samacharsecretary.com

पुलकित सम्राट ने नॉर्थ इंडिया के प्रति अपने खास लगाव को किया जाहिर

मुंबई,

 बॉलीवुड अभिनेता पुलकित सम्राट नॉर्थ इंडिया के प्रति अपने खास लगाव को जाहिर किया है। पुलकित सम्राट हमेशा से नॉर्थ इंडिया के प्रति अपने प्यार को खुलकर जाहिर करते आए हैं। अपनी आगामी फिल्म 'राहु केतु' के प्रमोशन के दौरान भी उन्होंने इस बात पर खुलकर चर्चा की कि दिल्ली, शिमला और नॉर्थ इंडिया के बड़े कैनवस पर रची गई कहानियां क्यों आज भी फिल्ममेकर्स और दर्शकों को उतना ही उत्साहित करती हैं।

पुलकित ने अपनी सुपरहिट फिल्म 'फुकरे' का जिक्र करते हुए बताया कि किसी भी फिल्म की पहचान गढ़ने में उसके बैकड्रॉप और लोकेशन की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा, “फुकरे भी दिल्ली में ही प्लॉट है और राहु केतु का भी शिमला–दिल्ली साइड का ही बैकड्रॉप है।” उनके मुताबिक, रीजनल ऑथेंटिसिटी ही कहानी में एक अलग तरह की जान डालती है।

पुलकित ने नॉर्थ इंडिया के प्रति अपने खास लगाव को जाहिर करते हुए कहा कि इस इलाके का फ्लेवर कहीं और देखने को नहीं मिलता। यहां के लोग, यहां की जगहें और यहां की जिंदगी बेहद सच्ची और जीती-जागती महसूस होती है। उन्होंने यह भी बताया कि दर्शकों ने समय के साथ ऐसी कहानियों को खूब अपनाया है, खासकर तब से जब दिबाकर बनर्जी और अमृत शर्मा जैसे फिल्ममेकर नॉर्थ इंडिया और दिल्ली की सांस्कृतिक बारीकियों को बड़े परदे पर लेकर आए हैं। पुलकित के अनुसार, ये निर्देशक इस इलाके को “रग-रग से” जानते हैं, इसलिए उनकी कहानियां बेहद ऑर्गैनिक और रिलेटेबल लगती हैं।

पुलकित मानते हैं कि बार-बार मुंबई को दिखाने के बजाय अब नॉर्थ इंडिया की लोकेशन्स को एक्सप्लोर करना हिंदी सिनेमा के लिए एक ताजगी भरा बदलाव रहा है। उन्होंने कहा, “यहां के लोग, यहां के लिबाज़, यहां के पहाड़, ये सब आपको और कहीं नहीं मिलते।” उनके अनुसार, जब दर्शक 'राहु केतु' जैसी फिल्में देखते हैं, तो वे सिर्फ कहानी नहीं देखते, बल्कि नॉर्थ इंडिया की हवा और उसकी ऊर्जा को भी महसूस करते हैं।

पुलकित ने कहा, “हमें नॉर्थ इंडिया से बहुत प्यार है। यहां के लोग बेहद अतरंगी, प्यारे, वॉर्म और काफी ईमानदार होते हैं। हर जगह का अपना अलग फ्लेवर होता है। हमने सालों तक फिल्मों में मुंबई नगरी देखी है, लेकिन जब से दिबाकर और अमृत जैसे निर्देशक आए हैं, तब से दिल्ली और नॉर्थ इंडिया का फ्लेवर फिल्मों में ज्यादा दिखने लगा है। जब आप अमृत या दिबाकर की फिल्म देखते हैं, या फिर जब आप राहु केतु देखेंगे, तब भी आप नॉर्थ इंडिया की हवा महसूस कर पाएंगे। ऐसे पहाड़, ऐसे लिबाज़ और ऐसे लोग आपको कहीं और नहीं मिलेंगे।”

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here