बीजापुर
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबल के जवानों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। छह माओवादी कैडरों ने सुरक्षाबल के जवानों के सामने सरेंडर कर दिया। इनमें से चार ओडिशा में सक्रिय थे और दो वेस्ट बस्तर डिवीजन संगठन से भागकर आए थे। इस समूह में चार पार्टी पॉलिटिकल कैडर सदस्य (पीपीसीएम) और दो पार्टी सदस्य (पीएम) शामिल थे।
35 लाख रुपये के थे इनामी
मामले की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये कैडर छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल सरेंडर और पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के लगातार नक्सल-विरोधी अभियानों और बीजापुर जिले में चल रहे पुनर्वास व कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावित थे।
मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया
सुरक्षा बलों के लगातार संपर्क और तालमेल के कारण उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। सुरक्षा बलों में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) बीजापुर और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) शामिल थे। उन्होंने अपने सरेंडर के मुख्य कारणों के तौर पर सुरक्षा बलों के बढ़ते असर, संगठन के बिखरने, माओवादियों की हिंसक और जन-विरोधी विचारधारा से मोहभंग होने, पुराने कैडरों के सफल पुनर्वास और आदिवासी इलाकों में तेजी से हो रहे विकास का जिक्र किया।
तीन माओवादियों पर था 8-8 लाख रुपये का इनाम
सरेंडर करने वालों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या (30), उनके पति संतोष कुड़ियम उर्फ सुक्कू (27) और पांडो पोडियाम उर्फ सस्मिता (28) शामिल हैं। ये तीनों ओडिशा राज्य इकाई की कंपनी नंबर 8 में प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य (पीपीसीएम) के रूप में सक्रिय थे। इनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ इकाई की कंपनी नंबर 2 में पीपीसीएम के रूप में सक्रिय कोसा मड़वी (30) पर भी आठ लाख रुपये का इनाम था। ओडिशा राज्य इकाई के पार्टी सदस्य देवें मड़कम उर्फ जन्नी (22) पर दो लाख रुपये, जबकि बीजापुर के गंगालूर क्षेत्र में सक्रिय लल्लू ताती (25) पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस के अनुसार, सभी सरेंडर करने वाले माओवादी बस्तर क्षेत्र के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। उन पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सुरक्षा बलों पर हुए विभिन्न हमलों में शामिल होने का आरोप है। बीत दिनों सुकमा में बेकार और बचे हुए विस्फोटकों को नष्ट करने के दौरान अचानक धमाका हो गया। हादसे में CRPF के चार जवान घायल हो गए।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता
एसपी उमेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और स्वरोजगार के लिए सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें रोजगार के अवसर देकर समाज की मुख्यधारा में फिर से शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
सुकमा के जंगल में हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा मिला
एक अन्य कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने सुकमा जिले के जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों, कारतूसों और विस्फोटकों का जखीरा बरामद किया। अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान चलाया गया।
जिला पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने किस्टाराम थाना क्षेत्र के पलाचलमा गांव के पहाड़ी और वन क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान छिपाकर रखी गई हथियारों की खेप का पता चला। बरामद सामग्री में दो .303 राइफल, एक सिंगल शॉट हथियार, चार बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल), तीन 12 बोर राइफल, दो मजल-लोडिंग बंदूकें और एक देशी पिस्तौल शामिल हैं।
इसके अलावा, इंसास राइफल की तीन मैगजीन, 26 जिंदा कारतूस, 12 बोर के 20 जिंदा कारतूस, एक एरो बम, बीजीएल के दो गोले, एक वायरलेस सेट और 208 नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर भी बरामद किए गए।
किसने किया सरेंडर
अधिकारियों ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सली कैडरों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या शामिल हैं, जो ओडिशा स्टेट कंपनी नंबर-8 में पीपीसीएम के पद पर सक्रिय थी। उसके सिर पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनके अलावा पांडो पोडियम उर्फ सस्मिता ने आत्मसमर्पण किया, जो ओडिशा स्टेट कंपनी नंबर-8 की पीपीसीएम थीं और 8 लाख रुपये की इनामी थी। सुक्कु कुडियम उर्फ संतोष ओडिशा स्टेट सीसीएम के पूर्व सुरक्षा गार्ड थे। वहीं, गणेश उइका ने हथियार छोड़ दिए, उस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वालों में कोसा माडवी कंपनी नंबर-2 के ए-सेक्शन कमांडर और पीपीसीएम थे। उस पर 8 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा देवे माडकम उर्फ जन्नी पार्टी सदस्य होने के साथ ओडिशा स्टेट एसजेडसीएम जगदीश इरपा के सुरक्षा गार्ड था। इस पर 2 लाख रुपये का इनाम था। लालू ताती ने भी आत्मसमर्पण किया। उसपर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुनर्वास नीति से थे प्रभावित
इन सभी छह लोगों को राज्य सरकार की 'नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति' के तहत आर्थिक मदद, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार में सहायता मिलेगी, ताकि वे मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें। इस आत्मसमर्पण की सफलता में डीआरजी बीजापुर, सीआरपीएफ की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतरीन तालमेल, आपसी भरोसा और संवेदनशील रवैये ने अहम भूमिका निभाई।





