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जामिया छात्रसंघ चुनाव पर बनी सहमति, 15 दिनों में मतदान कराने के आदेश पर छात्रों की टाइमलाइन की मांग

 नई दिल्ली

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन का नतीजा अब सामने आ गया है. छात्रों ने धरना देने के साथ भूख हड़ताल भी की. 24 अक्टूबर को प्रदर्शन के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए सभी कोर्स की ऑफलाइन क्लासेज को अगले आदेश तक ऑनलाइन करने का फैसला लिया. इसके बाद 25 अक्टूबर को ऑनलाइन क्लास के फैसले के विरोध में भी छात्र कैंपस के गेट नंबर 7 के बाहर जुटे। 

लेकिन अब सोमवार को प्रशासन ने करीब दो दशक बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का ऐलान किया है. जारी किए गए आदेश के मुताबिक, छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे. हालांकि, संविधान को मंजूरी देने की निश्चित तारीख तय नहीं होने के कारण चुनाव की समयसीमा को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं। 

क्या है पूरा विवाद?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ को साल 2006 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भंग कर दिया था. इसके बाद से छात्र निर्वाचित छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग उठाते रहे हैं.लेकिन इसके कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा था. छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ के जरिए वे अपनी समस्याओं और मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने लोकतांत्रिक तरीके से रख सकते हैं। 

हाल के दिनों में भी छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर परिसर में प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन का ताजा आदेश सामने आया है. प्रशासन के मुताबिक, चुनाव की समयसीमा छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने से जुड़ी होगी. यानी चुनाव कराने के लिए संविधान को मंजूरी मिलना अहम कदम है। 

कब होंगे चुनाव?
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ के चुनाव संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर कराए जाएंगे. हालांकि, दिए गए आदेश के मुताबिक चुनाव की निश्चित तारीख संविधान को मंजूरी मिलने के बाद ही स्पष्ट होगी. करीब 20 साल बाद चुनाव कराने की घोषणा को छात्रसंघ की बहाली की मांग के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि छात्रसंघ के संविधान को कब मंजूरी मिलती है और चुनाव की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। 

कल जमकर हुआ था प्रदर्शन
लगातार हो रहे विरोध के चलते यूनिवर्सिटी ने सुरक्षा कारणों से सभी क्लासेज को ऑनलाइन मोड में कर दिया था जिसके बाद से छात्रों का गुस्सा भड़क उठा. ऑफलाइन क्लास बंद किए जाने के बाद से ही कैंपस में माहौल गरमाया हुआ था. इस कड़ी में गेट नंबर 7 के बाहर जोरदार हंगामा देखने को मिला. कैंपस के बाहर बड़ी संख्या में छा6 प्रदर्शन करने लगे। 

सुबह 4:30 बजे छात्रों से बात करने पहुंचे रजिस्ट्रार
इस बीच एक और खबर ने तूल पकड़ लिया. जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है. सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत करने पहुंचे. वह अपने साथ प्रशासन का एक नोटिस लेकर आए और छात्रों को सौंपा. रजिस्ट्रार ने दावा किया कि छात्रों की मांगें पूरी कर दी गई हैं और उनसे प्रदर्शन खत्म करने की अपील की। 

हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन के नोटिस को खारिज कर दिया. छात्रों का कहना है कि इसमें छात्रसंघ की बहाली को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है. उनका आरोप है कि नोटिस में न तो छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी देने की कोई निश्चित समयसीमा बताई गई है और न ही चुनाव कराने की तारीख स्पष्ट की गई है। 

प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग पर भी स्पष्टता नहीं
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का यह भी कहना है कि उनकी मांगों में यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर का इस्तीफा भी शामिल है, लेकिन प्रशासन के नोटिस में इस मुद्दे का कोई जिक्र नहीं है. छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मुख्य मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं लिया जाता, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं किया जाएगा। 

छात्रों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल आश्वासन हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि कैंपस में लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्रों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए है. उनका तर्क है कि छात्रसंघ की बहाली और चुनाव को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय होना जरूरी है. फिलहाल, छात्रों ने प्रशासन के नोटिस को अपर्याप्त बताते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही है। 

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