samacharsecretary.com

चीन का दो टूक संदेश: ईरान के दमन पर साथ, अमेरिका को ग्रीनलैंड मुद्दे पर खुली चुनौती

ईरान
ईरान में जारी जनविरोध और अशांति के बीच चीन ने स्पष्ट रूप से तेहरान सरकार का समर्थन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को कड़ा संदेश दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह “आशा करता है कि ईरान अपनी मौजूदा कठिनाइयों से उबर जाएगा” और देश में “स्थिरता” बनी रहेगी। बीजिंग ने इस बयान के साथ ही यह भी दोहराया कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है। चीन का यह रुख ऐसे समय आया है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर सख्ती, गिरफ्तारियां और कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर पश्चिमी देश चिंता जता रहे हैं।यही नहीं, चीन ने ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर भी अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का यह बयान केवल ईरान के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में एक व्यापक संदेश है कि सत्तावादी सरकारों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को ‘घरेलू मामला’ मानते हुए उस पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए। चीन का यह रुख अमेरिका और यूरोपीय देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकार आधारित हस्तक्षेप की सोच से टकराता हुआ नजर आता है। इससे साफ है कि ईरान संकट केवल एक देश का आंतरिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और वैचारिक टकराव का नया मोर्चा बनता जा रहा है। ईरान में दमन को चीन ने खुला समर्थन देकर पूरी दुनिया को सख्त संदेश दिया है “अपने काम से काम रखो।”  हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठोनों और पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा, गिरफ्तारियां और सख्त कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। ऐसे में चीन का यह रुख साफ तौर पर दमनकारी नीतियों के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका को अपने “स्वार्थी हितों” के लिए दूसरे देशों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। चीन ने स्पष्ट किया कि आर्कटिक में उसकी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के पूरी तरह अनुरूप हैं और किसी भी देश की संप्रभुता के खिलाफ नहीं हैं। बीजिंग के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र में सभी देशों के स्वतंत्र और शांतिपूर्ण गतिविधियों के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।चीनी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका बार-बार दूसरे देशों और क्षेत्रों को बहाना बनाकर अपने रणनीतिक और सैन्य हित साधना चाहता है। ग्रीनलैंड को लेकर हाल के अमेरिकी बयानों और गतिविधियों ने आर्कटिक को एक बार फिर वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बना दिया है।विशेषज्ञों का मानना है कि आर्कटिक में प्राकृतिक संसाधनों, नए समुद्री मार्गों और रणनीतिक बढ़त को लेकर अमेरिका और चीन आमने-सामने आ रहे हैं। चीन का यह बयान साफ संकेत है कि बीजिंग अब आर्कटिक में अमेरिकी दबदबे को खुली चुनौती देने के मूड में है।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here