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एक्सप्रेसवे बना मौत का रास्ता: दर्दनाक हादसे में चार मृत, छह से अधिक घायल

कोटा जिले के दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, वहीं आधा दर्जन लोग घायल हो गए। यह हादसा जिले के बूढ़ादीत थाना इलाके में चम्बल नदी पर हुआ। हादसे में मरने वाले लोग करौली के रहने वाले थे। जो कि मध्यप्रदेश के इंदौर से एक कार्यक्रम में भाग लेकर वापस करौली लौट रहे थे। हादसे में गाड़ी बुरी तरह से चकनाचूर हो गई। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां पर उनका उपचार जारी है। बूढ़ादीत थाना अधिकारी रघुनाथ सिंह ने बताया कि करौली का एक परिवार अपने रिश्तेदारों के साथ गोद भराई के कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के इंदौर गया था। कार्यक्रम समाप्ति के बाद सभी लोग इंदौर से वापस दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के रास्ते करौली लौट रहे थे। तभी बूढ़ादीत के पास चंबल नदी पर अज्ञात वाहन ने टेंपो ट्रैक्स को टक्कर मार दी, जिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। इस जोरदार टक्कर के बाद टेंपो ट्रैक्स वाहन पीछे से एक अन्य वाहन से टकरा गया। पुलिस ने बताया कि हादसे में सुरेश सोनी, गीता सोनी और अनिल की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि बृजेश को अस्पताल ले जाते समय उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। हादसे के दौरान गाड़ी में 15 से अधिक लोग सवार थे। घायलों को पहले बूंदी जिले के दहीखेड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें कोटा एमबीएस अस्पताल रैफर कर दिया गया। जहां सभी का उपचार जारी है। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया है। पुलिस अज्ञात वाहन की पहचान करने के प्रयास कर रही है।

थानेदार की दबंगई! डीएसपी के सामने झुके भाजपा विधायक, लगाए गंभीर आरोप

बांसवाड़ा जिले के गढ़ी थाना परिसर में शनिवार रात भाजपा विधायक कैलाशचंद्र मीणा थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। विधायक ने थानाधिकारी पर बजरी और भूमि माफियाओं से अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि विधायक, मौके पर पहुंचे पुलिस उपअधीक्षक सुदर्शन पालीवाल के पैर छूने के लिए तक झुक गए। परतापुर कस्बे में जमीन पर अवैध कब्जे और मोर गांव में युवक की संदिग्ध आत्महत्या के मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज विधायक पीड़ितों के साथ थाने पहुंचे। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वे थाने के बाहर सीढ़ियों पर धरने पर बैठ गए। विधायक मीणा ने आरोप लगाया कि थानाधिकारी रोहित कुमार भूमाफियाओं और खनन माफियाओं से सांठगांठ कर दलाली कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि थाने को दलालों की धर्मशाला बना दिया गया है, जबकि गरीब आदिवासी न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने गुस्से में यहां तक कह डाला कि यदि यही हाल रहा तो थानाधिकारी के कपड़े उतरवाकर घर भेज देंगे। यह टिप्पणी क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। मौके पर पहुंचे गढ़ी सर्कल के डिप्टी सुदर्शन पालीवाल ने विधायक को आश्वासन दिया कि मामलों की जांच जारी है और उच्च अधिकारियों को सभी तथ्यों से अवगत कराया जा चुका है। थानाधिकारी रोहित कुमार ने भी यही दोहराया कि कार्रवाई जांच के बाद ही की जाएगी।

अहमदाबाद-जयपुर समेत कई शहरों में ED की रेड, साइबर फ्रॉड में करोड़ों की बरामदगी

जयपुर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुंबई शाखा ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अहमदाबाद, जयपुर, जबलपुर और पुणे स्थित कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी एक जाली लोन स्कीम से जुड़े चल रहे मामले की जांच के सिलसिले में की गई है, जिसके जरिए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। ईडी ने इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकदी और बहुमूल्य धातुएं जब्त की हैं। ईडी के अधिकारियों ने इस अभियान के दौरान 7 किलोग्राम सोना, 62 किलोग्राम चांदी, 1.18 करोड़ रुपए नकद और 9.2 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज बरामद किए। इसके साथ ही, फर्जी कॉल सेंटर के संचालन से जुड़े कई अहम डिजिटल सबूत भी जब्त किए गए हैं, जिनसे इस पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली का पता चलेगा। जांच एजेंसी ने इस मामले में मुख्य आरोपी फर्म 'मैग्नाटेल बीपीएस कंसल्टेंट्स एंड एलएलपी' के दो पार्टनर्स संजय मोरे और अजीत सोनी को जयपुर से गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर भारत से संचालित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी गिरोह को चलाने का आरोप है। माना जा रहा है कि यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को कम ब्याज पर फर्जी लोन देने का झांसा देकर उनसे प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर पैसे ऐंठता था। ईडी की यह कार्रवाई भारत में स्थित कॉल सेंटरों के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के बाद इस रैकेट से जुड़े और भी लोगों के नाम सामने आने की उम्मीद है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और बरामद की गई संपत्तियों की कीमत अभी बढ़ सकती है।

कोचिंग इंडस्ट्री पर उपराष्ट्रपति की कड़ी टिप्पणी, कहा– अब ये ‘पोचिंग सेंटर’ बन चुके हैं

कोटा भारत के उपराष्ट्रपति, जगदीप धनखड़ ने आज कहा, “कोचिंग सेंटर अब ‘पोचिंग सेंटर’ बन चुके हैं। ये सुदृढ़ सांचों में प्रतिभा को जकड़ने वाले काले छिद्र बन गए हैं। कोचिंग सेंटर अनियंत्रित रूप से फैल रहे हैं, जो हमारे युवाओं के लिए, जो कि हमारे भविष्य हैं—एक गंभीर संकट बनता जा रहा है। हमें इस चिंताजनक बुराई से निपटना ही होगा। हम अपनी शिक्षा को इस तरह कलंकित और दूषित नहीं होने दे सकते।” धनखड़ ने आगे कहा, “अब देश किसी सैन्य आक्रमण से नहीं, बल्कि विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता से कमजोर और पराधीन होंगे। सेनाएं अब एल्गोरिद्म में बदल गई हैं। संप्रभुता की रक्षा का संघर्ष अब तकनीकी स्तर पर लड़ा जाएगा।” उपराष्ट्रपति ने तकनीकी नेतृत्व को नई राष्ट्रभक्ति का आधार बताते हुए कहा, “हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं—एक नए राष्ट्रवाद के युग में। तकनीकी नेतृत्व अब देशभक्ति की नई सीमा रेखा है। हमें तकनीकी नेतृत्व में वैश्विक अगुवा बनना होगा।” धनखड़ ने रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात-निर्भरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यदि हम रक्षा के क्षेत्र में बाहर से तकनीकी उपकरण प्राप्त करते हैं, तो वह देश हमें ठहराव की स्थिति में ला सकता है।” डिजिटल युग में बदलती वैश्विक शक्ति संरचनाओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “21वीं सदी का युद्धक्षेत्र अब भूमि या समुद्र नहीं है। पारंपरिक युद्ध अब अतीत की बात हो गई है। आज हमारी शक्ति और प्रभाव ‘कोड, क्लाउड और साइबर’ से तय होते हैं।” भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), कोटा, राजस्थान के चौथे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए श्री धनखड़ ने कहा, “हम गुरुकुल की बात कैसे न करें? हमारे संविधान की 22 दृश्य-प्रतिमाओं में एक गुरुकुल की छवि भी है। हम सदैव ज्ञानदान में विश्वास रखते आए हैं। कोचिंग सेंटर को अपने ढांचे का उपयोग कौशल केंद्रों में परिवर्तित करने के लिए करना चाहिए। मैं नागरिक समाज और जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि इस समस्या की गंभीरता को समझें और शिक्षा में पुनर्संयम लाने हेतु एकजुट हों। हमें कौशल आधारित कोचिंग की आवश्यकता है।” धनखड़ ने अंकों की होड़ के दुष्परिणामों पर चेताते हुए कहा, “पूर्णांक और मानकीकरण के प्रति जुनून ने जिज्ञासा को खत्म कर दिया है, जो कि मानव बुद्धिमत्ता का एक स्वाभाविक अंग है। सीटें सीमित हैं लेकिन कोचिंग सेंटर हर जगह फैले हुए हैं। वे वर्षों तक छात्रों के मन को एक ही ढर्रे में ढालते हैं, जिससे उनकी सोचने की शक्ति अवरुद्ध हो जाती है। इससे कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।” छात्रों को अंकों से ऊपर सोचने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा, “आपकी मार्कशीट और अंक आपको परिभाषित नहीं करेंगे। प्रतिस्पर्धी दुनिया में प्रवेश करते समय, आपका ज्ञान और सोचने की क्षमता ही आपको परिभाषित करेगी।” डिजिटल क्षेत्र की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “एक स्मार्ट ऐप जो ग्रामीण भारत में काम नहीं करता, वह पर्याप्त स्मार्ट नहीं है। एक एआई मॉडल जो क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं समझता, वह अधूरा है। एक डिजिटल उपकरण जो दिव्यांगों को शामिल नहीं करता, वह अन्यायपूर्ण है।” युवाओं से स्थानीय समाधान को वैश्विक स्तर तक ले जाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “भारत के युवाओं को टेक्नोलॉजी की दुनिया के सजग संरक्षक बनना चाहिए। हमें भारत के लिए भारतीय प्रणालियां बनानी होंगी और उन्हें वैश्विक बनाना होगा।” डिजिटल आत्मनिर्भरता में भारत को अग्रणी बनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “हमें अपनी डिजिटल नियति के निर्माता बनना होगा और अन्य देशों की नियति को भी प्रभावित करना होगा। हमारे कोडर, डेटा वैज्ञानिक, ब्लॉकचेन इनोवेटर और एआई इंजीनियर आज के राष्ट्र निर्माता हैं। भारत, जो कभी वैश्विक अग्रणी था, अब केवल उधार की तकनीक का उपयोगकर्ता बनकर नहीं रह सकता। पहले हमें तकनीक के लिए वर्षों प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। अब यह समय सप्ताहों में सिमट गया है। हमें तकनीक का निर्यातक बनना चाहिए।” धनखड़ ने शिक्षा को फैक्टरी की तरह संचालित करने की प्रवृत्ति का विरोध करते हुए कहा, “हमें इस असेंबली-लाइन संस्कृति को समाप्त करना होगा क्योंकि यह हमारी शिक्षा के लिए अत्यंत खतरनाक है। कोचिंग सेंटर राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के विपरीत हैं। यह विकास और प्रगति में बाधाएं उत्पन्न करता है।” उन्होंने कोचिंग सेंटरों द्वारा विज्ञापनों पर भारी खर्च की आलोचना करते हुए कहा, “अखबारों में विज्ञापनों और होर्डिंग्स पर भारी पैसा बहाया जाता है। यह पैसा उन छात्रों से आता है जो या तो कर्ज लेकर या बड़ी कठिनाई से अपनी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। यह धन का उपयुक्त उपयोग नहीं है। ये विज्ञापन भले ही आकर्षक लगें, पर हमारी सभ्यतागत आत्मा के लिए आँखों की किरकिरी बन गए हैं।” अपने उद्बोधन का समापन करते हुए उपराष्ट्रपति ने रटंत शिक्षा की संस्कृति की तीव्र आलोचना की: “हम आज रट्टा मारने की संस्कृति के संकट से जूझ रहे हैं, जिसने जीवंत मस्तिष्कों को केवल अस्थायी जानकारी के यंत्रवत भंडारों में बदल दिया है। इसमें न तो कोई आत्मसात है, न कोई समझ। यह रचनात्मक विचारकों की बजाय बौद्धिक ‘ज़ॉम्बी’ तैयार कर रहा है। रट्टा ज्ञान नहीं देता, केवल स्मृति देता है। यह डिग्रियों को गहराई के बिना जोड़ता है।” इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ए.के. भट्ट, निदेशक प्रो. एन.पी. पाढ़ी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

वन राज्यमंत्री ने जनसुनवाई कर आमजन की परिवेदनाओं को सुना, अधिकारियों को परिवेदनाओं के त्वरित निराकरण के दिए निर्देश

जयपुर,  पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा ने अलवर जिले के सर्किट हाउस में जनसुनवाई कर आमजन की परिवेदनाओं को सुनकर उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिये। वन राज्यमंत्री श्री शर्मा ने जनसुनवाई में आए पेयजल, विद्युत, सडक, पुलिस आदि की परिवेदनाएं लेकर आए फरियादियों को संवेदनशीलता के साथ सुनकर संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिये कि समस्याओं का निराकरण होने पर उन्हें सूचित कर उनके संतुष्टि स्तर में वृद्धि करें। उन्होंने निर्देश दिये कि आमजन को मूलभूत समस्याओं की प्राथमिकता से सुनवाई करें। इस कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अंतिम पंक्ति तक के पात्र व्यक्ति के कल्याण हेतु विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है जिनका जागरूक रहकर न केवल स्वयं लाभ उठाएं बल्कि अन्य पात्र व्यक्तियों को भी इन योजनाओं के प्रति जागरूक कर लाभांवित करावे।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, कोटा के चौथे दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, कोचिंग सेंटर अब ‘पोचिंग सेंटर’ बन गए हैं: उपराष्ट्रपति

जयपुर, भारत के उपराष्ट्रपति, जगदीप धनखड़ ने शनिवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), कोटा, राजस्थान के चौथे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा, “कोचिंग सेंटर अब ‘पोचिंग सेंटर’ बन चुके हैं। ये सुदृढ़ सांचों में प्रतिभा को जकड़ने वाले काले छिद्र बन गए हैं। कोचिंग सेंटर अनियंत्रित रूप से फैल रहे हैं, जो हमारे युवाओं के लिए, जो कि हमारे भविष्य हैं-एक गंभीर संकट बनता जा रहा है। हमें इस चिंताजनक बुराई से निपटना ही होगा। हम अपनी शिक्षा को इस तरह कलंकित और दूषित नहीं होने दे सकते।”  धनखड़ ने आगे कहा, “अब देश किसी सैन्य आक्रमण से नहीं, बल्कि विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता से कमजोर और पराधीन होंगे। सेनाएं अब एल्गोरिद्म में बदल गई हैं। संप्रभुता की रक्षा का संघर्ष अब तकनीकी स्तर पर लड़ा जाएगा।” उपराष्ट्रपति ने तकनीकी नेतृत्व को नई राष्ट्रभक्ति का आधार बताते हुए कहा, “हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं- एक नए राष्ट्रवाद के युग में। तकनीकी नेतृत्व अब देशभक्ति की नई सीमा रेखा है। हमें तकनीकी नेतृत्व में वैश्विक अगुवा बनना होगा।” धनखड़ ने रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात-निर्भरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यदि हम रक्षा के क्षेत्र में बाहर से तकनीकी उपकरण प्राप्त करते हैं, तो वह देश हमें ठहराव की स्थिति में ला सकता है।” डिजिटल युग में बदलती वैश्विक शक्ति संरचनाओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “21वीं सदी का युद्धक्षेत्र अब भूमि या समुद्र नहीं है। पारंपरिक युद्ध अब अतीत की बात हो गई है। आज हमारी शक्ति और प्रभाव ‘कोड, क्लाउड और साइबर’ से तय होते हैं।” धनखड़ ने कहा, “हम गुरुकुल की बात कैसे न करें? हमारे संविधान की 22 दृश्य-प्रतिमाओं में एक गुरुकुल की छवि भी है। हम सदैव ज्ञानदान में विश्वास रखते आए हैं। कोचिंग सेंटर को अपने ढांचे का उपयोग कौशल केंद्रों में परिवर्तित करने के लिए करना चाहिए। मैं नागरिक समाज और जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि इस समस्या की गंभीरता को समझें और शिक्षा में पुनर्संयम लाने हेतु एकजुट हों। हमें कौशल आधारित कोचिंग की आवश्यकता है।” धनखड़ ने अंकों की होड़ के दुष्परिणामों पर चेताते हुए कहा, “पूर्णांक और मानकीकरण के प्रति जुनून ने जिज्ञासा को खत्म कर दिया है, जो कि मानव बुद्धिमत्ता का एक स्वाभाविक अंग है। सीटें सीमित हैं लेकिन कोचिंग सेंटर हर जगह फैले हुए हैं। वे वर्षों तक छात्रों के मन को एक ही ढर्रे में ढालते हैं, जिससे उनकी सोचने की शक्ति अवरुद्ध हो जाती है। इससे कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।” छात्रों को अंकों से ऊपर सोचने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा, “आपकी मार्कशीट और अंक आपको परिभाषित नहीं करेंगे। प्रतिस्पर्धी दुनिया में प्रवेश करते समय, आपका ज्ञान और सोचने की क्षमता ही आपको परिभाषित करेगी।” डिजिटल क्षेत्र की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “एक स्मार्ट ऐप जो ग्रामीण भारत में काम नहीं करता, वह पर्याप्त स्मार्ट नहीं है। एक एआई मॉडल जो क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं समझता, वह अधूरा है। एक डिजिटल उपकरण जो दिव्यांगों को शामिल नहीं करता, वह अन्यायपूर्ण है।” युवाओं से स्थानीय समाधान को वैश्विक स्तर तक ले जाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “भारत के युवाओं को टेक्नोलॉजी की दुनिया के सजग संरक्षक बनना चाहिए। हमें भारत के लिए भारतीय प्रणालियां बनानी होंगी और उन्हें वैश्विक बनाना होगा।” डिजिटल आत्मनिर्भरता में भारत को अग्रणी बनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “हमें अपनी डिजिटल नियति के निर्माता बनना होगा और अन्य देशों की नियति को भी प्रभावित करना होगा। हमारे कोडर, डेटा वैज्ञानिक, ब्लॉकचेन इनोवेटर और एआई इंजीनियर आज के राष्ट्र निर्माता हैं। भारत, जो कभी वैश्विक अग्रणी था, अब केवल उधार की तकनीक का उपयोगकर्ता बनकर नहीं रह सकता। पहले हमें तकनीक के लिए वर्षों प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। अब यह समय सप्ताहों में सिमट गया है। हमें तकनीक का निर्यातक बनना चाहिए।” श्री धनखड़ ने शिक्षा को फैक्टरी की तरह संचालित करने की प्रवृत्ति का विरोध करते हुए कहा, “हमें इस असेंबली-लाइन संस्कृति को समाप्त करना होगा क्योंकि यह हमारी शिक्षा के लिए अत्यंत खतरनाक है। कोचिंग सेंटर राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के विपरीत हैं। यह विकास और प्रगति में बाधाएं उत्पन्न करता है।” उन्होंने कोचिंग सेंटरों द्वारा विज्ञापनों पर भारी खर्च की आलोचना करते हुए कहा, “अखबारों में विज्ञापनों और होर्डिंग्स पर भारी पैसा बहाया जाता है। यह पैसा उन छात्रों से आता है जो या तो कर्ज लेकर या बड़ी कठिनाई से अपनी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। यह धन का उपयुक्त उपयोग नहीं है। ये विज्ञापन भले ही आकर्षक लगें, पर हमारी सभ्यतागत आत्मा के लिए आँखों की किरकिरी बन गए हैं।” अपने उद्बोधन का समापन करते हुए उपराष्ट्रपति ने रटंत शिक्षा की संस्कृति की तीव्र आलोचना की “हम आज रट्टा मारने की संस्कृति के संकट से जूझ रहे हैं, जिसने जीवंत मस्तिष्कों को केवल अस्थायी जानकारी के यंत्रवत भंडारों में बदल दिया है। इसमें न तो कोई आत्मसात है, न कोई समझ। यह रचनात्मक विचारकों की बजाय बौद्धिक ‘ज़ॉम्बी’ तैयार कर रहा है। रट्टा ज्ञान नहीं देता, केवल स्मृति देता है। यह डिग्रियों को गहराई के बिना जोड़ता है।” महात्मा बुद्ध के विचारों से युवाओं को किया प्रेरित- ‘‘अप्प दीपो भवः’’ राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, कोटा के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन की एक नई शुरुआत है। यह वह पड़ाव है जहां से युवा अपने ज्ञान, विचार और दृष्टिकोण से समाज और देश के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। राज्यपाल ने कहा कि भारत ने विश्व को ऐसे कई इंजीनियर दिए हैं जिन्होंने वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन किया है। कोटा को उन्होंने ‘औद्योगिक और शैक्षिक नगरी’ की उपाधि देते हुए कहा कि यह शहर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। अपने उद्बोधन में उन्होंने महात्मा बुद्ध के प्रसिद्ध वाक्य ‘अप्प दीपो भवः’ अपना दीपक स्वयं बनो को उद्धृत करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को चाहिए कि वह अपने भीतर प्रकाश उत्पन्न करे और अपनी मेधा से न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को आलोकित करें। उन्होंने भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, एम. विश्वेश्वरैया, सुंदर … Read more

राजस्थान में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध: कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़

जयपुर, उद्योग एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने शुक्रवार को जोधपुर में औद्योगिक विकास से जुड़े विविध पक्षों पर स्थानीय उद्यमियों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर उन्होंने औद्योगिक प्रगति से संबंधित राज्य सरकार की भावी कार्ययोजना एवं नवीन पहलुओं की जानकारी देते हुए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उद्योग मंत्री  ने बताया कि राज्य सरकार सर्कुलर इकोनॉमी को आधार बनाकर औद्योगिक क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर अग्रसर है। इस नीति के अंतर्गत संसाधनों के पुनः उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे उद्योगों को पर्यावरण-संवेदनशील और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में आधुनिक मॉडल इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना की जाएगी, जो विश्वस्तरीय अधोसंरचना से युक्त होंगे। इन पार्कों के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा युवाओं के लिए व्यापक स्तर पर रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। कर्नल राठौड़ ने घोषणा की कि राज्य सरकार का प्रयास है कि रीको (RIICO) के अंतर्गत शून्य कराधान (Zero Tax) व्यवस्था लागू की जाए, ताकि पूर्ण राजस्व को औद्योगिक अधोसंरचना के विकास में ही पुनर्निवेशित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह नीतिगत परिवर्तन राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को और अधिक सक्षम, प्रतिस्पर्धी तथा निवेशोन्मुख बनाएगा। उन्होंने कहा, "नीतिगत निर्णयों की ज़िम्मेदारी सरकार की है और आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में राजस्थान सरकार उद्योग जगत के सभी अपेक्षित सुधारों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। कर्नल राठौड़ ने यह भी कहा कि औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने हेतु “सरकार – उद्योग – प्रशासन” की त्रिस्तरीय सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोधपुर को विश्वस्तरीय औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने हेतु संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा Ease of Doing Business को सुगम एवं सुलभ बनाने के लिए उठाए जा रहे ये ठोस कदम राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक रूप से अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे। बैठक में सांसद श्री राजेन्द्र गहलोत, लघु उद्योग भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री घनश्याम ओझा, राज्यसभा , श्री प्रसन्नचन्द मेहता, मारवाड चैम्बर आफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज, राजस्थान स्टील एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री प्रकाश जीरावला, लघु उद्योग भारती के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष श्री शंतिलाल बालड, सहित 150 से अधिक प्रबुद्ध उद्यमियो ने भाग लिया।

‘राइजिंग राजस्थान’ एमओयू समीक्षा बैठक- राज्य सरकार प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। इस लक्ष्य को पूरा करने में राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के तहत हुए ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित निवेश एमओयू की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की ऊर्जा आवश्यकता को प्राथमिकता देते हुए इन निवेश एमओयू में शामिल सौर व बैटरी स्टोरेज आधारित परियोजनाओं के विकास के लिए विशेष रोडमैप तैयार किया जाए। श्री शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के तहत हुए एमओयू के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एमओयू के समयबद्ध क्रियान्वयन से प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिल रही है। उन्होंने अधिकारियों को निवेश समझौतों की प्रगति के लिए मिशन मोड पर काम करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता से एमओयू क्रियान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’ के दौरान हुए एमओयू की समीक्षा के लिए त्रि-स्तरीय व्यवस्था की गई है। जिसके तहत 1 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि वाले एमओयू की समीक्षा प्रतिमाह नियमित रूप से मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के तहत हुए 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों में से अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। निवेशकों से रखें संवाद, प्रगति से कराएं अवगत उन्होंने कहा कि विकसित राजस्थान बनाने के लक्ष्य को साकार करने में निवेश का अहम योगदान है। राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव सहायता उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेशकों से निरंतर संवाद स्थापित रखें और मॉनिटरिंग करते हुए प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही, उन्होंने  कहा कि मुख्य सचिव स्तर पर नियमित रूप से अक्षय ऊर्जा से संबंधित एमओयू की नियमित समीक्षा की जाए। एकीकृत पावर कॉरिडोर अपनाने के हो प्रयास श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अक्षय ऊर्जा आधारित परियोजनाओं पंप स्टोरेज तथा बैटरी स्टोरेज जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी जोर दे रही है। प्रदेश में 6 हजार मेगावाट आवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकसित की जाने वाली सौर व बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं के संबंध में विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए तथा इसके लिए एकीकृत पावर कॉरिडोर सहित अन्य नवाचारों को अपनाए जाने के प्रयास किए जाएं।  मुख्यमंत्री ने बैठक में सौर ऊर्जा, कॉम्प्रेस्ड बायो गैस व बायो फ्यूल प्रोजेक्ट्स की बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने प्रगतिरत एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाने एवं शेष रहे एमओयू के श्रेणीवार विभाजन के साथ तय समय सीमा में धरातल पर लागू करने के संबंध में निर्देश दिए।  बैठक में मुख्य सचिव सुधांश पंत सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं संबंधित जिला कलक्टर्स वीसी के माध्यम से जुड़े।

लग्जरी गाड़ी में सवार होकर एसबीआई का एटीएम उखाड़कर ले गए बदमाश

सीकर शहर के जयपुर रोड पर हुई एक सनसनीखेज वारदात में बदमाशों ने पूनिया वाइंस के पास स्थित भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम को उखाड़कर करीब 32 लाख रुपये से अधिक लूट को अंजाम दिया। वारदात करने वाले बदमाश चार से पांच की संख्या में थे और एक लग्जरी गाड़ी में सवार होकर आए थे। घटना की सूचना मिलते ही उद्योग नगर थाना पुलिस सहित पुलिस के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का मौका-मुआयना किया और इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह वारदात रात करीब 3 बजे हुई और पूरी घटना एटीएम के पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। हालांकि अब तक बदमाशों की पहचान नहीं हो पाई है। ये भी पढ़ें: Kota News: आपसी कहासुनी में युवक ने महिला को गोली मारने के बाद की आत्महत्या, महिला अस्पताल में भर्ती सूचना के बाद एफएसएल की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। साथ ही एटीएम इंचार्ज और बैंक के अन्य अधिकारी भी सुबह मौके पर पहुंचे और नुकसान का आकलन किया। पुलिस ने जिले भर में नाकाबंदी करवा दी है और बदमाशों की धरपकड़ के प्रयास तेज कर दिए हैं। पुलिस को शक है कि यह कोई संगठित गिरोह है, जिसने पहले से ही योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि जिस तरीके से एटीएम को उखाड़ा गया और उसे वाहन में लादकर ले जाया गया, उससे साफ है कि बदमाश इस तरह की घटनाओं के लिए पूरी तैयारी के साथ आए थे। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सीकर जिले के अजीतगढ़ और खाटूश्यामजी इलाके में भी ऐसी ही एटीएम लूट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में पुलिस इस मामले को भी उसी गैंग से जोड़कर देख रही है। फिलहाल पुलिस की कई टीमें बदमाशों की तलाश में जुटी हुई हैं और जिले के बाहर भी सुराग जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बासनपीर में हिंसा फैलाने वाले महिलाओं सहित 23 उपद्रवी हिरासत में

जैसलमेर जिले के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत बासनपीर गांव में छतरी पुनर्निर्माण के दौरान उपजे तनाव के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल से जुड़े विभिन्न वीडियो फुटेज, चश्मदीदों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। अब तक इस मामले में कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। गौरतलब है कि 10 जुलाई को पुराने रियासती योद्धाओं की स्मृति में बनाई जा रही छतरियों के पुनर्निर्माण को लेकर अचानक उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष, महिलाएं और बच्चे एकत्र होकर जोरदार विरोध करने लगे। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य के विरोध में नारेबाजी करते हुए पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान भीड़ ने पुलिसकर्मियों व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को घेरते हुए उन पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए मौके पर तैनात अधिकारियों पर जानलेवा हमला और राजकार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल से जुड़े विभिन्न वीडियो फुटेज, चश्मदीदों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। अब तक इस मामले में कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि मामले की तह में जाकर की गई जांच में यह सामने आया कि पूरे घटनाक्रम के पीछे गांव का ही निवासी हासम खान मुख्य भूमिका में था। हासम खान ने ही ग्रामीणों को भड़काया और प्रशासन को भ्रमित करते हुए समुदाय विशेष के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किए, जिससे गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया। एसपी चौधरी के अनुसार हासम खान ने सोची-समझी साजिश के तहत दोनों पक्षों को भड़काने का कार्य किया। उसने पुलिस और प्रशासन को एकपक्षीय परिवाद देकर गुमराह किया और साथ ही ग्रामीणों को धार्मिक भावना से उकसाया। परिणामस्वरूप गांव में तनाव का माहौल बना और छतरी निर्माण कार्य के दौरान हिंसात्मक झड़प हुई। पुलिस की जांच का दायरा सिर्फ हासम खान तक सीमित नहीं रहा। अब उसके पीछे की संभावित साजिशों और अन्य लोगों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है। एसपी ने बताया कि हासम खान इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ मोहरा नहीं, बल्कि योजना का सूत्रधार था और अब पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि इसके पीछे किन-किन लोगों की भूमिका रही। इसके अलावा अन्य उपद्रवियों की पहचान के लिए वीडियो फुटेज, फोटो और स्थानीय इनपुट्स के आधार पर दबिशें दी जा रही हैं। पुलिस उन सभी लोगों को चिन्हित करने में लगी है, जिन्होंने इस हिंसा में भाग लिया और कानून व्यवस्था को बाधित किया। गांव में फिलहाल शांति का माहौल है और पुलिस द्वारा लगातार गश्त कर क्षेत्र में कानून व्यवस्था को कायम रखा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह से सतर्क है और किसी भी प्रकार की अफवाह या उकसावे को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है।