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प्रॉपर्टी रेट में 50-100% की वृद्धि, अब ‘सेक्टर’ तय करेंगे दाम, वार्ड नहीं

ग्वालियर
ग्वालियर शहर के प्रॉपर्टी बाजार में अब कम या ज्यादा रेट दिखाकर स्टांप ड्यूटी बचाने का खेल बंद होने वाला है। पंजीयन विभाग वित्त वर्ष 2026-27 की नई गाइडलाइन के लिए 'सेक्टर फॉर्मूला' तैयार कर रहा है। इस नई व्यवस्था में शहर को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर कीमतें तय की जाएंगी। इसके लिए एआइ आधारित 'पॉलिगॉन' का दायरा बढ़ाया जा रहा है, ताकि एक ही इलाके की सटी हुई जमीनों के दामों में जो बड़ा अंतर था, उसे खत्म किया जा सके।

अभी स्थिति यह है कि दो सटकर लगी हुई लोकेशनों के सरकारी दाम में जमीन-आसमान का फर्क होता है। शातिर लोग इसी विसंगति का फायदा कर उठाकर ऊंचे रेट वाली जमीन को कम ने रेट वाली लोकेशन का हिस्सा बताकर रजिस्ट्री करा लेते थे। नए मॉडल में के एक सेक्टर या पॉलिगॉन के भीतर एक आने वाली सभी लोकेशनों पर समान रेट लागू होगा।

नियम यह होगा कि उस इलाके की जिस लोकेशन की कीमत सबसे ज्यादा होगी, वही पूरे सेक्टर की दर मान ली जाएगी। इसका सीधा असर यह होगा कि जहां अब तक गाइडलाइन कम थी, वहां कीमतें रातों-रात 50 से 100 फीसदी तक बढ़ जाएंगी।

संपदा-2: फेसलेस और पारदर्शी होगी रजिस्ट्री

पंजीयन विभाग अब 'संपदा-2' सॉफ्टवेयर के जरिए पूरी प्रक्रिया को फेसलेस बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इस सिस्टम में पक्षकार घर बैठे ही रजिस्ट्री से जुड़े काम निपटा सकेंगे। 9 जनवरी को भोपाल में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में इस नए स्वरूप पर मुहर लग सकती है। अब तक गाइडलाइन वार्डवार बनती थी, जिसमें हर गली-मोहल्ले की अलग दर होती थी, जो स्टांप चोरी का सबसे बड़ा कारण था। अब एक पॉलिगॉन में 40 से 50 लोकेशन शामिल हो सकेंगी। वर्तमान में जिले में करीब 2400 पॉलिगॉन सक्रिय हैं।

मुरार का उदाहरणः ऐसे बढ़ेंगे दाम

नई व्यवस्था को इस तरह समझा जा सकता है- यदि मुरार गांव की गाइडलाइन 19 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर है और उससे सटी हुई 10 अन्य कॉलोनियों में रेट 8 से 15 हजार के बीच है, तो अब नया पॉलिगॉन बनते ही उन सभी 10 लोकेशनों का रेट भी बढ़कर सीधे 19 हजार रुपए हो जाएगा। इससे विसंगति खत्म होगी और विभाग का राजस्व बढ़ेगा।

भविष्य का सेक्टर प्लान

वार्ड सिस्टम आउटः विभाग धीरे-धीरे वार्डों के आधार पर रेट तय करने की परंपरा खत्म करेगा।

20 सेक्टरों में शहर: ग्वालियर के 66 वार्डों को लगभग 20 बड़े सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा।

समान गतिविधिः रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर एक समान दरें तय होंगी।

चोरी पर अंकुशः पॉलिगॉन बदलकर कम स्टांप देने के पुराने केसों के बाद अब यह तकनीकी 'लूपहोल' पूरी तरह बंद होगा।

सेक्टरों में विभाजित कर रहे हैं…

गाइडलाइन को अब वार्डों के बजाय सेक्टरों में विभाजित किया जा रहा है। एक पॉलिगॉन में कई लोकेशनों को शामिल करने से स्टांप ड्यूटी चोरी की संभावना खत्म होगी। इससे पूरे क्षेत्र में एक समान दर लागू हो सकेगी और पारदर्शिता आएगी।- अशोक शर्मा, जिला पंजीयक, ग्वालियर

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