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‘कोई शर्म नहीं…’, ओलंपिक मेडलिस्ट एलिशा न्यूमैन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म से कमाई की, ब्रांड पर नियंत्रण बनाए रखने की बात की

लंदन 

पेरिस ओलंपिक 2024 में पोल वॉल्ट के आसमान को चीरती एलिशा न्यूमैन सिर्फ एक एथलीट नहीं थीं- वो एक घोषणा थीं. एक चुनौती. एक ऐसा सवाल, जिसने खेल की 'सभ्यता' और 'संस्कार' दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया.

कनाडा को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली एलिशा न्यूमैन ने बाद में जो सच बताया, उन्होंने खेल जगत में भूकंप ला दिया- ओलंपिक तक पहुंचने का रास्ता OnlyFans से होकर गया था. हां, वही OnlyFans, जिसे लेकर फुसफुसाहटें होती हैं, भौंहें तनती हैं.

एलिशा ने बिना झिझक कहती हैं ,'OnlyFans से जो पैसा आया, उसने मेरी ट्रेनिंग को सांस दी. वो किसी टॉप स्पॉन्सर से कम नहीं था- बल्कि ज्यादा ईमानदार था.'

कनाडा सरकार के  Athlete Assistance Program से सालाना महज 21 हजार डॉलर (करीब 18 लाख रु.) एक ओलंपिक एथलीट के सपनों के लिए ये रकम मजाक जैसी है. ट्रैवल, कोच, इक्विपमेंट, रिकवरी- सब महंगा. ऐसे में एलिशा ने वही किया, जो बहुतों के लिए अस्वीकार्य था, लेकिन उनके लिए जरूरी.

उन्होंने अपनी खूबसूरती को छुपाया नहीं- बेचा नहीं, बल्कि ब्रांड बनाया.

खेल जगत में महिलाओं को अक्सर दो खांचों में बांटा जाता है- या तो 'सीरियस एथलीट' बनो, या 'ग्लैमरस चेहरा'. एलिशा ने दोनों को एक साथ जीने का ऐलान कर दिया- वह कहती हैं- 'मैंने तय किया कि मैं किसी एक पहचान में कैद नहीं रहूंगी….मेरी बॉडी मेरी है.. मेरी छवि मेरी है और कमाई भी मेरी होगी.'

यहीं से शुरू हुआ विवाद-

– आरोप लगे, 'ये महिला खिलाड़ियों को वस्तु बना रहा है.'
– सवाल उठे, 'क्या ओलंपिक एथलीट को ऐसा करना चाहिए?'

एलिशा का जवाब और ज्यादा धमाकेदार था- 
'अगर लोग मुझे देख रहे हैं, तो मैं तय करूंगी कि कैसे देखें. मुझे सेक्शुअलाइज किया जाना कमजोर नहीं बनाता- मुझे ताकत देता है.'

उनके शब्दों में कोई शर्म नहीं, कोई सफाई नहीं- सिर्फ आत्मविश्वास.
'Look good, feel good' मेरे लिए स्लोगन नहीं, रणनीति है. जब मैं खुद को लेकर कॉन्फिडेंट होती हूं, तो मुझे हराना आसान नहीं होता.'

एलिशा न्यूमैन सिर्फ मेडल जीतने वाली खिलाड़ी नहीं रहीं, वो उस सिस्टम की पोल खोलने वाली आवाज बन गईं, जो खिलाड़ियों से देशभक्ति तो चाहता है, लेकिन आजादी से डरता है. वो साबित करती हैं कि आज की महिला एथलीट देह और दिमाग- दोनों की मालिक हैं.

उनकी कहानी डॉक्यूमेंट्री ‘Big Feminine Energy’ का हिस्सा है, जहां ‘गर्लहुड’, ‘सॉफ्ट लाइफ’ और आधुनिक स्त्रीत्व पर खुलकर बात होती है. लेकिन एलिशा की मौजूदगी इस बहस को और तेज कर देती है- क्या खिलाड़ी सिर्फ खेलें, या अपनी शर्तों पर जिएं भी?

ओलंपिक पोडियम पर चमकता ब्रॉन्ज मेडल अब सिर्फ जीत की निशानी नहीं-  वो एक संदेश है- खूबसूरती अपराध नहीं, और आजादी किसी की इजाजत से नहीं मिलती.

एलिशा न्यूमैन की कमाई, जिसने ओलंपिक तक पहुंचने का रास्ता खोला

एलिशा न्यूमैन 2021 में इस प्लेटफॉर्म से जुड़ीं और करीब £9 प्रति माह (लगभग 1,000 रु) वाले सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई से उन्होंने पेरिस ओलंपिक की तैयारी का एक हिस्सा खुद फंड किया. न्यूमैन के पेज पर शुरुआत में थोड़ी सनसनीखेज तस्वीरें मुफ्त में दिखाई जाती थीं, जो बाद में निजी संदेशों के जरिए और अधिक स्पष्ट कंटेंट के लिए £50 (करीब 6,000 रु.) या उससे ज्यादा में उपलब्ध कराए जाते थे. 2024 की गर्मियों तक इस काम से उन्होंने £1,70,000 (करीब 2 करोड़ रु.) से अधिक की कमाई की थी.

OnlyFans … आखिर क्या?

OnlyFans एक पेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जहां क्रिएटर अपने कंटेंट के बदले सीधे फॉलोअर्स से पैसे लेते हैं. यह इंस्टाग्राम या यूट्यूब जैसा ही है, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां कंटेंट देखने के लिए सब्सक्रिप्शन देना होता है और कमाई का 80 फीसदी हिस्सा क्रिएटर को मिलता है. 

हालांकि इसकी पहचान एडल्ट कंटेंट से बनी है, लेकिन OnlyFans पर फिटनेस, कुकिंग, म्यूजिक, एजुकेशन और स्पोर्ट्स से जुड़ा प्रोफेशनल कंटेंट भी मौजूद है. इसी वजह से कई खिलाड़ी इसे वैकल्पिक कमाई के प्लेटफॉर्म के तौर पर अपना रहे हैं. कुछ ट्रेनिंग वीडियो और फिटनेस टिप्स बेचते हैं, तो कुछ बोल्ड कंटेंट भी बनाते हैं. यह पूरी तरह उनकी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है.

भारत में यह प्लेटफॉर्म अभी बहुत लोकप्रिय नहीं है और सामाजिक-सांस्कृतिक कारणों से इसे लेकर झिझक और विवाद ज्यादा है, खासकर इसलिए क्योंकि खेल संगठनों और स्पॉन्सर्स इसे फैमिली-फ्रेंडली नहीं मानते. आसान शब्दों में, OnlyFans एक ऐसा डिजिटल टूल है जहां कंटेंट का पूरा कंट्रोल क्रिएटर के पास होता है और फैन सीधे उसके काम के लिए भुगतान करता है.

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