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झटका बनाम हलाल विवाद पर बड़ा कदम, अब दुकान के बाहर लगेगा स्पष्ट बोर्ड

  जयपुर राजधानी जयपुर में अवैध मीट की दुकानों को बंद किया जाएगा। साथ ही जिन दुकानों पर कमर्शियल पट्टे हैं उन्हें अनिवार्य रूप से दुकान के बाहर यह स्पष्ट लिखने के निर्देश दिए गए हैं कि दुकान में झटके का मीट है या हलाल का। जयपुर की महापौर सौम्या गुर्जर ने कहा है कि  अब से केवल उन्हीं दुकानों को मीट बिक्री का लाइसेंस मिलेगा जो कमर्शियल पट्टे पर होंगी व  प्रत्येक दुकान को अपने बाहर बोर्ड लगाकर स्पष्ट करना होगा कि वो 'झटका मीट शॉप' है या 'हलाल मीट शॉप'। उन्होंने कहा कि  शहर में आवासीय कॉलोनियों में अनियंत्रित रूप से मीट की दुकानें खुल संचालय हो रही हैं, जिससे क्षेत्रवासियों को असुविधा होती है। गंदगी और बदबू भी फैलती है, साथ ही झटका और हलाल मीट की दुकान की स्पष्ट जानकारी नहीं होने से जन भावनाएं भी आहत होती हैं। महापौर ने कहा कि लोग चाहते हैं कि किसी की धार्मिक भावना आहत न हो इस वजह से मीट की दुकानों पर झटका और हलाल लिखा हुआ होना चाहिए, ताकि जो जिस तरह का मीट इस्तेमाल करते हैं, उन्हें वही मीट मिले।  उन्होंने बताया कि पूर्व में दिए निर्देशों के बाद कुछ दुकानों पर झटका और हलाल अंकित किया भी गया है, लेकिन जिन पर नहीं लिखा गया है।  सौम्या गुर्जर ने बताया कि पिछले काफी असरे से स्थानीय रिहायशी कॉलोनियों में संचालित मीट की दुकानों का विरोध हो रहा है।  ऐसे स्थान पर दुर्गंध आती है और महिलाओं का निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूल, मंदिर से 100 मीटर दूरी का प्रस्ताव सरकार को भेजा उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां स्कूल या मंदिर है, वहां इस तरह की गतिविधियों को नहीं देखा जा सकता। ऐसे में राज्य सरकार को लिखा गया है कि ऐसी तमाम दुकानें मंदिर और स्कूल से तकरीबन 100 मीटर दूर हो। इस पर राज्य सरकार जनता के हित में ही फैसला लेगी। गौरतलब है कि निगम प्रशासन ने करीब एक साल पहले भी ऐसा ही निर्णय लिया था, लेकिन इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है। इसे लेकर समय-समय पर सियासी बयानबाजी जरूर सामने आती है। अब निगम ने इस मामले में सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं।

जनवरी में मिली थी जमानत, आसाराम ने अब जोधपुर जेल में किया सरेंडर

 जोधपुर नाबालिग से रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम ने शनिवार, 30 अगस्त को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया है। राजस्थान हाई कोर्ट ने 27 अगस्त को उसकी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसे यह कदम उठाना पड़ा। आसाराम को जनवरी 2025 में पहली बार 12 साल बाद अंतरिम जमानत मिली थी। उसने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम की तबीयत स्थिर है और उसे अस्पताल में भर्ती होने या लगातार चिकित्सा देखभाल की जरूरत नहीं है। अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आसाराम ने पिछले कुछ महीनों में इलाज के लिए कई यात्राएं की हैं और विभिन्न शहरों के अस्पतालों में सलाह ली है, लेकिन किसी भी अस्पताल में नियमित फॉलोअप नहीं कराया है। कोर्ट ने आसाराम के वकील की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एम्स जोधपुर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्वास्थ्य में गिरावट की बात कही थी। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने फैसले में कहा था कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार आसाराम की तबीयत स्थिर है। उसे हॉस्पिटल में भर्ती होने या लगातार चिकित्सा देखभाल की जरूरत नहीं है। आसाराम जनवरी 2025 में 12 साल के बाद पहली बार जमानत मिली थी। सबसे पहले जानिए- अंतरिम जमानत कैंसिल करते हुए कोर्ट ने क्या कहा था… अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में मेडिकल बोर्ड की ओर से दी गई रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि आसाराम ने पिछले 3-4 महीनों में इलाज के लिए कई यात्राएं की हैं। उसने कई शहरों में अलग-अलग हॉस्पिटल में इलाज भी कराया है, लेकिन किसी भी हॉस्पिटल में नियमित फॉलोअप नहीं कराया है। वकील के दलील को किया खारिज 27 अगस्त की सुनवाई में आसाराम के वकील निशांत बोड़ा ने कहा था कि- 21 अगस्त को आसाराम को एम्स जोधपुर ले जाया गया था। वहां के डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट दी है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। बेटे से भी हुई थी मुलाकात अपनी करीब साढ़े सात महीने की जमानत के दौरान आसाराम ने 11 साल बाद अपने बेटे नारायण साईं से भी मुलाकात की थी। नारायण साईं 25 जून को सूरत जेल से जोधपुर स्थित आसाराम के आश्रम पहुंचे थे।

बारिश बनी आफत: खेतों में डूबीं फसलें, सड़कें-जिंदगी प्रभावित

जयपुर राजस्थान में मानसून का दौर लगातार सक्रिय बना हुआ है और मौसम विभाग ने 10 सितंबर तक राज्य में यलो अलर्ट जारी किया है। पिछले 24 घंटों में कई जिलों में भारी वर्षा दर्ज की गई, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। बांसवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा 5 इंच तक बारिश दर्ज की गई, वहीं झालावाड़, बूंदी, कोटा और जयपुर समेत अन्य जिलों में भी झमाझम बरसात हुई। भारी वर्षा के चलते कुछ जिलों में दुखद घटनाएं भी सामने आईं। सलूंबर के झल्लारा क्षेत्र में एक शिक्षक बाइक समेत नदी में बह गए, वहीं भीलवाड़ा जिले के बड़लियास थाना क्षेत्र में नदी में नहाने गई दो युवतियां पानी का स्तर अचानक बढ़ने से डूब गईं। नदियों और नालों में तेज बहाव ने ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा बढ़ा दिया है। मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में मानसून टर्फ लाइन गंगानगर, शिवपुरी और दमोह होते हुए लो-प्रेशर सिस्टम तक गुजर रही है, जिसके चलते बारिश का दौर जारी है। इसके अलावा एक अन्य टर्फ मध्यप्रदेश से दक्षिणी पंजाब की ओर सक्रिय है, जो राजस्थान में बारिश बढ़ाने का कारण बन रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के इस सक्रिय चरण में राज्यभर में हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। इसके चलते सड़कों पर जलभराव, फसल नुकसान और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन ने प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्यों के लिए निगरानी बढ़ा दी है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बारिश का असर और अधिक गंभीर हो सकता है, इसलिए सभी को सतर्क और सावधान रहना जरूरी है।

जीएसटी चोरी में बड़ी कार्यवाही: भीलवाड़ा में डीजीजीआई की छापेमारी

  भीलवाड़ा, महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस जयपुर जोनल यूनिट ने गुरुवार को भीलवाड़ा में जीएसटी चोरी और फर्जी बिलिंग के नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी की। जयपुर से आई विशेष टीमों ने शहर के 10 से अधिक प्रोसेस हाउस और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड्स बरामद किए गए, जिनकी जांच शुरू हो गई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई मुख्य रूप से निखिल डाड के ठिकानों पर केंद्रित थी, जो पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड के पुत्र हैं। इसके अलावा, माहेश्वरी केमिकल से जुड़े अनुज सोमानी के प्रतिष्ठानों पर भी डीजीजीआई ने तलाशी ली। प्रारंभिक जांच में 10 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि यह राशि और बढ़ सकती है, क्योंकि बरामद दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड्स का विश्लेषण अभी जारी है। डीजीजीआई की यह कार्रवाई राजस्थान में जीएसटी चोरी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी जीएसटी नियमों के उल्लंघन और फर्जी बिलिंग के जरिए बड़े पैमाने पर कर चोरी के नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बरामद दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स की गहन जांच के बाद कर चोरी की पूरी तस्वीर सामने आएगी। इस कार्रवाई से भीलवाड़ा के व्यावसायिक समुदाय में हड़कंप मच गया है। डीजीजीआई ने स्पष्ट किया कि जीएसटी चोरी के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां भविष्य में भी जारी रहेंगी, ताकि कर चोरी पर अंकुश लगाया जा सके। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे राज्य में जीएसटी अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत संदेश देती है। जांच पूरी होने तक और जानकारी की प्रतीक्षा है।  

कोटा में बाढ़ का पानी घटा, गांवों में हालात होने लगे सामान्य

कोटा राजस्थान के बूंदी जिले के नैनवां, कापरेन और केशोरायपाटन इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी जैसे-जैसे कम हो रहा है, ग्रामीण जीवन की टूटी हुई कड़ियों को फिर से जोड़कर उसे पटरी पर लाने में जुट गए हैं। वे अपने भीगे हुए घरेलू सामान, गीले कपड़ों और अनाज को सुखा रहे हैं तथा अपने अपने घरों और दुकानों में बाढ़ के कारण जमा गाद को बाहर निकाल रहे हैं। इस क्षेत्र के किसानों को बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है, सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्के की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। नैनवां ब्लॉक में पैबलापुरा बांध के नीचे की ओर स्थित 1,500 से अधिक आबादी वाला डोकुन गांव और पड़ोसी देवरिया गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान बांध का पानी उफनकर अचानक घरों और दुकानों में घुस गया था। डोकुन गांव के निवासी रमेश नागर ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से घरों में घुस आया कि लोगों को अपने घरेलू सामान या फसलों को बचाने का भी समय नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उनके घरों में रखे गेहूं, सोयाबीन, चना और मूंग से भरे सैकड़ों बोरे पूरी तरह भीगकर खराब हो गए। इस बीच, प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं पहुंची है। कांग्रेस की बूंदी जिला इकाई के अध्यक्ष और केशोरायपाटन से विधायक सीएल प्रेमी ने मीडिया को बताया, ‘‘बाढ़ के बाद के हालात केशोरायपाटन, कापरेन और नैनवां क्षेत्रों में सबसे खराब हैं। इन इलाकों के गांवों के लगभग हर घर और दुकान को भारी नुकसान हुआ है। संपत्ति और फसलें नष्ट हो गई हैं, अधिकतर कच्चे मकान ढह गए हैं, मवेशी मर गए हैं। राज्य सरकार को शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों तक तुरंत राहत पहुंचानी चाहिए।’’ बूंदी के विधायक हरिमोहन शर्मा ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार ने अब तक बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए कोई मुआवज़ा घोषित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत मानदंडों के तहत निर्धारित सहायता राशि अपर्याप्त है और गांवों में हुए नुकसान को देखते हुए ‘‘यह सागर में एक बूंद के समान है और सहायता के नाम पर एक मजाक है’’। इस बीच, केशोरायपाटन के उप-मंडल अधिकारी (एसडीएम) ऋतुराज शर्मा ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य और नुकसान का सर्वेक्षण जारी है। एसडीएम ने कहा, ‘‘हम जल्द ग्राम पंचायतों में शिविर लगाने जा रहे हैं, ताकि मौके पर ही दस्तावेजों और राहत संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।’’ उन्होंने बताया कि लोग राहत शिविरों से अपने अपने घर लौट चुके हैं।  

सियासी घमासान के बीच अदालत का हस्तक्षेप, राजस्थान पुलिस भर्ती पर लगा ब्रेक

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार, 28 अगस्त 2025 को बहुचर्चित पुलिस उप-निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा 2021 रद्द कर देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस भर्ती को लेकर लंबे समय से चल रही पेपर लीक और गड़बड़ी की जांच के बाद हाईकोर्ट ने इस निर्णय तक पहुंचा। एसआई भर्ती 2021 मामले की लंबी सुनवाई के बाद फैसला न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने 14 अगस्त 2025 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। अदालत ने सुनवाई के दौरान बहुत गंभीर रुख अपनाया और कहा कि यह 'साधारण मामला नहीं' है। पेपर लीक और मिलीभगत के खुलासों के बाद अब मिला न्याय! सरकार ने बॉडी के सामने माना कि भर्ती में कुल 68 उम्मीदवारों की मिलीभगत सामने आई थी, जिसमें 54 ट्रेनी SI, 6 चयनित उम्मीदवार तथा 8 फरार उम्मीदवार शामिल थे। आरोपों की गुत्थी सुलझाने के लिए SIT जांच कर रही थी। सरकार और विपक्ष के बीच सियासत, हनुमान बेनीवाल भी सड़कों पर उतरे राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि इस स्तर पर भर्ती को रद्द करना उपयुक्त नहीं है। इसके पीछे कारण था कि केवल कुछ ही उम्मीदवार आरोपों की गिरफ्त में हैं, और शेष अधिकांश उम्मीदवार निष्कलंक हैं। कैबिनेट उप-समिति ने भी भर्ती जारी रखने की सिफारिश की थी, जिसे मुख्यमंत्री की ओर से अनुमोदित किया गया। नागौर से RLP सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भर्ती रद्द नहीं की गई क्योंकि 'सरकार को इसका श्रेय नहीं मिलेगा।' उन्होंने दिल्ली कूच करने वाली युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया। अदालत में अंतिम दलीलों की सुनवाई 2 अगस्त 2025 को हुई थी, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में सुरक्षा की विफलता और प्रक्रिया की ईमानदारी पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से चुने गए उम्मीदवारों को बरकरार रखना कानून-व्यवस्था की दृष्टि से खतरनाक हो सकता है।

पैलेस ऑन व्हील्स का नया अध्याय: निजी कंपनी करेगी संचालन, स्वर्णनगरी में 21 सितंबर को होगा आगमन

जयपुर देश की विभिन्न शाही रेलों में सबसे चर्चित और लोकप्रिय लग्जरी ट्रेन पैलेस ऑन व्हील इस सीजन की पहली यात्रा पर 21 सितंबर को जैसलमेर पहुंचेगी। यह ट्रेन 17 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होकर जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर होते हुए रविवार सुबह जैसलमेर पहुंचेगी। 26 जनवरी 1982 को शुरू हुई पैलेस ऑन व्हील का 41 साल बाद दो साल पहले निजीकरण कर दिया गया है। पहले रेलवे इसके संचालन और नवीनीकरण का जिम्मा संभालता था, लेकिन यात्रियों की घटती संख्या और लगातार घाटे के बाद अब इसकी कमान निजी कंपनी को सौंप दी गई है। ट्रेन को इस सीजन के लिए नया कलेवर दिया गया है। 41 बाथरूमों का रेनोवेशन किया गया है, बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं, फर्नीचर और लाइटिंग बदली गई है तथा स्थानीय व्यंजनों को खाने के मेन्यू में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सैलानियों को एक बार फिर से शाही रेल का शाही अनुभव देना है। पैलेस ऑन व्हील की यात्रा हमेशा से विदेशी सैलानियों की पहली पसंद रही है लेकिन महंगे किराए और कोविड के प्रभाव से यात्रियों की संख्या लगातार गिरती गई। पांच साल पहले पूरे सीजन में केवल 3500 यात्री ही इसमें सवार हुए। कोविड से ठीक पहले यह संख्या 2500 से भी नीचे चली गई थी। स्थिति और बिगड़ने पर इसे दो साल तक बंद करना पड़ा। 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया, लेकिन पूरे सीजन में केवल 11 फेरे ही हो पाए। इस बार निजी कंपनी के हाथों में संचालन सौंपने के बाद ट्रेन 33 फेरे करेगी। उम्मीद है कि बदलाव और नए शाही लुक के साथ पैलेस ऑन व्हील का पुराना आकर्षण एक बार फिर लौटेगा।

पार्टी लाइन से हटकर बोलना पड़ा भारी, विधायक चौधरी पर कार्रवाई के संकेत

जयपुर डीग जिले की कामां विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक नौक्षम चौधरी पर उनके विवादित बयान को लेकर पार्टी ने सख्ती दिखाई है। विधायक द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में "कांग्रेस प्रधान को हटाकर बीजेपी समर्थित प्रधान बनाने" की बात कहे जाने के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। नोक्षम का बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया। कांग्रेस विधानसभा में इस बयान को भुनाएगी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इसे लेकर बयान जारी किया। डोटासरा ने कहा-  'जो बात कांग्रेस पार्टी कह रही है उसकी साक्ष्य खुद सत्ताधारी दल की विधायक दे रही हैं। कामां से भाजपा विधायक नौक्षम चौधरी जी ने स्वीकार किया है कि भरतपुर में कांग्रेस से जुड़े प्रधानों को मनगढ़ंत आरोप लगाकर पद से हटाया है और नियमों को ताक पर रखकर बहुमत के खिलाफ उनकी जगह भाजपा से जुड़े प्रधानों को बैठा दिया गया। इसका साफ मतलब है कि भाजपा ने राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करते हुए जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सत्ता के दुरुपयोग से हटाया गया। भाजपा ने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की खुलेआम हत्या की है।'  कांग्रेस इसे विधानसभा में भी मुद्दा बनाने की तैयारी कर चुकी है। बीजेपी अध्यक्ष बोले यह हमारी परंपरा नहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस मुद्दे पर कहा, "भाजपा की परंपरा चुने हुए जनप्रतिनिधियों को हटाने की नहीं रही है, यह कांग्रेस की कार्यशैली रही है। विधायक से इस बयान पर जवाब तलब किया गया है। उन्हें बुलाया गया है, वे आकर अपना पक्ष रखेंगी।" क्या कहा था विधायक ने? कामां विधायक नौक्षम चौधरी ने कामां और पहाड़ी पंचायत समितियों में बीजेपी प्रधान बनने के बाद प्रेस वार्ता की थी। इसमें उन्होंने बिना नाम लिए पार्टी के एक मंत्री पर भी सवाल उठाए और कहा, "नगर पंचायत में कांग्रेस का प्रधान क्यों है? बीजेपी समर्थित कार्यकर्ता को प्रधान बनाइए, ताकि हम भी कह सकें कि कांग्रेस का प्रधान हटाकर बीजेपी का बनाया गया है।" पार्टी कर सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बयान को गंभीरता से लिया है और संकेत दिए हैं कि यदि विधायक का जवाब असंतोषजनक रहा तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।  

विधायकी पर लटकी तलवार! जयकृष्ण पटेल के खिलाफ सिफारिश संभव

जयपुर राजस्थान विधानसभा में  सवाल वापस लेने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में एसीबी द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल के खिलाफ विधानसभा की सदाचार समिति ने जांच पूरी हो चुकी है। समिति अपनी रिपोर्ट आज दोपहर 2 बजे विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को सौंपेगी। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में विधायक की सदस्यता रद्द करने तक की सिफारिश की जा सकती है। 1 सितंबर से शुरू हो रहे सत्र में पेश होगी रिपोर्ट सदाचार समिति की यह रिपोर्ट आगामी 1 सितंबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में रखी जाएगी। इसके बाद सदन की सिफारिश के आधार पर स्पीकर देवानी पटेल की सदस्यता के संबंध में कोई निर्णय ले सकते हैं। पहली बार किसी विधायक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया जयकृष्ण पटेल को राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनके घर से 20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। बताया गया कि उन्होंने खनन विभाग से जुड़े सवालों को विधानसभा से वापस लेने के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग की थी। सौदेबाज़ी के दौरान वे 20 लाख रुपये ले रहे थे, तभी एसीबी ने उन्हें ट्रैप कर लिया। यह राजस्थान के इतिहास में पहली बार है जब किसी विधायक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। स्पीकर ने सदाचार कमेटी को सौंपी थी जांच गिरफ्तारी के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मामला सदाचार समिति को सौंपा था। इस कमेटी ने पूरे मामले की गहन जांच करते हुए एसीबी, संबंधित एजेंसियों और खुद विधायक का पक्ष भी शामिल किया। अब रिपोर्ट अंतिम चरण में पहुंच गई है। विधायकी रद्द होने पर क्या होगा? अगर सदाचार समिति की रिपोर्ट में जयकृष्ण पटेल को गंभीर दुराचार का दोषी ठहराया जाता है और विधायकी समाप्त करने की सिफारिश की जाती है, तो इसे विधानसभा में रखकर वोटिंग कराई जाएगी। इसके बाद सदन बहुमत से निर्णय लेगा।  

आवारा कुत्तों को लेकर बड़ा फैसला, 6 महीने से कम उम्र के पिल्लों पर नसबंदी नहीं

जयपुर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को आधार मानते हुए आवारा कुत्तों के मानवीय प्रबंधन हेतु नई 13 सूत्री गाइड लाइन जारी की है। स्वायत्त शासन विभाग ने इसे सभी नगरीय निकायों में 30 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए हैं। नियमों के अनुसार अब राज्य में 6 महीने से छोटे कुत्तों की नसबंदी नहीं की जाएगी। इसी तरह दूध पिलाने वाली मादा को तब तक पकड़ने पर रोक रहेगी, जब तक उनके पिल्ले प्राकृतिक रूप से दूध छोड़ न दें। गाइड लाइन में स्पष्ट किया गया है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए तार, फंदा या टोंग्स का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल प्रशिक्षित कर्मचारी ही कुत्तों को सुरक्षित जाल या हाथ से पकड़ सकेंगे। प्रत्येक वार्ड में निर्धारित भोजन स्थल बनाए जाएंगे। इसके अलावा नसबंदी केंद्रों का नवीनीकरण और नई सुविधाओं जैसे टीकाकरण और डीवार्मिंग की व्यवस्था होगी। कुत्तों को पकड़ने और देखभाल का जिम्मा केवल एडब्ल्यूबीआई से मान्यता प्राप्त एनजीओ को दिया जाएगा, जिन्हें प्रति कुत्ता 200 से 1450 रुपए तक भुगतान होगा। हर नगर निकाय में निगरानी समिति बनाई जाएगी, जिसमें पशु कार्यकर्ता की मौजूदगी अनिवार्य होगी। सभी प्रक्रियाओं की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और 30 दिन का फुटेज रखना होगा। बीमार या घायल कुत्तों का पहले इलाज किया जाएगा, उसके बाद ही नसबंदी होगी। यूडीएच शासन सचिव रवि जैन ने कहा कि यह नीति लोगों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों को संतुलित करेगी। उल्लंघन करने पर पशु जन्म नियंत्रण नियम 2003 के तहत कार्रवाई होगी। नई गाइड लाइन से राज्य में आवारा कुत्तों के प्रति मानवीय व्यवहार और जनता की सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।