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गोड्डा की प्रियंका बनीं मिसाल, बकरी पालन से संवारी जिंदगी और महिलाओं को दिया रोजगार का रास्ता

 गोड्डा
 सदर प्रखंड के बरियाठा गांव की प्रियंका कुमारी ग्रामीण युवक-युवतियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने बकरी पालन और दुकानदारी को रोजगार का माध्यम बनाया।

अपनी मेहनत से आत्मनिर्भर बनने के बाद उन्होंने अन्य लोगों को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनकी पहल से अब 100 से अधिक महिला, युवक और युवतियां विभिन्न रोजगार से जुड़कर आर्थिक समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

प्रियंका बताती हैं कि लगातार कम बारिश के कारण फसल बर्बाद होने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी। घर में कमाने वाला कोई नहीं था। करीब पांच वर्ष पहले उनकी मुलाकात आरसेटी के अशोक कुमार से हुई।

उन्होंने प्रियंका को संस्थान में ले जाकर बकरी पालन और शॉपकीपिंग का प्रशिक्षण दिलाया। इसके बाद आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई। प्रियंका ने बकरी पालन से रोजगार की शुरुआत की। शुरुआती दौर में कठिनाइयां आईं, लेकिन एक वर्ष बाद आमदनी होने लगी।

इसके बाद वह जेएसएलपीएस के महिला समूह से जुड़ीं। समूह में छोटी-छोटी बचत के माध्यम से कम ब्याज पर ऋण मिला, जिससे उन्होंने घर पर ही जनरल स्टोर खोल लिया। इससे उनकी आमदनी बढ़ी और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।

उनके पति हरि किशन ने भी इस काम में सहयोग किया। आज प्रियंका अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हैं।

प्रियंका ने समूह की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनकी पहल पर कई महिलाएं सिलाई-कटाई, वर्मी कंपोस्ट निर्माण, मशरूम उत्पादन, गोपालन और बकरी पालन जैसे रोजगार से जुड़ी हैं। धीरे-धीरे यह मुहिम दूसरे गांवों तक पहुंच रही है।

ठाकुरगंगटी प्रखंड के रुंजी गांव की रूबी कुमारी ने भी प्रियंका से प्रेरित होकर दुकानदारी शुरू की। वह घरेलू जिम्मेदारियों के साथ दुकान चलाकर आमदनी कर रही हैं।

वहीं, सैदापुर की पूजा कुमारी सहित अन्य युवक-युवतियों ने सिलाई-कटाई को रोजगार का जरिया बनाया है। प्रशिक्षण और छोटे ऋण की मदद से ये लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

गोड्डा स्थित आरसेटी की ओर से युवक-युवतियों को स्वरोजगार के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान में सिलाई-कटाई, शॉपकीपिंग, वर्मी कंपोस्ट निर्माण, सेरिकल्चर, बकरी पालन और गोपालन सहित विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है।

प्रत्येक वर्ष 300 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने के साथ बैंक के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है।आरसेटी के निदेशक नीरज आजाद के अनुसार, संस्थान की पहल से जिले के युवक-युवतियां प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार अपना रहे हैं और अपने भविष्य को बेहतर बना रहे हैं।

प्रियंका की पहल से बदली जिंदगी
बरियाठा गांव की प्रियंका कुमारी ने बकरी पालन और जनरल स्टोर से स्वरोजगार की शुरुआत की। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को इससे सहारा मिला। बाद में उन्होंने दूसरी महिलाओं को भी रोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

आज 100 से अधिक युवक-युवतियां विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

गोड्डा स्थित आरसेटी की ओर से प्रत्येक वर्ष 300 से अधिक युवक-युवतियों को विभिन्न रोजगारपरक विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें बकरी पालन, सिलाई-कटाई, शॉपकीपिंग, वर्मी कंपोस्ट निर्माण और गोपालन जैसे प्रशिक्षण शामिल हैं। संस्थान के माध्यम से बैंक से आर्थिक सहायता दिलाने का भी प्रावधान है। – नीरज आजाद, निदेशक, आरसेटी, गोड्डा

 

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