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पंजाब के युवाओं में परविंदर सिंह झोटा की चर्चा, दोस्त की मौत के बाद बदली पहचान

मानसा.

नशे के खिलाफ आवाज उठाने पर जान गंवाने वाले परविंदर सिंह झोटा के जीवन में भी एक ऐसा दौर भी आया था, जब वह खुद नशे की गिरफ्त में फंस गया था, लेकिन एक दोस्त की नशे के कारण हुई मौत ने उसे भीतर तक झकझोर दिया। इस घटना के बाद उसने न सिर्फ नशा छोड़ने का फैसला किया बल्कि नशे के खिलाफ जंग भी छेड़ दी।

नशे के खिलाफ अभियान के दौरान वह इंटरनेट मीडिया के जरिए अपनी बात रखता था और नशे से जुड़े मामलों को सामने लाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन भी करता था।

बॉक्सिंग में रहा नेशनल खिलाड़ी
नशे के कारोबार में शामिल होने का संदेह होने पर लोगों से सीधे सवाल करना और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना उसकी गतिविधियों का हिस्सा बन गया। यही नहीं विभिन्न विवादों और कानूनी मामलों के कारण भी वह चर्चा में रहा। झोटा कभी बॉक्सिंग का नेशनल खिलाड़ी रहा था। उसकी शारीरिक ताकत के कारण लोग उसे "झोटा" कहने लगे और फिर यही नाम उसकी पहचान बन गया। परविंदर सिंह झोटा के खिलाफ नौ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इनमें कुछ मामले विचाराधीन थे, जबकि कुछ में उसे राहत मिली थी। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार,झोटा को गोली मारने वाले केमिस्ट अश्विनी कुमार के खिलाफ अलग-अलग वर्षों में चार एफआइआर दर्ज हुई थीं।

मां से कहा था रोटी बनाकर रखना, आकर खाऊंगा
झोटा की मां अमरजीत कौर की आंखों के सामने बार-बार बेटे के घर से निकलते समय कहे गए शब्द घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह कहता था कि कुछ लोग उसे मार देंगे, लेकिन फिर उसने नशे के खिलाफ अपनी आवाज बंद नहीं की। मां ने कहा कि घर से निकलते समय उसने पैर छुए और कहा कि रोटी बनाकर रखना, लौटकर खाना खाएगा।

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