के विभिन्न हिस्सों तथा राज्य के बाहर से स्वयंसेवकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस संदेश को और मजबूत करती है कि वन्य-जीव संरक्षण एक … Read more

ताला, मगधी और खितौली गेट खुले, पहले दिन बाघिन के दीदार से पर्यटकों में उत्साह

भोपाल  तीन माह के मानसून ब्रेक के बाद विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आज 1 अक्टूबर से नए पर्यटन सत्र की शुरुआत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। इसके साथ ही टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में जंगल सफारी पुनः प्रारंभ हो गई। पर्यटन सत्र के पहले दिन ताला, मगधी और खितौली गेट को आकर्षक ढंग से सजाया गया। पार्क प्रबंधन एवं वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने पर्यटकों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया। गेट खोलने से पहले विधिवत पूजा-अर्चना कर वन्यजीवों की सुरक्षा एवं पर्यटन सत्र के सफल संचालन की कामना की गई। ताला गेट से पार्क में प्रवेश करने वाले पर्यटकों के लिए पहला दिन ही यादगार बन गया। सिद्ध बाबा क्षेत्र के पास पर्यटकों को एक बाघिन के दीदार हुए। बाघिन को अपने प्राकृतिक परिवेश में विचरण करते देख पर्यटक रोमांचित हो उठे। सफारी वाहनों में सवार पर्यटकों ने बाघिन की गतिविधियों को काफी देर तक देखा और इस खास पल को कैमरों में कैद किया। नए पर्यटन सत्र के पहले ही दिन बाघिन के दीदार से पर्यटकों का उत्साह और बढ़ गया। कोर क्षेत्र में पर्यटन 1 अक्टूबर से 30 जून तक संचालित होगा, जबकि बफर क्षेत्र में पर्यटन वर्षभर जारी रहता है। पर्यटकों के स्वागत के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। निर्धारित समय पर तीनों प्रमुख गेटों से पर्यटकों के प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रवेश द्वारों को फूलों एवं अन्य सजावटी सामग्री से सजाया गया था। पर्यटकों को पार्क के नियमों का पालन करने तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की जानकारी भी दी गई। पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय ने बताया कि नए पर्यटन सत्र से पहले सफारी व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बार पर्यटकों को केवल बाघ दर्शन तक सीमित न रखते हुए जंगल, वन्यजीव, पक्षियों, वनस्पतियों, इतिहास, पर्यावरण एवं बांधवगढ़ के भौगोलिक महत्व की जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिए प्रसिद्ध होने के साथ अपनी प्राकृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय संस्कृति के लिए भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां प्राचीन गुफाएं, मंदिरों के अवशेष और शेषशय्या जैसे ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के अनुभव को और व्यापक बनाते हैं। जंगल सफारी के साथ बाघ, पक्षियों तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को देखने का अवसर बांधवगढ़ को विशिष्ट पर्यटन अनुभव प्रदान करता है। देशी पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों में बांधवगढ़ आने वाले देशी पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिली है। विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या से पर्यटन गतिविधियों के साथ क्षेत्र की आय में भी वृद्धि हो रही है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पांच पर्यटन सत्रों में कुल 9 लाख 50 हजार 177 पर्यटक बांधवगढ़ पहुंचे। इनमें 8 लाख 34 हजार 693 देशी तथा 1 लाख 15 हजार 484 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। इस अवधि में पर्यटन से कुल 76 करोड़ 1 लाख 32 हजार 188 रुपये की आय प्राप्त हुई। वर्ष 2021-22 में 1 लाख 76 हजार 51 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 1 लाख 70 हजार 106 देशी और 5 हजार 945 विदेशी पर्यटक शामिल थे। इस वर्ष पर्यटन से 12 करोड़ 6 लाख 60 हजार 748 रुपये की आय हुई। वर्ष 2022-23 में कुल 1 लाख 85 हजार 825 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 1 लाख 64 हजार 559 देशी और 21 हजार 266 विदेशी पर्यटक थे। इस वर्ष 13 करोड़ 89 लाख 74 हजार 913 रुपये की आय हुई। वर्ष 2023-24 में कुल 1 लाख 78 हजार 926 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 1 लाख 53 हजार 32 देशी और 25 हजार 894 विदेशी पर्यटक शामिल रहे तथा 14 करोड़ 15 लाख 70 हजार 318 रुपये की आय हुई। वर्ष 2024-25 में पर्यटकों की संख्या बढ़कर 1 लाख 96 हजार 889 हो गई, जिनमें 1 लाख 66 हजार 123 देशी और 30 हजार 766 विदेशी पर्यटक शामिल थे। इस वर्ष 16 करोड़ 38 लाख 78 हजार 420 रुपये की आय प्राप्त हुई। वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक 2 लाख 12 हजार 486 पर्यटक बांधवगढ़ पहुंचे, जिनमें 1 लाख 80 हजार 873 देशी और 31 हजार 613 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। इस वर्ष पर्यटन से 19 करोड़ 50 लाख 47 हजार 789 रुपये की आय हुई। लगभग एक माह की ऑनलाइन बुकिंग क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय ने बताया कि नए पर्यटन सत्र के प्रारंभ होने से पहले ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की लगभग एक माह की ऑनलाइन टिकट बुकिंग हो चुकी है। इससे पर्यटकों में बांधवगढ़ को लेकर उत्साह और रुचि का पता चलता है। सफारी वाहनों के निर्धारित मानकों के पालन पर विशेष सख्ती बरती जा रही है। सभी पर्यटक जिप्सियों की जांच एवं पंजीयन किया जा रहा है। वाहनों के दस्तावेज, तकनीकी स्थिति तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप पंजीयन सुनिश्चित किया जा रहा है। 195 गाइडों को प्रशिक्षण, 105 को अंग्रेजी एवं कम्युनिकेशन स्किल्स की ट्रेनिंग पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए लगभग 195 गाइडों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ‘जंगल की पाठशाला’ के तहत गाइडों को वन्यजीवों के पदचिह्न, उनकी गतिविधियों, पक्षियों की पहचान, जंगल की वनस्पतियों तथा बांधवगढ़ के इतिहास से संबंधित जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही 105 गाइडों को अंग्रेजी भाषा एवं बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी सरल, रोचक एवं प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जा सके। हाथियों की मौजूदगी के बावजूद जारी रहेगी सफारी क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय ने बताया कि सफारी के लिए सभी तैयारियां पूरी हैं। जंगली हाथियों की आवाजाही के बावजूद सफारी जारी रहेगी। पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाइड एवं वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया गया है। नए पर्यटन सत्र में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।  

आधुनिक तकनीक, संवेदनशीलता और प्रो-एक्टिव पुलिसिंग: मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचार एवं कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण के प्रयास

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस राज्य में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए "देश भक्ति – जन सेवा" के मूलमंत्र के साथ कार्य कर रही है। विगत समय में प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पन्न हुई अत्यधिक संवेदनशील और जटिल परिस्थितियों में मध्य प्रदेश पुलिस ने बिना किसी अनावश्यक बल प्रयोग या लाठीचार्ज के, केवल "पहले संवाद, फिर सुरक्षा" की सूझबूझ भरी रणनीति और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था के बल पर शांति स्थापित कर मिसाल कायम की है। ​जिलावार कानून-व्यवस्था के उत्कृष्ट उदाहरण ​1. धार: संवेदनशीलता, संवाद और त्रिस्तरीय सुरक्षा का प्रभावी मॉडल ​साम्प्रदायिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील धार जिले में पुलिस एवं प्रशासन ने कानूनी आदेशों के पालन और सौहार्द बनाए रखने में अभूतपूर्व तालमेल का प्रदर्शन किया। जिले मेंपूजन व नमाज शांतिपूर्वक संपन्न कराई गई। 23 जनवरी को  हजारों लोगों की वाग्देवी शोभायात्रा तथा दिनभर में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दर्शन-हवन के दौरान 6 सेक्टरों और 7 जोन में पुलिस बल तथा  आरएएफ (RAF) प्लाटून की तैनाती कर चाक-चौबंद सुरक्षा सुनिश्चित की गई। ​प्रतिबंधात्मक आदेश, सतत शांति समिति बैठकें, ड्रोन व सीसीटीवी निगरानी और आरएएफ/एसटीएफ/क्यूआरएफ के फ्लैग मार्च से माहौल पूरी तरह नियंत्रित रहा। ​कानून-व्यवस्था के दृष्टिगत अनुमति निरस्त होने के बावजूद रैली निकालने की जिद पर अड़े असामाजिक तत्वों के विरुद्ध पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। मजबूत बैरिकेडिंग और ड्रोन निगरानी के साथ उल्लंघन पर व्यक्तियों की वैधानिक गिरफ्तारी कर शहर में शांति बनाए रखी। ​​2. भोपाल पुलिस कमिश्नरेट: टकराव टालकर किसान आंदोलन में संवाद से समाधान ​मूंग खरीदी और खाद वितरण को लेकर नर्मदापुरम व आसपास के हजारों किसानों द्वारा बैरिकेड्स तोड़ने और राजमार्ग पर 6 घंटे तक चक्काजाम करने की गंभीर स्थिति में भोपाल पुलिस ने लाठीचार्ज या बल प्रयोग से परहेज किया। पुलिस कमिश्नर व प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को रोके रखा, जिससे आधी रात को मांगें पूरी होने के साथ चक्काजाम बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। गोविंदपुरा क्षेत्र में मारपीट की घटना के बाद शहर के कुछ संवेदनशील इलाकों में विरोध प्रदर्शन और तनाव फैल गया, जहां कुछ जगहों पर पथराव की घटनाएं भी हुईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस नेत्वरित कार्रवाई की, आरोपियों को गिरफ्तार कियाऔर संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस सुरक्षा बल तैनात कर शांति व्यवस्था बहाल की। 3. खंडवा एवं खरगोन जिले: अग्रिम समन्वय से रूट विवादों का खात्मा ​त्योहारों के दौरान जुलूसों के मार्गों और समय को लेकर उत्पन्न होने वाले तनाव को पुलिस ने त्‍योहारों के पूर्व "शांति समिति की बैठकें" आयोजित कर हल किया। दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं की आपसी सहमति से रूट व समय निर्धारण करवाकर संभावित झड़पों को शून्य किया गया। ​4. राजगढ़ जिला (ब्यावरा एवं बोड़ा): मध्यस्थता से लिखित समझौता ​ग्रामीण इलाकों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर और रात्रिकालीन आयोजनों को लेकर उभरे विवाद में पुलिस ने थाना परिसरों में आपातकालीन बैठकें आयोजित कीं। कानून और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए पुलिस की मध्यस्थता में दोनों पक्षों से समय-सीमा और ध्वनि नियंत्रण का लिखित समझौता कराया गया। इसी प्रकार मध्यप्रदेश पुलिस ने "देशभक्ति-जनसेवा" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, अपराध नियंत्रण और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर अब म.प्र. पुलिस स्मार्ट, तकनीकी रूप से सक्षम और जन-संवेदनशील पुलिसिंग को प्राथमिकता दे रही है।   1. डिजिटल नवाचार एवं पारदर्शी नागरिक सेवाएं नागरिकों को बिना किसी झंझट के पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल माध्यमों को सशक्त बनाया गया है: ई-जीरो एफआईआर (E-Zero FIR) के दायरे का विस्तार: नागरिकों की सुविधा के लिए चोरी या संपत्ति संबंधी नुकसान की ऑनलाइन रिपोर्टिंग सीमा, जो पहले ₹1,00,000 थी, उसे घटाकर अब ₹25,000 कर दिया गया है। इससे छोटे अपराधों और संपत्ति चोरी की स्थिति में आम नागरिकों को त्वरित राहत और ऑनलाइन एफआईआर की सुविधा मिल रही है। ई-रक्षक ऐप (e-Rakshak Mobile App):राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB, भोपाल) द्वारा विकसित यह स्मार्ट-पुलिसिंग ऐप सुरक्षा व्यवस्था संभालने और नागरिकों तक आपातकालीन सेवाएं पहुँचाने में तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है। सिटीजन पोर्टल (Citizen Portal):चरित्र सत्यापन (Character Verification), किरायेदार/कर्मचारी सत्यापन और ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने जैसी बहुमूल्य सेवाएं घर बैठे उपलब्ध हो रही हैं। क्यूआर कोड आधारित शिकायत व्यवस्था: भीड़भाड़ वाले बाजारों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर क्यूआर कोड स्थापित किए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर नागरिक बिना थाने जाए गोपनीय व सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। डायल-112 व फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (FRV): किसी भी आपात स्थिति में सूचना मिलते ही न्यूनतम रिस्पांस टाइम में सहायता उपलब्ध कराने के लिए डायल-112 को आधुनिक जीपीएस व एफआरवी नेटवर्क से लैस किया गया है। अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड: एक क्लिक पर संदिग्धों का क्रिमिनल बैकग्राउंड, हिस्ट्री शीट और पूर्व रिकॉर्ड की जांच। ​फेशियल रिकग्निशन व वाहन ट्रैकिंग: चेहरे की पहचान कर संदिग्धों को चिह्नित करना तथा चोरी/लावारिस वाहनों और संपत्तियों को तुरंत ट्रैक करना। ​डिजिटल सम्मन/वारंट: समन व वारंट की तामीली को पारदर्शी और त्वरित बनाना। 2. महिला एवं बाल सुरक्षा: संवेदनशीलता और सख्त निगरानी महिला, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा मध्यप्रदेश पुलिस की सर्वोच्च ​“शी-शक्ति” (She-Shakti) अभियान: भोपाल पुलिस कमिश्नरेट द्वारा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत महिला पुलिसकर्मियों द्वारा शहर भर में वाहन रैलियां निकालकर जागरूकता फैलाई जा रही है। ​हॉटस्पॉट व संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग: प्रमुख बाजारों, पूजा स्थलों, मेलों, गरबा/डांडिया पंडालों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में प्रत्येक थाने से हॉटस्पॉट चिह्नित कर आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक की महिला पुलिस पेट्रोलिंग पार्टियां तैनात की गई हैं। ​त्वरित कार्रवाई व उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग: छेड़छाड़, फब्तियां कसने और पीछा करने जैसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिएअतिरिक्त/सहायक पुलिस आयुक्त (महिला सुरक्षा) स्तर के अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं। ​ऊर्जा डेस्क (Urja Desk):प्रदेश के सभी प्रमुख थानों में महिला केंद्रित शिकायतों की सुनवाई और त्वरित निस्तारण के लिए समर्पित महिला डेस्क सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। हेल्पलाइन नेटवर्क: महिला हेल्पलाइन (1090 / 181): संकटग्रस्त महिलाओं को विधिक, चिकित्सीय एवं पुलिस सहायता। चाईल्ड हेल्पलाइन (1098): बाल अपराधों की रोकथाम और गुमशुदा/मुसीबत में फंसे बच्चों के त्वरित रेस्क्यू के लिए 24×7 सक्रिय। आपातकालीन सेवा: डायल 112 (एकीकृत आपातकालीन पुलिस सेवा) ​वित्तीय साइबर … Read more

मरकाटोला घाट सड़क हादसे के घायलों और परिजनों से की मुलाकात, बेहतर उपचार के दिए निर्देश

रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने अस्पताल पहुंचकर जाना सड़क हादसे में घायलों का हाल नेशनल हाईवे-30 स्थित मरकाटोला घाट पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में घायल कवर्धा के लोगों से मिलने उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचे। उन्होंने घायलों का कुशलक्षेम जाना और उनके परिजनों से मुलाकात कर उपचार की स्थिति की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने घायल रोमन सोरा से मुलाकात कर उनसे स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने परिजनों से भी उपचार और अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं के बारे में चर्चा की। परिजनों ने उपचार व्यवस्था पर संतुष्टि व्यक्त की।  शर्मा ने विशेषज्ञ चिकित्सकों से घायल के स्वास्थ्य और आगे के उपचार की जानकारी ली। चिकित्सकों ने बताया कि घायल के पैरों का ऑपरेशन किया जाना है। शारीरिक स्थिति सामान्य होने के बाद आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस पर उप मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों एवं संबंधित अधिकारियों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर अस्पताल सुपरिटेंडेंट डॉ संतोष सोनकर, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ सुंदरानी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री  शर्मा हादसे के बाद से लगातार सभी घायलों के उपचार की जानकारी ले रहे हैं। एक घायल को उच्च स्तरीय उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से निःशुल्क उपचार सुनिश्चित कराया जा रहा है। घायलों के परिजनों के ठहरने के लिए सेवा सदन में निःशुल्क व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई थी।   उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों में भर्ती सभी घायलों को समुचित एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। इस बीच स्वास्थ्य में सुधार के बाद चार घायलों अरमान कोसले, गणेश पात्रे, प्रदीप साहू और दीप चन्द्र को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

सड़क दुर्घटनाओं में कमी और वाहन दुर्घटनाओं में मृत्युदर को कम करने कार्यशाला

भोपाल  विगत वर्ष प्रदेश में हुई सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को कम करने एवं सड़क दुर्घटनाओं में पीडितों को शासन द्वारा लागू की गई विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, केशलेस उपचार सहायता उपलब्ध कराने के उ‌द्देश्य से मध्यप्रदेश की विभिन्न जिला इकाईयों के पुलिस अधिकारियों/ कर्मचारियों को प्रशिक्षित किये जाने हेतु अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  मोहम्मद शाहिद अबसार के निर्देशानुसार पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) भोपाल में विषय "यातायात रिफ्रेशर कोर्स" पर 29 और 30 सितम्बर को दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में मध्यप्रदेश के सभी जिला इकाईयों से रक्षित निरीक्षक से लेकर आरक्षक स्तर तक के पुलिस अधिकारियों को 2 दिवसीय आफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई  टी. के. विद्यार्थी द्वारा किया गया।  टी.के. विद्यार्थी द्वारा विषय प्रदेश में होने वाली वाहन दुघटनाओं का विश्लेषण एवं उनकी रोकथाम करने के संबंध में कार्य योजना तैयार करना तथा शासन द्वारा प्रदेश में लागू की गयी विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं हिट एण्ड रन योजना, राहवीर योजना, पी. एम. राहत योजना आदि योजनाओं के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी जाकर योजनाओं के व्यापक रूप से प्रभावी प्रचार-प्रसार करने हेतु सभी पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में व्याख्याता  देवेन्द्र सिंह यादव, एसीपी यातायात, भोपाल द्वारा वाहन पार्किंग के प्रकार एवं उनकी व्यवस्था, सडक उपयोगकर्ताओं का व्यवहार विषय पर, व्याख्याता डॉ. आशीष शर्मा द्वारा सड़क दुर्घटना में पीडितों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने संबंधी विषय पर,  एस.एस.लल्ली से.नि. अति.पु.अधी. द्वारा मोटरयान अधिनियम एवं केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम एवं नियम संबंधी विषय पर, व्याख्याता  रविशंकर ब‌ट्टी, उपनिरीक्षक यातायात पुलिस भोपाल द्वारा यातायात प्रवर्तन की नवीन तकनीकों, आधुनिक यातायात उपकरणों, नवीन टेक्नोलॉजी की जानकारी जैसे-POS, ITMS, E-CHALLAN इन्टरसेप्टर व्हीकल, स्पीड रडार गन, ब्रीथ एनालाइजर आदि जैसे नव प्रयोगों के बारे में व्यापक रूप से प्रशिक्षण में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान उमनि  टी. के. वि‌द्यार्थी, समनि  अभिजीत रंजन, समनि  राजेश कुमार मिश्र, समनि  मनोज कुमार शर्मा, उप पुलिस अधीक्षक  हिमांशु कार्तिकेय एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। इस प्रशिक्षण सत्र के समापन के दौरान प्रशिक्षणार्थियों की पीटीआरआई द्वारा सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।  

1,520 किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा को अपर प्रबंध संचालक डॉ. बेडेकर ने दिखाई हरी झंडी

भोपाल  मध्यप्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10 दिवसीय विशेष मोटरसाइकिल एक्सपीडिशन का शुभारंभ हुआ। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर ने हरी झंडी दिखाकर 1,520 किलोमीटर लंबी इस यात्रा को भोपाल से रवाना किया। यह यात्रा पर्यटकों को प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों, ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध संस्कृति से सीधे जोड़ने का माध्यम बनेगी। देश के 9 राज्यों और फ्रांस से जुटे 22 साहसी राइडर्स इस अभियान में देश-विदेश के कुल 22 राइडर्स भाग ले रहे हैं। इनमें महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और केरल के प्रतिभागी शामिल हैं। यात्रा में फ्रांस के पेरिस से आईं 55 वर्षीय महिला राइडर फैबिएन क्रिस्टीन जैनिन ड्यूपुइस विशेष रूप से शामिल हुई हैं। वे प्रदेश के प्राकृतिक और वन्य जीव स्थलों को दोपहिया वाहन से करीब से देखने को लेकर बहुत उत्साहित थी। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और रॉयल एनफील्ड की 2 साल की साझेदारी यह फ्लैग-ऑफ मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और रॉयल एनफील्ड के बीच 2026 से 2028 तक चलने वाली दो वर्षीय रणनीतिक साझेदारी की औपचारिक शुरुआत है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में अनुभव-आधारित और जिम्मेदार पर्यटन (रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म) को बढ़ावा देना है। दोनों संस्थाएं मिलकर नए क्यूरेटेड रूट्स तैयार करेंगी, जिससे न केवल पर्यटन के नए आयाम स्थापित होंगे, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित किए जाएंगे। पचमढ़ी से पन्ना तक का मनोरम यात्रा मार्ग 1 से 10 अक्टूबर 2026 तक चलने वाली इस नौ दिवसीय यात्रा का मार्ग भोपाल से शुरू होकर पचमढ़ी, पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना होते हुए पुनः भोपाल पर समाप्त होगा। अभियान में शामिल राइडर्स हाल ही में लॉन्च हुई रॉयल एनफील्ड बुलेट 650 पर सवार होकर पहाड़ी, वनाच्छादित और दुर्गम रास्तों का अनुभव करेंगे। इस यात्रा का भव्य समापन भोपाल में आयोजित होने वाले 7वें मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम) 2026 के विशेष समारोह में किया जाएगा। वन्य जीव संरक्षण और समृद्ध जनजातीय विरासत का जीवंत अनुभव यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को पेंच, कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर-जोन में सुबह की विशेष जीप सफारी का अनुभव कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दल को स्थानीय समुदायों की जीवन शैली, पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने की कला, स्थानीय हस्तशिल्प और विश्व प्रसिद्ध बैगा जनजातीय कला से भी रूबरू कराया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के बीच आत्मीय संवाद स्थापित होगा। भविष्य में तैयार होंगे नए टूरिज्म कॉरिडोर और हेरिटेज ट्रेल्स आगामी दो वर्षों में इस साझेदारी के अंतर्गत राज्य में ऑफ-रोड ट्रेल, हेरिटेज राइड्स और सुंदर प्राकृतिक मार्गों पर आधारित नए मोटरसाइकिल रूट्स विकसित किए जाएंगे। इसका प्राथमिक ध्येय प्रमुख पर्यटन केन्द्रों को अनछुए और दूरस्थ दर्शनीय स्थलों से जोड़ना तथा पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के प्रति यात्रियों को जागरूक करना है। इस अवसर पर टूरिज्म बोर्ड के संयुक्त निदेशक डॉ. संतोष वास्तव और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (आईजीआरएमएस) के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे सहित पर्यटन बोर्ड एवं रॉयल एनफील्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।