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टॉप 100 में सिर्फ 3 ने चुना सर्जरी: आखिर क्यों बढ़ रही विशेषज्ञता चुनने की दुविधा?

 नई दिल्ली

नीट पीजी टॉपरों की पसंद में बीते कुछ सालों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मेडिकल पीजी की जिन ब्रांचों पर टॉप रैंकर्स टूट कर पड़ते थे, अब वे पहली पसंद नहीं रह गई हैं। पिछले पांच सालों में नीट पीजी काउंसलिंग में हिस्सा लेने वाले ज्यादातर टॉप परफॉर्म करने वाले मेडिकल ग्रेजुएट्स का झुकाव नॉन-सर्जिकल मेडिसिन ब्रांच एमडी जनरल मेडिसिन की तरफ हो गया है। मास्टर इन सर्जरी (एमएस) में जबरदस्त गिरावट देखी गई है। टॉप 100 में से सिर्फ तीन उम्मीदवारों ने वर्तमान में चल रही नीट पीजी काउंसलिंग में एमएस को चुना है, जबकि 2021 में कम से कम 11 उम्मीदवारों ने एमएस कोर्स चुना था।

इसी तरह रेडियोलॉजी और डर्मेटोलॉजी में एमडी, जो कभी टॉप रैंकर्स के बीच सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कोर्स थे, उनमें दिलचस्पी में भारी गिरावट देखी गई है। कैंडिडेट्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आने को लेकर परेशान हैं, जिसके रेडियोलॉजी में डॉक्टरों की जगह लेने का डर है। डर्मेटोलॉजी में आर्टिफिशियल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट में हालिया बढ़ोतरी ने मेडिकल ग्रेजुएट्स की दिलचस्पी बदल दी है। जनरल सर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी और न्यूरोसर्जरी जैसी सर्जिकल ब्रांच में दिलचस्पी बहुत ज्यादा सीखने पढ़ने, काम के बोझ, मेडिको-लीगल रिस्क, इमरजेंसी अधिक होना और वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी की वजह से कम हुई है।

मेडिसिन टॉप प्रेफरेंस

पिछले पांच सालों में टॉप रैंक वाले कैंडिडेट्स के बीच सीट प्रेफरेंस पैटर्न में काफी बदलाव आया है। लगभग 44-47 फीसदी ग्रेजुएट्स मेडिसिन और 40-43 फीसदी रेडियोलॉजी चुन रहे हैं।

सर्जरी लाइन की पसंद कम क्यों

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल काउंसलिंग कमिटी (एमसीसी) के सदस्य सचिव कहते हैं, 'सर्जिकल स्पेशियलिटी सबसे ज्यादा डिमांड वाले फील्ड्स में से हैं, जिनमें काम के लंबे घंटे होते हैं जो कई लोगों, खासकर महिलाओं को हतोत्साहित करते हैं। जबकि डॉक्टर टेक्निकली अपने क्लिनिक खोल सकते हैं, इंडिपेंडेंट प्रैक्टिस बहुत कम होती है क्योंकि ज्यादातर सर्जिकल काम के लिए हॉस्पिटल से अटैचमेंट की जरूरत होती है। सर्जरी सेक्टर सीमित है क्योंकि सीनियर स्पेशलिस्ट के रिटायर होने तक नए लोगों के लिए कम जगह बची है। जब तक वे रिटायर नहीं होते, नए डॉक्टरों के लिए मौके कम होते हैं।'

रैंक ही नहीं, मेहनत से भी ग्रोथ होती है

2025 सेशन के लिए एमएस जनरल सर्जरी के लिए लगभग 5,119 सीटें उपलब्ध थीं। घटती दिलचस्पी के कारण इनमें से कई सीटें टॉप 100 से नीचे रैंक वाले कैंडिडेट्स द्वारा भरी जाने की उम्मीद है। डॉ. एस श्रीनिवास कहते हैं, 'सिर्फ रैंक ही डॉक्टर की क्षमता को नहीं दिखाती है। हर ट्रेनी की ग्रोथ आखिरकार उनके डेडिकेशन, मेंटरशिप और पूरे कोर्स के दौरान हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है।'

देखें बीते 5 सालों में किस मेडिकल पीजी ब्रांच का क्या हाल रहा

डर्मेटोलॉजी को 2025 में 4, 2024 में 1, 2023 में 6, 2022 में 2 और 2021 ने 3 ने चुना

रेडियोलॉजी को 2025 में 41, 2024 में 28, 2023 में 41, 2022 में 41 और 2021 ने 36 ने चुना

सर्जरी को 2025 में 3, 2024 में 2, 2023 में 4, 2022 में 4 और 2021 में 11 ने चुना

मेडिसिन को 2025 में 46, 2024 में 41 , 2023 में 41, 2022 में 45 और 2021 में 43 ने चुना

ओब गायने को 2025 में 3, 2024 में 2, 2023 में 1, 2022 में 1 और 2021 में 1 ने चुना

पीडियाट्रिशियन को 2025 में 1, 2024 में 0, 2023 में 5, 2022 में 2 और 2021 में 2 ने चुना

ओर्थोपेडिक्स को 2025 में 1, 2024 में 1, 2023 में 1, 2022 में 1 और 2021 में 2 ने चुना

 

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