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इतिहास रचा! राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बनीं पहली भारतीय राष्ट्रपति जिन्होंने उड़ाया राफेल लड़ाकू विमान

अंबाला 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल फाइटर जेट की सवारी की है। उन्होंने अंबाला के एयरफोर्स बेस से उड़ान भरी। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। अहम बात यह है कि अंबाला एयरबेस से ही भारत के फाइटर जेट्स ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उड़ान भरी थी और पाकिस्तान एवं पीओके में घुसकर मार की थी। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया था और पाकिस्तान ने भी इसका जवाब देने की कोशिश की थी। इस दौरान अंबाला एयरबेस का भारत की ओर से इस्तेमाल किया गया था।

राफेल विमान में चढ़ने से पहले राष्ट्रपति ने ‘जी-सूट’ पहना था। हाथ में हेलमेट लिए और धूप का चश्मा लगाए मुर्मू ने पायलट के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। पूर्वाह्न 11:27 बजे विमान के उड़ान भरने से पहले राष्ट्रपति ने विमान के अंदर से हाथ हिलाकर अभिवादन किया। आज सुबह वायुसेना स्टेशन पहुंचने पर राष्ट्रपति को औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। इससे पहले सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर मुर्मू ने 8 अप्रैल, 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी और वह ऐसा करने वाली तीसरी राष्ट्रपति बनी थीं।

अंबाला में ही भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने थे राफेल जेट
फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल लड़ाकू विमान को सितंबर 2020 में अंबाला वायुसेना स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। पहले पांच राफेल विमानों को 17वें स्क्वाड्रन 'गोल्डन एरोज' में शामिल किया गया था। ये विमान 27 जुलाई, 2020 को फ्रांस से यहां पहुंचे थे। राफेल 2020 में अंबाला वायु सेना स्टेशन पर भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल हुए। ये 17 स्क्वाड्रन 'गोल्डन एरो' का हिस्सा हैं। बता दें कि भारत ने 4 दिन चले ऑपरेशन में पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। पाकिस्तान के डीजीएमओ की मांग पर जंग को रोका गया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा करते हैं कि उनके दखल के बाद ही भारत और पाकिस्तान संघर्ष रोकने को राजी हुए थे।

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