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बाल विवाह मुक्त बनने की दिशा में एमसीबी जिला, 60 ग्राम पंचायतों की शानदार सफलता

बाल विवाह मुक्त बनने की राह पर एमसीबी जिला, 60 ग्राम पंचायतों की उल्लेखनीय उपलब्धि

एमसीबी
जिले में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत बड़ी उपलब्धि सामने आई है। संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर के पत्र क्रमांक 33/10568/मवादि/मि.वा./सारा/2025-26 दिनांक 09 सितम्बर 2025 के निर्देशानुसार ऐसे ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाना है, जहां विगत दो वर्षों में बाल विवाह का कोई भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ हो। इसी के तहत जिले के विभिन्न विकास खंडों से प्रस्ताव प्राप्त हुए और नियमानुसार जांच के बाद संबंधित दस्तावेज महिला एवं बाल विकास विभाग को प्राप्त हुए। इसके पश्चात 06 मार्च 2026 को दावा-आपत्ति के लिए पत्र जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित तिथि तक महिला एवं बाल विकास विभाग जिला एमसीबी कार्यालय में कोई भी दावा या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई।

हालांकि चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से कुछ ग्राम पंचायतों में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होने पर ब्लॉक खड़गवां के ग्राम पंचायत आमालाड, मुकुन्दपुर और दुग्गी, ब्लॉक भरतपुर के ग्राम पंचायत सेमरिया तथा ब्लॉक मनेन्द्रगढ़ के ग्राम पंचायत डंगौरा और चिमटीमार को सूची से विलोपित कर दिया गया है। कलेक्टर की अनुशंसा के आधार पर चयनित ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को तीन चरणों में बाल विवाह मुक्त होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा तथा आगे की प्रक्रिया के तहत जिले के अन्य पंचायतों और नगरीय निकायों को भी प्रमाण पत्र प्रदान कराया जाएगा।

 बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत विकासखण्ड मनेन्द्रगढ़ की ग्राम पंचायत चौघड़ा, तेन्दूडांड, बंजी, बिहरापुर, भलौर, हस्तिनापुर, पिपरिया, चिरईपानी, चैनपुर, कठौतिया, छिपछिपी, सेमरा, बुन्देली, सिरौली, भौता, शंकरगढ़, बॉही, बिरौरीडांड, गरूणडोल, बुलाकीटोला, घाघरा, उजियारपुर, बौरीडांड, महाई, बेलबहरा, डुगला, रोझी, चनवारीडांड, मनवारी, डोडकी, केल्हारी, रोकड़ा, ताराबहरा, केराबहरा, परसगढ़ी, डिहुली और कछौड शामिल हैं। इसके साथ ही विकासखण्ड भरतपुर की ग्राम पंचायत बरहोरी, चांटी, ओहनिया, नेरूआ, बड़गांव कला, केसौड़ा, डोमहरा और कुदरा तथा विकासखण्ड खड़गवां की ग्राम पंचायत बोडेमुडा, छोटेकलुआ, पेण्ड्री, बरदर, गिद्धमुड़ी, अखराडांड, जड़हरी, मंगोरा और बेलकामार ग्राम पंचायत भी इस सूची में शामिल हैं। जिले में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान, महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और आमजन की सक्रिय भागीदारी के कारण बाल विवाह रोकने की दिशा में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है, जो समाज में जागरूकता और बेटियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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