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यूपी सरकार सख्त: 30 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग अनिवार्य, तभी जारी होगा लोन

लखनऊ मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत अब किसी अभ्यर्थी को लोन आनलाइन प्रशिक्षण के बाद ही मिलेगा। यह राशि बैंक को प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र मिलने के बाद जारी करेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। योजना के तहत किसी युवा उद्यमी को अब लोन स्वीकृत होने के बाद चुनिंदा तीन संस्थानों से 30 घंटे का प्रशिक्षण सत्र पूरा करना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों की खास ट्रेनिंग के बाद प्रमाणपत्र आनलाइन ही बैंक को प्राप्त हो जाएगा, जिसके मिलने पर बैंक लोन राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर कर देगा। कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए विभाग ने फेस रिक्ग्नीशन प्रणाली अपनाई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बैंकों के बड़ी संख्या में आवेदनों को निरस्त किए जाने और युवाओं को अलग-अलग सेक्टर में बेहतर प्रशिक्षण के लिए प्रणाली में बड़ा सुधार किया गया है। सीएम युवा योजना के तहत बिना बैंक गारंटी पांच लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन हासिल करने में युवाओं को कोई कठिनाई न हो और कहीं कोई तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए बड़ी पहल की गई है। योजना के तहत 28 अप्रैल तक लगभग 530487 आवेदन आए थे, जिनमें 448577 आवेदनों को बैंक को भेजा गया। इनमें बैंक ने करीब 180756 आवेदनों को स्वीकृति दी और 168516 आवेदनों के तहत 5913.13 करोड़ रुपये का लोन वितरित किया गया। लगभग 2.67 लाख आवेदनों को बैंक के स्तर से स्वीकृति न मिल पाने पर चिंता जताई गई थी। बैंक अधिकारियों ने आवेदनों में प्रोजेक्ट रिपोर्ट व अन्य तकनीकी खामियां बताई थीं। मिशन निदेशक के विजयेन्द्र पांडियन ने आवश्यक बदलाव कराकर एक मई से नई व्यवस्था लागू कराई है। एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित प्रशिक्षण सीएम युवा योजना के आवेदकों को प्रशिक्षण के लिए समाधान समिति, यूपीआईकान (यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड) और उद्यमिता विकास संस्थान को चुना गया है। तीनों संस्थानों को 25-25 जिले प्रदान किए गए हैं। बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद आवेदकों की उनके चुने हुए सेक्टर के अनुरूप पांच दिनों में 30 घंटे की आनलाइन ट्रेनिंग कराई जा रही है। अंतिम दिन लाइव सत्र में विशेषज्ञ भी जुड़े हैं, जो आवेदकों के प्रश्नों का समाधान भी करते हैं। सीएम युवा के नोडल अधिकारी सर्वेश्वर शुक्ला के अनुसार बैंक जिस सेक्टर या कारोबार के लिए लोन स्वीकृत करता है, उसके लिए विशेषज्ञों से खास ट्रेनिंग का माड्यूल एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित है। पंजीकरण से पहले 30 मिनट का वीडियो देखना अनिवार्य पोर्टल पर पंजीकरण के लिए भी काउंसलिंग सत्र के तहत आधे घंटे का प्रारंभिक वीडियो देखना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण के लिए आवेदक को पहले उसके चुने गए उद्यम की बारीकियों व बैंक से लोन लेने के सेक्टर की जरूरी जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध करा रहा है। मानक विहीन लैब व प्रशिक्षण देने वाली 400 कंपनियां हटाई गईं लखनऊ। यूपी में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने में गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को हटा दिया गया है। लैब व प्रशिक्षण कार्यक्रम दोनों मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। ऐसे में उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से इस बार बड़ी कार्रवाई की है। गुणवत्तापूर्ण ढंग से प्रशिक्षण दिलाने के सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से जिलों में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों का चयन किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान मिशन की ओर से टीमें भेजकर मानकों की जांच कराई जाती है। जांच में 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियां ऐसी पाईं गईं जिनके यहां लैब में प्रशिक्षण देने के पर्याप्त संसाधन तक नहीं थे। यही नहीं मनमाने ढंग से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा था और सरकार से इसकी एवज में धन लिया जा रहा था। मिशन निदेशक पुलकित खरे की ओर से सत्र 2026-27 से कौशल प्रशिक्षण को लेकर पर्याप्त सख्ती की जा रही है। जिसका नतीजा है कि मानकों की जांच सख्ती से कर गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। करीब 900 से अधिक कंपनियों को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए चयनित किया जा चुका है और आगे मांग के अनुसार प्रशिक्षण लक्ष्य दिए जाएंगे। अच्छा कार्य करने पर टॉपअप की सुविधा भी है, यानी उन्हें और युवाओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य दिया जाएगा। कौशल दृष्टि पोर्टल से प्रशिक्षण की निगरानी की जा रही है। जिस पर जियो टैगिंग के साथ प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण करते युवाओं की फोटो अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। फिलहाल अब गड़बड़ी नहीं चलेगी।

सीएम युवा योजना को गति देने के लिए क्रेडिट काउंसलर्स की ट्रेनिंग शुरू, जिलों में तैनात होंगे 90 सर्टिफाइड काउंसलर

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश सरकार ने सीएम युवा योजना में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस वर्ष 1.5 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी क्रम में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें बैंकिंग प्रक्रिया में सक्षम बनाने के उद्देश्य से गोमतीनगर में सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर्स (सीसीसी) की विशेष ट्रेनिंग आयोजित की गई। पहले बैच में 50 जिलों और दूसरे बैच में 25 जिलों को शामिल किया गया है। यूपीकॉन के सभी कर्मचारियों को इस प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे जमीनी स्तर पर युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद कुल 90 सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात किए जाएंगे। ये काउंसलर सीएम युवा योजना के तहत ऋण लेने वाले लाभार्थियों को बैंकिंग प्रक्रियाओं, दस्तावेजीकरण और प्रोजेक्ट तैयार करने में मदद करेंगे, जिससे युवाओं को आसानी से ऋण प्राप्त हो सके। काउंसलर्स निभाएंगे सेतु की भूमिका यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह ने बताया कि सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर एमएसएमई उद्यमियों और बैंकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करेंगे। वे न केवल उद्यमियों को उपयुक्त ऋण योजनाओं की जानकारी देंगे, बल्कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट, वित्तीय विवरण और आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करने में भी सहयोग करेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने संबोधन में क्रेडिट रेटिंग, सिबिल स्कोर और ग्रीन एवं नए प्रोजेक्ट्स के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सही वित्तीय योजना और बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल के माध्यम से युवा उद्यमी न केवल आसानी से ऋण प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने व्यवसाय को भी सफल बना सकते हैं। रोजगार और वित्तीय समावेशन को मिलेगा बढ़ावा यह पहल न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि अनुभवी पेशेवरों विशेषकर सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों को भी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करने का अवसर प्रदान करती है। प्रदेश सरकार की यह पहल वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करते हुए एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा देने का कार्य करेगी। आने वाले समय में यह मॉडल प्रदेश में रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार बनेगा। एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा मजबूती का आधार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (आईआईबीएफ) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह सीसीसी कोर्स रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया  द्वारा अनुमोदित है, जिसे प्रदेश में व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर योजना आरबीआई की वित्तीय समावेशन समिति की सिफारिशों पर आधारित है। इसका उद्देश्य एमएसएमई उद्यमियों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना और उन्हें ऋण प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना है। इस ढांचे के अंतर्गत सिड्बी को एक्रीडिटिंग एजेंसी और इंप्लीमेंटिंग एंड रजिस्टरिंग अथॉरिटी की भूमिका दी गई है, जबकि आईआईबीएफ  द्वारा इस कोर्स को विकसित किया गया है। यह सर्टिफिकेशन प्राप्त करना सीसीसी बनने के लिए अनिवार्य है।

वंदना की कहानी: सीएम युवा योजना के जरिए ऑयल मिल से हासिल की आजीविका

सीएम युवा योजना से बदली वंदना की किस्मत, ऑयल मिल शुरू कर बनीं आत्मनिर्भर  स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर, आसपास के गांवों में हो रही उत्पाद की आपूर्ति योजना के पहले चरण में पात्र युवाओं को दिया जाता है 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण  लखनऊ उत्तर प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के माध्यम से योगी आदित्यनाथ सरकार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना का लाभ उठाकर कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहीं हैं। ऐसी ही एक मिसाल है यूपी की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज की वंदना यादव की, जिन्होंने इस योजना के तहत ऋण लेकर अपनी ऑयल मिल स्थापित की और आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं हैं। सीएम युवा योजना से मिली वित्तीय सहायता, शुरु की ऑयल मिल  वंदना यादव बताती हैं कि उन्होंने राज्य सरकार की सीएम युवा योजना के तहत ऋण प्राप्त कर अपने उद्यम की शुरुआत की। उन्हें इस योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता के साथ आवश्यक मार्गदर्शन भी मिला। उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया से ऋण लेकर अपने पति के साथ मिलकर ऑयल मिल की स्थापना की। यहां सरसों के शुद्ध तेल का उत्पादन किया जा रहा है और उन्होंने अपने उत्पाद का एक ब्रांड भी लॉन्च किया है। मोहनलालगंज के गांव मजरा खुजेहटा में वंदना ने ऑयल मिल लगाई और वर्तमान में इससे तैयार सरसों का तेल आसपास के कई गांवों और जिलों में पहुंच रहा है। इस उद्यम के जरिए उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं। उनके इस प्रयास से क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है। योगी सरकार की योजनाओं से महिला उद्यमिता को मिल रही नई पहचान मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 21 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के पहले चरण में पात्र युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाता है। समय पर ऋण चुकाने पर दूसरे चरण में 10 लाख रुपये तक के ऋण की व्यवस्था भी की गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य हर वर्ष एक लाख नए उद्यमी तैयार करना है।