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भारत के गणतंत्र दिवस पर यूरोप की बड़ी मौजूदगी, चीफ गेस्ट और FTA पर अहम बातचीत

 नई दिल्ली

गणतंत्र दिवस 2026 भारत के लिए हर मायनों में ख़ास होने जा रहा है. चाहे कूटनीति हो या विश्व स्तर पर आर्थिक रिश्तों के लिहाज़ से. इस बार गणतंत्र दिवस 2026 में चीफ गेस्ट के तौर पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित किया गया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा समारोह में शामिल होंगे. 

माना जा रहा है कि जब ये दो शीर्ष नेता भारत आएंगे तो भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते और शिखर सम्मेलन भी आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है, जहां दोनों पक्षों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर ज़रूर चर्चाएं और संभावित समझौते पर फोकस रहेगा. 

दोनों नेताओं का नई दिल्ली दौरा भारत और EU के बीच सबसे हाई लेवल पर एक नए रणनीतिक और आर्थिक तालमेल का संकेत देती हैं। गणतंत्र दिवस पर EU के टॉप नेताओं को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाना एक मजबूत प्रतीकात्मक महत्व रखता है। इसके साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के नई दिल्ली के इरादे को दिखाता है।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा ऐसे समय दिल्ली आ रहे हैं जब भारत-EU संबंधों में तेजी आई है। खासकर फरवरी 2025 में EU कमिश्नरों की भारत यात्रा के बाद दोनों काफी करीब आए हैं। यह दौरा व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाने का रास्ता तैयार करेगा।

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने 8 दिसंबर को नई दिल्ली में लंबे समय से अटके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत फिर से शुरू की थी। इसमें दोनों पक्षों का लक्ष्य इस साल के आखिर तक दशक भर पुरानी बातचीत को खत्म करना है। यह बैठक एक अहम समय पर हो रही है, क्योंकि भारत और EU इस महत्वाकांक्षी समझौते में बची हुई कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में सामान और सेवाओं के व्यापार, निवेश नियमों, सरकारी खरीद और रेगुलेटरी स्टैंडर्ड, से जुड़े बाकी मुद्दों को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है। इसमें सैनिटरी और टेक्निकल जरूरतें शामिल हैं। कुछ मुख्य मुद्दे अभी भी बने हुए हैं, जिनमें EU का प्रस्तावित कार्बन टैक्स, ऑटोमोबाइल और स्टील के लिए मार्केट एक्सेस, मूल नियम और सेवाओं में रुकावटें शामिल हैं।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। जबकि EU पक्ष का नेतृत्व यूरोपियन कमीशन में ट्रेड के डायरेक्टर-जनरल सबाइन वेयांड कर रही हैं। भारत ने EU के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) पर भी चिंता जताई है, जो 1 जनवरी से लागू होगा। यह स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य कार्बन-इंटेंसिव सामानों के निर्यात पर उनके कार्बन फुटप्रिंट से जुड़े अतिरिक्त टैक्स लगाकर असर डाल सकता है।

भारत और यूरोपीय संघ लंबे समय से एफटीए को लेकर चर्चा कर रही है. बिज़नेस, इन्वेस्टमेंट, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन जैसे विषयों पर यह समझौता दोनों पक्षों के लिए स्ट्रैटेजिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. अब गणतंत्र दिवस पर यूरोपियन यूनियन के दो शीर्ष नेताओं की मौजूदगी साफ़ इस बात की संकेत दे रही है कि यूरोपियन यूनियन भारत के साथ रिश्तों को महज़ कूटनीतिक लेवल पर नहीं, बल्कि आर्थिक साझेदारी के नए लेवल पर ले जाना चाहते हैं.
यूरोपीय संघ-भारत व्यापार वार्ता और गणतंत्र दिवस समारोह 2026 का एक ही समय के आसपास होने की वजह से यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है. राजनियक हलकों का मानना है कि भारत आर्थिक शक्तियों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को प्रायोरिटी दे रहा है. यह भारत की बैलेंस्ड और मल्टीलेटरल विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है.

इस साल यानि 2025 में भारत ने गणतंत्र दिवस में चीफ गेस्ट के तौर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हुए थे. राष्ट्रपति पद संभालने के बाद प्रबोवो की यह भारत की पहली यात्रा थी. 1950 के बाद यह चौथा मौका रहा जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए.

 

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