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बिहार में आपदा से निपटने 20 जिलों में बनेंगे इमरजेंसी रिस्पॉन्स व ट्रेनिंग सेंटर

पटना.

बिहार में आपदा प्रबंधन को और सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने दूसरे चरण में प्रदेश के 20 जिलों में “डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी रिस्पॉन्स फैसिलिटी-कम-ट्रेनिंग सेंटर” की स्थापना का ऐलान किया है। इससे आपदा के समय त्वरित राहत, बेहतर समन्वय और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत होगी।

38 जिलों में चरणबद्ध तरीके से बनेगा आपदा केंद्र
आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने बताया कि राज्य के सभी 38 जिलों में चरणबद्ध तरीके से यह केंद्र स्थापित किए जाने की योजना है। फिलहाल पहले चरण में 18 जिलों का चयन किया गया था, जिनमें से 17 जिलों में केंद्र पूरी तरह चालू हो चुके हैं, जबकि पटना जिले में निर्माण कार्य प्रगति पर है।

दूसरे चरण में 20 जिलों में निर्माण कार्य
संयुक्त सचिव ने बताया कि दूसरे चरण में भूमि की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए 20 जिलों में केंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। इन केंद्रों में अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, जहां एसडीआरएफ टीमों की तैनाती, प्रशिक्षण, उपकरणों का भंडारण और आपातकालीन समन्वय की व्यवस्था रहेगी।

आपदा राहत में बड़ा फैसला: अनुग्रह राशि बढ़ी
राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों को मिलने वाली ग्रैच्युटस रिलीफ राशि 6000 रुपये से बढ़ाकर 7000 रुपये कर दी है। सिद्दीकी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बाढ़ प्रभावित जिलों के 9,71,678 परिवारों को कुल 680.17 करोड़ रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है।

बाढ़ आश्रय स्थलों का तेजी से निर्माण
आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए राज्य के 10 बाढ़ प्रभावित जिलों में 100 “बाढ़ आश्रय स्थल” बनाए जा रहे हैं। इनमें से 96 आश्रय स्थल पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष चार का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इन जिलों में कटिहार, सीतामढ़ी, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण, पूर्णिया, किशनगंज, दरभंगा, शिवहर, अररिया और मधुबनी शामिल हैं।

312 करोड़ का अत्याधुनिक SDRF मुख्यालय
संयुक्त सचिव ने बताया कि 19 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहटा में बने नए एसडीआरएफ मुख्यालय भवन का उद्घाटन किया था। यह भवन 312.30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है, जिसमें प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र और आवासीय परिसर शामिल हैं। इससे राज्य की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

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