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CBI की बड़ी कार्रवाई: भाजयुमो नेता की गिरफ्तारी के बाद पंजाब विजिलेंस मुख्यालय पर उठे सवाल

मोहाली
मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय पर सोमवार रात सीबीआई की छापेमारी ने दो अलग-अलग मामलों को एक साथ जोड़ दिया है— एक तरफ मलोट के भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेता राघव गोयल की गिरफ्तारी और दूसरी तरफ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शरद सत्य चौहान का कार्यालय, जो पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद के लिए सबसे वरिष्ठ दावेदार माने जा रहे हैं।भाजपा से जुड़े और अक्सर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ तस्वीरें साझा करने वाले राघव गोयल को 25 लाख रुपये के रिश्वत मामले में कथित बिचौलिए के रूप में गिरफ्तार किया गया है।

बताया जा रहा है कि गोयल राजस्थान के भाजपा नेता गजेंद्र शेखावत के करीबी हैं। तीन दिन पहले ही उनकी पुलिस सुरक्षा वापस ले ली गई थी। यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि सुरक्षा केंद्रीय एजेंसियों की थी या पंजाब पुलिस की।

सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हाल के समय में पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा अहम पदों पर नियुक्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करती रही है। हालांकि, इस मामले में निशाना एक भाजपा नेता बना है।

सीबीआई ने गोयल के मलोट स्थित आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। भाजपा सूत्रों के अनुसार, गोयल के बठिंडा और मलोट के कुछ भाजपा नेताओं से भी संबंध हैं। हालांकि, एक भाजपा नेता ने दावा किया कि गोयल को पार्टी में कोई आधिकारिक पद नहीं दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने पहले चंडीगढ़ के एक पांच सितारा होटल में छापा मारा और बाद में विजिलेंस ब्यूरो कार्यालय पहुंचकर 13 लाख रुपये बरामद किए।

जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार के आरोप में चौहान के निजी रीडर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उसने एक केस को निपटाने के लिए सौदेबाजी कराने में भूमिका निभाई। चौहान के साथ पिछले पांच-छह वर्षों से तैनात इस रीडर को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

शरद सत्य चौहान को पिछले महीने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो का निदेशक नियुक्त किया गया था। लगभग एक दशक बाद उन्हें फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली थी। अप्रैल में यूपीएससी को भेजे गए पैनल में डीजीपी पद के लिए उनका नाम सबसे वरिष्ठ अधिकारी के रूप में शामिल था।
मेरा नाम बेवजह घसीटा गया : चौहान

विवाद पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में चौहान ने ‘ट्रिब्यून’ से कहा, 'मेरे रीडर की किसी भी संदिग्ध गतिविधि के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। मेरा नाम बेवजह इस मामले में घसीटा गया है। मैं शाम 6 बजे तक कार्यालय में था और आज भी कार्यालय जाऊंगा। मैं उपलब्ध हूं।' उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या इस छापेमारी का यूपीएससी की लंबित चयन प्रक्रिया से कोई संबंध है। उन्होंने कहा कि उनका करियर हमेशा साफ-सुथरा रहा है।

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