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अर्थतंत्र को सशक्त और सुप्रबंधित करने में डॉ. मोहन यादव का योगदान

अर्थ तंत्र को सुप्रबंधित और सशक्त करते डॉ मोहन यादव 

विश्व के महानतम अर्थशास्त्री कौटिल्य के अनुसार प्रजा के सुख में राजा का सुख निहित है।इसलिए राजा को –

तस्मान्नित्योत्थितो राजा,कुर्यादर्थानुशासनम् ।

अर्थस्य मूलमुत्थानमनर्थस्य विपर्ययः ।।

अर्थात राजा सदैव उद्यमशील रहकर,अर्थमूल में वृद्धि करे। इसके विपरीत कार्य अनर्थ या हानि के कारण बनते हैं ।
 इस मंत्र को आत्मसात करते हुए भाजपा की डॉ मोहन यादव सरकार प्रगति पथ पर अग्रसर है।अर्थ तंत्र को उन्नत कर रही है।मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के कुशल वित्तीय सुप्रबंधन द्वारा राज्य का अर्थ तंत्र उन्नत हो रहा है, सशक्त हो रहा है।वित्त विभाग द्वारा श्रेष्ठ वित्तीय प्रबंधन मानकों को अपनाकर शून्य आधारित बजट प्रक्रिया के अनुसार बजट तैयार किया जा रहा है। तीन वर्षों के लिये रोलिंग बजट की प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें बजट प्रक्रिया से संबंधित नवाचार अपनाएं जा रहे हैं। वित्तीय संस्थाओं द्वारा जारी प्रतिवेदनों में मध्यप्रदेश के वित्तीय प्रबंधन,बजटीय विश्वसनीयता तथा गुणवत्ता को सराहा गया है।दूरदर्शी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 5 वर्षों में बजट के आकार को दोगुना कर वर्ष 2028-29 तक 7 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।पूंजीगत निवेश को बढ़ाना,सड़क विस्तार एवं संधारण, सिंचाई क्षेत्रफ़ल जल संचय क्षमता विस्तारण,बिजली,सौर,पवन ऊर्जा उत्पादन,वितरण सुविधा का विस्तार, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा का विकास और उद्योग,रोजगार के अवसर वृद्धि हेतु,निवेश आकर्षित करने आदि के लक्ष्यों को पूर्ण कर,विकसित भारत निर्माण के परम लक्ष्य में योगदान देना है।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा प्रदेश में पूंजीगत व्यय में निरंतर, सतत वृद्धि की जा रही है।

पूंजीगत व्यय से राज्य के इन्फ्रास्ट्रक्चर, अवसंरचना में गुणात्मक वृद्धि हुई है।वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय,केपिटल एक्सपेंडिचर लगभग 85 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।प्रभावी पूंजीगत व्यय लगभग 90 हजार करोड़ रुपये है।प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में नियमित वृद्धि बनी हुई है।वर्ष 2024-25 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 15 लाख 03 हजार 395 करोड़ रूपये रहा एवं प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 52 हजार 615 रूपये रही है।वर्तमान वित्त वर्ष में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 17 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आर्थिक संकल्पों को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पूर्ण मनोयोग से सिद्ध कर रहे हैं।वर्तमान में वित्तीय मानकों के आधार पर प्रदेश की स्थिति अत्यधिक सुदृढ़ है।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशन में संचालनालय कोष एवं लेखा द्वारा अनेक नवाचार लागू किए गए हैं।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की आर्थिक शुचिता और नवाचार के कारण लगभग 50 वर्षों से प्रचलित व्यवस्था को समाप्त किया गया है जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में मुख्यमंत्री एवं समस्त मंत्री स्वयं ही आयकर का भुगतान कर रहे हैं।पूर्व में मुख्यमंत्री,मंत्रीगणों, मुख्य सचिव का वार्षिक आयकर,शासकीय कोष द्वारा वहन किया जाता था।

वाणिज्यिक कर अर्थव्यवस्था को सुप्रबंधित, सशक्त कर रहा है। वाणिज्य कर द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में 55 हजार 634 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक कुल 34 हजार 829 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक डाटा एनालिटिक्स आधारित चिन्हित प्रकरणों में प्रवर्तन कार्यवाहियों से रुपये 967 करोड़ एवं ऑडिट की कार्यवाही से रुपये 404 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। 

नवाचारी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की दूरदर्शी पहल द्वारा मध्य प्रदेश, देश का प्रथम राज्य बन गया है जहाँ पंजीयन विभाग में 75 प्रकार के दस्तावेज पट्टा, पॉवर ऑफ अटर्नी, बंधक इत्यादि का घर बैठे वीडियो केवायसी के माध्यम से पंजीयन किया जा रहा है।पंजीयन विभाग के सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 में स्वर्ण पदक मिला है। प्रदेश के 8 करोड़ से अधिक नागरिकों के लिये यह गौरव का विषय है।पंजीयन विभाग को वर्ष 2023-24 में 10 हजार 325 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।वर्ष 2024-25 में 11 हजार 355 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।वर्ष 2025-26 में 13 हजार 920 करोड रूपये का लक्ष्य रखा गया है।नवंबर 2025 तक 7 हजार 580 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हो गया है।प्रतिवर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

विभिन्न विभागों में अनेक आर्थिक सुधारों एवं नवाचारों को अपनाकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रहे हैं।मध्य प्रदेश के अर्थ तंत्र को, अर्थमूल को बढ़ा रहे हैं।

इति श्री।                                                                                                                           लेखक- सत्येंद्र कुमार जैन 

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