samacharsecretary.com

पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा में केंद्रीय मंत्री से दक्षिणा की मांग, तुरंत पूरा करने का निर्देश

शिवपुरी
'महाराज' के सामने जब 'महाराज' पहुंचे तो धीरेंद्र शास्त्री ने दक्षिणा में कुछ ऐसा मांग की लिया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कहना पड़ा कि यह इनका निवेदन नहीं आदेश है, जिसे पूरा करना ही पड़ेगा। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के मंच पर यह दृश्य देखने को मिला जब कथा सुना रहे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सिंधिया से 108 फीट ऊंची 'शिव प्रतिमा' की मांग रखी थी।

दरअसल शिवपुरी में धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भागवत कथा की जा रही है। इसी दौरान इस भागवत कथा में दर्शन के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पहुंचे थे। जब वे मंच पर दर्शन करने पहुंचे तो शास्त्री ने सिंधिया से दक्षिणा में 108 फीट की विशाल 'शिव मूर्ति' की मांग करते हुए इसे अपनी दक्षिणा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि प्राण प्रतिष्ठा में हम कथा सेवा करेंगे। दरअसल, दोपहर में दिव्य दरबार शुरू करने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने शिवपुरी में भगवान शिव की 108 फीट की बड़ी मूर्ति स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। फिर शाम को कथा में केंद्रीय मंत्री सिंधिया पहुंचे तो उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर कर दी। उन्होंने कथा मंच से ऐलान किया कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री के निवेदन नहीं, आदेश का सत-प्रतिशत पालन होगा।

108 फीट की शिव प्रतिमा पर्वत पर स्थापित होगी

दिव्य दरबार के दौरान पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि शिवपुरी का मतलब 'शिव की नगरी' है, इसलिए यहां बहुत बड़ी शिव जी की मूर्ति होनी चाहिए। सुझाव दिया कि यह मूर्ति 108 फीट की होनी चाहिए, जिसे किसी पर्वत के ऊपर स्थापित किया जाए। उस पर्वत का नाम 'कैलाश पर्वत' रखा जाए। वहां पर पूरा आध्यात्मिक केंद्र विकसित कर द्वादश ज्योतिर्लिंग भी स्थापित किए जाएं। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और यह एक दर्शनीय स्थल बनेगा। शिवपुरी का नाम भी अर्थात 'यथा नाम तथा गुण' भी सार्थक हो जाएगा जाएगा। उन्होंने कहा कि फिर शिवपुरी को शिव जी की विशाल मूर्ति से भी जाना जाएगा। पूरे सावन महीने में अगल-बगल के जिलों से उस मंदिर में कावड़ यात्रा आएगी, जिससे शिवपुरी महादेव की नगरी हो जाएगी और हर हर महादेव के नारे से गुंजायमान हो जाएगी।

शिवपुरी अच्छी लगने लगी है

उन्होंने कहा कि अब उन्हें शिवपुरी अच्छी लगने लगी है और उन्हें तब तक शिवपुरी आना चाहिए जब तक कि शिवपुरी भगवामय (भगवा रंग में रंगी हुई) या राममय न हो जाए। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा के आखिरी दिन, 30 दिसंबर को फिर से दिव्य दरबार की घोषणा की है।

दिव्य दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी

दिव्य दरबार के चलते  श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शिवपुरी के अलावा दूसरे पड़ोसी जिलों से भी लोग भारी संख्या में पहुंचे। कथा स्थल आस्था का संगम नजर आया। कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनाई गई व जन्माष्टमी की जीवंत झांकी का दर्शन हुआ।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here