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घाटशिला सीट पर चुनावी शोर हुआ शांत, 14 को मतदाता तय करेंगे 13 उम्मीदवारों का भविष्य

घाटशिला

घाटशिला विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए प्रचार का समय आज शाम से थमा चुनाव प्रचार। सोमवार को सभी मतदान केंद्रों पर मतदान कर्मियों को सुरक्षा बलों के साथ ईवीएम देकर भेजा जाएगा। इसकी सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।

उक्त अवधि के पश्चात प्रचार करते हुए पाए जाने या विधानसभा क्षेत्र के बाहर के राजनीतिक व्यक्ति, कार्यकर्ताओं को संबंधित विधानसभा क्षेत्र में मौजूद पाए जाने पर सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। मतदान की तिथि से 72 घंटे पूर्व असामाजिक व विघटनकारी तत्वों की घुसपैठ को रोकने के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं व अंतर जिला सीमाएं भी सील होगी। वही, भाजपा और झामुमो के नेताओं द्वारा अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में पूरी ताकत झोंकी गई। आज भी सभी प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंकेगे।

बता दें कि झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। दोनों ही संताल समाज से आते हैं। इसलिए संभावना है कि आदिवासी मत दोनों तरफ जाएगा। भाजपा के अपने सहयोगी लोजपा के सहारे चार प्रतिशत दलित मतों को साथ लाने की कोशिश में हैं। झामुमो गठबंधन के मुस्लिम मंत्री भी अल्पसंख्यक मतों को अपने पाले में लाने के लिए लगे हैं, लेकिन भाजपा आदिवासी मतों के अलावा कुड़मी, पिछड़ी और अन्य दलित मतों पर नजर रख रही है। चंपाई के गहरे मित्र विद्युतवरण महतो की भी इस क्षेत्र में काफी पकड़ है। वे तीन बार से जमशेदपुर लोकसभा के सांसद भी हैं।

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