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नए बिजली मीटरों पर गुस्सा फूटा, पंजाब में आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

लुधियाना भारतीय किसान यूनियन पंजाब प्रधान दिलबाग सिंह गिल द्वारा अपनी यूनियन के नेताओं सहित राहों रोड स्थित गौतम नगर जीवन कॉलोनी और गौंसगढ़ गांव की दर्जनों कॉलोनी में घरों में लगे बिजली के चिप वाले मीटर उतारने के लिए आंदोलन छेड़ दिया गया है जिसकी शुरुआत यूनियन द्वारा बुधवार की सुबह को की जा रही है l मामले संबंधी जानकारी देते हुए प्रधान दिलबाग सिंह गिल ने बताया कि सरकार द्वारा पावर कॉम विभाग का निजीकरण किया जा रहा है जिससे आम जनता महंगाई की चक्की में पिस कर रह जाएगी क्योंकि बिजली आम जनता की मूलभूत सुविधाओं का मुख्य आधार है और निजीकरण होने पर प्राइवेट कंपनियां आम जनता विशेष कर गरीब और जरूरतमंद परिवारों से बिजली के मुंह मांगे दाम वसूलने पर उतार आएंगे जिसके कारण लोगों में हाहाकार मचेगी l जिसे ध्यान में रखते हुए भारतीय किसान मजदूर यूनियन द्वारा निजीकरण के विरोध में बिजली के चिप वाले मीटर उतारने संबंधी कदम उठाया गया है एक सवाल के जवाब में दिलबाग से गिल ने बताया कि बिजली के उतारे गए सभी मीटर यूनियन द्वारा पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन के फिरोजपुर रोड स्थित सेंट्रल जोन कार्यालय में जमा करवा दिया जाएंगे उन्होंने बताया कि बिजली के मीटर उतारे जाने के बाद जब तक पावर कॉम विभाग द्वारा पुराने सिस्टम वाले गरारी या फिर इलेक्ट्रॉनिक वाले मीटर लोगो के घरों में नहीं लगाए जाते जब तक  लोग डायरेक्ट कुंडली डालकर अपने घरों में बिजली जलाने के लिए आजाद है।  उन्होंने दावा किया है कि अगर पावर कॉम द्वारा संबंधित लोगों के खिलाफ खिलाफ जुर्माना या फिर पर्चा दर्ज करवाने संबंधी कार्रवाई की जाती है तो भारतीय किसान यूनियन ऐसे सभी लोगों का केस अदालत में लड़ने और उनके जुर्माने माफ करवाने के लिए वचनबद्ध है l  

प्राइमरी टीचर भर्ती में नया नियम: B.Ed. उम्मीदवारों को करना होगा 6 महीने का ट्रेनिंग कोर्स

लुधियाना स्टेट कॉसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.), पंजाब ने बी. एड. डिग्री के आधार पर नियुक्त प्राइमरी शिक्षकों की पेशेवर योग्यता पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। एस.सी.ई. आर. टी., पंजाब ने समूह जिला शिक्षा अफसरों (ए.शि.) को नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एन. आई. ओ.एस.) द्वारा करवाए जा रहे 6 महीने के' ब्रिज कोर्स' के लिए संबंधित शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा है। यह कोर्स' प्राइमरी टीचर एजुकेशन' में 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स है, जिसे ओपन और डिस्टेंस लर्निंग (ओ.डी.एल.) मोड के माध्यम से पूरा करवाया जाएगा। एस. सी.ई.आर.टी. द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इन निर्देशों की हू-ब-हू पालना सुनिश्चित की जाए। उन्होने शिक्षकोंको हिदायत दी है कि वे अपने अन.आई.एस. के पोर्टल पर अपना पंजीकण समय रहते जरूर करवाए। एन.आई.ओ.एस. ने भी उम्मीदवारों को सलाहदी है कि वे आवेदन करने से पहले योग्यता मानदंडों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उनकी पालना करें। विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि य समय सीमा के भीतर सभी योग्य शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करवाया जाए। रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 25 दिसंबर है।  कौन है इस कोर्स का पात्र? यह ब्रिज कोर्स विशेष रूप से उन प्राइमरी शिक्षकों के लिए अनिवार्य है जो बी.एड. डिग्री के साथ नियुक्त हुए थे। जिनकी नियुक्ति एनसीटीई की दिनांक 28 जून 2018 की नोटिफिकेशन के अनुसार हुई थी।  जो माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 अगस्त 2023 को दिए गए फैसले से पहले सेवा में आ चुके थे।

नवजोत सिद्धू विवाद पर हाईकमान की एंट्री, पूरी रिपोर्ट तलब

चंडीगढ़ अमृतसर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के मामले में अब कांग्रेस हाईकमान की एंट्री हो गई है। हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल से नवजोत कौर सिद्धू के संबंध में रिपोर्ट तलब की है। गौरतलब है कि नवजोत कौर सिद्धू लगातार कांग्रेस नेताओं के खिलाफ खुलेआम बयानबाजी करती नजर आ रही थीं। इसी कारण पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। अब यह पूरा मामला कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि संसद सत्र के बाद पंजाब कांग्रेस को लेकर दिल्ली में हाईकमान की ओर से बैठक बुलाई जा सकती है। यह भी बता दें कि हाल ही में नवजोत कौर सिद्धू ने मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर 500 करोड़ रुपए से जुड़ा बयान दिया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद भी नवजोत कौर सिद्धू का कांग्रेस नेताओं और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के प्रति आक्रामक रुख लगातार जारी है। इसी को देखते हुए अब इस मामले में कांग्रेस हाईकमान ने दखल दिया है। 

200 मीटर ज़ोन में अब पूरा नियंत्रण! पंचायत चुनाव 2025 को लेकर नए आदेश जारी

गुरदासपुर राज्य चुनाव आयोग, पंजाब द्वारा राज्य में जिला परिषद् और पंचायत समितियों के चुनाव 14 दिसंबर, 2025 को करवाने के आदेश जारी किए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट गुरदासपुर आदित्य उप्पल ने चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निर्विघ्न संपन्न कराने तथा अमन-कानून की व्यवस्था बनाए रखने के लिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किए हैं। चुनाव आयोग की हिदायतों के मद्देनजर, यह आशंका जताई गई है कि चुनाव वाले दिन पोलिंग बूथों के 200 मीटर के दायरे के अंदर प्रचार, सेल्युलर फोन/वायरलेस सेट/लाउड स्पीकर, मेगाफोन आदि का प्रयोग, या प्रचार से संबंधित पोस्टर/बैनर लगाने से अमन-शांति भंग हो सकती है। इससे सुरक्षा बलों के काम में बाधा आ सकती है, अमन-कानून की स्थिति बिगड़ सकती है और निजी/सरकारी संपत्ति तथा मानव जीवन को हानि पहुंच सकती है। इसलिए, चुनावों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए तुरंत ज़रूरी उपाय किए गए हैं। जारी आदेशों के अनुसार, चुनाव वाले दिन 14 दिसंबर, 2025 को जिला गुरदासपुर के अंदर बने पोलिंग बूथों के 200 मीटर के दायरे में कई महत्वपूर्ण प्रतिबंध लागू रहेंगे। इन प्रतिबंधों के तहत पोलिंग बूथों या आस-पास की सार्वजनिक/निजी जगह पर किसी भी उम्मीदवार/व्यक्ति/समर्थक द्वारा प्रचार नहीं किया जाएगा। पोलिंग बूथों के नजदीक किसी भी व्यक्ति द्वारा शोर शराबा या हुल्लड़बाज़ी नहीं की जाएगी। पोलिंग बूथों के 200 मीटर के दायरे के अंदर किसी भी व्यक्ति द्वारा लाउड स्पीकर, वायरलेस सेट, कॉर्डलेस/सेल्युलर फोन, मेगाटोन आदि का प्रयोग नहीं किया जाएगा, न ही प्रचार से संबंधित किसी भी किस्म का पोस्टर/बैनर लगाया जाएगा। साथ ही, कोई भी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार पोलिंग बूथ के 200 मीटर के दायरे के अंदर अपना पोलिंग बूथ/टेंट नहीं लगाएगा। चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों द्वारा अधिकृत व्यक्ति के सिवाय, कोई भी व्यक्ति पोलिंग बूथ के 200 मीटर के दायरे के अंदर अपना प्राइवेट वाहन नहीं ले जाएगा। ये आदेश चुनाव ड्यूटी पर तैनात ऑब्ज़र्वर, प्रशासनिक/पुलिस अधिकारी, सुरक्षा कर्मचारी, और पोलिंग/काउंटिंग से संबंधित सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे। 

US की कड़ा रुख अपनाया, पंजाब के युवाओं के सपनों पर लगा ब्रेक?

पंजाब  America जाने की चाह रखने वालों को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, अब अमेरिका या वीजा पानी और भी मुश्किल हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार अमेरिका में H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले हजारों भारतीय आवेदकों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। अमेरिकी दूतावास ने मंगलवार को जारी एक नोटिस में स्पष्ट कर दिया कि जिन आवेदकों की सितंबर और दिसंबर के बीच अपॉइंटमेंट (Appointment) तय थी और जिन्हें पुनर्निर्धारण की सूचना दी गई है, वे पुरानी तारीख पर दूतावास पहुंचकर इंटरव्यू नहीं दे सकेंगे। प्रवेश केवल नई निर्धारित अपॉइंटमेंट पर ही मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर महीने की सभी वीजा अपॉइंटमेंट्स को स्थगित कर मार्च 2026 तक के लिए टाल दिया गया है।  सोशल मीडिया वेरिफिकेशन बना नई मुश्किल कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने H-1B तथा H-4 वीजा आवेदकों के लिए सोशल मीडिया वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। 15 दिसंबर से लागू होने जा रही इस नई प्रक्रिया के तहत सभी आवेदकों को अपना सोशल मीडिया प्रोफाइल “पब्लिक” मोड में रखना होगा। अमेरिकी अधिकारियों को ऑनलाइन व्यवहार की गहन जांच का अधिकार होगा। इस दौरान सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा करने वाले आवेदकों को छांटा जाएगा। इसी वजह से कई इंटरव्यू अचानक रद्द कर मार्च तक के लिए पुनर्निर्धारित कर दिए गए हैं। वहीं कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि, दूतावास ने कुछ अपॉइंटमेंट (Appointment) को रद्द करके मार्च तक पुननिर्धारित कर दिया है। H-1B वीजा प्रोग्राम पर बढ़ी सख्ती अमेरिकी प्रशासन पहले ही H-1B वीज़ा प्रोग्राम पर कड़ी नजर रखे हुए है। इससे पहले सितंबर में नए H-1B वीजा पर $1,00,000 का शुल्क लगाया गया था। जानकारी के अनुसार, सिक्योरिटी चिंताजनक देशों के आवेदकों के ग्रीन कार्ड और नागरिकता प्रक्रियाएं अस्थायी रूप से रोकी गईं। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट का कहना है कि हर वीजा निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होता है, और सोशल मीडिया स्क्रीनिंग इसी सुरक्षा नीति का हिस्सा है। क्या है H-1B वीजा आपको बता दें कि, अमेरिका का H-1B वीज़ा उन अत्यधिक कुशल विदेशी पेशेवरों के लिए बनाया गया है, जो किसी अमेरिकी कंपनी में निश्चित समयावधि के लिए काम करना चाहते हैं। यह वीजा मुख्य रूप से आईटी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर, साइंस और अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों के कर्मचारियों को दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, H-1B वीज़ा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि L वीजा और E वीजा के विपरीत इसमें अमेरिकी कंपनी पर किसी विशेष पात्रता या निवेश से जुड़ी शर्तें लागू नहीं होतीं। यानी कोई भी अमेरिकी नियोक्ता, जो योग्य विदेशी कर्मचारी की जरूरत साबित कर सके, H-1B वीजा स्पॉन्सर कर सकता है। यह वीजा 3 साल के लिए दिया जाता है, जिसे बाद में बढ़ाकर अधिकतम 6 साल तक किया जा सकता है। H-1B धारक अपने पति/पत्नी और बच्चों को भी H-4 वीजा पर अमेरिका ले जा सकते हैं, हालांकि H-4 आश्रितों के लिए काम करने की अनुमति अलग नियमों के तहत मिलती है। हर साल लाखों आवेदन आने के कारण H-1B प्रक्रिया अत्यधिक प्रतिस्पर्धी होती जा रही है। अमेरिकी एजेंसियों द्वारा हाल में लागू किए गए सख्त जाँच मानकों, खासतौर पर सोशल मीडिया वेरिफिकेशन, ने इस वीजा को हासिल करना और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

स्कूलों में विंटर वेकेशन का बिगुल! अब बच्चों-परिवार की होगी जमकर मस्ती

चंडीगढ़ शहर के स्कूलों में इस महीने सर्दियों की छुट्टियां पड़ने जा रही हैं। इसे लेकर लोगों ने पहले से ही छुट्टियों में घूमने-फिरने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। परिवार यात्रा की जगहों पर चर्चा कर रहे हैं और बच्चे अपनी पसंदीदा जगहें चुन रहे हैं। हर घर में छुट्टियों का माहौल बन चुका है। सर्दियों को आमतौर पर यात्रा के लिए सबसे आरामदायक मौसम माना जाता है। इसी अवसर पर IRCTC ने चंडीगढ़ से नए रेल टूर पैकेज पेश किए हैं। IRCTC ने चंडीगढ़ से विशेष रेल टूर पैकेज लॉन्च किए हैं, जिनमें ज्योतिर्लिंग दर्शन से लेकर राजस्थान के मरुस्थल और गुजरात तक घूमने के कई विकल्प शामिल हैं। टिकट, होटल या लोकल ट्रैवल की चिंता नहीं सर्दियों की छुट्टियों के ये टूर पैकेज चंडीगढ़वासियों को अलग-अलग जगहों पर घूमने का मौका देंगे। चाहे कोई धार्मिक यात्रा करना चाहता हो, मरुस्थल का अनुभव लेना चाहता हो या गुजरात के आधुनिक व ऐतिहासिक स्थलों को देखना चाहता हो—हर तरह के यात्रियों के लिए विकल्प मौजूद हैं। ये पैकेज खास तौर पर उन परिवारों के लिए हैं, जो बिना झंझट और पूरी तरह प्लान की हुई यात्रा चाहते हैं। ट्रेन यात्रा से लेकर होटल में ठहराव, स्थानीय आवागमन और रोजाना नाश्ता—सब कुछ इसमें शामिल है। यानी टिकट बुक करने, होटल तलाशने या लोकल ट्रांसपोर्ट की चिंता करने की जरूरत नहीं। छुट्टियों में बस परिवार के साथ घूमिए, आराम कीजिए और यादें संजोइए। इन जगहों की कर सकते हैं यात्रा 1. दो ज्योतिर्लिंग दर्शन – 6 रातें / 7 दिन छुट्टियों में लोग धार्मिक यात्राओं की भी योजना बनाते हैं। इस पैकेज में इंदौर स्थित ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर के दर्शन शामिल हैं। हर शनिवार चंडीगढ़ स्टेशन से ट्रेन रवाना होगी। शुरुआती कीमत: ₹15,515 2. राजस्थान सर्किट: उदयपुर, आबू रोड, जोधपुर, अजमेर – 7 रातें / 8 दिन अगर बच्चों को किले, झीलें और ऐतिहासिक स्थल पसंद हैं, तो यह टूर खास है। इसमें दिलवाड़ा जैन मंदिर, ब्रह्माकुमारी केंद्र, माउंट आबू की खूबसूरत नक्की झील, अरावली पर्वतों में सनसेट पॉइंट, सिटी पैलेस, एकलिंगजी मंदिर, हल्दीघाटी, रणकपुर जैन मंदिर, मेहरानगढ़ किला, उमैद भवन संग्रहालय, पुष्कर मंदिर और दरगाह शरीफ शामिल हैं। ट्रेन हर शुक्रवार रवाना होगी।  शुरुआती कीमत: ₹23,215 3. बीकानेर, जैसलमेर और जयपुर की रंगीन यात्रा – 7 रातें / 8 दिन सर्दियों में राजस्थान की खूबसूरती चरम पर होती है। मरुस्थल, ऊंट सफारी, जैसलमेर किला और जयपुर देखने का सुनहरा मौका। इस पैकेज में पुष्कर, आना सागर झील, ब्रह्मा मंदिर, बीकानेर का ऊंट प्रजनन फार्म, देशनोक मंदिर, जूनागढ़ किला, जैसलमेर के सैम सैंड ड्यून्स, कुलधारा गांव, आर्मी म्यूज़ियम, जोधपुर का मेहरानगढ़ किला, उमैद भवन संग्रहालय, जयपुर का हवा महल, सिटी पैलेस, जंतर-मंतर और नाहरगढ़ किला शामिल हैं। ट्रेन हर शुक्रवार चलेगी। शुरुआती कीमत: ₹21,895 4. राजस्थान और गुजरात टूर: केवड़िया, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, अहमदाबाद, उदयपुर – 7 रातें / 8 दिन यह पैकेज परिवारों में काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसमें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, म्यूज़ियम, ऐतिहासिक स्थल, उदयपुर की झीलें, माउंट आबू, दिलवाड़ा मंदिर, ब्रह्माकुमारी केंद्र, नक्की झील, सनसेट पॉइंट, उदयपुर सिटी पैलेस, फतेह सागर झील, केवड़िया, अहमदाबाद का साबरमती आश्रम, साबरमती रिवरफ्रंट और वडोदरा शामिल हैं। ट्रेन हर शुक्रवार रवाना होगी। शुरुआती कीमत: ₹23,780 पैकेज में मिलेंगी ये खास सुविधाएं थर्ड एसी या स्लीपर में कन्फर्म ट्रेन टिकट पिक-अप और ड्रॉप सहित स्थानीय आवागमन होटल में रात्रि ठहराव रोजाना नाश्ता छुट्टियों में यात्रा करते समय सबसे बड़ी चिंता होटल, टिकट और लोकल ट्रांसपोर्ट की होती है, लेकिन IRCTC के इन पैकेजों में सभी सुविधाएं शामिल हैं, जिससे पारिवारिक यात्रा बेहद आसान हो जाती है। ऐसे करें बुकिंग IRCTC की टूरिज्म वेबसाइट पर जाकर चंडीगढ़ से शुरू होने वाले पैकेज चुनें। जानकारी के लिए WhatsApp: 7888696843 पर संपर्क कर सकते हैं या IRCTC सेक्टर-34ए स्थित कार्यालय में जाकर भी विवरण प्राप्त किया जा सकता है।  

राज्य में सख्ती चरम पर! पंजाब के सभी मुख्य बॉर्डर बंद, भारी पुलिस फोर्स तैनात

जालंधर/चंडीगढ़   पंजाब को सुरक्षित और शांतिपूर्ण राज्य बनाने के मकसद से मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देशों पर पंजाब पुलिस ने मंगलवार को विशेष अभियान ‘ऑपरेशन सील-23’ चलाया। इस अभियान का उद्देश्य पंजाब में प्रवेश या बाहर जाने वाले सभी वाहनों की गहन जांच कर असामाजिक तत्वों, नशा तस्करों और अवैध शराब से जुड़े लोगों पर कड़ी निगरानी रखना है।   पंजाब के डी.जी.पी. पंजाब गौरव यादव के आदेशों पर सभी जिलों में यह एकसमान ऑपरेशन चलाया गया। सभी बॉर्डर जिलों के एस.एस.पी. को रणनीतिक स्थानों पर संयुक्त नाकाबंदी लगाने और अधिकतम पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए गए, ताकि गजेटेड अधिकारियों और एस.एच.ओ. की देखरेख में मजबूत नाके स्थापित किए जा सकें।   जानकारी सांझा करते हुए विशेष डी.जी.पी. (कानून-व्यवस्था) अर्पित शुक्ला ने बताया कि 10 अंतरराज्यीय सीमा जिलों— पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, रूपनगर, एस.ए.एस. नगर, पटियाला, संगरूर, मानसा, होशियारपुर और बठिंडा में 65 एंट्री/एग्जिट प्वाइंट्स पर 600 से अधिक पुलिस कर्मियों की तैनाती के साथ समन्वित और मजबूत नाकाबंदी लगाई गई। उन्होंने कहा कि इस दौरान राज्य में प्रवेश/निर्गमन कर रहे 1182 वाहनों की जांच की गई, जिनमें से 234 का चालान किया गया और 2 वाहनों को जब्त किया गया। इसके अलावा पुलिस ने पांच एफआईआर दर्ज कर तीन व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया।    इसके साथ ही, पंजाब पुलिस ने अपने नशा विरोधी अभियान (कासो) को 283वें दिन भी जारी रखते हुए राज्यभर में 346 स्थानों पर छापेमारी की। इन कार्रवाइयों में 95 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 68 एफ.आई.आर. दर्ज की गईं। इस प्रकार पिछले 283 दिनों में गिरफ्तार कुल नशा तस्करों की संख्या 39,864 हो गई है। विशेष डी.जी.पी. ने बताया कि छापेमारी के दौरान 1.5 किलो हैरोइन, 429 ग्राम अफीम, 6 किलो गांजा, 21 किलो पोपी हस्क और 2.95 लाख रुपए ड्रग मनी बरामद की गई। 70 गजेटेड अधिकारियों की देखरेख में 1000 से अधिक पुलिस कर्मियों वाली 120 से अधिक टीमों ने पूरे राज्य में कार्रवाई करते हुए 340 संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई तीन-स्तरीय रणनीति एन्फोर्समैंट, डी-एडिक्शन और प्रिवैंशन (ई.डी.पी.) के तहत पंजाब पुलिस ‘डि-एडिक्शन’ अभियान को भी मजबूत कर रही है और आज 40 लोगों को नशामुक्ति एवं पुनर्वास उपचार के लिए प्रेरित किया गया।

पंजाब में बूथ लेवल अफसर की बल्ले-बल्ले! चुनावों के दौरान ड्यूटी को लेकर आया ये बड़ा फैसला

पंजाब  पंजाब में बूथ लेवल अफसर (BLO) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंजाब के दफ़्तर की ओर से एक अहम कदम उठाया गया है। आदेश जारी करते हुए बताया गया है कि BLO को जिला परिषद और ब्लॉक समिती की चुनावों में बतौर पोलिंग स्टाफ की ड्यूटी से छूट दे दी गई है। सूत्रों के अनुसार, कई क्षेत्रों में महिला और पुरुष BLO को इस समय वोटर सूची अपडेट, वोटर शिनाख्त कार्य, और अपने क्षेत्र से जुड़े SIR के प्री-रिवीजन व voter mapping जैसे महत्वपूर्ण काम करने पड़ रहे हैं। कई BLO के लगातार आग्रह के बाद यह फैसला लिया गया है। चुनाव दफ़्तर का कहना है कि इससे BLO को अपने नियमित चुनाव कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। इसी के साथ ही सभी डिप्टी कमिश्नरों-कम- जिला चुनाव अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि आने वाले समय में किसी भी BLO की ड्यूटी किसी अतिरिक्त काम के लिए न लगाई जाए। 

पंजाब में ड्रग मनी की पड़ताल हाई कोर्ट की निगरानी में हो—BJP ने CM मान पर डाला दबाव

चंडीगढ़  भ्रष्टाचार को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए पंजाब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से राज्य के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की जांच कराने की मांग की है, साथ ही यह पता लगाने का आग्रह किया कि क्या किसी को भ्रष्ट गतिविधियों से धन प्राप्त हुआ है. पूर्व कांग्रेस विधायक नवजोत कौर सिद्धू के आरोपों के बाद कांग्रेस में मचे घमासान के बीच, सुनील जाखड़ ने भगवंत मान को उनके 16 जून को लिखे पत्र की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने ड्रग मनी ट्रेल की जांच पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पंजाब के कई राजनेताओं की किस्मत बदल गई है, जिसे महज संयोग कहकर खारिज नहीं किया जा सकता.उन्होंने कहा कि कई कि विधायक जो साइकिल से आते थे, अब उनके पास लग्जरी कारें हैं और कई के पास फार्महाउस हैं.इतनी बड़ी मात्रा में पैसा कहां से आया, इसकी जांच जरूरी है. ‘भ्रष्टाचार समाज में नासूर बन गया’ मंगलवार को जाखड़ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया जिसमें कांग्रेस और नवजोत कौर सिद्धू द्वारा लगाए गए आरोपों का ज़िक्र किए बिना लिखा, ‘इस समय भ्रष्टाचार समाज में नासूर बन गया है. अब तो 70 साल तक देश पर राज करने वाली पार्टी के वरिष्ठ नेता भी एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं’. ‘सभी दलों के नेताओं की हो जांच’ जाखड़ ने पोस्ट में कहा, ‘भगवंत मान जी, आपने इस भ्रष्टाचार को कैंसर कहा था. आपने यह भी कहा था कि आपके पास फाइलें हैं, तो आप उन फाइलों को क्यों नहीं खोलते? मैंने आपको पहले भी लिखा था और मैं फिर से मांग करता हूं कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में सभी दलों के नेताओं (जिनमें मैं भी शामिल हूं) की समयबद्ध जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पता चले कि भ्रष्टाचारों से पैसा किसने प्राप्त किया है’. उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है अगर आपकी सरकार ड्रग्स के खिलाफ अपनी लड़ाई में अपनी विश्वसनीयता और दृढ़ संकल्प स्थापित करना चाहती है’. 16 जून को लिखे अपने पत्र में बीजेपी नेता ने मांग की थी कि ‘ड्रग-धन के मामले में ताकतवर और प्रभावशाली लाभार्थियों का पता लगाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की निगरानी में जांच की जाए’. ‘धन का पता लगाना जरूरी’ जाखड़ ने आगे कहा ‘यह उचित होगा कि आप, मुख्यमंत्री के रूप में, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर, उनकी निगरानी में एक विश्वसनीय एजेंसी या यहां तक कि एकएजेंसी जांच द्वारा समयबद्ध जांच स्थापित करने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध करें ताकि ड्रग-धन के जाल में अंतिम लाभार्थियों का पता लगाया जा सके’. उन्होंने कहा कि ड्रग-धन के जाल में धन का पता लगाना जरूरी है, जिसके बिना पंजाब से ड्रग्स को जड़ से उखाड़ने की कवायद न केवल निरर्थक है, बल्कि एक दिखावा भी है. ‘छोटे कारोबारियों को गिरफ्तार करने से कुछ नहीं होगा’ उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हज़ारों नशेड़ियों और छोटे कारोबारियों को गिरफ्तार करने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि बड़ी मछलियों को पकड़ने और अंतिम लाभार्थियों को गिरफ्तार करने के लिए धन का प्रवाह स्थापित करना होगा, चाहे वे विभिन्न दलों के राजनेता हों या अधिकारी. उन्होंने कहा कि पंजाब में ड्रग कार्टेल किसी न किसी तरह के संरक्षण के बिना फल-फूल नहीं सकते. उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं के कारोबार में पैसे का पता लगाना ज़रूरी है, क्योंकि इसके बिना पंजाब से नशीली दवाओं को जड़ से उखाड़ने की कोशिश न केवल निरर्थक है, बल्कि एक दिखावा भी है.  

चुनाव से ठीक पहले SSP वरुण शर्मा ने ली छुट्टी, पटियाला में वायरल ऑडियो क्लिप पर आज अदालत का फैसला

पटियाला जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव से ठीक पहले पटियाला में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। मतदान 14 दिसंबर को होना है और इसी बीच पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) वरुण शर्मा अचानक एक सप्ताह की छुट्टी पर चले गए हैं। यह कदम उस समय उठाया गया है जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में आज वायरल ऑडियो-क्लिप विवाद पर अहम सुनवाई होनी है। पुलिस विभाग के सूत्रों ने पुष्टि की है कि SSP शर्मा मंगलवार शाम को अवकाश पर चले गए। फिलहाल संगरूर SSP सरताज चाहल को पटियाला की पुलिस व्यवस्था का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। हालांकि, यह राज्य चुनाव आयोग पर निर्भर करेगा कि वह पटियाला जिले के चुनाव-सम्बंधित कार्यों की निगरानी के लिए किसी अन्य अधिकारी की आधिकारिक तौर पर नियुक्ति करता है या नहीं। एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने कहा, “SSP वरुण शर्मा छुट्टी पर हैं। इसकी जानकारी चंडीगढ़ मुख्यालय को भी दे दी गई है।” हाईकोर्ट ने दिया था जांच तेज करने का निर्देश छुट्टी का यह निर्णय उस समय आया है जब हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य चुनाव आयोग को वायरल ऑडियो क्लिप की जांच तेज करने का आदेश दिया था। शिरोमणि अकाली दल (SAD) अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पिछले सप्ताह एक ऑडियो क्लिप जारी की थी, जिसमें कथित रूप से SSP शर्मा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोकने के निर्देश देते सुनाई दे रहे हैं। निष्पक्ष चुनाव की मांग, CBI जांच की अपील पूर्व विधायक डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान विपक्षी दलों को व्यवस्थित रूप से रोका गया। याचिका में SSP शर्मा के निलंबन, और सात दिनों के भीतर CBI-निगरानी में FIR दर्ज करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब आरोप पुलिस व्यवस्था के कामकाज से जुड़े हों तो राज्य पुलिस द्वारा ‘आंतरिक जांच’ का कोई अर्थ नहीं है। याचिका में उस कथित वायरल कॉन्फ्रेंस कॉल का भी जिक्र है, जिसे कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। इसमें कथित रूप से कहा गया है कि विपक्षी उम्मीदवारों को घरों और रास्तों में रोका जाए, स्थानीय विधायकों के निर्देश माने जाएं, सत्ताधारी दल AAP से जुड़े लोगों को “सकारात्मक रिपोर्ट” मिले और रिटर्निंग अधिकारी विपक्षी नामांकन रद्द कर दें ताकि कई सीटें बिना मुकाबले जीत ली जा सकें—जो आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।   राजनीतिक तापमान बढ़ा पटियाला SSP के छुट्टी पर जाने से राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। अब नजरें आज होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।