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बारिश बनी मुसीबत: नागौर में नेशनल हाईवे तीसरी बार बंद, स्कूलों में ऐहतियातन छुट्टी

जयपुर मानसून की टर्फ लाइन उत्तर की तरफ शिफ्ट होने से राजस्थान में भारी बारिश झेल रहे जिलों में अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं उत्तरी क्षेत्रों में अब भारी बारिश का प्रभाव देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को गंगानगर और हनुमानगढ़ में जोरदार बारिश रिकॉर्ड की गई। हनुमानगढ़ के गोलूवाला में 6 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। सर्वाधिक वर्षा तारानगर (चूरू) में 185 मिलीमीटर दर्ज की गई। पूर्वानुमान है कि आगामी 5-6 दिन मानसून टर्फ लाइन के सामान्य से उत्तर की ओर शिफ्ट होने से राज्य के उत्तरी व उत्तर-पूर्वी भागों में बारिश की गतिविधियां जारी रहेगी, वहीं दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भागों में भारी बारिश की गतिविधियों में कमी रहने की संभावना है। राजस्थान में लगातार हो रही बारिश ने लोगों के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागौर में बीते 12 दिनों में तीसरी बार नेशनल हाईवे बंद करना पड़ा है। 11 जिलों के स्कूलों में छुट्टी आईएमडी ने आज प्रदेश के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 12 जिलों में स्कूलों  में अवकाश घोषित कर दिया है। इसमें झालावाड़, बारां, टोंक, डीग, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा और कोटपूतली-बहरोड़ शामिल हैं। इसके अलावा कोटा में शनिवार को क्लास एक से 12वीं तक के स्कूलों में बच्चों की छुट्टी रहेगी, जबकि स्टाफ यथावत कार्य करेंगे। कलेक्टर पीयूष समारिया ने शुक्रवार को इसके आदेश जारी किए, जो सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों पर लागू होंगे।

नई जिम्मेदारी: अरुण चतुर्वेदी राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नियुक्त, ठकराल को सचिव पद

जयपुर राजस्थान में राज्य वित्त आयोग के पद पर पूर्व बीजेपी अध्यक्ष तथा वसुंधरा सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे अरुण चतुर्वेदी को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। चतुर्वेदी के साथ एक पूर्व ब्यूरोक्रेट नरेश ठकराल को भी राजनीतिक नियुक्ति मिली है। वित्त विभाग में लंबे समय तक रह चुके ठकराल को राज्य वित्त आयोग में सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। इस संबंध में वित्त विभाग ने देर रात अधिसूचना जारी कर दी। राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल एक अप्रैल 2025 से अगले डेढ़ वर्ष के लिए किया गया है। इस अवधि में यह राज्य की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा। हालांकि डेढ़ वर्ष बाद भी सरकार आयोग का कार्यकाल बढ़ा सकती है। हर सरकार में आयोग के कार्यकाल की समय सीमा बढ़ाई जाती रही है। ये होंगे आयोग के काम राज्य वित्त आयोग मुख्य रूप से पंचायतों के लिए ग्रांट निर्धारित करता है। इसकी सिफारिशों के आधार पर ही सरकार पंचायतों को ग्रांट जारी करती है। इसके अलावा इसके अलावा पंचायतों में वित्तीय संसाधनों को विकसित करने के लिए टोल, शुल्क और टैक्स की दरें निर्धारित करने की सिफारिश भी कर सकता है। शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने का काम भी राज्य वित्त आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके अलावा 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्थानीय निकायों को दी जाने वाली सहायता राशि का समायोजन भी राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही किया जाता है। भजनलाल सरकार में यह पहली राजनीतिक नियुक्ति नहीं है, इससे पहले आरपीएससी, किसान आयोग, सैनिक कल्याण बोर्ड सहित कई अन्य बोर्ड और आयोगों में नियुक्तियां हुई हैं लेकिन अब तक किसी भी राजनीतिक नियुक्ति वाले पदाधिकारी को मंत्री का दर्जा नहीं दिया गया है। जबकि इससे पहले की सरकारों में राजनीतिक नियुक्तियों के साथ नियुक्त होने वाले पदाधिकारियों को मंत्री का दर्जा दिए जाने के आदेश भी जारी किए जाते थे। क्या कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलेगा? राज्य वित्त आयोग एक संवैधनिक संस्था है, यहां पर नियुक्ति होने वाले अध्यक्ष को लगभग हर सरकर में मंत्री का दर्जा दिया जाता रहा है। इससे पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाकर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। इसके साथ ही बीजेपी नेता अशोक लाहोटी को राज्य वित्त आयोग में सदस्य नियुक्त किया गया था। हालांकि मौजूदा सरकार ने चतुर्वेदी को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है लेकिन उनके दर्जे को लेकर अभी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

अजमेर में प्रशासन का बड़ा कदम, 250 अवैध दुकानों पर चलेगा बुलडोजर, सुरक्षा के लिए भारी फोर्स मौजूद

अजमेर  अजमेर के तारागढ़ पहाड़ियों पर वन विभाग की जमीन पर बने अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है. शनिवार को वन विभाग ने तारागढ़ क्षेत्र में लगभग 250 अवैध निर्माणों को चिन्हित किया है, जिनमें करीब 200 केबिननुमा दुकानें शामिल हैं. इन निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए वन विभाग की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ कार्रवाई शुरू कर दी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन क्षेत्र में शांतिपूर्ण रूप से अतिक्रमण हटाया जा रहा है. ध्वस्तीकरण की ये कार्रवाई सेक्टर बनाकर की जा रही है. हर सेक्टर में मजिस्ट्रेट कार्रवाई की निगरानी कर रहे हैं. वहां वन विभाग के भी अधिकारी मौजूद है. बताया जा रहा है कि अब तक प्रशासन ने 40% के आसपास अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि तारागढ़ क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर सालों से अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं. इन्हीं शिकायत के आधार पर प्रशासन ने पहले 300 से अधिक अवैध निर्माणों को चिन्हित किया था, जिनमें से कुछ अतिक्रमणकारियों ने हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है. हालांकि, जिन निर्माणों पर कोई कानूनी स्थगन नहीं है, उन्हें ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. प्रशासन ने बताया कि हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त करने वाले अतिक्रमण को अलग से चिन्हित किया गया है. जारी है अभियान अजमेर की पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा ने बताया कि ये अभियान वन विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए चलाया जा रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, विभिन्न थानों के थानाधिकारी और विशेष कार्य बल (STF) की टीमें शामिल हैं. प्रशासन ने इस दौरान मीडिया की एंट्री पर भी पाबंदी लगा दी है, ताकि कार्रवाई में किसी तरह की बाधा न आए.

चोरी का सुनियोजित खेल: खरीदारी की आड़ में ज्वेलरी उड़ाने वाली तीन महिलाएं पकड़ी गईं

जोधपुर जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट की देवनगर थाना पुलिस ने मसूरिया इलाके में स्थित एक ज्वेलरी की दुकान से सोने के आभूषण चोरी के मामले में पुलिस ने मोगिया गैंग की तीन शातिर महिलाओं को कोटा से गिरफ्तार किया है। मामले में देवनगर थाना क्षेत्र के व्यापारी भावेश सोनी ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसकी दुकान पर तीन महिलाएं खरीददारी के बहाने आई थीं। जब वह एक अन्य ग्राहक को ज्वेलरी दिखा रहा था, तब उन महिलाओं ने गुपचुप तरीके से ड्रावर से सोने के आभूषणों से भरा डिब्बा चोरी कर लिया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और 25 किलोमीटर के दायरे में करीब 400 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी सहायता और डाटा एनालिसिस के आधार पर चोरी की वारदात का पर्दाफाश किया गया। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान मौसम बाई, कृष्णा और सीमा के रूप में हुई है। ये तीनों महिलाएं कोटा शहर की रहने वाली हैं और मोगिया गैंग से जुड़ी हुई हैं। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये महिलाएं साधारण वेशभूषा पहनकर तीन-चार के समूह में शहरों और कस्बों में ज्वेलरी की दुकानों की रेकी करती हैं। वे अकेले दुकानदार की दुकान में ग्राहक बनकर प्रवेश करती हैं और जैसे ही दुकानदार किसी अन्य ग्राहक में व्यस्त होता है, चुपचाप चोरी की वारदात को अंजाम देती हैं और अक्सर हजार- पांच सौ रुपये का कोई छोटा आभूषण खरीददकर संदेह से बचकर निकल जाती हैं। इसके बाद यह गैंग वेशभूषा बदलकर अगली दुकान की ओर रवाना हो जाती है। पूछताछ में सामने आया है कि इस गैंग ने इसी तरीके से प्रदेशभर में कई चोरियों को अंजाम दिया है।  

जयपुर हेरिटेज ज़ोन में खतरनाक इमारतों की पहचान शुरू, प्रशासन ने दिए नोटिस

जयपुर राजधानी जयपुर के परकोटे में पुरानी जर्जर इमारतों को चिन्हित कर उनके भवन मालिकों को नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। पिछले दिनों झालावाड़ में स्कूल भवन की छत गिरने से बच्चों की मौत के बाद अब सरकार ने एहतियातन पुरानी जर्जर इमारतों को सील कर उन्हें ढहाने के लिए कहा है। स्थानीय निकाय विभाग ने सभी शहरी निकायों को इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा है। अब तक प्रदेश में 2 हजार से ज्यादा ऐसी इमारतों को सील कर उन्हें गिराने की कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम हैरिटेज जयपुर क्षेत्र में कुल 126 जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं। इनमें हवा महल आमेर जोन में 29, किशनपोल जोन में 65, आदर्श नगर जोन में 18 व सिविल लाइन जोन में 14 जर्जर भवनों की पहचान की गई है। खासतौर पर परकोटे में बनी पुरानी हवेलियों के गिरने का खतरा सबसे ज्यादा है। सैकड़ों साल पहले बनाई गई ये हवेलियां अब गिरने की कगार पर आ चुकी हैं। चिन्हित जर्जर भवनों और इमारतों को सभी जोन उपायुक्त की ओर से नोटिस दिए जा चुके हैं। नोटिस में भवन मालिक को आमजन की सुरक्षा को देखते हुए जल्द भवन की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। जोन उपायुक्त के निर्देशन में मरम्मत कार्य की जिओ टैगिंग फोटो और वीडियो उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जर्जर भवनों की मॉनिटरिंग के लिए हैरिटेज निगम आयुक्त डॉ. निधि पटेल ने एक टीम का भी गठन किया है। टीम अतिरिक्त आयुक्त सुरेंद्र यादव की अध्यक्षता में बनाई गई है, जो जर्जर भवनों की मॉनिटरिंग करेगी और आयुक्त को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

खतरनाक इमारतों पर बड़ी कार्रवाई: 2699 भवन होंगे सील और ध्वस्त

जयपुर प्रदेश में झालवाड़ में स्कूल बिल्डिंग गिरने हुई बच्चों की मौतों के बाद अब स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेश भर में जर्जर इमारतों को चिन्हित करने का काम शुरू कर उन्हें ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग के सचिव रवि जैन ने इसे लेकर गुरुवार को सभी 224 निकायों के प्रमुखों की बैठक ली।  इस बैठक में प्रदेश में 2699 भवनों के जर्जर होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद उन्होंने इन भवनों को सील कर इन्हें ध्वस्त करने की कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए हैं। रवि जैन ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश अनुसार प्रदेश के 224 नगरीय निकायों में अब तक कुल 2 हजार 699 जर्जर भवनों की पहचान की जा चुकी है, जिन्हें नियमानुसार सील करके ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। जैन ने सख्त निर्देश दिए कि सभी आयुक्त और अधिशासी अधिकारी अपने क्षेत्रों में जाकर नियमित रूप से निरीक्षण कर जर्जर भवनों के सामने स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाएं, जिससे आम जनता को चेतावनी मिल सके और किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। बारिश में विद्युतजनित हादसों को लेकर भी बैठक में चर्चा की गई। जैन ने विद्युत तंत्र की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए विद्युत डिस्कॉम के अभियंताओं के साथ समन्वय कर सड़क किनारे ढीले तारों को तुरन्त ठीक करने के आदेश दिए। इसके साथ ही बिजली के खम्भों, डीपी, केबल बॉक्स और स्वीच बॉक्स के पास फैले हुए लूज तारों को हटाने, स्वीच बॉक्स के टूटे ढक्कनों की तुरंत मरम्मत करने के निर्देश दिए। वहीं आकस्मिक अग्निकांड या करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अग्निशमन वाहन, तकनीकी उपकरण और स्टाफ को हमेशा तैयार रखने के निर्देश दिए। बैठक में हरियालो राजस्थान के तहत करवाए जा रहे पौधारोपण के कार्यों की भी समीक्षा की गई, जिसमें अधिकारियों को अपने-अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पौधारोपण करने के निर्देश दिए गए।

लसाड़िया में बाइक चोर गिरोह पकड़ा गया, मास्टर माइंड निकला स्कूली उम्र का बालक

सलूंबर सलूंबर जिले की लसाड़िया पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए बाइक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। लसाड़िया थाना क्षेत्र में लगातार हो रही बाइक चोरी की वारदातों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर इस गिरोह का खुलासा किया। थानाधिकारी हर्षराज सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने गिरोह से जुड़े तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा चोरी की बाइक खरीदने वाले दो अन्य व्यक्तियों को भी पुलिस ने पकड़ा है। वहीं गिरोह का मास्टर माइंड एक बाल अपचारी निकला, जो पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रह चुका है। पुलिस ने मुख्य सरगना समेत दो बाल अपचारियों को डिटेन किया है। पूछताछ और छापेमारी के बाद पुलिस ने एक चोरी की बाइक, एक बाइक के विभिन्न पार्ट्स और दो प्रयुक्त बाइक जब्त की हैं, जो अलग-अलग घटनाओं में चोरी की गई थीं। इस गिरोह का नेटवर्क क्षेत्र के कई हिस्सों में फैला हुआ था और ये चोरी की गई बाइकों को सस्ते दामों में बेचते थे। एसपी राजेश यादव के निर्देश पर यह पूरी कार्रवाई हुई। एसपी यादव ने बताया कि क्षेत्र में बाइक चोरी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया गया था, जिसमें लसाड़िया पुलिस ने कई कार्रवाइयां की हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से आमजन ने राहत की सांस ली है। वहीं गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी है।

भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी से बचें: आरएसएसबी ने दिए अहम दिशा-निर्देश

जयपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर की ओर से पटवारी भर्ती परीक्षा 17 अगस्त, 2025 को दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा से पहले भर्ती बोर्ड ने विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत अधिसूचित पटवारी भर्ती के संबंध में बेहद महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। नोटिस आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in. पर उपलब्ध है। इस नोटिस में उम्मीदवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका उन्हें पालन करना होगा। हालांकि, बोर्ड ने दिशानिर्देशों के साथ-साथ एक चेतावनी भी जारी की है। पंजीकृत अभ्यर्थी आरएसएसबी द्वारा जारी दिशानिर्देश और चेतावनी के बारे में नीचे जान सकते हैं। आधिकारिक नोटिस नीचे उपलब्ध है। आरएसएसबी के दिशा-निर्देश भर्ती बोर्ड के नोटिस में लिखा है कि पटवारी भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों को निम्नानुसार सूचित किया जाता है किः-     आवेदक यह सुनिश्चित कर लें कि वे बोर्ड कार्यालय की उक्त विज्ञप्ति के अनुसार निर्धारित पात्रता एवं शैक्षणिक योग्यता रखते हैं।     अभ्यर्थी अपने पहचान पत्र में फोटो, यदि 03 वर्ष या उससे अधिक पुरानी है तो उसे अपडेट करा लिया जाना सुनिश्चित करें ताकि परीक्षा आयोजन के समय परीक्षा प्रवेश पत्र में प्रिंट फोटो का मिलान आपके मूल पहचान पत्र में फोटो से हो सके तथा आपको प्रवेश के समय कोई कठिनाई न हो। आपके मूल पहचान पत्र की फोटो का आपके चेहरे, प्रवेश पत्र की फोटो से मिलान होना आवश्यक है अन्यथा आपको परीक्षा केन्द्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जावेगी।     परीक्षा के अन्तर्गत प्रत्येक प्रश्न के आगे पांच विकल्प/गोले दिए जायेंगे। पहले चार विकल्प/गोला A,B,C और D उपयुक्त उत्तर से संबंधित तथा पांचवा विकल्प/गोला 'E' 'अनुत्तरित प्रश्न' से संबंधित होगा।     अभ्यर्थी को ओ.एम.आर. उत्तर-पत्रक पर, संबंधित प्रश्न क्रमांक के लिए सही उत्तर निर्दिष्ट करने हेतु A,B,C या D अर्थात पहले चार में से केवल एक विकल्प/गोला नीले बॉल पॉइन्ट पेन से गहरा कर भरना होगा। यदि अभ्यर्थी कोई प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता है तो पांचवा विकल्प/गोला 'E' को गहरा करना होगा।     यदि पांचों विकल्पों में से कोई भी विकल्प/गोला गहरा नहीं किया गया तो उस प्रश्न के अंक का 1/3 भाग काट लिया जाएगा।     10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में किसी भी विकल्प/गोले को अभ्यर्थी द्वारा गहरा नहीं किया गया तो उसे परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।     प्रत्येक प्रश्न के लिए कोई एक विकल्प/गोला भरा है या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवार को 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जायेगा।     उक्त परीक्षाओं के लिए "प्रोविजनल ई- प्रवेश पत्र" बोर्ड की वेबसाइट से डाउनलोड करने की दिनांक यथासमय सूचित कर दी जाएगी। बोर्ड द्वारा परीक्षार्थियों को अलग से प्रवेश पत्र प्रेषित नहीं किये जायेंगे।     परीक्षाओं के सम्बन्ध में विभिन्न सोशल मीडिया पर किये जा रहे भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करें। बोर्ड द्वारा राज्य स्तरीय प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में एवं बोर्ड की वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in पर प्रकाशित विज्ञप्ति द्वारा दी गई जानकारी को ही अधिकृत माना जाए।     ड्रेस कोड के बारे में समय-समय पर निर्देश अपडेट किए जाते हैं जो बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड़ किए जाते है। प्रवेश पत्र में भी इस विषय में उल्लेख किया जाता है। ड्रेस कोड की पालना आवश्यक रूप से की जाए ताकि परीक्षा केन्द्र पर प्रवेश हेतु कोई समस्या या कोई परेशानी ना हो। दिशानिर्देशों के साथ-साथ यह चेतावनी भी दी परीक्षा केन्द्रों पर नकल की रोकथाम के लिए बहुत ही प्रभावी उपाय किये गये हैं। भर्ती बोर्ड ने अभ्यर्थियों को परीक्षा में नकल कराने के नाम पर ठगी कराने वाले गिरोह के किसी झांसे/बहकावे में नहीं आने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा है कि परीक्षा के संबंध में विभिन्न Social Media पर किये जा रहे भ्रामक प्रचार पर विचार न करें। नकल करने वालों पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान परीक्षा संचालन में किसी प्रकार से अनुचित साधनों का उपयोग एवं अनियमित गतिविधियों में संलिप्तता पाए जाने पर 10 लाख से लेकर अधिकतम 10 करोड रूपये तक दंड तथा 10 वर्ष से लेकर अधिकतम आजीवन करावास तक की सजा के प्रावधान है। इसके साथ ही कठोर दंडात्मक कानूनी कार्यवाही की जा सकती है साथ ही ऐसे अभ्यर्थी को आगे परीक्षा देने से विवर्जित (Debar) भी किया जाएगा।

बीडीएस छात्र की आत्महत्या का मामला: दो शिक्षकों को हटाया गया

उदयपुर, उदयपुर के पैसिफिक डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल में फाइनल ईयर की 25 वर्षीय छात्रा श्वेता सिंह की कथित आत्महत्या के बाद दो शिक्षकों को कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया है। श्वेता ने गुरुवार रात करीब 11 बजे अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी। उनकी रूममेट ने उन्हें इस हालत में देखा था। तुरंत चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई गई लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। श्वेता जम्मू-कश्मीर की रहने वाली थीं, और उनके पिता एक पुलिस कांस्टेबल हैं। पुलिस को मौके से एक हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला, जिसमें श्वेता ने दो शिक्षकों (माही मैम और भगवत सर) पर दो साल तक मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न का आरोप लगाया। नोट में श्वेता ने दावा किया कि कॉलेज प्रशासन ने आंतरिक परीक्षाओं में देरी की, मेहनती छात्रों को फेल किया, और रिश्वत देने वालों को पास किया। श्वेता की मौत के बाद शुक्रवार सुबह सैकड़ों छात्र कॉलेज परिसर में जमा हुए और मुख्य द्वार को ब्लॉक कर धरना दिया। उन्होंने दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामले की गहन जांच की मांग की। बढ़ते तनाव को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने सुसाइड नोट में नामित दोनों शिक्षकों को निष्कासित कर दिया। कॉलेज संचालक राहुल अग्रवाल ने प्रिंसिपल रवि कुमार को फटकार लगाई और छात्रों को आश्वासन दिया कि दो से तीन महीने में समाधान कर लिया जाएगा। सुखेर पुलिस स्टेशन ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की है और आरोपों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस कॉलेज प्रशासन के साथ मिलकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में जुटी है। श्वेता के सहपाठियों के अनुसार, वह “ऑड बैच” में थीं, जिसमें वे छात्र शामिल होते हैं जो परीक्षा छूटने या 75 प्रतिशत उपस्थिति की कमी के कारण पिछड़ जाते हैं। नियमों के अनुसार, ऐसे छात्रों की छह महीने में दोबारा परीक्षा होनी चाहिए, लेकिन श्वेता की बार-बार गुहार के बावजूद उनकी लंबित परीक्षा आयोजित नहीं की गई। छात्रों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता और देरी ने श्वेता के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला था।  

बीडीएस छात्र की आत्महत्या का मामला: दो शिक्षकों को हटाया गया

उदयपुर, उदयपुर के पैसिफिक डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल में फाइनल ईयर की 25 वर्षीय छात्रा श्वेता सिंह की कथित आत्महत्या के बाद दो शिक्षकों को कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया है। श्वेता ने गुरुवार रात करीब 11 बजे अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी। उनकी रूममेट ने उन्हें इस हालत में देखा था। तुरंत चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई गई लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। श्वेता जम्मू-कश्मीर की रहने वाली थीं, और उनके पिता एक पुलिस कांस्टेबल हैं। पुलिस को मौके से एक हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला, जिसमें श्वेता ने दो शिक्षकों (माही मैम और भगवत सर) पर दो साल तक मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न का आरोप लगाया। नोट में श्वेता ने दावा किया कि कॉलेज प्रशासन ने आंतरिक परीक्षाओं में देरी की, मेहनती छात्रों को फेल किया, और रिश्वत देने वालों को पास किया। श्वेता की मौत के बाद शुक्रवार सुबह सैकड़ों छात्र कॉलेज परिसर में जमा हुए और मुख्य द्वार को ब्लॉक कर धरना दिया। उन्होंने दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामले की गहन जांच की मांग की। बढ़ते तनाव को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने सुसाइड नोट में नामित दोनों शिक्षकों को निष्कासित कर दिया। कॉलेज संचालक राहुल अग्रवाल ने प्रिंसिपल रवि कुमार को फटकार लगाई और छात्रों को आश्वासन दिया कि दो से तीन महीने में समाधान कर लिया जाएगा। सुखेर पुलिस स्टेशन ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की है और आरोपों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस कॉलेज प्रशासन के साथ मिलकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में जुटी है। श्वेता के सहपाठियों के अनुसार, वह “ऑड बैच” में थीं, जिसमें वे छात्र शामिल होते हैं जो परीक्षा छूटने या 75 प्रतिशत उपस्थिति की कमी के कारण पिछड़ जाते हैं। नियमों के अनुसार, ऐसे छात्रों की छह महीने में दोबारा परीक्षा होनी चाहिए, लेकिन श्वेता की बार-बार गुहार के बावजूद उनकी लंबित परीक्षा आयोजित नहीं की गई। छात्रों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता और देरी ने श्वेता के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला था।