samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की 95वीं पुण्य तिथि पर किया नमन

भोपाल 

अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की 95वीं पुण्य तिथि पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को उनकी जन्मस्थली चंद्रशेखर आज़ाद नगर स्थित ऐतिहासिक आज़ाद कुटिया पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर राष्ट्र के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। अनुसूचित जाति कल्‍याण मंत्री  नागर सिंह चौहान, सांसद मती अनीता चौहान, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाडे, आईजी  अनुराग, कलेक्टर मती नीतू माथुर, पुलिस अधीक्षक  रघुवंश सिंह भदौरिया सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आजाद कुटिया में क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के स्वतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय योगदान पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने आज़ाद कुटिया परिसर में ही स्थापित संग्रहालय का भी अवलोकन किया, जहां उनके जीवन, संघर्ष और क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज, चित्र और स्मृति चिह्न संजोए गए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत पर स्मरण कर कहा कि भारत के सभी क्रांतिकारी नायकों का स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान रहा है। शहीद चंद्रशेखर आज़ाद जैसे वीर क्रांतिकारी ने अनेक कठिनाइयों के बावजूद अपने अदम्य साहस और त्याग से तत्कालीन समय में स्वतंत्रता की अलख को रौशन रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदिवासी अंचलों के नायकों के संघर्ष को भी याद किया और कहा कि उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध कर स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय नायक शहीद छीतू किराड़ के बलिदान को भी नमन करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया।

आलीराजपुर जिले में 23 जुलाई 1906 को जन्मे चंद्रशेखर आज़ाद का प्रारंभिक जीवन तत्कालीन भाबरा वर्तमान चन्द्रशेखर आजाद नगर की पावन भूमि पर बीता। बचपन में उन्होंने भील बालकों के साथ रहकर धनुष-बाण चलाना और निशानेबाजी की शिक्षा प्राप्त की। आदिवासी अंचल में पले-बढ़े आज़ाद ने यहीं से साहस, स्वाभिमान और संघर्ष की प्रेरणा ली, वहीं से उनके क्रांतिकारी जीवन की आधारशिला बनी। 27 फरवरी 1931 को, इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क (अब चंद्रशेखर आज़ाद पार्क) में अपने एक साथी के विश्वासघात के कारण पुलिस ने उन्हें घेर लिया। उस दौरान उनके पास सिर्फ एक गोली बची थी, तो उन्होंने अपने संकल्प के अनुसार स्वयं को गोली मारकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। पूर्व में भाबरा के नाम से प्रसिद्ध इस तहसील का नाम परिवर्तित कर आधिकारिक तौर पर 2011 में चंद्रशेखर आज़ाद नगर कर दिया गया है। उनकी स्मृतियों से जुड़ा उनके पैतृक घर को आज़ाद कुटिया के रूप में संरक्षित किया गया है। यह अब शहीद स्मारक और पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित हो चुका है।

प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बस स्टैंड स्थित चन्द्रशेखर उद्यान में अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। इस दौरान अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान, क्षेत्रीय सांसद मती अनीता नागर सिंह चौहान, कलेक्टर मती नीतू माथुर, पुलिस अधीक्षक  रघुवंश सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here