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भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी: राजस्थान और कैलिफोर्निया मिलकर बनाएंगे स्मार्ट ग्रिड और क्लीन एनर्जी मॉडल

जयपुर राजस्थान की ऊर्जा यात्रा अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदल सकता है। यह सिर्फ एक सरकारी समझौता नहीं, बल्कि उस भविष्य की शुरुआत है, जहां बिजली सिर्फ पैदा नहीं होगी, बल्कि नई तकनीक के सहारे ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद भी बनेगी। इस बदलाव की कहानी हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका के कैलिफोर्निया से जुड़ गई है। राजस्थान और अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC), कैलिफोर्निया ऊर्जा आयोग (CEC) और कैलिफोर्निया पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन (CPUC) के बीच वर्चुअल माध्यम से सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर भी ऑनलाइन जुड़े और इसे दोनों राज्यों के लिए भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण समझौता बताया। सिर्फ कागजों पर हस्ताक्षर नहीं, तकनीक का होगा सीधा आदान-प्रदान इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राजस्थान को दुनिया के उन क्षेत्रों से सीखने का मौका मिलेगा, जिन्होंने ऊर्जा प्रबंधन में मिसाल कायम की है। कैलिफोर्निया लंबे समय से ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट बिजली व्यवस्था के लिए जाना जाता है। अब वही अनुभव राजस्थान के साथ साझा किया जाएगा। इस साझेदारी के तहत सौर और पवन ऊर्जा के बेहतर प्रबंधन, ऊर्जा भंडारण तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम विकसित करने और आधुनिक बिजली प्रबंधन से जुड़े शोध व अनुभव साझा किए जाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे राजस्थान की ऊर्जा व्यवस्था और अधिक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार हो सकेगी। हजारों किलोमीटर की दूरी, लेकिन सोच और लक्ष्य एक ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि भले ही राजस्थान और कैलिफोर्निया भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से काफी दूर हों, लेकिन दोनों का लक्ष्य समान है। दोनों स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ भविष्य तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों राज्यों के नियामक ढांचे, नीतिगत अनुभव और जमीनी स्तर पर किए गए सफल प्रयोगों को भी साझा करने का अवसर देगा। इससे राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में नई दिशा और नई गति मिलने की उम्मीद है। राजस्थान पहले से बना रहा है हरित ऊर्जा में पहचान ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राजस्थान आज देश के अग्रणी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है। प्रदेश में विशाल सौर ऊर्जा पार्क और अनुकूल पवन गति का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर हरित बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। सरकार केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों तक सुरक्षित, किफायती और निर्बाध बिजली पहुंचाने पर भी लगातार काम कर रही है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक पावर ग्रिड, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और स्मार्ट मीटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू किया जा रहा है। रिकॉर्ड बिजली उत्पादन पर मिला वैश्विक सम्मान इसी बीच राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के कोयला आधारित बिजली घरों ने रिकॉर्ड स्तर पर बिजली उत्पादन कर नया इतिहास रचा है। इस उपलब्धि के लिए ‘मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर को वैश्विक अवार्ड से सम्मानित किया। विद्युत भवन में आयोजित समारोह में संस्था के मैनेजर अरिहंत उपाध्याय और कोऑर्डिनेटर गरिमा जैन ने ऊर्जा मंत्री को सम्मान पत्र सौंपा। साथ ही उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेन्द्र श्रृंगी को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। 2 जून बना बिजली उत्पादन का ऐतिहासिक दिन ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 2 जून 2026 को प्रदेश की 7580 मेगावाट क्षमता वाली सभी 23 थर्मल इकाइयों ने 94.60 प्रतिशत उपयोग क्षमता के साथ रिकॉर्ड 7171 मेगावाट बिजली उत्पादन किया। यह राजस्थान के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा उत्पादन माना जा रहा है। इतना ही नहीं, सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की सभी आठ इकाइयों ने भी अपनी कुल 2820 मेगावाट क्षमता में से 2790 मेगावाट बिजली उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि बताती है कि प्रदेश न केवल हरित ऊर्जा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन में भी नई मिसाल कायम कर रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ हुई यह तकनीकी साझेदारी और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन, दोनों मिलकर राजस्थान को आने वाले वर्षों में देश के सबसे मजबूत और आधुनिक ऊर्जा राज्यों की कतार में खड़ा कर सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग जमीन पर कितनी तेजी से बदलाव लाता है और प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को इसका कितना फायदा मिलता है।

राजस्थान के 76 कस्बे बने नगर पालिका, विकास और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

जयपुर राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में अक्सर बड़े फैसलों की चर्चा होती है, लेकिन इस बार जो हुआ, उसने सिर्फ सरकारी फाइलों का वजन नहीं बढ़ाया, बल्कि उन लाखों लोगों की उम्मीदों को भी नया पता दे दिया, जो वर्षों से अपने कस्बे को शहर बनते देखने का इंतजार कर रहे थे। कस्बों से शहर बनने का सफर सोचिए… एक छोटा कस्बा, जहां सड़कें तो हैं लेकिन शहर जैसी व्यवस्था नहीं। जहां आबादी बढ़ती रही, बाजार फैलते रहे, मकान ऊंचे होते गए, लेकिन सरकारी सुविधाएं वहीं की वहीं अटकी रहीं। अब यही कस्बे नगर पालिका बनने जा रहे हैं। यानी अब इनके पास अपना प्रशासन होगा, अपने विकास की रफ्तार होगी और योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने का अलग तंत्र होगा। 15 साल का सबसे बड़ा नगरीय विस्तार राजस्थान सरकार ने प्रदेश में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन को मंजूरी देकर पिछले 15 साल का सबसे बड़ा नगरीय विस्तार कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में नगरीय निकायों की संख्या 309 से बढ़कर 385 हो जाएगी। इसके साथ ही इन नए निकायों के प्रशासनिक संचालन के लिए 684 नए पदों का भी सृजन किया गया है। यह सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि उन इलाकों के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है, जो लंबे समय से शहर जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे थे। सबसे ज्यादा फायदा किन जिलों को? सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा जयपुर और झुंझुनूं को मिला है। दोनों जिलों में सात-सात नई नगरपालिकाओं का गठन किया गया है। जयपुर जिले में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, गट्टू, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा को नगर पालिका का दर्जा मिला है। वहीं झुंझुनूं में सिंघाना, डूंडलोद, जाखल, सुलताना, बुहाना, मलसीसर और मण्ड्रेला अब नए शहरी निकायों के रूप में पहचान बनाएंगे। इन जिलों की भी बदलेगी तस्वीर दौसा, अलवर और टोंक में चार-चार नई नगरपालिकाएं बनाई गई हैं। अजमेर, बाड़मेर और बालोतरा में तीन-तीन नए निकाय बने हैं। इसके अलावा सीकर, बूंदी, जालौर, नागौर, बीकानेर, धौलपुर, करौली, उदयपुर, श्रीगंगानगर, कोटा, बारां, पाली, चूरू, प्रतापगढ़, सिरोही और कई अन्य जिलों के कस्बों को भी नगर पालिका का दर्जा देकर विकास की नई कतार में खड़ा कर दिया गया है। आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलेगा? असल बदलाव अब इन कस्बों की तस्वीर में दिखाई देगा। नगर पालिका बनने के बाद स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, नालियां, कचरा प्रबंधन और शहरी योजनाओं को लागू करना पहले की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। लंबे समय से गांव और शहर के बीच झूल रहे इन इलाकों को अब अपनी अलग प्रशासनिक पहचान मिलेगी। 684 नई नौकरियों का रास्ता खुला सरकार ने सिर्फ नगरपालिकाओं की घोषणा कर औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि इनके संचालन के लिए 684 नए पदों को भी मंजूरी दी है। हर नई नगर पालिका में एक अधिशासी अधिकारी, सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबंधक (स्वास्थ्य निरीक्षक), वरिष्ठ प्रारूपकार, वरिष्ठ सहायक और दो कनिष्ठ सहायकों के पद स्वीकृत किए गए हैं। यानी नए निकाय शुरुआत से ही प्रशासनिक ढांचे के साथ काम करेंगे। युवाओं के लिए क्यों है बड़ी खबर? इन पदों का एक और बड़ा असर युवाओं पर पड़ेगा। पिछले तीन वर्षों में स्वायत्त शासन विभाग में पहली बार इतनी बड़ी भर्ती का रास्ता खुला है। लंबे समय से सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह फैसला रोजगार की नई उम्मीद भी लेकर आया है। आउटसोर्सिंग पर भी बड़ा फैसला सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पहले से गठित छह नगरपालिकाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार, सफाई जमादार और सफाई कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इन निकायों के लिए पहले स्वीकृत 54 पदों से जुड़ी व्यवस्था भी निरस्त कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार अब नगरीय निकायों की प्रशासनिक संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित करना चाहती है। आगे क्या बदलेगा? राजस्थान के तेजी से बढ़ते कस्बों के लिए यह फैसला सिर्फ सीमा बदलने का नहीं, बल्कि पहचान बदलने का है। जिन इलाकों में लोग वर्षों से बेहतर सड़क, नियमित सफाई, व्यवस्थित विकास और मजबूत स्थानीय प्रशासन की मांग कर रहे थे, वहां अब बदलाव की घड़ी शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में यह फैसला जमीन पर कितना असर दिखाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।

राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: 76 नई नगरपालिकाएं और 684 नए पद स्वीकृत

जयपुर राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है. सरकार ने प्रदेश में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन को मंजूरी दी है. स्वशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में इन नई नगर पालिकाओं के गठन को मंजूरी दी गई है. यह घोषणा बजट घोषणाओं के तहत की गई है. नई नगरपालिकाओं के सुचारू संचालन के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने 684 नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी है. 385 हो जाएगी नगर निकाय की संख्या इस फैसले के बाद राज्य में नगर निकायों की कुल संख्या 309 से बढ़कर 385 हो जाएगी. जयपुर और झुंझुनूं जिलों में सबसे ज्यादा 7-7 नगरपालिकाओं का गठन हुआ है. इन निकायों में कुल 684 पद स्वीकृत हैं. जयपुर में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, दूदू, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा नगर पालिकाओं का गठन हुआ है. युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर होंगे निकाय की संख्या में बढ़ोतरी से तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रशासन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा. युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे. साथ ही निकाय में पदों पर भर्ती से प्रशासनिक कार्यों भी आसान होगा. इन पदों को मिली मंजूरी नवगठित पदों में अधिशाषी अधिकारी-चतुर्थ, सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबन्धक (स्वास्थ्य निरीक्षक- सेकंड), वरिष्ठ प्रारूपकार, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक के 76-76 पदों का सृजन किया गया है.

कोटा को मिली 100 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात, 250 युवाओं को मिलेगा रोजगार

कोटा शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। आने वाले कुछ दिनों में कोटा की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत शहर को कुल 100 ई-बसें मिलने जा रही हैं, जिनकी पहली खेप जुलाई के पहले सप्ताह तक कोटा पहुंचने की संभावना है। इन बसों के शुरू होने से न सिर्फ शहर के लोगों का सफर आसान होगा, बल्कि नगर निगम सीमा में शामिल हुए दूरदराज के ग्रामीण इलाकों के हजारों लोगों को भी पहली बार नियमित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। शहर के साथ गांव भी होंगे सीधे जुड़े अब तक शहर से दूर बसे कई गांवों के लोगों को निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। नई ई-बस सेवा इस तस्वीर को बदलने जा रही है। नगर निगम और कोटा बस सर्विसेज लिमिटेड ने ऐसे 20 रूट तय किए हैं, जिनके जरिए शहर के साथ-साथ निगम सीमा में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों को भी जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और मरीजों को रोजाना आने-जाने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 20 रूट पर चलेगी नई इलेक्ट्रिक बस सेवा योजना के तहत रेलवे स्टेशन से बंधा धर्मपुरा, मुकुन्दरा विहार और कोलीपुरा गांव तक बसें संचालित होंगी। न्यू बस स्टैंड से बोराबास, एरोड्राम, डीसीएम, भामाशाह मंडी और कॉमर्स कॉलेज तक कनेक्टिविटी मिलेगी। एरोड्राम से रानपुर, सोगरिया, धनेश्वर और दरा जंक्शन, रायपुरा से भदाना और सोगरिया स्टेशन, झालीपुरा से अरण्डखेड़ा, बड़गांव से सीमलिया, चंद्रेसल से आरके पुरम, सोगरिया स्टेशन से अनंतपुरा, बड़ तिराहे से शंभुपुरा एयरपोर्ट, नयापुरा से तालेड़ा और रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-4 से जीएडी सर्किल तक के रूट भी इस योजना में शामिल किए गए हैं। 100 बसों में 95 होंगी 9 मीटर लंबी कोटा को मिलने वाली 100 ई-बसों में अधिकांश 9 मीटर लंबी होंगी, जबकि पांच बसें 12 मीटर श्रेणी की रहेंगी। इन बसों को यात्रियों की संख्या और विभिन्न मार्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सभी बसें आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देंगी। सुभाष नगर में तैयार हुआ चार्जिंग स्टेशन बसों के संचालन से पहले जरूरी तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। सुभाष नगर में बस स्टॉप और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार बसों की देखरेख, मरम्मत और ड्राइवर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बस सप्लाई करने वाली कंपनी के पास रहेगी। इससे संचालन व्यवस्था को बेहतर और नियमित बनाए रखने में मदद मिलेगी। 250 लोगों को मिलेगा रोजगार ई-बस परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था ही नहीं बदलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी लेकर आएगी। स्थानीय स्तर पर कंडक्टर, लिपिकीय स्टाफ और अन्य कर्मचारियों सहित करीब 250 लोगों की नियुक्ति संविदा फर्म के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए टेंडर जुलाई के पहले सप्ताह में खोले जाने की तैयारी है। इतना होगा बस का किराया नगर निगम ने यात्रियों को राहत देने के लिए किराया भी किफायती रखा है। पहले तीन किलोमीटर तक का किराया 10 रुपये होगा। तीन से छह किलोमीटर तक 15 रुपये, छह से दस किलोमीटर तक 20 रुपये और अधिकतम किराया 60 रुपये निर्धारित किया गया है। इससे आम लोगों को कम खर्च में सुरक्षित और सुविधाजनक सफर का विकल्प मिलेगा। बदलेगी शहर की परिवहन व्यवस्था ई-बसों के संचालन के साथ कोटा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश करेगी। प्रदूषण कम करने, ट्रैफिक का दबाव घटाने और शहर के साथ ग्रामीण इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी देने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि सब कुछ तय समय के अनुसार हुआ तो जुलाई के पहले सप्ताह से कोटा के लोग आधुनिक, स्वच्छ और सुविधाजनक ई-बस सेवा का लाभ उठाना शुरू कर देंगे।

यूट्यूब-व्हाट्सएप जाल में फंसकर 72 लाख गंवाए, चित्तौड़गढ़ में बड़ी साइबर ठगी

चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ में शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ के नाम पर 72 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है. गोपाल लाल शर्मा को टीना मल्होत्रा नाम की एक महिला ने आईआईएफएल कंपनी की फर्जी सेक्रेटरी बनकर अपना शिकार बनाया. ठगों ने पीड़ित को यूट्यूब विज्ञापन और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए जाल में फंसाया और फर्जी ऐप डाउनलोड कराया. अधिक मुनाफे का लालच देकर पीड़ित और उनके परिवार के 7 अलग-अलग बैंक खातों से कुल 71 लाख 97 हजार 900 रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर करा लिए. जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की तो ऐप पर फिशिंग वॉर्निंग आ गई और आरोपियों के नंबर बंद हो गए. यूट्यूब विज्ञापन और व्हाट्सएप ग्रुप से फंसाया दरअसल, पीड़ित गोपाल राशमी उपखंड के पहुंना के रहने वाले हैं. फर्जी सेक्रेटरी टीना मल्होत्रा ने जमा कराई गई राशि पर 5 से 20 फीसदी तक प्रॉफिट होने का झांसा दिया था. इसके बाद 26 मार्च को डीएमए मार्केट ट्रेडिंग अकाउंट रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरवाया गया. जब पीड़ित ग्रुप से जुड़ा तो व्हाट्सएप ग्रुप में उसे यह टिप्स दिए जाते थे कि कौन-सा शेयर कब खरीदना है और कब बेचना है. ठगों ने पैसे ट्रांसफर करने के बाद व्हाट्सएप ग्रुप में ही स्क्रीनशॉट भी भेजे. 25 हजार से शुरू हुई ठगी, 72 लाख तक पहुंचा नुकसान 2 अप्रैल 2026 को पीड़ित ने आरोपियों द्वारा बताए गए खाते में 25 हजार रुपए ट्रांसफर किए. इसके बाद अधिक मुनाफे का लालच देकर 2 अप्रैल से 3 जून 2026 के बीच ठगों ने पीड़ित गोपाल और उनके परिवार के एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीएफसी, आईसीआईसीआई, कोटक महिंद्रा और फेडरल बैंक समेत अलग-अलग बैंक खातों से कुल 71 लाख 97 हजार 900 रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर करवा लिए. पीड़ित गोपाल शर्मा ने बताया कि यह राशि होम लोन, पर्सनल लोन और उनकी पत्नी चन्द्रकला और पिता देवी लाल के खातों में जमा पैसे और परिचितों से लेकर जुटाई गई थी, जिसे ठगों ने बताए गए खातों में जमा करा लिया. 26 लाख से ज्यादा का फर्जी प्रॉफिट कुछ ही दिनों में आईआईएफएल वीआईपी ऐप पर 26 लाख 31 हजार 544 रुपए का प्रॉफिट दिखाया गया. जब पीड़ित ने पैसे विड्रॉल करने की रिक्वेस्ट डाली तो ऐप पर फिशिंग वॉर्निंग आ गई और अकाउंट में जीरो बैलेंस दिखाई देने लगा. कैसे खुला ठगी का राज? पीड़ित ने टीना मल्होत्रा समेत ग्रुप के अन्य सदस्यों से संपर्क किया, लेकिन सभी आरोपियों के नंबर बंद मिले. इसके बाद पीड़ित ने आईआईएफएल कंपनी से संपर्क किया, जहां बताया गया कि टीना मल्होत्रा नाम की कोई सेक्रेटरी कंपनी में नहीं है और न ही वह वहां काम करती है. इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि उसके साथ साइबर ठगी हो चुकी है. साइबर थाने में मामला दर्ज ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित ने 24 जून को साइबर पुलिस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस थाना चित्तौड़गढ़ में आईटी एक्ट की धारा 66डी और बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2) के तहत टीना मल्होत्रा और आर. वेंकटरमन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. साइबर पुलिस थानाधिकारी मधु कंवर मामले की जांच कर रही हैं.

जयपुर में ताजिया जुलूस को लेकर सुरक्षा कड़ी, ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग पर रोक

जयपुर जयपुर में मुहर्रम के अवसर पर निकलने वाले ताजिया जुलूसों को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक कड़ी कर दी गई है। शहर की संवेदनशीलता और लाखों लोगों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने ऐसा सुरक्षा घेरा तैयार किया है, जिसमें जमीन से लेकर आसमान तक हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। करीब तीन हजार पुलिसकर्मी पूरे शहर में तैनात रहेंगे, जबकि ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी नेटवर्क और सादा वर्दी में मौजूद इंटेलिजेंस टीम हर संदिग्ध गतिविधि पर निगरानी रखेगी। प्रशासन का कहना है कि उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराना भी है। आस्था और परंपरा का दिन मुहर्रम का दिन मुस्लिम समाज के लिए गहरी आस्था और शहादत की याद का प्रतीक माना जाता है। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की स्मृति में शहर के अलग-अलग इलाकों से ताजिए निकलेंगे और कर्बला तक पहुंचेंगे। इस दौरान हजारों लोग जुलूस में शामिल होंगे, वहीं बड़ी संख्या में लोग रास्तों के किनारे खड़े होकर इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बनेंगे। इसी भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही विस्तृत योजना तैयार की है। परकोटे में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदलेगी परकोटा क्षेत्र में आज पूरे दिन यातायात व्यवस्था पूरी तरह बदली हुई नजर आएगी। संजय सर्किल, अजमेरी गेट, न्यू गेट, सांगानेरी गेट, घाट गेट, गलता गेट और रामगढ़ मोड़ से परकोटे में सभी प्रकार के वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। जरूरत पड़ने पर अन्य मार्गों से आने वाले ट्रैफिक को भी वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट किया जाएगा। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी लेकर ही घर से निकलें। भारी वाहनों पर भी रहेगा प्रतिबंध भारी मालवाहक वाहनों के लिए भी शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर रोक लगा दी गई है। रोड नंबर-14 वीकेआई, कालवाड़ पुलिया, सिरसी पुलिया, 200 फीट अजमेर रोड, न्यू सांगानेर मोड़, गोपालपुरा मोड़, ट्रांसपोर्ट नगर चौराहा, धोबीघाट, रामगढ़ मोड़, गलता गेट चौराहा और आमेर तिराहे सहित कई स्थानों से भारी वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं मिलेगा। इससे जुलूस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम रखने की कोशिश की जाएगी। इन बाजारों में पार्किंग पूरी तरह बंद ताजिया जुलूस के दौरान शहर के प्रमुख बाजारों में पार्किंग भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। चौड़ा रास्ता, बड़ी चौपड़, बापू बाजार, जौहरी बाजार, हवामहल बाजार, सुभाष चौक, रामगंज बाजार, घाट गेट बाजार, चांदपोल बाजार, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार, इंदिरा बाजार, किशनपोल बाजार, गोपीनाथ मार्ग, एमआई रोड और एमडी रोड सहित कई क्षेत्रों में वाहन खड़े करने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन का मानना है कि इससे जुलूस के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सकेगा। कर्बला तक निकलेगा ताजिया जुलूस आज दोपहर बाद शहर के विभिन्न इलाकों से ताजिए बड़ी चौपड़ पहुंचेंगे। यहां से पारंपरिक मार्ग से होते हुए जुलूस हवामहल बाजार, चांदी की टकसाल, सुभाष चौक, जोरावर सिंह गेट और रामगढ़ मोड़ के रास्ते कर्बला पहुंचेगा। इस पूरे मार्ग पर दोपहर से देर रात तक यातायात प्रभावित रहेगा और पुलिस लगातार ट्रैफिक को नियंत्रित करती रहेगी। ड्रोन, सीसीटीवी और QRT रहेगी अलर्ट पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर इस बार सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। एडिशनल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर राजीव पचार के अनुसार शहर के भीतर और बाहरी इलाकों में करीब तीन हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ERT) को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। संवेदनशील इलाकों में सादा वर्दी में पुलिस और इंटेलिजेंस के जवान भी तैनात रहेंगे। 17 ताजियों के लाइसेंस रद्द प्रशासन ने साफ कर दिया है कि केवल लाइसेंसधारी ताजियों को ही जुलूस निकालने की अनुमति होगी। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 17 ताजियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है। जुलूस मार्ग पर बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को भी निर्देश जारी किए गए हैं अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों को रोकने के लिए भी पुलिस विशेष सतर्क रहेगी। अभय कमांड सेंटर, शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों से पूरे आयोजन की लाइव निगरानी की जाएगी। साइबर सेल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखेगी और भ्रामक पोस्ट, अफवाह फैलाने या सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आमजन से सहयोग की अपील यातायात पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे प्रतिबंधित मार्गों पर वाहन लेकर न जाएं, ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से पहले वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। प्रशासन का कहना है कि सभी के सहयोग से ही मुहर्रम का यह पारंपरिक और श्रद्धापूर्ण आयोजन शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जा सकेगा।

वेल्डिंग मिस्त्री की बेटी सिमरन प्रवीन ने बास्केटबॉल में जीता गोल्ड, राष्ट्रीय स्तर पर चमकी प्रतिभा

बीकानरे  कहा जाता है कि यदि इरादे मजबूत हों और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो रास्ते की हर मुश्किल आसान हो जाती है. इसका एक जीता-जागता और प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली युवा बास्केटबॉल खिलाड़ी सिमरन प्रवीन ने. सिमरन ने अपने परिवार के बेहद सीमित संसाधनों और कमजोर आर्थिक हालातों के बावजूद अपनी कड़ी मेहनत और असाधारण प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान बनाई है. एक साधारण वेल्डिंग मिस्त्री की बेटी सिमरन अब तक दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और एक नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर बीकानेर जिले सहित पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर चुकी हैं. वर्तमान में सिमरन प्रवीन 12वीं कक्षा की छात्रा हैं और वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ बास्केटबॉल के मैदान पर भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. बेहद कम समय में राष्ट्रीय फलक पर अपनी चमक बिखेरने वाली सिमरन का अब अगला लक्ष्य भारतीय सीनियर बास्केटबॉल टीम का हिस्सा बनना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतना है. तीन साल पहले शुरू हुआ था बास्केटबॉल का सफर सिमरन बताती हैं कि उन्होंने करीब तीन वर्ष पहले ही बास्केटबॉल खेलना शुरू किया था. शुरुआत में उन्हें इस खेल के नियमों और तकनीकों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन एक स्थानीय ट्रायल में भाग लेने के बाद बास्केटबॉल के प्रति उनका लगाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने इसे ही अपनी जिंदगी का मुख्य लक्ष्य बना लिया. इसके बाद नियमित कड़े अभ्यास, अनुशासन और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने बहुत ही कम समय में राष्ट्रीय स्तर तक का एक सफर तय कर लिया, जो हर किसी के लिए प्रेरणादायक है. सिमरन ने बताया कि वे अब तक दो नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं. हाल ही में जनवरी माह में राजस्थान के बाड़मेर में आयोजित स्कूली राष्ट्रीय खेलों में भी उन्होंने अपनी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया. इससे पहले आयोजित हुई एक अन्य प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा का लोहा देश भर में मनवाया था. बहन से मिली प्रेरणा, कोच ने तराशा हुनर सिमरन अपनी इस शानदार सफलता का एक बड़ा श्रेय अपने कोच नरेंद्र कस्वा को देती हैं. उनका कहना है कि उनके कोच ने हमेशा उन्हें मैदान पर और मैदान के बाहर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है. वे खिलाड़ियों को केवल खेल की तकनीक और ड्रिबलिंग ही नहीं सिखाते, बल्कि जीवन में अनुशासन और लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण का महत्व भी गहराई से समझाते हैं. सिमरन बताती हैं कि कोच अक्सर सभी खिलाड़ियों से कहते हैं कि “मोबाइल में कुछ नहीं रखा है, खेलो और अपना भविष्य बनाओ.” कोच की यही बातें सिमरन के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गईं. इसके अलावा सिमरन ने बताया कि बास्केटबॉल खेलने की शुरुआती प्रेरणा उन्हें अपनी बड़ी बहन से मिली थी, जिन्होंने उन्हें इस खेल को अपनाने की सलाह दी थी. माता-पिता ने आर्थिक तंगी के बाद भी दिया पूरा साथ एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली सिमरन के पिता यूसुफ अली वेल्डिंग का कार्य करते हैं, जिससे उनके घर का गुजारा चलता है, जबकि उनकी माता मन्नत बानो एक कुशल गृहिणी हैं. चार भाई-बहनों में सिमरन सबसे छोटी और सबकी लाडली हैं. परिवार की आर्थिक परिस्थितियां बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होने के बावजूद उनके माता-पिता ने कभी भी सिमरन के कदमों को रुकने नहीं दिया और अपनी क्षमता से बढ़कर उनकी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया. मैदान पर जब सिमरन उतरती हैं, तो अपनी तेज रफ्तार, बेहतरीन बॉल कंट्रोल और शानदार शूटिंग स्किल के दम पर विपक्षी टीम के डिफेंस को पूरी तरह से ध्वस्त कर देती हैं. सिमरन का कहना है कि उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय टीम की आधिकारिक जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना है, जिसके लिए वे रोज घंटों पसीना बहा रही हैं.

राजस्थान सरकार का बड़ा कदम, ऊर्जा बचाने वाले भवनों और ई-वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

 जयपुर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में ऊर्जा दक्ष भवनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड को अधिसूचित करने की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए हैं। इससे भवनों में ऊर्जा की खपत को कम किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने इस कोड के अनुपालन मैकेनिज्म को भी प्रभावी बनाने के निर्देश दिए ताकि प्रदेश में भवन निर्माण के क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहन दिया जा सके। मुख्य सचिव ने यह निर्देश गुरूवार को शासन सचिवालय में प्रदेश में एनर्जी ट्रांजिशन पर गठित राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदान किए।  कोड तथा इससे संबंधित रूल्स के प्रारूपों की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा सहित नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिए जाने से ऊर्जा परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आया है और राजस्थान इसमें निरन्तर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने पीएम ई— ड्राईव योजना के अन्तर्गत प्रदेश के प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स, ग्रिड स्थिरता और एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्थान मजबूत एवं स्थिर ग्रिड तंत्र विकसित करने की दिशा में भी पूरी तरह प्रतिबद्धता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन को और गति प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सरकारी भवनों में रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के कार्य की समीक्षा करते हुए कहा कि इससे राजकीय कार्यस्थलों पर बिजली की बचत को प्रोत्साहन मिला है। बैठक में ऊर्जा सचिव सुश्री आरती डोगरा ने ग्रिड की स्थिरता, सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन सहित ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

यमुना जल परियोजना को मिली रफ्तार, राजस्थान में पाइपलाइन से पानी सप्लाई का फॉर्मूला तय

जयपुर राजस्थान में पानी के पुराने और पेचीदा विवाद अब सुलझने के नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। मध्य प्रदेश के साथ पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) का विवाद सुलझाने के ठीक बाद, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अब पड़ोसी राज्य हरियाणा के साथ दोस्ती का नया हाथ बढ़ाया है। मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय अंतर्राज्यीय बैठक में शेखावाटी अंचल को यमुना का पानी देने के ऐतिहासिक फॉर्मूले पर सहमति बन गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में हुई इस त्रिपक्षीय बैठक में 'यमुना जल परियोजना' को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबी और निर्णायक चर्चा हुई। तैयार हुआ 'पाइपलाइन फॉर्मूला', केंद्रीय जल आयोग पहुंची DPR इस बैठक का मुख्य फोकस यमुना नदी के पानी को राजस्थान के चूरू, सीकर और झुंझुनूं (शेखावाटी क्षेत्र) तक पहुंचाने के लिए तैयार किए जा रहे 'मेमोरेन्डम ऑफ एग्रीमेंट' के विधिक और तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देना था। तकनीकी विकास को लेकर सबसे बड़ी खबर यह है कि राजस्थान तक पानी लाने के लिए अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाने की संयुक्त विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पूरी तरह तैयार कर ली गई है। दोनों राज्यों के जल संसाधन विभागों ने इसे आपसी सहमति के बाद केंद्रीय जल आयोग को अंतिम विधिक स्वीकृति के लिए सौंप दिया है। 'खत्म हो रहा है पानी पर लड़ने का दौर'- सीएम भजनलाल बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मुलाकात को राज्य के सुनहरे भविष्य के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा- देश में अब राज्यों के बीच पानी को लेकर चलने वाले पुराने विवादों का दौर खत्म हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सभी राज्य अब विवाद नहीं, बल्कि समाधान की राह पर बढ़ रहे हैं। उन्होंने ERCP का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एमपी और राजस्थान ने मिलकर राह निकाली, वैसे ही अब हरियाणा और राजस्थान मिलकर समाधान की ओर बढ़ चुके हैं। बहुत जल्द ही प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में दोनों राज्यों के बीच अंतिम समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे। शेखावाटी के अन्नदाता और जनता को मिलेगा भरपूर पानी यह परियोजना शेखावाटी के लिए 'लाइफलाइन' साबित होने वाली है। इस फॉर्मूले के तहत न केवल आम जनता को पीने का मीठा पानी मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से चलाई जा रही है ताकि MoU होते ही धरातल पर काम शुरू किया जा सके। सीएम ने साफ किया कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सुदृढ़ जल प्रबंधन बेहद आवश्यक है।

छात्रों की सुरक्षा पर प्रशासन का एक्शन: जयपुर में कोचिंग सेंटरों की फायर सेफ्टी जांच तेज

जयपुर लखनऊ के कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत के बाद जयपुर प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। शहर में हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़े पैमाने पर जांच अभियान शुरू किया है। मंगलवार को नगर निगम और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीमों ने शहर के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की पड़ताल की, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आईं। 13 कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं करने और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमी पाए जाने पर नगर निगम ने अब तक 13 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया है। इनमें रिद्धि सिद्धि क्षेत्र, गोपालपुरा बाइपास, त्रिवेणी चौराहा और गोपालपुरा चौराहे के आसपास संचालित कई संस्थान शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि जहां भी छात्रों की सुरक्षा से समझौता होता दिखाई देगा, वहां बिना किसी रियायत के कार्रवाई की जाएगी। 24 से ज्यादा संस्थानों को नोटिस जांच के दौरान कई ऐसे कोचिंग सेंटर भी मिले जहां सुरक्षा व्यवस्था अधूरी या नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई। ऐसे 24 से अधिक संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटिस के बावजूद सुधार नहीं होने पर इन संस्थानों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे फायर सिस्टम और इमरजेंसी एग्जिट पर खास नजर निरीक्षण के दौरान अधिकारी यह जांच रहे हैं कि भवनों में लगे फायर फाइटिंग सिस्टम काम कर रहे हैं या नहीं। अग्निशमन यंत्रों की वैधता, आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता, भवन की संरचना और किसी दुर्घटना की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की भी बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही संस्थानों से फायर एनओसी से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए हैं। कोचिंग हब होने के कारण बढ़ी जिम्मेदारी जयपुर प्रदेश का प्रमुख कोचिंग केंद्र माना जाता है। यहां हर साल हजारों छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रशासनिक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में किसी भी दुर्घटना का असर केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सैकड़ों परिवारों की उम्मीदों पर भी पड़ता है। यही वजह है कि प्रशासन इस बार किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है। 35 से ज्यादा संस्थानों का हो चुका निरीक्षण नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीमें अब तक 35 से अधिक कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण कर चुकी हैं। गोपालपुरा बाइपास, रामगढ़ मोड़, मानसरोवर, मालवीय नगर और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा। जारी रहेगा अभियान प्रशासन का कहना है कि यह केवल शुरुआती कार्रवाई है। आगामी दिनों में शहर के अन्य कोचिंग सेंटरों, शैक्षणिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले भवनों की भी जांच की जाएगी। लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा से समझौता न हो। लखनऊ की दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे शैक्षणिक संस्थान आपदा से निपटने के लिए तैयार हैं। जयपुर में चल रही यह कार्रवाई उसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है, ताकि किसी हादसे के बाद पछताने की नौबत न आए।