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अजय बरलोटा ने सौ बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा डोनेशन कर रचा सेवा का कीर्तिमान

रायपुर मानव सेवा की मिशाल पेश करते हुए रायपुर के युवा व्यवसायी अजय बारलोटा द्वारा 100 बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा डोनेशन कर एक अनुकरणीय कीर्तिमान स्थापित किया। इस उपलब्धि ने न केवल जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान दिया, बल्कि समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है। अजय ने रायपुर में  समय समय पर आयोजित रक्तदान शिविरों एवं आपातकालीन परिस्थितियों में स्वेच्छा से रक्त एवं प्लाज़्मा दान किया। विशेषकर कोरोना काल में भी प्लाज़्मा डोनेशन के माध्यम से कई गंभीर मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज 100 रक्तदान के अवसर पर चिकित्सकों एवं सामाजिक संगठनों ने रक्तदाता अजय बरलोटा के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है, और एक यूनिट रक्त किसी के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकती है। अजय ने युवाओं से आगे आकर नियमित रक्तदान करने की अपील की। रक्तदाता अजय ने कहा कि जब तक शरीर स्वस्थ है, तब तक वह इस सेवा कार्य को निरंतर जारी रखेंगे और अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे। आज 100 बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा दान कर अजय से रायपुर शहरवासियों के साथ साथ जैन समाज  को भी गौरवानवित महसूस किए। एवं अजय बारलोटा के उज्ज्वल भविष्य की कमान की।

लेमनग्रास: छोटे किसानों के लिए आमदनी का नया जरिया

रायपुर. लेमनग्रास की खेती से बदल रही छोटे किसानों की किस्मत लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, क्योंकि इसमें लागत कम, मुनाफा ज़्यादा है और यह बंजर ज़मीन पर भी होती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। यह फसल कीटों और जंगली जानवरों से सुरक्षित रहती है, एक बार लगाने पर कई सालों तक पैदावार देती है l इससे निकलने वाले तेल की बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है, जिसका उपयोग साबुन, परफ्यूम, और हर्बल उत्पादों में होता है, जिससे किसानों की किस्मत बदल रही है।        छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड गौरेला- पेण्ड्रा-मरवाही जिला अधिकतर वनों से घिरा हुआ क्षेत्र है, जहाँ अधिकांश किसानों के पास कम खेती योग्य भूमि है। कई किसानों के पास तो एक एकड़ जमीन भी नहीं है। ऐसे किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी या बड़े शहरों में पलायन करने को मजबूर थे।      उल्लेखनीय है कि किसानों की इस स्थिति को देखते हुए वन मंत्री  ईटीवी भारत केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष  ईटीवी भारत विकास मरकाम के मार्गदर्शन में बोर्ड के द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी के अंतर्गत लेमनग्रास की खेती को जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया है। किसान लगभग 230 एकड़ में कर रहे हैं लेमनग्रास की खेती            बोर्ड द्वारा क्लस्टर मॉडल के माध्यम से किसानों को समूह में जोड़ा गया। लेमनग्रास की बुवाई से पहले ही किसानों का तेल क्रय करने वाले उद्योगों के साथ अनुबंध कराया गया। इन उद्योगों द्वारा बोरवेल, खेत की जुताई, पौधारोपण, फेंसिंग तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अग्रिम वित्तीय सहायता दी गई। किसान फसल बेचने के बाद इस राशि को चरणबद्ध तरीके से वापस करते हैं साथ ही, बोर्ड द्वारा लेमनग्रास की स्लिप्स निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं और तेल निकालने के लिए आसवन संयंत्र (डिस्टिलेशन यूनिट) भी स्थापित किए गए। भविष्य में हर 50 किसानों पर एक संयंत्र स्थापित करने की योजना है। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के 4 क्लस्टरों खरड़ी, पंडरी, अमारू और हरड़ी के 123 किसान लगभग 230 एकड़ में लेमनग्रास की खेती कर रहे हैं। एक बार लगाए गए पौधों से कई वर्षों तक मिलती है फसल         गांव बहरी–जोरकी के किसान अगहन सिंह के पास केवल 35 डिसमिल (लगभग 1/3 एकड़) भूमि थी। कम जमीन होने के कारण उनकी आय सीमित थी। बोर्ड से प्रेरणा लेकर उन्होंने लेमनग्रास की खेती शुरू करने का फैसला किया। बोर्ड द्वारा उन्हें लेमनग्रास की स्लिप्स निःशुल्क प्रदान की गईं। लेमनग्रास की फसल केवल 4 महीने में तैयार हो जाती है। पहली कटाई में 4 लीटर तेल प्राप्त होता है जिसका बाजार मूल्य  1000 रुपए प्रति लीटर है जिससे कुल आय  4,000 रुपए होगी। इसी तरह दूसरी कटाई (अगले 4 महीने बाद) से 8 लीटर तेल प्राप्त होगा जिससे कुल आय 8,000 रुपये होगी। इस तरह किसान को एक वर्ष में कुल आय 12,000 रुपये और यह आय आने वाले 5 वर्षों तक लगातार मिलती रहेगी, क्योंकि एक बार लगाए गए पौधों से कई वर्षों तक फसल मिलती है। किसान लेमनग्रास की खेती से बन रहे हैं आत्मनिर्भर           अगहन सिंह जैसे कई किसान आज लेमनग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इस मॉडल की खासियत यह है कि किसान शून्य बजट में खेती शुरू कर सकते हैं और उन्हें तत्काल आय मिलनी शुरू हो जाती है। लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए एक वरदान         लेमनग्रास की खेती से किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार के स्थानीय अवसर, पलायन में कमी और छोटे किसानों की आर्थिक मजबूती जैसे सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। गौरेला-पेण्ड्रा- मरवाही में यह कहना बिल्कुल उचित है कि लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए एक वरदान बनकर उभर रही है।

महिला लेखन को बढ़ावा देने परिचर्चा का आयोजन, मण्डप में

रायपुर . लाला जगदलपुरी मण्डप में समकालीन महिला लेखन पर सार्थक परिचर्चा रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन लाला जगदलपुरी मण्डप में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम के प्रथम सत्र में “समकालीन महिला लेखन” विषय पर गहन एवं सार्थक परिचर्चा संपन्न हुई। इस सत्र में सुश्री इंदिरा दांगी, सुश्री श्रद्धा थवाईत, सुश्री जया जादवानी तथा सुश्री सोनाली मिश्र ने सहभागिता करते हुए महिला लेखन की बदलती भूमिका और उसकी सामाजिक प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि समकालीन महिला लेखन अब भावनाओं की अभिव्यक्ति के साथ ही समाज के यथार्थ, संघर्ष, असमानताओं और संवेदनाओं को सशक्त रूप में सामने लाने का माध्यम बन चुका है। आज का स्त्री लेखन आत्मकथात्मक होने के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन को भी प्रतिबिंबित कर रहा है, जो पाठक को सोचने और प्रश्न करने के लिए प्रेरित करता है। परिचर्चा के दौरान महिला सशक्तिकरण, समानता, सामाजिक न्याय और बदलते पारिवारिक व सामाजिक ढांचे जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि महिला लेखन ने साहित्य में नई भाषा, नए अनुभव और नए सरोकार जोड़े हैं, जिससे साहित्य अधिक समावेशी और यथार्थपरक बना है। वक्ताओं ने कहा कि समकालीन महिला लेखन समाज में सकारात्मक बदलाव का सशक्त माध्यम बन रहा है। यह न केवल स्त्री अनुभवों को स्वर देता है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करता है। साथ ही महिला लेखन भारतीय साहित्य को नई दृष्टि, नई संवेदना और नई दिशा प्रदान कर रहा है।

देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की थीम पर कर्तव्य पथ पर सजी छत्तीसगढ़ की झांकी

फुल ड्रेस रिहर्सल में छत्तीसगढ़ की झांकी ने दिखाई जनजातीय संस्कृति की जीवंत झलक रायपुर, गणतंत्र दिवस से पूर्व कर्तव्य पथ पर आयोजित फुल ड्रेस रिहर्सल में छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपनी विशिष्ट और आकर्षक प्रस्तुति से सभी का ध्यान आकर्षित किया। झांकी में जनजातीय समाज की जीवनशैली, पारंपरिक कला, लोकनृत्य, वेशभूषा और ऐतिहासिक विरासत की झलक को प्रदर्शित किया गया है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की थीम पर आधारित है, जिसमें राज्य की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और आधुनिक तकनीक के समन्वय को प्रभावशाली एवं सृजनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

राजेश अग्रवाल ने मोबाइल मेडिकल यूनिट से स्वास्थ्य सेवा को किया सशक्त

रायपुर. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ईटीवी भारत राजेश अग्रवाल ने किया मोबाइल मेडिकल यूनिट का शुभारंभ छत्तीसगढ़ सरकार ने जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार का नारा "जनसेवा में समर्पित छत्तीसगढ़ सरकार, अब स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आपके द्वार" अब साकार हो रहा है।  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ईटीवी भारत राजेश अग्रवाल ने निज निवास लखनपुर सरगुजा से पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट वैन को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया । इस अवसर पर मंत्री ईटीवी भारत राजेश अग्रवाल ने कहा कि  "छत्तीसगढ़ सरकार  दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में रहने वाले भाइयों-बहनों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट्स उन क्षेत्रों तक पहुंचेंगी जहां स्थायी स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। इनके माध्यम से समय पर जांच, निदान और उपचार सुनिश्चित होगा, जिससे ग्रामीणों को अस्पताल जाने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।"उन्होंने आगे बताया कि इन यूनिट्स में विभिन्न सामान्य बीमारियों जैसे बुखार, खांसी, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, एनीमिया आदि की जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही, जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयां वितरित की जाएंगी। मंत्री महोदय ने कहा, "यह योजना सरगुजा जिले के दूरस्थ गांवों के लिए वरदान साबित होगी। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे। सरकार की यह पहल जन-कल्याणकारी योजनाओं की दिशा में एक और मील का पत्थर है।"शुभारंभ समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। मोबाइल मेडिकल यूनिट सरगुजा जिले के विभिन्न ब्लॉकों में घूम-घूमकर सेवाएं प्रदान करेगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो सकेगा।

मेंड्रॉकला स्कूल में सरस्वती साइकिल योजना के तहत छात्राओं को साइकिल मिली

रायपुर.सरगुजा  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  ईटीवी भारत राजेश अग्रवाल ने सरस्वती साइकिल योजना के तहत मेंड्रॉकला विद्यालय में छात्राओं को साइकिल वितरित की पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  ईटीवी भारत राजेश अग्रवाल ने सरगुजा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेंड्राकला में सरस्वती साइकिल योजना के तहत छात्राओं को साइकिलें वितरित की । मंत्री  ईटीवी भारत राजेश अग्रवाल ने  समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि "आज सरस्वती साइकिल योजना के तहत छात्राओं को साइकिल वितरण किया। यह साइकिल उनके लिए सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आगे बढ़ने की प्रेरणा है। सरस्वती साइकिल योजना ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की बेटियों को शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सभी बेटियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।" इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे शिक्षा से वंचित न रहें। सरगुजा जिले के दूरस्थ इलाकों में रहने वाली कई छात्राएं पैदल लंबी दूरी तय करती थीं, लेकिन अब ये साइकिलें  न केवल समय बचाएंगी, बल्कि उनकी सुरक्षा और आत्मविश्वास को भी बढ़ाएंगी।  मंत्री  ईटीवी भारत अग्रवाल ने समारोह में छात्राओं से कहा कि वे इस साइकिल को शिक्षा के साधन के रूप में उपयोग करें और अपने सपनों को साकार करें। उन्होंने ग्रामीण विकास और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से इसकी प्रासंगिकता जोड़ते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार कन्या शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है।स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और अभिभावकों ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि इससे छात्राओं का स्कूल ड्रॉपआउट दर कम होगा और क्षेत्र में साक्षरता स्तर बढ़ेगा।

नवीनतम सीटी एंजियोग्राफी सुविधा से लैस हुआ अम्बेडकर अस्पताल

रायपुर. अम्बेडकर अस्पताल में सीटी एंजियोग्राफी की अत्याधुनिक सुविधा शुरू पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में अब सीटी एंजियोग्राफी की अत्याधुनिक जांच सुविधा शुरू हो गई है। इसके अंतर्गत सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी, ब्रेन (सेरेब्रल), एब्डोमिनल, पेरिफेरल एवं पल्मोनरी एंजियोग्राफी जांच की जा रही है, जो नॉन इंवेसिव (Non-invasive) पद्धति पर आधारित है। विगत सप्ताह 29 मरीजों की विभिन्न बीमारियों में सीटी एंजियो जाँच हुई जिससे समय रहते उन्हें उचित उपचार मिला।  स्वास्थ्य मंत्री  ईटीवी भारत श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री  ईटीवी भारत विष्णुदेव साय की अगुवाई में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। आम नागरिकों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और दूरदराज़ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस सुविधा के प्रारंभ होने से हृदय, मस्तिष्क, पेट, हाथ-पैर एवं फेफड़ों से संबंधित गंभीर रोगों के शीघ्र, सटीक एवं विश्वसनीय निदान में मदद मिल रही है।   उन्होंने बताया कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले मरीजों एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों के लिए सभी जांचें निःशुल्क हैं। वहीं एपीएल श्रेणी के मरीजों के लिए ओपीडी में सीटी स्कैन ₹1000 एवं एमआरआई ₹2000 की दर से उपलब्ध है, जबकि भर्ती एपीएल मरीजों को ये जांच सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं।  रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक पात्रे ने बताया कि विभाग में उपलब्ध आधुनिक सीटी स्कैन मशीन एवं प्रेशर इंजेक्टर की सहायता से सभी जांच सेवाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि सीटी एंजियोग्राफी की प्रक्रिया कम समय में पूरी हो जाती है, मरीज को असुविधा नहीं होती। इसमें पारंपरिक एंजियोग्राफी की तुलना में रिकवरी टाइम भी कम होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी में कैथेटराइजेशन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह पारंपरिक एंजियोग्राफी की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक जांच है। सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी के माध्यम से हृदय की कोरोनरी धमनियों में होने वाले संकुचन एवं ब्लॉकेज का उच्च गुणवत्ता की विस्तृत (Detailed) 3D इमेजिंग के साथ आकलन किया जाता है। वहीं ब्रेन एंजियोग्राफी से मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों जैसे स्ट्रोक, एन्यूरिज्म एवं धमनी-शिरापरक विकृति (एवीएम) की सटीक जांच संभव हो पाती है। इस जांच में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मरीज जांच के बाद सामान्य दिनचर्या में शीघ्र लौट सकता है।  उल्लेखनीय है कि सीटी एंजियोग्राफी एक आधुनिक जांच पद्धति है, जिसमें आयोडीन-आधारित कंट्रास्ट डाई की सहायता से शरीर की रक्त वाहिकाओं की स्पष्ट त्रि-आयामी (3D) तस्वीरें प्राप्त की जाती हैं। पूरी जांच प्रक्रिया सामान्यतः 15 से 20 मिनट में पूर्ण हो जाती है।

गांव में प्रेशर IED विस्फोट, एक ग्रामीण गंभीर रूप से जख्मी

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों द्वारा जंगल में लगाए गए प्रेशर IED की चपेट में आने से एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया. यह घटना उसूर ब्लॉक के इल्मीडी थाना क्षेत्र अंतर्गत लंकापल्ली के जंगलों में गुरुवार दोपहर की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार राजू मोडियाम पिता मुन्नी मोडियाम (उम्र 30 वर्ष) जंगल की ओर लकड़ी लाने गया हुआ था. इसी दौरान उसका पैर जमीन में प्लांट किए गए प्रेशर IED पर पड़ गया, जिससे जोरदार धमाका हुआ. विस्फोट में राजू के दाहिने पैर में गंभीर चोट आई. घटना के बाद साथ गए ग्रामीणों ने तत्काल घायल राजू को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया. फिलहाल जिला अस्पताल में उसका उपचार जारी है. घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और इलाके में सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया गया है. नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लगाए गए IED की चपेट में निर्दोष ग्रामीण आने से क्षेत्र में दहशत का माहौल है.

नवनियुक्त पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से भेंट की

रायपुर. रायपुर के नवनियुक्त प्रथम पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा से की सौजन्य भेंट रायपुर के नवनियुक्त प्रथम पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने आज उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा से नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राजधानी रायपुर की कानून-व्यवस्था, शहरी सुरक्षा की चुनौतियों तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने नागरिक सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन एवं प्रशासनिक समन्वय को प्रभावी बनाने जैसे बिंदुओं पर भी विचार-विमर्श किया।        उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि राजधानी रायपुर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नागरिकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने हेतु राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। नवनियुक्त कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने राजधानी की सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साहित्य उत्सव को बताया समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक

रायपुर . साहित्य आशा, साहस और सामाजिक चेतना जागृत करने का सबसे सशक्त माध्यम : उप सभापति श्री हरिवंश राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश के मुख्य आतिथ्य और मुख्यमंत्री विष्णु श्री देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा तथा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ तथा राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया। उप सभापति श्री हरिवंश ने अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है तथा इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है। रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उप सभापति श्री हरिवंश ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं।  उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है। उपसभापति श्री हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं। आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे। माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया। माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है।  मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी। उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है। मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी। “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियाँ आज भी जनमानस को संबल देती हैं। मुख्यमंत्री ने इमरजेंसी काल के दौरान साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि आज जब बड़ी संख्या में युवा साहित्यप्रेमी इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में साहित्य का वातावरण उजला और सशक्त है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय आयोजन एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को भी नमन किया। उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं। वहीं डॉ. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का संकल्प हमारे उज्ज्वल भविष्य की नींव है। उन्होंने साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया तथा भारत को मानवीय संस्कृति की टकसाल कहा। आयोजन के पश्चात अतिथियों एवं साहित्यकारों ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता करते हुए समकालीन साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।  कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ साहित्यिक संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।