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किसानों की आय बढ़ाने के लिए फार्म पॉन्ड व सहकारिता मॉडल पर जोर

भोपाल

मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार ने सोमवार को भोपाल स्थित मध्यप्रदेश राज्य मत्स्य महासंघ (सहकारी) मर्यादित के सभागार में विभाग की समीक्षा की। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, प्रदेश में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति एवं आगामी कार्य योजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार आगामी 2 वर्षों में प्रदेश में मत्स्य उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि “किसान कल्याण वर्ष” में मत्स्य पालकों की आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की जाए तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले मछुआरों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जाए। राज्यमंत्री  पंवार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला स्तर पर मत्स्य महासंघ के माध्यम से मछुआरों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जाए तथा रोजगार के नवीन अवसर सृजित किए जाएं।

राज्यमंत्री  पंवार ने मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर को प्रोत्साहित करने के लिये "फार्म पॉन्ड मॉडल" की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया। साथ ही सहकारिता के माध्यम से मछली पालन के साथ सिंघाड़ा, कमलगट्टा एवं मखाना जैसी पूरक गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए, जिससे मत्स्य पालकों की आय में बहुआयामी वृद्धि सुनिश्चित हो सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। राज्यमंत्री  पंवार ने बताया कि वर्तमान में विभिन्न वर्गों की 2645 मछुआ समितियां पंजीकृत हैं, जिनकी कुल सदस्य संख्या 1,00,197 है। प्रदेश में 4.42 लाख हैक्टेयर जलक्षेत्र उपलब्ध है, जिसमें से 99 प्रतिशत क्षेत्र को मत्स्य पालन के अंतर्गत लाया जा चुका है। मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है। मंत्री  पंवार ने कहा कि जिन तालाबों में 6 से 9 महीने तक पानी रहता है, वहां बोनसाई सीड के जरिए मत्स्य उत्पादन किया जाए। मत्स्य समितियों की जांच कर फर्जी और निष्क्रिय सदस्यों को हटाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि असली मछुआरों को लाभ मिल सके।

समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह, एमडी  अनुराग चौधरी, डायरेक्टर  मनोज कुमार पथरोलिया उपस्थित रहे। बैठक में प्रदेश को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया।

 

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