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संस्कृति से राजनीति तक: बिहार दिवस पर PM मोदी और शाह ने दिलाई आपातकाल की याद

पटना.

बिहार दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दी गई शुभकामनाएं राजनीतिक रूप से भी कई संकेत छोड़ गई हैं। अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को रेखांकित करते हुए इसे देश के लिए मार्गदर्शक बताया। मोदी एक्स पर बिहार दिवस के अवसर पर राज्य के अपने सभी परिवारजनों को अनेकानेक शुभकामनाएं दीं।

PM मोदी ने लिखा, "भारतीय विरासत को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने वाला हमारा यह प्रदेश आज प्रगति के नित-नए अध्याय गढ़ने में जुटा है।" मुझे विश्वास है कि विकसित बिहार के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में यहां के कर्मठ एवं ऊर्जावान लोगों का समर्पण और सामर्थ्य बहुत काम आएगा।

बिहार को बताया बौद्धिक चेतना की भूमि
गृह मंत्री ने जिस तरह बिहार को सामाजिक न्याय और बौद्धिक चेतना की भूमि बताया, उसे राज्य की राजनीति के मौजूदा विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर जब बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति लंबे समय से केंद्र में रही है, ऐसे में उनका यह बयान भाजपा के व्यापक सामाजिक विस्तार के प्रयास का संकेत माना जा रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसी ऐतिहासिक शिक्षण परंपराओं का उल्लेख कर उन्होंने बिहार के गौरवशाली अतीत को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ा। यह भी संदेश देने की कोशिश रही कि केंद्र सरकार बिहार की बौद्धिक विरासत को सम्मान देने के साथ उसे विकास के एजेंडे में शामिल कर रही है। स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल का जिक्र करते हुए शाह ने बिहार की राजनीतिक जागरूकता और संघर्षशीलता को रेखांकित किया। इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से जोड़ते हुए उन्होंने राज्य की भूमिका को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने का प्रयास किया।

सामाजिक संदेश देने की कोशिश
बिहार में आगामी सत्ता परिवर्तन समीकरणों को देखते हुए इस तरह के संदेशों के जरिए भाजपा लोगों के बीच भावनात्मक और वैचारिक जुड़ाव मजबूत करना चाहती है। विकास, विरासत और सामाजिक समरसता को एक साथ रखकर पार्टी अपने एजेंडे को व्यापक बनाने में जुटी है। संदेश के अंत में गृह मंत्री ने बिहार के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इंटरनेट मीडिया पर इस पोस्ट को व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है, जो यह दर्शाता है कि बिहार दिवस जैसे अवसर अब राजनीतिक संवाद का भी महत्वपूर्ण मंच बनते जा रहे हैं।

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