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लिज्जत पापड़ की संस्थापक पुष्पा बेरी का निधन, हजारों महिलाओं को रोजगार देने वाली महिला उद्योगपति

जबलपुर
 प्रसिद्ध महिला उद्योगपति पुष्पा बेरी का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लिज्जत पापड़ जैसा उद्योग स्थापित कर हजारों महिलाओं को रोजागर से जोड़ने वाली बेरी ने एक कमरे से कारोबार प्रारंभ कर देश-विदेश तक पहुंचाया।

वे कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहीं थीं। स्थानीय अस्पताल में सुबह उनका निधन हो गया। अंतिम संस्कार स्थानीय गुप्तेश्वर मुक्तिधाम में हुआ। उनके पुत्र रसिम बेरी और असिम बेरी ने उन्हें मुखाग्नि दी।

पंजाब के मोगा में 26 अगस्त 1934 को जन्मीं पुष्पा बेरी का विवाह जबलपुर निवासी कारोबारी सत्यपाल बेरी के साथ हुआ था। श्री महिला गृह उद्योग के अंतर्गत बनाए गए लिज्जत पापड़ और अचार की मांग देश के साथ अमेरिका और ब्रिटेन तक थी। उनके दोनों पुत्र सिंगापुर में कारोबारी हैं। बेरी के निधन पर जबलपुर सहित देशभर के उद्योगपतियों ने शोक जताया है।

महिलाओं को स्वावलंबी बनाने संघर्षरत रहीं पुष्पा बेरी

जो काम करे वह मालिक के ध्येय वाक्य को अपनाकर कारोबार को जमीन से आसमान तक पहुंचाने वाली प्रसिद्ध महिला उद्योगपति पुष्पा बेरी ने महिलाओं को स्वावलंबी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पूरे जीवन संघर्ष किया। उनकी मेहनत का ही परिणाम था कि एक कमरे से शुरू किए गए कारोबार की ख्याति देश-विदेश तक पहुंची और करीब चार हजार महिलाओं का जीवन सबल बन सका।

उनके दौर के कारोबारी बताते हैं कि पुष्पा बेरी हमेशा कहती थीं कि उन्होंने अपनी महिला साथियों को कभी कर्मचारी नहीं समझा, उनके हर सुख-दुख में बराबर से खड़ी होती थीं। जबलपुर के चौथा पुल स्थित आवास में उनसे मिलने बड़ी संख्या में महिलाएं आती थीं। राइट टाउन में पापड़ बनाने का कारोबार प्रारंभ किया। गुणवत्ता और समयबद्ध काम के चलते सतत सफलता मिलती चली गई और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

1952 में विवाह के बाद जबलपुर आईं

    पुष्पा बेरी वर्ष 1952 में विवाह के बाद जबलपुर आ गई थीं। यहां उन्होंने श्री महिला गृह उद्योग की स्थापना कर कारोबार प्रारंभ किया था।

    उनकी संस्था ने फरवरी 2024 में 50 वर्ष पूर्ण किए थे।

    संस्था में होने वाला मुनाफा वे अपनी महिला साथियों में बराबर से बांटती थीं।

    पंजाब के मोगा में जन्म हुआ और उनकी प्रारंभिक शिक्षा वहीं पूरी हुई।

    वर्ष 1974 में दुर्ग (छग) के समाजसेवी शांतिलाल शाह ने उन्हें यह कारोबार करने की सलाह दी थी।

    श्री महिला गृह उद्योग मुंबई से अनुमति लेकर जबलपुर में बुनियाद रखी।

 

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