samacharsecretary.com

खनन माफियाओं पर कसा शिकंजा, पूर्व सरपंच सहित आठ आरोपियों पर करोड़ों की पेनल्टी

पांढुर्ना  पांढर्णा में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए छह प्रकरणों में कुल 5 करोड़ 44 लाख 27 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। इस कार्रवाई में एक पूर्व सरपंच, तत्कालीन सचिव, ठेकेदार सहित आठ लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया है।  कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देश पर खनिज विभाग और राजस्व अधिकारियों द्वारा की गई जांच में अवैध रेत, मिट्टी और मुरम उत्खनन के मामलों का खुलासा हुआ, जिसके बाद मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का निवारण) नियम-2022 के तहत कार्रवाई की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में अवैध खनन से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति है। लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में अवैध उत्खनन की शिकायतें मिल रही थीं, जिनकी जांच के बाद संबंधित व्यक्तियों पर करोड़ों रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया है। रंगारी में सबसे बड़ा घोटाला, 5.26 करोड़ का अर्थदंड सबसे बड़ा मामला सौंसर तहसील के ग्राम रंगारी में सामने आया। जांच के दौरान पाया गया कि स्वीकृत खदान लीज क्षेत्र की सीमा से बाहर जाकर करीब 3510 घनमीटर रेत का अवैध उत्खनन किया गया था। यह उत्खनन नियमों और स्वीकृत शर्तों के विपरीत पाया गया। मामले में तत्कालीन सरपंच प्रतिभा आनंदराव ठाकरे, तत्कालीन ग्राम सचिव तथा संबंधित ठेकेदार की भूमिका सामने आने पर तीनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए 5 करोड़ 26 लाख 50 हजार रुपए का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। यह जिले में अवैध खनन से जुड़े मामलों में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई मानी जा रही है। जांच में सामने आई राजस्व हानि अधिकारियों के अनुसार लीज क्षेत्र से बाहर खनिज निकालने के कारण शासन को भारी राजस्व हानि हुई। साथ ही नदी और आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए थे, जिसके बाद अंतिम आदेश पारित किया गया। निजी भूमि पर भी नहीं मिली राहत प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध उत्खनन चाहे शासकीय भूमि पर हो या निजी भूमि पर, नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में जिले के विभिन्न गांवों में निजी भूमि से मिट्टी, मुरम और रेत निकासी के मामलों में भी दंडात्मक कार्रवाई की गई। घोतकी निवासी तीरथ पेमचंद काहार पर सावंगा स्थित भूमि में अवैध उत्खनन पाए जाने पर 2 लाख 73 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वहीं रामाकोना निवासी अशोक भाउराव उपासे पर सुरिया बुरिया क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में 4 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना किया गया। इसी प्रकार बोरगांव निवासी विजय देवीलाल प्रजाति पर खैरीतायगांव क्षेत्र में अवैध उत्खनन के लिए 2 लाख 73 हजार रुपये, जबकि काजलवानी में भूमि स्वामी असलमबी हबीबउल्ला और भट्टा संचालक नासिर हबीबउल्ला पर संयुक्त रूप से 4 लाख 35 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। काजलवानी क्षेत्र में ही भूमि स्वामी अजीजउल्ला हबीबउल्ला पर 2 लाख 73 हजार रुपये व रामाकोना निवासी विजय बलवंत वानखेड़े पर 4 लाख 35 हजार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया है। एक माह की मोहलत, फिर होगी राजस्व वसूली प्रशासन ने सभी आरोपितों को निर्धारित अर्थदंड की राशि जमा करने के लिए एक माह का समय दिया है। आदेश में कहा गया है कि तय अवधि में राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उसे भू-राजस्व बकाया मानकर वसूला जाएगा। इसके लिए राजस्व वसूली की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिलेभर में बढ़ेगी निगरानी सूत्रों के अनुसार, प्रशासन अब जिले के अन्य खनन क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों की भी समीक्षा कर रहा है। अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर नजर रखने के लिए राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग के संयुक्त दलों को सक्रिय किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि सख्त कार्रवाई से अवैध खनन पर अंकुश लगेगा और शासन को होने वाले राजस्व नुकसान को रोका जा सकेगा। जिले में हुई इस बड़ी कार्रवाई को प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा माना जा रहा है। करोड़ों रुपए के अर्थदंड ने साफ संकेत दे दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ अब कठोर कदम उठाए जाएंगे।   

खान सचिव का सख्त निर्देश—229 बालू घाटों की प्रक्रिया जल्द पूरी करें, अवैध खनन पर निगरानी तेज

रांची  राज्य में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद तीन दर्जन के करीब बालू घाटों का संचालन शुरू नहीं होने के पीछे के कारणों को दूर करने का निर्देश खान सचिव अरवा राजकमल ने दिया है। बालू घाटों का संचालन शुरू नहीं होने के पीछे मुख्य वजह लीज डीड की प्रक्रिया लंबित होना है। राज्य के 16 जिलों के 229 बालू घाट केवल लीज डीड नहीं होने के कारण अटके हुए हैं। लीज डीड की जिम्मेदारी संबंधित जिलों के डीसी पर है। इनमें से 35 लीज डीड महज उपायुक्त के स्तर से हस्ताक्षर नहीं होने के कारण अटके हुए हैं। 10 जून से पहले लीज डीड की प्रक्रिया पूरी करें सोमवार को बालू घाटों के संचालन और अवैध खनन की समीक्षा को लेकर आयोजित टास्क फोर्स की ऑनलाइन बैठक में खान सचिव अरवा राजकमल ने सभी डीसी को निर्देश दिया कि वे 10 जून से पहले हर हाल में लीज डीड की प्रक्रिया पूरी कर लें। बैठक में सभी जिलों के डीसी, डीएमओ तथा खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा भी जुड़े थे। खान सचिव ने कहा कि 10 जून से बालू घाटों से बालू निकासी पर एनजीटी की रोक प्रभावी हो जाती है। ऐसे में उससे पहले लंबित सभी घाटों का लीज डीड पूरा कर संचालन शुरू करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि नया लीज डीड ड्राफ्ट भी जारी कर दिया गया है, जिससे प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। अवैध खनन पर सख्ती के निर्देश बैठक में सचिव ने अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और विभिन्न विभागों के समन्वय से काम किया जाये। उन्होंने बताया कि लघु खनिजों के अवैध खनन की निगरानी के लिए सभी खनन पट्टों की डिजिटल फाइल तैयार की जा रही है। इसके जरिए सैटेलाइट से खनन क्षेत्रों की निगरानी होगी। इसके साथ ही खान सचिव ने खनन प्रहरी मोबाइल ऐप पर मिलने वाली सूचनाओं की तत्काल जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। संवेदनशील मार्गों पर वाहन ट्रैकिंग सिस्टम, चेकपोस्ट निर्माण और रेलवे साइडिंग व प्रवेश-निकासी बिंदुओं पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी आदेश दिए गये। बैठक के दौरान खान निदेशक ने कागजी कार्रवाई पूर्ण कर चुके सभी 35 बालू घाटों को जल्द से जल्द शुरू करने का निर्देश दिया। इन 35 बालू घाटों की लीज प्रक्रिया अगले 10 दिनों के अंदर पूरा करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है। इन घाटों से संबंधित कागजी कार्रवाई हो चुकी है पूर्ण     बोकारो : पिछरी -2 बालू घाट, खेटको चलकारी घाट     दुमका : हरिपुर बालू घाट, छोटाकमती बालू घाट, कटनाई बालू घाट, सिमरा और हरिपुर बालू घाट।     खूंटी : पांडू बालू घाट, बुधिरोमा बालू घाट     जामताड़ा : बनखेत बालू घाट     हजारीबाग : कंदटारी, सांढ़ एम सोनपुरा, बैरिसाल, लंगातू सिकरी, गोसाईं बलिया, चोबदार बलिया     रांची : चोकसेरेंगे बालू घाट, श्यामनगर, सुंडिल बालू घाट     गोड्डा : जसमाता बालू घाट-2, राहा बालू घाट, घाट झिलुआ, सनातन बालू घाट     पूर्वी सिंहभूम : बनकाटा बालू घाट, कोरियामोहन पाल बालू घाट, कोरियामोहन घाट एवं सुवर्णरेखा घाट     रामगढ़ : सिरका, टोकीसूद-1 एवं पैंकी बालू घाट     लातेहार : मरमर बालू घाट, राजहर बालू घाट, बाजकुम घाट और तुबेद बालू घाट।  

पंजाब की 80 से ज्यादा माइनिंग साइट्स पर NGT ने लगाई रोक

लुधियाना/दीनानगर. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा पंजाब की 85 माइनिंग साइट्स पर रोक लगाने की खबर सामने आई है। दीनानगर  विधानसभा हलका दीनानगर के अंतर्गत आने वाले गांव गाहलड़ी की पंचायत द्वारा प्रदूषण और बाढ़ के खतरे को लेकर याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए National Green Tribunal (एनजीटी) ने बड़ा फैसला सुनाया है। NGT ने अगली सुनवाई तक पंजाब की 85 माइनिंग साइट्स पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। NGT ने कार्रवाई करते हुए अगली सुनवाई तक माइनिंग पर रोक लगा दी है क्योंकि जिस तरह से बाढ़ आई थी, उससे पंजाब के गुरदासपुर के रावी नदी इलाके में भी काफी नुकसान हुआ था। इसके बाद गांव गहलाड़ी की पंचायत ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि जिस जगह पर इस तरह से माइनिंग की जाती है, वहां पानी का बहाव बहुत तेज हो जाता है। अगर पानी नहीं रुका तो यह उनके खेतों और गांवों में घुस जाता है, जिससे खतरा की स्थिति बन जाती है। कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की। पंजाब सरकार के पॉल्यूशन बोर्ड के वकील ने सभी हालात पर बात की, लेकिन अभी के लिए कोर्ट ने कहा है कि अगली सुनवाई तक इन 85 माइनिंग साइट्स पर, जिन पर बैन लगाया गया है, वहां काम नहीं होगा। मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वकीलों ने अपना पक्ष रखा, लेकिन फिलहाल एनजीटी ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए सभी 85 माइनिंग साइट्स पर काम रोकने के आदेश जारी कर दिए हैं। अब अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि पंजाब सरकार और माइनिंग विभाग अपनी दलीलों में क्या तथ्य पेश करते हैं। NGT की प्रिंसिपल बेंच, जो नई दिल्ली में स्थित है, ने यह आदेश जारी किया है। फिलहाल इन साइट्स पर किसी भी प्रकार की माइनिंग गतिविधि नहीं होगी। 

खदानें बढ़ीं, समस्याएं नहीं घटीं: माइनिंग के विरोध में ग्रामीण एकजुट

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी  छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित मानपुर ब्लॉक के खड़गांव थाना क्षेत्र में स्थित भिलाई स्टील प्लांट (सेल) की दुलकी लौह अयस्क खदान को लेकर ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है. भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने लीज क्षेत्र में लौह अयस्क की उपलब्धता का आकलन करने के लिए एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग की अनुमति ग्राम सभा के माध्यम से मांगी है, लेकिन वन प्रबंधन समिति और स्थानीय ग्रामीण फिलहाल इस अनुमति के खिलाफ खड़े हो गए हैं. इसी सिलसिले में खड़गांव थाना क्षेत्र के ग्राम दौरबा में ग्रामीणों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें ड्रिलिंग कार्य के विरोध में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया. बैठक में वन प्रबंधन समिति बोदरा के सचिव रामकुमार सलामे, ग्रामीण महिला बिमला सलामे सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक ड्रिलिंग और खदान से जुड़ी सड़कों के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी. ग्रामीणों का आरोप है कि खनन कंपनियां केवल खनिज दोहन में रुचि दिखा रही हैं, जबकि नियमों के तहत क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ है. ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि ड्रिलिंग के दौरान होने वाले जमीनी कंपन से गांवों में मकानों को नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा खदानों से निकलने वाले लाल पानी से खेतों और फसलों पर भविष्य में खतरा मंडराने की बात भी कही गई. ग्रामीणों के अनुसार इन्हीं कारणों से फिलहाल वन प्रबंधन समिति से मांगी गई ड्रिलिंग अनुमति देने पर सहमति नहीं बनी है. हालांकि यह भी तय किया गया कि जल्द ही आसपास के प्रभावित गांवों की मौजूदगी में ग्राम सभा आयोजित कर अंतिम फैसला लिया जाएगा. ग्रामीणों ने कंपनी और प्रशासन के अधिकारियों से भी ग्राम सभा में पहुंचकर क्षेत्रीय विकास और खदान संचालन को लेकर खुली चर्चा करने की अपील की है. इस पूरे मामले पर कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने कहा कि भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन को अनुमति की प्रक्रिया प्रशासन के माध्यम से करनी थी. उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ग्राम पंचायत और BSP प्रबंधन की संयुक्त बैठक बुलाकर यह जानने का प्रयास करेगा कि समस्या कहां है और ग्रामीणों को किस बात पर आपत्ति है. कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि चर्चा के जरिए समाधान निकालते हुए प्रशासन और कंपनी से अपेक्षित विकास सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा. दो दशक पहले शुरू हुआ खनन, विकास अब भी नदारद गौरतलब है कि मानपुर ब्लॉक के खड़गांव थाना क्षेत्र में पिछले दो दशकों में तीन लौह अयस्क खदानें स्थापित हुई हैं. वर्ष 2002 में पल्लेमाड़ी शारदा, 2014 में गोदावरी और 2017 में भिलाई स्टील प्लांट की दुलकी माइंस शुरू हुई. खदानों के संचालन के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि नियमों के अनुसार कंपनियां बुनियादी सुविधाओं के विकास में योगदान देंगी, लेकिन दो दशक बाद भी ग्रामीण विकास से वंचित होने का दावा कर रहे हैं. बैठक के दौरान बोदरा गांव की एक वृद्ध महिला ने छत्तीसगढ़ी में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “सड़क नई दे, न बिजली नई दे, मैं तो कहात-कहात हार गेंव… अब मर जहूं घला,” यानी न सड़क मिली, न बिजली—मांग करते-करते थक गई हूं. वहीं ग्रामीण महिला बिमला सलामे ने कहा कि चारों ओर पहाड़ और जंगल से घिरे उनके गांव के तीन तरफ पहले ही खदानें खुल चुकी हैं. अब यदि शेष बचे जंगल-पहाड़ क्षेत्र में भी खनन हुआ तो वनोपज, जो उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, वह भी छिन जाएगा.

खनन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग, बना देश के लिए आदर्श मॉडल

रायपुर खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ राज्य ने हाल के वर्षों में खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी नवाचार को केंद्र में रखकर राज्य ने खनिज प्रशासन में अनेक संरचनात्मक सुधार किए हैं, जिनके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी खनन राज्यों में सम्मिलित हो गया है। राज्य में विश्वस्तरीय लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर, बाक्साइट, टिन अयस्क सहित नवीन अन्वेषणों से क्रिटिकल, स्ट्रैटेजिक तथा रेयर अर्थ मिनरल्स की उपलब्धता प्रमाणित हुई है, जिससे राज्य की वैश्विक पहचान सुदृढ़ हुई है। छत्तीसगढ़ का खनन क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, जबकि देश के कुल खनिज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है। राज्य के खनिज राजस्व में 25 सालों में 34 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। राज्य गठन के समय जहाँ खनिज राजस्व मात्र 429 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 14,592 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यह उपलब्धि राज्य की सुदृढ़ खनिज नीति और सतत प्रशासनिक सुधारों का परिणाम है। वर्ष 2015 में संशोधित खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के अंतर्गत गठित खनिज नीलामी नियम 2015 के तहत अब तक राज्य में 60 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है। इनमें 15 लौह अयस्क, 14 बाक्साइट, 18 चूना पत्थर तथा 13 क्रिटिकल व स्ट्रैटेजिक खनिज ब्लॉक सम्मिलित हैं। साथ ही, 05 नए ब्लॉकों (02 चूना पत्थर, 01 लौह अयस्क, 01 स्वर्ण और 01 बेस मेटल ब्लॉक) की नीलामी प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा चुकी है। संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ़ ने खनन अनुसंधान एवं अन्वेषण के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के लिए आईआईटी मुंबई, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद तथा कोल इंडिया लिमिटेड के साथ एमओयू संपादित किए हैं। इस साझेदारी के माध्यम से क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की खोज को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गति प्राप्त हुई है। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के गाइडलाइन-2024 के अनुरूप राज्य में जिला खनिज संस्थान न्यास नियम, 2025 अधिसूचित किए गए हैं। राज्य में अब तक 16,119 करोड़ रूपए का अंशदान प्राप्त हुआ है, जिसके अंतर्गत 1,05,653 कार्यों को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 74,454 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वित्तीय स्वीकृति, निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु डीएमएफ पोर्टल 2.0 को क्रियान्वित किया गया है। खनिज विभाग द्वारा विकसित खनिज ऑनलाइन 2.0 पोर्टल ने राज्य के खनिज प्रशासन को पूर्णतः डिजिटल स्वरूप प्रदान किया है। यह प्रणाली सुरक्षित, बहुआयामी और उपयोगकर्ता-मित्र है, जो पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देती है। यह पहल छत्तीसगढ़ को खनन प्रबंधन में एक राष्ट्रीय मॉडल राज्य के रूप में स्थापित कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के सिद्धांतों के अनुरूप राज्य में रेत खदानों का आबंटन अब पूर्णतः ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इस हेतु एमएसटीसी के साथ एमओयू किया गया है। नई व्यवस्था में मानव हस्तक्षेप समाप्त कर संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष एवं सुरक्षित बनाई गई है। गौण खनिज नियम, 2015 के अंतर्गत लागू की गई स्टार रेटिंग प्रणाली के तहत खनन, पर्यावरण प्रबंधन, सुरक्षा उपाय और सतत विकास के मानकों पर खदानों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस व्यवस्था के अंतर्गत 03 खदानों को 5-स्टार तथा 32 खदानों को 4-स्टार रेटिंग से सम्मानित किया गया है, जो वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार खनन की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।   मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय का कहना है कि खनिज संपदा केवल आर्थिक स्रोत नहीं, बल्कि राज्य के सर्वांगीण विकास का आधार है। छत्तीसगढ़ ने खनन क्षेत्र में नीतिगत सुधार, डिजिटल पारदर्शिता और सतत विकास के समन्वित प्रयासों से एक आदर्श प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत किया है। राज्य की यह प्रगति न केवल आर्थिक सुदृढ़ता का संकेत है, बल्कि यह जनहित आधारित विकास की दिशा में एक स्थायी कदम भी है।      नसीम अहमद खान, उप संचालक