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स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक प्रगति: गांव-ढाणी तक मिल रहा बेहतर इलाज, दो वर्षों में मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर — भजनलाल शर्मा

जयपुर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और संवेदना से जुड़ा क्षेत्र है। विगत दो वर्षों में राज्य सरकार ने अपने बजट में स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आगे भी स्वास्थ्य के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाया है। इससे गांव-ढाणी तक प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क उपचार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बजट पूर्व संवाद का उद्देश्य यही है कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के सुझावों से एक ऐसा बजट बने, जिससे प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और राजस्थान स्वास्थ्य में सिरमौर बने। शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार ‘पहला सुख निरोगी काया’ अर्थात् स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा सुख होता है। इसी अवधारणा के साथ प्रदेश में लागू की गई मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत अब तक 37 लाख मरीजों को 7 हजार 300 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज उपलब्ध करवाया गया है। इसी तरह, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत औषधियां, सर्जिकल एवं सूचर्स उपलब्ध करवाने में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। जिला चिकित्सालयों में बुजुर्गों के लिए रामाश्रय वार्ड खोले हैं, जहां उन्हें सम्मान के साथ स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। चिकित्सा सेवा का क्षेत्र, दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी से निभाए स्वास्थ्यकर्मी
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा सेवा का क्षेत्र है। हर रोगी को संवेदनशीलता के साथ अच्छा उपचार मिले और जीवन रक्षा का उद्देश्य फलीभूत हो। यही इस क्षेत्र की महानता है। चिकित्सकों एवं इस क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को चाहिए कि वे अपने दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाए। राज्य सरकार ऐसे सेवाभावी कार्मिकों के सम्मान में कोई कमी नहीं रखेगी। लेकिन जनता के पैसे का दुरूपयोग करने वाले एवं स्वास्थ्य योजनाओं में अनियमितता करने वाले कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि प्रदेश को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और 15 नवीन मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। साथ ही, भीलवाड़ा, धौलपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वारा एवं बूंदी में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना की गई है। हमारा प्रयास है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिले। इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
8 हजार 700 चिकित्सा संस्थान आयुष्मान आरोग्य मंदिर में परिवर्तित
मुख्यमंत्री ने कहा कि निचले स्तर तक चिकित्सा सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। विगत दो वर्षों में 7 उप जिला अस्पताल, 2 सैटेलाइट अस्पताल, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित कुल 14 संस्थानों का जिला चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन तथा 7 नवीन सैटेलाइट अस्पतालों की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि 129 उप स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में क्रमोन्नयन किया है। करीब 8 हजार 700 चिकित्सा संस्थानों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में परिवर्तित किया गया एवं 412 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए गए। उन्होंने कहा कि बालोतरा में नवीन जिला आयुर्वेद चिकित्सालय और ब्यावर, दूदू, डीग, डीडवाना-कुचामन और अनूपगढ़ में जिला आयुष चिकित्सालय शुरू किए गए हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों के सुझावों को गंभीरता के साथ सुना। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों को आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोरा, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी एवं आईएलबीएस हॉस्पिटल, नारायणा हृदयालय ग्रुप, महावीर विकलांग सेवा समिति, इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन, यूनीसेफ, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, आईएमए राजस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं आरयूएचएस के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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