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जशपुर में 74,000 परिवारों को मिला पक्का घर, PM आवास योजना से आई खुशहाली

जशपुर  छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाओं का लाभ अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना से दूरस्थ अंचलों के लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है और हितग्राही अपने खुद के मकान में सुकून से जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जिला पंचायत विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जशपुर जिले में 74 हजार 346 मकान पूर्ण हो चुके हैं। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम खटंगा के एक साधारण परिवार की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जहां शासन की तीन योजनाओं ने एक साथ उनकी ज़िंदगी को नई दिशा दी है।  74 हजार से अधिक आवास बन कर तैयार सुरेशराम की पत्नी सुमित्रा बाई बताती हैं पहले हम कच्चे घर में रहते थे। बरसात हो या गर्मी, हमेशा डर बना रहता था। पानी टपकता था, दीवारें गिरने का डर और रात-बिरात सांप, बिच्छू का डर अलग से। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर अब हमारे लिए एक नई दुनिया जैसा है। अब न डर है, न परेशानी3 घर भी साफ-सुथरा है, और बच्चों को पढ़ने-लिखने का भी अच्छा माहौल मिल गया है।  उनकी बेटी कुमारी संगीता बताती है जब कच्चा घर था, तब हम पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाते थे। बरसात के दिन बहुत दिक्कत होती थी। अब जब पक्का घर मिला है, तो मन लगता है। हम अब बहुत खुश हैं। उन्होंने आगे बताया कि मुझे मुख्यमंत्री महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 मिलते हैं। उसी से हम तेल, नमक, साबुन जैसे जरूरी सामान खरीद लेते हैं। कभी बेटी को स्कूल के लिए कॉपी-किताब भी लेना हो, तो उसी से काम चल जाता है।

नक्सलियों पर करारा प्रहार: नारायणपुर में सुरक्षाबलों ने किया बड़ा ऑपरेशन, हथियारों का जखीरा जब्त

नारायणपुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में जवानों को बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार को सुरक्षाबल के जवानों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में जवानों ने 6 नक्सलियों को मार गिराया है। अभी इलाके में सर्चिंग अभियान जारी है। माना जा रहा है कि इस एनकाउंटर में नक्सलियों के कई टॉप लीडर के ढेर होने की संभावना है। सुरक्षाबल के जवान सर्चिंग अभियान के लिए निकले थे इसी दौरान नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। मुठभेड़ में छह नक्सलियों को मार जाने की पुष्टि पुलिस अधिकारियों ने की है। एनकाउंटर के बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में छह नक्सलियों को मार गिराया। हालांकि अभी मारे गए नक्सलियों की पहचान नहीं है। नक्सलियों के शव के साथ भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार भी बरामद किया गया है। क्या कहा अधिकारी ने बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में माओवादियों के मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों की संयुक्त टीम को रवाना किया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान शुक्रवार दोपहर माआवोदियों ने सुरक्षाबलों की टीम पर हमला किया। जिसके जवाब में जवानों ने भी फायरिंग की। अभी मिशन जारी है उन्होंने बताया कि माओवादियों और जवानों के बीच रुक-रुक कर मुठभेड़ चल रही है। अब तक तलाशी अभियान के दौरान मुठभेड़ स्थल से छह नक्सलियों के शव, एके-47 और एसएलआर राइफल, कई अन्य हथियार, विस्फोटक सामग्री तथा दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गई हैं। पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि अभियान अभी जारी है, इसलिए इसमें शामिल जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है। मिशन पूरा होने के बाद देंगे जानकारी उन्होंने बताया कि अभियान पूरा होने के बाद इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मिशन में शामिल सभी जवान पूरी तरह से सुरक्षित हैं। बता दें कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में जवानों ने माओवादियों के कई टॉप लीडरों को ढेर किया है जिसके बाद से नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं।

अन्नदाताओं को राहत: डबल इंजन सरकार ने बढ़ाया चावल उपार्जन लक्ष्य, अब 8 लाख मीट्रिक टन अधिक खरीद

रायपुर  प्रदेश के किसानों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय पूल हेतु चावल उपार्जन के लक्ष्य को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। यह निर्णय राज्य के लाखों अन्नदाताओं के परिश्रम और विश्वास को सशक्त करता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय पर  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अन्नदाताओं की समृद्धि के लिए  डबल इंजन सरकार दृढ़संकल्पित है। मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि हमारे अन्नदाताओं के हितों को सर्वोपरि रखने वाली यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय पूल में चावल उपार्जन के लक्ष्य को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन करने की स्वीकृति प्रदान की है। हमारी सरकार के प्रयासों से केंद्र सरकार ने 08 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चावल उपार्जन करने की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ के किसानों की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा। साथ ही प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री साय की घोषणा: धान खरीदी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

रायपुर,  प्रदेश के किसानों के लिए आज एक अत्यंत हर्ष और गर्व का दिन है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अनुमान को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन करने की ऐतिहासिक स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं की मेहनत को नई पहचान और उनकी आर्थिक समृद्धि को नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अभूतपूर्व निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी जी के प्रति आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केंद्र और राज्य सरकार की "डबल इंजन" प्रतिबद्धता का सजीव प्रमाण है, जिसमें किसान कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा सोशल मीडिया 'एक्स' में पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 8 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त धान खरीदने की स्वीकृति, हमारे किसानों के परिश्रम को मान्यता देने वाला कदम है। यह न केवल उनकी आय में वृद्धि करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है और केंद्र सरकार से समन्वय करते हुए उनके लिए हरसंभव सुविधा सुनिश्चित कर रही है। राज्य के धान उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य, समय पर भुगतान और सुगम खरीदी प्रक्रिया के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। धान खरीदी सीमा में यह वृद्धि प्रदेश के किसानों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। यह उनके परिश्रम और उत्पादन क्षमता में केंद्र की आस्था का संकेत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगठित बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है। प्रदेश के अन्नदाताओं की समृद्धि के लिए सरकार लगातार नई योजनाएँ और उपाय लागू कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों के जीवन में खुशहाली और सम्मान लाना ही हमारी सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के अन्नदाता नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री साय की घोषणा: धान खरीदी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

रायपुर,  प्रदेश के किसानों के लिए आज एक अत्यंत हर्ष और गर्व का दिन है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अनुमान को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन करने की ऐतिहासिक स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं की मेहनत को नई पहचान और उनकी आर्थिक समृद्धि को नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अभूतपूर्व निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी जी के प्रति आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केंद्र और राज्य सरकार की "डबल इंजन" प्रतिबद्धता का सजीव प्रमाण है, जिसमें किसान कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा सोशल मीडिया 'एक्स' में पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 8 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त धान खरीदने की स्वीकृति, हमारे किसानों के परिश्रम को मान्यता देने वाला कदम है। यह न केवल उनकी आय में वृद्धि करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है और केंद्र सरकार से समन्वय करते हुए उनके लिए हरसंभव सुविधा सुनिश्चित कर रही है। राज्य के धान उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य, समय पर भुगतान और सुगम खरीदी प्रक्रिया के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। धान खरीदी सीमा में यह वृद्धि प्रदेश के किसानों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। यह उनके परिश्रम और उत्पादन क्षमता में केंद्र की आस्था का संकेत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगठित बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है। प्रदेश के अन्नदाताओं की समृद्धि के लिए सरकार लगातार नई योजनाएँ और उपाय लागू कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों के जीवन में खुशहाली और सम्मान लाना ही हमारी सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के अन्नदाता नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ेंगे।

राजस्व मंत्री का बड़ा ऐलान: 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर रोक, शहरी क्षेत्र बाहर

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक-2025 पारित हो गया है. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधेयक पेश किया, जिसे चर्चा के बाद पारित किया गया. इस विधेयक में वर्तमान भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें 5 डिसमिस से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री की अनुमति थी. विधानसभा में राजस्व मंत्री वर्मा ने विधेयक पर अपनी बात रखते हुए कहा कि “धारा 70 में पूर्व में भाजपा सरकार में 5 डिसमिल के नीचे की जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद धड़ल्ले से 5 डिसमिल से नीचे की जमीन की रजिस्ट्री करवायी गई, जिसके कारण पूरे प्रदेश में अवैध प्लॉटिंग शुरू हो गई. उन्होंने कहा कि इससे जगह-जगह समस्याएं उत्पन्न हो गई.” अभी धारा में जो संशोधन किया जा रहा है, उसके अनुसार 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होगी. मंत्री वर्मा ने स्पष्ट किया कि यह शहरों में लागू नहीं होगा, क्योंकि शहर वैसे भी कृषि भूमि से बाहर हैं. शहर में डायवर्टेड भूमि जो व्यवसायिक एवं आवासीय होता है, उसकी रजिस्ट्री हो जाती है. धारा 107 में जो संशोधन है, वह जियो रिफरेन्सिंग बेस्ड नक्शे तैयार किए जा रहे हैं. इसके आने से सीमांकन व बटांकन के सारे विवाद समाप्त हो जाएंगे. जियो रिफेरेन्सिंग से बने डिजिटल मैप को मिली कानूनी मान्यता उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में जियो रिफरेन्सिंग का काम चल रहा है, लेकिन विधिक मान्यता नहीं थी. इसलिए विधेयक लाया गया है, इस विधेयक के माध्यम से जियो रिफेरेन्सिंग का डिजिटल मैप को मान्यता मिलेगी, उसके हिसाब से काम होगा, भविष्य में नक्शा बंटाकन में कोई गड़बड़ी नहीं होगी. राजस्व मंत्री वर्मा ने विधेयक के धारा 110 की उपधारा 7 में रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया की जानकारी दी और साथ ही साथ ही दान की भूमि का नए प्रावधान बताए. अब रोड, गार्डन, मंदिर के लिए छोड़ी जमीन नहीं बेच पाएंगे बिल्डर इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि जो कॉलोनी डेवलपर बहुमंजिला भवन बनाते हैं और फ्लैट्स बेचते हैं. फ्लैट तो क्रेता के नाम पर होता है, लेकिन जमीन बिल्डर के नाम पर होती है. इसमें भी संशोधन किया गया है. अब फ्लैट मालिकों के साथ 10 हजार वर्गफुट जमीन भी सामानुपातिक रूप से उन क्रेताओं के नाम पर रहेगी. चाहे वह गार्डन हो, मनोरंजन का स्थान हो, भवन हो, उस एरिया में जितनी जमीन रहेगी, वह सभी समानुपातिक रूप से वहां पर बसने वाले क्रेताओं के नाम पर दर्ज होगी. अब तक रोड, गार्डन के लिए छोड़ी हुई जगह पर कॉम्पलेक्स बना देते थे और रोड को बेच देते थे, यह सभी समस्याएं संशोधन में ठीक हो जाएंगी. पट्टा अधिकार को लेकर हितग्राही की वार्षिक आय में वृद्धि राजस्व मंत्री वर्मा ने भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 के अलावा एक और विधेयक छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवासहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया, जिसे चर्चा के बाद पारित कर दिया गया. इस विधेयक के तहत बीएलसी के अंतर्गत नगरीय निकाय क्षेत्र में निवासरत पात्र हितग्राही ईडब्ल्यूएस श्रेणी की वार्षिक अधिकतम आय 3 लाख रुपए निर्धारित की गई है, जबकि छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवास व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार अधिनियम 2023 की कंडिका 2(ख) पात्र व्यक्ति की वार्षिक आय ढाई लाख रूपए से अधिक न हो, का प्रावधान है, इसलिए राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए का संशोधन कर रही है.

छोटे गांव से राष्ट्रीय गौरव तक: छत्तीसगढ़ के गांव से उठकर देश का सबसे तेज धावक बना अनिमेष कुजूर

रायपुर  छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव घुइटानगर से निकले 22 वर्षीय अनिमेष कुजूर आज भारत के सबसे तेज धावक बन चुके हैं. मात्र 10.18 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ पूरी कर उन्होंने गुरिंदरवीर सिंह का रिकॉर्ड तोड़ा और भारतीय एथलेटिक्स में एक नई क्रांति की शुरुआत की. अब वे सिर्फ देश नहीं, बल्कि विश्व पटल पर भारत की पहचान बनाने की राह पर हैं. मोनाको डायमंड लीग में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय स्प्रिंटर बनकर अनिमेष ने इतिहास रच दिया है. यहां उन्होंने 200 मीटर U-23 स्पर्धा में भाग लिया और दुनिया के दिग्गज एथलीट्स के सामने भी आत्मविश्वास से दौड़े. हालांकि वे केवल 0.10 सेकंड से पोडियम से चूक गए, लेकिन उनका प्रदर्शन भारत के लिए गर्व का विषय बना. गांव से लेकर ग्लोबल मंच तक कोविड लॉकडाउन के दौरान जब दुनिया ठहर सी गई थी, तब अनिमेष का करियर दौड़ने लगा. शुरुआत फुटबॉल से हुई, लेकिन गांव के पास आर्मी के जवानों के साथ ट्रैक पर दौड़ते हुए उनकी स्पीड ने लोगों को चौंका दिया. किसी ने उन्हें लोकल रेस में भाग लेने की सलाह दी और वहीं से एथलेटिक्स की दुनिया में उनका प्रवेश हुआ. जब कोच और खिलाड़ी की जिद ने इतिहास रचा अनिमेष के कोच मार्टिन ओवेन्स बताते हैं, "वह बहुत बड़ा लड़का था, और खुद को ट्रेनिंग में लेने की जिद कर रहा था. हम दोनों में आज तक बहस होती है कि किसने किससे गुजारिश की थी!" HPC (हाई परफॉर्मेंस सेंटर) में आने के बाद अनिमेष ने पहले ही टूर्नामेंट में U-23 200 मीटर दौड़ जीत ली. छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव घुइटानगर से निकले अनिमेष अब भारतीय एथलेटिक्स में नया अध्याय लिख रहे हैं. वह पहले ही भारत के सबसे तेज धावक बन चुके हैं. उन्होंने 100 मीटर दौड़ 10.18 सेकेंड में पूरी कर ली और गुरिंदरवीर सिंह का 10.20 सेकेंड वाला रिकॉर्ड तोड़ दिया. अनिमेष कुजूर ने एथलेटिक्स में क्या नया किया है? सिर्फ 22 साल की उम्र में और 6 फीट 2 इंच लंबाई के साथ कुजूर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. जुलाई में उन्होंने पहली बार डायमंड लीग में हिस्सा लिया, जहां उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के उभरते सितारे गॉट गॉट (Gout Gout,) से हुआ, जो पहले से ही एथलेटिक्स की दुनिया में सबका ध्यान खींच रहे हैं. मोनाको डायमंड लीग में कुजूर ने U-23 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया और स्प्रिंट प्रतियोगिता में भारत के पहले प्रतिभागी बने. महान मंच से दबाव महसूस करने की बजाय, उन्होंने खुद को प्रेरित किया और दुनिया के कुछ सबसे बड़े उभरते सितारों के साथ पदक जीतने की लड़ाई लड़ी. मुकाबले से डरने की बजाय अनिमेष  कुजूर ने कड़ी मेहनत की (20.55), लेकिन वह पोडियम से महज दसवें सेकेंड से चूक गए. निमेष दक्षिण अफ्रीका के जैक नईम (20.42 सेकेंड) से पीछे रहे.यह समय बहुत मायने रखता है. भारत को आमतौर पर 100 मीटर या 200 मीटर जैसी विश्व स्तरीय स्प्रिंट रेस में कम ही देखा गया है, लेकिन कुजूर  इस सोच को बदल रहे हैं. छत्तीसगढ़ की पूर्वी सीमा से आने वाले कुजूर लगातार रिकॉर्ड बना रहे हैं और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में ला रहे हैं. कुजूर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाई कर पाएंगे? हालांकि वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए सीधे क्वालीफाई करना (100 मीटर में 10.00 सेकें ड और 200 मीटर में 20.16 सेकेंड) मुश्किल लगता है,लेकिन कुजूर रैंकिंग सिस्टम के जरिए क्वालिफाई करने की काबिलियत रखते हैं. फिर भी वह सीधे क्वालिफाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, जो उनकी अंदर की जज्बे का प्रमाण है. अनिमेष के कोच ओवेन्स ने, जो इंटरव्यू में उनके साथ थे, मुस्कराते हुए कहा, 'अनिमेष को मेडल या रिकॉर्ड की चाह नहीं है, वो तो मेहनत के साथ अपने आप मिल जाते हैं. वह सिर्फ खुद को बेहतर बनाना चाहता है. इसीलिए ग्रां प्री में आना उसके लिए खास था- ये जानने के लिए कि बड़े खिलाड़ी क्या अलग करते हैं, वो कैसे रहते हैं, और वो क्या-क्या त्याग करते हैं. यह सिर्फ दौड़ने या वजन उठाने की बात नहीं है, इसमें आइसक्रीम खाना छोड़ना पड़ता है, शादियों में नहीं जाना पड़ता है और भी बहुत कुछ छोड़ना होता है.' ओवेन्स का मानना है कि डायमंड लीग में आना और नोआ लाइल्स (100 मीटर) तथा लेट्सिले तेबोगो (200 मीटर) जैसे ओलंपिक चैम्पियनों के साथ रहना, इस युवा एथलीट के लिए सही दिशा में उठाया गया एक अहम कदम था. डायमंड लीग में कुजूर का अनुभव कैसा रहा? रिलायंस फाउंडेशन की ओर से रखे गए इस इंटरव्यू में कुजूर ने कहा, 'मैंने लाइल्स और टेबोगो को देखा, उनके साथ तस्वीरें लीं और उनके वॉर्म-अप रूटीन देखे. मैंने अपने प्रशिक्षण में लागू करने के लिए बहुत कुछ सीखा. भीड़ खचाखच भरी थी, जोश चरम पर था…मैं बस दौड़ना चाहता था.' हालांकि कुजूर ने माना कि वह मोनाको में अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थे. उनका समय 20.55 सेकेंड रहा, जो उनके पर्सनल बेस्ट 20.32 सेकेंड से धीमा था. कोच ओवेन्स ने कहा, 'यह दौड़ तेज हवा (-1.9 मीटर/सेकेंड) के बीच हुई, जिससे सभी प्रतियोगियों की गति धीमी हो गई. इसके अलावा, मोनाको इस सीजन में कुजूर की यूरोप में तीसरी दौड़ थी, और थकान ने उन पर भारी असर डाला.' ओलंपिक चैम्पियनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ने से पहले कुजूर पेशेवर एथलेटिक्स की दुनिया से दूर थे. दरअसल, कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान वह गंभीरता से दौड़ भी नहीं रहे थे. शुरुआत में वह एक फुटबॉल खिलाड़ी थे और कभी-कभी अपने गांव के पास सेना के जवानों के साथ दौड़ लिया करते थे.एक ऐसा इलाका जहां न तो कोई ट्रैक था, न कोच, और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को तैयार करने की कोई योजना… यह वो जगह थी, जहां से एक पीढ़ी का सबसे तेज धावक निकल आएगा, ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था. … तो क्या इस सुझाव ने अनिमेष को बड़ा धावक बना डाला? लेकिन जैसा कहा जाता है, हर बड़ी यात्रा एक छोटे से कदम से शुरू होती है. कुजूर के लिए भी वो शुरुआत एक साधारण सुझाव से हुई-'क्यों न तुम एक स्थानीय दौड़ में हिस्सा लो?' जब उन्होंने अपनी पहली दौड़ पूरी की, तो उनके अंदर … Read more

विधानसभा में गरमाया माहौल: चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पर कांग्रेस का जोरदार विरोध

रायपुर  विधानसभा में शुक्रवार को भूपेश बघेल के घर ईडी की दबिश का मामला गूंजा. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ईडी के हिरासत में लिए जाने पर हंगामा मचाया. इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन की दिनभर की कार्यवाही का बहिष्कार किया. नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत ने कहा कि सदन के बाहर ईडी का दबाव है. भूपेश बघेल के यहां ईडी का छापा पड़ा है. आज बच्चे का जन्मदिन है, और उसे उठा लिया गया है. ये सब सरकार के दबाव में हो रहा है. आज के दिनभर की कार्यवाही का बहिष्कार करते हैं. विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने के बाद कांग्रेस विधायकों के साथ नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने अपने कक्ष में आपात बैठक शुरू की. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कांग्रेस के तमाम विधायक मौजूद हैं.

छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र: हसदेव जंगलों की कटाई को लेकर कांग्रेस ने घेरा सरकार को

रायपुर विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन शून्यकाल में नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य कांग्रेस विधायकों ने हसदेव अरण्य में पेड़ कटाई का मुद्दा जोर-शोर से उठाते हुए स्थगन पर चर्चा कराने की मांग की. स्पीकर डॉ. रमन सिंह के विपक्ष के स्थगन को अस्वीकार करने पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर तकरार हुई. हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित की गई. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने हसदेव अरण्य में पेड़ कटाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कोयला खनन के नाम पर जंगल उजाड़ना सही नहीं है. ग्राम सभा की स्वीकृति नहीं ली गई, फिर भी खनन शुरू कर दिया गया. कांग्रेस विधायक दल ने इसका विरोध किया है. हमारे स्थगन पर चर्चा होनी चाहिए. डॉ. महंत ने कहा कि तमनार क्षेत्र में खनन के नाम पर जंगल उजड़े जा रहे हैं. फसलों को रौंदा जा रहा है. गारे-पालमा क्षेत्र में खनन को निरस्त किया जा रहा है. स्थनीय लोग लगातार विरोध कर रहे हैं. एनजीटी ने भी आपत्ति जताई है. कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने तमनार क्षेत्र में फर्जी तरीके से काम हो रहा है. खनन के नाम पर मनामनी और फर्जी तरीके से काम हो रहा है. कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार ने कहा कि खनन के नाम पर तमनार क्षेत्र में अन्याय हो रहा है. पेड़ों की कटाई से जंगल खत्म हो रहा है. भाजपा एक पेड़ माँ के नाम पर पेड़ लगाती है, लेकिन मेरे क्षेत्र में पेड़ों की कटाई निरंतर हो रही है. विरोध करने पर मुझे पुलिसबल ने बर्बरतापूर्ण तरीके से मुझे हिरासत में लिया था. कांग्रेस विधायक लालजीत सिंह राठिया ने कहा कि मेरे क्षेत्र में फर्जी प्रस्ताव लाकर पेड़ों की कटाई की जा रही है. कांग्रेस सरकार में जंगल की कटाई रोकने लिए संकल्प लाया गया था. आज एक पेड़ माँ के नाम पर भाजपा अभियान चला रही है, और पूरे क्षेत्र में जंगल साफ किया जा रहा है. कांग्रेस द्वारिका यादव ने कहा कि तमनार ब्लॉक में जंगल को उजाड़ा जा रहा है. एक उद्योगपति को लाभ पहुँचाने के लिए जंगल खत्म किया जा रहा है. अपराधों को रोकने में पुलिस नाकाम है, लेकिन जंगल कटाई हो सके इसके लिए पुलिस बल तैनात है. कांग्रेस विधायक विक्रम उसेंडी ने कहा कि सरकार की ओर से तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है. कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव ने कि भाजपा के मंत्रियों के निवास- कार्यालयों में हमने बनाया है, हमी संवारेंगे का नारा लेकिन यहां तो जंगल को उजाड़ा जा रहा है. कांग्रेस विधायक अनिला भेंड़िया ने कहा कि जंगल के बहाने आदिवासियों को खत्म किया जा रहा है. मूलनिवासियों को खत्म किया जा रहा है. कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि जंगल की कटाई हो रही लेकिन आदिवासियों की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है. कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने कि आज छत्तीसगढ़ का पर्यावरण खत्म किया जा रहा है. सर्व आदिवासी समाज नाराज है. जल-जंगल की लड़ाई और तेज हो रही है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि तमनार में पेसा कानून का उल्लंघन हो रहा है. विधानसभा में जो संकल्प पारित है उसका उल्लंघन है. एनजीटी के नियमों का उल्लंघन है. वन अधिकार कानून का उल्लंघन है. तमनार में उद्योगपति की मनानानी चल रही है. स्थानीय निवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरा प्रशासन उद्योगपति के साथ खड़ा हुआ है. आज स्थिति ये एक पेड़ माँ के नाम और सारा जंगल बाप के नाम. सरकार नाम की चीज तमनार में नहीं है. यह बहुत ही गम्भीर मामला है. इस विषय पर सभी कार्यों को रोककर चर्चा होनी चाहिए.

भूपेश बघेल पर ईडी की कार्रवाई से छिड़ी सियासत: विजय शर्मा बोले- केंद्रीय एजेंसी अपना काम कर रही है

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद आए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि ईडी केंद्रीय संस्था है. पूर्व में जो भ्रष्टाचार हुआ था, उस पर ईडी काम कर रही है. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा के अंतिम सत्र से पहले मीडिया से चर्चा में ईडी को लेकर भूपेश बघेल के बयान पर कहा कि ED की अपनी जांच है, शराब घोटाला यहां हुआ था, यहां का कॉन्सेप्ट अन्य प्रदेशों में भी पहुंचाया गया था, दिल्ली -झारखंड. हम जानते हैं. ऐसा ही कुछ मामला हुआ होगा, जिससे ईडी आई है. ईडी को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि देश की बड़ी संस्थाओं के बारे में इस तरह की बयानबाजी से देश का तंत्र कमजोर होता है. (भूपेश बघेल) वो दिन याद कर लें जब इलेक्शन कमीशन से इन्होंने क्या-क्या काम कराए थे. वो दिन याद कर लें 1975 का, जब आपातकाल लगा था. वो दिन याद कर लें, जब इलेक्शन कमीशन को कोई जानता नहीं था. आज आप इलेक्शन कमीशन की बात कर रहे हैं. आज संवैधानिक तौर पर इलेक्शन कमीशन काम कर रहा है. विपक्ष के शराब घोटाले को सदन में उठाए जाने पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि विपक्ष कोई भी सवाल उठा ले. विष्णु देव सरकार में विपक्ष के किसी भी तार्किक विषय पर विरोध का स्वागत है. बता दें कि ईडी के छापे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया के सामने बयान देते हुए कहा था कि आज मेरे बेटे का जन्मदिन है. पिछले साल मेरे जन्मदिन पर ईडी भेजा गया था. आज तो विधानसभा में अडानी का मामला उठना है, और अपने मालिक को खुश करने के लिए मोदी और शाह ने ईडी को मेरे घर भेज दिया है.