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धमतरी जिला के मोंगरागहन में मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

​रायपुर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ग्राम मोंगरागहन में एक दिवसीय विशाल निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर का सफल आयोजन किया गया। कलेक्टर धमतरी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक के मार्गदर्शन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुजरा द्वारा आयोजित इस शिविर में क्षेत्र के 641 ग्रामीणों ने अपना पंजीयन कराकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से निःशुल्क जांच, परामर्श, उपचार एवं दवाओं का लाभ उठाया। शिविर का भव्य शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष धमतरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत स्वास्थ्य सभापति, जनपद सदस्य, मोंगरागहन और कोडेगांव सरपंच, अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष और गंगरेल महामंत्री  सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।  समारोह को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष धमतरी ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि सेवा संकल्प अभियान का मूल उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं का सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के मेगा शिविरों से लोगों को उनके घर के समीप ही विशेषज्ञ चिकित्सकों का परामर्श मिल जाता है, जिससे गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हो पाता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे आर्थिक या भौगोलिक कारणों से इलाज में देरी न करें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं तथा टीबी जैसी बीमारियों के प्रति सजग रहकर स्वच्छता एवं संतुलित जीवनशैली अपनाएं। शिविर के दौरान विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दीं। सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण के तहत 220 मरीजों का इलाज किया गया। नेत्र जांच में पहुंचे 120 मरीजों में से 51 जरूरतमंदों को तत्काल निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। इसके अलावा दंत रोग के 83, आयुर्वेद चिकित्सा के 81, स्त्री रोग के 76, नाक-कान-गला रोग के 68, हड्डी रोग के 63 और शिशु रोग के 50 मरीजों की गहन जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दी गई। ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर स्थल पर ही पैथोलॉजी जांच की व्यवस्था की गई थी, जिसमें 109 मरीजों की शुगर, 102 की हीमोग्लोबिन, 100 की सिकलिंग, 15 की मलेरिया, 10 की ब्लड ग्रुप तथा 10 मरीजों की वीडीआरएल जांच की गई। सिकलिंग जांच के दौरान दो मरीज पॉजिटिव पाए गए, जिन्हें अग्रिम इलाज और देखभाल के लिए मार्गदर्शन दिया गया। इसके साथ ही 315 मरीजों के रक्तचाप (बीपी) की जांच कर उन्हें सेहतमंद जीवनशैली अपनाने के उपाय बताए गए। उत्कृष्ट कार्यों और टीबी मुक्त पंचायतों का सम्मान कार्यक्रम में टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायत मोंगरागहन एवं अरौद डूबान के सरपंचों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतीक प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली छह मितानिनों को प्रशस्ति पत्र सौंपे गए, वहीं दो टीबी मरीजों को पोषण आहार किट (फूड बास्केट) और पांच ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम का सराहनीय योगदान इस आयोजन को सफल बनाने में हड्डी रोग विशेषज्ञ, खंड चिकित्सा अधिकारी, खंड कार्यक्रम प्रबंधक, खंड प्रशिक्षण अधिकारी तथा ग्रामीण चिकित्सा सहायक सहित पूरे स्वास्थ्य अमले का सराहनीय एवं महत्वपूर्ण योगदान रहा।  

मुख्यमंत्री साय ने ‘शौर्यांजलि : बस्तर के नायकों को समर्पित’ कार्यक्रम में अमर शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर की धरती पर शांति की स्थापना और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले हमारे वीर जवानों का शौर्य, त्याग और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। हमारे जवानों ने केवल नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष नहीं किया, बल्कि अपने रक्त और बलिदान से बस्तर में शांति, सुरक्षा और खुशहाली के नए युग की नींव रखी है। आज बस्तर में शांति और विश्वास की जो नई सुबह दिखाई दे रही है, उसके पीछे हमारे सुरक्षा बलों का अदम्य साहस और अमर शहीदों का सर्वोच्च बलिदान है। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर में द हिन्दू फाउंडेशन, नागपुर द्वारा आयोजित ‘शौर्यांजलि : बस्तर के नायकों को समर्पित’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बस्तर में शांति और सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले 50 अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके परिजनों का सम्मान किया। मुख्यमंत्री  साय ने शहीद परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी अपने को खोने की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जब एक जवान देश और समाज की रक्षा करते हुए शहीद होता है तो एक मां अपना बेटा, पत्नी अपना जीवनसाथी और बच्चे अपने पिता का साया खो देते हैं। इस अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन पूरा छत्तीसगढ़ अपने वीर सपूतों और उनके परिवारों के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा। उन्होंने शहीद परिवारों से कहा कि आपके अपने केवल आपके परिवार के सदस्य नहीं थे, वे पूरे छत्तीसगढ़ और राष्ट्र के गौरव हैं। उन्होंने अपने जीवन से साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां गर्व और सम्मान के साथ याद करेंगी। शहीद परिवारों के हर सुख-दुख में साथ खड़ी है सरकार मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शहीद परिवारों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। मातृभूमि और समाज की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले जवानों के परिवारों की चिंता करना सरकार का दायित्व है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ शहीद परिवारों के सुख-दुख में सहभागी है और भविष्य में भी हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवार हमारे लिए केवल सहायता के पात्र परिवार नहीं, बल्कि हमारे अपने परिवार हैं। उनका सम्मान करना और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बेहतर समन्वय के साथ अभियान चलाया है। केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 के लक्ष्य को लेकर सुरक्षा बलों ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया। उन्होंने कहा कि चार दशकों से बस्तर में गहरी जड़ें जमा चुके नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष आसान नहीं था। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हमारे जवानों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास, सुरक्षा बलों की रणनीति और जवानों के अदम्य पराक्रम से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक सफलता मिली। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में बस्तर में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस परिवर्तन के वास्तविक नायक हमारे सुरक्षा बलों के जवान हैं, जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के संकल्प से कभी समझौता नहीं किया। चार दशकों तक बस्तर ने झेला हिंसा का दंश मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं, अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य और सरल-सहज जनजीवन के लिए पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। दुर्भाग्य से चार दशकों तक इस सुंदर अंचल को नक्सली हिंसा का दंश झेलना पड़ा। हजारों परिवार हिंसा से प्रभावित हुए। अनेक बच्चों का बचपन भय और असुरक्षा के बीच गुजरा और दूरस्थ अंचलों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस कठिन दौर में हमारे सुरक्षा बलों के जवान बस्तरवासियों की सुरक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़े रहे। अपने परिवारों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर उन्होंने जंगलों और दुर्गम इलाकों में हर चुनौती का सामना किया। अनेक वीर जवान कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए, लेकिन उनका बलिदान उनके साथियों के संकल्प को और मजबूत करता गया। मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सहित नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में शामिल सभी सुरक्षा बलों के जवानों के शौर्य और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनके साहस और पराक्रम पर पूरे छत्तीसगढ़ को गर्व है। अब शांति, विश्वास और विकास की नई पहचान गढ़ रहा बस्तर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान से स्थापित हो रही शांति के साथ अब बस्तर में विकास और खुशहाली के नए द्वार खुल रहे हैं। जिन क्षेत्रों में कभी भय और हिंसा का वातावरण था, वहां आज सड़कें बन रही हैं, बिजली पहुंच रही है, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित हो रही हैं तथा शासन की योजनाएं अंतिम छोर के गांवों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ और लंबे समय तक विकास से वंचित रहे गांवों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि बस्तर का कोई भी गांव और कोई भी परिवार विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं और युवाओं को खेल, कौशल विकास तथा रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से गांव-गांव की खेल प्रतिभाएं सामने आ … Read more

पिता की मौत के दशकों बाद भी बेटी का संपत्ति पर अधिकार, भाई की अपील हाईकोर्ट ने की खारिज

बिलासपुर  पिता की मृत्यु वर्ष 1980 में होने के आधार पर बेटी को पैतृक संयुक्त संपत्ति में हिस्से से वंचित नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार कानून में 2005 के संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए भाई की दूसरी अपील खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने बहन को जमीन के आधे हिस्से का बंटवारा और अलग कब्जा देने के निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा। बेमेतरा की 7.120 हेक्टेयर जमीन का है मामला मामला बेमेतरा जिले के धंगांव गांव की 7.120 हेक्टेयर कृषि भूमि से जुड़ा है। जमीन पिता नानकू साहू के नाम दर्ज थी। उनकी मृत्यु 15 सितंबर 1980 को हो गई थी। इसके बाद बेटे डुलार साहू ने जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। बेटी दुलारा बाई ने इस नामांतरण को चुनौती देते हुए वर्ष 2007 में जमीन में अपना हिस्सा मांगा। भाई ने हिस्सा देने से इनकार किया तो उसने बंटवारे और अलग कब्जे के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया। निचली अदालतों ने बहन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आधे हिस्से का बंटवारा और अलग कब्जा देने का आदेश दिया था, जिसे भाई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। गहने देना अधिकार छोड़ने का प्रमाण नहीं भाई की ओर से दलील दी गई कि बहन को माता-पिता की मृत्यु के बाद सोने-चांदी के गहने दिए गए थे, इसलिए उसने जमीन पर अपना अधिकार छोड़ दिया था। यह भी कहा गया कि लंबे समय से जमीन पर खेती करने के कारण उसका प्रतिकूल कब्जा हो गया है और संपत्ति का बंटवारा पहले ही हो चुका है। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल गहने या दूसरी चल संपत्ति दिए जाने के दावे से यह नहीं माना जा सकता कि बेटी ने अचल संपत्ति में अपना अधिकार छोड़ दिया। इसके लिए संबंधित व्यवस्था, पक्षकारों की मंशा और अधिकार समाप्त करने के कानूनी आधार का प्रमाण जरूरी है। इसी तरह, केवल 12 वर्ष से अधिक समय तक खेती करने से प्रतिकूल कब्जा साबित नहीं होता। संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में एक सह-हिस्सेदार का कब्जा सामान्यतः सभी की ओर से माना जाता है, जब तक दूसरे के अधिकार को स्पष्ट रूप से समाप्त करने का प्रमाण न हो। सुप्रीम कोर्ट के विनीता शर्मा फैसले का हवाला अपील में भाई ने तर्क दिया कि पिता की मृत्यु संशोधित कानून लागू होने से पहले हो गई थी, इसलिए बहन को 2005 के संशोधन का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बहन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा फैसले का हवाला दिया गया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संशोधित धारा 6 के तहत बेटी को बेटे के समान सहदायिकी अधिकार जन्म से मिलता है। इसके लिए यह जरूरी नहीं कि पिता 9 सितंबर 2005 को जीवित रहे हों। हालांकि, 20 दिसंबर 2004 से पहले हुए बताए जाने वाले बंटवारे को कानून में निर्धारित कसौटियों पर परखना होगा। केवल मौखिक बंटवारे का दावा पर्याप्त नहीं है; इसके समर्थन में ठोस प्रमाण जरूरी हैं। अदालत ने माना कि निचली अदालतों के समवर्ती निष्कर्षों में हस्तक्षेप का आधार नहीं है। दूसरी अपील खारिज कर दी गई।

पिता IPS और मां शिक्षिका, बेटी ने दूसरे प्रयास में पास की UPSC; जानें IPS पारुल माथुर की कहानी

रायपुर  यौन शोषण केस में घिरे छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी मामले की जांच अब IPS पारुल माथुर करेंगी। पीड़िता की आपत्ति के बाद IPS प्रशांत अग्रवाल की जगह महिला IPS पारुल माथुर को पक्ष रखने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, ADG दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है। प्रारंभिक जांच में रतनलाल डांगी पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। आइए जानते हैं IPS पारुल माथुर कौन हैं। कौन हैं IPS पारुल माथुर पारुल माथुर छत्तीसगढ़ कैडर की 2008 बैच की आईपीएस अधिकारी है। वह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता राजीव माथुर भी 1974 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। पिता को पुलिस में देखकर ही पारुल माथुर ने IPS अधिकारी बनने का फैसला किया था। राजीव माथुर की तीन बेटियां हैं। उसमें से पारुल माथुर दूसरे नंबर की हैं। पारुल माथुर पहली लोकल छत्तीसगढ़िया आईपीएस हैं। माथुर छत्तीसगढ़ प्रदेश से यूपीएससी क्रैक करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। उनका जन्म 15 मार्च 1982 को दिल्ली में हुआ है। उनके पिता राजीव माथुर आईपीएस अफसर रहें है और डीजी रैंक से सेवानिवृत हुए हैं। उनकी माता रेखा माथुर शिक्षिका थीं। पारुल माथुर की बड़ी बहन पायल माथुर विदेश में रहती हैं। वह फाइनेंस सेक्टर में काम करती हैं। जबकि छोटी बहन बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में डॉक्टर हैं। रायपुर में की 12वीं तक की पढ़ाई छत्तीसगढ़ के गठन से पहले उनका परिवार रायपुर आ गया था। उन्होंने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई रायपुर में की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पारुल माथुर ने बीए किया। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद पारुल माथुर ने यूजीसी– नेट,जे आरएफ की परीक्षा भी क्वालीफाई की। एमफिल करने के दौरान दूसरे प्रयास में पारुल माथुर का यूपीएससी में सलेक्शन हो गया। कई जिलों की एसपी रहीं पारुल माथुर ने 1 सितंबर 2008 को ज्वाइन किया। बतौर एसपी उन्होंने पहली बार बेमेतरा जिले की कमान संभाली। इसके अलावा वह रेलवे में भी एसपी रहीं। इस दौरान उन्होंने कई कार्यक्रम चलाए। उनकी गिनती सख्त IPS अधिकारी के तौर पर होती है। वह कई जिलों की एसपी रही हैं। जांच अधिकारी बदलने की मांग की थी दरअसल, रतनलाल डांगी मामले में पीड़िता SI की पत्नी ने प्राथमिक जांच में पक्षपात का आरोप लगाया था। पीड़िता ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि जांच अधिकारी रतन लाल डांगी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। मामले में पीड़िता ने किसी महिला IAS अधिकारी से जांच कराने की मांग की थी। पीड़िता की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन के गृह सचिव और DGP से जवाब मांगा था।  

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्राम लोहझरी में ग्रामीणों के बीच बैठकर किया सीधा संवाद

रायपुर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा आज कबीरधाम जिले के ग्राम लोहझरी पहुंचे, जहां उन्होंने अपने चिर-परिचित सहज अंदाज में ग्रामीणों के बीच जमीन में बैठकर उनकी मांग, समस्याएं सुनीं और गांव की जरूरतों पर चर्चा की। महामाया मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में ही ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव से जुड़ी मांगें रखीं, जिन पर उपमुख्यमंत्री ने त्वरित पहल करते हुए विभिन्न विकास कार्यों के लिए कुल 20 लाख 20 हजार रुपए की घोषणा की। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने ग्राम लोहझरी में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए चार सीसी रोड निर्माण हेतु 10 लाख 40 हजार रुपए की घोषणा की। इसके साथ ही दुर्गा मंदिर में रंगमंच निर्माण के लिए 2 लाख 60 हजार रुपए, हनुमान मंदिर के पास रंगमंच निर्माण के लिए 2 लाख 60 हजार रुपए तथा महामाया मंदिर में दो मंचों के निर्माण के लिए 2 लाख 60 हजार रुपए देने की घोषणा की। इस तरह गांव में विभिन्न विकास कार्यों के लिए कुल 20 लाख 20 हजार रुपए की सौगात दी गई। इन कार्यों से आवागमन की सुविधा बेहतर होने के साथ धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के लिए भी सुविधाएं विकसित होंगी। विकास कार्यों की गुणवत्ता की हर महीने होगी समीक्षा उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा जरूरी है। उन्होंने जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य, सरपंच, ठेकेदार और अन्य जनप्रतिनिधियों को हर महीने एक साथ बैठकर कार्यों की प्रगति पर चर्चा करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों की भागीदारी और निगरानी से निर्माण कार्यों को टिकाऊ बनाया जा सकता है। कवर्धा क्षेत्र में एक हजार करोड़ रुपए से अधिक के कार्य प्रगतिरत उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बताया कि कवर्धा क्षेत्र में एक हजार करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्य चल रहे हैं। इनमें भोरमदेव कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और रायपुर-बिलासपुर मार्ग का चौड़ीकरण जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इनकी प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी के लिए गठित टीमें हर महीने के पहले सप्ताह में मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करती हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य जल्द पूरा होने की उम्मीद भी जताई। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य  मनीराम साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे, जनपद अध्यक्ष  रामकिंकर वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

लोगों की शिकायत पर एक्शन में डिप्टी CM, सड़क दोबारा बनाने के दिए निर्देश

करीबधाम  ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठ जाना, शिकायत मिलने पर अधिकारियों को फोन लगाकर एक्शन लेना। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के डेप्युटी सीएम विजय शर्मा का अलग अंदाज देखने को मिला। विजय शर्मा बंदौरा और ठकुराइनटोला गांव का दौरा करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी मांगे और समस्याएं सुनीं और गांव के विकास से जुड़ी मांगों पर गंभीरता से चर्चा की। वहीं, बंदौरा में सड़क की खराब स्थिति की शिकायत सामने आने पर उन्होंने संबंधित अधिकारी को फोन कर सड़क उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए। सड़क उखाड़कर फिर से बनाओ ग्रामीणों से संवाद के दौरान लोगों ने डेप्युटी सीएम विजय शर्मा को बताया कि सड़क के कारण परेशानी हो रही है। इसके बाद उन्होंने मामले में तत्काल एक्शन लिया। बंदौरा में ग्रामीणों ने सड़क की खराब स्थिति की समस्या उप मुख्यमंत्री के सामने रखी। ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद विजय शर्मा ने संबंधित अधिकारी से फोन पर बात की और खराब सड़क को उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए। विकास कार्यों की मिली सौगात ग्राम बंदौरा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वार्ड क्रमांक 10 में कबीर कुटी निर्माण के लिए 10 लाख रुपये, सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपये और नवधा मंच निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की घोषणा की। इसके अलावा मुक्तिधाम में शेड निर्माण तथा गांव में शेड निर्माण के लिए 18 लाख रुपए देने की घोषणा की। वहीं, ठकुराइनटोला गांव में 7.80 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क, 10 लाख रुपये की लागत से सामाजिक भवन और मुक्तिधाम के लिए 6 लाख रुपये की घोषणा की गई। वहीं, ग्राम नयापारा पंचायत में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। इन कार्यों से ग्रामीणों को सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। गांवों के विकास के लिए लगातार हो रहे कार्य ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के समग्र विकास और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, धार्मिक पर्यटन और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर विभिन्न विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।  

धान खरीदी में लापरवाही पड़ी महंगी, 25 दिन में काम पूरा नहीं किया तो ₹10 प्रति क्विंटल जुर्माना

रायपुर छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और कस्टम मिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने सख्त फैसले लिए हैं। धान की साइकिलिंग और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने नई धान कस्टम मिलिंग नीति 2026-27 जारी की है। इस बार धान की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाएगी। वहीं, राइस मिलर्स पर देरी करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का यह सख्त फैसला बिचौलियों और अवैध गतिविधियों में लगे लोगों को रोकने के लिए लिया गया है। सरकार ने साफ किया है कि सरकारी योजनाओं और समर्थन मूल्य का वास्तविक लाभ केवल प्रदेश के सच्चे अन्नदाताओं तक ही पहुंचे। हर बोरी में क्यूआर कोड नई व्यवस्था के तहत इस बार धान खरीदी में हर एक बोरी पर क्यूआर कोड लगाया जाएगा। इस तकनीकी पहल से धान के बोरे के उत्पादन से लेकर उसके भंडारण और मिलिंग तक की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखी जा सकेगी। इसके साथ ही, धान का परिवहन करने वाले सभी ट्रकों और वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य कर दी गई है, ताकि रास्ते में धान की हेराफेरी या अवैध डायवर्जन नहीं किया जाए। प्रशासनिक अमला और निगरानी टीमें ऑनलाइन माध्यम से इन वाहनों की आवाजाही पर लगातार नजर रखेगीं। राइस मिलर्स के लिए क्या प्रावधान कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया को सुचारू और अनुशासित बनाने के लिए राइस मिलों के लिए भी सख्त प्रावधान तय किए गए हैं। नई नीति के अनुसार अब किसी भी राइस मिल को उसकी कुल क्षमता का केवल 75 प्रतिशत धान ही आवंटित किया जाएगा। इससे मिलों पर अनावश्यक दबाव नहीं रहेगा और वे समय पर चावल की डिलीवरी सरकार को दे सकेंगी। 10 रुपये प्रति क्विंटल का जुर्माना इसके अलावा, मिलर्स को धान प्राप्त होने के बाद निर्धारित 25 कार्य दिवसों के भीतर अपना स्टेक का काम पूरा करना होगा। तय समय सीमा में काम पूरा नहीं करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले मिलर्स पर 10 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता बढ़ेगी सरकार के इन सख्त और डिजिटल कदमों से न केवल धान खरीदी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर सुधार आएगा, बल्कि राइस मिलों की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता बढ़ेगी। इन पहलों के जरिए बिचौलियों और धान की अवैध साइकिलिंग पर पूरी तरह लगाम कसेगी, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर नकेल कसी जा सकेगी और किसानों का अनाज सुरक्षित रहेगा।

शादी की रस्मों पर विवाद से विवाह शून्य नहीं होता: हाईकोर्ट ने पति की याचिका ठुकराई

बिलासपुर  फेसबुक पर दोस्ती के बाद मंदिर में शादी करने वाले पति ने सात फेरे नहीं होने का हवाला देकर शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी है।जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की बेंच ने कहा कि सिर्फ शादी की रस्में पूरी नहीं होने से विवाह को अमान्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 में शादी को अमान्य घोषित करने के कुछ तय आधार हैं। केवल रस्मों को लेकर विवाद होने पर शादी को शून्य घोषित नहीं किया जा सकता। मामला जांजगीर-चांपा जिले के राहौद के युवक-युवती से जुड़ा है, जिन्होंने 3 फरवरी 2022 को मंदिर में शादी की थी। बाद में पति ने शादी को मानने से इनकार करते हुए दावा किया कि सात फेरे नहीं हुए और दबाव डालकर शादी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। वहीं, पत्नी का कहना था कि शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी और पति भरण-पोषण से बचने के लिए इसे अमान्य घोषित कराना चाहता है। इस मामले में डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया, लेकिन पति की मूल याचिका भी खारिज कर दी। अब जानिए पूरा मामला दरअसल, जांजगीर-चांपा जिले के राहौद के रहने वाले युवक और युवती की पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। फिर उन्होंने शादी करने का फैसला किया। हालांकि, जब युवक युवती के परिवार वालों से मिला, तो उसने कहा कि वह पहले अपने परिवार की सहमति लेगा। धमकी देकर दस्तावेजों में हस्ताक्षर कराने का आरोप इस दौरान दोनों ने 3 फरवरी 2022 को मंदिर में शादी कर ली और शादी से जुड़े दस्तावेज भी बनवा लिए। लेकिन कुछ समय बाद दोनों के बीच मनमुटाव होने लगा। इसके बाद युवक ने शादी को मानने से इनकार कर दिया। युवक का आरोप था कि युवती ने उसे अपने घर बुलाया और शादी करने के लिए दबाव बनाया। उसने यह भी आरोप लगाया कि आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर शादी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद चिरमिरी के शिव मंदिर में जल्दबाजी में शादी करा दी गई। युवक का कहना था कि शादी के दौरान सात फेरे भी नहीं हुए थे। सात फेरे की रस्में नहीं हुई थीं पूरी युवक का कहना था कि शादी के दौरान हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अग्नि के सामने सात फेरे लेने की रस्म नहीं हुई थी। इसलिए उसने शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की। इसके लिए युवक ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। भरण-पोषण देने से बचने के लिए विवाह शून्य करने की मांग वहीं, युवती ने युवक के आरोपों को गलत बताया। उसका कहना था कि शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद युवक ने उसे पत्नी के रूप में स्वीकार भी किया और दोनों करीब डेढ़ महीने तक साथ रहे। युवती ने आरोप लगाया कि युवक भरण-पोषण देने से बचने के लिए शादी को अमान्य घोषित कराने की कोशिश कर रहा है। फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दी थी अर्जी फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और सबूत देखने के बाद युवक की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि सिर्फ सात फेरे नहीं होने से शादी को अमान्य घोषित नहीं किया जा सकता। इसके बाद युवक ने हाईकोर्ट में अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5, 7 और 11 पर विचार किया। कोर्ट ने बताया कि धारा 7 के तहत हिंदू विवाह संबंधित लोगों के रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार होता है। अगर उन रीति-रिवाजों में सात फेरे या अग्नि के सामने सात कदम लेने की रस्म शामिल है, तो सातवां कदम लेने के बाद ही विवाह पूरा माना जाता है। फैमिली कोर्ट ने नियम की अनदेखी की हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने मामले के कानूनी पहलुओं पर ध्यान देने के बजाय शादी की रस्मों और उसकी वैधता पर फैसला दिया था। जबकि, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत यह देखना जरूरी था कि शादी में धारा 5 की शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। इस कानूनी गलती के कारण हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। हालांकि, इससे युवक को शादी को अमान्य घोषित कराने में कोई राहत नहीं मिली और उसकी याचिका खारिज कर दी गई।

सारंगपुर कला में 47.85 लाख, कारेसरा में 59.63 लाख और मड़मड़ा में 48.19 लाख रुपए से बनेगा गौरव पथ

रायपुर नवरात्रि के पावन अवसर पर उप मुख्यमंत्री कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के ग्राम सारंगपुर कला, कारेसरा और मड़मड़ा में कुल 1 करोड़ 55 लाख 67 हजार रुपए की लागत से गौरव पथ निर्माण का भूमिपूजन कर ग्रामीणों को विकास की सौगात दी। इसमें ग्राम सारंगपुर कला में 47.85 लाख रुपए, कारेसरा में 59.63 लाख रुपए और मड़मड़ा में 48.19 लाख रुपए की लागत से गौरव पथ का निर्माण किया जाएगा। इन निर्माण कार्यों से तीनों गांवों में सड़क सुविधा बेहतर होगी और ग्रामीणों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने ग्राम सारंगपुर कला में 5.20 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा भी की। गुणवत्ता से समझौता नहीं, टिकाऊ सड़क निर्माण पर जोर उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने अधिकारियों को गौरव पथ निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और टिकाऊपन का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़कें ऐसी बननी चाहिए, जो लंबे समय तक चलें और ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा दें। निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ग्राम बंदौरा की सड़क का उदाहरण देते हुए बताया कि सड़क की खराब स्थिति की शिकायत मिलने पर उन्होंने तत्काल उसे उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए थे। अगले ही दिन सड़क उखाड़ने की कार्रवाई शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि गांव की सड़कों का उपयोग ग्रामीण ही करते हैं, इसलिए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने और किसी भी कमी की जानकारी देने में स्थानीय लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य  मनीराम साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे, जनपद अध्यक्ष   रामकिंकर वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर सुनीं समस्याएं कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने अपने सहज अंदाज में ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनसे सीधा संवाद किया। उन्होंने लोगों की समस्याएं और मांगें सुनीं तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके निराकरण के लिए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने ग्राम सारंगपुर कला में 5.20 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों को सुनने और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने से जनसमस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 12 लाख से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही पात्र परिवारों को आवास का लाभ दिलाने के लिए सर्वे सूची के अनुसार आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी। बस्तर में विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया गया, जिसमें सफलता मिली है। बस्तर में पेड़ों की कटाई और बड़ी खनन परियोजनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि इन विषयों पर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखें। साथ ही उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

तकनीक से सुगम होगा न्याय, विधि से सुनिश्चित होगी निष्पक्षता; दुर्ग कोर्ट में विधिक संगोष्ठी आयोजित

रायपुर : तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित रायपुर  न्याय की राह में दूरियाँ कम हो रही हैं और तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को नए आयाम दे रही है। अब ऑडियो-वीडियो माध्यमों से साक्ष्य दर्ज करने से लेकर डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को समझने तक, न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में तकनीक का उपयोग केवल सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि विधिसम्मत, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना भी आवश्यक है।        इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में 16 अक्टूबर को “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विधिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में न्यायिक कार्यवाही के आधुनिक स्वरूप, साक्ष्य की प्रक्रिया और तकनीकी साधनों के विधिसम्मत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के साथ ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने आयोजन को व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक स्वरूप प्रदान किया। ’न्यायालय की सीमाओं से परे साक्ष्य, लेकिन विधि के दायरे में’      प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर तथा प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, दुर्ग श्रीमती सुमन एक्का की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित संगोष्ठी में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग कु. दीपांशी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब विधिक प्रावधानों का पालन करते हुए साक्ष्य की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। ’ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों की प्रदर्शनी : तकनीक को समझने का व्यावहारिक माध्यम’       संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आयोजित ई-साक्ष्य की प्रक्रिया एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी का उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रक्रिया, उनके महत्व और न्यायिक कार्यवाही में उनकी प्रासंगिकता के प्रति समझ विकसित करना था। इस पहल ने संगोष्ठी की विषयवस्तु को व्यावहारिक आयाम प्रदान किया। जहाँ संगोष्ठी में नियमों और प्रक्रियाओं की विधिक व्याख्या की गई, वहीं प्रदर्शनी के माध्यम से ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित जानकारी को एक अलग और सहज स्वरूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार न्यायिक तकनीक से जुड़े विषयों को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए, उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी और जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया। ’विधिक जागरूकता में नवाचार: रंगोली ने भी बढ़ाई आयोजन की गरिमा’      कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आकर्षक रंगोली का निर्माण कराया गया। रंगोली ने आयोजन को रचनात्मक स्वरूप प्रदान करने के साथ उसकी शोभा भी बढ़ाई। विधिक संगोष्ठी, डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी और कलात्मक प्रस्तुति का यह समन्वय दर्शाता है कि विधिक जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक, दोनों प्रकार के माध्यम उपयोगी हो सकते हैं। ’न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक और संस्थागत समन्वय पर जोर’      कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण के अतिरिक्त उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, सचिव श्री रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय और साझा समझ के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन पक्ष तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रावधानों और ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था।