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गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक

गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी

छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र का छोटा सा गांव धोवाताल आज आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनकर उभर रहा है। जहां कई स्थानों पर गौठान योजनाएं निष्क्रिय हैं, वहीं इस गांव की 60 महिलाओं ने गौठान को किराए पर लेकर उसे आजीविका के सशक्त केंद्र में बदल दिया है। लगभग 150 घरों और 510 की आबादी वाले इस गांव में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं ने आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिखी है।

पांच समूहों ने संभाली जिम्मेदारी

गांव में पांच महिला समूह मिलकर विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। बजरंगबली समूह बकरी पालन, सिद्धबाबा समूह मुर्गी पालन, महिला सशक्तिकरण समूह किराना दुकान, सीता महिला समूह बहुआयामी गतिविधियों (सुअर, बटेर व मछली पालन) तथा दुर्गा महिला समूह किराना व मनिहारी दुकान संचालित कर रहे हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
सहायता राशि को बनाया निवेश
महिलाओं को क्लस्टर स्तर से मिली 60-60 हजार रुपये की सहायता राशि को खर्च करने के बजाय व्यवसाय में निवेश किया गया। आज उनके उत्पाद स्थानीय हाट-बाजारों के साथ-साथ मध्यप्रदेश तक पहुंच रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं।

पलायन पर लगी रोक

इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव गांव में पलायन रुकने के रूप में सामने आया है। जो युवा पहले रोजगार की तलाश में रायपुर, गुजरात और मेरठ जैसे शहरों की ओर जाते थे, अब उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

NRLM से मिली दिशा

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से मिले मार्गदर्शन और सहयोग ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। समूह की महिलाओं का कहना है कि अब पशुपालन और दुकान संचालन से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है।

युवाओं को मिला स्थानीय रोजगार

गांव के युवाओं ने बताया कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही काम मिलने से आय के साथ संतोष भी मिल रहा है।
प्रशासन ने सराहा पहल
ग्राम सरपंच गोकुल प्रसाद परस्ते
ने बताया कि गौठान आधारित गतिविधियों से गांव में आर्थिक समृद्धि आई है और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। जनपद भरतपुर के अधिकारियों ने भी धोवाताल मॉडल को प्रेरणादायक बताया है।

प्रेरणादायक बना धोवाताल

धोवाताल की यह पहल दर्शाती है कि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।

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