samacharsecretary.com

तरबूज खाने से बच्चे की मौत, 3 अन्य बच्चे अस्पताल में भर्ती मामले में जांजगीर कलेक्टर ने लिया तत्काल संज्ञान

तरबूज खाने से बच्चे की मौत, 3 अन्य बच्चे अस्पताल में भर्ती मामले में जांजगीर कलेक्टर ने लिया तत्काल संज्ञान जांच के लिए भेजे गए तरबूज के सैंपल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कर रही अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच रायपुर जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम धुरकोट में तरबूज खाने के बाद एक बच्चे की मृत्यु तथा 3 अन्य बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम एवं संबंधित एसडीएम को जिला चिकित्सालय जांजगीर भेजा , कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम जांजगीर ने मेडिकल टीम को गांव में संबंधित परिवार के सभी लोगों के स्वास्थ्य जांच के लिए रवाना किया तथा तहसीलदार को गांव में इस बाबत पूरे मामले पर लगातार निगरानी रखने हेतु निर्देशित किया गया। सिविल सर्जन श्री एस. कुजूर ने बताया बच्चों के तरबूज और चिकन खाने बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। एक बच्चे की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो गई, जबकि 3 अन्य बीमार बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है जिनकी हालत अब सामान्य है ।कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित तरबूज के सैंपल जांच हेतु भेज दिए गए हैं। साथ ही मृत बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया है और विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। जिला प्रशासन द्वारा पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है तथा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर निगरानी भी कर रही है।

जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा: सीएम योगी

हमने पिछली सरकारों के गड्ढों को भरा, अब यूपी को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी: सीएम योगी दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा: सीएम योगी 9 वर्ष पहले प्रदेश के नाम के आगे “उत्तर” तो था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे: योगी आदित्यनाथ 2017 के पहले अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे देखकर लोग समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया: सीएम योगी मठ के प्रबंधन का अनुभव प्रदेश के संचालन में मददगार: मुख्यमंत्री नई दिल्ली  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट-2026 में उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिवर्तन की विस्तृत तस्वीर पेश करते हुए कहा कि हमने अभी तक नींव को पुख्ता किया है, पिछली सरकारों के पाप के गड्ढों को भरा है। अब डबल इंजन की सरकार को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी है। किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति उसकी मैन्युफैक्चरिंग शक्ति पर निर्भर करती है। उद्योग और उद्यमिता मजबूत होंगे तो रोजगार, निवेश और समृद्धि स्वतः बढ़ेगी। दुनिया के अधिसंख्य संघर्षों और युद्धों के पीछे भी आर्थिक हित ही प्रमुख कारण रहे हैं। ऐसे में कोई भी देश अपने उद्यमियों की उपेक्षा नहीं कर सकता। भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति ही मानवता व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। 75 वर्ष पहले आज के दिन ही प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी द्वारा पुनर्प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। आज ही के दिन अटल जी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण के माध्यम से ‘ऑपरेशन शक्ति’ का प्रदर्शन किया था। भारत की यह ताकत न केवल उसके सामर्थ्य का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक मानवता एवं कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करती है। जिसके पास शक्ति होगी, जो सामर्थ्यवान होगा, वही करुणा व मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा। केवल हाथ फैलाने, गिड़गिड़ाने से दुनिया हमें गंभीरता से नहीं लेगी। कोई हमारी बात नहीं मानेगा और न ही हम पर विश्वास करेगा। अनेक प्रश्नचिह्न लगे थे उत्तर प्रदेश पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा था। प्रदेश का नाम सुनते ही लोग दूरी बना लेते थे। कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब थी कि हर वर्ष 300 से अधिक दंगे होते थे, गुंडा टैक्स वसूला जाता था और उद्यमी पलायन करने को मजबूर थे। उत्तर प्रदेश के नाम के आगे ‘उत्तर’ था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे। प्रदेश दंगों, माफिया राज, गुंडा टैक्स और पलायन की पहचान बन चुका था। यात्रा कर रहे लोग अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे दिखने पर समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया है। 2017 से पहले यही उत्तर प्रदेश की पहचान बनी थी। मठ का अनुभव प्रदेश के संचालन में सहायता कर रहा मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वह पहली बार सांसद बने थे और गोरखपुर के बंद पड़े फर्टिलाइजर कारखाने को शुरू कराने के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री से मिले, तो उनसे पूछा गया कि “यूपी में चुनाव जीतकर आए हैं, कितने लोगों का मर्डर हुआ था?”  यह उस दौर के उत्तर प्रदेश की छवि थी। 2017 में प्रधानमंत्री ने जब उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी, तब उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं था। सीएम योगी ने कहा कि मैं तो मठ चलाता था, लेकिन मठ प्रबंधन का अनुभव मुझे प्रदेश चलाने में बड़ी सहायता कर रहा है। क्योंकि किसी भी मठ का अपना एक अनुशासन होता है। समयबद्ध तरीके से कार्यक्रम संचालित होते हैं। वित्त का भी अनुशासन होता है और हर प्रकार की सुरक्षा के लिए भी उस अनुशासन को लागू करना पड़ता है। मैंने उसी अनुभव को प्रदेश प्रशासन में लागू किया। सबसे पहली प्राथमिकता सुरक्षा का वातावरण स्थापित करना था। रूल ऑफ लॉ को लागू करने, पॉलिसी पैरालिसिस समाप्त करने और सेक्टोरल पॉलिसी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। कभी माफिया के लिए रोका गया था चीफ जस्टिस का काफिला मुख्यमंत्री ने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसी स्थिति थी कि एक माफिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के काफिले तक को रुकवा दिया था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कोई भी माफिया ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता। अब बेटियां सुरक्षित माहौल में स्कूल जा रही हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पलायन करने वाले परिवार लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कैराना का उल्लेख करते हुए कहा कि 2015 में एक व्यापारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद पूरा परिवार प्रदेश छोड़कर चला गया। लेकिन अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद वही परिवार वापस लौटा। किसी भी राज्य के विकास की पहली शर्त सुरक्षा का वातावरण है और सरकार का दायित्व है कि वह हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करे। उद्योगों को ठोस सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ सरकार ने कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए। किसानों की आत्महत्या रोकने, खेती को तकनीक से जोड़ने और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर विशेष काम हुआ। सरकार ने बड़े निवेशों को आकर्षित करने के लिए लैंड बैंक तैयार किया और उद्योगों के लिए स्पष्ट नीतियां बनाई। 2018 में शुरू की गई वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना आज प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिला रही है। ओडीओपी के माध्यम से डिजाइन, पैकेजिंग, तकनीक और ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया गया। 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां प्रदेश में रोजगार और उत्पादन का आधार बन चुकी हैं। एमएसएमई सेक्टर लगभग 3 करोड़ युवाओं को रोजगार दे रहा है। इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उद्योगों को सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन उपलब्ध कराई जाए। सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें महाकुंभ में आए 66-67 करोड़ श्रद्धालु भी शामिल थे। काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, नैमिषारण्य, बौद्ध और जैन सर्किट सहित प्रदेश की सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश … Read more

डीएम डॉ. वीके सिंह का बड़ा एक्शन: जनशिकायत निस्तारण में ढिलाई पर अफसरों पर गिरी गाज

 मेरठ यूपी के मेरठ में अधिकारियों पर गाज गिरी है। डीएम डॉ. वीके सिंह ने जनशिकायतों (आईजीआरएस) के निस्तारण में लापरवाही को लेकर 9 अफसरों, अभियंताओं के एक दिन का वेतन कटौती, 155 अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। विकास भवन सभागार में सोमवार को डीएम ने आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त जनशिकायतों के निस्तारण की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में नौ विभागीय नोडल अधिकारियों, अभियंताओं को अनुपस्थित पाया गया। इन सभी के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम ने उनके एक दिन के वेतन कटौती का निर्देश दिया। समीक्षा में पाया गया जनशिकायतों पर प्राप्त फीडबैक में 15 अधिकारियों के मामले में 100 प्रतिशत असंतुष्टि पाई गई। अर्थात शिकायतकर्ता संबंधित अधिकारी की कार्रवाई से 100 प्रतिशत असंतुष्ट है। डीएम ने इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए। डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता बनाए रखें। यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक शिकायत का समाधान संतोषजनक रूप से हो। प्रत्येक शिकायतकर्ता से वार्ता की जाए और मौके पर जाकर सत्यापन कर रिपोर्ट लगाई जा सके। इन्हें जारी हुआ नोटिस जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, बीडीओ रजपुरा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सरूरपुर, बीडीओ हस्तिनापुर, बीडीओ दौराला, बीडीओ जानी, बीडीओ माछरा, बीडीओ मेरठ, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, उप संचालक चकबंदी, मेरठ, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण पीडी, पशु चिकित्सा अधिकारी मवाना, खंड शिक्षा अधिकारी मवाना, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (जिला चिकित्सालय) और सब रजिस्ट्रार, मवाना। इनके वेतन कटौती का निर्देश हुआ अधिशासी अभियंता, यांत्रिकी विभाग, अधिशासी अधिकारी, हस्तिनापुर, जिला कमांडेंट, होमगार्ड, खंड शिक्षा अधिकारी, माछरा, एआरटीओ (सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी), एआरएम रोडवेज, वरिष्ठ निरीक्षक बाट एवं माप विभाग, अधिशासी अभियंता जलकल विभाग और अधिशासी अधिकारी मवाना। कृषि विभाग ने नौ समितियों समेत 35 उर्वरक विक्रेताओं को नोटिस उधर, पीलीभीत में पिछले वर्ष के सापेक्ष वर्तमान वर्ष के अप्रैल महीने में 35 प्रतिशत अधिक यूरिया को खपा दिया गया। इस पर कृषि विभाग सतर्क हो गया। जिला कृषि अधिकारी ने नौ सहकारी समितियों समेत 35 उवर्रक विक्रेताओं को अधिक यूरिया बेचने पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। एम-पैक्स कैशोपुर, एम-पैक्स माधोटांडा, एम-पैक्स ललौरीखेड़ा, एम-पैक्स सुहास, एम-पैक्स ऐमी, एम-पैक्स चुटकुना, एम-पैक्स बीसलपुर, दीक्षित फर्टिलाइजर, मखदूम अशरफ खाद भंडार, श्रीराम खाद भंडार, शंकर इंटरप्राइजेज, गुरुनानक फर्टिलाइजर, गगन एग्री जंक्शन, सिंह फर्टिलाइजर, विपिन खाद भंडार, शर्मा खाद भंडार, न्यू सपन खाद भंडार से जवाब मांगा गया है। इन केंद्रों पर पीओएस मशीन के माध्यम से जो बिक्री दिखाई गई है। वह बीते साल के शून्य या बेहद कम आंकड़ों के मुकाबले इस बार कई गुना अधिक है। आईएफएमएस पोर्टल के माध्यम से कड़ी मानीटरिंग की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल यूरिया की खपत में 35 फीसदी की बढ़ोत्तरी पाई गई है। इस पर कृषि विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

यूपी सरकार सख्त: 30 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग अनिवार्य, तभी जारी होगा लोन

लखनऊ मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत अब किसी अभ्यर्थी को लोन आनलाइन प्रशिक्षण के बाद ही मिलेगा। यह राशि बैंक को प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र मिलने के बाद जारी करेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। योजना के तहत किसी युवा उद्यमी को अब लोन स्वीकृत होने के बाद चुनिंदा तीन संस्थानों से 30 घंटे का प्रशिक्षण सत्र पूरा करना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों की खास ट्रेनिंग के बाद प्रमाणपत्र आनलाइन ही बैंक को प्राप्त हो जाएगा, जिसके मिलने पर बैंक लोन राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर कर देगा। कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए विभाग ने फेस रिक्ग्नीशन प्रणाली अपनाई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बैंकों के बड़ी संख्या में आवेदनों को निरस्त किए जाने और युवाओं को अलग-अलग सेक्टर में बेहतर प्रशिक्षण के लिए प्रणाली में बड़ा सुधार किया गया है। सीएम युवा योजना के तहत बिना बैंक गारंटी पांच लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन हासिल करने में युवाओं को कोई कठिनाई न हो और कहीं कोई तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए बड़ी पहल की गई है। योजना के तहत 28 अप्रैल तक लगभग 530487 आवेदन आए थे, जिनमें 448577 आवेदनों को बैंक को भेजा गया। इनमें बैंक ने करीब 180756 आवेदनों को स्वीकृति दी और 168516 आवेदनों के तहत 5913.13 करोड़ रुपये का लोन वितरित किया गया। लगभग 2.67 लाख आवेदनों को बैंक के स्तर से स्वीकृति न मिल पाने पर चिंता जताई गई थी। बैंक अधिकारियों ने आवेदनों में प्रोजेक्ट रिपोर्ट व अन्य तकनीकी खामियां बताई थीं। मिशन निदेशक के विजयेन्द्र पांडियन ने आवश्यक बदलाव कराकर एक मई से नई व्यवस्था लागू कराई है। एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित प्रशिक्षण सीएम युवा योजना के आवेदकों को प्रशिक्षण के लिए समाधान समिति, यूपीआईकान (यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड) और उद्यमिता विकास संस्थान को चुना गया है। तीनों संस्थानों को 25-25 जिले प्रदान किए गए हैं। बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद आवेदकों की उनके चुने हुए सेक्टर के अनुरूप पांच दिनों में 30 घंटे की आनलाइन ट्रेनिंग कराई जा रही है। अंतिम दिन लाइव सत्र में विशेषज्ञ भी जुड़े हैं, जो आवेदकों के प्रश्नों का समाधान भी करते हैं। सीएम युवा के नोडल अधिकारी सर्वेश्वर शुक्ला के अनुसार बैंक जिस सेक्टर या कारोबार के लिए लोन स्वीकृत करता है, उसके लिए विशेषज्ञों से खास ट्रेनिंग का माड्यूल एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित है। पंजीकरण से पहले 30 मिनट का वीडियो देखना अनिवार्य पोर्टल पर पंजीकरण के लिए भी काउंसलिंग सत्र के तहत आधे घंटे का प्रारंभिक वीडियो देखना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण के लिए आवेदक को पहले उसके चुने गए उद्यम की बारीकियों व बैंक से लोन लेने के सेक्टर की जरूरी जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध करा रहा है। मानक विहीन लैब व प्रशिक्षण देने वाली 400 कंपनियां हटाई गईं लखनऊ। यूपी में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने में गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को हटा दिया गया है। लैब व प्रशिक्षण कार्यक्रम दोनों मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। ऐसे में उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से इस बार बड़ी कार्रवाई की है। गुणवत्तापूर्ण ढंग से प्रशिक्षण दिलाने के सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से जिलों में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों का चयन किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान मिशन की ओर से टीमें भेजकर मानकों की जांच कराई जाती है। जांच में 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियां ऐसी पाईं गईं जिनके यहां लैब में प्रशिक्षण देने के पर्याप्त संसाधन तक नहीं थे। यही नहीं मनमाने ढंग से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा था और सरकार से इसकी एवज में धन लिया जा रहा था। मिशन निदेशक पुलकित खरे की ओर से सत्र 2026-27 से कौशल प्रशिक्षण को लेकर पर्याप्त सख्ती की जा रही है। जिसका नतीजा है कि मानकों की जांच सख्ती से कर गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। करीब 900 से अधिक कंपनियों को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए चयनित किया जा चुका है और आगे मांग के अनुसार प्रशिक्षण लक्ष्य दिए जाएंगे। अच्छा कार्य करने पर टॉपअप की सुविधा भी है, यानी उन्हें और युवाओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य दिया जाएगा। कौशल दृष्टि पोर्टल से प्रशिक्षण की निगरानी की जा रही है। जिस पर जियो टैगिंग के साथ प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण करते युवाओं की फोटो अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। फिलहाल अब गड़बड़ी नहीं चलेगी।

महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता: सीताफल से बढ़ी आमदनी

सफलता की कहानी सीताफल उत्पादन एवं प्रसंस्करण से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति में सुधार सिवनी जिला आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा भोपाल  वर्तमान में मांगलिक आयोजनों, विशेषकर विवाह समारोहों में सीताफल से निर्मित व्यंजनों, जैसे सीताफल रबड़ी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। इस बढ़ती मांग की पूर्ति के लिये ऑफ-सीज़न में भी सीताफल पल्प का प्रसंस्करण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के सिवनी जिला में उत्पादित सीताफल ने स्थानीय स्तर पर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन का प्रभावी माध्यम स्थापित किया है। पूर्व में आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में जीवन यापन कर रहीं महिलाओं की आय एवं जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है। आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में पहल सिवनी जिले के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले सीताफल के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन का कार्य वर्तमान में स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित किया जा रहा है। छपारा विकासखंड के अंतर्गत खेरमटाकोल (भूतबंधानी) स्थित महादेव ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती अभिलाषा ने बताया कि समूह से जुड़ने के पश्चात महिलाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध हुआ है। वे सीताफल की पैकिंग एवं विपणन के माध्यम से वार्षिक रूप से उल्लेखनीय आय अर्जित कर रही हैं। उत्पादों का विपणन स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राज्य के प्रमुख शहरों एवं छत्तीसगढ़ तक किया जा रहा है। सिवनी जिले में उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता एवं स्वाद के कारण इसकी मांग राष्ट्रीय स्तर, विशेषकर महानगरों में भी बढ़ रही है। वन क्षेत्रों में सीताफल पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव का कार्य भी महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है। आय के स्थायी स्रोत का सृजन बरोड़ा सिवनी विकासखंड के मां दुर्गा महिला आजीविका ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती रामप्यारी ने बताया कि सीताफल आधारित गतिविधियों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है तथा वे प्रतिवर्ष एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। रोजगार सृजन एवं कौशल विकास आजीविका मिशन के अंतर्गत छपारा विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रारंभिक चरण में 200 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। समूहों को विपणन, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग के माध्यम से उत्पादों को अन्य राज्यों तक सफलतापूर्वक भेजा जा रहा है। जिला परियोजना प्रबंधक श्री संजय रस्तोगी ने बताया कि सिवनी का सीताफल प्राकृतिक रूप से अत्यंत स्वादिष्ट एवं मीठा होता है। इस उत्पाद को “एक जिला एक उत्पाद” योजना में भी शामिल किया गया है, जिससे इसकी ब्रांड पहचान सुदृढ़ हुई है। सीताफल पल्प प्रसंस्करण की व्यवस्था बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सीताफल के गूदे (पल्प) का प्रसंस्करण एवं संरक्षण किया जा रहा है। जिले में स्थापित दो प्रसंस्करण इकाइयों में पल्प को निम्न तापमान पर संरक्षित कर वर्षभर उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इससे बड़े आयोजनों एवं बाजार की मांग के अनुरूप निरंतर आपूर्ति संभव हो पाती है। आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर सिवनी एसआरएलएम भोपाल के राज्य परियोजना प्रबंधक (कृषि) श्री मनीष पंवार ने बताया कि सिवनी जिले की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही हैं। अनुकूल जलवायु के कारण यहां उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता उत्कृष्ट है, जिससे इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। सिवनी जिला वर्तमान में आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।  

उज्जैन जिले में जल संरक्षण और जनजागरूकता पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन

जल गंगा संवर्धन अभियान उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं जनजागरूकता के लिए आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताएं उज्जैन उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन के उद्देश्य से “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” का वृहद स्तर पर संचालन किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के मार्गदर्शन में जिले के शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों द्वारा विभिन्न जनजागरूकता एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन कर विद्यार्थियों एवं आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान से जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा भू-जल संवर्धन के प्रति सकारात्मक संदेश प्रसारित किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के नेतृत्व में “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत उज्जैन जिले के 15 शासकीय एवं 07 अशासकीय महाविद्यालयों में विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में निबंध, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, भाषण प्रतियोगिता, व्याख्यान तथा रैली शामिल थीं। इन कार्यक्रमों में 1866 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों एवं महाविद्यालयों द्वारा मानव श्रृंखला, रंगोली, वृक्षारोपण, तालाबों की सफाई, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम तथा जल स्रोतों के संरक्षण जैसे रचनात्मक एवं सामाजिक कार्य भी किए गए। इसके माध्यम से जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। उज्जैन जिले के 13 महाविद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह भू-जल स्तर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अतिरिक्त जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले के 17 महाविद्यालयों द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है, जिसके तहत 1086 वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना से पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन को बढ़ावा दिया जाएगा। जल गंगा संवर्धन योजना के अंतर्गत आयोजित रैलियों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का पुरजोर प्रयास किया।  

योगी कैबिनेट फुल होने के बाद, BJP की 2024 की तैयारी और चुनावी स्थिति पर सवाल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दूसरा कैबिनेट विस्तार रविवार किया गया है. 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई तो दो राज्य मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया. मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संदेश देने कवायद की गई है, क्योंकि 2024 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'पीडीए' फॉर्मूले से बीजेपी को पीछे धकेल दिया था।  राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिनमें छह नए चेहरे शामिल हैं. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और सपा के बागी विधायक मनोज कुमार पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है तो कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।  योगी मंत्रिमंडल विस्तार में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली. ये दोनों ही नेता पहले से योगी सरकार में राज्यमंत्री थे, जिन्हें अब प्रमोशन देकर अब स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है. इस तरह से योगी मंत्रिमंडल अब पूरी तरह फुल हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि कैबिनेट विस्तार से बीजेपी के बिगड़े सियासी समीकरण को कितनी मजबूती मिल पाएगी?  कैबिनेट के जरिए बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग योगी मंत्रिमंडल का विस्तार कर बीजेपी ने दलित, पिछड़े और ब्राह्मण समाज केतबकों को बड़ा संदेश दे दिया है. योगी सरकार से नाराज माने जा रहे ब्राह्मण समाज से मनोज पांडेय को मंत्री बना कर बीजेपी ने उन्हें लुभाने का प्रयास किया है. इसी तरह भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी यूपी के जाट समाज को जोड़े रखने का दांव है तो सोमेंद्र तोमर को राज्यमंत्री पद से प्रमोशन स्वतंत्र प्रभार देकर गुर्जर समाज को सियासी संदेश दिया है।  कैबिनेट विस्तार में दलित चेहरे को तौर पर कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को राज्यमंत्री बनाया गया, जिनके जरिए गैर जाटव दलित वोटों को साधने की कवायद की है. कृष्णा पासवान पासी समुदाय से हैं तो सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समुदाय से आते हैं. इन दोनों ही नेताओं दलित प्रतिनिधित्व के रूप में कैबिनेट में जगह दी है ताकि दलित समाज के विश्वास को बनाए रखा जा सके।  वहीं, लोधी, पाल और विश्वकर्मा जैसी पिछड़ी जातियों पर भी फोकस किया गया. पाल समुदाय से आने वाले अजीत सिंह पाल को राज्यमंत्री से प्रमोशन कर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बना दिया गया है. इसी तरह लोधी जाति से आने वाले कैलाश सिंह राजपूत बनाए गए हैं. हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री के तौर पर शामिल कर ओबीसी की लोहार जाति को सियासी संदेश दिया है।  बीजेपी ने दिया सियासी संदेश,  राह में कांटे ही कांटे?  योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी ने राजनीतिक रूप से इसका सबसे बड़ा संदेश दिया है. बीजेपी ने जिस तरह से मंत्रिमंडल में ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उसके जरिए ओबीसी की उन्हीं जातियों पर फोकस किया है, जो पहले से ही बीजेपी के साथ जुड़ी हुई हैं. सपा के पीडीए फॉर्मूले के साथ 2024 में नहीं गई थी।  बीजेपी गैर-यादव OBC की राजनीति से आगे बढ़कर अन्य पिछड़ी जाति पर काम कर रही है. 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी को जिन इलाकों और जातियों में नुकसान हुआ था, पार्टी अब उसी गैप को भरने की कोशिश कर रही है. पश्चिम यूपी में जाट समीकरण लोकसभा में पूरी तरह स्थिर नहीं दिखे थे. इसी तरह मायावती के कमजोर से होने से दलित वोट का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी की ओर गया था।  अखिलेश यादव ने पीडीए के जरिए पिछड़ी जातियों को भी साथ जोड़ने में कामयाब रहे. इसलिए इस विस्तार के जरिए इन सभी तबकों को संदेश दिया जा रहा है कि सत्ता में उनकी हिस्सेदारी है, लेकिन सवाल यही है कि अखिलेश यादव के 'पीडीए फॉर्मूले' को बीजेपी क्या काउंटर कर पाएगी।  2024 के बिगड़े समीकरण कितना दुरुस्त होगा?  बीजेपी ने योगी मंत्रिमंडल विस्तार में जिस तरह ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उससे 2024 में बीजेपी के अलग होने वाली जातियों को क्या फिर से बीजेपी जोड़ पाएगी? ये इसीलिए भी कहा जा रहा है कि 2019 की तुलना में बीजेपी 2024 में 62 सीटों से घटकर 33 सीट पर सिमट गई थी।  सपा 37 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही तो उसकी सहयोगी कांग्रेस को 6 सीटें मिली थी. 2024 के चुनाव नतीजे को विधानसभा क्षेत्र के लिहाज से देखें तो सपा और कांग्रेस को करीब 128  विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी. बीजेपी के साथ जुड़ा रहा कुर्मी, मौर्य जैसे ओबीसी वोटर के साथ-साथ राजपूत और दलित वोटर भी छिटक गए थे. इसके चलते ही बीजेपी लोकसभा चुनाव में सपा से पीछे रह गई थी।  बीजेपी ने कुर्मी समाज के विश्वास को जीतने के लिए पकंज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, लेकिन मौर्य और राजपूत समाज को साधने की कवायद कैबिनेट के जरिए नहीं हो सकी. इसीलिए बृजभूषण शरण सिंह और विधायक आशा मौर्य का दर्द छलक उठा. आशा मौर्य ने कहा कि लगता है पार्टी को अब मौर्य समाज की आवश्यकता नहीं रह गई और बाहर से आए दलबदलुओं को प्राथमिकता दी गई है।  वहीं, बृजभूषण सिंह कैबिनेट विस्तार से नाखुश दिखे. माना जा रहा था कि वे अपने बेटे प्रतीक भूषण के लिए मंत्री पद चाहते थे. किसी ठाकुर चेहरे को जगह न मिलने पर उन्होंने 'X' पर शायराना अंदाज में निशाना साधा कि शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है. उनके इस पोस्ट को लेकर साफ समझा जा सकता है कि किस तरह से नाराज हैं. मौर्य और ठाकुर वोटों को साधे रखने के लिए बीजेपी ने कोई सियासी दांव नहीं चल रही है।  पांडेय और चौधरी बीजेपी के कितन काम आएंगे?  ब्राह्मण बीजेपी के साथ पहले ही मजबूती से खड़ा है और मनोज पांडेय मंत्री बनकर क्या खिसकते हुए ब्राह्मण समाज को जोड़े रख पाएंगे, ये सवाल इसीलिए है कि सपा में रहते हुए ब्राह्मणों को अखिलेश के करीब नहीं ला सके थे. अखिलेश से बगावत करने का भले ही उन्हें इनाम मिल गया है, लेकिन ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी स्वीकार्यता अपने क्षेत्र से बाहर नहीं है।  पश्चिम … Read more

बाहर ATM, अंदर नाई की दुकान! कैश लेने गए लोग वीडियो देखकर चौंके

 पटना  पटना के दानापुर में एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसे देखकर लोग चौंक जा रहे हैं. यहां एक पुराने SBI ATM के अंदर अब कैश नहीं, बल्कि हेयर कटिंग और शेविंग का काम हो रहा है. बाहर से पूरा सेटअप अब भी बैंक ATM जैसा ही दिखाई देता है, लेकिन अंदर घुसते ही लोगों को कुर्सी, शीशा और हेयर ड्रायर नजर आते हैं।  मामला दानापुर के रूपसपुर इलाके स्थित उषा विला का है. स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां कई सालों तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का ATM संचालित होता था. आसपास रहने वाले लोग यहीं से से कैश निकालते थे. लेकिन कुछ महीने पहले ATM को वहां से हटा दिया गया. हैरानी की बात यह है कि ATM हटने के बाद भी उसका बोर्ड, बाहरी डिजाइन और पूरा ढांचा वैसे का वैसा ही छोड़ दिया गया. इसी खाली जगह को बाद में किराये पर दे दिया गया और अब वहां एक सैलून चल रहा है. बाहर से गुजरने वाले लोग आज भी इसे ATM समझ लेते हैं. कई बार तो लोग सीधे कैश निकालने के लिए अंदर पहुंच जाते हैं।  स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें भी समझ नहीं आया कि आखिर ATM के अंदर सैलून कैसे खुल गया. अब यह जगह इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है. आसपास के लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी यह 'अनोखा ATM' दिखाने ले जाते हैं. कुछ लोग मजाक में कहते हैं कि यहां कैश नहीं, हेयरकट मिलता है. वहीं सोशल मीडिया पर भी इस जगह की तस्वीरें और वीडियो तेजी से शेयर किए जा रहे हैं. लोग इस पर तरह-तरह के मजेदार कमेंट कर रहे हैं।  इलाके के एक युवक ने बताया कि कई बार रात को बाहर से आने वाले लोग जल्दी में ATM समझकर अंदर चले जाते हैं. उन्हें लगता है कि मशीन अंदर होगी, लेकिन सामने सैलून देखकर पहले हैरान होते हैं और फिर हंसने लगते हैं. दरअसल, ATM हटने के बाद बैंक की तरफ से बोर्ड या बाहरी पहचान नहीं हटाई गई. यही वजह है कि लोगों का भ्रम अब भी बना हुआ है. हालांकि स्थानीय लोग अब इस जगह को 'ATM वाला सैलून' कहकर बुलाने लगे हैं। 

ईमेल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से NRI समस्याओं का समाधान, 13 मई को पंजाब सरकार का ऑनलाइन मिलनी

चंडीगढ़  विदेशों में बसे पंजाबियों की समस्याओं और शिकायतों को सुनने तथा उनके समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा 13 मई 2026, बुधवार को सुबह 11:00 बजे (भारतीय समयानुसार) “ऑनलाइन मिलनी” का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब के एन.आर.आई. मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि इस ऑनलाइन मिलनी के दौरान वे विदेशों में रह रहे पंजाबियों के साथ सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं, शिकायतों और सुझावों को सुनेंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरान प्राप्त होने वाली शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि संबंधित व्यक्ति अपनी शिकायतें minister.pa@punjab.gov.in ईमेल पर भेज सकते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन मिलनी में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन https://forms.gle/KKUutEpVTeccLSta6⁠लिंक के माध्यम से करवाया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि निर्धारित दिन और समय के अनुसार “ऑनलाइन मिलनी” में शामिल होने के लिए https://new.bharatvc.nic.in/join/8833894922⁠ लिंक का उपयोग किया जा सकता है। जॉइन करने के लिए आई.डी. 8833894922 तथा पासवर्ड 742627 होगा। एन.आर.आई. मंत्री ने विदेशों में बसे समस्त पंजाबियों से इस “ऑनलाइन मिलनी” में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है ताकि उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। संगरूर सहित कई जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए इसके बाद वर्ष 2024 में फरवरी महीने के दौरान पठानकोट, शहीद भगत सिंह नगर, फिरोजपुर और संगरूर सहित कई जिलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। अब पंजाब सरकार ने इस व्यवस्था को और व्यवस्थित करते हुए मई 2026 से महीने में दो बार एनआरआई मिलनी आयोजित करने का फैसला लिया है। इनमें एक मिलनी ऑनलाइन और दूसरी व्यक्तिगत अथवा डिवीजन स्तर पर आयोजित की जाएगी। पहली बार 609 शिकायतें आई थी सरकार की तरफ से दिसंबर 2022 में हुई पहली एनआरआई मिलनी के दौरान करीब 609 शिकायतें आई थीं। फरवरी 2024 में हुई मिलनियों में 309 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 256 का समाधान कर दिया गया। वहीं, जनवरी 2025 तक ऑनलाइन सत्रों के जरिए 542 से ज्यादा शिकायतें मिलीं, जिनमें से 488 मामलों का निपटारा हो चुका है।  

UCC को लेकर MP में सक्रियता: जनसुनवाई जिलों में, दिल्ली में समिति की बैठक और आदिवासी प्रावधानों का मंथन

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के गठन के बाद अब उसके कामकाज की रूपरेखा तैयार की जा रही है। समिति की अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही मंगलवार को दिल्ली में समिति की पहली बैठक आयोजित होने की संभावना है। सरकार प्रदेशभर में लोगों की राय जानने के लिए जिला स्तर और भोपाल में जनसुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही एक विशेष वेबसाइट भी बनाई जा रही है, जहां नागरिक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। समिति का कार्यालय दिल्ली में स्थापित किए जाने की तैयारी है।   आदिवासी समुदाय को दायरे से बाहर रखने पर मंथन जानकारी के अनुसार, प्रदेश के आदिवासी समुदायों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से अलग रखने पर भी विचार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है और उनके पारंपरिक रीति-रिवाज व सामाजिक कानून लंबे समय से प्रचलित हैं। ऐसे में सरकार उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने के विकल्प पर मंथन कर रही है, ताकि किसी प्रकार का सामाजिक विवाद न उत्पन्न हो। यूसीसी के मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी विशेष प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। समिति को ऐसे संबंधों के पंजीयन, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर सुझाव देने को कहा गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर उत्तराखंड और गुजरात की तुलना में अधिक सख्त रुख अपना सकती है।